इतिहास सिर्फ तारीखों और घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता की यात्रा का एक अद्भुत वृत्तांत है। यह हमें सिखाता है कि हम कौन हैं, हम कहाँ से आए हैं और हम कहाँ जा रहे हैं। आज, “इतिहास परीक्षा रणनीतिकार” के रूप में, मैं आपको समय-यात्रा की एक रोमांचक यात्रा पर ले जाने के लिए तैयार हूँ। इस दैनिक अभ्यास सेट के माध्यम से, आप प्राचीन सभ्यताओं से लेकर आधुनिक आंदोलनों तक, अपने ऐतिहासिक ज्ञान का परीक्षण कर पाएंगे। प्रत्येक प्रश्न सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है और इसकी विस्तृत व्याख्या आपकी समझ को गहरा करेगी। अपनी तैयारी को परखें और अतीत से सीखें!
दैनिक इतिहास मॉक टेस्ट
-
किस सभ्यता के पुरातात्विक स्थलों में “ग्रेट बाथ” (महान स्नानागार) और “बड़ा अन्न भंडार” (Granary) जैसी संरचनाएँ पाई गई हैं?
- (A) मेसोपोटामियाई सभ्यता
- (B) सिंधु घाटी सभ्यता
- (C) मिस्र सभ्यता
- (D) चीनी सभ्यता
सही उत्तर: (B) सिंधु घाटी सभ्यता
विस्तृत व्याख्या: “ग्रेट बाथ” (महान स्नानागार) और “बड़ा अन्न भंडार” (Granary) सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजें हैं, विशेष रूप से मोहनजोदड़ो में। मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े और सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक है। महान स्नानागार संभवतः अनुष्ठानिक स्नान के लिए इस्तेमाल किया जाता था, जबकि अन्न भंडार अनाज के भंडारण के लिए था, जो इस सभ्यता की उन्नत शहरी नियोजन और आर्थिक संरचना को दर्शाता है।
(A) मेसोपोटामियाई सभ्यता अपनी ज़िगुरेट्स (Ziggurats) और लेखन प्रणाली (क्यूनीफॉर्म) के लिए जानी जाती है।
(C) मिस्र सभ्यता पिरामिडों और फिरौन के लिए प्रसिद्ध है।
(D) चीनी सभ्यता अपनी महान दीवार और कांस्य युग की कलाकृतियों के लिए उल्लेखनीय है। -
ऋग्वेद में उल्लिखित ‘दशराज्ञ युद्ध’ (Dasarajna war) किस नदी के तट पर लड़ा गया था?
- (A) सिंधु
- (B) सरस्वती
- (C) परुष्णी (रावी)
- (D) झेलम
सही उत्तर: (C) परुष्णी (रावी)
विस्तृत व्याख्या: ऋग्वेद के सातवें मंडल में दशराज्ञ युद्ध का वर्णन है, जो भरत जनजाति के राजा सुदास और दस राजाओं (पाँच आर्य और पाँच अनार्य) के एक संघ के बीच परुष्णी नदी (आधुनिक रावी नदी) के तट पर लड़ा गया था। इस युद्ध में राजा सुदास विजयी हुए, जिससे भरत जनजाति की सर्वोच्चता स्थापित हुई।
(A) सिंधु नदी सबसे महत्वपूर्ण वैदिक नदी थी, लेकिन दशराज्ञ युद्ध इसके तट पर नहीं हुआ था।
(B) सरस्वती नदी को ऋग्वेद में ‘नदीतमा’ (नदियों में श्रेष्ठ) कहा गया है।
(D) झेलम नदी सिकंदर और पोरस के बीच हुए युद्ध (हाइडस्पेस का युद्ध) से संबंधित है, न कि दशराज्ञ युद्ध से। -
निम्नलिखित में से कौन-सा मौर्य साम्राज्य के पतन का एक मुख्य कारण नहीं था?
- (A) अशोक की शांतिवादी नीतियाँ
- (B) प्रांतीय शासकों का विद्रोह
- (C) आर्थिक समस्याएं
- (D) ब्राह्मणों का विरोध
सही उत्तर: (A) अशोक की शांतिवादी नीतियाँ
विस्तृत व्याख्या: अशोक की शांतिवादी नीतियाँ और धम्म विजय की अवधारणा ने साम्राज्य को नैतिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत किया, लेकिन सैन्य शक्ति को कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्हें एक नई दिशा दी। मौर्य साम्राज्य के पतन के लिए कई कारक जिम्मेदार थे, जैसे कमजोर उत्तराधिकारी, विशाल साम्राज्य का केंद्रीकरण बनाए रखने में कठिनाई, प्रांतीय शासकों का अत्याचार और विद्रोह, आर्थिक दबाव (भारी कर), और ब्राह्मणों का विरोध (अशोक की कुछ नीतियों के कारण)। हालांकि, अशोक की शांतिवादी नीतियां सीधे तौर पर साम्राज्य के पतन का कारण नहीं बनीं।
(B) प्रांतीय शासकों का विद्रोह, जैसे तक्षशिला में, साम्राज्य के केंद्रीय नियंत्रण को कमजोर करता गया।
(C) आर्थिक समस्याएं, जिनमें साम्राज्य को बनाए रखने के लिए भारी सैन्य और प्रशासनिक खर्च शामिल थे, ने भी पतन में योगदान दिया।
(D) ब्राह्मणों का विरोध, विशेषकर अशोक की पशुबलि पर रोक जैसी नीतियों के कारण, भी एक कारक माना जाता है। -
गुप्त काल में ‘दशावतार मंदिर’ कहाँ स्थित है, जिसे भारतीय मंदिर वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरणों में से एक माना जाता है?
- (A) सांची
- (B) देवगढ़
- (C) भूमरा
- (D) तिगवा
सही उत्तर: (B) देवगढ़
विस्तृत व्याख्या: देवगढ़ का दशावतार मंदिर, जो उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में स्थित है, गुप्त काल की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह एक पंचायतन शैली का मंदिर है, जहाँ मुख्य गर्भगृह चार छोटे मंदिरों से घिरा होता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के दस अवतारों को समर्पित है और अपनी सुंदर मूर्तियों और नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है, विशेषकर शेषशायी विष्णु की मूर्ति।
(A) सांची अपने बौद्ध स्तूपों के लिए प्रसिद्ध है, खासकर मौर्य और शुंग काल से संबंधित।
(C) भूमरा (मध्य प्रदेश) में भी गुप्त काल का शिव मंदिर है, लेकिन दशावतार मंदिर देवगढ़ में है।
(D) तिगवा (मध्य प्रदेश) में भी गुप्त काल का विष्णु मंदिर है। -
प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किसके शासनकाल में भारत का दौरा किया था?
