समाजशास्त्र की वैचारिक गहराई: अपनी तैयारी को दें एक नई दिशा
\n\n
समाजशास्त्र केवल समाज का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह दुनिया को देखने का एक नया नजरिया है। आज का यह विशेष अभ्यास सेट आपकी विश्लेषणात्मक क्षमता को चुनौती देने और जटिल सिद्धांतों को स्पष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आइए, समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से अपनी समझ को और अधिक परिष्कृत करें और प्रतियोगी परीक्षाओं की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाएं।
\n\n
\n\n
- \n
- कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘अलगाव’ (Alienation) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब:\n
- \n
- (A) श्रमिक अपनी उत्पादन की प्रक्रिया पर नियंत्रण खो देता है।
- (B) समाज में धर्म का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
- (C) व्यक्ति समाज के नियमों का पालन करना बंद कर देता है।
- (D) केवल पूंजीपतियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (A)
\n
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने ‘अलगाव’ की अवधारणा को पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली के संदर्भ में समझाया था। उनके अनुसार, श्रमिक अपने द्वारा उत्पादित वस्तु, उत्पादन की प्रक्रिया, अपने साथी श्रमिकों और अंततः स्वयं के मानवीय स्वभाव (Species-being) से अलग हो जाता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब श्रमिक का अपने काम और उत्पाद पर कोई नियंत्रण नहीं रहता। विकल्प (B), (C) और (D) मार्क्स के अलगाव के सिद्धांत का मुख्य केंद्र नहीं हैं।
\n
- मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित ‘आदर्श प्रकार’ (Ideal Type) क्या है?\n
- \n
- (A) एक नैतिक रूप से श्रेष्ठ समाज का मॉडल।
- (B) समाज में मौजूद वास्तविक स्थितियों का सटीक विवरण।
- (C) एक मानसिक निर्माण (Conceptual tool) जिसका उपयोग वास्तविकता की तुलना के लिए किया जाता है।
- (D) एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था जो पूरी तरह से न्यायपूर्ण हो।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (C)
\n
विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर के लिए ‘आदर्श प्रकार’ कोई ‘आदर्श’ या ‘परफेक्ट’ स्थिति नहीं है, बल्कि एक विश्लेषणात्मक उपकरण है। यह किसी सामाजिक घटना के विशिष्ट लक्षणों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है ताकि वास्तविक दुनिया की घटनाओं की तुलना उससे की जा सके और अंतर समझा जा सके। विकल्प (A) और (D) इसे नैतिक अर्थों में लेते हैं, जो गलत है।
\n
- एमिल दुर्खीम ने ‘अनोमी’ (Anomie) की अवधारणा का उपयोग किस संदर्भ में किया था?\n
- \n
- (A) सामाजिक एकजुटता की अधिकता।
- (B) सामाजिक मानदंडों का अभाव या विखंडन।
- (C) वर्ग संघर्ष की चरम स्थिति।
- (D) धार्मिक विश्वासों में तीव्र वृद्धि।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम के अनुसार, ‘अनोमी’ वह स्थिति है जब समाज में तेजी से परिवर्तन होते हैं और पुराने नियम अब प्रभावी नहीं रहते, जबकि नए नियम अभी स्थापित नहीं हुए होते। यह स्थिति व्यक्ति में दिशाहीनता और तनाव पैदा करती है, जो अक्सर ‘अनोमिक आत्महत्या’ का कारण बनती है। विकल्प (C) मार्क्सवादी दृष्टिकोण है।
\n
- टैलकोट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ (Latency) का क्या अर्थ है?\n
- \n
- (A) लक्ष्यों का निर्धारण करना।
- (B) संसाधनों का संग्रहण करना।
- (C) सांस्कृतिक मूल्यों और प्रतिमानों का रखरखाव करना।
