भारतीय संविधान की गहराई को समझें: एक व्यापक अभ्यास सेट
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भारतीय लोकतंत्र की नींव हमारे संविधान के सिद्धांतों और मूल्यों पर टिकी है। किसी भी गंभीर प्रतियोगी परीक्षा के लिए केवल तथ्यों को रटना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के पीछे के तर्क और उनकी व्यावहारिक व्याख्या को समझना अनिवार्य है। यह विशेष क्विज़ आपकी वैचारिक स्पष्टता का परीक्षण करने और आपकी तैयारी को एक नई धार देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आइए, अपनी तैयारी को चुनौती दें और संवैधानिक ज्ञान को पुख्ता करें!
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- भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया था?\n
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- (A) 44वां संशोधन
- (B) 42वां संशोधन
- (C) 73वां संशोधन
- (D) 86वां संशोधन
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उत्तर: (B) 42वां संशोधन\n
विस्तृत व्याख्या: 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में तीन नए शब्द जोड़े गए: ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’। \n
संदर्भ: यह संशोधन आपातकाल के दौरान किया गया था और इसे ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) भी कहा जाता है। \n
अन्य विकल्प: 44वां संशोधन आपातकाल के बाद नागरिक अधिकारों को बहाल करने के लिए लाया गया था। 73वां संशोधन पंचायती राज से संबंधित है और 86वां संशोधन शिक्षा के अधिकार (अनुच्छेद 21A) से संबंधित है।\n
- संविधान सभा की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?\n
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- (A) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- (B) जवाहरलाल नेहरू
- (C) डॉ. बी.आर. अंबेडकर
- (D) सरदार वल्लभभाई पटेल
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उत्तर: (C) डॉ. बी.आर. अंबेडकर\n
विस्तृत व्याख्या: डॉ. बी.आर. अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, जिसका गठन 29 अगस्त 1947 को संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए किया गया था।\n
संदर्भ: उन्हें ‘भारतीय संविधान का जनक’ कहा जाता है क्योंकि उन्होंने विभिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन कर भारत के लिए सबसे उपयुक्त प्रावधानों का चयन किया।\n
अन्य विकल्प: डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष थे। जवाहरलाल नेहरू ने ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ पेश किया था।\n
- भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण’ की गारंटी देता है?\n
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- (A) अनुच्छेद 19
- (B) अनुच्छेद 20
- (C) अनुच्छेद 21
- (D) अनुच्छेद 22
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उत्तर: (C) अनुच्छेद 21\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 21 के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना वंचित नहीं किया जाएगा।\n
संदर्भ: मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुच्छेद की व्याख्या को व्यापक बनाया और कहा कि ‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ उचित, निष्पक्ष और न्यायसंगत होनी चाहिए।\n
अन्य विकल्प: अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण प्रदान करता है।\n
- निम्नलिखित में से कौन सी रिट (Writ) किसी सार्वजनिक अधिकारी को अपने आधिकारिक कर्तव्य का पालन करने का आदेश देती है?\n
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- (A) बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
- (B) परमादेश (Mandamus)
- (C) प्रतिषेध (Prohibition)
- (D) अधिकार-पृच्छा (Quo-Warranto)
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उत्तर: (B) परमादेश (Mandamus)\n
विस्तृत व्याख्या: ‘परमादेश’ का शाब्दिक अर्थ है ‘हम आदेश देते हैं’। यह न्यायालय द्वारा जारी किया जाता है जब कोई सरकारी अधिकारी अपने कानूनी कर्तव्य का पालन करने में विफल रहता है।\n
संदर्भ: यह अनुच्छेद 32 (सुप्रीम कोर्ट) और अनुच्छेद 226 (हाई कोर्ट) के तहत जारी किया जा सकता है।\n
अन्य विकल्प: बंदी प्रत्यक्षीकरण अवैध हिरासत के खिलाफ है। प्रतिषेध निचली अदालत को अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकता है। अधिकार-पृच्छा किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक पद धारण करने की वैधता की जांच करता है।\n
- राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का मुख्य उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) कानूनी अधिकारों की स्थापना करना
- (B) एक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना करना
- (C) नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करना
- (D) न्यायिक समीक्षा को समाप्त करना
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उत्तर: (B) एक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना करना\n
विस्तृत व्याख्या: संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में निहित DPSP राज्य को सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देते हैं।\n
संदर्भ: ये तत्व ‘गैर-न्यायोचित’ (Non-justiciable) हैं, अर्थात इन्हें अदालत के माध्यम से लागू नहीं करवाया जा सकता, लेकिन ये शासन के लिए बुनियादी हैं।\n
अन्य विकल्प: मौलिक अधिकार न्यायोचित हैं, जबकि DPSP दिशा-निर्देश हैं।\n
- मौलिक कर्तव्यों को भारतीय संविधान में किस समिति की सिफारिश पर जोड़ा गया था?\n
- \n (A) वर्मा समिति
- भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल में कौन शामिल नहीं होता है?\n
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- (A) संसद के निर्वाचित सदस्य
- (B) राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
- (C) राज्य विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य
- (D) दिल्ली और पुदुचेरी विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
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उत्तर: (C) राज्य विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें केवल निर्वाचित सदस्य (MP और MLA) भाग लेते हैं।\n
संदर्भ: मनोनीत सदस्य (Nominated members) राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर सकते ताकि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व बना रहे।\n
अन्य विकल्प: संसद के निर्वाचित सदस्य और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य इस प्रक्रिया का मुख्य हिस्सा हैं।\n
- राष्ट्रपति की अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद में वर्णित है?\n
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- (A) अनुच्छेद 111
- (B) अनुच्छेद 123
- (C) अनुच्छेद 213
- (D) अनुच्छेद 72
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उत्तर: (B) अनुच्छेद 123\n
विस्तृत व्याख्या: जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों और राष्ट्रपति को लगे कि तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है, तो वह अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी कर सकता है।\n
संदर्भ: अध्यादेश की शक्ति संसद के कानून बनाने की शक्ति के समान होती है, लेकिन इसे संसद सत्र शुरू होने के 6 सप्ताह के भीतर अनुमोदित होना चाहिए।\n
अन्य विकल्प: अनुच्छेद 213 राज्यपाल की अध्यादेश शक्ति है। अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति है।\n
- मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?\n
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- (A) राष्ट्रपति
- (B) प्रधानमंत्री
- (C) लोकसभा
- (D) राज्यसभा
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उत्तर: (C) लोकसभा\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 75(3) स्पष्ट रूप से कहता है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी।\n
संदर्भ: यह संसदीय शासन प्रणाली का मूल सिद्धांत है। यदि लोकसभा में ‘अविश्वास प्रस्ताव’ पारित हो जाता है, तो पूरी सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।\n
अन्य विकल्प: प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है, लेकिन जवाबदेही सदन (लोकसभा) के प्रति होती है।\n
- धन विधेयक (Money Bill) के संबंध में कौन सा कथन सही है?\n
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- (A) इसे राज्यसभा में पेश किया जा सकता है।
- (B) इसे केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
- (C) राज्यसभा इसे संशोधित कर सकती है और लोकसभा को मानना अनिवार्य है।
- (D) राष्ट्रपति इसे बिना सहमति के पारित कर सकता है।
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उत्तर: (B) इसे केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है।\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 110 के तहत धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है और इसे राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना पेश नहीं किया जा सकता।\n
