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UGC NET JRF Geography: उच्च स्तरीय अंतर-विषय अभ्यास प्रश्नोत्तरी और विस्तृत विश्लेषण

UGC NET JRF Geography: उच्च स्तरीय अंतर-विषय अभ्यास प्रश्नोत्तरी और विस्तृत विश्लेषण

नमस्ते भविष्य के प्रोफेसरों और शोधार्थियों! UGC NET भूगोल की परीक्षा अब केवल तथ्यात्मक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी विश्लेषणात्मक क्षमता और विभिन्न भौगोलिक इकाइयों के बीच संबंध स्थापित करने के कौशल की परीक्षा है। आज का यह विशेष मॉक टेस्ट NTA के नवीनतम पैटर्न पर आधारित है, जिसमें हमने भू-आकृति विज्ञान से लेकर भौगोलिक तकनीकों तक के जटिल विषयों को आपस में जोड़कर (Interdisciplinary Approach) प्रश्नों का निर्माण किया है। अपनी तैयारी को JRF स्तर तक ले जाने के लिए इस चुनौतीपूर्ण यात्रा में हमारे साथ जुड़ें!

UGC NET JRF Geography: Advanced Mixed-Unit Practice Set

निर्देश: निम्नलिखित 25 प्रश्नों को हल करें। ये प्रश्न पाठ्यक्रम की दो या दो से अधिक इकाइयों के मिश्रण से तैयार किए गए हैं ताकि आपकी समग्र समझ का परीक्षण हो सके।

प्रश्न 1: (इकाई 1: भू-आकृति विज्ञान + इकाई 10: भारत का भूगोल)
कथन (A): मुख्य सीमा भ्रंश (Main Boundary Thrust – MBT) लघु हिमालय और शिवालिक श्रेणियों के बीच एक महत्वपूर्ण विवर्तनिक सीमा बनाता है।
कारण (R): शिवालिक पर्वतमाला मुख्य रूप से उच्च हिमालय से आने वाले नदीय अवसादों के संचय से निर्मित नवीन वलन हैं।

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

उत्तर: (a)

विस्तृत व्याख्या:

  • संकल्पना: यह प्रश्न विवर्तनिक संरचना (Tectonics) और भारत के भौतिक विभाजन को जोड़ता है। MBT वह क्षेत्र है जहाँ लघु हिमालय शिवालिक के ऊपर चढ़ता है।
  • तर्क: शिवालिक सबसे नवीन श्रेणी है, जो हिमालय के उत्थान के कारण उत्पन्न तीव्र अपरदन और उसके बाद हुए निक्षेपण (Deposition) का परिणाम है। चूँकि यह संचय विवर्तनिक दबाव के प्रभाव में हुआ, इसलिए यहाँ MBT जैसी भ्रंश रेखाएं विकसित हुईं।
  • महत्व: यह क्षेत्र अत्यधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय है क्योंकि यहाँ अभी भी विवर्तनिक हलचलें जारी हैं।

प्रश्न 2: (इकाई 2: जलवायु विज्ञान + इकाई 10: भारत का भूगोल)
कथन I: भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून की शुरुआत में अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का उत्तर की ओर खिसकना निर्णायक होता है।
कथन II: तिब्बत का पठार एक ऊष्मीय स्रोत (Heat Source) के रूप में कार्य करता है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून की तीव्रता को बढ़ाता है।

  1. केवल कथन I सही है।
  2. केवल कथन II सही है।
  3. दोनों कथन I और II सही हैं।
  4. दोनों कथन I और II गलत हैं।

उत्तर: (c)

विस्तृत व्याख्या:

  • संकल्पना: यह प्रश्न वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण और क्षेत्रीय भारतीय मानसून के अंतर्संबंध को दर्शाता है।
  • व्याख्या: ITCZ जब गंगा के मैदानों तक पहुँचता है, तो यह कम दबाव का क्षेत्र बनाता है जो दक्षिणी हिंद महासागर से नमी युक्त हवाओं को आकर्षित करता है। साथ ही, तिब्बत के पठार का अत्यधिक गर्म होना ऊपरी वायुमंडल में एक ‘एंटी-साइक्लोन’ बनाता है, जो मानसूनी हवाओं को भारत की ओर धकेलता है।
  • निष्कर्ष: दोनों कारक मिलकर भारतीय मानसून की प्रणाली को संचालित करते हैं।

