नमस्ते भविष्य के समाजशास्त्रियों!
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क्या आप अपनी वैचारिक गहराई को चुनौती देने के लिए तैयार हैं? समाजशास्त्र केवल सिद्धांतों को पढ़ने का नाम नहीं है, बल्कि समाज की जटिलताओं को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से समझने की कला है। आज का यह अभ्यास सेट आपको शास्त्रीय सिद्धांतों से लेकर समकालीन वैश्विक मुद्दों तक ले जाएगा। अपनी कलम उठाएं, अपना ध्यान केंद्रित करें और देखें कि आप समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य में कितने निपुण हैं!
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- पर्यावरणीय समाजशास्त्र के संदर्भ में, ‘सामाजिक असमानता और जलवायु परिवर्तन’ के बीच संबंध का क्या अर्थ है?\n
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- (A) जलवायु परिवर्तन सभी सामाजिक वर्गों को समान रूप से प्रभावित करता है।
- (B) हाशिए पर रहने वाले समुदाय पर्यावरणीय संकटों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और उनके पास संसाधनों की कमी होती है।
- (C) केवल विकसित देशों को ही जलवायु परिवर्तन का सामना करना पड़ता है।
- (D) सामाजिक वर्ग का पर्यावरणीय प्रभाव से कोई संबंध नहीं है।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: पर्यावरणीय समाजशास्त्र यह मानता है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तटस्थ नहीं होता। गरीब, अल्पसंख्यक और हाशिए के समुदाय अक्सर ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जो प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, और उनके पास इनसे उबरने के लिए आर्थिक या राजनीतिक संसाधनों की कमी होती है। इसे ‘पर्यावरणीय अन्याय’ (Environmental Injustice) कहा जाता है। विकल्प (A) गलत है क्योंकि प्रभाव असमान होते हैं।\n
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- हालिया अध्ययनों के अनुसार, महामारी के बाद ‘रिमोट वर्क’ (घर से काम) ने घरेलू श्रम विभाजन को कैसे प्रभावित किया है?\n
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- (A) इसने घरेलू कार्यों में पूर्ण लैंगिक समानता स्थापित कर दी है।
- (B) पुरुषों ने महिलाओं की तुलना में अधिक अवैतनिक घरेलू कार्य करना शुरू कर दिया है।
- (C) महिलाओं पर अभी भी पुरुषों की तुलना में अवैतनिक घरेलू कार्यों का अधिक बोझ बना हुआ है।
- (D) रिमोट वर्क ने घरेलू श्रम की आवश्यकता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
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सही उत्तर: (C)
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\n विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्रीय विश्लेषण दिखाते हैं कि भले ही कार्यस्थल बदल गया हो, लेकिन पारंपरिक लैंगिक भूमिकाएं (Gender Roles) अभी भी प्रभावी हैं। रिमोट वर्क के बावजूद, महिलाओं पर घरेलू जिम्मेदारियों का बोझ अधिक रहता है, जिसे ‘सेकंड शिफ्ट’ (Second Shift) कहा जाता है। यह दर्शाता है कि संरचनात्मक परिवर्तन हमेशा सांस्कृतिक मानदंडों को तुरंत नहीं बदलते।\n
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- सत्तावादी शासनों में बढ़ती ‘डिजिटल निगरानी’ (Digital Surveillance) सामूहिक कार्रवाई (Collective Action) के सिद्धांतों को कैसे प्रभावित कर रही है?\n
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- (A) यह सामाजिक आंदोलनों को पूरी तरह समाप्त कर देती है।
- (B) यह नागरिक सहभागिता के नए और गुप्त तरीकों के उद्भव को प्रेरित करती है।
- (C) डिजिटल निगरानी से समाज में विश्वास बढ़ता है।