- (A) चंद्रगुप्त द्वितीय
- (B) हर्षवर्धन
- (C) समुद्रगुप्त
- (D) अशोक
सही उत्तर: (B) हर्षवर्धन
विस्तृत व्याख्या: प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु और यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) ने 7वीं शताब्दी ईस्वी में (लगभग 629-645 ईस्वी) सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान भारत का दौरा किया था। उन्होंने भारत में लगभग 17 वर्ष बिताए, विभिन्न बौद्ध स्थलों का भ्रमण किया और नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। उनकी यात्रा का वृत्तांत ‘सी-यू-की’ (Si-Yu-Ki) में दर्ज है, जो उस समय के भारत के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालता है।
(A) चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) गुप्त वंश के शासक थे, जिनके दरबार में फाह्यान आए थे।
(C) समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है, लेकिन ह्वेनसांग उनके शासनकाल में नहीं आए।
(D) अशोक मौर्य वंश के महान सम्राट थे, जिनका काल ह्वेनसांग की यात्रा से काफी पहले का है। -
चोल प्रशासन की मुख्य विशेषता क्या थी?
- (A) केंद्रीकृत राजशाही
- (B) सामंती व्यवस्था
- (C) ग्राम स्वशासन
- (D) धार्मिक सहिष्णुता
सही उत्तर: (C) ग्राम स्वशासन
विस्तृत व्याख्या: चोल प्रशासन अपनी सुदृढ़ ग्राम स्वशासन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध था, जैसा कि उत्तरमेरूर अभिलेखों से पता चलता है। गाँव अपनी स्थानीय सभाओं (उर और सभा) के माध्यम से अपने मामलों का प्रबंधन करते थे, जिसमें सिंचाई, मंदिर प्रशासन, न्याय और कर संग्रह जैसे कार्य शामिल थे। यह प्रणाली स्थानीय भागीदारी और विकेंद्रीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण थी।
(A) चोलों की एक मजबूत केंद्रीकृत राजशाही थी, लेकिन उनकी सबसे विशिष्ट विशेषता ग्राम स्वशासन था।
(B) सामंती व्यवस्था उतनी प्रमुख नहीं थी जितनी कि उत्तर भारत में।
(D) धार्मिक सहिष्णुता दक्षिण भारतीय साम्राज्यों की एक सामान्य विशेषता थी, लेकिन ग्राम स्वशासन चोलों की विशिष्ट पहचान थी। -
इब्न बतूता, जिसने मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत का दौरा किया था, किस देश का यात्री था?
- (A) मोरक्को
- (B) फ़ारस
- (C) तुर्की
- (D) मिस्र
सही उत्तर: (A) मोरक्को
विस्तृत व्याख्या: इब्न बतूता एक प्रसिद्ध मोरक्को का यात्री था जिसने 14वीं शताब्दी में मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल (लगभग 1333-1347 ईस्वी) के दौरान भारत का दौरा किया था। उसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया गया और उसने लगभग 8 वर्षों तक इस पद पर कार्य किया। उसकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘किताब-उल-रेहला’ या ‘रिहला’ है, जिसमें उस समय के भारत के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिलती है।
(B) फ़ारस से अल-बिरूनी जैसे विद्वान आए थे, लेकिन वे इब्न बतूता नहीं थे।
(C) तुर्की से कई शासक आए, लेकिन इब्न बतूता एक यात्री था।
(D) मिस्र से भी यात्रियों का आना-जाना लगा रहता था, लेकिन इब्न बतूता मोरक्को का था। -
दिल्ली सल्तनत का कौन सा सुल्तान “बाजार नियंत्रण नीति” के लिए जाना जाता है?
- (A) इल्तुतमिश
- (B) बलबन
- (C) अलाउद्दीन खिलजी
- (D) फिरोज शाह तुगलक
सही उत्तर: (C) अलाउद्दीन खिलजी
विस्तृत व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ईस्वी) दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने बाजार नियंत्रण नीति को लागू किया। उसने वस्तुओं की कीमतें निर्धारित कीं, जमाखोरी पर प्रतिबंध लगाया और ‘शहना-ए-मंडी’ (बाजार अधीक्षक) जैसे अधिकारियों को नियुक्त किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वस्तुओं को निर्धारित कीमतों पर बेचा जाए। इस नीति का मुख्य उद्देश्य एक बड़ी और सस्ती सेना बनाए रखना था ताकि मंगोल आक्रमणों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
(A) इल्तुतमिश (1211-1236 ईस्वी) इक्ता प्रणाली और चालीसा (तुर्कान-ए-चहलगानी) के लिए जाना जाता है।
(B) बलबन (1266-1287 ईस्वी) लौह और रक्त नीति तथा दैवीय राजत्व सिद्धांत के लिए प्रसिद्ध है।
(D) फिरोज शाह तुगलक (1351-1388 ईस्वी) नहरों के निर्माण, दीवान-ए-खैरात और दारुल शिफा जैसे सार्वजनिक कार्यों के लिए जाना जाता है। -
किस मुगल बादशाह ने ‘दीन-ए-इलाही’ नामक एक नए धर्म की शुरुआत की थी?
- (A) बाबर
- (B) हुमायूं
- (C) अकबर
- (D) औरंगजेब
सही उत्तर: (C) अकबर
विस्तृत व्याख्या: सम्राट अकबर (1556-1605 ईस्वी) ने 1582 ईस्वी में ‘दीन-ए-इलाही’ नामक एक नए समन्वयवादी धर्म की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य विभिन्न धर्मों के बीच सद्भाव स्थापित करना था। यह सभी धर्मों के मूल सिद्धांतों को मिलाकर बनाया गया एक नैतिक और आध्यात्मिक संहिता थी, जिसमें एकेश्वरवाद, दान, क्षमा और अहिंसा पर जोर दिया गया था। हालांकि, यह बहुत लोकप्रिय नहीं हुआ और अकबर की मृत्यु के साथ ही समाप्त हो गया।
(A) बाबर मुगल साम्राज्य का संस्थापक था।
(B) हुमायूं बाबर का उत्तराधिकारी था और उसने अपने पिता की नीतियों का पालन किया।
(D) औरंगजेब एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था और उसने इस्लामी शरीयत कानूनों को कड़ाई से लागू किया, जो अकबर की नीतियों के विपरीत था। -
विजयनगर साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध शासक कौन था, जिसके शासनकाल में साम्राज्य अपनी चरम सीमा पर था?
