क्या आप समाजशास्त्र की जटिल अवधारणाओं पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए तैयार हैं? यह दैनिक अभ्यास सेट न केवल आपके ज्ञान का परीक्षण करेगा, बल्कि आपको गहन विश्लेषण की दिशा में ले जाएगा। आइए, समाजशास्त्र के महान विचारकों और समकालीन सामाजिक मुद्दों की इस बौद्धिक यात्रा को शुरू करें और अपनी तैयारी को एक नई ऊंचाई दें!
- एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब:\n
- (A) समाज में बहुत अधिक नियम होते हैं।
- (B) सामाजिक मानदंडों और मूल्यों में गिरावट आती है या वे अस्पष्ट हो जाते हैं।
- (C) व्यक्ति समाज से पूरी तरह अलग हो जाता है।
- (D) आर्थिक असमानता चरम पर होती है।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने ‘एनोमी’ शब्द का उपयोग उस स्थिति का वर्णन करने के लिए किया जहाँ समाज में नैतिक दिशा-निर्देशों या मानदंडों का अभाव होता है, जिससे व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है। यह अक्सर तीव्र सामाजिक परिवर्तन (जैसे आर्थिक संकट या अचानक समृद्धि) के दौरान होता है। विकल्प (A) गलत है क्योंकि यह अत्यधिक नियमन (Fatalism) की ओर इशारा करता है। विकल्प (C) ‘अलगाव’ (Alienation) के अधिक करीब है, जो मार्क्स की अवधारणा है।
- मैक्स वेबर की ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) की अवधारणा का मुख्य उद्देश्य क्या है?\n
- (A) समाज के लिए एक आदर्श मानक निर्धारित करना।
- (B) सामाजिक वास्तविकता का सटीक और पूर्ण विवरण देना।
- (C) तुलनात्मक विश्लेषण के लिए एक मानसिक निर्माण या ‘बेंचमार्क’ तैयार करना।
- (D) यह बताना कि समाज को कैसा होना चाहिए।
\nसही उत्तर: (C)\n
विस्तृत व्याख्या: वेबर के लिए ‘आदर्श प्रारूप’ कोई नैतिक आदर्श नहीं था, बल्कि एक विश्लेषणात्मक उपकरण था। यह किसी सामाजिक घटना की सबसे शुद्ध और तार्किक विशेषताओं को एकत्र करके बनाया जाता है ताकि वास्तविक घटनाओं की तुलना उससे की जा सके। विकल्प (A) और (D) गलत हैं क्योंकि यह एक मूल्य-मुक्त (Value-free) उपकरण है, न कि कोई नैतिक लक्ष्य।
- कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘अलगाव’ (Alienation) का सबसे गहरा स्तर कौन सा है?\n
- (A) उत्पाद से अलगाव।
- (B) उत्पादन की प्रक्रिया से अलगाव।
- (C) साथी श्रमिकों से अलगाव।
- (D) अपनी मानव स्वभाव (Species-essence) से अलगाव।
\nसही उत्तर: (D)\n
विस्तृत व्याख्या: मार्क्स का तर्क था कि पूंजीवाद में श्रमिक न केवल अपने काम या उत्पाद से अलग होता है, बल्कि वह अपनी रचनात्मक क्षमता और मानवीय स्वभाव (Gattungswesen) से भी कट जाता है, क्योंकि वह केवल जीवित रहने के लिए एक मशीन की तरह काम करता है। अन्य विकल्प (A, B, C) अलगाव के विभिन्न स्तर हैं, लेकिन ‘मानव स्वभाव से अलगाव’ सबसे व्यापक और गहरा है।
- टैल्कॉट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ (Latency) का क्या अर्थ है?\n
- (A) अनुकूलन (Adaptation)
- (B) लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment)
- (C) एकीकरण (Integration)
- (D) प्रतिमान अनुरक्षण (Pattern Maintenance)
\nसही उत्तर: (D)\n
विस्तृत व्याख्या: पार्सन्स के अनुसार, किसी भी सामाजिक प्रणाली को जीवित रहने के लिए चार कार्य करने होते हैं: Adaptation (A), Goal Attainment (G), Integration (I), और Latency (L)। ‘Latency’ का अर्थ है सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना और तनाव को कम करना ताकि सामाजिक ढांचा स्थिर रहे। इसे ‘प्रतिमान अनुरक्षण’ भी कहा जाता है।
- रॉबर्ट के. मर्टन द्वारा प्रतिपादित ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अप्रत्यक्ष कार्य’ (Latent Function) में क्या अंतर है?\n
