समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें
प्रिय उम्मीदवारों, आपकी दैनिक समाजशास्त्र बौद्धिक चुनौती में आपका स्वागत है! “The Sociology Scholar” के रूप में, मैं आपके लिए समाजशास्त्रीय अवधारणाओं, विचारकों और सिद्धांतों की गहरी समझ का परीक्षण करने के लिए 25 अद्वितीय और चुनौतीपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नों का एक सेट लेकर आया हूँ। ये प्रश्न आपको प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC-NET, UPSC, State PSCs) में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अपनी विश्लेषणात्मक क्षमताओं और वैचारिक स्पष्टता को बढ़ाने में मदद करेंगे। अपनी तैयारी को परखें और समाजशास्त्र के इस दैनिक मॉक टेस्ट में गोता लगाएँ!
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कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिक की ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा का मुख्य कारण क्या है?
- सामाजिक मानदंडों का टूटना (Anomie)
- उत्पादन प्रक्रिया और उत्पाद से दूरी
- समाज का तर्कसंगतकरण
- झूठी चेतना का विकास
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा का उपयोग यह समझाने के लिए किया कि पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में श्रमिक अपने श्रम, उत्पाद, अपनी मानवीय प्रजाति-सत्ता (species-being) और अन्य मनुष्यों से कैसे अलग-थलग पड़ जाते हैं। उनका मानना था कि उत्पादन प्रक्रिया पर नियंत्रण न होने और उत्पाद के स्वामित्व से वंचित होने के कारण श्रमिक स्वयं को पराया महसूस करते हैं। अन्य विकल्प अलग-अलग समाजशास्त्रीय अवधारणाओं से संबंधित हैं: ‘एनोमी’ दुर्खीम और मर्टन से, ‘तर्कसंगतकरण’ वेबर से, और ‘झूठी चेतना’ मार्क्स से संबंधित है लेकिन यह अलगाव का परिणाम है, कारण नहीं।
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मैक्स वेबर के अध्ययन ‘द प्रोटेस्टेंट एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैपिटलिज्म’ के अनुसार, प्रोटेस्टेंट नैतिकता का पूंजीवाद के विकास में क्या योगदान था?
- इसने पूंजीवाद के विकास को रोका।
- इसने पूंजीवाद के विकास को बढ़ावा दिया।
- इन दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं था।
- पूंजीवाद ने प्रोटेस्टेंट नैतिकता को जन्म दिया।
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘द प्रोटेस्टेंट एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैपिटलिज्म’ में तर्क दिया कि प्रोटेस्टेंट धर्म, विशेष रूप से कैल्विनवाद की कुछ नैतिक मान्यताएँ, जैसे कि तपस्या, कड़ी मेहनत और धन संचय को ईश्वर की कृपा का संकेत मानना, पूंजीवादी व्यवस्था के विकास के लिए अनुकूल थीं। उनका मानना था कि इन नैतिक मूल्यों ने लोगों को व्यवस्थित रूप से काम करने और मुनाफे का पुनर्निवेश करने के लिए प्रेरित किया, जिससे पूंजीवाद को बढ़ावा मिला।
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एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Fact) की मुख्य विशेषता क्या है?
- यह व्यक्तिपरक और व्यक्तिगत होता है।
- यह बाह्य, सामान्य और बाध्यकारी होता है।
- यह प्राकृतिक घटनाओं पर आधारित होता है।
- यह मनोवैज्ञानिक स्थिति का परिणाम है।
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम के लिए, ‘सामाजिक तथ्य’ वे सोचने, कार्य करने और महसूस करने के तरीके हैं जो व्यक्ति के लिए बाहरी होते हैं, पूरे समाज में सामान्य होते हैं, और व्यक्ति पर बाध्यकारी प्रभाव डालते हैं। ये व्यक्तियों के नियंत्रण से बाहर होते हैं और सामूहिक चेतना का हिस्सा होते हैं। उदाहरणों में कानून, नैतिकता, विश्वास, और सामाजिक रीति-रिवाज शामिल हैं।
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रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा का विस्तार किस संदर्भ में किया, विशेषकर समाज में लक्ष्यों और साधनों के बीच बेमेल के संबंध में?