- (A) हरिहर प्रथम
- (B) बुक्का प्रथम
- (C) कृष्णदेव राय
- (D) राम राय
सही उत्तर: (C) कृष्णदेव राय
विस्तृत व्याख्या: कृष्णदेव राय (1509-1529 ईस्वी) विजयनगर साम्राज्य के तुलुव वंश के सबसे महान शासक थे। उनके शासनकाल को विजयनगर साम्राज्य का स्वर्ण युग माना जाता है, जब साम्राज्य ने सैन्य शक्ति, कला, वास्तुकला और साहित्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की। उन्हें ‘आंध्र भोज’ के नाम से भी जाना जाता है और वे स्वयं एक विद्वान और लेखक थे, जिन्होंने तेलुगु में ‘अमुक्तमाल्यदा’ की रचना की।
(A) हरिहर प्रथम और (B) बुक्का प्रथम संगम वंश के संस्थापक थे, जिन्होंने विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की थी।
(D) राम राय तुलिकोट का युद्ध (राक्षसी-तंगड़ी का युद्ध) के समय शासक थे, जिसके परिणामस्वरूप विजयनगर साम्राज्य का पतन हुआ। -
शिवाजी महाराज के प्रशासन में ‘अष्टप्रधान’ क्या था?
- (A) आठ किले
- (B) आठ प्रमुख मंत्री
- (C) आठ सैन्य कमांडर
- (D) आठ प्रांत
सही उत्तर: (B) आठ प्रमुख मंत्री
विस्तृत व्याख्या: शिवाजी महाराज ने अपने प्रशासन को सुव्यवस्थित करने के लिए ‘अष्टप्रधान’ नामक आठ मंत्रियों की परिषद का गठन किया था। ये मंत्री विभिन्न प्रशासनिक विभागों के प्रमुख थे और शिवाजी को सलाह देते थे। इनमें पेशवा (प्रधानमंत्री), अमात्य (वित्त मंत्री), सचिव (शाही पत्राचार), सुमंत (विदेश मंत्री), सेनापति (सैन्य कमांडर), पंडितराव (धार्मिक मामले), न्यायाधीश (न्याय) और वाकयानवीस (खुफिया और गृह मामले) शामिल थे। यह प्रणाली राजशाही के अधीन कार्य करती थी, न कि कैबिनेट की तरह।
(A) शिवाजी के कई किले थे, लेकिन अष्टप्रधान मंत्रियों की परिषद थी।
(C) सैन्य कमांडर अष्टप्रधान का हिस्सा थे (जैसे सेनापति), लेकिन अष्टप्रधान स्वयं सिर्फ सैन्य कमांडर नहीं थे।
(D) शिवाजी के राज्य में प्रांत भी थे, लेकिन अष्टप्रधान प्रशासनिक परिषद थी। -
‘ब्लैक होल त्रासदी’ (Black Hole Tragedy) किस शहर में हुई थी?
- (A) मुर्शिदाबाद
- (B) ढाका
- (C) कलकत्ता
- (D) प्लासी
सही उत्तर: (C) कलकत्ता
विस्तृत व्याख्या: ‘ब्लैक होल त्रासदी’ 20 जून, 1756 को कलकत्ता (आज का कोलकाता) के फोर्ट विलियम में हुई थी। बंगाल के नवाब सिराज-उद-दौला ने फोर्ट विलियम पर कब्जा कर लिया और कहा जाता है कि उसने ब्रिटिश कैदियों को एक छोटे से अंधेरे कमरे में बंद कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप दम घुटने से कई कैदियों की मृत्यु हो गई। इस घटना ने अंग्रेजों को नवाब के खिलाफ और अधिक शत्रुतापूर्ण बना दिया, जिससे प्लासी के युद्ध (1757) का मार्ग प्रशस्त हुआ।
(A) मुर्शिदाबाद बंगाल के नवाबों की राजधानी थी।
(B) ढाका भी एक महत्वपूर्ण शहर था, लेकिन त्रासदी कलकत्ता में हुई थी।
(D) प्लासी वह स्थान है जहाँ 1757 में प्लासी का युद्ध लड़ा गया था, न कि त्रासदी हुई थी। -
भारत में सिविल सेवाओं का जनक किसे माना जाता है?
- (A) लॉर्ड डलहौजी
- (B) लॉर्ड विलियम बेंटिंक
- (C) लॉर्ड कार्नवालिस
- (D) लॉर्ड रिपन
सही उत्तर: (C) लॉर्ड कार्नवालिस
विस्तृत व्याख्या: लॉर्ड कार्नवालिस (1786-1793 ईस्वी) को भारत में सिविल सेवाओं का जनक माना जाता है। उन्होंने प्रशासन में सुधार के लिए कई कदम उठाए, जिनमें कंपनी के कर्मचारियों के निजी व्यापार पर प्रतिबंध लगाना और ‘कॉर्नवालिस कोड’ लागू करना शामिल था, जिसने राजस्व प्रशासन और न्यायिक प्रशासन को अलग किया। उन्होंने सिविल सेवकों के लिए योग्यता-आधारित चयन की नींव भी रखी, हालांकि इसे बाद में और विकसित किया गया।
(A) लॉर्ड डलहौजी (1848-1856 ईस्वी) व्यपगत के सिद्धांत (Doctrine of Lapse) और रेलवे के विकास के लिए जाने जाते हैं।
(B) लॉर्ड विलियम बेंटिंक (1828-1835 ईस्वी) सती प्रथा के उन्मूलन और ठगी के दमन के लिए प्रसिद्ध हैं।
(D) लॉर्ड रिपन (1880-1884 ईस्वी) स्थानीय स्वशासन के जनक और इल्बर्ट बिल विवाद के लिए जाने जाते हैं। -
‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ की स्थापना के समय भारत का वायसराय कौन था?