- (D) यह केवल व्यक्तिगत गोपनीयता को प्रभावित करती है, सामाजिक आंदोलनों को नहीं।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: जब राज्य डिजिटल उपकरणों के माध्यम से निगरानी बढ़ाता है, तो सामाजिक आंदोलन और नागरिक समूह अपनी रणनीतियों को बदलते हैं। वे एन्क्रिप्टेड संचार और नए संगठनात्मक ढांचे अपनाते हैं। यह सामूहिक कार्रवाई के पारंपरिक सिद्धांतों को चुनौती देता है और ‘डिजिटल प्रतिरोध’ की नई समझ विकसित करता है।\n
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- संघर्ष-पश्चात समाजों (Post-conflict Societies) में ‘सामाजिक पूंजी’ (Social Capital) का क्या महत्व है?\n
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- (A) यह केवल आर्थिक सहायता प्राप्त करने का एक साधन है।
- (B) सामुदायिक विश्वास और नेटवर्क घनत्व आर्थिक लचीलेपन और पुनर्निर्माण की भविष्यवाणी करते हैं।
- (C) सामाजिक पूंजी केवल शहरी क्षेत्रों में प्रभावी होती है।
- (D) यह संघर्ष को बढ़ाने का कार्य करती है।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट पुटनाम और पियरे बोर्दियू जैसे विचारकों के अनुसार, सामाजिक पूंजी (विश्वास, साझा मूल्य और नेटवर्क) समाज के भीतर सहयोग को बढ़ावा देती है। संघर्ष के बाद के समाजों (जैसे सूडान या म्यांमार) में, यदि लोगों के बीच विश्वास है, तो आर्थिक पुनर्निर्माण तेजी से और अधिक प्रभावी ढंग से होता है।\n
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- ‘पब्लिक सोशियोलॉजी’ (Public Sociology) का मुख्य उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) केवल अकादमिक पत्रिकाओं के लिए शोध करना।
- (B) समाजशास्त्रीय शोध को आम जनता के लिए सुलभ बनाना और सामाजिक परिवर्तन के लिए उपयोग करना।
- (C) समाजशास्त्र को केवल सरकारी नीति तक सीमित रखना।
- (D) केवल सैद्धांतिक चर्चाओं में संलग्न होना।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: माइकल बुरावोय (Michael Burawoy) द्वारा लोकप्रिय बनाया गया ‘पब्लिक सोशियोलॉजी’ का विचार यह है कि समाजशास्त्रियों को अपनी विशेषज्ञता का उपयोग सार्वजनिक विमर्श में करना चाहिए ताकि सामाजिक असमानताओं को दूर किया जा सके और समुदायों को सशक्त बनाया जा सके।\n
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- कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘अलगाव’ (Alienation) की स्थिति मुख्य रूप से किसके कारण उत्पन्न होती है?\n
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- (A) धार्मिक विश्वासों के कारण।
- (B) पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली और उत्पादन के साधनों से अलगाव के कारण।
- (C) शिक्षा की कमी के कारण।
- (D) पारिवारिक विवादों के कारण।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: मार्क्स का मानना था कि पूंजीवाद में श्रमिक अपने उत्पाद, उत्पादन की प्रक्रिया, अपनी प्रजाति (Species-being) और अन्य मनुष्यों से अलग हो जाता है। यह अलगाव श्रमिक की मानवीय गरिमा को समाप्त कर देता है।\n
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- मैक्स वेबर की ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) की अवधारणा क्या है?\n
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- (A) एक नैतिक रूप से श्रेष्ठ समाज का मॉडल।
- (B) एक विश्लेषणात्मक उपकरण जो वास्तविकता के मुख्य लक्षणों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है ताकि तुलना की जा सके।
- (C) एक ऐसा समाज जहाँ कोई संघर्ष न हो।
- (D) केवल सांख्यिकीय डेटा का एक समूह।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: ‘आदर्श प्रारूप’ वास्तविकता का सटीक चित्रण नहीं है, बल्कि एक मानसिक निर्माण है जिसका उपयोग समाजशास्त्री जटिल सामाजिक घटनाओं (जैसे नौकरशाही या करिश्माई नेतृत्व) को समझने और वर्गीकृत करने के लिए एक मानक के रूप में करते हैं।\n
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- एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘यांत्रिक एकजुटता’ (Mechanical Solidarity) की विशेषता क्या है?\n
