समाजशास्त्र की गहन समझ: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें
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समाजशास्त्र के सभी गंभीर अभ्यर्थियों का स्वागत है! आज का यह अभ्यास सेट न केवल आपकी स्मृति का परीक्षण करेगा, बल्कि आपकी विश्लेषणात्मक गहराई को भी बढ़ाएगा। यूजीसी-नेट, यूपीएससी और राज्य पीसीएस जैसी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए केवल तथ्यों को रटना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवधारणाओं के बीच संबंधों को समझना आवश्यक है। आइए, इस बौद्धिक चुनौती को स्वीकार करें और अपनी तैयारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएं।
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- एमिल दुर्खीम द्वारा प्रतिपादित ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति का क्या अर्थ है?\n
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- (A) सामाजिक एकजुटता में वृद्धि
- (B) मानदंडों और मूल्यों का अभाव या विघटन
- (C) आर्थिक संसाधनों का समान वितरण
- (D) धार्मिक विश्वासों में अत्यधिक वृद्धि
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\nउत्तर: (B) मानदंडों और मूल्यों का अभाव या विघटन\n
\nविस्तृत व्याख्या: दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ वह स्थिति है जब समाज में तेजी से बदलाव आते हैं और पुराने सामाजिक नियम काम करना बंद कर देते हैं, लेकिन नए नियम अभी स्थापित नहीं हुए होते। यह व्यक्ति में दिशाहीनता पैदा करता है।\n
संदर्भ: यह अवधारणा उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘The Division of Labour in Society’ और ‘Suicide’ में विस्तृत है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) इसके विपरीत है; (C) और (D) का एनोमी की समाजशास्त्रीय परिभाषा से कोई सीधा संबंध नहीं है।\n\n
- कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘परकीयकरण’ (Alienation) का प्राथमिक कारण क्या है?\n
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- (A) धार्मिक अंधविश्वास
- (B) पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली और निजी स्वामित्व
- (C) शिक्षा का अभाव
- (D) पारिवारिक विवाद
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\nउत्तर: (B) पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली और निजी स्वामित्व\n
\nविस्तृत व्याख्या: मार्क्स का तर्क है कि पूंजीवाद में श्रमिक अपनी बनाई हुई वस्तु, उत्पादन की प्रक्रिया, अपने साथी श्रमिकों और अंततः स्वयं के मानवीय स्वभाव (Species-being) से अलग हो जाता है।\n
संदर्भ: यह विचार मार्क्स के ‘Economic and Philosophic Manuscripts of 1844’ में मिलता है।\n
अन्य विकल्प: (A), (C), और (D) सामाजिक समस्याएँ हो सकती हैं, लेकिन मार्क्स के सिद्धांत में परकीयकरण का मूल कारण आर्थिक संरचना है।\n\n
- मैक्स वेबर की ‘वेरस्टहेन’ (Verstehen) पद्धति का मुख्य उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) सांख्यिकीय डेटा का विश्लेषण करना
- (B) सामाजिक घटनाओं का वस्तुनिष्ठ मापन करना
- (C) कर्ता के दृष्टिकोण से सामाजिक क्रिया के अर्थ को समझना
- (D) प्राकृतिक विज्ञान के नियमों को समाजशास्त्र पर लागू करना