- (A) लॉर्ड लिटन
- (B) लॉर्ड डफरिन
- (C) लॉर्ड कर्जन
- (D) लॉर्ड रिपन
सही उत्तर: (B) लॉर्ड डफरिन
विस्तृत व्याख्या: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में ए.ओ. ह्यूम द्वारा की गई थी। उस समय लॉर्ड डफरिन (1884-1888 ईस्वी) भारत के वायसराय थे। यह अक्सर कहा जाता है कि कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश सरकार के लिए एक “सेफ्टी वाल्व” के रूप में की गई थी, हालांकि यह एक विवादित अवधारणा है। डफरिन ने शुरुआत में कांग्रेस के प्रति सहिष्णुता दिखाई, लेकिन बाद में इसे “सूक्ष्म अल्पसंख्यक” का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन कहकर इसकी आलोचना की।
(A) लॉर्ड लिटन (1876-1880 ईस्वी) वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट और आर्म्स एक्ट के लिए जाने जाते हैं।
(C) लॉर्ड कर्जन (1899-1905 ईस्वी) बंगाल विभाजन और पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए प्रसिद्ध हैं।
(D) लॉर्ड रिपन (1880-1884 ईस्वी) डफरिन से ठीक पहले वायसराय थे। -
महात्मा गांधी ने अपना पहला जन सत्याग्रह ‘चंपारण सत्याग्रह’ कब शुरू किया था?
- (A) 1915
- (B) 1917
- (C) 1919
- (D) 1920
सही उत्तर: (B) 1917
विस्तृत व्याख्या: महात्मा गांधी ने भारत में अपना पहला प्रमुख सत्याग्रह 1917 में बिहार के चंपारण जिले में शुरू किया था। यह सत्याग्रह नील की खेती करने वाले किसानों के शोषण (तिनकठिया प्रणाली) के खिलाफ था, जिसके तहत किसानों को अपनी जमीन के 3/20वें हिस्से पर नील उगाना अनिवार्य था। यह गांधीजी का भारत में पहला सफल प्रयोग था, जिसने उन्हें एक जन नेता के रूप में स्थापित किया।
(A) 1915 में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे।
(C) 1919 में रॉलेट सत्याग्रह और जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था।
(D) 1920 में असहयोग आंदोलन शुरू किया गया था। -
निम्नलिखित में से कौन ‘खिलाफत आंदोलन’ का प्रमुख नेता था?
- (A) सर सैयद अहमद खान
- (B) मौलाना अबुल कलाम आजाद
- (C) मुहम्मद अली जिन्ना
- (D) अली बंधु (मौलाना मुहम्मद अली और शौकत अली)
सही उत्तर: (D) अली बंधु (मौलाना मुहम्मद अली और शौकत अली)
विस्तृत व्याख्या: खिलाफत आंदोलन (1919-1924) का नेतृत्व मुख्य रूप से अली बंधुओं (मौलाना मुहम्मद अली और शौकत अली) ने किया था। यह आंदोलन प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के खलीफा के पद को बहाल करने और मुस्लिम पवित्र स्थलों की संप्रभुता बनाए रखने के लिए भारतीय मुसलमानों द्वारा शुरू किया गया था। महात्मा गांधी ने इस आंदोलन को हिंदू-मुस्लिम एकता का एक अवसर माना और इसे असहयोग आंदोलन के साथ जोड़ दिया।
(A) सर सैयद अहमद खान (अलीगढ़ आंदोलन) खिलाफत आंदोलन के समय नहीं थे।
(B) मौलाना अबुल कलाम आजाद भी आंदोलन से जुड़े थे, लेकिन अली बंधु इसके प्रमुख सूत्रधार थे।
(C) मुहम्मद अली जिन्ना ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन नहीं किया था, क्योंकि वह इसे एक धार्मिक आंदोलन मानते थे। -
1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान, गांधीजी ने कौन सा प्रसिद्ध नारा दिया था?
- (A) स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है
- (B) तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा
- (C) करो या मरो
- (D) वंदे मातरम
सही उत्तर: (C) करो या मरो
विस्तृत व्याख्या: 8 अगस्त, 1942 को मुंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र में, महात्मा गांधी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (Quit India Movement) की घोषणा की और भारतीयों को “करो या मरो” (Do or Die) का नारा दिया। इसका अर्थ था कि या तो हम भारत को आजाद कराएँगे या इस प्रयास में अपनी जान दे देंगे, लेकिन गुलामी में वापस नहीं जाएंगे। यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतिम बड़ा संघर्ष था।
(A) “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” का नारा बाल गंगाधर तिलक ने दिया था।
(B) “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का नारा सुभाष चंद्र बोस ने दिया था।
(D) “वंदे मातरम” बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित गीत है जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का प्रेरणा स्रोत बना। -
आधुनिक भारतीय इतिहास में ‘मॉर्ले-मिंटो सुधार’ किस वर्ष लागू किए गए थे?
- (A) 1905
- (B) 1909
- (C) 1919
- (D) 1935
सही उत्तर: (B) 1909
विस्तृत व्याख्या: मॉर्ले-मिंटो सुधार, जिसे ‘भारतीय परिषद अधिनियम 1909’ भी कहा जाता है, को 1909 में लागू किया गया था। इसका नाम भारत के तत्कालीन राज्य सचिव लॉर्ड मॉर्ले और भारत के वायसराय लॉर्ड मिंटो के नाम पर रखा गया था। इन सुधारों ने केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों के सदस्यों की संख्या में वृद्धि की और मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचक मंडल की शुरुआत की, जिसने भारत में सांप्रदायिकता की नींव रखी।
(A) 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ था।
(C) 1919 में मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (भारत सरकार अधिनियम 1919) लागू किए गए थे।
(D) 1935 में भारत सरकार अधिनियम 1935 पारित किया गया था। -
फ्रांसीसी क्रांति (1789) का तात्कालिक कारण क्या था?
- (A) अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम
- (B) बास्टिल का पतन
- (C) लुई सोलहवें की निरंकुशता
- (D) आर्थिक संकट और खाद्य पदार्थों की कमी
सही उत्तर: (D) आर्थिक संकट और खाद्य पदार्थों की कमी
विस्तृत व्याख्या: 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के कई गहरे कारण थे, जिनमें सामाजिक असमानता, राजशाही की निरंकुशता और प्रबुद्धता के विचार शामिल थे। हालांकि, तात्कालिक कारण गंभीर आर्थिक संकट, राजकोषीय दिवालियापन और 1780 के दशक के अंत में खराब फसल के कारण खाद्य पदार्थों (विशेषकर रोटी) की अत्यधिक कमी थी। इसने जनता में व्यापक असंतोष पैदा किया और अंततः क्रांति को जन्म दिया।
(A) अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम (1775-1783) ने फ्रांसीसी विचारों को प्रभावित किया और फ्रांस पर वित्तीय बोझ भी डाला, लेकिन यह तात्कालिक कारण नहीं था।
(B) बास्टिल का पतन 14 जुलाई, 1789 को हुआ, जो क्रांति की शुरुआत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक था, लेकिन यह तात्कालिक कारण नहीं बल्कि एक परिणाम था।
(C) लुई सोलहवें की निरंकुशता एक अंतर्निहित कारण थी, तात्कालिक ट्रिगर नहीं। -
प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार के बाद, किस संधि पर हस्ताक्षर किए गए जिसने युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया और जर्मनी पर कठोर शर्तें लगाईं?
