समाजशास्त्र की गहन समझ: वैचारिक स्पष्टता और विश्लेषणात्मक कौशल के लिए दैनिक अभ्यास
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क्या आप समाजशास्त्रीय कल्पना (Sociological Imagination) को चुनौती देने के लिए तैयार हैं? आज का यह अभ्यास सेट न केवल शास्त्रीय सिद्धांतों की आपकी पकड़ को मजबूत करेगा, बल्कि आपको समकालीन डिजिटल बदलावों और सामाजिक जटिलताओं से भी रूबरू कराएगा। अपनी तैयारी को एक नए स्तर पर ले जाने और अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखने के लिए इस चुनौतीपूर्ण क्विज़ को हल करें!
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- ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Facts) की अवधारणा, जिन्हें व्यक्ति के बाहर और उनके ऊपर बाध्यकारी माना जाता है, किस समाजशास्त्री ने प्रतिपादित की थी?\n
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- (A) मैक्स वेबर
- (B) एमिल दुर्खीम
- (C) कार्ल मार्क्स
- (D) हरबर्ट स्पेंसर
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\n सही उत्तर: (B) एमिल दुर्खीम
\n विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘The Rules of Sociological Method’ में सामाजिक तथ्यों को परिभाषित किया। उनके अनुसार, सामाजिक तथ्य व्यवहार, सोचने के तरीके और भावनाओं के वे तरीके हैं जो व्यक्ति के बाहरी होते हैं और उस पर दबाव डालते हैं (जैसे कानून, रीति-रिवाज)। वेबर ने ‘सामाजिक क्रिया’ (Social Action) पर जोर दिया, जबकि मार्क्स ने ‘वर्ग संघर्ष’ पर।\n\n
- मैक्स वेबर के अनुसार, ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) क्या है?\n
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- (A) समाज का एक नैतिक मॉडल
- (B) एक पूर्ण समाज की कल्पना
- (C) विश्लेषण के लिए एक वैचारिक उपकरण (Conceptual Tool)
- (D) वास्तविक समाज का सटीक दर्पण
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\n सही उत्तर: (C) विश्लेषण के लिए एक वैचारिक उपकरण
\n विस्तृत व्याख्या: आदर्श प्रारूप कोई ‘आदर्श’ (Perfect) स्थिति नहीं है, बल्कि एक मानसिक निर्माण है जिसमें किसी सामाजिक घटना के विशिष्ट लक्षणों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है ताकि वास्तविक घटनाओं की तुलना की जा सके। यह वेबर की ‘Interpretive Sociology’ का हिस्सा है।\n\n
- कार्ल मार्क्स के ‘अलगाव’ (Alienation) के सिद्धांत में, आधुनिक श्रमिक सबसे अधिक किससे अलग हो जाता है?\n
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- (A) केवल अपने सहकर्मियों से
- (B) केवल अपनी मशीन से
- (C) उत्पाद, उत्पादन प्रक्रिया, स्वयं से और अन्य मनुष्यों से
- (D) केवल समाज के उच्च वर्ग से
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\n सही उत्तर: (C) उत्पाद, उत्पादन प्रक्रिया, स्वयं से और अन्य मनुष्यों से
\n विस्तृत व्याख्या: मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में श्रमिक का अपने काम के उत्पाद पर कोई नियंत्रण नहीं होता, जिससे वह उत्पाद, उत्पादन की प्रक्रिया, अपनी मानवीय प्रकृति (Species-being) और अन्य लोगों से पूरी तरह अलग हो जाता है।\n\n
- डिजिटल असमानता (Digital Inequality) के संदर्भ में, ‘डिजिटल डिवाइड’ का अर्थ केवल इंटरनेट तक पहुंच का अभाव नहीं है, बल्कि और क्या है?\n
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- (A) केवल कंप्यूटर की कमी
