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UGC NET JRF History: उच्च स्तरीय अभ्यास प्रश्न और विस्तृत विश्लेषण

UGC NET JRF History: उच्च स्तरीय अभ्यास प्रश्न और विस्तृत विश्लेषण

इतिहास की गहराइयों में उतरने और अपनी तैयारी को JRF स्तर तक ले जाने के लिए तैयार हो जाइए। यह मॉक टेस्ट केवल तथ्यों की जांच नहीं है, बल्कि आपकी विश्लेषणात्मक क्षमता और विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों के बीच संबंध स्थापित करने की आपकी योग्यता की परीक्षा है। आइए, समय की यात्रा करें और अपनी तैयारी को अंतिम रूप दें।

History Practice Questions

निर्देश: निम्नलिखित 25 प्रश्नों को हल करें और नीचे दिए गए विस्तृत स्पष्टीकरणों के माध्यम से अपनी वैचारिक समझ का विश्लेषण करें।

प्रश्न 1: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: हड़प्पा सभ्यता के पतन के संबंध में ‘पारिस्थितिकीय परिवर्तन’ का सिद्धांत यह तर्क देता है कि जलवायु परिवर्तन और नदियों के मार्ग बदलने से शहरी केंद्रों का विनाश हुआ।
कथन II: मार्कस कार्निल और अन्य आधुनिक इतिहासकारों ने इस पतन को एक अचानक घटना के बजाय एक क्रमिक प्रक्रिया (De-urbanization) के रूप में देखा है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  1. केवल कथन I
  2. केवल कथन II
  3. कथन I और II दोनों
  4. न तो कथन I और न ही कथन II

उत्तर: (c)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: दोनों कथन सही हैं। हड़प्पा सभ्यता का पतन किसी एक कारण से नहीं, बल्कि विभिन्न कारकों के समन्वय से हुआ था।
  • संदर्भ और विस्तार: कथन I पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण (Environmental Approach) को दर्शाता है, जहाँ बाढ़, सूखा और सरस्वती नदी के सूखने को मुख्य कारण माना गया है। कथन II इतिहासलेखन (Historiography) के आधुनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो ‘विनाश’ (Collapse) के बजाय ‘नगर-विहीनता’ (De-urbanization) शब्द का प्रयोग करता है, जिसका अर्थ है कि लोग शहरों को छोड़कर ग्रामीण बस्तियों की ओर चले गए।
  • गलत विकल्प: चूंकि दोनों तर्क अकादमिक रूप से मान्य हैं, इसलिए केवल एक को चुनना गलत होगा।

प्रश्न 2: मौर्यकालीन प्रशासन और प्रारंभिक मध्यकालीन क्षेत्रीय राज्यों के बीच ‘भूमि अनुदान’ (Land Grants) की प्रकृति में मुख्य अंतर क्या था?

  1. मौर्य काल में भूमि अनुदान पूरी तरह प्रतिबंधित थे, जबकि मध्यकाल में वे अनिवार्य थे।
  2. मौर्य प्रशासन में भूमि का स्वामित्व केंद्रीय था, जबकि प्रारंभिक मध्यकाल में ‘ब्रह्मदेय’ और ‘अग्रहार’ ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक स्वायत्तता को जन्म दिया।
  3. प्रारंभिक मध्यकाल में भूमि अनुदान केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए थे, जबकि मौर्य काल में वे सैन्य उद्देश्यों के लिए थे।
  4. दोनों कालखंडों में भूमि अनुदान की प्रकृति समान थी।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: मौर्य काल में राज्य का भूमि पर कड़ा नियंत्रण था और नौकरशाही वेतनभोगी थी। इसके विपरीत, गुप्त काल के बाद और प्रारंभिक मध्यकाल में भूमि अनुदान की प्रथा बढ़ी।
  • संदर्भ और विस्तार: प्रारंभिक मध्यकाल (Early Medieval) में ब्राह्मणों और मंदिरों को दी गई भूमि (ब्रह्मदेय/अग्रहार) ने न केवल आर्थिक बल्कि प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों का भी हस्तांतरण किया। इसने ‘सामंतवाद’ (Feudalism) के उदय का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे केंद्रीय सत्ता कमजोर हुई।
  • गलत विकल्प: मौर्य काल में अनुदान पूर्णतः प्रतिबंधित नहीं थे, लेकिन वे मध्यकालीन स्वायत्त अनुदानों जैसे नहीं थे।