- (A) वियना की संधि
- (B) वर्साय की संधि
- (C) पेरिस की संधि
- (D) ब्रस्ट-लिटोवस्क की संधि
सही उत्तर: (B) वर्साय की संधि
विस्तृत व्याख्या: प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार के बाद, 28 जून, 1919 को फ्रांस के वर्साय महल में ‘वर्साय की संधि’ पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि ने जर्मनी पर बहुत कठोर शर्तें लगाईं, जिसमें विशाल युद्ध क्षतिपूर्ति, क्षेत्रीय नुकसान और सैन्य प्रतिबंध शामिल थे। कई इतिहासकारों का मानना है कि इस संधि की कठोर शर्तों ने द्वितीय विश्व युद्ध के बीज बो दिए थे।
(A) वियना की संधि (1815) ने नेपोलियन युद्धों के बाद यूरोप का पुनर्गठन किया था।
(C) पेरिस की संधि कई ऐतिहासिक संधियों का नाम है, लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के बाद की मुख्य संधि वर्साय की संधि थी।
(D) ब्रस्ट-लिटोवस्क की संधि (1918) जर्मनी और बोल्शेविक रूस के बीच हुई थी, जिसने रूस को प्रथम विश्व युद्ध से बाहर कर दिया था। -
नीचे दी गई सभ्यताओं में से कौन-सी वर्तमान मैक्सिको के आसपास केंद्रित थी और अपनी उन्नत खगोलीय ज्ञान तथा मानव बलिदान की प्रथाओं के लिए जानी जाती थी?
- (A) इंका सभ्यता
- (B) माया सभ्यता
- (C) एज़्टेक सभ्यता
- (D) ओलमेक सभ्यता
सही उत्तर: (C) एज़्टेक सभ्यता
विस्तृत व्याख्या: एज़्टेक सभ्यता, जिसने 14वीं से 16वीं शताब्दी तक मेसोअमेरिका के एक बड़े हिस्से पर शासन किया, वर्तमान मैक्सिको घाटी के आसपास केंद्रित थी। इसकी राजधानी टेनोच्टिट्लान (Tenochtitlan) थी, जो आज के मैक्सिको सिटी के स्थल पर स्थित थी। एज़्टेक अपने जटिल सामाजिक-राजनीतिक ढांचे, विस्तृत धार्मिक अनुष्ठानों (मानव बलिदान सहित), और प्रभावशाली कृषि तकनीकों (चिनम्पास) के लिए जाने जाते थे। उनके पास एक उन्नत कैलेंडर प्रणाली और खगोलीय प्रेक्षणों का ज्ञान भी था। हालिया पुरातात्विक खोजें, जैसे कि टेनोच्टिट्लान के ‘टेंप्लो मेयर’ (प्रमुख मंदिर) में मिलीं, इस सभ्यता के रीति-रिवाजों और कलाकृतियों पर नया प्रकाश डालती हैं।
(A) इंका सभ्यता दक्षिण अमेरिका (वर्तमान पेरू) में एंडीज़ पहाड़ों में केंद्रित थी।
(B) माया सभ्यता वर्तमान दक्षिणी मैक्सिको और मध्य अमेरिका के अन्य भागों में फैली हुई थी, जो अपनी लेखन प्रणाली, कला और खगोल विज्ञान के लिए प्रसिद्ध थी, लेकिन वर्तमान मैक्सिको के केंद्र में नहीं थी।
(D) ओलमेक सभ्यता (लगभग 1400-400 ईसा पूर्व) मेसोअमेरिका की सबसे शुरुआती सभ्यताओं में से एक थी, जो खाड़ी तट (वर्तमान मैक्सिको) पर केंद्रित थी, लेकिन खगोलीय ज्ञान और मानव बलिदान की विस्तृत प्रथाएं एज़्टेक की विशिष्टता थीं। -
कैरोलिंगियन साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध शासक कौन था, जिसने पश्चिमी यूरोप के बड़े हिस्से को एकजुट किया और ‘होली रोमन साम्राज्य’ की नींव रखी?
- (A) चार्ल्स मार्टेल
- (B) शारलेमेन (चार्ल्स द ग्रेट)
- (C) लुईस द पायस
- (D) पेपिन द शॉर्ट
सही उत्तर: (B) शारलेमेन (चार्ल्स द ग्रेट)
विस्तृत व्याख्या: शारलेमेन (Charles the Great या चार्ल्स महान), जिसने 768 से 814 ईस्वी तक शासन किया, कैरोलिंगियन साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली शासक था। उसने अपनी सैन्य विजयों के माध्यम से पश्चिमी यूरोप के एक बड़े हिस्से को एकजुट किया और एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया। 800 ईस्वी में पोप लियो III द्वारा उसे ‘सम्राट’ का ताज पहनाया गया, जिसने ‘होली रोमन साम्राज्य’ की अवधारणा की नींव रखी। उसके शासनकाल को ‘कैरोलिंगियन पुनर्जागरण’ के नाम से जाना जाता है, जो कला, संस्कृति और शिक्षा में सुधार का काल था। कैरोलिंगियन साम्राज्य का बाद में पतन हुआ, जैसा कि ऐतिहासिक अध्ययनों में देखा जाता है।
(A) चार्ल्स मार्टेल शारलेमेन के दादा थे और टूर की लड़ाई (732 ईस्वी) में मुस्लिम आक्रमणकारियों को हराकर प्रसिद्ध हुए थे।
(C) लुईस द पायस शारलेमेन के पुत्र और उत्तराधिकारी थे, जिनके शासनकाल में साम्राज्य के विघटन की प्रक्रिया शुरू हुई।
(D) पेपिन द शॉर्ट शारलेमेन के पिता थे और कैरोलिंगियन राजवंश के पहले औपचारिक राजा थे। -
मानव विकास के संदर्भ में, निएंडरथल मानव के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
- (A) वे आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) के प्रत्यक्ष पूर्वज थे।
- (B) वे मुख्य रूप से यूरोप और एशिया में पाए जाते थे।
- (C) वे उपकरण बनाने और आग का उपयोग करने में सक्षम थे।
- (D) वे मृतकों को दफनाते थे और उनमें प्रतीकात्मक सोच के प्रमाण मिलते हैं।
सही उत्तर: (A) वे आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) के प्रत्यक्ष पूर्वज थे।
विस्तृत व्याख्या: निएंडरथल (होमो निएंडरथेलेंसिस) लगभग 400,000 से 40,000 साल पहले यूरोप, मध्य एशिया और पश्चिम एशिया में रहने वाली एक विलुप्त मानव प्रजाति थी। वे आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) के प्रत्यक्ष पूर्वज नहीं थे, बल्कि एक समानांतर शाखा थे। हालांकि, आनुवंशिक अध्ययनों से पता चलता है कि आधुनिक मनुष्यों (विशेषकर यूरोपीय और एशियाई) के डीएनए में निएंडरथल डीएनए का एक छोटा प्रतिशत मौजूद है, जो यह दर्शाता है कि दोनों प्रजातियों के बीच कुछ हद तक संकरण हुआ था। वे उपकरण बनाने, आग का उपयोग करने, मृतकों को दफनाने और यहां तक कि कलात्मक या प्रतीकात्मक व्यवहार (जैसे गहने बनाना) के प्रमाण भी छोड़ गए हैं। पीटर साहलिन्स जैसे विद्वानों का काम निएंडरथल मानव के जीवन और उनके आधुनिक मानव के साथ संबंधों पर नए दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
(B) निएंडरथल के जीवाश्म और कलाकृतियाँ मुख्य रूप से यूरोप, मध्य पूर्व और पश्चिमी एशिया में पाई गई हैं।
(C) वे पत्थर के परिष्कृत उपकरण बनाते थे (मुस्टेरियन उपकरण) और आग का नियंत्रित उपयोग करते थे।
(D) मृतकों को दफनाने के प्रमाण उनकी प्रतीकात्मक सोच और संभावित रूप से किसी प्रकार के विश्वास प्रणाली को दर्शाते हैं। -
भारतीय पुनर्जागरण के जनक के रूप में किसे जाना जाता है?