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\nउत्तर: (C) कर्ता के दृष्टिकोण से सामाजिक क्रिया के अर्थ को समझना\n
\nविस्तृत व्याख्या: ‘वेरस्टहेन’ एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ है ‘सहानुभूतिपूर्ण समझ’। वेबर का मानना था कि समाजशास्त्री को व्यक्ति के आंतरिक उद्देश्यों और अर्थों को समझना चाहिए।\n
संदर्भ: यह वेबर की ‘Interpretive Sociology’ (व्याख्यात्मक समाजशास्त्र) का आधार है।\n
अन्य विकल्प: (A) और (B) मात्रात्मक शोध से संबंधित हैं, जबकि (D) प्रत्यक्षवाद (Positivism) का लक्षण है।\n\n
- टैल्कोट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ (Latency) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment)
- (B) एकीकरण (Integration)
- (C) अनुकूलन (Adaptation)
- (D) प्रतिमान अनुरक्षण (Pattern Maintenance)
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\nउत्तर: (D) प्रतिमान अनुरक्षण (Pattern Maintenance)\n
\nविस्तृत व्याख्या: AGIL मॉडल में L का अर्थ है कि समाज को अपनी सांस्कृतिक मान्यताओं और मूल्यों को बनाए रखना होगा ताकि सामाजिक स्थिरता बनी रहे। परिवार और शिक्षा इस कार्य में मुख्य भूमिका निभाते हैं।\n
संदर्भ: यह पार्सन्स के ‘Structural Functionalism’ (संरचनात्मक कार्यात्मकता) का हिस्सा है।\n
अन्य विकल्प: (A) G के लिए, (B) I के लिए और (C) A के लिए उपयोग किया जाता है।\n\n
- रॉबर्ट के. मर्टन के अनुसार, ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अंतर्निहित कार्य’ (Latent Function) में क्या अंतर है?\n
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- (A) प्रकट कार्य अनपेक्षित होते हैं, अंतर्निहित अपेक्षित।
- (B) प्रकट कार्य इच्छित और ज्ञात होते हैं, अंतर्निहित अनपेक्षित और अज्ञात।
- (C) दोनों एक ही हैं।
- (D) अंतर्निहित कार्य हमेशा हानिकारक होते हैं।
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\nउत्तर: (B) प्रकट कार्य इच्छित और ज्ञात होते हैं, अंतर्निहित अनपेक्षित और अज्ञात।\n
\nविस्तृत व्याख्या: उदाहरण के लिए, विश्वविद्यालय का प्रकट कार्य शिक्षा देना है, लेकिन इसका अंतर्निहित कार्य सामाजिक नेटवर्किंग या जीवनसाथी खोजना हो सकता है।\n
संदर्भ: मर्टन ने इसे ‘Social Theory and Social Structure’ में समझाया है।\n
अन्य विकल्प: (A) परिभाषा को उल्टा करता है; (C) गलत है; (D) अंतर्निहित कार्य सकारात्मक भी हो सकते हैं।\n\n
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड के ‘स्व’ (Self) के सिद्धांत में ‘I’ और ‘Me’ के बीच क्या संबंध है?\n
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- (A) ‘I’ सामाजिक अपेक्षाओं का समूह है और ‘Me’ व्यक्तिगत इच्छा है।
- (B) ‘I’ व्यक्ति का रचनात्मक/स्वभाविक पक्ष है और ‘Me’ सामाजिक मानदंडों का आंतरिक रूप है।
- (C) ‘I’ और ‘Me’ एक ही सिक्के के दो पहलू नहीं हैं।
- (D) ‘Me’ केवल बचपन में विकसित होता है।
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\nउत्तर: (B) ‘I’ व्यक्ति का रचनात्मक/स्वभाविक पक्ष है और ‘Me’ सामाजिक मानदंडों का आंतरिक रूप है।\n
\nविस्तृत व्याख्या: ‘Me’ वह छवि है जो समाज हमारे बारे में रखता है (Socialized Self), जबकि ‘I’ उस छवि के प्रति व्यक्ति की तात्कालिक प्रतिक्रिया है।\n
