नमस्कार भविष्य के समाजशास्त्रियों! अपनी बौद्धिक क्षमताओं को चुनौती देने और समाजशास्त्रीय सिद्धांतों की सूक्ष्मताओं को समझने के लिए तैयार हो जाइए। यह दैनिक क्विज़ न केवल आपके ज्ञान का परीक्षण करेगा, बल्कि आपको प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण प्रदान करेगा। आइए, समाज के जटिल ढांचों को डिकोड करें!
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- एमिल दुर्खीम द्वारा प्रतिपादित ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति का क्या अर्थ है?\n
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- (A) सामाजिक मानदंडों की अत्यधिक कठोरता
- (B) मानदंडों का अभाव या मानदंडों में विसंगति
- (C) सामाजिक एकजुटता में वृद्धि
- (D) आर्थिक संसाधनों का समान वितरण
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\nउत्तर: (B) मानदंडों का अभाव या मानदंडों में विसंगति\n
\nविस्तृत व्याख्या: दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ वह स्थिति है जब समाज में तीव्र परिवर्तन के कारण पुराने मानदंड अप्रासंगिक हो जाते हैं और नए मानदंड अभी तक स्थापित नहीं हुए होते हैं। यह व्यक्ति में दिशाहीनता और हताशा पैदा करता है।\n
संदर्भ: यह अवधारणा उनकी पुस्तक ‘The Division of Labour in Society’ और ‘Suicide’ में विस्तार से मिलती है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) इसके विपरीत है, जबकि (C) और (D) समाजशास्त्रीय स्थिरता या आर्थिक समानता से संबंधित हैं, न कि एनोमी से।\n\n
- मैक्स वेबर की ‘Verstehen’ (वर्स्टेहेन) पद्धति का मुख्य उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) केवल सांख्यिकीय आंकड़ों का विश्लेषण करना
- (B) सामाजिक घटनाओं का वस्तुनिष्ठ बाहरी अवलोकन करना
- (C) सामाजिक क्रिया के पीछे के व्यक्तिपरक अर्थ को समझना
- (D) समाज के आर्थिक आधार का विश्लेषण करना
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\nउत्तर: (C) सामाजिक क्रिया के पीछे के व्यक्तिपरक अर्थ को समझना\n
\nविस्तृत व्याख्या: ‘Verstehen’ एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ है ‘समझना’। वेबर का मानना था कि समाजशास्त्रियों को केवल बाहरी व्यवहार को नहीं देखना चाहिए, बल्कि उस व्यक्ति के नजरिए से क्रिया के अर्थ को समझना चाहिए जिसने वह क्रिया की है।\n
संदर्भ: यह वेबर के ‘Interpretive Sociology’ (व्याख्यात्मक समाजशास्त्र) का आधार है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) और (B) सकारात्मकवादी (Positivist) दृष्टिकोण हैं, जबकि (D) मार्क्सवादी दृष्टिकोण है।\n\n
- कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘अलगाव’ (Alienation) का सिद्धांत मुख्य रूप से किस व्यवस्था की आलोचना करता है?\n
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- (A) सामंतवाद
- (B) पूंजीवाद
- (C) पारंपरिक समाज
- (D) नौकरशाही
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\nउत्तर: (B) पूंजीवाद\n
\nविस्तृत व्याख्या: मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में श्रमिक अपनी उत्पादित वस्तु, उत्पादन की प्रक्रिया, अपने साथी श्रमिकों और अंततः स्वयं के मानवीय स्वभाव से अलग हो जाता है।\n
संदर्भ: यह विचार उनकी रचना ‘Economic and Philosophic Manuscripts of 1844’ में प्रमुखता से मिलता है।\n
अन्य विकल्प: हालांकि मार्क्स ने अन्य प्रणालियों का अध्ययन किया, लेकिन ‘अलगाव’ विशेष रूप से औद्योगिक पूंजीवाद की उपज है।\n\n
- टैल्कॉट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ का क्या अर्थ है?\n
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- (A) Legitimation (वैधता)
