समाजशास्त्र: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें – दैनिक अभ्यास सेट
प्रिय उम्मीदवारों, क्या आप प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं (UGC-NET, UPSC, State PSCs) में समाजशास्त्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए तैयार हैं? “The Sociology Scholar” द्वारा प्रस्तुत यह दैनिक अभ्यास सेट आपकी वैचारिक समझ और विश्लेषणात्मक कौशल को चुनौती देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यहाँ दिए गए प्रश्न समाजशास्त्र के मूलभूत सिद्धांतों से लेकर समकालीन सामाजिक मुद्दों तक फैले हुए हैं, जो आपको अपनी तैयारी का गहन मूल्यांकन करने में मदद करेंगे।
प्रत्येक प्रश्न को ध्यानपूर्वक हल करें और अपनी समझ को मजबूत करने के लिए विस्तृत व्याख्याओं का उपयोग करें। यह अभ्यास आपको समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण को विकसित करने और परीक्षा में सफलता प्राप्त करने में सहायक होगा।
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किस समाजशास्त्री ने ‘सामाजिक तथ्यों’ (Social Facts) की अवधारणा का प्रतिपादन किया, जिनका अध्ययन स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है?
- (A) कार्ल मार्क्स
- (B) मैक्स वेबर
- (C) एमिल दुर्खीम
- (D) हर्बर्ट स्पेंसर
सही उत्तर: (C) एमिल दुर्खीम
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने ‘सामाजिक तथ्यों’ की अवधारणा को अपनी पुस्तक ‘द रूल्स ऑफ सोशियोलॉजिकल मेथड’ में प्रतिपादित किया। उनके अनुसार, सामाजिक तथ्य व्यवहार, विचार और भावना के तरीके हैं जो व्यक्ति पर बाहरी दबाव डालते हैं और एक सामूहिक चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं। दुर्खीम ने समाजशास्त्र को सामाजिक तथ्यों का अध्ययन करने वाला विज्ञान माना, जैसे कानून, नैतिकता, विश्वास और प्रथाएँ। कार्ल मार्क्स ने वर्ग संघर्ष पर ध्यान केंद्रित किया, मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया और नौकरशाही पर, और हर्बर्ट स्पेंसर ने सामाजिक डार्विनवाद पर।
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‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा, जहाँ श्रमिक अपने श्रम के उत्पाद और स्वयं से कट जाता है, किस विचारक से संबंधित है?
- (A) जॉर्ज सिमेल
- (B) कार्ल मार्क्स
- (C) जॉर्ज हर्बर्ट मीड
- (D) टैल्कॉट पार्सन्स
सही उत्तर: (B) कार्ल मार्क्स
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने अपनी प्रारंभिक रचनाओं में ‘अलगाव’ (या वि-परकीकरण) की अवधारणा को पूंजीवादी व्यवस्था के तहत श्रमिकों की स्थिति का वर्णन करने के लिए विकसित किया। उनके अनुसार, पूंजीवाद में श्रमिक चार तरह से अलगाव महसूस करते हैं: अपने श्रम के उत्पाद से, अपनी उत्पादन प्रक्रिया से, अपनी प्रजाति-सत्ता (species-being) से, और अन्य मनुष्यों से। जॉर्ज सिमेल ने महानगरों में सामाजिक संबंधों का अध्ययन किया, जॉर्ज हर्बर्ट मीड ने आत्म (self) के विकास पर ध्यान केंद्रित किया, और टैल्कॉट पार्सन्स ने सामाजिक व्यवस्था और क्रिया का सिद्धांत दिया।
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मैक्स वेबर के अनुसार, तर्कसंगत-कानूनी प्राधिकार (Rational-Legal Authority) का सबसे शुद्ध प्रकार क्या है?