संदर्भ: यह प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) का मुख्य हिस्सा है।\n
अन्य विकल्प: (A) परिभाषा को उलट देता है; (C) और (D) सिद्धांत के विरुद्ध हैं।\n\n
- पियरे बोर्दियू (Pierre Bourdieu) द्वारा प्रतिपादित ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) से क्या तात्पर्य है?\n
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- (A) बैंक में जमा धन
- (B) केवल भौतिक संपत्ति
- (C) ज्ञान, कौशल, शिक्षा और भाषाई दक्षता जो सामाजिक लाभ प्रदान करती है
- (D) किसी देश की कुल जीडीपी
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\nउत्तर: (C) ज्ञान, कौशल, शिक्षा और भाषाई दक्षता जो सामाजिक लाभ प्रदान करती है\n
\nविस्तृत व्याख्या: बोर्दियू का तर्क है कि उच्च वर्ग के लोग अपनी सांस्कृतिक पूंजी (जैसे खास तरह की बोली, शिष्टाचार) के माध्यम से अपनी सामाजिक स्थिति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाते हैं।\n
संदर्भ: यह अवधारणा ‘Reproduction in Education, Society and Culture’ में मिलती है।\n
अन्य विकल्प: (A) और (B) आर्थिक पूंजी हैं; (D) एक आर्थिक संकेतक है।\n\n
- एंथनी गिडिन्स के ‘संरचनाकरण सिद्धांत’ (Structuration Theory) का मुख्य तर्क क्या है?\n
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- (A) संरचना व्यक्ति को पूरी तरह नियंत्रित करती है।
- (B) व्यक्ति संरचना से स्वतंत्र है।
- (C) संरचना और एजेंसी (व्यक्ति) एक-दूसरे को परस्पर निर्मित करते हैं।
- (D) समाज केवल आर्थिक हितों से चलता है।
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\nउत्तर: (C) संरचना और एजेंसी (व्यक्ति) एक-दूसरे को परस्पर निर्मित करते हैं।\n
\nविस्तृत व्याख्या: गिडिन्स का मानना है कि सामाजिक नियम (संरचना) हमारे कार्यों को प्रभावित करते हैं, लेकिन हमारे कार्य उन नियमों को बदलते या मजबूत करते हैं। इसे ‘Duality of Structure’ कहा जाता है।\n
संदर्भ: यह विचार उनकी पुस्तक ‘The Constitution of Society’ में है।\n
अन्य विकल्प: (A) संरचनावाद और (B) व्यक्तिवाद के चरम रूप हैं, जिन्हें गिडिन्स नकारते हैं।\n\n
- सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) के संदर्भ में ‘बंद स्तरीकरण’ (Closed Stratification) का उदाहरण कौन सा है?\n
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- (A) वर्ग (Class)
- (B) जाति (Caste)
- (C) पेशा (Occupation)
- (D) शिक्षा (Education)
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\nउत्तर: (B) जाति (Caste)\n
\nविस्तृत व्याख्या: बंद स्तरीकरण वह होता है जहाँ व्यक्ति की सामाजिक स्थिति जन्म से निर्धारित होती है और उसमें बदलाव (Social Mobility) लगभग असंभव होता है।\n
संदर्भ: जाति व्यवस्था भारत में बंद स्तरीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।\n
अन्य विकल्प: वर्ग, पेशा और शिक्षा ‘खुले स्तरीकरण’ के उदाहरण हैं क्योंकि यहाँ योग्यता से स्थिति बदली जा सकती है।\n\n
- मार्क्स के अनुसार ‘प्रजाति-सत्ता’ (Species-being) का ह्रास किस कारण होता है?\n
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- (A) अत्यधिक व्यायाम के कारण