- (D) बाहरी वातावरण के साथ अनुकूलन करना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (C)
\n
विस्तृत व्याख्या: पार्सन्स के AGIL मॉडल में L (Latency/Pattern Maintenance) का अर्थ है समाज के बुनियादी मूल्यों, विश्वासों और सांस्कृतिक प्रतिमानों को बनाए रखना ताकि सामाजिक व्यवस्था स्थिर रहे। Adaptation (A) पर्यावरण से संबंधित है, Goal Attainment (G) उद्देश्यों से, और Integration (I) सामाजिक समन्वय से।
\n
- रॉबर्ट के. मर्टन के अनुसार, ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अंतर्निहित कार्य’ (Latent Function) में क्या अंतर है?\n
- \n
- (A) प्रकट कार्य अनपेक्षित होते हैं, जबकि अंतर्निहित कार्य अपेक्षित होते हैं।
- (B) प्रकट कार्य मान्यता प्राप्त और अपेक्षित होते हैं, जबकि अंतर्निहित कार्य अनपेक्षित और अज्ञात होते हैं।
- (C) दोनों एक ही बात हैं, केवल शब्दों का अंतर है।
- (D) प्रकट कार्य नकारात्मक होते हैं और अंतर्निहित कार्य सकारात्मक होते हैं।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: मर्टन ने कार्यात्मक विश्लेषण में स्पष्ट किया कि किसी भी सामाजिक संस्था के कुछ ज्ञात उद्देश्य होते हैं (प्रकट कार्य), लेकिन उनके कुछ ऐसे परिणाम भी होते हैं जो अनजाने में घटित होते हैं (अंतर्निहित कार्य)। उदाहरण के लिए, शिक्षा का प्रकट कार्य ज्ञान देना है, लेकिन उसका अंतर्निहित कार्य सामाजिक नेटवर्किंग बनाना हो सकता है।
\n
- सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) के संदर्भ में डेविस और मूर का कार्यात्मक सिद्धांत क्या तर्क देता है?\n
- \n
- (A) स्तरीकरण समाज में अन्याय का कारण है।
- (B) स्तरीकरण अपरिहार्य है क्योंकि यह समाज की सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं को सबसे योग्य व्यक्तियों से भरने के लिए प्रेरित करता है।
- (C) स्तरीकरण केवल आर्थिक असमानता का परिणाम है।
- (D) स्तरीकरण को पूरी तरह से समाप्त किया जा सकता है।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: डेविस और मूर के अनुसार, कुछ पद दूसरों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होते हैं और उनके लिए विशेष कौशल की आवश्यकता होती है। इसलिए, समाज इन पदों के लिए अधिक पुरस्कार (प्रतिष्ठा, धन) प्रदान करता है ताकि योग्य लोग वहां पहुंचें। यह स्तरीकरण को कार्यात्मक मानता है, जबकि तुमिन (Tumin) ने इसकी आलोचना की थी।
\n
- विलियम ओगबर्न द्वारा प्रतिपादित ‘सांस्कृतिक विलंब’ (Cultural Lag) का क्या अर्थ है?\n
- \n
- (A) जब संस्कृति का विकास पूरी तरह रुक जाता है।
- (B) जब भौतिक संस्कृति (तकनीक) का विकास, अभौतिक संस्कृति (मूल्यों, नियमों) की तुलना में तेजी से होता है।
- (C) प्राचीन संस्कृतियों का आधुनिक युग में लुप्त होना।
- (D) विभिन्न संस्कृतियों के बीच संघर्ष होना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: ओगबर्न के अनुसार, तकनीक और भौतिक साधन (Material Culture) बहुत तेजी से बदलते हैं, लेकिन हमारे सामाजिक मूल्य, कानून और रीति-रिवाज (Non-material Culture) धीमी गति से बदलते हैं। इस अंतराल को ही ‘सांस्कृतिक विलंब’ कहा जाता है।
\n
- ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Fact) की अवधारणा किसने दी थी और इसे कैसे परिभाषित किया गया है?\n
- \n
- (A) मैक्स वेबर; व्यक्तिगत क्रियाओं का समूह।
- (B) एमिल दुर्खीम; वे तरीके के सोचने, महसूस करने और कार्य करने जो व्यक्ति के बाहर होते हैं और उस पर दबाव डालते हैं।
- (C) कार्ल मार्क्स; वर्ग हितों का प्रतिबिंब।