- (A) पितृसत्ता
- (B) करिश्माई नेतृत्व
- (C) नौकरशाही
- (D) पारंपरिक नेतृत्व
सही उत्तर: (C) नौकरशाही
विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने प्राधिकार के तीन शुद्ध प्रकारों की पहचान की: पारंपरिक, करिश्माई और तर्कसंगत-कानूनी। उनके अनुसार, नौकरशाही तर्कसंगत-कानूनी प्राधिकार का सबसे शुद्ध और कुशल रूप है, जो नियमों और प्रक्रियाओं पर आधारित होता है न कि व्यक्तिगत संबंधों या चमत्कारी गुणों पर। पितृसत्ता और पारंपरिक नेतृत्व पारंपरिक प्राधिकार के उदाहरण हैं, जबकि करिश्माई नेतृत्व असाधारण व्यक्तिगत गुणों पर आधारित होता है।
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‘प्रतिमानहीनता’ (Anomie) की अवधारणा, जो सामाजिक मानदंडों के अभाव या भ्रम की स्थिति को संदर्भित करती है, किसके द्वारा प्रतिपादित की गई थी?
- (A) रॉबर्ट के. मर्टन
- (B) एमिल दुर्खीम
- (C) फर्डिनेंड टोनीज़
- (D) अल्फ्रेड शुट्ज़
सही उत्तर: (B) एमिल दुर्खीम
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘आत्महत्या’ (Suicide) में ‘प्रतिमानहीनता’ (Anomie) की अवधारणा का विस्तार से विश्लेषण किया। यह ऐसी स्थिति है जहाँ सामाजिक मानदंड कमजोर या अनुपस्थित हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों में दिशाहीनता और निराशा की भावना पैदा होती है। रॉबर्ट के. मर्टन ने दुर्खीम की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए प्रतिमानहीनता को विचलन के एक संभावित कारण के रूप में देखा। फर्डिनेंड टोनीज़ ने जेमिनशाफ्ट और गेसेलशाफ्ट की अवधारणाएँ दीं, और अल्फ्रेड शुट्ज़ ने घटना-क्रिया विज्ञान पर काम किया।
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सामाजिक संरचना के अध्ययन में ‘फंक्शनलिज्म’ (Functionalism) किस बात पर जोर देता है?
- (A) वर्ग संघर्ष
- (B) प्रतीकों की व्याख्या
- (C) समाज के विभिन्न अंगों के अंतर्संबंध और कार्य
- (D) व्यक्तिगत अनुभव
सही उत्तर: (C) समाज के विभिन्न अंगों के अंतर्संबंध और कार्य
विस्तृत व्याख्या: फंक्शनलिज्म (प्रकार्यवादी) परिप्रेक्ष्य समाज को एक जटिल प्रणाली के रूप में देखता है जिसके विभिन्न भाग (संस्थाएँ जैसे परिवार, शिक्षा, सरकार) एक साथ काम करके स्थिरता और संतुलन बनाए रखते हैं। यह प्रत्येक भाग के ‘कार्य’ (function) पर जोर देता है जो समग्र व्यवस्था के रखरखाव में योगदान करते हैं। वर्ग संघर्ष मार्क्सवादी परिप्रेक्ष्य से संबंधित है, प्रतीकों की व्याख्या प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद से, और व्यक्तिगत अनुभव घटना-क्रिया विज्ञान से।
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‘मीड’ के आत्म (Self) के सिद्धांत में, व्यक्ति के ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) की अवधारणा क्या दर्शाती है?
- (A) माता-पिता की विशिष्ट भूमिका
- (B) समाज की सामान्यीकृत अपेक्षाएँ और दृष्टिकोण
- (C) व्यक्ति की अपनी व्यक्तिगत भावनाएँ
- (D) निकटतम दोस्तों का समूह
सही उत्तर: (B) समाज की सामान्यीकृत अपेक्षाएँ और दृष्टिकोण
विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘आत्म’ (Self) सामाजिक अंतःक्रिया के माध्यम से विकसित होता है। ‘सामान्यीकृत अन्य’ वह अवधारणा है जहाँ व्यक्ति समाज की समग्र अपेक्षाओं, दृष्टिकोणों और मूल्यों को आंतरिक रूप से ग्रहण करता है। यह व्यक्ति को यह समझने में मदद करता है कि समाज सामान्य रूप से उससे क्या उम्मीद करता है, और इस प्रकार सामाजिक मानदंडों के अनुरूप व्यवहार करने में सक्षम बनाता है। यह आत्म के विकास का अंतिम चरण है, जो विशिष्ट दूसरों (significant others) की भूमिकाओं को आत्मसात करने के बाद आता है।
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‘द्वंद्वात्मक भौतिकवाद’ (Dialectical Materialism) का सिद्धांत किससे संबंधित है?