- धार्मिक अनुष्ठानों की कमी
- सामाजिक मानदंडों का पूर्ण रूप से टूटना
- आधुनिक समाजों में कार्य-विभाजन की समस्याएँ
- सांस्कृतिक रूप से स्वीकृत लक्ष्यों और संस्थागत साधनों के बीच तनाव
सही उत्तर: D
विस्तृत व्याख्या: जबकि दुर्खीम ने एनोमी को सामाजिक मानदंडों के टूटने के रूप में देखा, मर्टन ने इसे ‘स्ट्रेन थ्योरी’ के माध्यम से समझाया। उनके अनुसार, एनोमी तब उत्पन्न होती है जब समाज सांस्कृतिक रूप से कुछ लक्ष्यों को प्रस्तुत करता है (जैसे धन और सफलता), लेकिन सभी व्यक्तियों के पास उन लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए वैध या संस्थागत साधन उपलब्ध नहीं होते। यह लक्ष्यों और साधनों के बीच का तनाव ‘विचलन’ (deviance) को जन्म दे सकता है।
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‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा, जिसमें निम्न जाति या जनजाति के लोग उच्च जाति, विशेषकर द्विज जातियों की जीवनशैली और रीति-रिवाजों को अपनाते हैं, किसने प्रतिपादित की थी?
- एम.एन. श्रीनिवास
- आंद्रे बेतेई
- जी.एस. घुर्ये
- योगेन्द्र सिंह
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा प्रस्तुत की। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक ‘निम्न’ हिंदू जाति या जनजाति या अन्य समूह अपनी रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, विचारधारा और जीवन शैली को अक्सर एक ‘उच्च’ और ‘द्विज’ जाति के अनुसार बदल देता है, जिसके परिणामस्वरूप पारंपरिक जाति पदानुक्रम में उसकी स्थिति ऊपर उठने की उम्मीद होती है।
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गुणात्मक अनुसंधान (Qualitative Research) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- सांख्यिकीय संबंध स्थापित करना
- गहरी समझ, व्याख्या और अर्थ प्राप्त करना
- परिकल्पना का संख्यात्मक परीक्षण करना
- बड़ी आबादी पर सामान्यीकरण करना
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: गुणात्मक अनुसंधान का उद्देश्य सामाजिक घटनाओं, व्यवहारों और अर्थों की गहराई से पड़ताल करना है। यह अक्सर छोटे नमूनों पर केंद्रित होता है और साक्षात्कार, फोकस समूह, प्रतिभागी अवलोकन जैसे तरीकों का उपयोग करके समृद्ध, गैर-संख्यात्मक डेटा एकत्र करता है ताकि मानवीय अनुभवों और सामाजिक प्रक्रियाओं की गहन समझ प्राप्त की जा सके। अन्य विकल्प मात्रात्मक अनुसंधान के उद्देश्यों से अधिक संबंधित हैं।
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आधुनिक औद्योगिक समाजों में परिवार के किस रूप की प्रधानता देखी जाती है, जो कि छोटे आकार और माता-पिता व उनके बच्चों तक सीमित होता है?
- संयुक्त परिवार
- विस्तृत परिवार
- नाभिकीय परिवार (Nuclear Family)
- मातृसत्तात्मक परिवार
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: औद्योगिक क्रांति और शहरीकरण के साथ, नाभिकीय परिवार का उदय हुआ। यह परिवार का एक छोटा रूप है जिसमें केवल माता-पिता और उनके अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं। यह गतिशीलता (mobility) और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बढ़ावा देता है, जो औद्योगिक समाजों की आवश्यकताओं के अनुकूल है। संयुक्त और विस्तृत परिवार पारंपरिक कृषि समाजों में अधिक आम थे।
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कार्ल मार्क्स के अनुसार, वर्ग संघर्ष (Class Conflict) का मुख्य आधार क्या है?
- जाति और धर्म
- उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण
- शिक्षा का स्तर
- राजनीतिक शक्ति
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: मार्क्सवादी सिद्धांत में, वर्ग संरचना को उत्पादन के साधनों (जैसे भूमि, कारखाने, पूंजी) पर नियंत्रण के आधार पर परिभाषित किया जाता है। मार्क्स का मानना था कि समाज मुख्य रूप से दो विरोधी वर्गों में बंटा हुआ है: बुर्जुआ वर्ग (उत्पादन के साधनों के मालिक) और सर्वहारा वर्ग (श्रमिक जो अपनी श्रम शक्ति बेचते हैं)। इन दोनों के बीच हितों का टकराव वर्ग संघर्ष को जन्म देता है।
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अर्ली रसेल हॉचचाइल्ड (Arlie Russell Hochschild) द्वारा प्रस्तुत ‘भावनात्मक श्रम’ (Emotional Labor) की अवधारणा किससे संबंधित है?