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- (A) श्रम विभाजन की उच्च डिग्री।
- (B) व्यक्तियों के बीच उच्च समानता और साझा सामूहिक चेतना।
- (C) परस्पर निर्भरता पर आधारित समाज।
- (D) जटिल कानूनी प्रणालियों की उपस्थिति।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: यांत्रिक एकजुटता आदिम या सरल समाजों में पाई जाती है जहाँ लोग समान कार्य करते हैं, समान विचार रखते हैं और उनमें ‘सामूहिक चेतना’ (Collective Conscience) बहुत मजबूत होती है। जैविक एकजुटता (Organic Solidarity) इसके विपरीत आधुनिक, श्रम-विभाजित समाजों की विशेषता है।\n
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- टैलकॉट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ (Latency) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment)
- (B) अनुकूलन (Adaptation)
- (C) स्वरूप अनुरक्षण / तनाव प्रबंधन (Pattern Maintenance)
- (D) एकीकरण (Integration)
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सही उत्तर: (C)
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\n विस्तृत व्याख्या: पार्सन्स के अनुसार, किसी भी सामाजिक प्रणाली को जीवित रहने के लिए चार कार्य करने होते हैं: Adaptation (अर्थव्यवस्था), Goal Attainment (राजनीति), Integration (कानून/धर्म), और Latency (परिवार/शिक्षा), जो सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखता है और तनाव को कम करता है।\n
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- रॉबर्ट के. मर्टन के ‘प्रकट’ (Manifest) और ‘अंतर्निहित’ (Latent) कार्यों के बीच मुख्य अंतर क्या है?\n
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- (A) प्रकट कार्य नकारात्मक होते हैं और अंतर्निहित कार्य सकारात्मक।
- (B) प्रकट कार्य इच्छित और ज्ञात होते हैं, जबकि अंतर्निहित कार्य अनपेक्षित और अज्ञात होते हैं।
- (C) दोनों एक ही होते हैं, बस नाम अलग हैं।
- (D) प्रकट कार्य केवल धर्म से संबंधित होते हैं।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: मर्टन ने स्पष्ट किया कि किसी भी सामाजिक क्रिया के दो परिणाम हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, स्कूल का प्रकट कार्य शिक्षा देना है, लेकिन उसका अंतर्निहित कार्य बच्चों का सामाजिककरण करना या उन्हें भविष्य के कार्यबल के लिए अनुशासित करना हो सकता है।\n
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- जॉर्ज हरबर्ट मीड के अनुसार, ‘स्व’ (Self) का विकास कैसे होता है?\n
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- (A) जन्मजात जैविक प्रवृत्तियों के माध्यम से।
- (B) केवल आनुवंशिकता के माध्यम से।
- (C) सामाजिक अंतःक्रिया और प्रतीकों के उपयोग के माध्यम से।
- (D) अकेले चिंतन करने से।
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सही उत्तर: (C)
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\n विस्तृत व्याख्या: मीड के प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) के अनुसार, व्यक्ति दूसरों की प्रतिक्रियाओं को आत्मसात करके और खुद को दूसरों की नजर से देखकर ‘स्व’ का निर्माण करता है। इसमें ‘I’ (प्रतिक्रियाशील स्व) और ‘Me’ (सामाजिक स्व) की भूमिका होती है।\n
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- ‘अनुदैर्ध्य अध्ययन’ (Longitudinal Study) की मुख्य विशेषता क्या है?\n
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- (A) एक ही समय में कई लोगों का अध्ययन करना।
- (B) एक ही नमूने या समूह का समय के अलग-अलग अंतरालों पर बार-बार अध्ययन करना।
- (C) केवल पुस्तकालय के रिकॉर्ड का उपयोग करना।
