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UGC NET JRF Political Science: भारतीय राजव्यवस्था और राजनीतिक सिद्धांत का मास्टर क्लास अभ्यास सेट

UGC NET JRF Political Science: भारतीय राजव्यवस्था और राजनीतिक सिद्धांत का मास्टर क्लास अभ्यास सेट

UGC NET JRF की तैयारी कर रहे गंभीर अभ्यर्थियों के लिए यह अभ्यास सेट विशेष रूप से तैयार किया गया है। यहाँ हमने केवल तथ्यों पर ध्यान न देकर, ‘इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोच’ (Interdisciplinary Approach) का उपयोग किया है, जहाँ राजनीतिक सिद्धांत, विचारकों के दर्शन और भारतीय संवैधानिक प्रावधानों का सम्मिश्रण है। अपनी वैचारिक स्पष्टता और विश्लेषण क्षमता को परखने के लिए इस मॉक टेस्ट को हल करें।

उच्च स्तरीय विश्लेषणात्मक प्रश्न (Advanced Analytical Questions)

निर्देश: निम्नलिखित 25 प्रश्नों को हल करें। प्रत्येक प्रश्न को UGC NET के नवीनतम पैटर्न (Assertion-Reason, Statement-based, Matching) पर आधारित किया गया है।

प्रश्न 1: (यूनिट 1: न्याय + यूनिट 3: भारतीय संविधान)
अभिकथन (A): जॉन रॉल्स का ‘न्याय का सिद्धांत’ भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) में अंतर्निहित सामाजिक और आर्थिक न्याय की अवधारणा के साथ मेल खाता है।
कारण (R): रॉल्स का ‘अंतर सिद्धांत’ (Difference Principle) यह तर्क देता है कि सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को केवल तभी स्वीकार किया जा सकता है जब वे समाज के सबसे कम सुविधा प्राप्त वर्ग के अधिकतम लाभ के लिए हों।

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

उत्तर: (a)

विस्तृत व्याख्या:

  • तर्क और संदर्भ: जॉन रॉल्स का ‘Difference Principle’ इस विचार पर आधारित है कि असमानता केवल तभी उचित है जब वह सबसे वंचित व्यक्ति को लाभ पहुँचाए। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 38 और 39 (DPSP) राज्य को एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाने का निर्देश देते हैं जहाँ आय, स्थिति और अवसरों की असमानता को कम किया जा सके। दोनों ही ‘वितरणात्मक न्याय’ (Distributive Justice) की बात करते हैं।
  • निष्कर्ष: चूँकि रॉल्स का सिद्धांत संवैधानिक लक्ष्यों का दार्शनिक आधार प्रदान करता है, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की सटीक व्याख्या करता है।

प्रश्न 2: (यूनिट 2: डॉ. अंबेडकर + यूनिट 8: राजनीतिक प्रक्रियाएं)
कथन I: डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने जाति को केवल ‘श्रम का विभाजन’ नहीं, बल्कि ‘श्रमिकों का विभाजन’ माना था।
कथन II: अंबेडकर के अनुसार, राजनीतिक लोकतंत्र तब तक स्थायी नहीं हो सकता जब तक कि उसके आधार में सामाजिक लोकतंत्र (स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व) न हो।

  1. केवल कथन I सही है।
  2. केवल कथन II सही है।
  3. कथन I और II दोनों सही हैं।
  4. दोनों कथन गलत हैं।

उत्तर: (c)

विस्तृत व्याख्या:

  • संदर्भ: अंबेडकर ने तर्क दिया कि जाति व्यवस्था श्रम के विभाजन को इतना कठोर बना देती है कि वह श्रमिकों को उनकी योग्यता के विरुद्ध श्रेणियों में बाँट देती है। उन्होंने संविधान सभा में स्पष्ट किया था कि केवल ‘एक व्यक्ति एक वोट’ (राजनीतिक समानता) पर्याप्त नहीं है, बल्कि ‘एक व्यक्ति एक मूल्य’ (सामाजिक समानता) आवश्यक है।
  • महत्व: यह विश्लेषण यूनिट 2 के राजनीतिक विचार और यूनिट 8 की सामाजिक गतिशीलता के बीच संबंध को दर्शाता है।