- (B) डिजिटल साक्षरता और सूचना के उपयोग की क्षमता में अंतर
- (C) केवल सोशल मीडिया का उपयोग न करना
- (D) हार्डवेयर की कीमत में वृद्धि
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\n सही उत्तर: (B) डिजिटल साक्षरता और सूचना के उपयोग की क्षमता में अंतर
\n विस्तृत व्याख्या: समकालीन समाजशास्त्र में डिजिटल डिवाइड को केवल ‘पहुंच’ (Access) तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसमें यह भी देखा जाता है कि व्यक्ति उस तकनीक का उपयोग अपने सामाजिक-आर्थिक लाभ के लिए कितनी कुशलता से कर पाता है।\n\n
- टैल्कोट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ का क्या अर्थ है?\n
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- (A) Legitimation (वैधता)
- (B) Latency (सुप्त अवस्था/तनाव प्रबंधन)
- (C) Linking (जुड़ाव)
- (D) Logical (तार्किक)
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\n सही उत्तर: (B) Latency (सुप्त अवस्था/तनाव प्रबंधन)
\n विस्तृत व्याख्या: पार्सन्स का AGIL मॉडल सामाजिक प्रणालियों की स्थिरता के लिए चार कार्यात्मक आवश्यकताओं को बताता है: Adaptation (अनुकूलन), Goal Attainment (लक्ष्य प्राप्ति), Integration (एकीकरण), और Latency (सुप्त अवस्था या पैटर्न रखरखाव)।\n\n
- रॉबर्ट के मर्टन ने ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अप्रत्यक्ष कार्य’ (Latent Function) के बीच क्या अंतर बताया है?\n
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- (A) एक सकारात्मक है और दूसरा नकारात्मक
- (B) एक इच्छित और ज्ञात है, जबकि दूसरा अनपेक्षित और अज्ञात
- (C) एक सूक्ष्म समाज के लिए है और दूसरा वृहद समाज के लिए
- (D) दोनों एक ही हैं, बस नाम अलग हैं
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\n सही उत्तर: (B) एक इच्छित और ज्ञात है, जबकि दूसरा अनपेक्षित और अज्ञात
\n विस्तृत व्याख्या: प्रकट कार्य वे परिणाम हैं जो जानबूझकर लाए जाते हैं (जैसे स्कूल का कार्य शिक्षा देना), जबकि अप्रत्यक्ष कार्य वे परिणाम हैं जो अनजाने में होते हैं (जैसे स्कूल में सामाजिक नेटवर्क बनाना)।\n\n
- एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
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- (A) उच्च जातियों का निम्न जातियों के साथ घुलना-मिलना
- (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाना
- (C) संस्कृत भाषा का अनिवार्य रूप से अध्ययन करना
- (D) जाति व्यवस्था का पूर्ण उन्मूलन
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\n सही उत्तर: (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाना
\n विस्तृत व्याख्या: यह एक सामाजिक गतिशीलता की प्रक्रिया है जहाँ निचली जातियाँ अपनी स्थिति सुधारने के लिए उच्च जातियों (विशेषकर द्विजों) के रीति-रिवाजों, विचारधारा और जीवनशैली को अपनाती हैं।\n\n
- ‘गिग इकोनॉमी’ (Gig Economy) में काम करने वाले श्रमिकों के संदर्भ में समाजशास्त्रीय चिंता क्या है?\n
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- (A) बहुत अधिक वेतन मिलना
- (B) कार्यस्थल पर अत्यधिक सुरक्षा
- (C) सामाजिक सुरक्षा का अभाव और अनिश्चित रोजगार (Precarity)
- (D) काम के घंटों की कमी
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\n सही उत्तर: (C) सामाजिक सुरक्षा का अभाव और अनिश्चित रोजगार