संदर्भ: राज्यसभा के पास धन विधेयक पर सीमित शक्तियां हैं; वह इसे अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है, लेकिन इसे खारिज नहीं कर सकती।\n
अन्य विकल्प: विकल्प A और C गलत हैं क्योंकि राज्यसभा के पास धन विधेयक पर संशोधक शक्ति नहीं है, केवल सिफारिश की शक्ति है।\n
- संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) की अध्यक्षता कौन करता है?\n
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- (A) राष्ट्रपति
- (B) उपराष्ट्रपति
- (C) लोकसभा अध्यक्ष
- (D) प्रधानमंत्री
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उत्तर: (C) लोकसभा अध्यक्ष\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 108 के तहत जब किसी विधेयक पर दोनों सदनों में गतिरोध होता है, तो राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाता है, लेकिन इसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) करता है।\n
संदर्भ: यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित हो, तो उपाध्यक्ष और उसके बाद राज्यसभा का उपसभापति अध्यक्षता करता है।\n
अन्य विकल्प: राष्ट्रपति बैठक बुलाता है, लेकिन अध्यक्षता नहीं करता। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति होता है, वह संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करता।\n
- राज्यपाल द्वारा किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने की शक्ति किस अनुच्छेद में है?\n
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- (A) अनुच्छेद 200
- (B) अनुच्छेद 201
- (C) अनुच्छेद 163
- (D) अनुच्छेद 167
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उत्तर: (A) अनुच्छेद 200\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 200 राज्यपाल को यह शक्ति देता है कि वह राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित कर ले।\n
संदर्भ: यह प्रावधान तब किया जाता है जब विधेयक उच्च न्यायालय की शक्तियों को प्रभावित करता हो या संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध हो।\n
अन्य विकल्प: अनुच्छेद 201 राष्ट्रपति की उस विधेयक पर कार्रवाई से संबंधित है जिसे राज्यपाल ने आरक्षित किया है।\n
- उच्चतम न्यायालय के ‘मूल अधिकार क्षेत्र’ (Original Jurisdiction) के अंतर्गत कौन सा मामला आता है?\n
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- (A) मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
- (B) केंद्र और राज्यों के बीच विवाद
- (C) किसी कानून की संवैधानिकता की जांच
- (D) राष्ट्रपति के चुनाव विवाद
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उत्तर: (B) केंद्र और राज्यों के बीच विवाद\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 131 के तहत, केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच विवादों का निपटारा सीधे सुप्रीम कोर्ट में होता है।\n
संदर्भ: मूल अधिकार क्षेत्र का अर्थ है कि मामला पहली बार सीधे सुप्रीम कोर्ट में जाएगा, निचली अदालत में नहीं।\n
अन्य विकल्प: मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की जाती है, जो ‘रिट क्षेत्राधिकार’ कहलाता है।\n
- ‘बुनियादी ढांचे का सिद्धांत’ (Basic Structure Doctrine) किस ऐतिहासिक मामले में प्रतिपादित किया गया था?\n
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- (A) गोलकनाथ मामला
- (B) केशवानंद भारती मामला
- (C) मिनर्वा मिल्स मामला
- (D) मेनका गांधी मामला
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उत्तर: (B) केशवानंद भारती मामला (1973)\n
विस्तृत व्याख्या: सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि संसद संविधान में संशोधन तो कर सकती है, लेकिन वह इसके ‘बुनियादी ढांचे’ (Basic Structure) को नष्ट नहीं कर सकती।\n
संदर्भ: यह निर्णय न्यायिक समीक्षा की शक्ति को सर्वोच्च बनाता है और लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता तथा संघवाद को बुनियादी ढांचे का हिस्सा मानता है।\n
अन्य विकल्प: गोलकनाथ मामले में कहा गया था कि मौलिक अधिकारों को संशोधित नहीं किया जा सकता, जिसे बाद में बदला गया।\n
- अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के बीच मुख्य अंतर क्या है?\n
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- (A) अनुच्छेद 32 केवल हाई कोर्ट के लिए है।
- (B) अनुच्छेद 226 का दायरा अनुच्छेद 32 से व्यापक है।
- (C) अनुच्छेद 32 केवल कानूनी अधिकारों के लिए है।
- (D) कोई अंतर नहीं है।