प्रश्न 3: अभिकथन (A): दिल्ली सल्तनत के दौरान चिश्ती सूफी संतों ने राजकीय संरक्षण और दरबारों से दूरी बनाए रखी।
कारण (R): चिश्ती सिलसिला ‘तसव्वुफ’ के उस मार्ग का अनुसरण करता था जो भौतिक विलासिता के त्याग और आम जनता के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव पर जोर देता था।
सही विकल्प चुनें:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

उत्तर: (a)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: अभिकथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, अभिकथन की तार्किक व्याख्या करता है।
  • संदर्भ और विस्तार: चिश्ती संतों (जैसे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और निजामुद्दीन औलिया) का मानना था कि सत्ता के करीब रहने से आध्यात्मिक शुद्धता कम हो जाती है। इसी कारण उन्होंने सुल्तानों द्वारा दिए गए उपहारों और पदों को अस्वीकार कर दिया, जिससे वे आम जनता के बीच अधिक लोकप्रिय हुए।
  • तुलना: इसके विपरीत, सुहरावर्दी सिलसिला के संत राजकीय पदों को स्वीकार करने में संकोच नहीं करते थे।

प्रश्न 4: मुगलकालीन ‘मनसबदारी प्रणाली’ के संदर्भ में, ‘जात’ और ‘सवार’ रैंकों के बीच संबंध का सही विश्लेषण कौन सा है?

  1. ‘जात’ केवल घुड़सवारों की संख्या को दर्शाता था और ‘सवार’ व्यक्तिगत वेतन को।
  2. ‘जात’ मनसबदार की व्यक्तिगत स्थिति और वेतन निर्धारित करता था, जबकि ‘सवार’ यह तय करता था कि उसे कितने घुड़सवार रखने हैं।
  3. ‘सवार’ रैंक ‘जात’ रैंक से हमेशा अधिक होता था।
  4. इन दोनों रैंकों का निर्धारण केवल वंशानुगत आधार पर किया जाता था।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: ‘जात’ (Zat) पद की गरिमा और वेतन का सूचक था, जबकि ‘सवार’ (Sawar) सैन्य जिम्मेदारी का सूचक था।
  • संदर्भ और विस्तार: अकबर द्वारा शुरू की गई इस प्रणाली ने मुगल प्रशासन को एक सैन्य-नौकरशाही ढांचा प्रदान किया। यदि किसी मनसबदार की ‘जात’ 5000 और ‘सवार’ 2000 था, तो उसका वेतन 5000 के स्तर का था लेकिन उसे 2000 घुड़सवारों का रखरखाव करना था।
  • गलत विकल्प: यह प्रणाली वंशानुगत नहीं थी (हालांकि बाद में कुछ प्रयास हुए), बल्कि योग्यता और सम्राट की इच्छा पर आधारित थी।

प्रश्न 5: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहासलेखन (Historiography) के संदर्भ में, ‘कैम्ब्रिज स्कूल’ (Cambridge School) का मुख्य तर्क क्या है?

  1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का उदय शुद्ध रूप से राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता की इच्छा से हुआ था।
  2. कांग्रेस का गठन स्थानीय हितों, सत्ता के संघर्ष और व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया था, न कि किसी व्यापक राष्ट्रवादी विचारधारा के कारण।
  3. ब्रिटिश शासन ने भारत में जानबूझकर राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया ताकि शासन आसान हो सके।
  4. कांग्रेस केवल उच्च वर्ग का प्रतिनिधित्व करती थी और इसका किसानों से कोई संबंध नहीं था।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: कैम्ब्रिज स्कूल (जैसे अनिल सील) राष्ट्रवाद के रोमांटिक विचार को खारिज करता है और इसे ‘हितों के संघर्ष’ (Conflict of Interests) के रूप में देखता है।
  • संदर्भ और विस्तार: इस स्कूल का तर्क है कि भारतीय नेता ब्रिटिश व्यवस्था के भीतर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कांग्रेस का उपयोग कर रहे थे। यह दृष्टिकोण राष्ट्रवादी इतिहासलेखन के बिल्कुल विपरीत है, जो कांग्रेस को भारतीय जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक मानता है।
  • गलत विकल्प: विकल्प (a) राष्ट्रवादी स्कूल का तर्क है।