- शारीरिक रूप से थकाऊ कार्य
- वैज्ञानिक अनुसंधान में मानसिक प्रयास
- अपनी भावनाओं का प्रबंधन जो एक नौकरी की आवश्यकता होती है
- कलात्मक रचनात्मकता में लगाया गया श्रम
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: भावनात्मक श्रम उस प्रक्रिया को संदर्भित करता है जिसमें कर्मचारी अपनी भावनाओं को प्रबंधित करते हैं (जैसे मुस्कुराना, सहानुभूति दिखाना, क्रोध को दबाना) ताकि उनकी नौकरी की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और ग्राहक या सहकर्मियों के साथ बातचीत में एक वांछित भावनात्मक स्थिति पेश की जा सके। यह अक्सर सेवा उद्योग में देखा जाता है, जहाँ कर्मचारियों से एक विशेष ‘भावनात्मक शैली’ बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।
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“डिजिटल डिवाइड” (Digital Divide) शब्द का सबसे उपयुक्त अर्थ क्या है?
- इंटरनेट पर सामग्री का विभिन्न श्रेणियों में विभाजन
- सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) तक पहुंच और उसके उपयोग में असमानता
- डिजिटल उपकरणों की गुणवत्ता में अंतर
- ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण उत्पन्न सामाजिक अलगाव
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: डिजिटल डिवाइड व्यक्तियों, घरों, व्यवसायों या भौगोलिक क्षेत्रों के बीच सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों (ICT) तक पहुंच और उपयोग में असमानता को संदर्भित करता है। यह अक्सर सामाजिक-आर्थिक स्थिति, भौगोलिक स्थान, लिंग, उम्र या अन्य जनसांख्यिकीय कारकों पर आधारित होता है और शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी के अवसरों को प्रभावित करता है।
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तालकॉट पार्सन्स के AGIL मॉडल में, ‘L’ किसका प्रतिनिधित्व करता है, जो सामाजिक व्यवस्था के सांस्कृतिक पैटर्न और मूल्यों के रखरखाव से संबंधित है?
- अनुकूलन (Adaptation)
- लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment)
- एकीकरण (Integration)
- सुप्तता/पैटर्न रखरखाव (Latency/Pattern Maintenance)
सही उत्तर: D
विस्तृत व्याख्या: तालकॉट पार्सन्स ने सामाजिक व्यवस्था के कार्यात्मक अनिवार्यताओं की व्याख्या करने के लिए AGIL मॉडल प्रस्तुत किया। A = Adaptation (अनुकूलन), G = Goal Attainment (लक्ष्य प्राप्ति), I = Integration (एकीकरण), और L = Latency या Pattern Maintenance (सुप्तता या पैटर्न रखरखाव)। ‘L’ घटक समाज में सांस्कृतिक पैटर्न, मूल्यों और मानदंडों के रखरखाव से संबंधित है, जो सदस्यों को प्रेरित और एकीकृत रखते हैं।
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‘सांस्कृतिक विलम्बना’ (Cultural Lag) की अवधारणा, जिसमें भौतिक संस्कृति के परिवर्तन की तुलना में गैर-भौतिक संस्कृति (मूल्य, मानदंड) धीमी गति से बदलती है, किसने प्रस्तुत की थी?
- विलियम ओगबर्न
- रॉबर्ट मर्टन
- तालकॉट पार्सन्स
- जॉर्ज मीड
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या: विलियम ओगबर्न ने ‘सांस्कृतिक विलम्बना’ की अवधारणा दी। उनके अनुसार, संस्कृति के दो पहलू होते हैं: भौतिक संस्कृति (प्रौद्योगिकी, उपकरण) और गैर-भौतिक संस्कृति (विचार, विश्वास, मूल्य)। भौतिक संस्कृति तेजी से बदलती है, जबकि गैर-भौतिक संस्कृति धीमी गति से बदलती है, जिससे दोनों के बीच एक ‘विलम्बना’ या ‘लैग’ पैदा होता है, जिससे सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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भारत में ‘हरित क्रांति’ (Green Revolution) का सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य पर क्या प्रभाव पड़ा?