प्रश्न 3: (यूनिट 4: तुलनात्मक राजनीति + यूनिट 7: भारतीय संसदीय संस्थाएं)
निम्नलिखित का मिलान करें:
सूची-I (अवधारणा) | सूची-II (संबंधित विशेषता/प्रक्रिया)
(A) वेस्टमिंस्टर मॉडल | (i) राष्ट्रपति प्रणाली का प्रभाव
(B) न्यायिक सक्रियता | (ii) कार्यपालिका का विधायिका के प्रति उत्तरदायित्व
(C) गठबंधन राजनीति | (iii) PIL (जनहित याचिका)
(D) सहकारी संघवाद | (iv) बहु-दलीय प्रतिनिधित्व और सत्ता साझाकरण

  1. A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i)
  2. A-(ii), B-(iii), C-(iv), D- (GST परिषद का कार्यान्वयन)
  3. A-(i), B-(iii), C-(iv), D-(ii)
  4. A-(iv), B-(ii), C-(iii), D-(i)

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • विश्लेषण: वेस्टमिंस्टर मॉडल (ब्रिटिश मॉडल) की मुख्य विशेषता कार्यपालिका का विधायिका के प्रति जवाबदेह होना है। न्यायिक सक्रियता का भारत में सबसे बड़ा उदाहरण PIL है। गठबंधन राजनीति में विभिन्न दलों का सत्ता साझाकरण होता है। सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का आधुनिक उदाहरण GST काउंसिल है।

प्रश्न 4: (यूनिट 5: अंतर्राष्ट्रीय संबंध सिद्धांत + यूनिट 6: भारत की विदेश नीति)
यथार्थवाद (Realism) के परिप्रेक्ष्य में, भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) की नीति को कैसे समझा जा सकता है?

  1. यह केवल आदर्शवादी मूल्यों और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित है।
  2. यह शक्ति संतुलन (Balance of Power) बनाए रखने और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा का एक प्रयास है।
  3. यह अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाता है।
  4. यह केवल क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की एक सीमित रणनीति है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • सिद्धांत और अनुप्रयोग: अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में ‘यथार्थवाद’ मानता है कि राज्य अपने राष्ट्रीय हित (National Interest) और शक्ति को अधिकतम करने के लिए कार्य करते हैं। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है कि वह किसी एक गुट (Bloc) में शामिल हुए बिना अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करे ताकि वह अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा कर सके।
  • अन्य विकल्प: विकल्प (a) आदर्शवाद (Idealism) से संबंधित है, न कि यथार्थवाद से।

प्रश्न 5: (यूनिट 9: लोक प्रशासन + यूनिट 10: शासन और सार्वजनिक नीति)
‘नया लोक प्रबंधन’ (New Public Management – NPM) और भारत में ‘ई-गवर्नेंस’ (e-Governance) के बीच क्या संबंध है?

  1. NPM नौकरशाही के नियंत्रण को बढ़ाने पर जोर देता है, जबकि ई-गवर्नेंस इसे समाप्त करता है।
  2. NPM दक्षता, प्रभावशीलता और परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण पर जोर देता है, जिसे ई-गवर्नेंस के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
  3. दोनों का उद्देश्य केवल राजनीतिक नियंत्रण को मजबूत करना है।
  4. ई-गवर्नेंस NPM के सिद्धांतों का विरोध करता है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • अवधारणा: NPM प्रशासन में ‘बाजार सिद्धांतों’ (Market Principles) और ‘प्रबंधन तकनीकों’ को लाने की बात करता है ताकि सरकारी सेवाएँ अधिक कुशल हों। डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस इसी दक्षता (Efficiency) और पारदर्शिता (Transparency) को प्राप्त करने के तकनीकी साधन हैं।

प्रश्न 6: (यूनिट 1: विचारधाराएं + यूनिट 3: मौलिक अधिकार)
मार्क्सवादी दृष्टिकोण से, भारतीय संविधान के ‘मौलिक अधिकारों’ (Fundamental Rights) की आलोचना का मुख्य आधार क्या होगा?