प्रश्न 6: निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची I (ऐतिहासिक स्रोत) — सूची II (काल/प्रकृति)
A. ऋग्वेद — 1. उत्तर-वैदिक काल/लोहे का प्रयोग
B. अथर्ववेद — 2. प्रारंभिक वैदिक काल/ग्रामीण अर्थव्यवस्था
C. शतपथ ब्राह्मण — 3. राज्य गठन की प्रक्रिया
D. अष्टाध्यायी — 4. व्याकरण और सामाजिक वर्गीकरण

  1. A-2, B-1, C-3, D-4
  2. A-1, B-2, C-4, D-3
  3. A-2, B-3, C-1, D-4
  4. A-4, B-1, C-2, D-3

उत्तर: (a)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: ऋग्वेद प्रारंभिक वैदिक काल का है; अथर्ववेद में उत्तर-वैदिक काल के जादू-टोने और लोहे के संकेत मिलते हैं; शतपथ ब्राह्मण में आर्यों के पूर्व से पूर्व की ओर विस्तार और राज्य गठन का वर्णन है; पाणिनि की अष्टाध्यायी उस समय के सामाजिक और भाषाई ढांचे को दर्शाती है।
  • संदर्भ: यह मिलान वैदिक काल के क्रमिक विकास (आरंभिक ग्रामीण से जटिल राज्य संरचना तक) को स्पष्ट करता है।

प्रश्न 7: इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के संदर्भ में, ‘दोहरा गुंबद’ (Double Dome) की तकनीक का मुख्य उद्देश्य क्या था?

  1. भूकंप के दौरान संरचना को अधिक स्थिरता प्रदान करना।
  2. बाहरी ऊंचाई को भव्य बनाना जबकि आंतरिक छत को अनुपात में रखना।
  3. भीतर की ध्वनि को गूंजने से रोकना।
  4. निर्माण लागत को कम करना।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: दोहरा गुंबद एक वास्तुशिल्प नवाचार था जिसने हुमायूँ के मकबरे जैसी इमारतों को एक विशिष्ट भव्यता दी।
  • संदर्भ और विस्तार: एक साधारण गुंबद यदि बाहर से ऊंचा बनाया जाता, तो वह अंदर से बहुत ऊंचा और असंगत लगता। दोहरे गुंबद में एक आंतरिक छत होती है और एक बाहरी बाहरी आवरण, जिससे बाहर से इमारत विशाल दिखती है लेकिन अंदर से वह मानव अनुपात के अनुकूल रहती है।
  • गलत विकल्प: यह तकनीक लागत बढ़ाने वाली थी, कम करने वाली नहीं।

प्रश्न 8: आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, ‘धन के निष्कासन’ (Drain of Wealth) सिद्धांत का सबसे सटीक विश्लेषण कौन सा है?

  1. यह केवल ब्रिटिश अधिकारियों के वेतन के भारत से बाहर जाने की प्रक्रिया थी।
  2. यह भारत के प्राकृतिक संसाधनों और राजस्व का एकतरफा हस्तांतरण था, जिसके बदले भारत को कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला।
  3. ब्रिटिश शासन ने भारत में निवेश किया, जिसे बाद में मुनाफे के रूप में वापस ले लिया गया।
  4. यह सिद्धांत केवल दादाभाई नौरोजी द्वारा प्रतिपादित था और इसका कोई सांख्यिकीय आधार नहीं था।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: ‘ड्रेन ऑफ वेल्थ’ का अर्थ था भारत की पूंजी का ब्रिटेन की ओर प्रवाह, जिसने भारत को गरीब और ब्रिटेन को समृद्ध बनाया।
  • संदर्भ और विस्तार: दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक ‘Poverty and Un-British Rule in India’ में स्पष्ट किया कि होम चार्जेज, पेंशन और व्यापारिक लाभ के माध्यम से भारत का पैसा लूटा जा रहा था। इसने भारतीय राष्ट्रवाद को एक आर्थिक आधार प्रदान किया।
  • गलत विकल्प: यह केवल वेतन तक सीमित नहीं था, बल्कि व्यापारिक एकाधिकार और राजस्व के दुरुपयोग को भी शामिल करता था।