प्रश्न 3: (इकाई 3: समुद्र विज्ञान + इकाई 4: पर्यावरण भूगोल)
सूची-I (समुद्री प्रक्रिया) को सूची-II (पर्यावरणीय प्रभाव) से सुमेलित कीजिए:

सूची-I सूची-II
(A) अल नीनो (El Niño) (i) पोषक तत्वों की प्रचुरता और मत्स्य पालन
(B) यूट्रोफिकेशन (Eutrophication) (ii) वैश्विक ऊष्मा वितरण और जलवायु नियंत्रण
(C) थर्मोहेलिन परिसंचरण (iii) भारतीय मानसून में कमी/सूखा
(D) अपवेलिंग (Upwelling) (iv) मृत क्षेत्र (Dead Zones) का निर्माण
  1. A-(iii), B-(iv), C-(ii), D-(i)
  2. A-(iii), B-(i), C-(ii), D-(iv)
  3. A-(ii), B-(iv), C-(iii), D-(i)
  4. A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i)

उत्तर: (a)

विस्तृत व्याख्या:

  • अल नीनो: प्रशांत महासागर के पूर्वी तट पर गर्म जल का जमाव, जिससे भारत में वर्षा कम होती है।
  • यूट्रोफिकेशन: पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फास्फोरस) की अधिकता से शैवाल प्रस्फुटन होता है, जिससे ऑक्सीजन कम हो जाती है और ‘डेड जोन’ बनते हैं।
  • थर्मोहेलिन परिसंचरण: घनत्व (तापमान और लवणता) आधारित वैश्विक कन्वेयर बेल्ट जो ध्रुवों और भूमध्य रेखा के बीच ऊष्मा का संतुलन बनाती है।
  • अपवेलिंग: गहरे ठंडे और पोषक तत्वों से भरपूर जल का सतह पर आना, जो प्लवक (Plankton) की वृद्धि और समृद्ध मत्स्य पालन का आधार है।

प्रश्न 4: (इकाई 8: भौगोलिक चिंतन + इकाई 9: भौगोलिक तकनीकें)
कथन (A): भूगोल में ‘मात्रात्मक क्रांति’ (Quantitative Revolution) ने स्थानिक विश्लेषण (Spatial Analysis) के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।
कारण (R): इसने भूगोल को वर्णनात्मक (Idiographic) दृष्टिकोण से हटाकर नियम-केंद्रित (Nomothetic) दृष्टिकोण की ओर मोड़ा।

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

उत्तर: (a)

विस्तृत व्याख्या:

  • संकल्पना: यह प्रश्न भूगोल के दार्शनिक बदलाव और आधुनिक GIS/सांख्यिकी के आधार को जोड़ता है।
  • व्याख्या: 1950-60 के दशक में भूगोलवेत्ताओं ने महसूस किया कि केवल क्षेत्रों का वर्णन करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सांख्यिकीय मॉडल और गणितीय विधियों का उपयोग किया ताकि भूगोल के सामान्य नियम (Laws) बनाए जा सकें। इसी सोच ने आगे चलकर कंप्यूटर मैपिंग और GIS जैसी तकनीकों को जन्म दिया।
  • शब्दावली: इडियोग्राफिक = विशिष्ट विवरण; नॉमोटेटिक = सामान्य नियम।

प्रश्न 5: (इकाई 5: जनसंख्या भूगोल + इकाई 6: आर्थिक भूगोल)
क्रिस्टालर के ‘केंद्रीय स्थान सिद्धांत’ (Central Place Theory) के संदर्भ में, यदि किसी क्षेत्र में परिवहन लागत न्यूनतम है और जनसंख्या का वितरण समान है, तो निम्न में से कौन सा परिणाम सबसे सटीक होगा?