\n विस्तृत व्याख्या: गिग इकोनॉमी (जैसे उबेर, जोमैटो) में श्रमिक ‘स्वतंत्र ठेकेदार’ माने जाते हैं, जिससे कंपनियां उन्हें पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और न्यूनतम वेतन जैसे लाभ देने से बच जाती हैं, जिससे ‘प्रीकैरियट’ (Precariat) वर्ग का जन्म होता है।\n\n
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘स्व’ (Self) के दो घटक कौन से हैं?\n
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- (A) मन और आत्मा
- (B) ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me)
- (C) चेतना और अवचेतन
- (D) व्यक्ति और समाज
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\n सही उत्तर: (B) ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me)
\n विस्तृत व्याख्या: ‘Me’ समाज की अपेक्षाओं का आंतरिक रूप है (सामाजिक स्व), जबकि ‘I’ उस सामाजिक अपेक्षा के प्रति व्यक्ति की स्वतःस्फूर्त और रचनात्मक प्रतिक्रिया है।\n\n
- अनुसंधान पद्धति में ‘विश्वसनीयता’ (Reliability) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) डेटा का पूरी तरह से सत्य होना
- (B) समान परिस्थितियों में बार-बार वही परिणाम प्राप्त होना
- (C) शोधकर्ता का निष्पक्ष होना
- (D) नमूने का आकार बहुत बड़ा होना
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\n सही उत्तर: (B) समान परिस्थितियों में बार-बार वही परिणाम प्राप्त होना
\n विस्तृत व्याख्या: विश्वसनीयता का अर्थ है निरंतरता (Consistency)। यदि एक ही परीक्षण को बार-बार दोहराया जाए और परिणाम समान आएं, तो वह विश्वसनीय माना जाता है। ‘वैधता’ (Validity) का अर्थ है कि क्या हम वास्तव में वही माप रहे हैं जिसे मापने का दावा कर रहे हैं।\n\n
- ‘प्रभावी जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा किसने दी थी?\n
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- (A) जी.एस. घुर्ये
- (B) बी.आर. अंबेडकर
- (C) एम.एन. श्रीनिवास
- (D) लुई ड्यूमों
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\n सही उत्तर: (C) एम.एन. श्रीनिवास
\n विस्तृत व्याख्या: श्रीनिवास के अनुसार, एक जाति ‘प्रभावी’ तब होती है जब उसके पास संख्यात्मक बल, आर्थिक शक्ति (भूमि स्वामित्व) और राजनीतिक प्रभाव हो, भले ही वह जाति पदानुक्रम में सबसे ऊपर न हो।\n\n
- समाजशास्त्र में ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति क्या दर्शाती है?\n
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- (A) सामाजिक एकजुटता की अधिकता
- (B) सामाजिक मानदंडों का अभाव या भ्रम (Normlessness)
- (C) अत्यधिक धार्मिक विश्वास
- (D) वर्ग संघर्ष की समाप्ति
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\n सही उत्तर: (B) सामाजिक मानदंडों का अभाव या भ्रम
\n विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने ‘एनोमी’ शब्द का प्रयोग तब किया जब समाज में तेजी से बदलाव आते हैं और पुराने नियम काम नहीं करते जबकि नए नियम अभी बने नहीं होते, जिससे व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है।\n\n
- सिमेल (Georg Simmel) के अनुसार, महानगरीय जीवन (Metropolis) व्यक्ति के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव डालता है?\n
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- (A) व्यक्ति अधिक भावुक हो जाता है
- (B) व्यक्ति में ‘ब्लाज़’ (Blasé) दृष्टिकोण विकसित होता है (उदासीनता)
- (C) व्यक्ति पूरी तरह से समाज से कट जाता है