- (A) मैक्स वेबर
- (B) कार्ल मार्क्स
- (C) एमिल दुर्खीम
- (D) टैल्कॉट पार्सन्स
सही उत्तर: (B) कार्ल मार्क्स
विस्तृत व्याख्या: द्वंद्वात्मक भौतिकवाद कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स के दर्शन का मूल है। यह मानता है कि समाज का विकास विरोधाभासों और संघर्षों (द्वंद्व) के माध्यम से होता है, और यह कि भौतिक या आर्थिक स्थितियाँ (भौतिकवाद) सामाजिक संरचना और परिवर्तन के प्राथमिक निर्धारक हैं। यह ऐतिहासिक विकास को एक चक्रीय प्रक्रिया के रूप में देखता है जहाँ प्रत्येक अवस्था में अंतर्निहित विरोधाभास होते हैं जो अगली अवस्था को जन्म देते हैं।
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‘सामाजिक स्तरीकरण’ (Social Stratification) का सबसे कठोर रूप कौन सा है, जहाँ गतिशीलता लगभग अनुपस्थित होती है?
- (A) वर्ग
- (B) जाति
- (C) संपदा
- (D) लिंग
सही उत्तर: (B) जाति
विस्तृत व्याख्या: सामाजिक स्तरीकरण विभिन्न सामाजिक समूहों को एक पदानुक्रम में व्यवस्थित करने को संदर्भित करता है। जाति व्यवस्था को स्तरीकरण का सबसे कठोर रूप माना जाता है, क्योंकि यह जन्म पर आधारित होती है और व्यक्तियों के बीच गतिशीलता (एक स्तर से दूसरे स्तर पर जाना) बेहद प्रतिबंधित होती है। वर्ग व्यवस्था में कुछ हद तक गतिशीलता संभव है, और संपदा (Estate) व्यवस्था सामंती समाजों में पाई जाती थी। लिंग एक अन्य प्रकार का स्तरीकरण है लेकिन यह जाति जितना कठोर नहीं है।
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भारत में ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा किसके द्वारा प्रतिपादित की गई थी?
- (A) एम. एन. श्रीनिवास
- (B) आंद्रे बेतेई
- (C) जी. एस. घुरिये
- (D) योगेंद्र सिंह
सही उत्तर: (A) एम. एन. श्रीनिवास
विस्तृत व्याख्या: एम. एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा को अपनी पुस्तक ‘रिलीजन एंड सोसाइटी अमंग द कूर्ग्स ऑफ साउथ इंडिया’ में प्रस्तुत किया। यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक निम्न जाति या जनजाति या अन्य समूह किसी ‘उच्च’ और अक्सर ‘द्विज’ जाति की जीवन शैली, अनुष्ठानों और परंपराओं को अपनाकर सामाजिक पदानुक्रम में अपनी स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करता है। यह भारत में सामाजिक परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
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‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) की अवधारणा किसने दी?
- (A) जॉर्ज सिमेल
- (B) चार्ल्स हॉर्टन कूली
- (C) रॉबर्ट रेडफील्ड
- (D) टालकॉट पार्सन्स
सही उत्तर: (B) चार्ल्स हॉर्टन कूली
विस्तृत व्याख्या: चार्ल्स हॉर्टन कूली ने ‘प्राथमिक समूह’ की अवधारणा दी, जो छोटे सामाजिक समूहों को संदर्भित करती है जहाँ सदस्य घनिष्ठ, व्यक्तिगत और आमने-सामने की अंतःक्रिया में संलग्न होते हैं, जिससे मजबूत भावनात्मक बंधन और पहचान विकसित होती है (जैसे परिवार, दोस्तों का समूह)। द्वितीयक समूह बड़े और अधिक अवैयक्तिक होते हैं।
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किस प्रकार के समाज में ‘यांत्रिक एकजुटता’ (Mechanical Solidarity) पाई जाती है?