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उत्तर: (B) अनुच्छेद 226 का दायरा अनुच्छेद 32 से व्यापक है।\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 32 केवल ‘मौलिक अधिकारों’ के प्रवर्तन के लिए है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट मौलिक अधिकारों के साथ-साथ ‘अन्य कानूनी उद्देश्यों’ के लिए भी रिट जारी कर सकता है।\n
संदर्भ: अनुच्छेद 32 स्वयं में एक मौलिक अधिकार है, जबकि अनुच्छेद 226 एक संवैधानिक शक्ति है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 32 सुप्रीम कोर्ट के लिए है।\n
- सातवीं अनुसूची (7th Schedule) का संबंध किससे है?\n
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- (A) भाषा आधिकारिकता
- (B) केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन
- (C) पंचायतों की शक्तियां
- (D) आपातकालीन प्रावधान
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उत्तर: (B) केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन\n
विस्तृत व्याख्या: सातवीं अनुसूची में तीन सूचियां हैं: संघ सूची (Union List), राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List)।\n
संदर्भ: यह भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) को स्पष्ट करता है कि कौन सा विषय केंद्र के पास होगा और कौन सा राज्य के पास।\n
अन्य विकल्प: आठवीं अनुसूची भाषाओं से संबंधित है।\n
- अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council) की स्थापना किस अनुच्छेद के तहत की जाती है?\n
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- (A) अनुच्छेद 262
- (B) अनुच्छेद 263
- (C) अनुच्छेद 280
- (D) अनुच्छेद 312
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उत्तर: (B) अनुच्छेद 263\n
विस्तृत व्याख्या: राष्ट्रपति अनुच्छेद 263 के तहत राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक अंतर-राज्य परिषद की स्थापना कर सकता है।\n
संदर्भ: इसकी स्थापना सरकारिया आयोग की सिफारिशों के बाद 1990 में की गई थी ताकि केंद्र-राज्य विवादों को बातचीत से सुलझाया जा सके।\n
अन्य विकल्प: अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से संबंधित है। अनुच्छेद 262 अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों से संबंधित है।\n
- भारत के चुनाव आयोग (ECI) की नियुक्ति और कार्यकाल का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?\n
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- (A) अनुच्छेद 320
- (B) अनुच्छेद 324
- (C) अनुच्छेद 326
- (D) अनुच्छेद 330
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उत्तर: (B) अनुच्छेद 324\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान करता है।\n
संदर्भ: चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है ताकि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से संपन्न हों।\n
अन्य विकल्प: अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार (Universal Adult Suffrage) से संबंधित है।\n
- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति कौन करता है?\n
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- (A) प्रधानमंत्री
- (B) संसद
- (C) राष्ट्रपति
- (D) वित्त मंत्री
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उत्तर: (C) राष्ट्रपति\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 148 के तहत CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।\n
संदर्भ: CAG को ‘सार्वजनिक धन का संरक्षक’ (Guardian of Public Purse) कहा जाता है। वह केंद्र और राज्य सरकारों के खातों का ऑडिट करता है।\n
अन्य विकल्प: CAG को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान होती है, जो उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करती है।\n
- वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन हर कितने वर्ष बाद किया जाता है?\n
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- (A) 3 वर्ष
- (B) 4 वर्ष
- (C) 5 वर्ष
- (D) 6 वर्ष
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उत्तर: (C) 5 वर्ष\n
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 280 के अनुसार, राष्ट्रपति हर पांच वर्ष या उससे कम अवधि के अंतराल पर एक वित्त आयोग का गठन करता है।\n
संदर्भ: इसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच करों (Taxes) के वितरण की सिफारिश करना है।\n
अन्य विकल्प: यह एक अर्ध-न्यायिक संवैधानिक निकाय है।\n
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) किस प्रकार का निकाय है?\n