  1. बस्तियों का आकार अनियमित होगा।
  2. सेवा केंद्रों का वितरण षट्कोणीय (Hexagonal) प्रतिरूप में होगा।
  3. उच्च क्रम की सेवाएँ निम्न क्रम की सेवाओं की तुलना में अधिक घनी होंगी।
  4. कस्बों के बीच की दूरी अधिकतम होगी।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • संकल्पना: यह सिद्धांत जनसंख्या के वितरण और आर्थिक सेवाओं की पहुँच के बीच संबंध बताता है।
  • व्याख्या: वाल्टर क्रिस्टालर ने माना कि यदि सतह समरूप (Isotropic surface) है, तो बाजार क्षेत्र एक-दूसरे को ओवरलैप करने से बचने के लिए और पूरी जगह को कवर करने के लिए षट्कोणीय रूप ले लेते हैं।
  • अन्य विकल्प: उच्च क्रम की सेवाएँ (जैसे विशेषज्ञ अस्पताल) कम घनी और दूर-दूर होती हैं, जबकि निम्न क्रम की सेवाएँ (जैसे किराना स्टोर) अधिक घनी होती हैं।

प्रश्न 6: (इकाई 2: जलवायु विज्ञान + इकाई 1: भू-आकृति विज्ञान)
परiglacial (पेरिग्लेशियल) भू-दृश्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. पिंगो (Pingoes) बर्फ के कोर वाले टीले होते हैं जो पर्माफ्रॉस्ट क्षेत्रों में बनते हैं।
II. सॉलिफ्लक्शन (Solifluction) की प्रक्रिया केवल उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के ढलानों पर होती है।

  1. केवल कथन I सही है।
  2. केवल कथन II सही है।
  3. दोनों कथन I और II सही हैं।
  4. दोनों कथन I और II गलत हैं।

उत्तर: (a)

विस्तृत व्याख्या:

  • पिंगो: ये ठंडे प्रदेशों की विशेषता हैं जहाँ जमीन के नीचे जमी बर्फ के दबाव से सतह ऊपर उठ जाती है।
  • सॉलिफ्लक्शन: यह प्रक्रिया तब होती है जब ऊपरी मिट्टी पिघलती है लेकिन नीचे की परत जमी रहती है, जिससे संतृप्त मिट्टी धीरे-धीरे ढलान की ओर खिसकती है। यह शीत प्रदेशों की विशेषता है, न कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की।

प्रश्न 7: (इकाई 7: राजनीतिक भूगोल + इकाई 5: जनसंख्या भूगोल)
मैकिन्डर के ‘हार्टलैंड सिद्धांत’ (Heartland Theory) का मुख्य तर्क क्या था?

  1. समुद्री शक्ति ही विश्व पर नियंत्रण का एकमात्र साधन है।
  2. यूरेशिया का आंतरिक भाग (पिवट एरिया) नियंत्रित करने वाला विश्व पर शासन करेगा।
  3. सीमाएं केवल प्राकृतिक बाधाओं द्वारा निर्धारित होनी चाहिए।
  4. जनसंख्या घनत्व का राजनीतिक शक्ति से कोई संबंध नहीं है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • संकल्पना: यह राजनीतिक शक्ति और भौगोलिक स्थिति (Location) का विश्लेषण है।
  • व्याख्या: मैकिन्डर ने तर्क दिया कि यूरेशिया का मध्य भाग (Heartland) समुद्री शक्तियों की पहुँच से दूर है और यहाँ के विशाल संसाधन और जनसंख्या इसे दुनिया का सबसे शक्तिशाली क्षेत्र बनाते हैं। “जो हार्टलैंड पर शासन करेगा, वह विश्व द्वीप पर शासन करेगा।”

प्रश्न 8: (इकाई 10: भारत का भूगोल + इकाई 4: पर्यावरण भूगोल)
निम्नलिखित राष्ट्रीय उद्यानों को उनके प्रमुख पारिस्थितिकी तंत्र (Biome) से सुमेलित करें:

उद्यान पारिस्थितिकी तंत्र
(A) काजीरंगा (i) उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
(B) साइलेंट वैली (ii) घास के मैदान और दलदली क्षेत्र
(C) गिर (iii) अल्पाइन वन और घास के मैदान
(D) नंदा देवी (iv) शुष्क पर्णपाती वन
  1. A-(ii), B-(i), C-(iv), D-(iii)
  2. A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv)
  3. A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i)
  4. A-(ii), B-(iv), C-(i), D-(iii)