  1. कि ये अधिकार बहुत अधिक विस्तृत हैं।
  2. कि ये ‘औपचारिक समानता’ (Formal Equality) प्रदान करते हैं, लेकिन ‘वास्तविक आर्थिक समानता’ (Substantive Equality) की उपेक्षा करते हैं।
  3. कि ये अधिकार न्यायपालिका को बहुत अधिक शक्ति देते हैं।
  4. कि इनमें सामाजिक अधिकारों का पूरी तरह अभाव है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • मार्क्सवादी विश्लेषण: मार्क्सवाद के अनुसार, नागरिक और राजनीतिक अधिकार (जैसे बोलने की आजादी) केवल ‘बुर्जुआ’ (Bourgeoisie) वर्ग के हितों की रक्षा करते हैं। जब तक उत्पादन के साधनों पर स्वामित्व नहीं बदलता, तब तक कानूनी समानता केवल एक भ्रम है क्योंकि आर्थिक असमानता अधिकारों के वास्तविक उपयोग में बाधा डालती है।

प्रश्न 7: (यूनिट 2: गांधीवादी विचार + यूनिट 10: स्थानीय शासन)
गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज’ की अवधारणा और 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के बीच मुख्य अंतर क्या है?

  1. गांधीजी राज्य के पूर्ण हस्तक्षेप के पक्षधर थे, जबकि 73वां संशोधन विकेंद्रीकरण की बात करता है।
  2. गांधीजी पूर्ण स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता चाहते थे, जबकि 73वां संशोधन एक संवैधानिक ढांचे के भीतर सीमित शक्तियों का हस्तांतरण है।
  3. 73वां संशोधन गांधीजी के विचारों का पूर्ण और सटीक कार्यान्वयन है।
  4. दोनों के बीच कोई वैचारिक अंतर नहीं है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • तुलना: गांधीजी का ‘ग्राम स्वराज’ राज्यविहीन समाज (Stateless Society) और ग्रामों की पूर्ण आत्मनिर्भरता की कल्पना थी। इसके विपरीत, पंचायती राज संस्थान (PRIs) राज्य सरकार के अधीन हैं और उन्हें शक्तियाँ राज्य अधिनियमों के माध्यम से मिलती हैं। यह ‘विकेंद्रीकृत प्रशासन’ है, न कि ‘पूर्ण स्वराज’।

प्रश्न 8: (यूनिट 5: IR सिद्धांत + यूनिट 6: भारत-अमेरिका संबंध)
‘रचनावाद’ (Constructivism) के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच हालिया रणनीतिक निकटता को कैसे विश्लेषित किया जाएगा?

  1. केवल सैन्य शक्ति के संतुलन के रूप में।
  2. साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, पहचान और साझा हितों के निर्माण के रूप में।
  3. केवल आर्थिक लाभ और व्यापारिक समझौतों के रूप में।
  4. चीन के डर से प्रेरित एक अल्पकालिक समझौता।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • रचनावाद: यह सिद्धांत मानता है कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति केवल भौतिक शक्ति (Material Power) से नहीं, बल्कि विचारों, मानदंडों (Norms) और पहचान (Identity) से संचालित होती है। भारत और अमेरिका का एक-दूसरे को ‘प्राकृतिक सहयोगी’ (Natural Allies) के रूप में देखना एक ‘साझा पहचान’ का निर्माण है।

प्रश्न 9: (यूनिट 1: नारीवाद + यूनिट 8: राजनीतिक प्रक्रियाएं)
नारीवादी राजनीतिक सिद्धांत के संदर्भ में, स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को ‘प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व’ (Symbolic Representation) क्यों कहा जाता है?

  1. क्योंकि महिलाओं की संख्या बहुत कम है।
  2. क्योंकि कई मामलों में ‘प्रधान-पति’ जैसी संस्कृति हावी है, जहाँ वास्तविक शक्ति पुरुषों के पास रहती है।
  3. क्योंकि आरक्षण केवल शहरी क्षेत्रों में लागू है।
  4. क्योंकि महिलाओं को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • विश्लेषण: नारीवादी विचारक तर्क देते हैं कि केवल संख्यात्मक प्रतिनिधित्व (Descriptive Representation) पर्याप्त नहीं है। यदि संरचनात्मक पितृसत्ता (Structural Patriarchy) मौजूद है, तो निर्वाचित महिला केवल एक मुखौटा (Proxy) बन कर रह जाती है, जिसे ‘प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व’ कहा जाता है।

प्रश्न 10: (यूनिट 4: तुलनात्मक राजनीति + यूनिट 3: भारतीय संघवाद)
डेविड ईस्टन के ‘सिस्टम एनालिसिस’ (System Analysis) के अनुसार, भारत में ‘क्षेत्रीय दलों का उदय’ किस प्रक्रिया का परिणाम है?

