क्या आप समाजशास्त्र की जटिल अवधारणाओं और महान विचारकों के सिद्धांतों में महारत हासिल करना चाहते हैं? यह दैनिक अभ्यास सेट आपकी विश्लेषणात्मक सोच को चुनौती देने और UGC-NET, UPSC जैसे कठिन एग्जाम्स के लिए आपको तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अपनी तैयारी को अगले स्तर पर ले जाएं और अपनी वैचारिक सटीकता की जाँच करें।
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- इमाइल दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब:\n
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- (A) समाज में बहुत अधिक नियम होते हैं।
- (B) सामाजिक मानदंडों का अभाव या विघटन होता है।
- (C) व्यक्ति समाज से पूरी तरह अलग हो जाता है।
- (D) आर्थिक असमानता चरम पर होती है।
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\nउत्तर: (B) सामाजिक मानदंडों का अभाव या विघटन होता है।\n
विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने ‘एनोमी’ शब्द का उपयोग उस स्थिति के लिए किया जहाँ समाज में नैतिक दिशा-निर्देशों या मानदंडों की कमी हो जाती है, जिससे व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है। यह अक्सर तेजी से होने वाले सामाजिक परिवर्तनों के दौरान होता है। विकल्प (A) गलत है क्योंकि यह नियमों की अधिकता की बात करता है, जबकि एनोमी नियमों की कमी है। विकल्प (C) ‘अलगाव’ (Alienation) की ओर संकेत करता है, जो मार्क्स की अवधारणा है।
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- कार्ल मार्क्स के ‘अलगाव’ (Alienation) के सिद्धांत में, श्रमिक निम्नलिखित में से किससे अलग नहीं होता है?\n
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- (A) उत्पादित वस्तु से।
- (B) उत्पादन की प्रक्रिया से।
- (C) अपने सहकर्मियों से।
- (D) सरकार के कानूनी ढांचे से।
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\nउत्तर: (D) सरकार के कानूनी ढांचे से।\n
विस्तृत व्याख्या: मार्क्स ने अलगाव के चार मुख्य प्रकार बताए हैं: उत्पाद से अलगाव, उत्पादन प्रक्रिया से अलगाव, साथी मनुष्यों (सहकर्मियों) से अलगाव, और स्वयं की प्रजाति-सत्ता (Species-essence) से अलगाव। सरकार का कानूनी ढांचा मार्क्स के अनुसार ‘अधिसंरचना’ (Superstructure) का हिस्सा है, न कि अलगाव के प्राथमिक चार प्रकारों का।
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- मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) का मुख्य उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) समाज के लिए एक नैतिक मानक स्थापित करना।
- (B) सामाजिक वास्तविकता का एक सटीक और पूर्ण वर्णन करना।
- (C) विश्लेषण के लिए एक तुलनात्मक मानसिक निर्माण (Conceptual Tool) बनाना।
- (D) भविष्य की सामाजिक घटनाओं की भविष्यवाणी करना।
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\nउत्तर: (C) विश्लेषण के लिए एक तुलनात्मक मानसिक निर्माण (Conceptual Tool) बनाना।\n
विस्तृत व्याख्या: ‘आदर्श प्रारूप’ कोई वास्तविक वस्तु नहीं है, बल्कि एक सैद्धांतिक उपकरण है जिसका उपयोग वेबर सामाजिक घटनाओं की तुलना करने और उन्हें समझने के लिए करते थे। यह ‘आदर्श’ (Ideal) इसलिए है क्योंकि यह विशिष्ट गुणों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है, न कि इसलिए कि यह ‘श्रेष्ठ’ है। विकल्प (A) और (B) गलत हैं क्योंकि यह न तो नैतिक मानक है और न ही पूर्ण वास्तविकता।
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- टैलकॉट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ (Latency) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) कानून और व्यवस्था बनाए रखना।
- (B) लक्ष्यों को प्राप्त करना।
- (C) संसाधनों का संग्रहण करना।
- (D) सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना और तनाव कम करना।
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\nउत्तर: (D) सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना और तनाव कम करना।\n