- (D) हर्बर्ट मीड; प्रतीकात्मक अंतःक्रियाओं का परिणाम।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विज्ञान बनाने के लिए ‘सामाजिक तथ्य’ की अवधारणा दी। उनके अनुसार, सामाजिक तथ्य बाहरी (External) और बाध्यकारी (Constraining) होते हैं, जैसे कानून, नैतिकता और रीति-रिवाज।
\n
- संयुक्त परिवार (Joint Family) के विघटन का मुख्य समाजशास्त्रीय कारण क्या माना जाता है?\n
- \n
- (A) केवल जनसंख्या में वृद्धि।
- (B) औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और व्यक्तिवाद का उदय।
- (C) शिक्षा का अभाव।
- (D) धार्मिक कट्टरता में वृद्धि।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: आधुनिक समाज में औद्योगिक विकास ने लोगों को रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन करने पर मजबूर किया, जिससे संयुक्त परिवार टूटकर एकल परिवारों (Nuclear Families) में बदल गए। साथ ही, सामूहिक हितों के बजाय व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Individualism) को प्राथमिकता मिलने लगी।
\n
- धर्म के समाजशास्त्र में ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र/लौकिक’ (Profane) के बीच अंतर किसने स्थापित किया?\n
- \n
- (A) मैक्स वेबर
- (B) एमिल दुर्खीम
- (C) कार्ल मार्क्स
- (D) ऑगस्ट कॉम्टे
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘The Elementary Forms of the Religious Life’ में तर्क दिया कि धर्म का सार पवित्र और लौकिक के बीच के विभाजन में है। पवित्र वह है जिसे समाज विशेष सम्मान और सुरक्षा देता है, जबकि लौकिक दैनिक जीवन की साधारण गतिविधियां हैं।
\n
- मैक्स वेबर के अनुसार, नौकरशाही (Bureaucracy) की मुख्य विशेषता क्या है?\n
- \n
- (A) व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित निर्णय।
- (B) नियमों का सख्त पालन और पदानुक्रमित संरचना (Hierarchy)।
- (C) अनौपचारिक संचार व्यवस्था।
- (D) केवल राजनीतिक प्रभाव से संचालित होना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: वेबर ने नौकरशाही को तर्कसंगत-कानूनी सत्ता (Rational-Legal Authority) का उदाहरण माना। इसकी मुख्य विशेषताओं में लिखित नियम, स्पष्ट श्रम विभाजन, योग्यता आधारित चयन और एक निश्चित पदानुक्रम शामिल हैं।
\n
- शिक्षा के समाजशास्त्र में ‘छिपा हुआ पाठ्यक्रम’ (Hidden Curriculum) से क्या तात्पर्य है?\n
- \n
- (A) वह पाठ्यक्रम जो केवल प्रतिभाशाली छात्रों को पढ़ाया जाता है।
- (B) वे अनौपचारिक मूल्य, व्यवहार और मानदंड जो छात्र स्कूल में अनजाने में सीखते हैं।
- (C) वह पाठ्यक्रम जिसे सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया हो।
- (D) डिजिटल लर्निंग के माध्यम से पढ़ाया जाने वाला गुप्त डेटा।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: ‘हिडन करिकुलम’ उन सामाजिक संदेशों और व्यवहारों को संदर्भित करता है जो औपचारिक पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा नहीं होते, लेकिन स्कूल के माहौल, अनुशासन और शिक्षकों के व्यवहार से सीखे जाते हैं (जैसे आज्ञाकारिता और समय की पाबंदी)।
\n
- क्षेत्रीय कार्य (Fieldwork) और नृवंशविज्ञान (Ethnography) के संबंध में कौन सा कथन सत्य है?\n
- \n
- (A) यह केवल मात्रात्मक डेटा एकत्र करने की विधि है।
- (B) इसमें शोधकर्ता को अध्ययन समूह के साथ गहराई से जुड़ना और उनके स्वाभाविक परिवेश में रहना पड़ता है।
- (C) यह केवल प्रयोगशाला प्रयोगों तक सीमित है।