- (A) प्रकट कार्य अनचाहे होते हैं, अप्रत्यक्ष कार्य इच्छित होते हैं।
- (B) प्रकट कार्य मान्यता प्राप्त और इच्छित होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कार्य अनपेक्षित और छिपे होते हैं।
- (C) दोनों एक ही होते हैं, बस नाम अलग हैं।
- (D) प्रकट कार्य केवल नकारात्मक होते हैं।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: मर्टन ने स्पष्ट किया कि सामाजिक संस्थाओं के कुछ परिणाम इच्छित और घोषित होते हैं (जैसे स्कूल का कार्य शिक्षा देना – प्रकट कार्य), जबकि कुछ परिणाम अनजाने में निकलते हैं (जैसे स्कूल में मित्र बनाना या सामाजिक नेटवर्क विकसित करना – अप्रत्यक्ष कार्य)।
- सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) के संदर्भ में ‘बंद स्तरीकरण’ (Closed Stratification) का उदाहरण कौन सा है?\n
- (A) वर्ग प्रणाली (Class System)
- (B) जाति प्रणाली (Caste System)
- (C) योग्यता तंत्र (Meritocracy)
- (D) व्यावसायिक पदानुक्रम
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: ‘बंद स्तरीकरण’ वह प्रणाली है जहाँ सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) अत्यंत सीमित या असंभव होती है। जाति प्रणाली जन्म पर आधारित होती है, जिसे बदला नहीं जा सकता। इसके विपरीत, वर्ग प्रणाली (विकल्प A) एक ‘खुली प्रणाली’ है जहाँ शिक्षा और धन के माध्यम से ऊपर बढ़ा जा सकता है।
- ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) के मुख्य प्रस्तावक कौन थे?\n
- (A) हरबर्ट स्पेंसर
- (B) जॉर्ज हरबर्ट मीड और हर्बर्ट ब्लूमर
- (C) ऑगस्ट कॉम्टे
- (D) एमिल दुर्खीम
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: यह सूक्ष्म-समाजशास्त्रीय (Micro-sociological) दृष्टिकोण है जो इस बात पर जोर देता है कि लोग प्रतीकों और भाषा के माध्यम से अर्थ बनाते हैं और एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया करते हैं। मीड ने ‘I’ और ‘Me’ की अवधारणा दी, जिसे ब्लूमर ने आगे विकसित किया। विकल्प (A, C, D) कार्यात्मक या संरचनात्मक दृष्टिकोण के समर्थक थे।
- संस्कृति के संदर्भ में ‘नृजातीयता’ (Ethnocentrism) का क्या अर्थ है?\n
- (A) सभी संस्कृतियों को समान महत्व देना।
- (B) अपनी संस्कृति को अन्य सभी संस्कृतियों से श्रेष्ठ मानना।
- (C) दूसरी संस्कृति को उसकी अपनी मान्यताओं के आधार पर समझना।
- (D) विभिन्न संस्कृतियों का मिश्रण।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: नृजातीयता तब होती है जब कोई व्यक्ति अपनी संस्कृति के मूल्यों और मानदंडों को ‘मानक’ मान लेता है और दूसरों की संस्कृति को उसके आधार पर आंकता है, जिससे अक्सर दूसरे निम्न नजर आते हैं। विकल्प (C) ‘सांस्कृतिक सापेक्षवाद’ (Cultural Relativism) की परिभाषा है।
- ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) की अवधारणा किसने दी थी?\n
- (A) चार्ल्स कूले
- (B) मैक्स वेबर
- (C) रॉबर्ट मर्टन
- (D) किंग्सले डेविस
\nसही उत्तर: (A)\n
विस्तृत व्याख्या: चार्ल्स कूले ने परिवार और करीबी मित्रों जैसे समूहों को ‘प्राथमिक समूह’ कहा, जिनमें आमने-सामने के घनिष्ठ संबंध और भावनात्मक जुड़ाव होता है। इसके विपरीत ‘द्वितीयक समूह’ औपचारिक और उद्देश्य-आधारित होते हैं।
- हिंदू विवाह के संदर्भ में ‘अंतर्विवाह’ (Endogamy) का क्या अर्थ है?\n
- (A) अपने समूह या जाति के बाहर विवाह करना।
- (B) अपने ही सामाजिक समूह, जाति या गोत्र के भीतर विवाह करना।
- (C) एक साथ कई पत्नियों से विवाह करना।
- (D) बिना किसी सामाजिक नियम के विवाह करना।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: अंतर्विवाह एक सामाजिक नियम है जो व्यक्ति को अपनी ही श्रेणी (जैसे जाति) में विवाह करने के लिए बाध्य करता है। विकल्प (A) ‘बहिर्विवाह’ (Exogamy) कहलाता है, जहाँ अपने गोत्र या कुल से बाहर विवाह करना अनिवार्य होता है।
- ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र’ (Profane) के बीच का अंतर किस समाजशास्त्री ने धर्म के अध्ययन में प्रमुखता से उपयोग किया?\n
- (A) मैक्स वेबर
- (B) एमिल दुर्खीम
- (C) कार्ल मार्क्स
- (D) ऑगस्ट कॉम्टे
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘The Elementary Forms of the Religious Life’ में तर्क दिया कि धर्म का मूल आधार दुनिया को दो श्रेणियों—पवित्र (Sacred) और अपवित्र (Profane)—में बांटना है। पवित्र वस्तुएं समाज के सामूहिक विश्वास और सम्मान का प्रतीक होती हैं।
- शिक्षा के समाजशास्त्र में ‘छिपा हुआ पाठ्यक्रम’ (Hidden Curriculum) से क्या तात्पर्य है?\n
- (A) वह पाठ्यक्रम जो सरकार ने गुप्त रखा हो।
- (B) वह ज्ञान जो किताबों में नहीं होता लेकिन स्कूल के माहौल और अनुशासन से सीखा जाता है।
- (C) केवल शिक्षकों के लिए बनाया गया विशेष पाठ्यक्रम।
- (D) वह ज्ञान जो केवल समृद्ध बच्चों को दिया जाता है।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: छिपा हुआ पाठ्यक्रम उन अनौपचारिक मूल्यों, दृष्टिकोणों और व्यवहारों को संदर्भित करता है जो छात्र स्कूल में अनजाने में सीखते हैं, जैसे सत्ता के प्रति आज्ञाकारिता, समय की पाबंदी और सामाजिक पदानुक्रम का सम्मान।
- ‘घटना विज्ञान’ (Phenomenology) के संदर्भ में अल्फ्रेड शुट्ज़ (Alfred Schutz) का मुख्य योगदान क्या है?\n
- (A) सामाजिक तथ्यों का सांख्यिकीय विश्लेषण।
- (B) ‘जीवन-जगत’ (Life-world) और सामान्य ज्ञान (Common Sense) का अध्ययन।
- (C) वर्ग संघर्ष के माध्यम से इतिहास की व्याख्या।
- (D) नौकरशाही के नियमों का अध्ययन।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: शुट्ज़ ने यह अध्ययन किया कि व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अनुभवों को कैसे अर्थ देता है। उन्होंने ‘लाइफ-वर्ल्ड’ की अवधारणा दी, जो उन साझा अनुभवों और मान्यताओं का समूह है जिनके आधार पर हम दुनिया को समझते हैं।
- नृवंशविज्ञान (Ethnography) अनुसंधान की मुख्य विशेषता क्या है?\n
- (A) केवल प्रश्नावली (Questionnaire) का उपयोग करना।
- (B) प्रयोगशाला में नियंत्रित प्रयोग करना।
- (C) दीर्घकालिक गहन अवलोकन और सहभागी अवलोकन (Participant Observation)।
- (D) केवल पुस्तकालय के आंकड़ों का विश्लेषण करना।
\nसही उत्तर: (C)\n
विस्तृत व्याख्या: नृवंशविज्ञान में शोधकर्ता उस समुदाय के बीच रहकर, उनकी भाषा और संस्कृति को अपनाकर डेटा एकत्र करता है। यह गुणात्मक (Qualitative) पद्धति है, जबकि प्रश्नावली मात्रात्मक (Quantitative) पद्धति का हिस्सा है।
- एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
- (A) निचली जातियों का अपनी संस्कृति को पूरी तरह छोड़ देना।
- (B) निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों (विशेषकर द्विजों) के रीति-रिवाजों, विचारधारा और जीवन शैली को अपनाना।
- (C) ब्राह्मणों का निचली जातियों के रीति-रिवाजों को अपनाना।
- (D) जाति व्यवस्था का पूरी तरह समाप्त हो जाना।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण एक सामाजिक गतिशीलता की प्रक्रिया है जहाँ निम्न जातियां अपनी सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए उच्च जातियों के कर्मकांडों और जीवन जीने के तरीकों को अपनाती हैं। यह जाति व्यवस्था के भीतर होने वाला परिवर्तन है, न कि जाति व्यवस्था का अंत।
- ‘प्रभु जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा के लिए कौन सी शर्त आवश्यक नहीं है?\n
