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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान: JRF और UPSC के लिए मास्टर क्लास चुनौतीपूर्ण क्विज़

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान: JRF और UPSC के लिए मास्टर क्लास चुनौतीपूर्ण क्विज़

भारतीय लोकतंत्र की शक्ति उसके संवैधानिक ढांचे और शासन की सूक्ष्मताओं में निहित है। चाहे आप UGC NET JRF की तैयारी कर रहे हों या UPSC/PSC की, वैचारिक स्पष्टता ही सफलता की कुंजी है। यह अभ्यास सेट आपकी विश्लेषणात्मक क्षमता को चुनौती देने और भारतीय शासन व्यवस्था की गहरी समझ विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आइए, अपनी तैयारी को एक नए स्तर पर ले जाएं!

Indian Polity & Constitution Practice Questions

निर्देश: निम्नलिखित 25 प्रश्नों का प्रयास करें और प्रदान किए गए विस्तृत स्पष्टीकरणों के माध्यम से अपनी समझ का विश्लेषण करें।

Question 1: निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (Enforceable) नहीं है।
कथन II: प्रस्तावना संविधान के ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) का हिस्सा है और इसका उपयोग अस्पष्ट प्रावधानों की व्याख्या के लिए किया जा सकता है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  1. केवल कथन I
  2. केवल कथन II
  3. कथन I और II दोनों
  4. न तो कथन I और न ही कथन II

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: दोनों कथन सही हैं। प्रस्तावना स्वयं में किसी कानूनी अधिकार का स्रोत नहीं है, इसलिए इसे न्यायालय में सीधे चुनौती देकर लागू नहीं कराया जा सकता (Non-justiciable)।
  • Context & Elaboration: ‘केशवानंद भारती मामले (1973)’ में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है और यह ‘मूल ढांचे’ का हिस्सा है। हालांकि यह प्रवर्तनीय नहीं है, लेकिन जब संविधान के किसी अनुच्छेद का अर्थ स्पष्ट न हो, तो न्यायाधीश प्रस्तावना का सहारा लेते हैं।
  • Incorrect Options: विकल्प (a) और (b) अधूरे हैं क्योंकि दोनों ही तथ्य संवैधानिक कानून के स्थापित सिद्धांत हैं।

Question 2: अभिकथन (A): भारत में ‘न्यायिक पुनरावलोकन’ (Judicial Review) की शक्ति कार्यपालिका और विधायिका दोनों के कार्यों पर लागू होती है।
कारण (R): भारतीय संविधान में ‘विधि के शासन’ (Rule of Law) को सर्वोच्च माना गया है, जिससे न्यायपालिका को असंवैधानिक कानूनों को शून्य घोषित करने का अधिकार मिलता है।
सही विकल्प चुनें:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

Answer: (a)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: अनुच्छेद 13, 32 और 226 के तहत न्यायपालिका को न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति प्राप्त है।
  • Context & Elaboration: न्यायिक पुनरावलोकन यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी कानून या सरकारी आदेश मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करे। चूंकि भारत में संविधान सर्वोच्च है (Constitutional Supremacy), इसलिए ‘विधि का शासन’ यह अनिवार्य करता है कि न्यायपालिका किसी भी मनमाने कार्य को रोक सके।
  • Incorrect Options: चूंकि कारण (R) सीधे तौर पर अभिकथन (A) के आधार (संविधान की सर्वोच्चता) को स्पष्ट करता है, इसलिए विकल्प (b), (c) और (d) गलत हैं।

Question 3: सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें और सही विकल्प चुनें:
सूची-I (संवैधानिक निकाय) — सूची-II (संबंधित अनुच्छेद)
A. भारत का चुनाव आयोग — 1. अनुच्छेद 280
B. वित्त आयोग — 2. अनुच्छेद 324
C. भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) — 3. अनुच्छेद 148
D. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) — 4. अनुच्छेद 315