- (D) इसमें केवल द्वितीयक स्रोतों (Secondary Sources) का उपयोग होता है।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: नृवंशविज्ञान एक गुणात्मक पद्धति है जहाँ शोधकर्ता प्रत्यक्ष अवलोकन (Participant Observation) के माध्यम से लोगों के जीवन का अध्ययन करता है। हालिया शोध प्रवृत्तियों में, ऐतिहासिक स्थलों की खुदाई और सामुदायिक जुड़ाव (जैसे माइनिंग टाउन का अध्ययन) इसी पद्धति का हिस्सा हैं।
\n
- सामाजिक अनुसंधान में ‘त्रिकोणीयकरण’ (Triangulation) का क्या उद्देश्य है?\n
- \n
- (A) डेटा को तीन अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद करना।
- (B) एक ही घटना का अध्ययन करने के लिए कई विधियों या डेटा स्रोतों का उपयोग करना ताकि परिणामों की वैधता बढ़े।
- (C) शोध के समय को तीन चरणों में विभाजित करना।
- (D) केवल तीन प्रतिभागियों का साक्षात्कार लेना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: त्रिकोणीयकरण वह प्रक्रिया है जिसमें शोधकर्ता मात्रात्मक (Quantitative) और गुणात्मक (Qualitative) दोनों विधियों का मेल करता है ताकि किसी एक विधि की त्रुटि को दूसरी विधि से संतुलित किया जा सके और निष्कर्ष अधिक विश्वसनीय हो।
\n
- समकालीन समाजशास्त्र में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है?\n
- \n
- (A) यह समाजशास्त्र को पूरी तरह समाप्त कर देगा।
- (B) इसका उपयोग जटिल डेटा पैटर्न की पहचान करने और सामाजिक व्यवहार के विजुअल मॉडल बनाने में किया जा रहा है।
- (C) AI का उपयोग केवल गणना करने के लिए किया जा सकता है, विश्लेषण के लिए नहीं।
- (D) यह केवल प्राकृतिक विज्ञानों के लिए उपयोगी है।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: आधुनिक समाजशास्त्र में ‘कंप्यूटेशनल सोशियोलॉजी’ का उदय हुआ है। AI का उपयोग अब जेंडर भूमिकाओं, घरेलू काम के वितरण और सोशल मीडिया व्यवहार के विश्लेषण के लिए विजुअल कॉन्जॉइंट्स और बिग डेटा एनालिटिक्स के रूप में किया जा रहा है।
\n
- सहभागी अवलोकन (Participant Observation) की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?\n
- \n
- (A) डेटा की कमी।
- (B) शोधकर्ता का समूह में अत्यधिक घुल-मिल जाना जिससे उसकी निष्पक्षता (Objectivity) प्रभावित हो सकती है।
- (C) बहुत कम समय लगना।
- (D) केवल शिक्षित लोगों का अध्ययन करना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: इसे ‘Going Native’ कहा जाता है। जब शोधकर्ता अध्ययन समूह की भावनाओं और मूल्यों में पूरी तरह बह जाता है, तो वह एक बाहरी विश्लेषक के रूप में अपनी तटस्थता खो देता है, जिससे शोध के परिणामों में पूर्वाग्रह आ सकता है।
\n
- भारतीय समाज के संदर्भ में एम.एन. श्रीनिवास द्वारा दी गई ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
- \n
- (A) उच्च जातियों का निम्न जातियों की संस्कृति को अपनाना।
- (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों (विशेषकर ब्राह्मणों) के रीति-रिवाजों, विचारधारा और जीवनशैली को अपनाना।
- (C) सभी जातियों का पूरी तरह से समाप्त हो जाना।
- (D) केवल संस्कृत भाषा का अध्ययन करना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कोई निम्न जाति या जनजाति उच्च जाति के रीति-रिवाजों और विश्वासों को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करती है। यह गतिशीलता जाति पदानुक्रम के भीतर होती है, न कि पदानुक्रम को बदलती है।
\n
- जी. एस. घुर्ये और वर्जीयर एल्विन के बीच ‘जनजातियों’ (Tribals) को लेकर मुख्य विवाद क्या था?\n
- \n
- (A) घुर्ये उन्हें पूरी तरह विदेशी मानते थे, जबकि एल्विन उन्हें भारतीय।