  1. आउटपुट (Output) का इनपुट (Input) में परिवर्तन।
  2. विभिन्न सामाजिक समूहों द्वारा अपनी मांगों को ‘इनपुट’ के रूप में भेजने की प्रक्रिया।
  3. प्रणाली (System) का पूर्ण पतन।
  4. केवल न्यायिक हस्तक्षेप का परिणाम।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • सिस्टम अप्रोच: ईस्टन के अनुसार, राजनीतिक प्रणाली समाज से ‘मांगें’ (Demands) और ‘समर्थन’ (Support) प्राप्त करती है (Input), जिन्हें वह नीतियों (Output) में बदलती है। क्षेत्रीय दलों का उदय इस बात का प्रमाण है कि विशिष्ट क्षेत्रीय और जातीय समूह अपनी मांगों को राजनीतिक तंत्र में प्रविष्ट करा रहे हैं।

प्रश्न 11: (यूनिट 3: संविधान + यूनिट 7: राष्ट्रपति)
अभिकथन (A): भारत का राष्ट्रपति ‘नाममात्र की कार्यपालिका’ (Nominal Executive) है।
कारण (R): अनुच्छेद 74 के अनुसार, राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसकी सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी है।

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

उत्तर: (a)

विस्तृत व्याख्या:

  • संवैधानिक स्थिति: 42वें और 44वें संशोधन के बाद यह स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही कार्य करेंगे (यद्यपि वे एक बार पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं)। यह संसदीय लोकतंत्र की बुनियादी विशेषता है जहाँ वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में निहित होती है।

प्रश्न 12: (यूनिट 2: कौटिल्य + यूनिट 9: लोक प्रशासन)
कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में वर्णित ‘सप्तांग सिद्धांत’ का आधुनिक शासन (Governance) के किस पहलू से सबसे अधिक संबंध है?

  1. केवल सैन्य प्रशासन से।
  2. राज्य के समग्र संगठनात्मक ढांचे और संसाधनों के प्रबंधन से।
  3. केवल विदेश नीति से।
  4. न्यायिक समीक्षा की प्रक्रिया से।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • विश्लेषण: सप्तांग सिद्धांत (स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड, मित्र) राज्य के सात अनिवार्य अंगों की बात करता है। यह आधुनिक ‘पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन’ के समग्र दृष्टिकोण (Holistic Approach) के समान है, जहाँ मानव संसाधन (अमात्य), वित्त (कोष) और सुरक्षा (दुर्ग/दंड) का समन्वय आवश्यक है।

प्रश्न 13: (यूनिट 1: स्वतंत्रता + यूनिट 3: मौलिक अधिकार)
जे.एस. मिल की ‘स्वतंत्रता’ (Liberty) की अवधारणा और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(2) के ‘उचित प्रतिबंधों’ (Reasonable Restrictions) के बीच क्या समानता है?

  1. दोनों पूर्ण और असीमित स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं।
  2. दोनों मानते हैं कि स्वतंत्रता केवल राज्य की अनुपस्थिति है।
  3. दोनों इस विचार से सहमत हैं कि दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाले कार्यों (Harm Principle) पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
  4. दोनों प्रतिबंधों को लोकतंत्र के विरुद्ध मानते हैं।

उत्तर: (c)

विस्तृत व्याख्या:

  • तुलना: मिल का ‘Harm Principle’ कहता है कि व्यक्ति की स्वतंत्रता वहीं तक है जहाँ वह दूसरों को हानि न पहुँचाए। इसी प्रकार, भारतीय संविधान अनुच्छेद 19(1) के तहत स्वतंत्रता देता है, लेकिन 19(2) के तहत देश की एकता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था के नाम पर ‘उचित प्रतिबंध’ लगाता है।

प्रश्न 14: (यूनिट 4: तुलनात्मक राजनीति + यूनिट 6: भारत की विदेश नीति)
‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) की अवधारणा, जिसे जोसेफ नाई ने विकसित किया, भारत की विदेश नीति में किस रूप में परिलक्षित होती है?