उत्तर: (a)

विस्तृत व्याख्या:

  • काजीरंगा: असम में स्थित, यहाँ के विशिष्ट ‘एलिफेंट ग्रास’ और दलदली क्षेत्र एक सींग वाले गैंडे के लिए आदर्श हैं।
  • साइलेंट वैली: केरल में, यह पश्चिमी घाट के वर्षावनों (Rainforests) का प्रतिनिधित्व करती है।
  • गिर: गुजरात का शुष्क क्षेत्र, जहाँ कांटेदार झाड़ियाँ और पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
  • नंदा देवी: उच्च हिमालयी क्षेत्र जहाँ ठंडे अल्पाइन वन और घास के मैदान होते हैं।

प्रश्न 9: (इकाई 3: समुद्र विज्ञान + इकाई 1: भू-आकृति विज्ञान)
मध्य-महासागरीय कटक (Mid-Oceanic Ridges) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. यहाँ टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं (Divergent Boundary)।
  2. यहाँ नया समुद्री क्रस्ट (New Crust) बनता है।
  3. यह क्षेत्र अत्यधिक शांत होता है और यहाँ कोई भूकंप नहीं आते।
  4. यहाँ बेसाल्टिक मैग्मा का उद्भेदन होता है।

उत्तर: (c)

विस्तृत व्याख्या:

  • प्रक्रिया: जब दो प्लेटें अलग होती हैं, तो नीचे से मैग्मा ऊपर आता है और ठंडा होकर नई चट्टानें बनाता है (Sea Floor Spreading)।
  • भूकंप: चूँकि यहाँ विवर्तनिक हलचलें तीव्र होती हैं, इसलिए यहाँ उथले भूकंप (Shallow Focus Earthquakes) बहुत आम हैं। अतः कथन (c) गलत है।

प्रश्न 10: (इकाई 9: भौगोलिक तकनीकें + इकाई 10: भारत का भूगोल)
भारत के गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान में भूजल संसाधनों के मानचित्रण के लिए रिमोट सेंसिंग (RS) और GIS का उपयोग किस प्रकार सबसे प्रभावी है?

  1. केवल उपग्रह चित्रों से जल स्तर का प्रत्यक्ष मापन करके।
  2. भू-आकृतिक इकाइयों, मृदा प्रकार और वनस्पति सूचकांक (NDVI) के ओवरले विश्लेषण (Overlay Analysis) द्वारा।
  3. केवल जनगणना डेटा के माध्यम से जल की मांग का विश्लेषण करके।
  4. स्थानीय सर्वेक्षणों को पूरी तरह हटाकर केवल डिजिटल डेटा का उपयोग करके।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • तकनीक: GIS में ‘ओवरले विश्लेषण’ का अर्थ है विभिन्न परतों (Layers) को एक के ऊपर एक रखकर विश्लेषण करना।
  • अनुप्रयोग: भूजल की उपलब्धता जानने के लिए हम भू-आकृति (जैसे पुराने जलोढ़ मैदान), मिट्टी की पारगम्यता और वनस्पति के घनत्व का विश्लेषण करते हैं। ये तीनों परतें मिलकर यह संकेत देती हैं कि कहाँ जल पुनर्भरण (Recharge) की संभावना अधिक है।

प्रश्न 11: (इकाई 2: जलवायु विज्ञान + इकाई 10: भारत का भूगोल)
कोपेन (Koppen) के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, भारत के पश्चिमी तट (मालाबार तट) को किस कोड से दर्शाया जाता है और इसकी मुख्य विशेषता क्या है?