- (B) Legalism (कानूनवाद)
- (C) Latency (सुप्त अवस्था/पैटर्न रखरखाव)
- (D) Linearization (रैखिकीकरण)
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\nउत्तर: (C) Latency (सुप्त अवस्था/पैटर्न रखरखाव)\n
\nविस्तृत व्याख्या: AGIL मॉडल में A=Adaptation, G=Goal Attainment, I=Integration, और L=Latency है। Latency का अर्थ है समाज के मूल मूल्यों और सांस्कृतिक पैटर्न को बनाए रखना ताकि प्रणाली स्थिर रहे।\n
संदर्भ: यह पार्सन्स के ‘Structural Functionalism’ का हिस्सा है।\n
अन्य विकल्प: Legitimacy एक अलग अवधारणा है, और Legalism या Linearization इस मॉडल का हिस्सा नहीं हैं।\n\n
- रॉबर्ट के मर्टन के अनुसार ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अप्रत्यक्ष कार्य’ (Latent Function) में क्या अंतर है?\n
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- (A) प्रकट कार्य अनपेक्षित होते हैं और अप्रत्यक्ष कार्य अपेक्षित होते हैं।
- (B) प्रकट कार्य इच्छित और मान्यता प्राप्त होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कार्य अनपेक्षित और अनदेखे होते हैं।
- (C) दोनों एक ही हैं, बस नाम अलग हैं।
- (D) प्रकट कार्य केवल नकारात्मक होते हैं।
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\nउत्तर: (B) प्रकट कार्य इच्छित और मान्यता प्राप्त होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कार्य अनपेक्षित और अनदेखे होते हैं।\n
\nविस्तृत व्याख्या: मर्टन ने स्पष्ट किया कि किसी भी सामाजिक संस्था के कुछ उद्देश्य स्पष्ट होते हैं (Manifest), लेकिन उनके कुछ ऐसे प्रभाव भी होते हैं जिन्हें समाज ने सोचा नहीं होता या पहचान नहीं पाता (Latent)।\n
संदर्भ: यह ‘Social Theory and Social Structure’ पुस्तक में वर्णित है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) परिभाषा को उल्टा करता है, और (C) तथा (D) समाजशास्त्रीय रूप से गलत हैं।\n\n
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘Self’ (स्व) का विकास किन दो घटकों के बीच संवाद से होता है?\n
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- (A) Id और Ego
- (B) Super-ego और Id
- (C) ‘I’ और ‘Me’
- (D) आत्मा और शरीर
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\nउत्तर: (C) ‘I’ और ‘Me’\n
\nविस्तृत व्याख्या: मीड के अनुसार, ‘I’ व्यक्ति का सहज, रचनात्मक और प्रतिक्रियाशील हिस्सा है, जबकि ‘Me’ समाज द्वारा आरोपित मानदंडों और अपेक्षाओं का आंतरिक प्रतिबिंब है।\n
संदर्भ: यह ‘Symbolic Interactionism’ (सांकेतिक अंतःक्रियावाद) का मुख्य सिद्धांत है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) और (B) फ्रायड के मनोवैज्ञानिक सिद्धांत हैं।\n\n
- सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) के संदर्भ में ‘बंद स्तरीकरण’ (Closed Stratification) का उदाहरण कौन सा है?\n
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- (A) वर्ग (Class)
- (B) जाति (Caste)
- (C) पेशा (Occupation)
- (D) शिक्षा का स्तर
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\nउत्तर: (B) जाति (Caste)\n
\nविस्तृत व्याख्या: बंद स्तरीकरण वह प्रणाली है जिसमें व्यक्ति की सामाजिक स्थिति जन्म से निर्धारित होती है और इसमें परिवर्तन (Social Mobility) लगभग असंभव होता है। जाति इसका सबसे सटीक उदाहरण है।\n
संदर्भ: स्तरीकरण के सिद्धांतों में इसे ‘Ascribed Status’ (प्रदत्त स्थिति) से जोड़ा जाता है।\n
अन्य विकल्प: वर्ग और पेशा ‘Open Stratification’ के उदाहरण हैं क्योंकि इनमें उपलब्धि के आधार पर बदलाव संभव है।\n\n