- इसने ग्रामीण असमानता को काफी कम कर दिया।
- इसने कृषि उत्पादकता में वृद्धि की, लेकिन कुछ क्षेत्रों में क्षेत्रीय और वर्ग असमानताओं को भी बढ़ाया।
- इसने बड़े पैमाने पर शहरीकरण को धीमा कर दिया।
- इसका केवल पर्यावरणीय प्रभाव था, सामाजिक नहीं।
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: हरित क्रांति ने भारत में कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की, खासकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में। हालांकि, इसने छोटे किसानों और भूमिहीनों की तुलना में बड़े किसानों को अधिक लाभ पहुँचाया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक असमानता बढ़ी। कुछ क्षेत्रों में इसके पर्यावरणीय प्रभाव भी थे, लेकिन इसका सामाजिक प्रभाव भी गहरा और बहुआयामी था।
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समाजशास्त्रीय अनुसंधान में नैतिक सिद्धांतों (Ethical Principles) का पालन क्यों महत्वपूर्ण है?
- यह केवल एक कानूनी औपचारिकता है।
- यह शोधकर्ताओं की व्यक्तिगत सुविधा के लिए है।
- यह प्रतिभागियों के अधिकारों की रक्षा करने और अनुसंधान की विश्वसनीयता व वैधता सुनिश्चित करने के लिए है।
- यह शोध परिणामों को छुपाने का एक तरीका है।
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: नैतिक सिद्धांतों का पालन समाजशास्त्रीय अनुसंधान में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करता है कि अनुसंधान प्रतिभागियों को कोई शारीरिक या मनोवैज्ञानिक नुकसान न पहुंचे, उनकी गोपनीयता और गुमनामी बनी रहे, और उन्हें सूचित सहमति (informed consent) प्राप्त हो। नैतिक दिशानिर्देशों का पालन अनुसंधान की विश्वसनीयता और वैधता को भी बढ़ाता है।
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‘गेमाइनशाफ्ट’ (Gemeinschaft) और ‘गेसेलशाफ्ट’ (Gesellschaft) की अवधारणाएँ, जो पारंपरिक और आधुनिक समाजों के बीच अंतर करती हैं, किसने प्रस्तुत की थीं?
- मैक्स वेबर
- फर्डिनेंड टोनीज़
- जॉर्ज सिमेल
- एमिल दुर्खीम
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: फर्डिनेंड टोनीज़ ने ‘गेमाइनशाफ्ट’ और ‘गेसेलशाफ्ट’ की अवधारणाएँ दीं। ‘गेमाइनशाफ्ट’ पारंपरिक, ग्रामीण समुदायों को संदर्भित करता है जहाँ घनिष्ठ संबंध, साझा मूल्य और मजबूत सामुदायिक भावना होती है। ‘गेसेलशाफ्ट’ आधुनिक, शहरी समाजों को संदर्भित करता है जहाँ संबंध अधिक अवैयक्तिक, संविदात्मक और स्वार्थ-आधारित होते हैं।
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जॉर्ज हर्बर्ट मीड (George Herbert Mead) के अनुसार, ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) क्या है?
- एक विशिष्ट व्यक्तिगत मित्र या परिवार का सदस्य
- समाज के संगठित दृष्टिकोण, नियम और अपेक्षाएँ जिन्हें व्यक्ति आंतरिक बनाता है
- बच्चे का स्वयं का शिशु विचार
- एक काल्पनिक साथी जिससे बच्चा बात करता है
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के सांकेतिक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) में, ‘सामान्यीकृत अन्य’ समाज के संगठित दृष्टिकोण, मूल्यों और अपेक्षाओं को संदर्भित करता है, जिसे व्यक्ति समाजीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से आंतरिक बनाता है। यह व्यक्ति को यह समझने में मदद करता है कि समाज उनसे क्या अपेक्षा करता है और उसके अनुसार कार्य करने में सक्षम बनाता है।
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‘संरचनात्मक असमानता’ (Structural Inequality) का सबसे अच्छा वर्णन कौन सा है?
- किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत पूर्वाग्रह या भेदभाव
- समाज की संस्थागत व्यवस्थाओं में अंतर्निहित असमानताएँ जो कुछ समूहों को व्यवस्थित रूप से नुकसान पहुँचाती हैं
- व्यक्तिगत आय में अस्थायी अंतर
- शिक्षा की कमी के कारण उत्पन्न असमानता
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: संरचनात्मक असमानता से तात्पर्य समाज की संस्थाओं (जैसे शिक्षा प्रणाली, कानूनी प्रणाली, श्रम बाजार) में अंतर्निहित असमानताओं से है जो कुछ सामाजिक समूहों (जैसे नस्लीय अल्पसंख्यक, महिलाएं, निम्न वर्ग) को दूसरों की तुलना में व्यवस्थित रूप से नुकसान पहुँचाती हैं। यह व्यक्तिगत पूर्वाग्रह से परे है और सामाजिक संरचनाओं में गहराई से अंतर्निहित होता है।
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समाजीकरण (Socialization) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- व्यक्ति को समाज का क्रियाशील और एकीकृत सदस्य बनाना
- व्यक्ति को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाना
- केवल बच्चों को औपचारिक रूप से शिक्षित करना
- केवल सामाजिक नियमों को याद कराना
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या: समाजीकरण वह आजीवन प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति समाज के मूल्यों, मानदंडों, विश्वासों और व्यवहारों को सीखते और आंतरिक बनाते हैं। इसका प्राथमिक उद्देश्य व्यक्ति को समाज का एक क्रियाशील और एकीकृत सदस्य बनाना है, ताकि वे अपनी भूमिकाएँ निभा सकें और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने में योगदान कर सकें।
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एमिल दुर्खीम के लिए, ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र’ (Profane) के बीच का अंतर किस चीज का आधार है?
- आर्थिक स्थिति और धन
- सामाजिक वर्गीकरण और धार्मिक विश्वास
- वैज्ञानिक खोजें और तकनीकी प्रगति
- व्यक्तिगत धार्मिक अनुभव
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने धर्म को पवित्र और अपवित्र के बीच अंतर के रूप में परिभाषित किया। ‘पवित्र’ वे चीजें हैं जो विशेष, अलौकिक, सम्मानजनक और निषेधों से घिरी होती हैं, जबकि ‘अपवित्र’ रोजमर्रा की, सामान्य चीजें हैं। दुर्खीम का मानना था कि समाज ही पवित्र की रचना करता है, और इस प्रकार, धर्म अंततः समाज की अपनी पूजा है।
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भारत में अनुसूचित जनजातियों के संदर्भ में ‘आत्मसातीकरण’ (Assimilation) और ‘एकीकरण’ (Integration) की बहस मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
- उनकी सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह से खत्म करना
- उन्हें मुख्यधारा के विकास में शामिल करने के सबसे प्रभावी तरीके
- उनकी पारंपरिक भाषाओं को बदलना
- उनके धार्मिक विश्वासों में जबरन परिवर्तन
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: यह बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा के समाज में पूरी तरह से आत्मसात (assimilation) किया जाना चाहिए, जिससे उनकी विशिष्ट संस्कृति और पहचान खत्म हो जाए, या उन्हें अपनी अनूठी पहचान बनाए रखते हुए मुख्यधारा के समाज के साथ एकीकृत (integration) किया जाना चाहिए। भारत में, एकीकरण के दृष्टिकोण को अधिक मानवीय और स्वीकार्य माना जाता है, जो उनकी संस्कृति और जीवनशैली का सम्मान करता है।
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रॉबर्ट के. मर्टन के अनुसार, एक सामाजिक क्रिया का ‘स्पष्ट कार्य’ (Manifest Function) क्या है?
- एक सामाजिक क्रिया का अनपेक्षित और अज्ञात परिणाम
- एक सामाजिक क्रिया का छिपा हुआ और गैर-मान्यता प्राप्त कार्य
- एक सामाजिक क्रिया का पहचाना और इच्छित परिणाम
- एक ऐसा कार्य जिसका समाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: मर्टन ने ‘कार्य’ (Function) को दो प्रकारों में विभाजित किया: स्पष्ट (Manifest) और अव्यक्त (Latent)। ‘स्पष्ट कार्य’ वे परिणाम होते हैं जो इच्छित और पहचाने जाते हैं। उदाहरण के लिए, शिक्षा प्रणाली का स्पष्ट कार्य छात्रों को ज्ञान और कौशल प्रदान करना है। ‘अव्यक्त कार्य’ अनपेक्षित और अक्सर अपरिचित परिणाम होते हैं।
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समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से, सोशल मीडिया एल्गोरिदम का व्यक्तियों की राजनीतिक राय और ध्रुवीकरण पर क्या संभावित प्रभाव हो सकता है, जैसा कि हाल के अध्ययनों में देखा गया है?