- (A) स्वामी दयानंद सरस्वती
- (B) राजा राम मोहन राय
- (C) ईश्वर चंद्र विद्यासागर
- (D) स्वामी विवेकानंद
सही उत्तर: (B) राजा राम मोहन राय
विस्तृत व्याख्या: राजा राम मोहन राय (1772-1833) को ‘भारतीय पुनर्जागरण का जनक’ और ‘भारतीय राष्ट्रवाद का पैगंबर’ माना जाता है। उन्होंने सती प्रथा के उन्मूलन, मूर्ति पूजा के विरोध, बहुदेववाद के विरोध और आधुनिक शिक्षा के प्रचार सहित कई सामाजिक और धार्मिक सुधारों की वकालत की। उन्होंने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की, जिसने एकेश्वरवाद और तर्कवाद पर जोर दिया।
(A) स्वामी दयानंद सरस्वती (1824-1883) ने आर्य समाज की स्थापना की और ‘वेदों की ओर लौटो’ का नारा दिया।
(C) ईश्वर चंद्र विद्यासागर (1820-1891) विधवा पुनर्विवाह के प्रबल समर्थक थे।
(D) स्वामी विवेकानंद (1863-1902) ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और वेदांत दर्शन का प्रचार किया। -
भूदान आंदोलन किसने शुरू किया था?
- (A) महात्मा गांधी
- (B) विनोबा भावे
- (C) जयप्रकाश नारायण
- (D) सरदार वल्लभभाई पटेल
सही उत्तर: (B) विनोबा भावे
विस्तृत व्याख्या: भूदान आंदोलन (भूमि उपहार आंदोलन) की शुरुआत 1951 में आचार्य विनोबा भावे ने तेलंगाना के पोचमपल्ली गाँव से की थी। इस आंदोलन का उद्देश्य स्वैच्छिक आधार पर धनी भूस्वामियों से भूमि दान में प्राप्त कर उसे भूमिहीन गरीबों में वितरित करना था। यह गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित एक अहिंसक सामाजिक सुधार आंदोलन था जिसका लक्ष्य ग्रामीण असमानता को कम करना था।
(A) महात्मा गांधी ने भूदान आंदोलन से पहले के आंदोलनों का नेतृत्व किया था, लेकिन यह विनोबा भावे द्वारा शुरू किया गया था।
(C) जयप्रकाश नारायण एक समाजवादी नेता थे जो सर्वोदय आंदोलन से जुड़े थे, जिसमें भूदान आंदोलन एक हिस्सा था, लेकिन भावे ने इसे शुरू किया था।
(D) सरदार वल्लभभाई पटेल स्वतंत्रता के बाद भारत के पहले गृह मंत्री थे। -
1907 में सूरत अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विभाजन का मुख्य कारण क्या था?
- (A) मुस्लिम लीग की स्थापना
- (B) बंगाल विभाजन
- (C) नरमपंथी और गरमपंथी नेताओं के बीच वैचारिक मतभेद
- (D) स्वदेशी आंदोलन
सही उत्तर: (C) नरमपंथी और गरमपंथी नेताओं के बीच वैचारिक मतभेद
विस्तृत व्याख्या: 1907 के सूरत अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नरमपंथी (Moderate) और गरमपंथी (Extremist) गुटों में विभाजन हो गया। इस विभाजन का मुख्य कारण दोनों गुटों के बीच वैचारिक मतभेद थे। नरमपंथी संवैधानिक तरीकों से धीरे-धीरे सुधार चाहते थे, जबकि गरमपंथी (जैसे बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल) अधिक आक्रामक तरीकों, जैसे असहयोग और बहिष्कार, के माध्यम से पूर्ण स्वराज या स्वशासन प्राप्त करना चाहते थे। अध्यक्ष पद के चुनाव और आंदोलन की रणनीति को लेकर भी मतभेद थे।
(A) मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में हुई थी, जो विभाजन का एक पृष्ठभूमि कारण हो सकता है लेकिन प्रत्यक्ष कारण नहीं।
(B) बंगाल विभाजन (1905) ने गरमपंथियों को मजबूत किया और विभाजन को बढ़ावा दिया, लेकिन यह प्रत्यक्ष कारण नहीं था।
(D) स्वदेशी आंदोलन (1905) नरमपंथियों और गरमपंथियों दोनों द्वारा समर्थित था, लेकिन इसकी रणनीति पर भी मतभेद थे जो विभाजन का हिस्सा बने। -
किस ब्रिटिश गवर्नर-जनरल ने ‘स्थायी बंदोबस्त’ (Permanent Settlement) प्रणाली की शुरुआत की थी?