- (D) बिना किसी परिकल्पना के डेटा एकत्र करना।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: अनुदैर्ध्य अध्ययन समय के साथ होने वाले परिवर्तनों को ट्रैक करने के लिए उपयोग किए जाते हैं (जैसे महामारी के दौरान रिमोट वर्क के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन)। यह ‘क्रॉस-सेक्शनल’ अध्ययन के विपरीत है जो एक ही समय बिंदु पर डेटा लेता है।\n
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- नृवंशविज्ञान (Ethnography) अनुसंधान विधि का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण करना।
- (B) सांख्यिकीय सहसंबंध खोजना।
- (C) किसी संस्कृति या सामाजिक समूह के जीवन का गहन और सहभागी अवलोकन करना।
- (D) प्रयोगशाला में प्रयोग करना।
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सही उत्तर: (C)
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\n विस्तृत व्याख्या: नृवंशविज्ञान में शोधकर्ता समूह के साथ समय बिताता है (Participant Observation) ताकि वह उनके जीवन के अनुभवों को उनके अपने दृष्टिकोण से समझ सके। यह गुणात्मक अनुसंधान (Qualitative Research) का एक प्रमुख हिस्सा है।\n
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- एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
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- (A) निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवन शैली को अपनाना।
- (B) संस्कृत भाषा का अनिवार्य रूप से अध्ययन करना।
- (C) उच्च जातियों का निम्न जातियों के साथ घुलना-मिलना।
- (D) केवल धार्मिक ग्रंथों का अनुवाद करना।
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सही उत्तर: (A)
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\n विस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसमें कोई निम्न हिंदू जाति या जनजाति उच्च जाति (विशेषकर द्विज) के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों और विचारधारा को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करती है।\n
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- श्रीनिवास के अनुसार, ‘प्रभावी जाति’ (Dominant Caste) होने के लिए क्या आवश्यक है?\n
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- (A) केवल उच्चतम अनुष्ठानिक स्थिति।
- (B) संख्यात्मक शक्ति, आर्थिक संसाधन (भूमि स्वामित्व) और राजनीतिक प्रभाव का संयोजन।
- (C) केवल विदेशी शिक्षा प्राप्त करना।
- (D) शहर में निवास करना।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: प्रभावी जाति वह होती है जिसके पास उस क्षेत्र में पर्याप्त भूमि हो, जिसकी जनसंख्या अधिक हो और जिसका राजनीतिक प्रभाव हो, चाहे उसकी अनुष्ठानिक स्थिति (Ritual Status) सबसे ऊंची न भी हो।\n
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- जी.एस. घुर्ये और वेरिअर एल्विन के बीच आदिवासियों (Tribals) के मुद्दे पर मुख्य वैचारिक मतभेद क्या था?\n
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- (A) घुर्ये उन्हें अलग रखना चाहते थे, जबकि एल्विन उन्हें मुख्यधारा में मिलाना चाहते थे।
- (B) घुर्ये उन्हें ‘पिछड़े हिंदू’ मानते थे, जबकि एल्विन उनकी विशिष्ट संस्कृति के संरक्षण और अलगाव (Isolation) के समर्थक थे।
- (C) दोनों का विचार एक ही था।
- (D) घुर्ये केवल शहरी आदिवासियों के अध्ययन के समर्थक थे।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: घुर्ये ने तर्क दिया कि आदिवासी हिंदू समाज का ही एक हिस्सा हैं (Assimilation), जबकि एल्विन का मानना था कि बाहरी हस्तक्षेप उनकी संस्कृति को नष्ट कर देगा, इसलिए उन्हें सुरक्षित क्षेत्रों में अलग रखा जाना चाहिए (Isolation)।\n
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- ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) से क्या तात्पर्य है?\n