प्रश्न 9: अभिकथन (A): भक्ति आंदोलन ने मध्यकालीन भारतीय समाज में जातिगत कठोरता को चुनौती दी।
कारण (R): कबीर और रविदास जैसे संतों ने ईश्वर की एकता और आंतरिक भक्ति पर जोर दिया, जिसने जन्म आधारित श्रेष्ठता को नकार दिया।
सही विकल्प चुनें:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

उत्तर: (a)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: भक्ति आंदोलन का मुख्य सामाजिक प्रभाव जाति व्यवस्था पर प्रहार करना था।
  • संदर्भ और विस्तार: निर्गुण संतों ने तर्क दिया कि ईश्वर निराकार है और उसे पाने के लिए किसी पुजारी या विशेष जाति के जन्म की आवश्यकता नहीं है। इसने समाज के निचले तबकों में आत्म-सम्मान और आध्यात्मिक समानता की भावना पैदा की।

प्रश्न 10: कथन I: मराठा साम्राज्य के तहत ‘चौथ’ और ‘सरदेशमुखी’ कर केवल विद्रोही राज्यों से वसूले जाते थे।
कथन II: ये कर मराठों द्वारा अपनी सुरक्षा और राजनीतिक प्रभुत्व सुनिश्चित करने के लिए एक रक्षात्मक तंत्र के रूप में लागू किए गए थे।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  1. केवल कथन I
  2. केवल कथन II
  3. कथन I और II दोनों
  4. न तो कथन I और न ही कथन II

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: कथन I गलत है क्योंकि ये कर केवल विद्रोही राज्यों से नहीं, बल्कि उन सभी क्षेत्रों से वसूले जाते थे जिन्हें मराठे अपने प्रभाव क्षेत्र में मानते थे ताकि वे उन क्षेत्रों पर हमला न करें।
  • संदर्भ और विस्तार: ‘चौथ’ कुल राजस्व का 1/4 भाग होता था, जिसे बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा के बदले लिया जाता था। ‘सरदेशमुखी’ अतिरिक्त 10% कर था, जिसे शिवाजी महाराज ने स्वयं को उस क्षेत्र का सर्वोच्च वंशानुगत प्रमुख (सरदेशमुख) मानकर वसूला।

प्रश्न 11: निम्नलिखित इतिहासकारों और उनके दृष्टिकोणों को सुमेलित कीजिए:
सूची I (इतिहासकार) — सूची II (दृष्टिकोण)
A. आर.सी. मजूमदार — 1. राष्ट्रवादी इतिहासलेखन
B. बिपन चंद्रा — 2. साम्राज्यवादी/संशयवादी इतिहासलेखन
C. रंजीत गुहा — 3. मार्क्सवादी इतिहासलेखन
D. इरफान हबीब — 4. सबाल्टर्न (Subaltern) इतिहासलेखन

  1. A-2, B-1, C-4, D-3
  2. A-1, B-2, C-3, D-4
  3. A-4, B-3, C-2, D-1
  4. A-2, B-4, C-1, D-3

उत्तर: (a)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: आर.सी. मजूमदार अक्सर राष्ट्रवादी दावों के प्रति संशयवादी रहे; बिपन चंद्रा ने राष्ट्रवादी और मार्क्सवादी संश्लेषण किया; रंजीत गुहा ने ‘सबाल्टर्न स्टडीज’ की नींव रखी; इरफान हबीब ने मुगल अर्थव्यवस्था का मार्क्सवादी विश्लेषण किया।
  • संदर्भ: यह प्रश्न यूनिट 10 (इतिहासलेखन) की गहरी समझ की मांग करता है।

प्रश्न 12: गांधार कला और मथुरा कला के बीच मुख्य अंतर के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?