- (A) लॉर्ड हेस्टिंग्स
- (B) लॉर्ड विलियम बेंटिंक
- (C) लॉर्ड कार्नवालिस
- (D) लॉर्ड वेलेज़ली
सही उत्तर: (C) लॉर्ड कार्नवालिस
विस्तृत व्याख्या: लॉर्ड कार्नवालिस ने 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में ‘स्थायी बंदोबस्त’ प्रणाली की शुरुआत की थी। इस प्रणाली के तहत, जमींदारों को भूमि का स्थायी मालिक बना दिया गया और उन्हें एक निश्चित राशि राजस्व के रूप में सरकार को भुगतान करनी होती थी। इस प्रणाली का उद्देश्य सरकार के लिए राजस्व की एक स्थिर धारा सुनिश्चित करना था, लेकिन इसने जमींदारों को किसानों का शोषण करने का अवसर दिया और कृषि समाज में असमानता को बढ़ाया।
(A) लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813-1823) रैयतवाड़ी और महालवाड़ी जैसी अन्य भूमि राजस्व प्रणालियों से जुड़े थे।
(B) लॉर्ड विलियम बेंटिंक (1828-1835) सती प्रथा के उन्मूलन के लिए जाने जाते हैं।
(D) लॉर्ड वेलेज़ली (1798-1805) सहायक संधि प्रणाली के लिए प्रसिद्ध हैं। -
किस भारतीय स्वतंत्रता सेनानी को ‘पंजाब केसरी’ के नाम से जाना जाता है?
- (A) भगत सिंह
- (B) लाला लाजपत राय
- (C) सरदार अजीत सिंह
- (D) बिपिन चंद्र पाल
सही उत्तर: (B) लाला लाजपत राय
विस्तृत व्याख्या: लाला लाजपत राय (1865-1928) को ‘पंजाब केसरी’ (पंजाब का शेर) के नाम से जाना जाता है। वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता थे और गरम दल के ‘लाल-बाल-पाल’ तिकड़ी का हिस्सा थे। उन्होंने पंजाब में आर्य समाज आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और साइमन कमीशन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज में घायल होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
(A) भगत सिंह एक क्रांतिकारी थे और ‘शहीद-ए-आजम’ के नाम से जाने जाते हैं।
(C) सरदार अजीत सिंह भगत सिंह के चाचा थे और एक प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे, लेकिन ‘पंजाब केसरी’ नहीं।
(D) बिपिन चंद्र पाल गरम दल के एक और प्रमुख नेता थे, लेकिन ‘पंजाब केसरी’ लाला लाजपत राय को कहा जाता था। -
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान के किन दो शहरों पर परमाणु बम गिराए थे?
- (A) टोक्यो और ओसाका
- (B) हिरोशिमा और नागासाकी
- (C) कोबे और क्योटो
- (D) सपोरो और फुकुओका
सही उत्तर: (B) हिरोशिमा और नागासाकी
विस्तृत व्याख्या: द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में, 6 अगस्त, 1945 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान के शहर हिरोशिमा पर “लिटिल बॉय” नामक पहला परमाणु बम गिराया। इसके तीन दिन बाद, 9 अगस्त, 1945 को, दूसरा परमाणु बम “फैट मैन” नागासाकी पर गिराया गया। इन हमलों के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर विनाश और हजारों लोगों की तत्काल मृत्यु हुई, और जापान ने अंततः 15 अगस्त, 1945 को आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हुआ।
(A) टोक्यो और ओसाका जापान के महत्वपूर्ण शहर थे जिन पर पारंपरिक बमबारी हुई थी, लेकिन परमाणु बम नहीं गिराए गए थे।
(C) कोबे और क्योटो भी जापानी शहर हैं, लेकिन वे परमाणु बम हमलों के लक्ष्य नहीं थे।
(D) सपोरो और फुकुओका भी जापान के शहर हैं, लेकिन वे परमाणु बम हमलों के लक्ष्य नहीं थे। -
‘गुटनिरपेक्ष आंदोलन’ (Non-Aligned Movement – NAM) की स्थापना में किस भारतीय प्रधानमंत्री की प्रमुख भूमिका थी?
- (A) महात्मा गांधी
- (B) सरदार वल्लभभाई पटेल
- (C) जवाहरलाल नेहरू
- (D) इंदिरा गांधी
सही उत्तर: (C) जवाहरलाल नेहरू
विस्तृत व्याख्या: गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की स्थापना शीत युद्ध के दौरान हुई थी, जिसका उद्देश्य नव स्वतंत्र देशों को किसी भी प्रमुख शक्ति गुट (संयुक्त राज्य अमेरिका या सोवियत संघ) में शामिल होने से बचाना था। इसकी स्थापना में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रमुख भूमिका थी, साथ ही यूगोस्लाविया के जोसिप ब्रोज़ टीटो, मिस्र के गमाल अब्देल नासिर, इंडोनेशिया के सुकर्णो और घाना के क्वामे न्क्रूमा भी इसके सह-संस्थापक थे। 1961 में बेलग्रेड में पहला NAM शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था।
(A) महात्मा गांधी का निधन NAM की स्थापना से पहले हो गया था।
(B) सरदार वल्लभभाई पटेल का निधन भी NAM की स्थापना से पहले हो गया था।
(D) इंदिरा गांधी बाद में भारत की प्रधानमंत्री बनीं और उन्होंने NAM का नेतृत्व किया, लेकिन वे इसकी संस्थापकों में से नहीं थीं। -
‘सर्वोदय’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया था?
- (A) महात्मा गांधी
- (B) विनोबा भावे
- (C) जयप्रकाश नारायण
- (D) दादाभाई नौरोजी
सही उत्तर: (A) महात्मा गांधी
विस्तृत व्याख्या: ‘सर्वोदय’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले महात्मा गांधी ने जॉन रस्किन की पुस्तक ‘अनटू दिस लास्ट’ (Unto This Last) के अपने गुजराती अनुवाद के शीर्षक के रूप में किया था। सर्वोदय का अर्थ है ‘सभी का उत्थान’ या ‘सभी का कल्याण’। गांधीजी ने इस अवधारणा को समाज के सबसे कमजोर और दलित वर्गों सहित सभी के नैतिक, सामाजिक और आर्थिक उत्थान के विचार को व्यक्त करने के लिए विकसित किया। यह उनके सामाजिक-आर्थिक दर्शन का एक केंद्रीय स्तंभ था।
(B) विनोबा भावे ने गांधी के निधन के बाद सर्वोदय आंदोलन को आगे बढ़ाया, लेकिन शब्द का प्रयोग गांधीजी ने किया था।
(C) जयप्रकाश नारायण भी सर्वोदय आंदोलन से जुड़े थे।
(D) दादाभाई नौरोजी ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में जाने जाते हैं और उन्होंने ‘ड्रेन ऑफ वेल्थ’ सिद्धांत दिया था। -
आजाद हिंद फौज (Indian National Army – INA) का गठन किस देश में किया गया था?