  1. A-2, B-1, C-3, D-4
  2. A-1, B-2, C-4, D-3
  3. A-2, B-3, C-1, D-4
  4. A-4, B-1, C-3, D-2

Answer: (a)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: चुनाव आयोग (Art. 324), वित्त आयोग (Art. 280), CAG (Art. 148) और UPSC (Art. 315)।
  • Context & Elaboration: ये सभी स्वतंत्र संवैधानिक निकाय हैं जो लोकतंत्र के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक हैं। वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के वितरण की सिफारिश करता है, जबकि CAG सार्वजनिक धन के संरक्षक के रूप में कार्य करता है।
  • Incorrect Options: अन्य सभी विकल्प अनुच्छेदों के गलत मिलान को दर्शाते हैं।

Question 4: राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) और मौलिक अधिकारों (FR) के बीच संघर्ष की स्थिति में, सुप्रीम कोर्ट ने ‘मिनर्वा मिल्स मामले (1980)’ में क्या निर्धारित किया?

  1. मौलिक अधिकार हमेशा DPSP पर हावी रहेंगे।
  2. DPSP हमेशा मौलिक अधिकारों पर प्राथमिकता रखेंगे।
  3. भारतीय संविधान मौलिक अधिकारों और DPSP के बीच ‘सामंजस्य’ (Harmonious Construction) पर आधारित है।
  4. संसद किसी भी DPSP को लागू करने के लिए किसी भी मौलिक अधिकार को पूरी तरह समाप्त कर सकती है।

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: मिनर्वा मिल्स मामले में कोर्ट ने कहा कि संविधान की नींव मौलिक अधिकारों (भाग III) और DPSP (भाग IV) के बीच संतुलन पर टिकी है।
  • Context & Elaboration: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक को दूसरे के ऊपर प्राथमिकता देना संविधान के मूल ढांचे को नुकसान पहुँचाना होगा। यह ‘सामंजस्यपूर्ण व्याख्या’ का सिद्धांत है।
  • Incorrect Options: विकल्प (a) और (b) एकतरफा दृष्टिकोण हैं, जबकि विकल्प (d) 42वें संशोधन के उस प्रयास को संदर्भित करता है जिसे बाद में मिनर्वा मिल्स मामले में सीमित कर दिया गया था।

Question 5: भारतीय राष्ट्रपति की ‘क्षमादान शक्ति’ (Pardoning Power) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?

  1. राष्ट्रपति मृत्युदंड को पूरी तरह माफ कर सकते हैं।
  2. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति पूर्णतः विवेकाधीन है और वह मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना कार्य कर सकते हैं।
  3. राष्ट्रपति सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दी गई सजा को माफ कर सकते हैं।
  4. क्षमादान की शक्ति का प्रयोग न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के अधीन है।

Answer: (b)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति को क्षमादान की शक्ति देता है, लेकिन यह शक्ति मंत्रिपरिषद की सलाह पर आधारित होती है।
  • Context & Elaboration: राष्ट्रपति एक संवैधानिक प्रमुख हैं, इसलिए वे क्षमादान जैसे महत्वपूर्ण निर्णय प्रधानमंत्री और कैबिनेट की सलाह के बिना नहीं लेते। हालांकि, हाल के निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि क्षमादान की प्रक्रिया में मनमानापन हो, तो न्यायालय उसकी समीक्षा कर सकता है।
  • Incorrect Options: विकल्प (a), (c) और (d) सही संवैधानिक प्रावधान हैं। सैन्य न्यायालयों के मामले में राष्ट्रपति की शक्ति राज्यपाल से अधिक विस्तृत होती है।

Question 6: ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा गठित निम्नलिखित में से कौन सा निकाय सबसे प्रभावी है?