  1. परमाणु हथियारों के विकास द्वारा।
  2. योग, बौद्ध धर्म, बॉलीवुड और प्रवासी भारतीयों (Diaspora) के माध्यम से।
  3. पड़ोसी देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने द्वारा।
  4. सैन्य गठबंधन बनाने द्वारा।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • अवधारणा: सॉफ्ट पावर का अर्थ है आकर्षण के माध्यम से दूसरों को प्रभावित करना, न कि दबाव या जबरदस्ती से। भारत की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्य उसकी वैश्विक छवि को सकारात्मक बनाते हैं, जो सॉफ्ट पावर का उत्कृष्ट उदाहरण है।

प्रश्न 15: (यूनिट 3: न्यायपालिका + यूनिट 10: सुशासन)
‘न्यायिक पुनरावलोकन’ (Judicial Review) और ‘सुशासन’ (Good Governance) के बीच क्या संबंध है?

  1. न्यायिक पुनरावलोकन सुशासन में बाधा डालता है।
  2. यह कार्यपालिका की मनमानी को रोककर कानून के शासन (Rule of Law) को सुनिश्चित करता है, जो सुशासन का आधार है।
  3. यह केवल राजनीतिक विवादों को सुलझाने का एक साधन है।
  4. इसका सुशासन से कोई संबंध नहीं है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • तर्क: सुशासन का अर्थ है पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून का शासन। जब न्यायपालिका किसी असंवैधानिक कानून को रद्द करती है, तो वह यह सुनिश्चित करती है कि शासन संविधान के दायरे में रहे, जिससे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा होती है।

प्रश्न 16: (यूनिट 1: समानता + यूनिट 8: राजनीतिक प्रक्रियाएं)
‘अवसर की समानता’ (Equality of Opportunity) और ‘परिणाम की समानता’ (Equality of Outcome) के बीच विवाद भारत की किस नीति में सबसे अधिक स्पष्ट है?

  1. एकल नागरिकता की नीति।
  2. आरक्षण की नीति (Reservation Policy)।
  3. वयस्क मताधिकार।
  4. त्रि-स्तरीय पंचायती राज।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • विश्लेषण: ‘अवसर की समानता’ केवल शुरुआती बिंदु को समान बनाने की बात करती है (जैसे सबको परीक्षा देने का मौका)। लेकिन ‘परिणाम की समानता’ यह सुनिश्चित करना चाहती है कि समाज के वंचित वर्गों का प्रतिनिधित्व भी हो। आरक्षण ‘सकारात्मक भेदभाव’ (Positive Discrimination) के माध्यम से परिणाम की समानता प्राप्त करने का प्रयास है।

प्रश्न 17: (यूनिट 5: IR सिद्धांत + यूनिट 6: भारत-चीन संबंध)
‘सुरक्षा दुविधा’ (Security Dilemma) की अवधारणा के संदर्भ में, भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को कैसे समझा जा सकता है?

  1. जब एक देश अपनी सुरक्षा के लिए हथियार बढ़ाता है, तो दूसरा उसे खतरे के रूप में देखता है और वह भी हथियार बढ़ाता है, जिससे तनाव बढ़ता है।
  2. यह केवल सांस्कृतिक गलतफहमी का परिणाम है।
  3. यह केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा का मामला है।
  4. यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों की कमी के कारण है।

उत्तर: (a)

विस्तृत व्याख्या:

  • सिद्धांत: सुरक्षा दुविधा यथार्थवाद की एक मुख्य अवधारणा है। इसमें दो राज्य एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते। भारत द्वारा अपनी सीमाओं पर बुनियादी ढांचे का विकास चीन को असुरक्षित महसूस कराता है, और चीन का आक्रामक व्यवहार भारत को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर मजबूर करता है।

प्रश्न 18: (यूनिट 2: प्लेटो + यूनिट 3: भारतीय शासन)
प्लेटो के ‘दार्शनिक राजा’ (Philosopher King) की अवधारणा और भारत में ‘न्यायपालिका के सर्वोच्चता’ के विचार के बीच क्या वैचारिक समानता है?