  1. Am – उष्णकटिबंधीय मानसून जलवायु (लघु शुष्क ऋतु)
  2. Aw – उष्णकटिबंधीय सवाना जलवायु (शुष्क शीत ऋतु)
  3. BSh – अर्ध-शुष्क स्टेप जलवायु
  4. Cwg – शुष्क शीत ऋतु वाला मानसून प्रकार

उत्तर: (a)

विस्तृत व्याख्या:

  • Am (Tropical Monsoon): यहाँ भारी वर्षा होती है और शुष्क मौसम बहुत छोटा होता है। मालाबार तट इसी श्रेणी में आता है।
  • Aw (Savanna): यह प्रायद्वीपीय भारत के आंतरिक भागों में पाया जाता है जहाँ शीत ऋतु शुष्क होती है।
  • BSh: यह राजस्थान और गुजरात के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए है।

प्रश्न 12: (इकाई 1: भू-आकृति विज्ञान + इकाई 3: समुद्र विज्ञान)
‘गुयाना पठार’ और ‘कनाडाई शील्ड’ जैसे क्षेत्रों को ‘स्थिर भूखंड’ (Stable Landmasses) कहा जाता है। इनका निर्माण मुख्य रूप से किस प्रक्रिया से हुआ है?

  1. हालिया ज्वालामुखी विस्फोटों से।
  2. प्राचीन प्री-कैम्ब्रियन क्रिस्टलाइन चट्टानों के क्षरण और उत्थान से।
  3. समुद्री निक्षेपों के दबाव से।
  4. हिमनदी अपरदन के कारण।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • संकल्पना: ये क्षेत्र पृथ्वी के सबसे पुराने क्रस्ट (Cratons) का हिस्सा हैं।
  • व्याख्या: ये प्लेटों के बीच में स्थित होते हैं, इसलिए यहाँ विवर्तनिक गतिविधियाँ बहुत कम होती हैं। ये मुख्य रूप से ग्रेनाइट और नीस जैसी कठोर चट्टानों से बने हैं जो अरबों वर्षों के अपरदन के बाद अब पठारी रूप में दिखते हैं।

प्रश्न 13: (इकाई 5: जनसंख्या भूगोल + इकाई 4: पर्यावरण भूगोल)
‘जनसांख्यिकीय संक्रमण सिद्धांत’ (Demographic Transition Theory) के चौथे चरण में पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में क्या सत्य है?

  1. जनसंख्या वृद्धि दर उच्चतम होती है, जिससे वनों का विनाश तीव्र होता है।
  2. जन्म और मृत्यु दर दोनों निम्न होते हैं, जिससे प्रति व्यक्ति संसाधन खपत (Consumption) बढ़ जाती है।
  3. मृत्यु दर में अचानक वृद्धि से पारिस्थितिक दबाव कम हो जाता है।
  4. जनसंख्या स्थिर होने से प्रदूषण पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • चौथा चरण: यह विकसित देशों (जैसे जापान, जर्मनी) की स्थिति है जहाँ जनसंख्या वृद्धि बहुत कम या शून्य होती है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: हालाँकि जनसंख्या नहीं बढ़ रही, लेकिन जीवन स्तर ऊँचा होने के कारण प्रति व्यक्ति कार्बन फुटप्रिंट और कचरा उत्पादन (Waste Generation) बहुत अधिक होता है, जो वैश्विक पर्यावरण को प्रभावित करता है।

प्रश्न 14: (इकाई 8: भौगोलिक चिंतन + इकाई 2: जलवायु विज्ञान)
‘पर्यावरणीय नियतिवाद’ (Environmental Determinism) के समर्थकों के अनुसार, मानव व्यवहार और संस्कृति का निर्धारण मुख्य रूप से किसके द्वारा होता है?

  1. मानवीय इच्छाशक्ति और तकनीक द्वारा।
  2. भौतिक पर्यावरण और जलवायु द्वारा।
  3. राजनीतिक विचारधारा द्वारा।
  4. केवल आर्थिक संसाधनों द्वारा।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • नियतिवाद: यह विचारधारा मानती है कि प्रकृति सर्वोपरि है। उदाहरण के लिए, ठंडी जलवायु के लोग अधिक परिश्रमी होते हैं या उष्णकटिबंधीय जलवायु के लोग आलसी होते हैं (यह एक पुराना और विवादित तर्क था)।
  • विपरीत विचारधारा: ‘संभववाद’ (Possibilism) कहता है कि प्रकृति अवसर प्रदान करती है और मानव अपनी तकनीक से उनका चयन करता है।

प्रश्न 15: (इकाई 10: भारत का भूगोल + इकाई 1: भू-आकृति विज्ञान)
दक्कन ट्रैप (Deccan Traps) की उत्पत्ति के संबंध में कौन सा कथन सही है?