- (B) घुर्ये उन्हें हिंदू समाज का हिस्सा (पिछड़े हिंदू) मानते थे, जबकि एल्विन उन्हें अलग पहचान रखने वाले समूह के रूप में देखते थे और अलगाव का समर्थन करते थे।
- (C) दोनों का मत एक ही था।
- (D) एल्विन उन्हें केवल शहरी मानते थे।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: घुर्ये ने जनजातियों को ‘पिछड़े हिंदू’ कहा और उनके एकीकरण (Integration) पर जोर दिया। इसके विपरीत, एल्विन का मानना था कि बाहरी हस्तक्षेप जनजातीय संस्कृति को नष्ट कर देगा, इसलिए उन्होंने ‘National Park’ जैसी अलगाववादी नीति का सुझाव दिया था।
\n
- ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) से क्या तात्पर्य है?\n
- \n
- (A) इंटरनेट पर केवल उच्च जातियों का उपलब्ध होना।
- (B) तकनीक और डिजिटल संसाधनों तक पहुँच में जाति-आधारित असमानता का बने रहना।
- (C) जाति व्यवस्था का पूरी तरह से खत्म हो जाना।
- (D) सोशल मीडिया पर जातिगत गर्व का प्रसार।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: डिजिटल डिवाइड केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। डिजिटल जाति व्यवस्था यह दर्शाती है कि कैसे सामाजिक पूंजी (Social Capital) और नेटवर्क के अभाव के कारण हाशिए के समुदायों तक आधुनिक तकनीक और अवसरों की पहुँच सीमित रहती है।
\n
- ‘प्रभु जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा किसने दी और इसकी मुख्य शर्त क्या है?\n
- \n
- (A) बी. आर. अंबेडकर; केवल उच्च जाति होना।
- (B) एम.एन. श्रीनिवास; संख्यात्मक शक्ति, भूमि का स्वामित्व और राजनीतिक प्रभाव।
- (C) लुई ड्यूमों; केवल धार्मिक शुद्धता।
- (D) योगेंद्र सिंह; केवल शहरीकरण।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: श्रीनिवास के अनुसार, प्रभु जाति वह है जिसके पास उस क्षेत्र में जमीन का बड़ा हिस्सा हो, जनसंख्या अधिक हो और जिसका राजनीतिक प्रभाव हो। जरूरी नहीं कि वह जाति अनुक्रम (Caste Hierarchy) में सबसे ऊपर (ब्राह्मण) हो।
\n
- नगरीकरण (Urbanization) की प्रक्रिया में ‘जेंट्रीफिकेशन’ (Gentrification) क्या है?\n
- \n
- (A) शहरों से लोगों का गांवों की ओर पलायन।
- (B) शहर के पुराने और गरीब इलाकों का पुनर्निर्माण कर उन्हें उच्च आय वर्ग के लोगों के रहने योग्य बनाना, जिससे मूल निवासी विस्थापित हो जाते हैं।
- (C) झुग्गी-झोपड़ियों का पूरी तरह समाप्त होना।
- (D) शहरों में जनसंख्या का समान वितरण।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: जेंट्रीफिकेशन एक शहरी सामाजिक प्रक्रिया है जहाँ निम्न-आय वाले क्षेत्रों में निवेश बढ़ता है और वहां समृद्ध लोग आने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप संपत्ति की कीमतें बढ़ जाती हैं और गरीब मूल निवासी वहां से हटने पर मजबूर हो जाते हैं।
\n
- ग्रामीण समाजशास्त्र में ‘ग्रामीण-शहरी सातत्य’ (Rural-Urban Continuum) का क्या अर्थ है?\n
- \n
- (A) गाँव और शहर के बीच एक स्पष्ट और अटूट दीवार।
- (B) यह विचार कि गाँव और शहर दो अलग ध्रुव नहीं हैं, बल्कि एक क्रमिक बदलाव (Gradual change) है।
- (C) केवल शहरों का विस्तार होना।
- (D) ग्रामीण क्षेत्रों का पूरी तरह शहरी होना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: यह अवधारणा बताती है कि ग्रामीण और शहरी जीवन के बीच कोई स्पष्ट रेखा नहीं है। जैसे-जैसे हम गाँव से शहर की ओर बढ़ते हैं, सामाजिक लक्षण (जैसे सामुदायिकता से व्यक्तिवाद) धीरे-धीरे बदलते हैं। इसमें ‘अर्ध-शहरी’ (Semi-urban) क्षेत्र शामिल होते हैं।
\n
- अकादमिक जगत में ‘लिंग-आधारित बाधाओं’ (Gendered Barriers) का समाजशास्त्रीय अर्थ क्या है?\n
- \n