  1. नीति आयोग (NITI Aayog)
  2. वित्त आयोग (Finance Commission)
  3. अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council)
  4. उपरोक्त सभी

Answer: (d)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: नीति आयोग, वित्त आयोग (Art. 280) और अंतर-राज्य परिषद (Art. 263) तीनों ही केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
  • Context & Elaboration: नीति आयोग ‘Bottom-up’ दृष्टिकोण अपनाता है, वित्त आयोग वित्तीय संसाधनों का न्यायसंगत वितरण करता है, और अंतर-राज्य परिषद संवैधानिक विवादों को सुलझाने और समन्वय का मंच प्रदान करती है।
  • Incorrect Options: किसी एक विकल्प को चुनना गलत होगा क्योंकि तीनों की भूमिकाएं पूरक हैं।

Question 7: भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India) के बारे में क्या सत्य है?
कथन I: वह भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है।
कथन II: उसे संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, लेकिन मतदान का अधिकार नहीं है।
विकल्प:

  1. केवल कथन I सही है।
  2. केवल कथन II सही है।
  3. दोनों कथन सही हैं।
  4. दोनों कथन गलत हैं।

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: अनुच्छेद 76 के तहत महान्यायवादी की नियुक्ति की जाती है।
  • Context & Elaboration: वह देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी है। उसे संसद में बोलने का विशेष अधिकार प्राप्त है ताकि वह सरकार के कानूनी पक्षों को स्पष्ट कर सके, लेकिन वह सदस्य नहीं होता, इसलिए वोट नहीं दे सकता।
  • Incorrect Options: विकल्प (a) और (b) अधूरे हैं क्योंकि दोनों ही संवैधानिक तथ्य सत्य हैं।

Question 8: 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 ने ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा दिया। इसके तहत ‘ग्राम सभा’ की प्रकृति क्या है?

  1. यह एक निर्वाचित निकाय है।
  2. यह एक मनोनीत निकाय है।
  3. यह गांव के सभी पंजीकृत मतदाताओं का एक निकाय है।
  4. यह केवल पंचायत प्रतिनिधियों का समूह है।

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: अनुच्छेद 243A के तहत ग्राम सभा का प्रावधान है।
  • Context & Elaboration: ग्राम सभा पंचायत राज व्यवस्था की आधारशिला है। इसमें गांव के वे सभी लोग शामिल होते हैं जिनका नाम मतदाता सूची में दर्ज है। यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र का सबसे शुद्ध रूप है।
  • Incorrect Options: ग्राम पंचायत एक निर्वाचित निकाय है, लेकिन ग्राम सभा एक ‘जन-निकाय’ (General Body) है, न कि केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों का समूह।

Question 9: निम्नलिखित में से कौन सा मामला ‘न्यायिक सक्रियता’ (Judicial Activism) और ‘जनहित याचिका’ (PIL) के विकास के लिए मील का पत्थर माना जाता है?

  1. मेनका गांधी बनाम भारत संघ
  2. एस.पी. गुप्ता बनाम भारत संघ
  3. गोलापुकुरन बनाम भारत संघ
  4. ए.के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य

Answer: (b)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: एस.पी. गुप्ता बनाम भारत संघ मामले में न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती ने PIL की अवधारणा को मजबूती दी।
  • Context & Elaboration: PIL ने ‘लोकस स्टैंडाई’ (Locus Standi) के पारंपरिक नियम को शिथिल कर दिया, जिससे कोई भी व्यक्ति किसी अन्य पीड़ित की ओर से न्यायालय जा सकता है, बशर्ते वह जनहित में हो।
  • Incorrect Options: मेनका गांधी मामले ने ‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ को ‘विधि की उचित प्रक्रिया’ में बदला, जबकि ए.के. गोपालन मामला एक संकीर्ण व्याख्या का उदाहरण था।

Question 10: भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘अध्यादेश’ (Ordinance) जारी करने की शक्ति के संबंध में कौन सा कथन सत्य है?

  1. राष्ट्रपति किसी भी समय अध्यादेश जारी कर सकता है।
  2. अध्यादेश केवल तभी जारी किया जा सकता है जब संसद के दोनों सदन सत्र में हों।
  3. अध्यादेश की अधिकतम अवधि संसद के पुनः सत्र शुरू होने के 6 सप्ताह बाद तक होती है।
  4. अध्यादेश को संसद की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है।
  • Context & Elaboration: अध्यादेश केवल तब जारी किया जा सकता है जब संसद के कम से कम एक सदन का सत्र न चल रहा हो और तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो। इसे संसद के पुनः सत्र शुरू होने के 6 सप्ताह के भीतर अनुमोदित होना चाहिए, अन्यथा यह समाप्त हो जाता है।
  • Incorrect Options: विकल्प (b) गलत है क्योंकि यह ‘सत्र न होने’ की स्थिति में जारी होता है। विकल्प (d) गलत है क्योंकि संसदीय मंजूरी अनिवार्य है।

Question 11: अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने किस ऐतिहासिक मामले में दिशानिर्देश जारी किए थे?