  1. यह एक वलित पर्वत (Fold Mountain) है।
  2. यह रीयूनियन हॉटस्पॉट (Reunion Hotspot) के ऊपर से प्लेट के गुजरने के कारण हुआ ज्वालामुखी प्रवाह है।
  3. यह केवल हिमनदी अपरदन का परिणाम है।
  4. इसका निर्माण टेथिस सागर के अवसादों के जमाव से हुआ है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • प्रक्रिया: जब भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसक रही थी, तो वह रीयूनियन हॉटस्पॉट के ऊपर से गुजरी। इससे भारी मात्रा में बेसाल्टिक लावा निकला जिसने परतों के रूप में जमा होकर ‘ट्रैप’ (सीढ़ियों जैसी आकृति) बनाई।
  • चट्टान: यहाँ मुख्य रूप से बेसाल्ट चट्टानें पाई जाती हैं, जिनसे काली मिट्टी (Regur Soil) का निर्माण होता है।

प्रश्न 16: (इकाई 6: आर्थिक भूगोल + इकाई 7: राजनीतिक भूगोल)
‘कोर-पेरिफेरी मॉडल’ (Core-Periphery Model) के अनुसार, एक आर्थिक केंद्र (Core) अपने आसपास के क्षेत्र (Periphery) के साथ कैसा संबंध रखता है?

  1. सहयोगात्मक और समान विकास का।
  2. परस्पर निर्भरता का जहाँ पेरिफेरी केवल कच्चे माल की आपूर्ति करती है और कोर मूल्यवर्धित उत्पाद बेचता है।
  3. पेरिफेरी हमेशा कोर से अधिक समृद्ध होता है।
  4. दोनों क्षेत्रों के बीच कोई व्यापारिक संबंध नहीं होता।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • संकल्पना: यह मॉडल (जैसे वॉलरस्टीन का वर्ल्ड सिस्टम थ्योरी) बताता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था असमान है।
  • व्याख्या: कोर क्षेत्र (विकसित देश) तकनीक और पूंजी पर नियंत्रण रखते हैं, जबकि पेरिफेरी (विकासशील देश) श्रम और प्राकृतिक संसाधनों का स्रोत बनते हैं, जिससे असमानता बढ़ती है।

प्रश्न 17: (इकाई 3: समुद्र विज्ञान + इकाई 10: भारत का भूगोल)
हिंद महासागर की धाराओं के संदर्भ में, ‘सोमाली धारा’ (Somali Current) की सबसे विशिष्ट विशेषता क्या है?

  1. यह वर्ष भर एक ही दिशा में बहती है।
  2. यह मानसून के अनुसार अपनी दिशा बदलती है (Seasonal Reversal)।
  3. यह एक ठंडी धारा है जो भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बहती है।
  4. इसका जल स्तर बहुत कम और लवणता शून्य होती है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • विशेषता: सोमाली धारा मानसून की हवाओं से गहराई से प्रभावित है। शीत ऋतु में यह दक्षिण-पश्चिम की ओर और ग्रीष्म ऋतु में उत्तर-पूर्व की ओर बहती है।
  • महत्व: यह धारा समुद्र तल से पोषक तत्वों को ऊपर लाती है (Upwelling), जिससे सोमालिया का तट मत्स्य पालन के लिए समृद्ध होता है।

प्रश्न 18: (इकाई 9: भौगोलिक तकनीकें + इकाई 5: जनसंख्या भूगोल)
जनसंख्या घनत्व के मानचित्रण के लिए ‘कोरोप्लैथ मैप’ (Choropleth Map) का उपयोग करते समय सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है?