  1. दोनों ही भीड़तंत्र (Mobocracy) के खिलाफ हैं और ‘विशेषज्ञता’ या ‘ज्ञान’ के शासन का समर्थन करते हैं।
  2. दोनों ही पूर्ण लोकतंत्र के समर्थक हैं।
  3. दोनों ही कार्यपालिका को सर्वोच्च मानते हैं।
  4. दोनों ही चुनाव प्रक्रिया को अनावश्यक मानते हैं।

उत्तर: (a)

विस्तृत व्याख्या:

  • तुलना: प्लेटो का मानना था कि केवल वे ही शासन करें जिनके पास परम ज्ञान हो। आधुनिक लोकतंत्र में, न्यायपालिका को संविधान के रक्षक के रूप में देखा जाता है। जब न्यायालय ‘बुनियादी ढांचे’ (Basic Structure) के आधार पर फैसला देता है, तो वह राजनीतिक बहुमत (लोकप्रियता) के ऊपर संवैधानिक ज्ञान और सिद्धांतों को प्राथमिकता देता है।

प्रश्न 19: (यूनिट 7: संवैधानिक निकाय + यूनिट 10: जवाबदेही)
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका ‘लोकतांत्रिक जवाबदेही’ को कैसे सुनिश्चित करती है?

  1. वह बजट तैयार करता है।
  2. वह कार्यपालिका द्वारा खर्च किए गए धन का ऑडिट करता है और यह देखता है कि धन उसी उद्देश्य के लिए खर्च हुआ जिसके लिए वह आवंटित था।
  3. वह सांसदों के वेतन निर्धारित करता है।
  4. वह सीधे तौर पर सरकार की नीतियों को बदल सकता है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • संदर्भ: अनुच्छेद 148 के तहत CAG एक स्वतंत्र निकाय है। वह ‘वित्तीय प्रहरी’ (Financial Watchdog) के रूप में कार्य करता है। उसकी रिपोर्ट लोक लेखा समिति (PAC) के पास जाती है, जिससे विधायिका सरकार से खर्चों का हिसाब माँग सकती है।

प्रश्न 20: (यूनिट 1: मार्क्सवाद + यूनिट 8: सामाजिक आंदोलन)
भारत में ‘किसान आंदोलनों’ को मार्क्सवादी परिप्रेक्ष्य से देखने पर कौन सा निष्कर्ष सबसे सटीक होगा?

  1. यह केवल चुनावी लाभ के लिए किए गए आंदोलन हैं।
  2. यह भूमि स्वामित्व के संघर्ष और वर्ग संघर्ष (Class Struggle) का परिणाम हैं।
  3. यह केवल तकनीकी प्रगति का विरोध है।
  4. इसका उद्देश्य केवल करों में छूट प्राप्त करना है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • विश्लेषण: मार्क्सवाद आर्थिक आधार (Base) और अधिरचना (Superstructure) की बात करता है। किसान आंदोलन मूल रूप से भूमि (उत्पादन के साधन) के नियंत्रण और कृषि लागत/मूल्य जैसे आर्थिक मुद्दों से जुड़े होते हैं, जो वर्ग संघर्ष का प्रतिबिंब हैं।

प्रश्न 21: (यूनिट 3: मौलिक अधिकार + यूनिट 4: तुलनात्मक राजनीति)
अमेरिकी ‘Bill of Rights’ और भारतीय ‘मौलिक अधिकारों’ के बीच मुख्य अंतर क्या है?