- निम्नलिखित में से कौन सी एक गुणात्मक अनुसंधान विधि (Qualitative Research Method) है?\n
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- (A) सर्वेक्षण (Survey)
- (B) प्रश्नावली (Questionnaire)
- (C) नृवंशविज्ञान (Ethnography)
- (D) सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical Analysis)
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\nउत्तर: (C) नृवंशविज्ञान (Ethnography)\n
\nविस्तृत व्याख्या: नृवंशविज्ञान में शोधकर्ता किसी समूह के साथ गहराई से रहकर उनके व्यवहार और संस्कृति का विस्तृत अवलोकन करता है, जो मात्रात्मक आंकड़ों के बजाय वर्णनात्मक डेटा प्रदान करता है।\n
संदर्भ: यह विधि मुख्य रूप से मानवशास्त्र और समाजशास्त्र में उपयोग की जाती है।\n
अन्य विकल्प: (A), (B) और (D) मात्रात्मक (Quantitative) विधियां हैं।\n\n
- एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
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- (A) उच्च जातियों द्वारा निम्न जातियों का दमन करना
- (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाना
- (C) जातियों का पूरी तरह से समाप्त हो जाना
- (D) केवल संस्कृत भाषा का सीखना
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\nउत्तर: (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाना\n
\nविस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसमें कोई निम्न हिंदू जाति या जनजाति, किसी उच्च जाति (विशेषकर द्विज) के रीति-रिवाजों, विचारधारा और जीवन पद्धति को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति ऊपर उठाने का प्रयास करती है।\n
संदर्भ: यह भारतीय समाजशास्त्र की एक मौलिक अवधारणा है।\n
अन्य विकल्प: (A) सामाजिक उत्पीड़न है, (C) जाति उन्मूलन है और (D) केवल भाषाई ज्ञान है।\n\n
- ‘लुई विर्थ’ (Louis Wirth) ने शहरी समाज की तीन मुख्य विशेषताओं के रूप में किसे परिभाषित किया है?\n
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- (A) गरीबी, बेरोजगारी और भीड़
- (B) आकार, घनत्व और विविधता (Size, Density, Heterogeneity)
- (C) प्रदूषण, यातायात और अपराध
- (D) धर्म, राजनीति और अर्थव्यवस्था
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\nउत्तर: (B) आकार, घनत्व और विविधता (Size, Density, Heterogeneity)\n
\nविस्तृत व्याख्या: विर्थ के अनुसार, शहर केवल बड़े गाँव नहीं हैं, बल्कि उनकी अपनी विशिष्ट सामाजिक विशेषताएं होती हैं: बड़ी जनसंख्या (Size), लोगों का पास-पास रहना (Density), और विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों का मिश्रण (Heterogeneity)।\n
संदर्भ: यह उनके प्रसिद्ध लेख ‘Urbanism as a Way of Life’ से लिया गया है।\n
अन्य विकल्प: अन्य विकल्प शहरी समस्याओं या सामान्य तत्वों को दर्शाते हैं, न कि समाजशास्त्रीय विशेषताओं को।\n\n
- ‘सगोत्र विवाह’ (Endogamy) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) अपने स्वयं के सामाजिक समूह या जाति के भीतर विवाह करना
- (B) अपने समूह से बाहर विवाह करना
- (C) एक साथ कई विवाह करना
- (D) विवाह न करना
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\nउत्तर: (A) अपने स्वयं के सामाजिक समूह या जाति के भीतर विवाह करना\n
\nविस्तृत व्याख्या: अंतर्विवाह (Endogamy) वह नियम है जो व्यक्ति को उसी सामाजिक श्रेणी, धर्म या जाति के भीतर साथी चुनने के लिए बाध्य करता है।\n
संदर्भ: यह नातेदारी (Kinship) और सामाजिक स्तरीकरण के अध्ययन का हिस्सा है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (B) ‘बहिर्विवाह’ (Exogamy) है।\n\n