  1. रंगों का चुनाव करना।
  2. इकाइयों (जैसे जिला या राज्य) के अलग-अलग आकार के कारण होने वाला दृश्य भ्रम (Visual Distortion)।
  3. डेटा का संग्रहण करना।
  4. मैप के स्केल को निर्धारित करना।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • कोरोप्लैथ मैप: इसमें प्रशासनिक सीमाओं के भीतर रंगों या शेड्स का उपयोग किया जाता है।
  • समस्या: यदि कोई बड़ा जिला कम जनसंख्या घनत्व वाला है और एक छोटा जिला उच्च घनत्व वाला, तो नक्शे पर बड़ा जिला अधिक प्रभावी दिखता है, भले ही वहाँ की जनसंख्या कम हो। इसे ठीक करने के लिए ‘कार्टोग्राम’ (Cartogram) का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 19: (इकाई 1: भू-आकृति विज्ञान + इकाई 2: जलवायु विज्ञान)
‘कार्स्ट स्थलाकृतियों’ (Karst Topography) के निर्माण के लिए आवश्यक प्राथमिक शर्त क्या है?

  1. अत्यधिक ठंडी जलवायु और हिमनद।
  2. शुष्क जलवायु और पवन अपरदन।
  3. पानी में घुली हुई कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और घुलनशील चट्टानें जैसे चूना पत्थर।
  4. तेज बहती नदियाँ और कठोर ग्रेनाइट चट्टानें।

उत्तर: (c)

विस्तृत व्याख्या:

  • रासायनिक प्रक्रिया: वर्षा का जल जब हवा से CO2 सोखता है, तो वह हल्का कार्बोनिक एसिड बनाता है। यह एसिड चूना पत्थर (Calcium Carbonate) को घोल देता है।
  • परिणाम: इससे स्टैलेक्टाइट्स, स्टैलेग्माइट्स और सिंकहोल जैसी आकृतियाँ बनती हैं।

प्रश्न 20: (इकाई 7: राजनीतिक भूगोल + इकाई 6: आर्थिक भूगोल)
‘हार्टलैंड’ और ‘रिमलैंड’ सिद्धांतों के बीच मुख्य अंतर क्या है?

  1. हार्टलैंड समुद्री शक्ति पर जोर देता है, रिमलैंड स्थलीय शक्ति पर।
  2. हार्टलैंड यूरेशिया के आंतरिक भाग को महत्वपूर्ण मानता है, जबकि स्पाइकमैन का रिमलैंड सिद्धांत तटीय क्षेत्रों (Peripheral regions) को नियंत्रण का केंद्र मानता है।
  3. दोनों सिद्धांतों में कोई अंतर नहीं है।
  4. रिमलैंड सिद्धांत केवल अफ्रीका महाद्वीप पर लागू होता है।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • मैकिन्डर (Heartland): आंतरिक यूरेशिया पर नियंत्रण = विश्व नियंत्रण।
  • स्पाइकमैन (Rimland): उन्होंने तर्क दिया कि यूरेशिया के किनारे के क्षेत्र (Rimland) अधिक महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे समुद्री और स्थलीय दोनों शक्तियों के संपर्क में हैं। जो रिमलैंड को नियंत्रित करेगा, वह हार्टलैंड को घेर लेगा।

प्रश्न 21: (इकाई 4: पर्यावरण भूगोल + इकाई 10: भारत का भूगोल)
भारत में ‘बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट्स’ (Biodiversity Hotspots) के संदर्भ में कौन सा मिलान गलत है?

  1. पश्चिमी घाट – उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
  2. पूर्वी हिमालय – अल्पाइन और शंकुधारी वन
  3. इंडो-बर्मा क्षेत्र – मैंग्रोव और तटीय वन
  4. थार मरुस्थल – वैश्विक बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट

उत्तर: (d)

विस्तृत व्याख्या:

  • हॉटस्पॉट की शर्त: किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट कहलाने के लिए वहां उच्च स्तर की स्थानिक प्रजातियां (Endemic Species) होनी चाहिए और उसका आवास काफी हद तक नष्ट हो चुका होना चाहिए।
  • त्रुटि: थार मरुस्थल एक विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र है, लेकिन इसे वैश्विक स्तर पर ‘बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट’ की श्रेणी में नहीं रखा गया है। भारत में मुख्य हॉटस्पॉट्स पश्चिमी घाट, हिमालय और इंडो-बर्मा क्षेत्र हैं।

प्रश्न 22: (इकाई 9: भौगोलिक तकनीकें + इकाई 1: भू-आकृति विज्ञान)
एक भू-आकृति विज्ञानी (Geomorphologist) द्वारा ‘डिजिटल एलिवेशन मॉडल’ (DEM) का उपयोग किस उद्देश्य के लिए सबसे अधिक किया जाएगा?