  1. एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ
  2. केशवानंद भारती मामला
  3. इंद्रा साहनी मामला
  4. गोलकनाथ मामला

Answer: (a)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: एस.आर. बोम्मई मामले (1994) में न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रपति शासन की घोषणा न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
  • Context & Elaboration: कोर्ट ने निर्देश दिया कि बहुमत का परीक्षण केवल विधानसभा के पटल (Floor Test) पर होना चाहिए, न कि राज्यपाल की व्यक्तिगत राय पर।
  • Incorrect Options: केशवानंद भारती मूल ढांचे से संबंधित है और इंद्रा साहनी आरक्षण (Cremy Layer) से संबंधित है।

Question 12: भारत के संविधान में ‘मूल कर्तव्यों’ (Fundamental Duties) को किस समिति की सिफारिश पर जोड़ा गया था?

  1. वर्मा समिति
  2. सरकारिया आयोग
  3. स्वर्ण सिंह समिति
  4. बलवंत राय मेहता समिति

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग IV-A और अनुच्छेद 51A जोड़ा गया।
  • Context & Elaboration: स्वर्ण सिंह समिति ने नागरिकों के लिए कुछ बुनियादी कर्तव्यों को शामिल करने का सुझाव दिया था ताकि अधिकार और कर्तव्य एक साथ चल सकें। वर्तमान में 11 मूल कर्तव्य हैं।
  • Incorrect Options: सरकारिया आयोग केंद्र-राज्य संबंधों पर था, जबकि बलवंत राय मेहता समिति पंचायती राज पर थी।

Question 13: ‘संसदीय विशेषाधिकार’ (Parliamentary Privileges) का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. सांसदों को कानून से ऊपर रखना।
  2. संसद के सदस्यों को बिना किसी डर या बाधा के स्वतंत्र रूप से कार्य करने देना।
  3. न्यायपालिका के हस्तक्षेप को पूरी तरह समाप्त करना।
  4. सांसदों को आजीवन वेतन की गारंटी देना।

Answer: (b)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: अनुच्छेद 105 (संसद के लिए) और 194 (विधानमंडलों के लिए) विशेषाधिकार प्रदान करते हैं।
  • Context & Elaboration: विशेषाधिकार यह सुनिश्चित करते हैं कि सदन के भीतर कही गई किसी बात के लिए किसी सदस्य पर न्यायालय में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता (Immunity)। यह संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और कार्यक्षमता के लिए आवश्यक है।
  • Incorrect Options: विकल्प (a) गलत है क्योंकि विशेषाधिकार उन्हें कानून से ऊपर नहीं बनाते, बल्कि विशिष्ट सुरक्षा प्रदान करते हैं।

Question 14: निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को उनके पद से केवल उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को।
कथन II: CAG अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपते हैं, जो इसे संसद के समक्ष रखवाते हैं।
सही विकल्प चुनें:

  1. केवल कथन I सही है।
  2. केवल कथन II सही है।
  3. दोनों कथन सही हैं।
  4. दोनों कथन गलत हैं।

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: अनुच्छेद 148 CAG की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया का वर्णन करता है।
  • Context & Elaboration: उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें हटाने की प्रक्रिया जटिल रखी गई है (संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव)। वे सार्वजनिक वित्त के संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं।
  • Incorrect Options: दोनों तथ्य संवैधानिक रूप से सत्य हैं, इसलिए (a) और (b) गलत हैं।

Question 15: भारत में ‘एकीकृत न्यायपालिका’ (Integrated Judiciary) का क्या अर्थ है?