- (A) औद्योगिक समाज
- (B) आधुनिक समाज
- (C) आदिम/पूर्व-औद्योगिक समाज
- (D) उत्तर-आधुनिक समाज
सही उत्तर: (C) आदिम/पूर्व-औद्योगिक समाज
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने समाज में एकजुटता के दो प्रकार बताए: यांत्रिक और जैविक। ‘यांत्रिक एकजुटता’ आदिम या पूर्व-औद्योगिक समाजों की विशेषता है, जहाँ सदस्य समान विश्वासों, मूल्यों और अनुभवों को साझा करते हैं, जिससे एक मजबूत सामूहिक चेतना बनती है। ‘जैविक एकजुटता’ आधुनिक, औद्योगिक समाजों में पाई जाती है, जहाँ श्रम विभाजन के कारण लोग एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
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‘संदर्भ समूह’ (Reference Group) की अवधारणा किससे संबंधित है?
- (A) आर. के. मर्टन
- (B) एमिल दुर्खीम
- (C) कार्ल मार्क्स
- (D) मैक्स वेबर
सही उत्तर: (A) आर. के. मर्टन
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘संदर्भ समूह’ की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया। यह एक ऐसा समूह है जिसका उपयोग व्यक्ति अपने व्यवहार, दृष्टिकोण और मूल्यों को आकार देने के लिए एक मानक या तुलना के बिंदु के रूप में करता है, भले ही वह उस समूह का सदस्य हो या न हो। यह सामाजिककरण और आत्म-मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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कौन सा समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य मानता है कि समाज में शक्ति और संसाधनों का असमान वितरण संघर्ष का मूल कारण है?
- (A) प्रकार्यवाद
- (B) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद
- (C) संघर्ष परिप्रेक्ष्य
- (D) विनिमय सिद्धांत
सही उत्तर: (C) संघर्ष परिप्रेक्ष्य
विस्तृत व्याख्या: संघर्ष परिप्रेक्ष्य (Conflict Perspective), विशेष रूप से कार्ल मार्क्स के कार्यों से प्रभावित, समाज को शक्ति, धन और संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाले विभिन्न समूहों के बीच एक क्षेत्र के रूप में देखता है। यह मानता है कि असमानता अंतर्निहित है और सामाजिक परिवर्तन संघर्ष के माध्यम से होता है। प्रकार्यवाद स्थिरता पर जोर देता है, प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद व्यक्तिगत अंतःक्रियाओं पर, और विनिमय सिद्धांत लागत-लाभ विश्लेषण पर।
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ग्रामीण समाजशास्त्र में ‘लघु समुदाय’ (Little Community) की अवधारणा किसने दी?
- (A) एम. एन. श्रीनिवास
- (B) रॉबर्ट रेडफील्ड
- (C) ए. आर. देसाई
- (D) एस. सी. दुबे
सही उत्तर: (B) रॉबर्ट रेडफील्ड
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट रेडफील्ड ने ग्रामीण समुदायों का अध्ययन करते हुए ‘लघु समुदाय’ की अवधारणा दी। उनके अनुसार, एक लघु समुदाय चार विशेषताओं को साझा करता है: विशिष्टता (distinctiveness), लघुता (smallness), समरूपता (homogeneity) और आत्मनिर्भरता (self-sufficiency)। यह अवधारणा लोक संस्कृति और सभ्यता के बीच संबंधों को समझने में भी महत्वपूर्ण है।
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‘एथनोमेथोडोलॉजी’ (Ethnomethodology) किस पर केंद्रित है?