  1. गांधार कला पूरी तरह स्वदेशी थी, जबकि मथुरा कला विदेशी प्रभाव से प्रेरित थी।
  2. गांधार कला में बुद्ध की शारीरिक बनावट ग्रीको-रोमन प्रभाव (जैसे घुंघराले बाल) को दर्शाती है, जबकि मथुरा कला में बुद्ध अधिक मांसल और भारतीय प्रतीकों से युक्त हैं।
  3. मथुरा कला केवल पत्थर से बनी थी, जबकि गांधार कला केवल मिट्टी से।
  4. गांधार कला का संरक्षण केवल गुप्त शासकों ने किया था।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: गांधार कला ‘ग्रीको-बौद्ध’ कला कहलाती है, जबकि मथुरा कला शुद्ध भारतीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है।
  • संदर्भ और विस्तार: गांधार कला में बुद्ध को एक यूनानी देवता (अपोलो) की तरह दिखाया गया है। मथुरा कला में बुद्ध के चेहरे पर आध्यात्मिक शांति और भारतीय शारीरिक विशेषताओं का समावेश है। दोनों का विकास कुषाण काल (विशेषकर कनिष्क के समय) में हुआ।

प्रश्न 13: अलाउद्दीन खिलजी के ‘बाजार नियंत्रण’ (Market Control) उपायों का प्राथमिक उद्देश्य क्या था?

  1. जनता को सस्ती वस्तुएं उपलब्ध कराकर समाज कल्याण करना।
  2. अपनी विशाल सेना को कम वेतन में बनाए रखना और महंगाई को नियंत्रित करना।
  3. व्यापारियों को प्रोत्साहित करना ताकि विदेशी व्यापार बढ़े।
  4. हिंदू व्यापारियों के प्रभाव को समाप्त करना।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: खिलजी के सुधार कल्याणकारी नहीं, बल्कि सामरिक (Strategic) थे।
  • संदर्भ और विस्तार: मंगोल आक्रमणों के खतरे को देखते हुए खिलजी को एक बहुत बड़ी सेना की आवश्यकता थी। राज्य के खजाने पर बोझ कम करने के लिए उन्होंने वस्तुओं की कीमतें निर्धारित कर दीं ताकि सैनिक कम वेतन में भी अपना गुजारा कर सकें।

प्रश्न 14: अबुल फजल द्वारा रचित ‘अकबरनामा’ के इतिहासलेखन के उद्देश्य के बारे में कौन सा विश्लेषण सही है?

  1. यह केवल एक प्रशासनिक रिकॉर्ड था जिसका उद्देश्य कर संग्रह करना था।
  2. इसका उद्देश्य अकबर को एक ‘दैवीय प्रकाश’ (Divine Light) से प्रेरित सार्वभौमिक शासक के रूप में प्रस्तुत करना था।
  3. यह अकबर की विफलताओं का एक आलोचनात्मक विवरण था।
  4. यह केवल मुगल दरबार की कहानियों का एक संग्रह था।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: अबुल फजल ने इतिहास को केवल घटनाओं के विवरण के रूप में नहीं, बल्कि एक दार्शनिक उद्देश्य के साथ लिखा।
  • संदर्भ और विस्तार: उसने ‘फर-ए-इजादी’ (दैवीय प्रकाश) का सिद्धांत दिया, जिससे अकबर की सत्ता को धार्मिक और नैतिक वैधता प्राप्त हुई। यह मुगल सत्ता के वैधीकरण (Legitimization) का एक उपकरण था।

प्रश्न 15: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान ‘वामपंथी’ (Left-wing) आंदोलनों और गांधीवादी विचारधारा के बीच मुख्य टकराव का बिंदु क्या था?

  1. वामपंथी ब्रिटिश शासन के समर्थन में थे।
  2. गांधीजी अहिंसा और ट्रस्टीशिप में विश्वास करते थे, जबकि वामपंथियों ने वर्ग संघर्ष (Class Struggle) और किसानों के हिंसक विद्रोह को जायज माना।
  3. दोनों केवल शहरी मध्यम वर्ग के हितों की बात कर रहे थे।
  4. गांधीजी ने कभी भी किसानों के मुद्दों को नहीं उठाया।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: गांधी और वामपंथियों (जैसे नेहरू का शुरुआती झुकाव और बाद में CSP) के बीच मुख्य मतभेद सामाजिक परिवर्तन की विधि को लेकर था।
  • संदर्भ और विस्तार: गांधीजी चाहते थे कि जमींदार और किसान आपसी सहमति से समस्या सुलझाएं (ट्रस्टीशिप)। इसके विपरीत, वामपंथियों का मानना था कि जब तक संपत्ति का पुनर्वितरण नहीं होगा और वर्ग संघर्ष नहीं होगा, वास्तविक आजादी नहीं मिलेगी।

प्रश्न 16: महाजनपदों से मौर्य साम्राज्य के संक्रमण के दौरान ‘राज्य गठन’ की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन क्या था?