- ‘छिपा हुआ पाठ्यक्रम’ (Hidden Curriculum) की अवधारणा शिक्षा के समाजशास्त्र में क्या दर्शाती है?\n
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- (A) वह पाठ्यक्रम जो आधिकारिक तौर पर नहीं पढ़ाया जाता लेकिन छात्र अनौपचारिक रूप से सीखते हैं (जैसे आज्ञाकारिता)
- (B) गुप्त रूप से पढ़ाए जाने वाले प्रतिबंधित विषय
- (C) वह पाठ्यक्रम जो केवल समृद्ध छात्रों के लिए होता है
- (D) डिजिटल शिक्षा का अभाव
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\nउत्तर: (A) वह पाठ्यक्रम जो आधिकारिक तौर पर नहीं पढ़ाया जाता लेकिन छात्र अनौपचारिक रूप से सीखते हैं (जैसे आज्ञाकारिता)\n
\nविस्तृत व्याख्या: शिक्षा प्रणाली केवल ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि मूल्यों, व्यवहारों और सामाजिक पदानुक्रमों को भी सिखाती है, जो लिखित पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होते।\n
संदर्भ: यह आलोचनात्मक समाजशास्त्र (Critical Sociology) और शिक्षा के समाजशास्त्र का विषय है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (B), (C) और (D) इस अवधारणा के वास्तविक समाजशास्त्रीय अर्थ को नहीं दर्शाते।\n\n
- पियरे बोर्दियु (Pierre Bourdieu) के अनुसार ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) क्या है?\n
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- (A) बैंक में जमा धन
- (B) ज्ञान, कौशल, शिक्षा और सांस्कृतिक योग्यताएं जो सामाजिक लाभ प्रदान करती हैं
- (C) प्राचीन स्मारकों का संरक्षण
- (D) केवल विदेशी भाषाओं का ज्ञान
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\nउत्तर: (B) ज्ञान, कौशल, शिक्षा और सांस्कृतिक योग्यताएं जो सामाजिक लाभ प्रदान करती हैं\n
\nविस्तृत व्याख्या: बोर्दियु का तर्क था कि उच्च वर्ग के लोग अपने बच्चों को ऐसी सांस्कृतिक पूंजी (जैसे बोलने का तरीका, कला की समझ) देते हैं, जो उन्हें शिक्षा प्रणाली और नौकरी बाजार में बढ़त दिलाती है।\n
संदर्भ: यह पुनरुत्पादन सिद्धांत (Theory of Reproduction) का हिस्सा है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) आर्थिक पूंजी है।\n\n
- ‘जेन्ट्रीफिकेशन’ (Gentrification) की प्रक्रिया का शहरी समाजशास्त्र में क्या अर्थ है?\n
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- (A) झुग्गियों का विस्तार होना
- (B) निम्न आय वाले शहरी क्षेत्रों का पुनर्निर्माण और वहां उच्च आय वाले लोगों का बसना
- (C) ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन
- (D) शहरी क्षेत्रों का औद्योगिकरण
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\nउत्तर: (B) निम्न आय वाले शहरी क्षेत्रों का पुनर्निर्माण और वहां उच्च आय वाले लोगों का बसना\n
\nविस्तृत व्याख्या: जब किसी पुराने या गरीब शहरी इलाके का नवीनीकरण किया जाता है और वहां अमीर लोग रहने आते हैं, तो संपत्ति की कीमतें बढ़ जाती हैं और मूल गरीब निवासी वहां से विस्थापित हो जाते हैं।\n
संदर्भ: यह समकालीन शहरी विकास और वर्ग संघर्ष का विषय है।\n
अन्य विकल्प: (C) शहरीकरण (Urbanization) है और (D) औद्योगीकरण है।\n\n
- ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र’ (Profane) के बीच का अंतर किस समाजशास्त्री ने धर्म के अध्ययन के लिए प्रस्तुत किया था?\n
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- (A) मैक्स वेबर
- (B) कार्ल मार्क्स
- (C) एमिल दुर्खीम
- (D) अगस्त कॉम्टे
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\nउत्तर: (C) एमिल दुर्खीम\n
\nविस्तृत व्याख्या: दुर्खीम के अनुसार, धर्म का सार पवित्र (वह जिसे विशेष सम्मान दिया जाता है) और अपवित्र (साधारण, दैनिक जीवन की वस्तुएं) के बीच का विभाजन है।\n