- (A) जमीन का स्वामित्व।
- (B) संख्यात्मक शक्ति।
- (C) उच्च राजनीतिक शक्ति।
- (D) अनिवार्य रूप से केवल ब्राह्मण होना।
\nसही उत्तर: (D)\n
विस्तृत व्याख्या: श्रीनिवास के अनुसार, प्रभु जाति वह है जिसके पास जमीन, संख्यात्मक बहुमत और राजनीतिक प्रभाव हो। जरूरी नहीं कि वह जाति पदानुक्रम में सबसे ऊपर (ब्राह्मण) हो; एक मध्यवर्ती जाति भी प्रभु जाति हो सकती है यदि उसके पास संसाधन हों।
- भारत में जनजातीय समुदायों के संदर्भ में ‘एकीकरण’ (Integration) और ‘आत्मसात’ (Assimilation) में क्या अंतर है?\n
- (A) दोनों एक ही प्रक्रियाएं हैं।
- (B) एकीकरण में अपनी पहचान बनाए रखते हुए मुख्यधारा से जुड़ना शामिल है, जबकि आत्मसात में अपनी मूल पहचान खोकर दूसरी संस्कृति में मिल जाना शामिल है।
- (C) आत्मसात अधिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।
- (D) एकीकरण केवल आर्थिक सुधार है।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: एकीकरण (Integration) एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ जनजाति अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता बनाए रखती है लेकिन राष्ट्र के आर्थिक-राजनीतिक ढांचे का हिस्सा बनती है। आत्मसात (Assimilation) में जनजाति अपनी भाषा और संस्कृति छोड़कर बहुसंख्यक समाज में विलीन हो जाती है।
- ग्रामीण समाजशास्त्र में ‘जजमानी व्यवस्था’ (Jajmani System) का मुख्य आधार क्या था?\n
- (A) केवल नकद भुगतान।
- (B) सेवाओं के बदले अनाज या भूमि का पारंपरिक विनिमय।
- (C) बाजार आधारित प्रतिस्पर्धा।
- (D) सरकारी वेतन प्रणाली।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: जजमानी व्यवस्था एक पारंपरिक आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था थी जहाँ सेवा प्रदाता जातियां (कामगार) संरक्षक जातियों (जजमान) को सेवाएं देती थीं और बदले में उन्हें फसल का हिस्सा या अन्य लाभ मिलते थे। यह पारस्परिक निर्भरता पर आधारित थी।
- लुई विर्थ (Louis Wirth) के अनुसार ‘शहरीता’ (Urbanism) की तीन मुख्य विशेषताएं क्या हैं?\n
- (A) गरीबी, बीमारी और बेरोजगारी।
- (B) जनसंख्या का आकार, घनत्व और विविधता।
- (C) आधुनिक तकनीक, शिक्षा और स्वास्थ्य।
- (D) औद्योगिक विकास, व्यापार और परिवहन।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: विर्थ ने तर्क दिया कि शहर की भौतिक बनावट (बड़ी जनसंख्या, उच्च घनत्व और सामाजिक विविधता) वहां के निवासियों के सामाजिक व्यवहार और मनोवैज्ञानिक स्थिति को निर्धारित करती है, जिससे संबंध अधिक औपचारिक और सतही हो जाते हैं।
- ‘डिजिटल डिवाइड’ (Digital Divide) का समाजशास्त्रीय अर्थ क्या है?\n
- (A) कंप्यूटर चलाने की क्षमता में अंतर।
- (B) सूचना और संचार तकनीक (ICT) तक पहुंच रखने वाले और न रखने वाले लोगों के बीच की सामाजिक-आर्थिक खाई।
- (C) केवल इंटरनेट की धीमी गति।
- (D) विभिन्न ब्रांड के मोबाइल फोन का उपयोग।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: डिजिटल डिवाइड केवल तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि एक सामाजिक समस्या है। यह जाति, वर्ग, लिंग और भूगोल के आधार पर सूचना तक पहुंच की असमानता को दर्शाता है, जिससे सामाजिक स्तरीकरण और गहरा होता है।
- समकालीन समाज में ‘प्रणालीगत असमानता’ (Systemic Inequality) का क्या अर्थ है?\n
- (A) किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे के प्रति व्यक्तिगत नफरत।
- (B) समाज के नियमों, कानूनों और संस्थाओं में अंतर्निहित ऐसी व्यवस्था जो कुछ समूहों को लाभ पहुँचाती है और दूसरों को वंचित रखती है।
- (C) केवल गरीबी का होना।