- (A) बड़े पैमाने पर सामाजिक संरचनाएँ
- (B) लोग अपनी दैनिक दुनिया को कैसे बनाते और समझते हैं
- (C) सामाजिक संस्थाओं के कार्य
- (D) आर्थिक उत्पादन के तरीके
सही उत्तर: (B) लोग अपनी दैनिक दुनिया को कैसे बनाते और समझते हैं
विस्तृत व्याख्या: एथनोमेथोडोलॉजी हेरोल्ड गारफिन्कल द्वारा विकसित एक समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण है जो इस बात का अध्ययन करता है कि लोग अपनी दैनिक अंतःक्रियाओं में अर्थ और सामाजिक व्यवस्था कैसे उत्पन्न करते हैं। यह ‘सामान्य ज्ञान’ (common sense) और उन विधियों पर केंद्रित है जिनका उपयोग लोग अपनी सामाजिक दुनिया को समझने और बनाने के लिए करते हैं। यह बड़े पैमाने पर संरचनाओं के बजाय सूक्ष्म-स्तरीय अंतःक्रियाओं पर जोर देता है।
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हाल के अध्ययनों के अनुसार, घर के कामों में महिलाओं द्वारा अधिक ‘मल्टीटास्किंग’ (multitasking) करने और पुरुषों द्वारा अकेले के काम करने की प्रवृत्ति किस सामाजिक मुद्दे को उजागर करती है?
- (A) केवल आर्थिक असमानता
- (B) लिंग आधारित श्रम विभाजन और लैंगिक रूढ़िवादिता
- (C) शहरीकरण का प्रभाव
- (D) तकनीकी प्रगति का अभाव
सही उत्तर: (B) लिंग आधारित श्रम विभाजन और लैंगिक रूढ़िवादिता
विस्तृत व्याख्या: हालिया समाचार रिपोर्टों में एक अध्ययन के निष्कर्षों पर प्रकाश डाला गया है जिसमें पाया गया है कि महिलाएं घर पर अधिक मल्टीटास्किंग करती हैं जबकि पुरुष अकेले काम करते हैं। यह स्पष्ट रूप से लिंग आधारित श्रम विभाजन और लैंगिक रूढ़िवादिता को दर्शाता है, जहाँ महिलाओं से घर और देखभाल संबंधी कार्यों का अधिक बोझ उठाने की उम्मीद की जाती है, और अक्सर उन्हें एक साथ कई काम करने पड़ते हैं। यह ‘देखभाल अर्थव्यवस्था’ (care economy) और घर के भीतर शक्ति संबंधों के समाजशास्त्र का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के भविष्य के प्रभाव और अकादमिक अखंडता के लिए AI डिटेक्शन टूल के जोखिमों पर चिंताएँ समाजशास्त्र के किस उप-क्षेत्र से सबसे अधिक संबंधित हैं?
- (A) ग्रामीण समाजशास्त्र
- (B) धर्म का समाजशास्त्र
- (C) प्रौद्योगिकी का समाजशास्त्र और शिक्षा का समाजशास्त्र
- (D) कला का समाजशास्त्र
सही उत्तर: (C) प्रौद्योगिकी का समाजशास्त्र और शिक्षा का समाजशास्त्र
विस्तृत व्याख्या: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सामाजिक प्रभाव, अकादमिक अखंडता पर इसके उपकरण (जैसे साहित्यिक चोरी का पता लगाने वाले उपकरण) और शिक्षा में इसके अनुप्रयोग, सीधे प्रौद्योगिकी के समाजशास्त्र और शिक्षा के समाजशास्त्र से संबंधित हैं। ये क्षेत्र समाज और व्यक्तियों पर तकनीकी परिवर्तनों के प्रभावों का अध्ययन करते हैं, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों के भीतर नैतिकता और सामाजिक नियंत्रण के मुद्दे भी शामिल हैं।
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‘क्लिकबेट क्राइम न्यूज़’ (Clickbait Crime News) पर एक अध्ययन स्थानीय समाचार कक्षों में मेट्रिक्स और पेशेवर प्राधिकार की जांच करता है। यह समाजशास्त्र के किस क्षेत्र से संबंधित है?
- (A) परिवार का समाजशास्त्र
- (B) अपराध और विचलन का समाजशास्त्र, मीडिया का समाजशास्त्र
- (C) राजनीतिक समाजशास्त्र
- (D) चिकित्सा समाजशास्त्र
सही उत्तर: (B) अपराध और विचलन का समाजशास्त्र, मीडिया का समाजशास्त्र
विस्तृत व्याख्या: ‘क्लिकबेट क्राइम न्यूज़’ से संबंधित अध्ययन सीधे अपराध और विचलन के समाजशास्त्र (कैसे अपराध को प्रस्तुत किया जाता है और समाज द्वारा समझा जाता है) और मीडिया के समाजशास्त्र (समाचारों के निर्माण, मीडिया की भूमिका, और सार्वजनिक धारणा पर इसके प्रभाव) से संबंधित है। यह दिखाता है कि कैसे मीडिया संगठन सामग्री बनाने और प्रसारित करने के लिए व्यावसायिक मेट्रिक्स (जैसे क्लिक और जुड़ाव) का उपयोग करते हैं, जो अपराध की सार्वजनिक समझ को प्रभावित कर सकता है।
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प्रारंभिक सामाजिक-मीडिया उपयोग के स्कूल के परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव की रिपोर्ट समाजशास्त्र के किस क्षेत्र में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती है?