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- (A) संवैधानिक निकाय
- (B) वैधानिक निकाय
- (C) गैर-संवैधानिक निकाय
- (D) इनमें से कोई नहीं
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उत्तर: (B) वैधानिक निकाय (Statutory Body)\n
विस्तृत व्याख्या: NHRC का गठन संसद द्वारा पारित ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत किया गया है, इसलिए यह एक वैधानिक निकाय है।\n
संदर्भ: संवैधानिक निकायों का उल्लेख संविधान के अनुच्छेदों में होता है, जबकि वैधानिक निकायों का गठन कानून द्वारा किया जाता है।\n
अन्य विकल्प: चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जबकि NHRC वैधानिक है।\n
- नीति आयोग (NITI Aayog) के संबंध में क्या सही है?\n
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- (A) यह एक संवैधानिक निकाय है।
- (B) यह योजना आयोग का प्रतिस्थापन है।
- (C) इसके पास वित्तीय आवंटन की शक्ति है।
- (D) यह केवल राज्य सरकारों को रिपोर्ट करता है।
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उत्तर: (B) यह योजना आयोग का प्रतिस्थापन है।\n
विस्तृत व्याख्या: 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग ने योजना आयोग का स्थान लिया। यह एक ‘थिंक टैंक’ (Think Tank) के रूप में कार्य करता है।\n
संदर्भ: नीति आयोग एक कार्यकारी निकाय (Executive Body) है, न कि संवैधानिक या वैधानिक। यह ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) के सिद्धांत पर आधारित है।\n
अन्य विकल्प: इसके पास वित्तीय आवंटन की शक्ति नहीं है (यह शक्ति वित्त मंत्रालय के पास है)।\n
- 73वें संविधान संशोधन अधिनियम (1992) द्वारा कौन सा नया भाग जोड़ा गया?\n
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- (A) भाग IV
- (B) भाग IX
- (C) भाग IX-A
- (D) भाग X
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उत्तर: (B) भाग IX\n
विस्तृत व्याख्या: 73वें संशोधन द्वारा ‘पंचायती राज’ के लिए भाग IX और 11वीं अनुसूची जोड़ी गई।\n
संदर्भ: इसने ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया और त्रि-स्तरीय संरचना (ग्राम, ब्लॉक, जिला) लागू की।\n
अन्य विकल्प: भाग IX-A नगर पालिकाओं (74वां संशोधन) से संबंधित है।\n
- नगर पालिकाओं के लिए संवैधानिक प्रावधान किस संशोधन द्वारा किए गए?\n
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- (A) 72वां संशोधन
- (B) 73वां संशोधन
- (C) 74वां संशोधन
- (D) 75वां संशोधन
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उत्तर: (C) 74वां संशोधन\n
विस्तृत व्याख्या: 74वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा शहरी स्थानीय निकायों (Municipalities) को संवैधानिक दर्जा दिया गया और 12वीं अनुसूची जोड़ी गई।\n
संदर्भ: इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देना है।\n
अन्य विकल्प: 73वां संशोधन केवल ग्रामीण क्षेत्रों (पंचायतों) के लिए था।\n
- राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की घोषणा किस अनुच्छेद के तहत की जाती है?\n
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- (A) अनुच्छेद 352
- (B) अनुच्छेद 356
- (C) अनुच्छेद 360
- (D) अनुच्छेद 368
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उत्तर: (A) अनुच्छेद 352\n
विस्तृत व्याख्या: जब युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण भारत की सुरक्षा को खतरा हो, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल लगा सकते हैं।\n
संदर्भ: 44वें संशोधन द्वारा ‘आंतरिक अशांति’ शब्द को बदलकर ‘सशस्त्र विद्रोह’ कर दिया गया ताकि इसका दुरुपयोग रोका जा सके।\n
अन्य विकल्प: अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति शासन (राज्य आपातकाल) और अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल से संबंधित है।\n
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\n (B) स्वर्ण सिंह समिति
\n (C) सरकारिया आयोग
\n (D) Sarkaria Commission
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उत्तर: (B) स्वर्ण सिंह समिति\n
विस्तृत व्याख्या: 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा भाग IV-A और अनुच्छेद 51A जोड़ा गया, जिसमें नागरिकों के लिए मौलिक कर्तव्यों का वर्णन है।\n
संदर्भ: प्रारंभ में 10 कर्तव्य थे, लेकिन 86वें संशोधन (2002) द्वारा 11वां कर्तव्य (शिक्षा का अवसर प्रदान करना) जोड़ा गया।\n
अन्य विकल्प: सरकारिया आयोग केंद्र-राज्य संबंधों पर आधारित था।
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