- (D) व्यक्ति बहुत अधिक सामाजिक हो जाता है
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\n सही उत्तर: (B) व्यक्ति में ‘ब्लाज़’ (Blasé) दृष्टिकोण विकसित होता है
\n विस्तृत व्याख्या: सिमेल ने तर्क दिया कि शहर की अत्यधिक उत्तेजनाओं (stimuli) से बचने के लिए शहरी लोग एक मानसिक ढाल विकसित करते हैं, जिससे वे दूसरों के प्रति उदासीन या तटस्थ (Blasé attitude) हो जाते हैं।\n\n
- पियरे बॉर्ड्यू (Pierre Bourdieu) की ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) की अवधारणा क्या बताती है?\n
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- (A) केवल बैंक में जमा पैसा
- (B) शिक्षा, भाषा और शिष्टाचार जैसे गैर-वित्तीय संसाधन जो सामाजिक लाभ दिलाते हैं
- (C) प्राचीन स्मारकों का संरक्षण
- (D) केवल धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान
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\n सही उत्तर: (B) शिक्षा, भाषा और शिष्टाचार जैसे गैर-वित्तीय संसाधन
\n विस्तृत व्याख्या: बॉर्ड्यू के अनुसार, उच्च वर्ग के लोग अपनी विशिष्ट भाषा, स्वाद और ज्ञान (सांस्कृतिक पूंजी) के माध्यम से अपनी सामाजिक स्थिति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाते हैं और असमानता को बनाए रखते हैं।\n\n
- लुई ड्यूमों (Louis Dumont) ने भारतीय जाति व्यवस्था के किस मुख्य सिद्धांत पर जोर दिया?\n
- \n (A) वर्ग संघर्ष
- (B) शुद्धता और अशुद्धता (Purity and Pollution)
- (C) केवल आर्थिक आधार
- (D) जनजातीय एकीकरण
- ‘सांस्कृतिक पिछड़ापन’ (Cultural Lag) की अवधारणा किसने विकसित की?\n
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- (A) ऑगस्ट कॉम्टे
- (B) डब्ल्यू.एफ. ओगबर्न
- (C) मैक्स वेबर
- (D) टैलकोट पार्सन्स
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\n सही उत्तर: (B) डब्ल्यू.एफ. ओगबर्न
\n विस्तृत व्याख्या: ओगबर्न के अनुसार, भौतिक संस्कृति (तकनीक) तेजी से बदलती है, लेकिन गैर-भौतिक संस्कृति (मान्यताएं, मूल्य) धीमी गति से बदलती है। इन दोनों के बीच के समय अंतराल को ही ‘सांस्कृतिक पिछड़ापन’ कहते हैं।\n\n
- दूरस्थ कार्य (Remote Work) के समाजशास्त्रीय प्रभाव के रूप में निम्न में से कौन सा सही है?\n
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- (A) कार्य और निजी जीवन के बीच की सीमाओं का धुंधला होना (Blurring of boundaries)
- (B) सामाजिक अलगाव का पूर्ण अंत
- (C) केवल उत्पादकता में गिरावट
- (D) पारिवारिक संघर्षों की पूर्ण समाप्ति
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\n सही उत्तर: (A) कार्य और निजी जीवन के बीच की सीमाओं का धुंधला होना
\n विस्तृत व्याख्या: रिमोट वर्क ने ‘घर’ और ‘ऑफिस’ के भौतिक और मानसिक अंतर को समाप्त कर दिया है, जिससे ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ की नई चुनौतियां पैदा हुई हैं और घरेलू श्रम के वितरण में बदलाव आया है।\n\n
- फेनोमेनोलॉजी (Phenomenology) या ‘घटनाशास्त्र’ के जनक किसे माना जाता है, जिन्होंने ‘लाइफ-वर्ल्ड’ (Life-world) की बात की?\n
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- (A) अल्फ्रेड शुट्ज़ (Alfred Schutz)
- (B) एमिल दुर्खीम
- (C) कार्ल मार्क्स
- (D) हर्बर्ट स्पेंसर
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\n सही उत्तर: (A) अल्फ्रेड शुट्ज़