- (A) शहरी समाजशास्त्र
- (B) आर्थिक समाजशास्त्र
- (C) शिक्षा का समाजशास्त्र और डिजिटल समाजशास्त्र
- (D) ज्ञान का समाजशास्त्र
सही उत्तर: (C) शिक्षा का समाजशास्त्र और डिजिटल समाजशास्त्र
विस्तृत व्याख्या: प्रारंभिक सामाजिक-मीडिया (सोशल मीडिया) उपयोग के स्कूल के परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव की रिपोर्ट सीधे शिक्षा के समाजशास्त्र (छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन और सामाजिक विकास पर बाहरी कारकों का प्रभाव) और डिजिटल समाजशास्त्र (डिजिटल प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से सोशल मीडिया के सामाजिक प्रभावों का अध्ययन) से संबंधित है। यह युवाओं के सामाजिकीकरण, ध्यान अवधि और शैक्षणिक जुड़ाव पर डिजिटल उपकरणों के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डालता है।
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चीनी गेमिंग में ऑनलाइन ध्रुवीकरण का लिंग-आधारित विश्लेषण समाजशास्त्र के किन उप-क्षेत्रों को जोड़ता है?
- (A) ग्रामीण समाजशास्त्र और पर्यावरण समाजशास्त्र
- (B) लिंग का समाजशास्त्र और डिजिटल समाजशास्त्र
- (C) औद्योगिक समाजशास्त्र और नगरीय समाजशास्त्र
- (D) आयु का समाजशास्त्र और नस्ल का समाजशास्त्र
सही उत्तर: (B) लिंग का समाजशास्त्र और डिजिटल समाजशास्त्र
विस्तृत व्याख्या: चीनी गेमिंग में ऑनलाइन ध्रुवीकरण का लिंग-आधारित विश्लेषण लिंग के समाजशास्त्र (कैसे लिंग पहचान और अपेक्षाएँ सामाजिक अंतःक्रियाओं को आकार देती हैं) और डिजिटल समाजशास्त्र (ऑनलाइन समुदायों, डिजिटल संस्कृतियों और इंटरनेट पर सामाजिक प्रक्रियाओं का अध्ययन) को सीधे जोड़ता है। यह दर्शाता है कि कैसे डिजिटल स्थान भी लिंग आधारित असमानताओं और सामाजिक विभाजन को प्रतिबिंबित और मजबूत कर सकते हैं।
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भारत में जाति व्यवस्था की ‘परिवर्तनशीलता’ (變動शीलता) को समझने के लिए किस अवधारणा का उपयोग किया जाता है?
- (A) वर्ग संघर्ष
- (B) संस्कृतिकरण
- (C) सर्वहाराकरण
- (D) पश्चिमीकरण
सही उत्तर: (B) संस्कृतिकरण
विस्तृत व्याख्या: एम. एन. श्रीनिवास द्वारा दी गई ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा भारत में जाति व्यवस्था की परिवर्तनशीलता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। यह बताती है कि कैसे निम्न जातियाँ उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवन शैली को अपनाकर सामाजिक पदानुक्रम में अपनी स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास करती हैं। यह कठोरता के बावजूद जाति व्यवस्था में अंतर्निहित गतिशीलता को दर्शाता है, हालांकि यह अक्सर स्थितिगत परिवर्तन होता है, संरचनात्मक नहीं।
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पितृसत्ता (Patriarchy) को एक सामाजिक व्यवस्था के रूप में किस परिप्रेक्ष्य द्वारा सबसे अधिक विश्लेषित किया जाता है?