  1. लोहे के प्रयोग का पूरी तरह बंद हो जाना।
  2. एक विकेंद्रीकृत ओलिगार्की (गणसंघ) से एक केंद्रीकृत निरंकुश राजतंत्र (Centralized Monarchy) की ओर बढ़ना।
  3. व्यापार का अंत और केवल कृषि पर निर्भरता।
  4. धार्मिक सहिष्णुता का पूरी तरह समाप्त होना।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: मौर्य साम्राज्य ने पहली बार भारत के एक बड़े भू-भाग को एक एकल प्रशासनिक ढांचे के नीचे लाया।
  • संदर्भ और विस्तार: महाजनपद काल में कई छोटे राज्य और गणराज्य (जैसे वज्जी) थे। चंद्रगुप्त मौर्य ने इन्हें जीतकर एक विशाल साम्राज्य बनाया, जहाँ शक्ति का केंद्र सम्राट था और प्रशासन एक विस्तृत नौकरशाही द्वारा चलाया जाता था।

प्रश्न 17: दिल्ली सल्तनत की ‘इक्ता प्रणाली’ (Iqta System) और मुगलकालीन ‘जागीरदारी प्रणाली’ के बीच मुख्य अंतर क्या था?

  1. इक्ता प्रणाली वंशानुगत थी, जबकि जागीरदारी नहीं।
  2. इक्ता का उद्देश्य मुख्य रूप से प्रशासनिक और सैन्य नियंत्रण था, जबकि जागीरदारी अधिक जटिल थी और इसमें बार-बार तबादले (Transfers) की प्रथा थी ताकि स्थानीय प्रभाव न बढ़े।
  3. जागीरदारी में केवल नकद वेतन दिया जाता था।
  4. इक्ता प्रणाली में भू-राजस्व का अधिकार केवल किसानों को था।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: इक्ता और जागीर दोनों भूमि अनुदान थे, लेकिन उनके प्रबंधन में अंतर था।
  • संदर्भ और विस्तार: इल्तुतमिश ने इक्ता प्रणाली को व्यवस्थित किया ताकि दूरदराज के क्षेत्रों पर नियंत्रण रहे। मुगलों ने जागीरदारी को और अधिक परिष्कृत किया और जागीरदारों का नियमित तबादला किया ताकि वे अपनी जागीर में स्वतंत्र राजा न बन जाएं।

प्रश्न 18: ज्योतिबा फुले के सामाजिक सुधारों का मुख्य केंद्र क्या था और उन्होंने ब्राह्मणवादी आधिपत्य को कैसे चुनौती दी?

  1. उन्होंने केवल अंग्रेजी शिक्षा के विरोध में आंदोलन किया।
  2. उन्होंने ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की और तर्क दिया कि निचली जातियाँ वास्तव में मूल निवासी थीं और आर्य बाहरी आक्रमणकारी थे।
  3. उन्होंने केवल विधवा विवाह का समर्थन किया।
  4. उनका मानना था कि जाति व्यवस्था को केवल धार्मिक प्रार्थनाओं से बदला जा सकता है।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: फुले ने जाति व्यवस्था के बौद्धिक और ऐतिहासिक आधार पर प्रहार किया।
  • संदर्भ और विस्तार: फुले ने दलितों और पिछड़ों को शिक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि ज्ञान ही वह हथियार है जिससे मानसिक गुलामी की बेड़ियाँ काटी जा सकती हैं। उनका दृष्टिकोण केवल सुधारवादी नहीं बल्कि क्रांतिकारी था।

प्रश्न 19: अभिकथन (A): 19वीं सदी के अंत में ‘आर्थिक राष्ट्रवाद’ का उदय हुआ।
कारण (R): दादाभाई नौरोजी और एम.जी. रानाडे ने यह सिद्ध किया कि भारत की गरीबी का कारण उसकी आंतरिक कमियाँ नहीं, बल्कि ब्रिटिश आर्थिक नीतियाँ थीं।
सही विकल्प चुनें:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