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- (A) इंटरनेट का उपयोग करने वाली जातियों का एक समूह।
- (B) तकनीक और डिजिटल संसाधनों तक पहुंच में जाति-आधारित असमानताओं का बने रहना या नए रूप में प्रकट होना।
- (C) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर केवल उच्च जातियों का प्रभुत्व होना।
- (D) जाति व्यवस्था का डिजिटल माध्यम से पूरी तरह समाप्त हो जाना।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: यह अवधारणा बताती है कि तकनीक निष्पक्ष नहीं होती। जिनके पास सामाजिक और सांस्कृतिक पूंजी (जाति के कारण) अधिक है, वे डिजिटल अवसरों का बेहतर लाभ उठाते हैं, जिससे पुरानी असमानताएं डिजिटल दुनिया में भी जारी रहती हैं।\n
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- डेविस और मूर (Davis & Moore) के ‘कार्यात्मक सिद्धांत’ (Functionalist Theory) के अनुसार, सामाजिक स्तरीकरण क्यों आवश्यक है?\n
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- (A) लोगों को नियंत्रित करने के लिए।
- (B) यह सुनिश्चित करने के लिए कि सबसे महत्वपूर्ण पदों पर सबसे योग्य व्यक्ति नियुक्त हों।
- (C) गरीब लोगों को दबाने के लिए।
- (D) समाज में संघर्ष पैदा करने के लिए।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: कार्यात्मकवादियों का तर्क है कि कुछ कार्य दूसरों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होते हैं और उनके लिए विशेष कौशल की आवश्यकता होती है। इन पदों को भरने के लिए उच्च पुरस्कार (धन, प्रतिष्ठा) देना आवश्यक है ताकि योग्य लोग कठिन प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित हों।\n
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- मार्क्स ने अलगाव के चार प्रकार बताए हैं, उनमें से ‘प्रजाति-होने से अलगाव’ (Alienation from Species-being) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) अपनी जाति से अलग होना।
- (B) मनुष्य की रचनात्मक क्षमता और स्वतंत्र इच्छा का हनन होना।
- (C) अन्य श्रमिकों के साथ प्रतिस्पर्धा करना।
- (D) उत्पाद के स्वामित्व से दूर होना।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: मार्क्स के अनुसार, मनुष्य स्वभाव से रचनात्मक है। जब पूंजीवाद उसे केवल एक मशीन का पुर्जा बना देता है, तो वह अपनी मानवीय प्रकृति (रचनात्मकता और चेतना) से कट जाता है।\n
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- दुर्खीम के अनुसार ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति कब उत्पन्न होती है?\n
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- (A) जब समाज में बहुत अधिक नियम होते हैं।
- (B) जब तीव्र सामाजिक परिवर्तन के कारण पुराने मानदंड टूट जाते हैं और नए मानदंड स्थापित नहीं हो पाते।
- (C) जब व्यक्ति बहुत अमीर हो जाता है।
- (D) जब लोग धर्म का त्याग कर देते हैं।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: एनोमी का अर्थ है ‘मानकहीनता’। जब समाज में अस्थिरता आती है (जैसे आर्थिक मंदी या अचानक समृद्धि), तो व्यक्ति की इच्छाओं को नियंत्रित करने वाले सामाजिक नियम कमजोर हो जाते हैं, जिससे भ्रम और निराशा पैदा होती है।\n
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- ‘विस्तारित परिवार’ (Extended Family) और ‘नाभिकीय परिवार’ (Nuclear Family) के बीच मुख्य अंतर क्या है?\n
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- (A) विस्तारित परिवार केवल शहरों में पाए जाते हैं।
- (B) नाभिकीय परिवार में केवल माता-पिता और उनके अविवाहित बच्चे होते हैं, जबकि विस्तारित परिवार में कई पीढ़ियां एक साथ रहती हैं।
- (C) विस्तारित परिवार में कोई संबंध नहीं होते।