- (A) प्रकार्यवाद
- (B) नारीवादी परिप्रेक्ष्य
- (C) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद
- (D) विनिमय सिद्धांत
सही उत्तर: (B) नारीवादी परिप्रेक्ष्य
विस्तृत व्याख्या: नारीवादी परिप्रेक्ष्य समाजशास्त्र में एक प्रमुख दृष्टिकोण है जो पितृसत्ता को एक सामाजिक व्यवस्था के रूप में विश्लेषण करता है, जहाँ पुरुष महिलाओं पर शक्ति और प्रभुत्व रखते हैं। यह लिंग असमानता, उत्पीड़न और लैंगिक भूमिकाओं के सामाजिक निर्माण की पड़ताल करता है। प्रकार्यवाद समाज की स्थिरता पर केंद्रित है, प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद सूक्ष्म अंतःक्रियाओं पर, और विनिमय सिद्धांत तर्कसंगत पसंद पर।
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‘सामाजिक गतिशीलता’ (Social Mobility) का अर्थ क्या है?
- (A) व्यक्तियों या समूहों की भौगोलिक आवाजाही
- (B) व्यक्तियों या समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में परिवर्तन
- (C) जनसंख्या का घनत्व
- (D) सांस्कृतिक प्रथाओं का प्रसार
सही उत्तर: (B) व्यक्तियों या समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में परिवर्तन
विस्तृत व्याख्या: सामाजिक गतिशीलता से तात्पर्य व्यक्तियों या समूहों के सामाजिक-आर्थिक पदानुक्रम में एक स्थिति से दूसरी स्थिति में जाने से है। यह ऊर्ध्वाधर (ऊपर या नीचे जाना) या क्षैतिज (समान स्तर पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना) हो सकती है। यह किसी समाज में खुलेपन और अवसर के स्तर का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। भौगोलिक आवाजाही प्रवासन है, न कि सामाजिक गतिशीलता।
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समाजशास्त्र में ‘सांस्कृतिक विलंबना’ (Cultural Lag) की अवधारणा किसने दी?
- (A) विलियम एफ. ओगबर्न
- (B) टैल्कॉट पार्सन्स
- (C) जॉर्ज सिमेल
- (D) अल्फ्रेड शुट्ज़
सही उत्तर: (A) विलियम एफ. ओगबर्न
विस्तृत व्याख्या: विलियम एफ. ओगबर्न ने ‘सांस्कृतिक विलंबना’ की अवधारणा दी। यह तब होती है जब भौतिक संस्कृति (जैसे प्रौद्योगिकी) गैर-भौतिक संस्कृति (जैसे मानदंड, मूल्य, विश्वास) की तुलना में तेजी से बदलती है, जिससे समाज में एक अंतराल और समायोजन की समस्याएँ पैदा होती हैं। उदाहरण के लिए, नई डिजिटल प्रौद्योगिकियों का तेजी से विकास सामाजिक मानदंडों और नैतिकता को बदलने में धीमी गति के साथ संघर्ष कर सकता है।
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कौन सी अनुसंधान विधि प्राकृतिक सेटिंग्स में सामाजिक अंतःक्रियाओं का गहन, गुणात्मक अध्ययन करती है?
- (A) सर्वेक्षण अनुसंधान
- (B) प्रयोग
- (C) नृवंशविज्ञान (Ethnography)
- (D) सामग्री विश्लेषण
सही उत्तर: (C) नृवंशविज्ञान (Ethnography)
विस्तृत व्याख्या: नृवंशविज्ञान एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जिसमें शोधकर्ता एक विशेष सामाजिक समूह या समुदाय के सदस्यों के साथ लंबे समय तक रहकर, उनके दैनिक जीवन में भाग लेकर और उनका अवलोकन करके गहन अध्ययन करता है। इसका उद्देश्य उनके दृष्टिकोण, व्यवहार और संस्कृति को उनके अपने संदर्भ से समझना है। सर्वेक्षण अनुसंधान और प्रयोग अधिक मात्रात्मक होते हैं, जबकि सामग्री विश्लेषण दस्तावेज़ों का अध्ययन करता है।
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