- (D) शिक्षा का अभाव।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: प्रणालीगत असमानता वह होती है जो व्यक्तिगत पूर्वाग्रह से परे, संस्थागत स्तर पर मौजूद होती है (जैसे ऋण मिलने में नस्लीय या जातिगत भेदभाव)। यह समाज के ढांचे में इतनी गहराई से समाई होती है कि यह सामान्य प्रक्रिया जैसा प्रतीत होता है।
- कार्ल मार्क्स के ‘ऐतिहासिक भौतिकवाद’ (Historical Materialism) का मुख्य तर्क क्या है?\n
- (A) विचार समाज को बदलते हैं।
- (B) उत्पादन के साधन और संबंध (आर्थिक आधार) समाज की ऊपरी संरचना (कानून, धर्म, राजनीति) को निर्धारित करते हैं।
- (C) इतिहास केवल महान राजाओं के कार्यों का परिणाम है।
- (D) समाज स्थिर रहता है और कभी नहीं बदलता।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: मार्क्स का मानना था कि समाज का ‘आधार’ (Base) उसकी अर्थव्यवस्था है। जब उत्पादन की शक्तियों में बदलाव आता है, तो यह समाज की ‘अधिसंरचना’ (Superstructure) जैसे राजनीति और संस्कृति में भी बदलाव लाता है, जिससे वर्ग संघर्ष और क्रांति जन्म लेती है।
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार ‘Me’ (मैं) और ‘I’ (मुझे) में क्या अंतर है?\n
- (A) ‘I’ सामाजिक अपेक्षाएं हैं, ‘Me’ व्यक्तिगत इच्छा है।
- (B) ‘I’ व्यक्ति का रचनात्मक और स्वतःस्फूर्त हिस्सा है, जबकि ‘Me’ समाज की नजरों से देखा गया व्यक्ति (सामाजिक अंतःक्रिया का परिणाम) है।
- (C) दोनों एक ही हैं।
- (D) ‘Me’ जन्मजात होता है और ‘I’ अर्जित होता है।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: मीड के अनुसार, ‘I’ वह सक्रिय हिस्सा है जो प्रतिक्रिया करता है, जबकि ‘Me’ वह हिस्सा है जो समाज के मानदंडों और दूसरों की अपेक्षाओं को आत्मसात कर चुका होता है। इन दोनों के बीच का संवाद ही ‘स्व’ (Self) का निर्माण करता है।
- सामाजिक परिवर्तन के संदर्भ में ‘आधुनिकीकरण’ (Modernization) का क्या अर्थ है?\n
- (A) केवल पश्चिमी कपड़े पहनना।
- (B) पारंपरिक समाज का तर्कसंगत, औद्योगिक और शहरी समाज में परिवर्तन।
- (C) पुरानी सभी परंपराओं को पूरी तरह नष्ट करना।
- (D) केवल तकनीक का उपयोग करना।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: आधुनिकीकरण एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें तर्कसंगतता (Rationality), विज्ञान, शहरीकरण और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रसार होता है। यह केवल पश्चिमीकरण नहीं है, बल्कि समाज के ढांचे में आने वाला एक बुनियादी बदलाव है।
- ‘पैट्रिआर्की’ (Patriarchy) या पितृसत्ता का समाजशास्त्रीय अर्थ क्या है?\n
- (A) पिता का परिवार में केवल वित्तीय नियंत्रण।
- (B) एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था जहाँ पुरुष सत्ता का केंद्र होते हैं और महिलाओं की भूमिका गौण होती है।
- (C) केवल पुरुषों का महिलाओं से प्यार करना।
- (D) परिवार में केवल पिता का शासन।
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: पितृसत्ता केवल एक पारिवारिक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक संरचना है जो शक्ति, संसाधनों और निर्णय लेने के अधिकार पुरुषों के हाथ में केंद्रित करती है और लिंग आधारित असमानता को बढ़ावा देती है।
- ‘पॉज़िटिविज़्म’ (Positivism) या प्रत्यक्षवाद का जनक किसे माना जाता है?\n
- (A) मैक्स वेबर
- (B) ऑगस्ट कॉम्टे
- (C) हर्बर्ट स्पेंसर
- (D) एमिल दुर्खीम
\nसही उत्तर: (B)\n
विस्तृत व्याख्या: ऑगस्ट कॉम्टे ने समाजशास्त्र की स्थापना की और ‘प्रत्यक्षवाद’ का प्रस्ताव रखा। उनका मानना था कि समाज का अध्ययन भी प्राकृतिक विज्ञानों (जैसे भौतिकी, रसायन विज्ञान) की तरह अनुभवजन्य प्रमाणों और वैज्ञानिक विधियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।