विस्तृत व्याख्या: पार्सन्स के अनुसार, किसी भी सामाजिक प्रणाली को जीवित रहने के लिए चार कार्य करने होते हैं: Adaptation (अनुकूलन), Goal Attainment (लक्ष्य प्राप्ति), Integration (एकीकरण), और Latency (प्रसुप्तता/पैटर्न रखरखाव)। ‘Latency’ का संबंध परिवार और शिक्षा जैसी संस्थाओं से है जो मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाती हैं।
- रॉबर्ट के. मर्टन के ‘स्ट्रेन थ्योरी’ (Strain Theory) में ‘नवाचार’ (Innovation) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) सांस्कृतिक लक्ष्यों को स्वीकार करना लेकिन वैध साधनों को अस्वीकार करना।
- (B) लक्ष्यों और साधनों दोनों को स्वीकार करना।
- (C) लक्ष्यों और साधनों दोनों को अस्वीकार करना।
- (D) केवल साधनों को अपनाना और लक्ष्यों को छोड़ देना।
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\nउत्तर: (A) सांस्कृतिक लक्ष्यों को स्वीकार करना लेकिन वैध साधनों को अस्वीकार करना।\n
विस्तृत व्याख्या: मर्टन के अनुसार, जब व्यक्ति समाज द्वारा निर्धारित लक्ष्यों (जैसे पैसा) को पाना चाहता है लेकिन उसके पास वैध साधन (जैसे शिक्षा, नौकरी) नहीं होते, तो वह ‘नवाचार’ (अक्सर आपराधिक गतिविधियों) का सहारा लेता है। विकल्प (B) ‘अनुरूपता’ (Conformity) है और विकल्प (C) ‘विद्रोह’ (Rebellion) है।
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- जी.एच. मीड के अनुसार, ‘Me’ (मैं/स्व) का क्या प्रतिनिधित्व करता है?\n
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- (A) व्यक्ति की सहज और रचनात्मक प्रतिक्रिया।
- (B) समाज द्वारा आरोपित अपेक्षाएं और सामाजिक मानक।
- (C) व्यक्ति की आंतरिक इच्छाएं।
- (D) जैविक प्रवृत्तियां।
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\nउत्तर: (B) समाज द्वारा आरोपित अपेक्षाएं और सामाजिक मानक।\n
विस्तृत व्याख्या: मीड ने ‘I’ और ‘Me’ के बीच अंतर किया। ‘I’ व्यक्ति का रचनात्मक, सहज और प्रतिक्रियात्मक पक्ष है, जबकि ‘Me’ वह पक्ष है जो समाज की नजरों से स्वयं को देखता है (Generalized Other)। अतः ‘Me’ सामाजिक नियंत्रण का प्रतिनिधित्व करता है।
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- पियरे बोर्दियू की ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) की अवधारणा का सबसे सटीक उदाहरण क्या है?\n
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- (A) बैंक में जमा राशि।
- (B) उच्च शिक्षा की डिग्री और शिष्टाचार (Etiquette)।
- (C) पुश्तैनी जमीन और संपत्ति।
- (D) राजनीतिक पार्टी की सदस्यता।
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\nउत्तर: (B) उच्च शिक्षा की डिग्री और शिष्टाचार (Etiquette)।\n
विस्तृत व्याख्या: बोर्दियू के अनुसार, सांस्कृतिक पूंजी में ज्ञान, कौशल, शिक्षा और बोलने का तरीका शामिल है, जो व्यक्ति को समाज के उच्च वर्गों में प्रवेश दिलाने में मदद करता है। हालिया शोध (यूरोपीय शिक्षा डेटा) भी यही दर्शाता है कि माता-पिता की पृष्ठभूमि (सांस्कृतिक पूंजी) शैक्षिक अवसरों और नवाचार को प्रभावित करती है। विकल्प (A) और (C) आर्थिक पूंजी हैं।
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- लुई ड्यूमों ने भारतीय जाति व्यवस्था को मुख्य रूप से किस सिद्धांत पर आधारित माना है?\n
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- (A) शक्ति और प्रभुत्व (Power and Dominance)।
- (B) शुद्धता और अशुद्धता (Purity and Pollution)।
- (C) आर्थिक वर्ग (Economic Class)।
- (D) क्षेत्रीय पहचान (Regional Identity)।
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\nउत्तर: (B) शुद्धता और अशुद्धता (Purity and Pollution)।\n
विस्तृत व्याख्या: अपनी पुस्तक ‘Homo Hierarchicus’ में ड्यूमों ने तर्क दिया कि जाति व्यवस्था का आधार पदानुक्रम है, जो शुद्धता और अशुद्धता के धार्मिक/सांस्कृतिक विचारों पर टिका है। एम.एन. श्रीनिवास ने इसके विपरीत ‘प्रभुत्व’ (Dominance) पर अधिक जोर दिया था।