  1. केंद्र और राज्यों की अपनी अलग-अलग सर्वोच्च अदालतें हैं।
  2. एक ही न्यायिक पदानुक्रम (Hierarchy) है जिसमें सुप्रीम कोर्ट शीर्ष पर है।
  3. न्यायाधीशों की नियुक्ति केवल कार्यपालिका द्वारा की जाती है।
  4. न्यायपालिका पूरी तरह से संसद के नियंत्रण में है।

Answer: (b)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: भारत में अमेरिका की तरह दोहरी न्यायपालिका (Dual Judiciary) नहीं है।
  • Context & Elaboration: भारत में एक एकीकृत व्यवस्था है: सुप्रीम कोर्ट $\rightarrow$ हाई कोर्ट $\rightarrow$ अधीनस्थ न्यायालय। सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होता है (अनुच्छेद 141)।
  • Incorrect Options: विकल्प (a) अमेरिका की प्रणाली है। विकल्प (d) न्यायपालिका की स्वतंत्रता के विरुद्ध है।

Question 16: संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन के अधिकार’ (Right to Life) में सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित में से किस अधिकार को शामिल नहीं किया है?

  1. निजता का अधिकार (Right to Privacy)
  2. स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार
  3. संपत्ति का अधिकार (Right to Property)
  4. त्वरित सुनवाई का अधिकार (Right to Speedy Trial)

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: संपत्ति का अधिकार अब मौलिक अधिकार नहीं है; इसे 44वें संशोधन (1978) द्वारा अनुच्छेद 300A के तहत एक ‘कानूनी अधिकार’ बना दिया गया है।
  • Context & Elaboration: अनुच्छेद 21 की व्याख्या करते हुए कोर्ट ने निजता (पुट्टस्वामी मामला), पर्यावरण (MC Mehta मामला) और गरिमा के साथ जीने के अधिकार को इसमें शामिल किया है।
  • Incorrect Options: विकल्प (a), (b) और (d) अनुच्छेद 21 के विस्तृत दायरे का हिस्सा हैं।

Question 17: ‘संसदीय प्रणाली’ (Parliamentary System) और ‘अध्यक्षात्मक प्रणाली’ (Presidential System) के बीच मुख्य अंतर क्या है?

  1. संसदीय प्रणाली में कार्यपालिका विधायिका से पूरी तरह स्वतंत्र होती है।
  2. अध्यक्षात्मक प्रणाली में कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है।
  3. संसदीय प्रणाली में कार्यपालिका, विधायिका का एक हिस्सा होती है और उसके प्रति उत्तरदायी होती है।
  4. अध्यक्षात्मक प्रणाली में प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है।

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: भारतीय संसदीय प्रणाली में मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है (अनुच्छेद 75(3))।
  • Context & Elaboration: संसदीय प्रणाली में ‘शक्तियों का संलयन’ (Fusion of Powers) होता है, जबकि अध्यक्षात्मक प्रणाली (जैसे अमेरिका) में ‘शक्तियों का पृथक्करण’ (Separation of Powers) कठोर होता है।
  • Incorrect Options: विकल्प (a) और (b) परस्पर उल्टे हैं। विकल्प (d) गलत है क्योंकि अध्यक्षात्मक प्रणाली में राष्ट्रपति ही प्रमुख होता है।

Question 18: ‘वोट बैंक की राजनीति’ और ‘जाति आधारित लामबंदी’ भारतीय राजनीतिक प्रक्रियाओं (Political Processes) के संदर्भ में किस संवैधानिक चुनौती को जन्म देती है?

  1. संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) का क्षरण
  2. धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का सुदृढ़ीकरण
  3. न्यायिक सक्रियता में वृद्धि
  4. संघवाद का पूर्ण अंत

Answer: (a)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: संवैधानिक नैतिकता का अर्थ है संविधान के मूल्यों (समानता, बंधुत्व) के प्रति निष्ठा रखना।
  • Context & Elaboration: जब राजनीति केवल जाति या धर्म (Identity Politics) पर आधारित हो जाती है, तो यह संविधान के ‘समान नागरिकता’ और ‘विविधता में एकता’ के आदर्शों को कमजोर करती है, जिसे संवैधानिक नैतिकता का क्षरण कहा जाता है।
  • Incorrect Options: यह धर्मनिरपेक्षता को मजबूत नहीं बल्कि कमजोर करता है। इसका न्यायिक सक्रियता से सीधा संबंध नहीं है।

Question 19: निम्नलिखित में से कौन सा एक ‘गैर-संवैधानिक’ (Non-Constitutional) निकाय है?