- (B) धर्म के कारण
- (C) श्रम के परकीयकरण (Alienation of Labor) के कारण
- (D) जनसंख्या वृद्धि के कारण
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\nउत्तर: (C) श्रम के परकीयकरण (Alienation of Labor) के कारण\n
\nविस्तृत व्याख्या: मनुष्य की विशिष्टता उसकी सचेत और रचनात्मक श्रम करने की क्षमता है। जब पूंजीवाद श्रम को एक वस्तु बना देता है, तो मनुष्य अपनी इस विशिष्टता (‘Species-being’) को खो देता है।\n
संदर्भ: मार्क्स के प्रारंभिक मानवतावादी लेखन।\n
अन्य विकल्प: (A), (B), और (D) परकीयकरण के मूल कारण नहीं हैं।\n\n
- मातृवंशीय (Matrilineal) और मातृस्थानीय (Matrilocal) परिवार में क्या मुख्य अंतर है?\n
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- (A) मातृवंशीय में वंश माँ से चलता है, मातृस्थानीय में विवाह के बाद पति पत्नी के घर रहता है।
- (B) दोनों का अर्थ एक ही है।
- (C) मातृवंशीय में पिता का अधिकार होता है।
- (D) मातृस्थानीय में वंश पिता से चलता है।
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\nउत्तर: (A) मातृवंशीय में वंश माँ से चलता है, मातृस्थानीय में विवाह के बाद पति पत्नी के घर रहता है।\n
\nविस्तृत व्याख्या: ‘वंश’ (Lineage) का संबंध उत्तराधिकार से है (Matrilineal), जबकि ‘स्थान’ (Residence) का संबंध रहने की जगह से है (Matrilocal)।\n
संदर्भ: समाजशास्त्रीय नातेदारी (Kinship) अध्ययन।\n
अन्य विकल्प: (B), (C), और (D) तकनीकी रूप से गलत हैं।\n\n
- धार्मिक समाजशास्त्र में ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र/लौकिक’ (Profane) का भेद किसने दिया?\n
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- (A) मैक्स वेबर
- (B) कार्ल मार्क्स
- (C) एमिल दुर्खीम
- (D) ओगबर्न
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\nउत्तर: (C) एमिल दुर्खीम\n
\nविस्तृत व्याख्या: दुर्खीम के अनुसार, धर्म का मूल आधार दुनिया का दो भागों में विभाजन है—पवित्र (जिसकी पूजा की जाती है और जो अलग रखा जाता है) और लौकिक (दैनिक जीवन की साधारण चीजें)।\n
संदर्भ: उनकी पुस्तक ‘The Elementary Forms of the Religious Life’ में।\n
अन्य विकल्प: वेबर ने धर्म के आर्थिक प्रभावों पर ध्यान दिया और मार्क्स ने इसे ‘अफीम’ कहा।\n\n
- शिक्षा के समाजशास्त्र में ‘हिडन करिकुलम’ (Hidden Curriculum) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) वह पाठ्यक्रम जो आधिकारिक तौर पर लिखित है।
- (B) वह अनकहे मूल्य, व्यवहार और मानदंड जो छात्र स्कूल में अनौपचारिक रूप से सीखते हैं।
- (C) केवल गणित और विज्ञान की शिक्षा।
- (D) शिक्षकों द्वारा गुप्त रूप से दी गई परीक्षा के प्रश्न।
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\nउत्तर: (B) वह अनकहे मूल्य, व्यवहार और मानदंड जो छात्र स्कूल में अनौपचारिक रूप से सीखते हैं।\n
\nविस्तृत व्याख्या: जैसे समय की पाबंदी, सत्ता का सम्मान और प्रतिस्पर्धा। ये चीजें किताबों में नहीं लिखी होतीं, लेकिन स्कूल के वातावरण से सीखी जाती हैं।\n
संदर्भ: यह अवधारणा सामाजिक पुनरुत्पादन (Social Reproduction) के सिद्धांत से जुड़ी है।\n
अन्य विकल्प: (A) औपचारिक पाठ्यक्रम है। (C) और (D) गलत हैं।\n\n