\n विस्तृत व्याख्या: शुट्ज़ ने हुसर्ल के दर्शन को समाजशास्त्र में लागू किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य दुनिया को अपने अनुभवों और साझा अर्थों (Life-world) के आधार पर कैसे समझते हैं।\n\n
- डीविस और मूर (Davis & Moore) के कार्यात्मक सिद्धांत के अनुसार, सामाजिक स्तरीकरण क्यों आवश्यक है?\n
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- (A) ताकि गरीबों का शोषण किया जा सके
- (B) ताकि सबसे महत्वपूर्ण पदों पर सबसे योग्य व्यक्ति आ सकें
- (C) ताकि समाज में संघर्ष बना रहे
- (D) ताकि जाति व्यवस्था बनी रहे
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\n सही उत्तर: (B) ताकि सबसे महत्वपूर्ण पदों पर सबसे योग्य व्यक्ति आ सकें
\n विस्तृत व्याख्या: यह एक कार्यात्मकवादी (Functionalist) दृष्टिकोण है जो मानता है कि समाज पुरस्कारों (वेतन, सम्मान) के माध्यम से योग्य लोगों को कठिन और महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।\n\n
- मैक्स वेबर ने सत्ता (Authority) के किन तीन प्रकारों का वर्णन किया है?\n
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- (A) राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक
- (B) पारंपरिक, करिश्माई और कानूनी-तार्किक (Rational-legal)
- (C) सैन्य, धार्मिक, न्यायिक
- (D) लोकतांत्रिक, तानाशाही, कुलीनतंत्र
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\n सही उत्तर: (B) पारंपरिक, करिश्माई और कानूनी-तार्किक
\n विस्तृत व्याख्या: पारंपरिक सत्ता रीति-रिवाजों पर आधारित होती है, करिश्माई सत्ता नेता के असाधारण व्यक्तित्व पर, और कानूनी-तार्किक सत्ता लिखित नियमों और कानूनों पर आधारित होती है।\n\n
- समकालीन समाजशास्त्र में ‘जलवायु न्याय’ (Climate Justice) का मुख्य तर्क क्या है?\n
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- (A) केवल पेड़ों को लगाना
- (B) यह कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव गरीब और हाशिए के समुदायों पर अधिक पड़ता है, जबकि जिम्मेदारी अमीर देशों की है
- (C) केवल तकनीक के माध्यम से प्रदूषण कम करना
- (D) प्रकृति को मनुष्यों से पूरी तरह अलग करना
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\n सही उत्तर: (B) यह कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव गरीब समुदायों पर अधिक पड़ता है
\n विस्तृत व्याख्या: जलवायु न्याय एक सामाजिक-राजनीतिक दृष्टिकोण है जो मानता है कि पर्यावरणीय संकट केवल वैज्ञानिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक मानवाधिकार और सामाजिक असमानता का मुद्दा है।\n\n
- जी.एस. घुर्ये (G.S. Ghurye) ने जनजातियों को किस रूप में देखा?\n
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- (A) पूरी तरह से अलग और विदेशी प्रजाति के रूप में
- (B) ‘पिछड़े हिंदू’ (Backward Hindus) के रूप में
- (C) आधुनिक शहरी नागरिकों के रूप में
- (D) केवल घुमंतू लोगों के रूप में
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\n सही उत्तर: (B) ‘पिछड़े हिंदू’ (Backward Hindus) के रूप में
\n विस्तृत व्याख्या: घुर्ये का मानना था कि जनजातियाँ हिंदू समाज का ही हिस्सा रही हैं और समय के साथ वे हिंदू संस्कृति में एकीकृत (assimilate) हो गई हैं। यह दृष्टिकोण वेरियर एल्विन के ‘अलगाव’ (Isolation) के विचार के विपरीत था।\n\n
- ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) का मुख्य केंद्र क्या है?\n