  1. भारत का चुनाव आयोग
  2. नीति आयोग
  3. भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
  4. संघ लोक सेवा आयोग

Answer: (b)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: नीति आयोग एक ‘कार्यकारी निकाय’ (Executive Body) है, जिसकी स्थापना कैबिनेट के एक प्रस्ताव द्वारा की गई थी।
  • Context & Elaboration: संवैधानिक निकायों का उल्लेख संविधान के अनुच्छेदों में होता है (जैसे चुनाव आयोग – Art 324), जबकि गैर-संवैधानिक निकाय या तो वैधानिक (Statutory – संसद के कानून द्वारा) या कार्यकारी (Executive – सरकार के आदेश द्वारा) होते हैं।
  • Incorrect Options: विकल्प (a), (c) और (d) सभी का उल्लेख संविधान में है।

Question 20: ‘अनुच्छेद 368’ के तहत संविधान संशोधन की प्रक्रिया के बारे में क्या सही है?

  1. सभी संशोधनों के लिए जनमत संग्रह (Referendum) आवश्यक है।
  2. कुछ संशोधन केवल साधारण बहुमत से किए जा सकते हैं।
  3. सभी संशोधन केवल राष्ट्रपति की सहमति से होते हैं, संसदीय बहुमत की आवश्यकता नहीं होती।
  4. संविधान के किसी भी हिस्से को संशोधित नहीं किया जा सकता।

Answer: (b)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: संविधान संशोधन तीन प्रकार के होते हैं: साधारण बहुमत, विशेष बहुमत और विशेष बहुमत + आधे राज्यों की सहमति।
  • Context & Elaboration: नए राज्यों का गठन या नाम बदलना ‘साधारण बहुमत’ से होता है, जबकि मौलिक अधिकारों का संशोधन ‘विशेष बहुमत’ से होता है।
  • Incorrect Options: भारत में जनमत संग्रह की व्यवस्था नहीं है। राष्ट्रपति संशोधन विधेयक पर अपनी सहमति देने के लिए बाध्य हैं (24वां संशोधन)।

Question 21: ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code – UCC) का उल्लेख संविधान के किस अनुच्छेद में है और यह किस श्रेणी में आता है?

  1. अनुच्छेद 40, मौलिक अधिकार
  2. अनुच्छेद 44, राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP)
  3. अनुच्छेद 51, मौलिक कर्तव्य
  4. अनुच्छेद 35, संवैधानिक प्रावधान

Answer: (b)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: अनुच्छेद 44 राज्य को पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
  • Context & Elaboration: यह DPSP का हिस्सा है, जिसका अर्थ है कि यह सरकार के लिए एक लक्ष्य है, लेकिन इसे न्यायालय के माध्यम से जबरन लागू नहीं करवाया जा सकता।
  • Incorrect Options: अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों से संबंधित है, अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति से।

Question 22: भारत में ‘मंत्रिमंडल’ (Cabinet) और ‘मंत्रिपरिषद’ (Council of Ministers) के बीच मुख्य अंतर क्या है?