- (D) नाभिकीय परिवार अधिक स्थिर होते हैं।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: नाभिकीय परिवार आधुनिक औद्योगिक समाजों की विशेषता है जहाँ गतिशीलता (Mobility) आवश्यक है। विस्तारित परिवार पारंपरिक ग्रामीण समाजों में अधिक मिलते हैं जहाँ कृषि और संयुक्त स्वामित्व मुख्य होते हैं।\n
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- शहरी समाजशास्त्र के संदर्भ में ‘शिकागो स्कूल’ (Chicago School) का मुख्य योगदान क्या था?\n
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- (A) केवल शहरी गरीबी का अध्ययन करना।
- (B) शहर को एक ‘पारिस्थितिक तंत्र’ (Ecosystem) के रूप में देखना और स्थानिक वितरण (Spatial Distribution) का अध्ययन करना।
- (C) ग्रामीण जीवन की प्रशंसा करना।
- (D) शहरीकरण को पूरी तरह रोकना।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: शिकागो स्कूल के विद्वानों (जैसे रॉबर्ट पार्क) ने ‘मानव पारिस्थितिकी’ (Human Ecology) का सिद्धांत दिया। उन्होंने बताया कि कैसे शहर विभिन्न क्षेत्रों (Zones) में विभाजित होते हैं और कैसे विभिन्न समूह वहां प्रतिस्पर्धा और अनुकूलन करते हैं।\n
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- ग्रामीण समाजशास्त्र में ‘कृषि संरचना’ (Agrarian Structure) का अध्ययन मुख्य रूप से किस पर केंद्रित होता है?\n
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- (A) केवल फसलों की किस्मों पर।
- (B) भूमि स्वामित्व के पैटर्न और ग्रामीण शक्ति संबंधों पर।
- (C) शहरी बाजारों के विस्तार पर।
- (D) केवल सिंचाई प्रणालियों पर।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: कृषि संरचना केवल खेती के बारे में नहीं है, बल्कि यह इस बारे में है कि भूमि किसके पास है (जैसे जमींदार बनाम बटाईदार) और यह स्वामित्व ग्रामीण समाज में राजनीतिक और सामाजिक शक्ति को कैसे निर्धारित करता है।\n
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- दुर्खीम के अनुसार, धर्म का मूल तत्व क्या है?\n
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- (A) ईश्वर में विश्वास।
- (B) ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र/लौकिक’ (Profane) के बीच का अंतर।
- (C) केवल व्यक्तिगत प्रार्थना।
- (D) मृत्यु के बाद जीवन का डर।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम के लिए, धर्म ईश्वर के बारे में नहीं, बल्कि पवित्र वस्तुओं के इर्द-गिर्द समुदाय के एकत्र होने के बारे में है। पवित्र वे चीजें हैं जिन्हें समाज अलग रखता है और सम्मान देता है, जबकि लौकिक चीजें रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा होती हैं।\n
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- शिक्षा के समाजशास्त्र में ‘हिडन करिकुलम’ (Hidden Curriculum) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) वह पाठ्यक्रम जो आधिकारिक तौर पर पढ़ाया जाता है।
- (B) वे अनकहे नियम, मूल्य और व्यवहार जो छात्र स्कूल के माहौल से अनजाने में सीखते हैं।
- (C) गुप्त रूप से पढ़ाए जाने वाले प्रतिबंधित विषय।
- (D) केवल खेल-कूद की गतिविधियां।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: हिडन करिकुलम में वे चीजें शामिल हैं जैसे समय की पाबंदी, सत्ता के प्रति आज्ञाकारिता और सामाजिक पदानुक्रम को स्वीकार करना। यह औपचारिक शिक्षा से अधिक प्रभावशाली हो सकता है क्योंकि यह छात्र के व्यक्तित्व और सामाजिक पहचान को आकार देता है।\n
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अभ्यास टिप: यदि आपने 20 से अधिक प्रश्नों के सही उत्तर दिए हैं, तो आपकी वैचारिक पकड़ उत्कृष्ट है। यदि आपके उत्तर 15 से कम हैं, तो आपको बुनियादी सिद्धांतों और हालिया सामाजिक बदलावों पर फिर से ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। पढ़ते रहें, विश्लेषण करते रहें!
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