संदर्भ: उनकी पुस्तक ‘The Elementary Forms of the Religious Life’ में यह विस्तार से है।\n
अन्य विकल्प: वेबर ने धर्म के आर्थिक प्रभावों (Protestant Ethic) पर ध्यान दिया, जबकि मार्क्स ने इसे ‘अफीम’ कहा।\n\n
- अनुसंधान में ‘विश्वसनीयता’ (Reliability) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) यह कि शोध सही चीज को माप रहा है या नहीं
- (B) यदि वही शोध बार-बार किया जाए, तो क्या परिणाम समान आएंगे
- (C) शोध का नैतिक होना
- (D) डेटा का बहुत अधिक मात्रा में होना
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\nउत्तर: (B) यदि वही शोध बार-बार किया जाए, तो क्या परिणाम समान आएंगे\n
\nविस्तृत व्याख्या: विश्वसनीयता का संबंध स्थिरता (Consistency) से है। यदि एक ही विधि से अलग-अलग समय पर समान परिणाम मिलते हैं, तो वह शोध विश्वसनीय है।\n
संदर्भ: यह शोध पद्धति (Research Methodology) का बुनियादी सिद्धांत है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) ‘वैधता’ (Validity) की परिभाषा है।\n\n
- ‘डिजिटल डिवाइड’ (Digital Divide) का समाजशास्त्रीय निहितार्थ क्या है?\n
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- (A) इंटरनेट की गति में अंतर
- (B) सूचना प्रौद्योगिकी तक पहुंच के आधार पर समाज में पैदा होने वाली असमानता
- (C) केवल कंप्यूटर की कीमतों में अंतर
- (D) सोशल मीडिया का अधिक उपयोग
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\nउत्तर: (B) सूचना प्रौद्योगिकी तक पहुंच के आधार पर समाज में पैदा होने वाली असमानता\n
\nविस्तृत व्याख्या: यह केवल तकनीक की उपलब्धता नहीं, बल्कि इस बात का अध्ययन है कि कैसे डिजिटल पहुंच का अभाव कुछ वर्गों (गरीब, ग्रामीण, वृद्ध) को सामाजिक और आर्थिक अवसरों से वंचित करता है।\n
संदर्भ: यह समकालीन सामाजिक समस्याओं और असमानता का विषय है।\n
अन्य विकल्प: (A) और (C) तकनीकी पहलू हैं, समाजशास्त्रीय नहीं।\n\n
- ‘लुकिंग ग्लास सेल्फ’ (Looking Glass Self) का सिद्धांत किसने दिया था?\n
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- (A) जॉर्ज हर्बर्ट मीड
- (B) चार्ल्स कूले (Charles Cooley)
- (C) हरबर्ट स्पेंसर
- (D) टैलकॉट पार्सन्स
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\nउत्तर: (B) चार्ल्स कूले (Charles Cooley)\n
\nविस्तृत व्याख्या: कूले का मानना था कि हमारा ‘स्व’ (Self) इस बात से बनता है कि हम दूसरों की नजरों में खुद को कैसा देखते हैं या कल्पना करते हैं कि दूसरे हमें कैसे देख रहे हैं।\n
संदर्भ: यह सामाजिक मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण है।\n
अन्य विकल्प: मीड ने ‘I’ और ‘Me’ दिया, लेकिन ‘दर्पण प्रतिबिंब’ का विचार कूले का है।\n\n
- ग्रामीण समाजशास्त्र के संदर्भ में ‘पुश फैक्टर्स’ (Push Factors) से क्या तात्पर्य है?\n
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- (A) शहर की वे सुविधाएं जो लोगों को आकर्षित करती हैं
- (B) गांव की वे समस्याएं (जैसे गरीबी, बेरोजगारी) जो लोगों को पलायन के लिए मजबूर करती हैं
- (C) सरकार द्वारा लोगों को गांव में रोकने की योजनाएं
- (D) शहरों में बढ़ती भीड़भाड़
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\nउत्तर: (B) गांव की वे समस्याएं (जैसे गरीबी, बेरोजगारी) जो लोगों को पलायन के लिए मजबूर करती हैं\n
\nविस्तृत व्याख्या: ‘पुश फैक्टर्स’ वे नकारात्मक परिस्थितियां हैं जो व्यक्ति को उसके मूल स्थान छोड़ने के लिए ‘धकेलती’ हैं, जबकि ‘पुल फैक्टर्स’ (Pull Factors) वे आकर्षण हैं जो उसे नए स्थान की ओर खींचते हैं।\n