- मैक्स वेबर के अनुसार, ‘करिश्माई सत्ता’ (Charismatic Authority) की मुख्य विशेषता क्या है?\n
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- (A) यह लिखित कानूनों पर आधारित होती है।
- (B) यह परंपराओं और रीति-रिवाजों पर आधारित होती है।
- (C) यह नेता के असाधारण व्यक्तिगत गुणों और आकर्षण पर आधारित होती है।
- (D) यह केवल लोकतांत्रिक चुनावों से आती है।
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\nउत्तर: (C) यह नेता के असाधारण व्यक्तिगत गुणों और आकर्षण पर आधारित होती है।\n
\nविस्तृत व्याख्या: करिश्माई सत्ता तब उत्पन्न होती है जब अनुयायी किसी व्यक्ति को ईश्वरीय, असाधारण या नायक मानते हैं (जैसे महात्मा गांधी या नेपोलियन)।\n
संदर्भ: वेबर का सत्ता का वर्गीकरण (Traditional, Legal-Rational, Charismatic)।\n
अन्य विकल्प: (A) कानूनी-तर्कसंगत सत्ता है; (B) पारंपरिक सत्ता है।\n\n
- ‘ग्राउंडेड थ्योरी’ (Grounded Theory) अनुसंधान पद्धति की क्या विशेषता है?\n
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- (A) पहले से मौजूद सिद्धांत का परीक्षण करना।
- (B) डेटा संग्रह के बाद डेटा से ही सिद्धांत विकसित करना।
- (C) केवल प्रयोगशाला प्रयोगों का उपयोग करना।
- (D) केवल ऐतिहासिक दस्तावेजों का विश्लेषण करना।
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\nउत्तर: (B) डेटा संग्रह के बाद डेटा से ही सिद्धांत विकसित करना।\n
\nविस्तृत व्याख्या: इसमें शोधकर्ता पहले से कोई परिकल्पना (Hypothesis) नहीं बनाता, बल्कि क्षेत्र (Field) में जाकर डेटा एकत्र करता है और उस पैटर्न के आधार पर सिद्धांत बनाता है।\n
संदर्भ: इसे ग्लेसर और स्ट्रॉस (Glaser and Strauss) ने विकसित किया था।\n
अन्य विकल्प: (A) निगमनात्मक (Deductive) पद्धति है, जबकि ग्राउंडेड थ्योरी आगमनात्मक (Inductive) है।\n\n
- अनुसंधान में ‘ट्राइएंगुलेशन’ (Triangulation) का उपयोग क्यों किया जाता है?\n
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- (A) डेटा संग्रह की गति बढ़ाने के लिए।
- (B) केवल एक ही विधि का उपयोग करने के लिए।
- (C) विभिन्न विधियों (जैसे मात्रात्मक और गुणात्मक) का उपयोग करके परिणामों की वैधता और सटीकता बढ़ाने के लिए।
- (D) नमूने के आकार (Sample Size) को छोटा करने के लिए।
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\nउत्तर: (C) विभिन्न विधियों (जैसे मात्रात्मक और गुणात्मक) का उपयोग करके परिणामों की वैधता और सटीकता बढ़ाने के लिए।\n
\nविस्तृत व्याख्या: जब एक ही समस्या को सर्वे (Quant) और इंटरव्यू (Qual) दोनों से परखा जाता है, तो निष्कर्ष अधिक विश्वसनीय होते हैं। हालिया शोध प्रवृत्तियां ‘मिक्स्ड-मेथड्स’ (Mixed-methods) पर जोर देती हैं ताकि समावेशी समाजों के लिए बेहतर पैमाने विकसित किए जा सकें।\n
संदर्भ: आधुनिक अनुसंधान पद्धति (Research Methodology)।\n
अन्य विकल्प: (A), (B) और (D) ट्राइएंगुलेशन के उद्देश्य नहीं हैं।\n\n
- ‘प्रतिभागी अवलोकन’ (Participant Observation) किस प्रकार के शोध का हिस्सा है?\n
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- (A) प्रयोगात्मक शोध
- (B) नृवंशविज्ञान (Ethnography)
- (C) सामग्री विश्लेषण (Content Analysis)
- (D) सर्वेक्षण शोध