  1. मिट्टी के रासायनिक गुणों का विश्लेषण करने के लिए।
  2. ढलान (Slope), पहलू (Aspect) और जल निकासी नेटवर्क (Drainage Network) का विश्लेषण करने के लिए।
  3. जनसंख्या की वृद्धि दर मापने के लिए।
  4. वायुमंडलीय दबाव का मानचित्रण करने के लिए।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • DEM: यह जमीन की ऊंचाई का एक डिजिटल प्रतिनिधित्व है।
  • उपयोग: DEM के माध्यम से हम यह गणना कर सकते हैं कि ढलान कितना तीव्र है, पानी किस दिशा में बहेगा (Flow Direction) और नदी घाटियों का आकार कैसा है।

प्रश्न 23: (इकाई 2: जलवायु विज्ञान + इकाई 3: समुद्र विज्ञान)
‘ला नीना’ (La Niña) की स्थिति के दौरान वैश्विक मौसम पर क्या प्रभाव पड़ता है?

  1. प्रशांत महासागर के पूर्वी तट पर पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है।
  2. भारत में सामान्य से अधिक वर्षा और बाढ़ की संभावना बढ़ जाती है।
  3. ऑस्ट्रेलिया में भीषण सूखा पड़ता है।
  4. हिंद महासागर की धाराएं रुक जाती हैं।

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • ला नीना: यह अल नीनो का विपरीत है। इसमें प्रशांत महासागर के पूर्वी तट (पेरू तट) पर पानी अधिक ठंडा हो जाता है।
  • प्रभाव: इसके कारण पश्चिमी प्रशांत (इंडोनेशिया/ऑस्ट्रेलिया) और भारतीय उपमहाद्वीप में निम्न दाब मजबूत होता है, जिससे मानसूनी हवाएं अधिक नमी लाती हैं और भारी वर्षा होती है।

प्रश्न 24: (इकाई 8: भौगोलिक चिंतन + इकाई 5: जनसंख्या भूगोल)
‘संभववाद’ (Possibilism) के विचार को सबसे अधिक मजबूती से किसने प्रस्तुत किया?

  1. कार्ल रिटर
  2. फ्रेडरिक रैटज़ेल
  3. विडाल डी ला ब्लाश
  4. अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट

उत्तर: (c)

विस्तृत व्याख्या:

  • विडल डी ला ब्लाश: इन्होंने फ्रांसीसी स्कूल ऑफ भूगोल की स्थापना की और तर्क दिया कि मनुष्य केवल प्रकृति का गुलाम नहीं है, बल्कि वह अपनी बुद्धि और तकनीक से पर्यावरण में बदलाव कर सकता है (Possibilism)।
  • रैटज़ेल: इन्हें ‘मानव भूगोल का पिता’ माना जाता है, लेकिन वे नियतिवाद (Determinism) के अधिक करीब थे।

प्रश्न 25: (इकाई 10: भारत का भूगोल + इकाई 6: आर्थिक भूगोल)
भारत में ‘रूर’ (Ruhr) क्षेत्र की तरह औद्योगिक क्लस्टर का विकास किस क्षेत्र में देखा जाता है और इसका मुख्य कारण क्या है?

  1. मालाबार तट – समुद्री व्यापार
  2. छोटा नागपुर पठार – खनिज संसाधनों की प्रचुरता
  3. दक्कन का पठार – काली मिट्टी
  4. गंगा का मैदान – उपजाऊ भूमि

उत्तर: (b)

विस्तृत व्याख्या:

  • तुलना: जर्मनी का रूर क्षेत्र कोयला और लोहा समृद्ध है। इसी तरह, भारत का छोटा नागपुर पठार (झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़) कोयला, लोहा और मैंगनीज का भंडार है।
  • औद्योगिकीकरण: कच्चे माल की उपलब्धता और परिवहन के साधनों ने इस क्षेत्र को भारत का ‘खनिज हृदय’ (Mineral Heart) बना दिया है।

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