  1. मंत्रिपरिषद एक छोटा समूह है, जबकि कैबिनेट बड़ा समूह है।
  2. कैबिनेट, मंत्रिपरिषद का एक छोटा और अधिक शक्तिशाली हिस्सा है जिसमें वरिष्ठ मंत्री होते हैं।
  3. कैबिनेट का उल्लेख संविधान में है, जबकि मंत्रिपरिषद का नहीं।
  4. दोनों एक ही चीज हैं और इनमें कोई अंतर नहीं है।

Answer: (b)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) में सभी श्रेणी के मंत्री (कैबिनेट, राज्य मंत्री, उपमंत्री) शामिल होते हैं।
  • Context & Elaboration: कैबिनेट केवल वरिष्ठ मंत्रियों का समूह है जो वास्तविक निर्णय लेता है। संविधान में ‘मंत्रिपरिषद’ शब्द का प्रयोग है, ‘कैबिनेट’ शब्द को बाद में 44वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 352 में जोड़ा गया।
  • Incorrect Options: विकल्प (c) गलत है क्योंकि मंत्रिपरिषद का उल्लेख अनुच्छेद 74 में है।

Question 23: ‘लोकपाल’ और ‘लोकायुक्त’ संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करना।
  2. प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों की जांच करना।
  3. केंद्र और राज्यों के बीच विवाद सुलझाना।
  4. न्यायाधीशों की नियुक्ति करना।

Answer: (b)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: लोकपाल (केंद्र) और लोकायुक्त (राज्य) भ्रष्टाचार विरोधी ओम्बुड्समैन (Ombudsman) संस्थाएं हैं।
  • Context & Elaboration: इनका कार्य प्रधानमंत्री (कुछ अपवादों के साथ), मंत्रियों और नौकरशाहों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करना है। यह ‘सुशासन’ (Good Governance) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • Incorrect Options: विकल्प (a) चुनाव आयोग का कार्य है, विकल्प (c) अंतर-राज्य परिषद का।

Question 24: भारतीय संविधान की ‘निश्चितता’ (Rigidity) और ‘लचीलेपन’ (Flexibility) का मिश्रण किस रूप में देखा जाता है?

  1. यह पूरी तरह लचीला है क्योंकि इसे संसद कभी भी बदल सकती है।
  2. यह पूरी तरह निश्चित है क्योंकि इसे बदला नहीं जा सकता।
  3. कुछ प्रावधान साधारण बहुमत से और कुछ विशेष बहुमत से संशोधित किए जा सकते हैं।
  4. यह केवल राष्ट्रपति की इच्छा पर निर्भर करता है।

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: भारतीय संविधान न तो अमेरिका की तरह अत्यधिक कठोर है और न ही ब्रिटेन की तरह अत्यधिक लचीला।
  • Context & Elaboration: यह एक ‘समिश्रण’ है। साधारण बहुमत से किए जाने वाले परिवर्तन लचीलापन दिखाते हैं, जबकि विशेष बहुमत और राज्यों की सहमति की आवश्यकता कठोरता को दर्शाती है।
  • Incorrect Options: विकल्प (a) और (b) चरम स्थितियां हैं जो भारत पर लागू नहीं होतीं।

Question 25: ‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ (Procedure Established by Law) और ‘विधि की उचित प्रक्रिया’ (Due Process of Law) के बीच अंतर के संदर्भ में, वर्तमान में भारत में कौन सा सिद्धांत प्रभावी है?

  1. केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया।
  2. केवल विधि की उचित प्रक्रिया।
  3. न्यायालय ने धीरे-धीरे ‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ को ‘विधि की उचित प्रक्रिया’ की ओर विस्तारित किया है।
  4. इन दोनों के बीच कोई अंतर नहीं है।

Answer: (c)

Detailed Explanation:

  • Correctness & Article Reference: अनुच्छेद 21 में ‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ शब्द का प्रयोग है।
  • Context & Elaboration: शुरुआत में (ए.के. गोपालन मामला) कोर्ट ने इसे संकीर्ण अर्थ में लिया। लेकिन ‘मेनका गांधी मामले (1978)’ के बाद, कोर्ट ने कहा कि कानून न केवल प्रक्रियात्मक रूप से सही होना चाहिए, बल्कि वह ‘उचित, निष्पक्ष और तर्कसंगत’ (Just, Fair and Reasonable) भी होना चाहिए, जो कि ‘Due Process of Law’ का सार है।
  • Incorrect Options: विकल्प (a) पुराना दृष्टिकोण था, विकल्प (b) पूरी तरह अमेरिकी अवधारणा है, जबकि भारत ने इसे अपनाया (Adopt) है।

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