- (A) महिलाओं का शिक्षा में अरुचि दिखाना।
- (B) संरचनात्मक और सांस्कृतिक बाधाएं जो महिलाओं को उच्च पदों, अनुसंधान और कलात्मक अभ्यासों में समान अवसर मिलने से रोकती हैं।
- (C) पुरुषों का शिक्षा के प्रति उदासीन होना।
- (D) केवल वेतन में अंतर होना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्र में यह अध्ययन किया जाता है कि कैसे ‘कांच की छत’ (Glass Ceiling) और पितृसत्तात्मक मानदंड अकादमिक संस्थानों में महिलाओं की प्रगति को सीमित करते हैं, चाहे उनकी योग्यता कितनी भी क्यों न हो।
\n
- ‘धार्मिक राष्ट्रवाद’ (Religious Nationalism) जब एक राजनीतिक विचारधारा बन जाता है, तो उसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?\n
- \n
- (A) समाज में पूर्ण शांति और सद्भाव आता है।
- (B) यह अक्सर ‘इन-ग्रुप’ और ‘आउट-ग्रुप’ का निर्माण करता है, जिससे ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
- (C) इससे केवल आर्थिक विकास होता है।
- (D) यह धर्म को निजी मामला बना देता है।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: जब धर्म को राष्ट्रीय पहचान से जोड़ा जाता है, तो वह एक शक्तिशाली पहचान बन जाता है। यह उन लोगों को ‘बाहरी’ या ‘दुश्मन’ के रूप में देखने की प्रवृत्ति बढ़ाता है जो उस विशिष्ट धार्मिक पहचान से नहीं जुड़े होते, जिससे सामाजिक विखंडन होता है।
\n
- प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) के मुख्य प्रणेता कौन थे?\n
- \n
- (A) एमिल दुर्खीम
- (B) जॉर्ज हर्बर्ट मीड
- (C) टैलकोट पार्सन्स
- (D) लुई ड्यूमों
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: हर्बर्ट मीड और बाद में ब्लूमर ने इस सिद्धांत को विकसित किया। यह सूक्ष्म-समाजशास्त्र (Micro-sociology) पर केंद्रित है और बताता है कि मनुष्य प्रतीकों, भाषा और आपसी बातचीत के माध्यम से दुनिया को अर्थ देता है और अपना ‘स्व’ (Self) विकसित करता है।
\n
- समाजशास्त्र में ‘शक्ति’ (Power) के संदर्भ में मैक्स वेबर और कार्ल मार्क्स के दृष्टिकोण में मुख्य अंतर क्या है?\n
- \n
- (A) मार्क्स शक्ति को केवल मानसिक मानते थे, वेबर भौतिक।
- (B) मार्क्स ने शक्ति को आर्थिक संसाधनों (उत्पादन के साधनों) से जोड़ा, जबकि वेबर ने इसे ‘दूसरों की इच्छा के विरुद्ध अपनी बात मनवाने की क्षमता’ के रूप में व्यापक रूप से देखा।
- (C) वेबर ने शक्ति को केवल धार्मिक माना।
- (D) दोनों का दृष्टिकोण पूरी तरह समान था।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: मार्क्स के लिए शक्ति का स्रोत ‘पूंजी’ है। जिसके पास उत्पादन के साधन हैं, उसी के पास शक्ति है। वेबर ने इसे और विस्तृत किया और कहा कि शक्ति केवल आर्थिक नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा (Status) और राजनीतिक दल (Party) से भी आ सकती है।
\n
- ‘सामाजिक पूंजी’ (Social Capital) की अवधारणा से क्या तात्पर्य है?\n
- \n
- (A) बैंक में जमा की गई कुल धनराशि।
- (B) सामाजिक नेटवर्क, विश्वास और साझा मानदंडों के माध्यम से मिलने वाले लाभ और संसाधन।
- (C) केवल उच्च शिक्षा प्राप्त करना।
- (D) सरकार द्वारा दिया गया सामाजिक भत्ता।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B)
\n
विस्तृत व्याख्या: पियरे बोर्दियू और जेम्स कोलमैन जैसे विचारकों ने इसे समझाया है। सामाजिक पूंजी का अर्थ है आपके संपर्क (Contacts) और संबंध, जो आपको करियर, सूचना या भावनात्मक सहयोग प्राप्त करने में मदद करते हैं।
\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n\n
\n
सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।