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\nउत्तर: (B) नृवंशविज्ञान (Ethnography)\n
\nविस्तृत व्याख्या: इसमें शोधकर्ता अध्ययन समूह का हिस्सा बनकर उनके दैनिक जीवन और संस्कृति का गहराई से अवलोकन करता है।\n
संदर्भ: यह गुणात्मक शोध (Qualitative Research) की एक प्रमुख विधि है।\n
अन्य विकल्प: (A) नियंत्रित वातावरण में होता है; (C) लिखित सामग्री का विश्लेषण है; (D) प्रश्नावली आधारित होता है।\n\n
- एम. एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘प्रभावी जाति’ (Dominant Caste) की क्या विशेषता है?\n
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- (A) केवल अनुष्ठानिक उच्चता होना।
- (B) केवल बड़ी जनसंख्या होना।
- (C) संख्यात्मक शक्ति, आर्थिक संसाधन (भूमि) और राजनीतिक प्रभाव का मिश्रण।
- (D) केवल शिक्षा में अग्रणी होना।
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\nउत्तर: (C) संख्यात्मक शक्ति, आर्थिक संसाधन (भूमि) और राजनीतिक प्रभाव का मिश्रण।\n
\nविस्तृत व्याख्या: प्रभावी जाति वह है जिसके पास अपनी जाति के साथ-साथ क्षेत्र में जमीन का स्वामित्व और राजनीतिक शक्ति हो, चाहे उसकी अनुष्ठानिक स्थिति (Ritual Status) कुछ भी हो।\n
संदर्भ: श्रीनिवास का भारतीय ग्रामीण समाज का अध्ययन।\n
अन्य विकल्प: (A), (B) और (D) अकेले प्रभावी जाति बनने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।\n\n
- भारतीय समाज में ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
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- (A) उच्च जातियों का निम्न जातियों के रीति-रिवाजों को अपनाना।
- (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवन शैली को अपनाकर अपनी स्थिति सुधारने का प्रयास।
- (C) केवल संस्कृत भाषा सीखना।
- (D) शहरीकरण की प्रक्रिया।
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\nउत्तर: (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवन शैली को अपनाकर अपनी स्थिति सुधारने का प्रयास।\n
\nविस्तृत व्याख्या: इसमें निम्न जातियाँ उच्च जातियों के खान-पान, पूजा पद्धति और जीवन शैली को अपनाती हैं ताकि सामाजिक पदानुक्रम में ऊपर उठ सकें।\n
संदर्भ: एम. एन. श्रीनिवास।\n
अन्य विकल्प: (A) इसका उल्टा है; (C) यह केवल भाषाई प्रक्रिया है; (D) यह एक भौगोलिक और सामाजिक बदलाव है।\n\n
- लुई ड्यूमों (Louis Dumont) ने भारतीय जाति व्यवस्था के मूल सिद्धांत के रूप में किसे माना है?\n
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- (A) समानता (Equality)
- (B) शुद्धता और अशुद्धता का पदानुक्रम (Hierarchy of Purity and Pollution)
- (C) आर्थिक वर्ग (Economic Class)
- (D) राजनीतिक शक्ति (Political Power)
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\nउत्तर: (B) शुद्धता और अशुद्धता का पदानुक्रम (Hierarchy of Purity and Pollution)\n
\nविस्तृत व्याख्या: ड्यूमों का तर्क है कि जाति व्यवस्था केवल शक्ति का खेल नहीं है, बल्कि यह ‘शुद्ध’ और ‘अशुद्ध’ के धार्मिक/सांस्कृतिक विचार पर आधारित एक पदानुक्रम है।\n
संदर्भ: उनकी पुस्तक ‘Homo Hierarchicus’।\n
अन्य विकल्प: (A) जाति के विरुद्ध है; (C) और (D) को वे गौण मानते थे।\n\n