  1. अमेरिकी अधिकार सीमित हैं, जबकि भारतीय अधिकार असीमित हैं।
  2. भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों में ‘उचित प्रतिबंध’ शामिल हैं, जबकि अमेरिकी अधिकार अधिक निरपेक्ष (Absolute) प्रतीत होते हैं।
  3. अमेरिका में मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा लागू नहीं किए जा सकते।
  4. भारत में कोई मौलिक अधिकार नहीं हैं।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • तुलना: अमेरिकी संविधान के अधिकार अधिक व्यापक और निरपेक्ष लगते हैं, जबकि भारतीय संविधान ने अधिकारों और सामाजिक नियंत्रण के बीच संतुलन बनाया है। अनुच्छेद 19(2) से 19(6) तक के प्रतिबंध इसका प्रमाण हैं।

प्रश्न 22: (यूनिट 9: लोक प्रशासन + यूनिट 2: मैक्स वेबर)
मैक्स वेबर के ‘नौकरशाही’ (Bureaucracy) मॉडल की सबसे बड़ी आलोचना ‘लालफीताशाही’ (Red Tapism) के संदर्भ में क्या है?

  1. कि यह नियमों का बहुत अधिक पालन नहीं करता।
  2. कि नियमों का अत्यधिक और कठोर पालन (Rigidity) कार्यक्षमता को कम कर देता है और मानवीय संवेदनाओं को समाप्त कर देता है।
  3. कि इसमें योग्यता (Merit) को महत्व नहीं दिया जाता।
  4. कि यह पूरी तरह से राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • सिद्धांत: वेबर ने तर्कसंगत-कानूनी प्राधिकरण (Rational-Legal Authority) की बात की थी। लेकिन इसी ‘तार्किकता’ और ‘नियमों’ के प्रति अत्यधिक लगाव ने नौकरशाही को जड़ बना दिया, जिसे हम लालफीताशाही कहते हैं।

प्रश्न 23: (यूनिट 6: विदेश नीति + यूनिट 1: वैश्विक न्याय)
भारत का ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ (South-South Cooperation) का सिद्धांत किस वैश्विक विचार से प्रेरित है?

  1. पश्चिमी साम्राज्यवाद के समर्थन से।
  2. विकासशील देशों के बीच एकजुटता और साझा समस्याओं के समाधान के विचार से।
  3. केवल सैन्य प्रभुत्व स्थापित करने से।
  4. विकसित देशों द्वारा दी गई सहायता पर पूर्ण निर्भरता से।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • संदर्भ: दक्षिण-दक्षिण सहयोग का अर्थ है कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देश एक-दूसरे के साथ तकनीकी और आर्थिक ज्ञान साझा करें ताकि वे विकसित देशों (उत्तर) पर अपनी निर्भरता कम कर सकें। यह वैश्विक न्याय और समानता की मांग है।

प्रश्न 24: (यूनिट 8: जाति और राजनीति + यूनिट 2: अंबेडकर)
‘पहचान की राजनीति’ (Identity Politics) के संदर्भ में, भारत में जाति का राजनीतिकरण (Politicization of Caste) क्या दर्शाता है?

  1. कि जाति व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो गई है।
  2. कि जाति अब केवल सामाजिक नहीं, बल्कि एक राजनीतिक उपकरण और लामबंदी (Mobilization) का साधन बन गई है।
  3. कि लोकतंत्र जातिवाद को बढ़ावा देता है।
  4. कि केवल उच्च जातियां राजनीति में सक्रिय हैं।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • विश्लेषण: रजनी कोठारी जैसे विचारकों ने तर्क दिया कि जाति का राजनीतिकरण होने से निम्न जातियों को अपनी राजनीतिक शक्ति का एहसास हुआ है। यह सामाजिक पदानुक्रम के बजाय ‘वोट बैंक’ और ‘सत्ता साझाकरण’ की लड़ाई बन गई है।

प्रश्न 25: (यूनिट 10: शासन + यूनिट 3: संविधान)
‘सूचना का अधिकार’ (RTI) अधिनियम, 2005 को भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के ‘अंतर्निहित’ (Implicit) अधिकार के रूप में देखा जाता है?

  1. अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार)
  2. अनुच्छेद 19(1)(a) (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता)
  3. अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार)
  4. अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता)

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • संवैधानिक लिंक: उच्चतम न्यायालय ने कई फैसलों में कहा है कि ‘जानने का अधिकार’ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ही एक हिस्सा है। यदि नागरिक के पास जानकारी नहीं होगी, तो वह प्रभावी ढंग से अपनी राय नहीं दे पाएगा और न ही शासन की जवाबदेही तय कर पाएगा।

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