उत्तर: (a)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: आर्थिक राष्ट्रवाद ने भारतीयों को यह समझाया कि ब्रिटिश शासन वास्तव में भारत का शोषण कर रहा है।
  • संदर्भ और विस्तार: जब भारतीयों ने महसूस किया कि उनका पैसा ब्रिटेन जा रहा है, तो उन्होंने केवल राजनीतिक अधिकारों की नहीं, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन की मांग शुरू की। इसने बाद में ‘स्वदेशी आंदोलन’ का आधार तैयार किया।

प्रश्न 20: गुप्त काल के इतिहास के पुनर्निर्माण में ‘अभिलेखीय साक्ष्य’ (Epigraphic Evidence) और ‘साहित्यिक साक्ष्य’ के बीच क्या विरोधाभास मिलता है?

  1. अभिलेख केवल युद्धों का वर्णन करते हैं, जबकि साहित्य केवल धर्म का।
  2. अभिलेख शासकों के गौरव और उपलब्धियों का बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन करते हैं, जबकि साहित्यिक स्रोत (जैसे फाह्यान के विवरण) सामाजिक स्थिति की अधिक सूक्ष्म तस्वीर पेश करते हैं।
  3. साहित्यिक स्रोत पूरी तरह काल्पनिक हैं, जबकि अभिलेख पूरी तरह सटीक।
  4. दोनों के बीच कोई विरोधाभास नहीं है।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: किसी भी काल के इतिहास में राजकीय अभिलेख (Prashastis) और बाहरी यात्रियों के विवरण में अंतर होता है।
  • संदर्भ और विस्तार: प्रयाग प्रशस्ति जैसे अभिलेख समुद्रगुप्त की विजयों का गुणगान करते हैं। वहीं, चीनी यात्री फाह्यान का विवरण गुप्त काल की शांति और समृद्धि को दर्शाता है, लेकिन वह प्रशासनिक बारीकियों पर मौन है। इतिहासकार इन दोनों का तुलनात्मक अध्ययन कर सत्य तक पहुँचते हैं।

प्रश्न 21: दिल्ली सल्तनत के दौरान ‘उलेमा’ (Ulama) की भूमिका के संबंध में कौन सा कथन सही है?

  1. उलेमा केवल धार्मिक उपदेशक थे और राजनीति में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं था।
  2. वे इस्लामी कानून (शरिया) के व्याख्याता थे और अक्सर सुल्तानों के राजनीतिक निर्णयों को धार्मिक वैधता प्रदान करते थे या उनका विरोध करते थे।
  3. सुल्तानों ने उलेमाओं के प्रभाव को पूरी तरह समाप्त कर दिया था।
  4. उलेमा केवल गैर-मुसलमानों के धर्म परिवर्तन के लिए जिम्मेदार थे।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: उलेमा राज्य की वैचारिक मशीनरी का हिस्सा थे।
  • संदर्भ और विस्तार: सुल्तान को अपनी सत्ता को वैध बनाने के लिए उलेमाओं के समर्थन की आवश्यकता होती थी। हालांकि, कई सुल्तानों (जैसे अलाउद्दीन खिलजी) ने स्पष्ट किया कि राजनीति (Zawabit) और धर्म (Sharia) अलग-अलग हैं, जिससे उलेमाओं के साथ टकराव भी हुआ।

प्रश्न 22: 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट (Regulating Act) का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिणाम क्या था?

  1. इसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार को पूरी तरह समाप्त कर दिया।
  2. इसने बंगाल के गवर्नर को ‘बंगाल का गवर्नर-जनरल’ बना दिया और मद्रास व बॉम्बे प्रेसीडेंसियों को उसके अधीन कर दिया।
  3. इसने भारत में पहली बार लोकतंत्र की स्थापना की।
  4. इसने मुगल सम्राट को भारत का वास्तविक शासक घोषित किया।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: यह एक्ट ब्रिटिश संसद द्वारा कंपनी के शासन को नियंत्रित करने का पहला औपचारिक प्रयास था।
  • संदर्भ और विस्तार: वॉरेन हेस्टिंग्स बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल बने। इस अधिनियम ने केंद्रीकरण की शुरुआत की और कलकत्ता में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही तय हुई।

प्रश्न 23: स्वतंत्रता के बाद रियासतों के एकीकरण (Integration of Princely States) में सरदार पटेल की रणनीति का मुख्य आधार क्या था?