- ‘जजमानी प्रथा’ (Jajmani System) मुख्य रूप से किससे संबंधित है?\n
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- (A) शहरी औद्योगिक संबंधों से।
- (B) ग्रामीण भारत में जातियों के बीच पारस्परिक सेवा और विनिमय संबंधों से।
- (C) आधुनिक बैंकिंग प्रणाली से।
- (D) केवल धार्मिक अनुष्ठानों से।
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\nउत्तर: (B) ग्रामीण भारत में जातियों के बीच पारस्परिक सेवा और विनिमय संबंधों से।\n
\nविस्तृत व्याख्या: इसमें एक सेवा प्रदाता जाति (कमीन) एक संरक्षक जाति (जजमान) को सेवा देती थी और बदले में उसे अनाज या अन्य वस्तुएं मिलती थीं।\n
संदर्भ: ग्रामीण समाजशास्त्र।\n
अन्य विकल्प: (A), (C) और (D) इस आर्थिक-सामाजिक व्यवस्था का वर्णन नहीं करते।\n\n
- शहरी समाजशास्त्र में ‘जेंट्रिफिकेशन’ (Gentrification) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) शहरों से लोगों का पलायन।
- (B) गरीब बस्तियों का स्लम में बदलना।
- (C) किसी पुराने या निम्न-आय वाले शहरी क्षेत्र का पुनर्विकास होकर उच्च-आय वाले वर्ग के लिए आकर्षक बनना।
- (D) केवल सड़कों का चौड़ीकरण करना।
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\nउत्तर: (C) किसी पुराने या निम्न-आय वाले शहरी क्षेत्र का पुनर्विकास होकर उच्च-आय वाले वर्ग के लिए आकर्षक बनना।\n
\nविस्तृत व्याख्या: इसमें अमीर लोग पुराने इलाकों में घर खरीदते हैं और उन्हें आधुनिक बनाते हैं, जिससे वहां की कीमतें बढ़ जाती हैं और मूल गरीब निवासी बाहर हो जाते हैं।\n
संदर्भ: शहरी समाजशास्त्र और शहरी भूगोल।\n
अन्य विकल्प: (A) डी-अर्बनाइजेशन है; (B) स्लमिफिकेशन है।\n\n
- समकालीन समाज में महिलाओं पर ‘दोहरे बोझ’ (Double Burden) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) दो अलग-अलग नौकरियों का करना।
- (B) घर के अवैतनिक घरेलू काम और बाहर की सवैतनिक नौकरी दोनों का प्रबंधन करना।
- (C) दो बच्चों की परवरिश करना।
- (D) केवल शिक्षा और करियर के बीच चुनाव करना।
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\nउत्तर: (B) घर के अवैतनिक घरेलू काम और बाहर की सवैतनिक नौकरी दोनों का प्रबंधन करना।\n
\nविस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्रीय अध्ययनों (जैसे हालिया रिपोर्ट्स) से पता चलता है कि कामकाजी महिलाएं घर पर भी पुरुषों की तुलना में अधिक ‘मल्टीटास्किंग’ (Multitasking) करती हैं, जिससे उन पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ता है।\n
संदर्भ: जेंडर स्टडीज और परिवार का समाजशास्त्र।\n
अन्य विकल्प: (A), (C) और (D) इस अवधारणा के व्यापक सामाजिक अर्थ को स्पष्ट नहीं करते।\n\n
- ‘सापेक्ष वंचना’ (Relative Deprivation) का सिद्धांत क्या बताता है?\n
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- (A) व्यक्ति तब दुखी होता है जब उसके पास बुनियादी जरूरतें नहीं होतीं।
- (B) व्यक्ति तब असंतोष महसूस करता है जब वह अपनी स्थिति की तुलना दूसरों से करता है और खुद को कमतर पाता है।
- (C) गरीबी केवल धन की कमी है।
- (D) सभी लोग समाज में समान रूप से वंचित हैं।
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\nउत्तर: (B) व्यक्ति तब असंतोष महसूस करता है जब वह अपनी स्थिति की तुलना दूसरों से करता है और खुद को कमतर पाता है।\n