संदर्भ: यह प्रवास (Migration) के सिद्धांतों का हिस्सा है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) ‘पुल फैक्टर्स’ का उदाहरण है।\n\n
- ‘सांस्कृतिक सापेक्षवाद’ (Cultural Relativism) का अर्थ क्या है?\n
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- (A) अपनी संस्कृति को सर्वश्रेष्ठ मानना
- (B) किसी संस्कृति को उसी के संदर्भ और मूल्यों के आधार पर समझना, न कि दूसरी संस्कृति के पैमाने से
- (C) सभी संस्कृतियों को एक समान बना देना
- (D) बाहरी संस्कृति का पूर्ण विरोध करना
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\nउत्तर: (B) किसी संस्कृति को उसी के संदर्भ और मूल्यों के आधार पर समझना, न कि दूसरी संस्कृति के पैमाने से\n
\nविस्तृत व्याख्या: यह दृष्टिकोण मानता है कि कोई भी संस्कृति श्रेष्ठ या निम्न नहीं होती; प्रत्येक संस्कृति के अपने तर्क और मूल्य होते हैं जिन्हें उनके अपने परिवेश में समझा जाना चाहिए।\n
संदर्भ: यह नृविज्ञान और समाजशास्त्र में नैतिकता और वस्तुनिष्ठता के लिए आवश्यक है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) ‘नृजातीयता’ (Ethnocentrism) है।\n\n
- सिमेल (Georg Simmel) के अनुसार ‘अजनबी’ (The Stranger) कौन है?\n
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- (A) वह जो समाज में बिल्कुल नहीं घुलता-मिलता
- (B) वह जो समूह का हिस्सा तो है लेकिन मानसिक या सामाजिक रूप से पूरी तरह एकीकृत नहीं है
- (C) एक विदेशी जो अवैध रूप से रह रहा हो
- (D) वह जो किसी से बात नहीं करता
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\nउत्तर: (B) वह जो समूह का हिस्सा तो है लेकिन मानसिक या सामाजिक रूप से पूरी तरह एकीकृत नहीं है\n
\nविस्तृत व्याख्या: सिमेल के अनुसार, अजनबी वह है जो भौतिक रूप से तो करीब आता है लेकिन सामाजिक रूप से दूर रहता है। इस कारण वह अक्सर एक ‘तटस्थ’ निरीक्षक की भूमिका निभाता है।\n
संदर्भ: यह सिमेल के ‘फॉर्मल समाजशास्त्र’ का हिस्सा है।\n
अन्य विकल्प: (C) एक कानूनी परिभाषा है, समाजशास्त्रीय नहीं।\n\n
- ‘स्ट्रैटिफाइड सैंपलिंग’ (Stratified Sampling) का उपयोग कब किया जाता है?\n
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- (A) जब जनसंख्या बहुत छोटी हो
- (B) जब जनसंख्या के भीतर विभिन्न उप-समूह (जैसे लिंग, आय) हों और प्रत्येक का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना हो
- (C) जब शोधकर्ता अपनी मर्जी से नमूने चुनना चाहता हो
- (D) जब केवल एक ही वर्ग के लोगों का अध्ययन करना हो
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\nउत्तर: (B) जब जनसंख्या के भीतर विभिन्न उप-समूह (जैसे लिंग, आय) हों और प्रत्येक का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना हो\n
\nविस्तृत व्याख्या: इसमें पूरी जनसंख्या को स्तरों (Strata) में बांटा जाता है और फिर प्रत्येक स्तर से यादृच्छिक (Random) नमूने लिए जाते हैं ताकि परिणाम संतुलित हों।\n
संदर्भ: यह मात्रात्मक शोध की एक उन्नत तकनीक है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (C) ‘सुविधाजनक सैंपलिंग’ (Convenience Sampling) है।\n\n
- भारतीय समाज में ‘जाति’ और ‘वर्ग’ के बीच मुख्य अंतर क्या है?\n
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- (A) जाति अर्जित होती है, वर्ग जन्मजात होता है
- (B) जाति जन्म आधारित (Ascribed) है, जबकि वर्ग उपलब्धि आधारित (Achieved) है
- (C) दोनों में कोई अंतर नहीं है
- (D) वर्ग केवल ग्रामीण क्षेत्रों में पाया जाता है