- यह हमेशा उपयोगकर्ताओं को विविध राजनीतिक विचारों से अवगत कराता है।
- यह उपयोगकर्ताओं को केवल उनकी मौजूदा मान्यताओं के अनुरूप सामग्री दिखाकर ‘इको चैंबर’ और ‘फ़िल्टर बबल’ बना सकता है, जिससे ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।
- यह राजनीतिक भागीदारी को पूरी तरह से कम कर देता है।
- यह केवल मनोरंजन का एक स्रोत है और इसका राजनीतिक विचारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: सोशल मीडिया एल्गोरिदम अक्सर उपयोगकर्ताओं की पिछली इंटरैक्शन और वरीयताओं के आधार पर सामग्री को प्राथमिकता देते हैं। यह एक ‘इको चैंबर’ या ‘फ़िल्टर बबल’ बना सकता है, जहाँ व्यक्ति केवल उन्हीं विचारों और सूचनाओं के संपर्क में आते हैं जो उनकी मौजूदा मान्यताओं की पुष्टि करते हैं। इस सीमित जोखिम से विविध दृष्टिकोणों के प्रति असहिष्णुता बढ़ सकती है और राजनीतिक ध्रुवीकरण में वृद्धि हो सकती है, जैसा कि हाल के अध्ययनों में देखा गया है।
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सामाजिक संरचना के संदर्भ में ‘स्थिति’ (Status) और ‘भूमिका’ (Role) की अवधारणाओं को व्यवस्थित रूप से किसने प्रस्तुत किया था?
- राल्फ लिंटन (Ralph Linton)
- लुईस कॉसियर
- एरविंग गोफमैन
- अल्फ्रेड शुट्ज़
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या: राल्फ लिंटन ने स्थिति और भूमिका की अवधारणाओं को समाजशास्त्र में केंद्रीय बनाया। उनके अनुसार, ‘स्थिति’ वह सामाजिक पद है जो एक व्यक्ति समाज में रखता है (जैसे डॉक्टर, छात्र, माता-पिता), जबकि ‘भूमिका’ उस स्थिति से जुड़ी अपेक्षाओं और व्यवहारों का सेट है। प्रत्येक स्थिति के साथ एक या एक से अधिक भूमिकाएँ जुड़ी होती हैं।
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‘डिजिटल जाति’ (Digital Caste) की अवधारणा किस समकालीन सामाजिक मुद्दे को उजागर करती है?
- ऑनलाइन विवाह प्लेटफार्मों का उदय
- डिजिटल प्लेटफार्मों और आभासी स्थानों पर जाति-आधारित भेदभाव और पदानुक्रम का पुनरुत्पादन
- आईटी उद्योग में विभिन्न जातियों के बीच रोजगार का वितरण
- सरकारी ई-गवर्नेंस पहलों का कार्यान्वयन
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: ‘डिजिटल जाति’ एक उभरती हुई अवधारणा है जो इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे पारंपरिक जाति-आधारित भेदभाव और पदानुक्रम डिजिटल प्लेटफार्मों, ऑनलाइन समुदायों और प्रौद्योगिकी-मध्यस्थता वाले इंटरैक्शन में खुद को पुनः पेश कर रहे हैं। यह ऑनलाइन ट्रोलिंग, पहचान के खुलासे, और डिजिटल स्थानों में विशेष जाति समूहों के लक्षित उत्पीड़न के माध्यम से प्रकट हो सकता है, जिससे पारंपरिक सामाजिक संरचनाएँ साइबरस्पेस में भी बनी रहती हैं।
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संभाव्यता प्रतिचयन (Probability Sampling) का मुख्य लाभ क्या है?
- यह हमेशा गैर-संभाव्यता प्रतिचयन से सस्ता होता है।
- यह शोधकर्ता के लिए हमेशा अधिक सुविधाजनक होता है।
- यह प्रतिनिधि नमूना प्राप्त करने और परिणामों का सांख्यिकीय रूप से सामान्यीकरण करने में मदद करता है।
- यह केवल बहुत छोटे जनसंख्या समूहों के लिए उपयोगी है।
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: संभाव्यता प्रतिचयन विधियों (जैसे सरल यादृच्छिक प्रतिचयन, स्तरीकृत प्रतिचयन) में, जनसंख्या के प्रत्येक सदस्य के चुने जाने की एक ज्ञात, गैर-शून्य संभावना होती है। इसका मुख्य लाभ यह है कि यह एक प्रतिनिधि नमूना प्राप्त करने में मदद करता है, जिससे शोधकर्ता अपने परिणामों को आत्मविश्वास के साथ बड़ी जनसंख्या पर सामान्यीकृत कर सकते हैं और सांख्यिकीय अनुमान लगा सकते हैं।
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