\nविस्तृत व्याख्या: यह पूर्ण गरीबी के बजाय ‘तुलनात्मक गरीबी’ की बात करता है। यह अक्सर सामाजिक आंदोलनों और विद्रोहों का कारण बनता है।\n
संदर्भ: सामाजिक मनोविज्ञान और सामाजिक समस्याएं।\n
अन्य विकल्प: (A) पूर्ण वंचना (Absolute Deprivation) है।\n\n
- ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) का क्या अर्थ हो सकता है?\n
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- (A) कंप्यूटर का उपयोग केवल उच्च जातियों द्वारा करना।
- (B) डिजिटल संसाधनों, तकनीक और ऑनलाइन अवसरों तक पहुँच में जाति आधारित असमानता का बने रहना।
- (C) इंटरनेट पर जाति आधारित समुदायों का बनना।
- (D) डिजिटल साक्षरता का पूर्ण अभाव।
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\nउत्तर: (B) डिजिटल संसाधनों, तकनीक और ऑनलाइन अवसरों तक पहुँच में जाति आधारित असमानता का बने रहना।\n
\nविस्तृत व्याख्या: यह इस विचार को दर्शाता है कि तकनीक ने सामाजिक भेदभाव को खत्म नहीं किया है, बल्कि पुराने भेदभाव नए डिजिटल रूपों (जैसे एल्गोरिथम बायस या डिजिटल डिवाइड) में बदल गए हैं।\n
संदर्भ: समकालीन भारतीय समाज और तकनीक का समाजशास्त्र।\n
अन्य विकल्प: (A) और (C) केवल लक्षण हैं, जबकि (B) मूल समाजशास्त्रीय अवधारणा है।\n\n
- जी. एस. घुर्ये (G.S. Ghurye) ने जनजातियों को किस रूप में देखा?\n
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- (A) पूरी तरह से अलग और विदेशी समुदायों के रूप में।
- (B) ‘पिछड़े हिंदू’ (Backward Hindus) के रूप में।
- (C) केवल शिकारियों और संग्राहकों के रूप में।
- (D) एक अलग राजनीतिक इकाई के रूप में।
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\nउत्तर: (B) ‘पिछड़े हिंदू’ (Backward Hindus) के रूप में।\n
\nविस्तृत व्याख्या: घुर्ये का मानना था कि भारतीय जनजातियाँ हिंदू समाज के संपर्क में रही हैं और वे धीरे-धीरे हिंदू संस्कृति में एकीकृत हो गई हैं।\n
संदर्भ: भारतीय समाजशास्त्र और जनजातीय अध्ययन।\n
अन्य विकल्प: वेरियर एल्विन जैसे विचारकों ने उन्हें अलग पहचान देने की बात की थी।\n\n
- ‘आधुनिकीकरण’ (Modernization) और ‘पश्चिमीकरण’ (Westernization) में मुख्य अंतर क्या है?\n
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- (A) दोनों एक ही प्रक्रिया हैं।
- (B) आधुनिकीकरण एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है (तर्क और विज्ञान), जबकि पश्चिमीकरण विशेष रूप से पश्चिमी संस्कृति को अपनाने से संबंधित है।
- (C) पश्चिमीकरण केवल धर्म से जुड़ा है।
- (D) आधुनिकीकरण केवल तकनीक का नाम है।
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\nउत्तर: (B) आधुनिकीकरण एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है (तर्क और विज्ञान), जबकि पश्चिमीकरण विशेष रूप से पश्चिमी संस्कृति को अपनाने से संबंधित है।\n
\nविस्तृत व्याख्या: एक व्यक्ति पश्चिमी कपड़े पहनकर ‘पश्चिमीकृत’ हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर वह ‘आधुनिक’ बनता है।\n
संदर्भ: एम. एन. श्रीनिवास।\n
अन्य विकल्प: (A), (C) और (D) इन दोनों के सूक्ष्म अंतर को नजरअंदाज करते हैं।\n\n
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