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- (A) बड़े सामाजिक ढांचे (Macro structures)
- (B) सूक्ष्म स्तर पर प्रतीकों और अर्थों के माध्यम से होने वाली बातचीत
- (C) आर्थिक उत्पादन के साधन
- (D) जैविक विकास की प्रक्रिया
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\n सही उत्तर: (B) सूक्ष्म स्तर पर प्रतीकों और अर्थों के माध्यम से होने वाली बातचीत
\n विस्तृत व्याख्या: यह सिद्धांत (मीड, ब्लूमर) मानता है कि समाज व्यक्तियों के बीच होने वाली निरंतर अंतःक्रियाओं और उन प्रतीकों (भाषा, संकेत) के अर्थों से बनता है जिन्हें वे साझा करते हैं।\n\n
- दुर्खीम के अनुसार, ‘यांत्रिक एकजुटता’ (Mechanical Solidarity) किस प्रकार के समाज में पाई जाती है?\n
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- (A) अत्यधिक आधुनिक और औद्योगिक समाज में
- (B) सरल, पारंपरिक और समरूप (Homogeneous) समाज में
- (C) केवल शहरी समाज में
- (D) जहाँ श्रम विभाजन बहुत अधिक हो
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\n सही उत्तर: (B) सरल, पारंपरिक और समरूप समाज में
\n विस्तृत व्याख्या: यांत्रिक एकजुटता वहां होती है जहां लोग एक जैसे काम करते हैं और उनके मूल्य समान होते हैं। आधुनिक समाजों में ‘सावयवी एकजुटता’ (Organic Solidarity) होती है, जो परस्पर निर्भरता (Interdependence) पर आधारित होती है।\n\n
- ऑनलाइन समुदायों (Online Communities) के संदर्भ में ‘सामूहिक पहचान’ (Collective Identity) का निर्माण कैसे होता है?\n
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- (A) केवल शारीरिक उपस्थिति से
- (B) साझा हितों, डिजिटल प्रतीकों और आभासी अंतःक्रियाओं के माध्यम से
- (C) केवल सरकारी नियमों द्वारा
- (D) भौगोलिक सीमाओं के आधार पर
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\n सही उत्तर: (B) साझा हितों, डिजिटल प्रतीकों और आभासी अंतःक्रियाओं के माध्यम से
\n विस्तृत व्याख्या: समकालीन समाजशास्त्र यह देख रहा है कि कैसे लोग भौतिक सीमाओं से परे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर समान विचारधारा या पहचान (जैसे LGBTQ+ या गेमिंग कम्युनिटीज) के आधार पर नए सामाजिक समूह बना रहे हैं।\n\n
- ‘एथ्नोग्राफी’ (Ethnography) अनुसंधान विधि की मुख्य विशेषता क्या है?\n
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- (A) केवल सांख्यिकीय डेटा का विश्लेषण करना
- (B) गहन अवलोकन और सहभागी अवलोकन (Participant Observation) के माध्यम से संस्कृति का अध्ययन
- (C) केवल पुस्तकालय के दस्तावेजों का अध्ययन
- (D) छोटे प्रश्नावली सर्वेक्षण करना
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\n सही उत्तर: (B) गहन अवलोकन और सहभागी अवलोकन के माध्यम से संस्कृति का अध्ययन
\n विस्तृत व्याख्या: एथ्नोग्राफी में शोधकर्ता उस समूह के बीच रहकर, उनके जीवन का हिस्सा बनकर डेटा एकत्र करता है, ताकि वह ‘इंसाइडर’ (Emic) नजरिए से सामाजिक वास्तविकता को समझ सके।\n\n
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\n सही उत्तर: (B) शुद्धता और अशुद्धता (Purity and Pollution)
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टिप: इन प्रश्नों का अभ्यास करते समय केवल सही उत्तर न देखें, बल्कि व्याख्या में दिए गए सिद्धांतों को अपनी नोटबुक में संक्षेप में लिखें। यह आपकी रिविजन प्रक्रिया को तेज करेगा!
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