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- एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
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- (A) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाना।
- (B) उच्च जातियों का निम्न जातियों के करीब आना।
- (C) पूरी तरह से जाति व्यवस्था को समाप्त करना।
- (D) केवल विदेशी संस्कृतियों को अपनाना।
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\nउत्तर: (A) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाना।\n
विस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई ‘निम्न’ हिंदू जाति या जनजाति, किसी ‘उच्च’ जाति (विशेषकर द्विज) के रीति-रिवाजों, विचारधारा और जीवन शैली को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति सुधारने का प्रयास करती है।
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- निम्नलिखित में से कौन सा ‘बंद स्तरीकरण’ (Closed Stratification) का उदाहरण है?\n
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- (A) वर्ग (Class)।
- (B) व्यावसायिक स्थिति (Professional Status)।
- (C) जाति (Caste)।
- (D) शैक्षिक योग्यता (Educational Qualification)।
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\nउत्तर: (C) जाति (Caste)।\n
विस्तृत व्याख्या: बंद स्तरीकरण वह प्रणाली है जहाँ व्यक्ति की स्थिति जन्म से निर्धारित होती है और जीवनकाल में इसे बदलना लगभग असंभव होता है। जाति इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके विपरीत, ‘वर्ग’ एक खुला स्तरीकरण है जहाँ शिक्षा और धन के माध्यम से गतिशीलता (Mobility) संभव है।
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- ‘इमोशनल लेबर’ (Emotional Labor) की अवधारणा किसने दी, जिसका उपयोग सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों के अध्ययन में किया जाता है?\n
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- (A) अरली हॉचशिल्ड (Arlie Hochschild)।
- (B) जूडिथ बटलर (Judith Butler)।
- (C) डोरोथी स्मिथ (Dorothy Smith)।
- (D) एनन ओकले (Ann Oakley)।
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\nउत्तर: (A) अरली हॉचशिल्ड (Arlie Hochschild)।\n
विस्तृत व्याख्या: हॉचशिल्ड ने बताया कि कैसे कुछ नौकरियों (जैसे एयर होस्टेस या कॉल सेंटर कर्मचारी) में कर्मचारियों को अपनी वास्तविक भावनाओं को दबाकर एक विशिष्ट भावना (जैसे मुस्कुराहट) प्रदर्शित करनी पड़ती है, जिसे उन्होंने ‘इमोशनल लेबर’ कहा।
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- डिजिटल समाजशास्त्र के संदर्भ में, ‘AI-जनित विजुअल्स’ के माध्यम से घरेलू काम के वितरण का अध्ययन करना किस विषय से संबंधित है?\n
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- (A) ग्रामीण समाजशास्त्र।
- (B) लिंग और श्रम विभाजन (Gender and Division of Labour)।
- (C) राजनीतिक समाजशास्त्र।
- (D) औद्योगिक समाजशास्त्र।
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\nउत्तर: (B) लिंग और श्रम विभाजन (Gender and Division of Labour)।\n
विस्तृत व्याख्या: हालिया शोधों में AI का उपयोग यह देखने के लिए किया जा रहा है कि लोग घरेलू कामों को किस लिंग (पुरुष या महिला) से जोड़ते हैं। यह समाजशास्त्रीय अध्ययन का हिस्सा है कि कैसे रूढ़ियाँ (Stereotypes) हमारे दिमाग में घर के काम के वितरण को तय करती हैं।
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- ‘क्लिकबैट अपराध समाचार’ (Clickbait Crime News) का अध्ययन समाजशास्त्र के किस क्षेत्र में आता है?\n
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- (A) चिकित्सा समाजशास्त्र।
- (B) मीडिया समाजशास्त्र और पेशेवर अधिकार (Sociology of Media)।
- (C) पर्यावरण समाजशास्त्र।
- (D) शिक्षा समाजशास्त्र।