  1. सभी रियासतों को जबरन भारत में मिलाना, चाहे वे सहमत हों या नहीं।
  2. ‘गाजर और छड़ी’ (Carrot and Stick) की नीति, जिसमें उन्हें स्वायत्तता का आश्वासन (Privy Purse) दिया गया लेकिन साथ ही भारतीय संघ में शामिल होने के लिए दबाव बनाया गया।
  3. सभी रियासतों को स्वतंत्र देश बनने की अनुमति देना।
  4. केवल उन रियासतों को मिलाना जो आर्थिक रूप से कमजोर थीं।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: पटेल ने कूटनीति और दृढ़ता का अद्भुत संतुलन बनाया।
  • संदर्भ और विस्तार: उन्होंने राजाओं को ‘प्रिवी पर्स’ (वार्षिक भत्ता) का लालच दिया ताकि वे स्वेच्छा से विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर करें। जहाँ यह विफल रहा (जैसे हैदराबाद), वहाँ उन्होंने ‘पुलिस कार्रवाई’ (Operation Polo) का सहारा लिया।

प्रश्न 24: उत्तर-मौर्य काल (Post-Mauryan) में ‘श्रेणियों’ (Guilds) के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?

  1. श्रेणियाँ केवल वस्तुओं का व्यापार करती थीं और उनका बैंकिंग से कोई संबंध नहीं था।
  2. श्रेणियाँ स्वायत्त निकाय थीं जो अपने नियम स्वयं बनाती थीं और उन्होंने मंदिरों व बौद्ध विहारों को भारी दान दिया, जिससे उनका सामाजिक प्रभाव बढ़ा।
  3. श्रेणियों के उदय से शहरीकरण का पतन हुआ।
  4. श्रेणियाँ केवल राज्य के आदेशों का पालन करती थीं और उनकी अपनी कोई शक्ति नहीं थी।

उत्तर: (b)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: श्रेणियाँ प्राचीन भारत के आर्थिक ढांचे का रीढ़ थीं।
  • संदर्भ और विस्तार: ये केवल व्यापारिक संघ नहीं थे, बल्कि बैंकों के रूप में कार्य करते थे जहाँ लोग पैसा जमा करते थे। उन्होंने कला और धर्म को संरक्षण दिया, जिससे इस काल में व्यापारिक नगरों का विकास हुआ।

प्रश्न 25: ‘सबाल्टर्न स्टडीज’ (Subaltern Studies) के परिप्रेक्ष्य में, 1857 के विद्रोह का विश्लेषण कैसे किया जाता है?

  1. इसे केवल एक ‘सिपाही विद्रोह’ (Sepoy Mutiny) के रूप में देखा जाता है।
  2. इसे केवल ब्रिटिश नीतियों के प्रति उच्च वर्ग के असंतोष के रूप में देखा जाता है।
  3. इसे ‘नीचे से इतिहास’ (History from below) के रूप में देखा जाता है, जिसमें किसानों, आदिवासियों और आम जनता की अपनी स्वतंत्र चेतना और एजेंसी को महत्व दिया जाता है।
  4. इसे केवल एक असफल सैन्य विद्रोह माना जाता है जिसका कोई सामाजिक आधार नहीं था।

उत्तर: (c)

Detailed Explanation:

  • सत्यता: सबाल्टर्न दृष्टिकोण मुख्यधारा के इतिहासलेखन (चाहे वह राष्ट्रवादी हो या साम्राज्यवादी) को चुनौती देता है।
  • संदर्भ और विस्तार: रंजीत गुहा जैसे इतिहासकारों का तर्क है कि आम जनता ने केवल नेताओं का अनुसरण नहीं किया, बल्कि उनकी अपनी राजनीतिक समझ थी। 1857 का विद्रोह केवल दरबारियों का नहीं, बल्कि उन लाखों गुमनाम लोगों का था जिन्होंने अपनी शर्तों पर प्रतिरोध किया।

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