- (A) भारत
- (B) जर्मनी
- (C) सिंगापुर
- (D) जापान
सही उत्तर: (C) सिंगापुर
विस्तृत व्याख्या: आजाद हिंद फौज (INA) का औपचारिक गठन सितंबर 1942 में कैप्टन मोहन सिंह द्वारा किया गया था, लेकिन इसका पुनर्गठन और नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस ने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में किया था। इसका मुख्य उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान की सहायता से ब्रिटिश शासन से भारत को मुक्त कराना था। सुभाष चंद्र बोस ने “दिल्ली चलो” और “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” जैसे नारे दिए।
(A) भारत में इसका गठन नहीं हुआ, बल्कि भारत के बाहर इसका गठन किया गया था।
(B) सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी में भारतीय सैन्य दल का गठन किया था, लेकिन INA का मुख्य गठन सिंगापुर में हुआ।
(D) जापान ने INA को समर्थन दिया, लेकिन गठन सिंगापुर में हुआ था। -
हड़प्पा स्थल ‘धोलावीरा’ किस भारतीय राज्य में स्थित है, जो अपनी उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) राजस्थान
- (B) पंजाब
- (C) गुजरात
- (D) हरियाणा
सही उत्तर: (C) गुजरात
विस्तृत व्याख्या: धोलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है जो भारत के गुजरात राज्य के कच्छ जिले में स्थित है। यह अपने अद्वितीय शहरी नियोजन, विशेष रूप से उन्नत जल संचयन और प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें बड़े जलाशय और बांध शामिल थे। धोलावीरा यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में भी शामिल है।
(A) राजस्थान में कालीबंगा जैसे हड़प्पा स्थल हैं।
(B) पंजाब में रोपड़ जैसे हड़प्पा स्थल हैं।
(D) हरियाणा में राखीगढ़ी और बनावली जैसे महत्वपूर्ण हड़प्पा स्थल हैं। -
किस मुगल सम्राट के शासनकाल में ‘चित्रकला अपने चरमोत्कर्ष पर थी’?
- (A) अकबर
- (B) जहांगीर
- (C) शाहजहां
- (D) औरंगजेब
सही उत्तर: (B) जहांगीर
विस्तृत व्याख्या: मुगल बादशाह जहांगीर (1605-1627 ईस्वी) का शासनकाल मुगल चित्रकला का स्वर्ण युग माना जाता है। वह कला का एक महान संरक्षक था और उसके दरबार में कई कुशल चित्रकार थे। जहांगीर स्वयं चित्रकला का पारखी था और चित्रों की गुणवत्ता और कलाकारों की पहचान करने में माहिर था। उसके शासनकाल में प्रकृतिवाद, व्यक्ति-चित्रण और दरबार के दृश्यों को चित्रित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
(A) अकबर के शासनकाल में मुगल चित्रकला की नींव रखी गई और फारसी व भारतीय शैलियों का मिश्रण हुआ।
(C) शाहजहां का शासनकाल वास्तुकला का स्वर्ण युग था, हालांकि चित्रकला भी जारी रही।
(D) औरंगजेब ने कलाओं को संरक्षण नहीं दिया, जिससे चित्रकला का पतन हुआ। -
किस गवर्नर-जनरल ने ‘व्यपगत के सिद्धांत’ (Doctrine of Lapse) को लागू किया था?
- (A) लॉर्ड कार्नवालिस
- (B) लॉर्ड हेस्टिंग्स
- (C) लॉर्ड डलहौजी
- (D) लॉर्ड कैनिंग
सही उत्तर: (C) लॉर्ड डलहौजी
विस्तृत व्याख्या: लॉर्ड डलहौजी (1848-1856 ईस्वी) ने ‘व्यपगत के सिद्धांत’ (Doctrine of Lapse) की नीति को लागू किया था। इस नीति के तहत, यदि किसी भारतीय शासक की मृत्यु बिना किसी प्राकृतिक पुरुष उत्तराधिकारी के हो जाती थी, तो उसके राज्य को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया जाता था। इस नीति के तहत विलय किए गए प्रमुख राज्यों में सतारा (1848), संबलपुर (1849), उदयपुर (1852), नागपुर (1853), और झांसी (1854) शामिल थे। इस नीति को 1857 के विद्रोह के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।
(A) लॉर्ड कार्नवालिस स्थायी बंदोबस्त और सिविल सेवाओं के जनक के रूप में जाने जाते हैं।
(B) लॉर्ड हेस्टिंग्स ने हस्तक्षेप की नीति अपनाई, लेकिन व्यपगत सिद्धांत से जुड़े नहीं थे।
(D) लॉर्ड कैनिंग 1857 के विद्रोह के समय भारत के वायसराय थे और उनके कार्यकाल में यह नीति समाप्त हो गई। -
कौन सा समाज सुधारक ‘विधवा पुनर्विवाह संघ’ (Widow Remarriage Association) से जुड़ा था?
- (A) ज्योतिबा फुले
- (B) गोपाल हरि देशमुख
- (C) विष्णु शास्त्री पंडित
- (D) एम. जी. रानाडे
सही उत्तर: (C) विष्णु शास्त्री पंडित
विस्तृत व्याख्या: विष्णु शास्त्री पंडित ने 1850 में ‘विधवा पुनर्विवाह संघ’ (Widow Remarriage Association) की स्थापना की थी। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में व्यापक अभियान चलाया और इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया। हालांकि ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विष्णु शास्त्री पंडित ने एक संगठन के रूप में इस आंदोलन को महाराष्ट्र में आगे बढ़ाया।
(A) ज्योतिबा फुले (1827-1890) सत्यशोधक समाज के संस्थापक थे और दलितों व महिलाओं की शिक्षा के लिए काम किया।
(B) गोपाल हरि देशमुख ‘लोकहितवादी’ के नाम से जाने जाते थे और सामाजिक सुधारों के लिए जाने जाते थे।
(D) एम. जी. रानाडे (महादेव गोविंद रानाडे) प्रार्थना समाज से जुड़े थे और भारतीय सामाजिक सम्मेलन की स्थापना की।
सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।