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\nउत्तर: (B) मीडिया समाजशास्त्र और पेशेवर अधिकार (Sociology of Media)।\n
विस्तृत व्याख्या: यह अध्ययन इस बात पर केंद्रित है कि कैसे समाचार माध्यम व्यावसायिक लाभ के लिए अपराधों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं और इससे समाज की सुरक्षा धारणा और पत्रकारिता के पेशेवर मानकों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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- चीन में ‘साइबरस्लैकिंग’ (Cyberslacking) के दौरान समय के नैतिकरण (Moralization of Time) का अध्ययन क्या दर्शाता है?\n
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- (A) इंटरनेट का पूरी तरह से निषेध।
- (B) कार्यस्थल पर सामाजिक नियंत्रण और समय प्रबंधन के नए मानदंड।
- (C) केवल तकनीकी खराबी।
- (D) कर्मचारियों की उत्पादकता में वृद्धि।
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\nउत्तर: (B) कार्यस्थल पर सामाजिक नियंत्रण और समय प्रबंधन के नए मानदंड।\n
विस्तृत व्याख्या: यह अध्ययन यह देखता है कि कैसे आधुनिक कार्य संस्कृति में ‘काम के समय’ का उपयोग निजी इंटरनेट गतिविधियों के लिए करना एक नैतिक मुद्दा बन गया है, जो कार्य और निजी जीवन के बीच धुंधली होती सीमाओं और सामाजिक नियंत्रण को दर्शाता है।
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- नृवंशविज्ञान (Ethnography) अनुसंधान विधि की मुख्य विशेषता क्या है?\n
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- (A) बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण करना।
- (B) केवल सांख्यिकीय डेटा का उपयोग करना।
- (C) गहन अवलोकन और सहभागी अवलोकन (Participant Observation)।
- (D) प्रयोगशाला में नियंत्रित प्रयोग करना।
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\nउत्तर: (C) गहन अवलोकन और सहभागी अवलोकन (Participant Observation)।\n
विस्तृत व्याख्या: नृवंशविज्ञान में शोधकर्ता स्वयं उस समुदाय का हिस्सा बनकर उनके जीवन, संस्कृति और व्यवहार का गहराई से अध्ययन करता है। विकल्प (A) और (B) मात्रात्मक (Quantitative) विधियाँ हैं, जबकि नृवंशविज्ञान एक गुणात्मक (Qualitative) विधि है।
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- स्तरीकृत नमूनाकरण (Stratified Sampling) का उपयोग कब किया जाता है?\n
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- (A) जब जनसंख्या बहुत छोटी हो।
- (B) जब जनसंख्या में अलग-अलग उप-समूह (Strata) हों और उनका प्रतिनिधित्व आवश्यक हो।
- (C) जब शोधकर्ता को यादृच्छिक चयन नहीं करना हो।
- (D) जब समय की कमी हो।
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\nउत्तर: (B) जब जनसंख्या में अलग-अलग उप-समूह (Strata) हों और उनका प्रतिनिधित्व आवश्यक हो।\n
विस्तृत व्याख्या: इसमें जनसंख्या को पहले समूहों (जैसे आयु, लिंग या जाति) में बांटा जाता है और फिर प्रत्येक समूह से नमूने लिए जाते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर वर्ग का उचित प्रतिनिधित्व है।
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- ‘पारिवारिक संरचना’ के संदर्भ में ‘नाभिकीय परिवार’ (Nuclear Family) की मुख्य विशेषता क्या है?\n
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- (A) इसमें तीन या अधिक पीढ़ियाँ एक साथ रहती हैं।
- (B) यह केवल माता-पिता और उनके अविवाहित बच्चों से बना होता है।
- (C) इसमें संपत्ति का स्वामित्व सामूहिक होता है।
- (D) यह केवल ग्रामीण क्षेत्रों में पाया जाता है।
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\nउत्तर: (B) यह केवल माता-पिता और उनके अविवाहित बच्चों से बना होता है।\n
विस्तृत व्याख्या: नाभिकीय परिवार सबसे छोटी पारिवारिक इकाई है। विकल्प (A) संयुक्त परिवार (Joint Family) की विशेषता है। आधुनिक शहरीकरण के कारण नाभिकीय परिवारों की संख्या बढ़ी है।