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\nउत्तर: (B) जाति जन्म आधारित (Ascribed) है, जबकि वर्ग उपलब्धि आधारित (Achieved) है\n
\nविस्तृत व्याख्या: जाति एक बंद प्रणाली है जहाँ स्थिति जन्म से तय होती है, जबकि वर्ग एक खुली प्रणाली है जहाँ धन, शिक्षा और पेशे के आधार पर व्यक्ति अपनी स्थिति बदल सकता है।\n
संदर्भ: सामाजिक स्तरीकरण के सिद्धांतों में यह मौलिक अंतर है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) बिल्कुल उल्टा है।\n\n
- समकालीन ग्रामीण भारत में ‘युवा आजीविका’ (Youth Livelihood) के संकट का मुख्य समाजशास्त्रीय कारण क्या है?\n
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- (A) केवल शिक्षा का अभाव
- (B) कृषि का कम लाभदायक होना और गैर-कृषि रोजगार के अवसरों की कमी
- (C) ग्रामीण युवाओं की काम न करने की इच्छा
- (D) केवल तकनीकी ज्ञान की कमी
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\nउत्तर: (B) कृषि का कम लाभदायक होना और गैर-कृषि रोजगार के अवसरों की कमी\n
\nविस्तृत व्याख्या: ग्रामीण भारत में युवा अब पारंपरिक खेती से दूर जा रहे हैं क्योंकि यह आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रही, लेकिन गांवों में औद्योगिक या सेवा क्षेत्र के पर्याप्त विकल्प उपलब्ध नहीं हैं, जिससे ‘बेरोजगारी’ और ‘पलायन’ बढ़ता है।\n
संदर्भ: यह ग्रामीण समाजशास्त्र और समकालीन आर्थिक संकट का विषय है।\n
अन्य विकल्प: (A) और (D) केवल आंशिक कारण हैं, जबकि (B) संरचनात्मक कारण है।\n\n
- ‘सिस्टमिक बायस’ (Systemic Bias) या प्रणालीगत पूर्वाग्रह का क्या अर्थ है?\n
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- (A) किसी एक व्यक्ति द्वारा दूसरे के प्रति नफरत
- (B) वह पूर्वाग्रह जो किसी संस्थान या समाज की नीतियों और कार्यप्रणाली में गहराई से समाया हो (जैसे नस्लीय या जातिगत भेदभाव)
- (C) केवल व्यक्तिगत गलतफहमी
- (D) डेटा प्रविष्टि में होने वाली गलती
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\nउत्तर: (B) वह पूर्वाग्रह जो किसी संस्थान या समाज की नीतियों और कार्यप्रणाली में गहराई से समाया हो (जैसे नस्लीय या जातिगत भेदभाव)\n
\nविस्तृत व्याख्या: यह व्यक्तिगत भेदभाव से अलग है। इसमें संस्थागत नियम ऐसे होते हैं कि वे अनजाने में या जानबूझकर किसी विशेष समूह को नुकसान पहुँचाते हैं (जैसे ऋण देने में नस्लीय भेदभाव)।\n
संदर्भ: यह संघर्ष सिद्धांत (Conflict Theory) और आलोचनात्मक समाजशास्त्र का हिस्सा है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) और (C) व्यक्तिगत पूर्वाग्रह हैं।\n\n
- ‘धर्म और गर्भपात’ के निर्णयों के बीच संबंध का अध्ययन समाजशास्त्र के किस क्षेत्र के अंतर्गत आता है?\n
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- (A) केवल चिकित्सा समाजशास्त्र
- (B) धर्म का समाजशास्त्र और जेंडर अध्ययन (Sociology of Religion & Gender Studies)
- (C) केवल कानूनी समाजशास्त्र
- (D) ग्रामीण समाजशास्त्र
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\nउत्तर: (B) धर्म का समाजशास्त्र और जेंडर अध्ययन (Sociology of Religion & Gender Studies)\n
\nविस्तृत व्याख्या: जब हम यह देखते हैं कि धार्मिक विश्वास कैसे महिलाओं के शरीर, उनके स्वास्थ्य निर्णयों और प्रजनन अधिकारों को प्रभावित करते हैं, तो यह धर्म और जेंडर के अंतर्संबंधों का अध्ययन होता है।\n
संदर्भ: यह समकालीन सामाजिक मुद्दों और पहचान की राजनीति से संबंधित है।\n
अन्य विकल्प: हालांकि चिकित्सा और कानून का इसमें रोल है, लेकिन मुख्य समाजशास्त्रीय विश्लेषण धर्म और जेंडर के मूल्यों पर आधारित होता है।\n\n
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