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- मैक्स वेबर की पुस्तक ‘The Protestant Ethic and the Spirit of Capitalism’ किस संबंध को स्पष्ट करती है?\n
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- (A) धर्म और राजनीति के बीच संघर्ष।
- (B) धार्मिक विश्वासों (कैल्विनवाद) और पूंजीवाद के उदय के बीच संबंध।
- (C) समाजवाद और धर्म का मेल।
- (D) केवल औद्योगिक क्रांति का इतिहास।
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\nउत्तर: (B) धार्मिक विश्वासों (कैल्विनवाद) और पूंजीवाद के उदय के बीच संबंध।\n
विस्तृत व्याख्या: वेबर ने तर्क दिया कि प्रोटेस्टेंट धर्म (विशेषकर कैल्विनवाद) की ‘तपस्या’ और ‘कठोर परिश्रम’ की अवधारणाओं ने पूंजीवाद के विकास के लिए आवश्यक मनोवैज्ञानिक आधार प्रदान किया।
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- ‘जाजमानी व्यवस्था’ (Jajmani System) का संबंध मुख्य रूप से किससे है?\n
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- (A) शहरी औद्योगिक संबंधों से।
- (B) ग्रामीण भारत में जातियों के बीच पारस्परिक सेवा और विनिमय से।
- (C) केवल सरकारी नौकरशाही से।
- (D) अंतरराष्ट्रीय व्यापार से।
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\nउत्तर: (B) ग्रामीण भारत में जातियों के बीच पारस्परिक सेवा और विनिमय से।\n
विस्तृत व्याख्या: जाजमानी व्यवस्था एक पारंपरिक सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था थी जहाँ निम्न जातियाँ (कामगार) उच्च जातियों (जजमान) को सेवाएँ प्रदान करती थीं और बदले में उन्हें अनाज या अन्य वस्तुएँ मिलती थीं।
- निम्नलिखित में से कौन सी अवधारणा ‘सामाजिक गतिशीलता’ (Social Mobility) का उदाहरण है?\n
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- (A) एक व्यक्ति का अपनी जाति बदलना (जो जाति व्यवस्था में असंभव है)।
- (B) एक क्लर्क का पदोन्नत होकर मैनेजर बनना।
- (C) एक व्यक्ति का उसी पद पर सेवानिवृत्त होना।
- (D) एक शहर से दूसरे शहर जाना।
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\nउत्तर: (B) एक क्लर्क का पदोन्नत होकर मैनेजर बनना।\n
विस्तृत व्याख्या: सामाजिक गतिशीलता का अर्थ है सामाजिक स्तरीकरण के एक स्तर से दूसरे स्तर पर जाना। क्लर्क से मैनेजर बनना ‘ऊर्ध्वगामी गतिशीलता’ (Upward Mobility) का उदाहरण है। विकल्प (D) केवल भौगोलिक गतिशीलता है, सामाजिक नहीं।
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- ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) का मुख्य केंद्र क्या है?\n
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- (A) बड़े सामाजिक ढांचे और संस्थाएं।
- (B) सूक्ष्म स्तर पर व्यक्तियों के बीच संकेतों और अर्थों का आदान-प्रदान।
- (C) आर्थिक उत्पादन के साधन।
- (D) जैविक विकास और आनुवंशिकी।
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\nउत्तर: (B) सूक्ष्म स्तर पर व्यक्तियों के बीच संकेतों और अर्थों का आदान-प्रदान।\n
विस्तृत व्याख्या: यह एक सूक्ष्म-समाजशास्त्रीय (Micro-sociological) दृष्टिकोण है जो मानता है कि समाज व्यक्तियों के बीच होने वाली निरंतर अंतःक्रियाओं और साझा प्रतीकों के माध्यम से निर्मित होता है। जॉर्ज हर्बर्ट मीड और हर्बर्ट ब्लूमर इसके प्रमुख विचारक हैं।
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- सामाजिक परिवर्तन के संदर्भ में ‘विकास’ (Development) और ‘प्रगति’ (Progress) में क्या अंतर है?\n
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- (A) विकास हमेशा सकारात्मक होता है, प्रगति नहीं।
- (B) विकास एक तटस्थ परिवर्तन है (बदलाव), जबकि प्रगति एक मूल्य-आधारित सकारात्मक परिवर्तन है।
- (C) दोनों शब्द पूरी तरह समान हैं।
- (D) प्रगति केवल आर्थिक होती है, विकास केवल सामाजिक।
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\nउत्तर: (B) विकास एक तटस्थ परिवर्तन है (बदलाव), जबकि प्रगति एक मूल्य-आधारित सकारात्मक परिवर्तन है।\n
विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्र में ‘विकास’ का अर्थ किसी भी प्रकार का विस्तार या बदलाव हो सकता है (जो हानिकारक भी हो सकता है), लेकिन ‘प्रगति’ का अर्थ है समाज का बेहतर स्थिति की ओर बढ़ना।
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- ‘शहरी समाजशास्त्र’ में बर्गेस का ‘संकेंद्रित क्षेत्र मॉडल’ (Concentric Zone Model) क्या बताता है?\n
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- (A) शहर बेतरतीब ढंग से बढ़ते हैं।
- (B) शहर एक केंद्र (CBD) से शुरू होकर रिंगों (Rings) के रूप में बाहर की ओर विकसित होते हैं।
- (C) शहर केवल नदियों के किनारे बसते हैं।
- (D) शहरीकरण का अंत हो चुका है।
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\nउत्तर: (B) शहर एक केंद्र (CBD) से शुरू होकर रिंगों (Rings) के रूप में बाहर की ओर विकसित होते हैं।\n
विस्तृत व्याख्या: अर्नेस्ट बर्गेस ने शिकागो स्कूल के दौरान यह मॉडल दिया था, जिसमें उन्होंने शहर को पांच संकेंद्रित वृत्तों में बांटा था, जिसमें केंद्र में व्यावसायिक जिला (Central Business District) होता है।
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- भारत में ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) का क्या अर्थ हो सकता है?\n
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- (A) इंटरनेट का उपयोग केवल उच्च जातियों द्वारा करना।
- (B) डिजिटल संसाधनों तक पहुँच में जाति-आधारित असमानता का बना रहना।
- (C) जाति व्यवस्था का पूरी तरह समाप्त हो जाना।
- (D) केवल ऑनलाइन जाति प्रमाणपत्र बनाना।
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\nउत्तर: (B) डिजिटल संसाधनों तक पहुँच में जाति-आधारित असमानता का बना रहना।\n
विस्तृत व्याख्या: यह अवधारणा दर्शाती है कि कैसे तकनीक के युग में भी पुरानी सामाजिक असमानताएं (जैसे शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच) डिजिटल डिवाइड के रूप में प्रकट होती हैं, जिससे कुछ समूहों को तकनीक का लाभ अधिक मिलता है।
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- निम्नलिखित में से कौन सा ‘प्रकार्यात्मक’ (Functionalist) दृष्टिकोण है?\n
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- (A) समाज संघर्षों और शक्ति संबंधों का परिणाम है।
- (B) समाज विभिन्न अंगों का एक समूह है जो स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करते हैं।
- (C) समाज केवल व्यक्तिगत इच्छाओं का योग है।
- (D) समाज का कोई निश्चित ढांचा नहीं होता।
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\nउत्तर: (B) समाज विभिन्न अंगों का एक समूह है जो स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करते हैं।\n
विस्तृत व्याख्या: प्रकार्यवाद (Functionalism) समाज को एक जैविक शरीर की तरह देखता है जहाँ शिक्षा, परिवार और धर्म जैसी संस्थाएं समाज के संतुलन और स्थिरता (Equilibrium) को बनाए रखने का कार्य करती हैं। दुर्खीम और पार्सन्स इसके प्रमुख समर्थक थे।
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- ‘जनजातीय समुदायों’ के संदर्भ में ‘एकीकरण’ (Integration) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) उनकी संस्कृति को पूरी तरह नष्ट करना।
- (B) उन्हें मुख्यधारा के समाज के साथ जोड़ते हुए उनकी पहचान का सम्मान करना।
- (C) उन्हें जंगलों में अलग-थलग रखना।
- (D) उन्हें केवल विदेशी सहायता देना।
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\nउत्तर: (B) उन्हें मुख्यधारा के समाज के साथ जोड़ते हुए उनकी पहचान का सम्मान करना।\n
विस्तृत व्याख्या: एकीकरण का उद्देश्य जनजातियों को आर्थिक और शैक्षिक अवसरों से जोड़ना है ताकि वे विकास का हिस्सा बन सकें, लेकिन यह ‘आत्मसातीकरण’ (Assimilation) से अलग है क्योंकि इसमें उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को मिटाया नहीं जाता।
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