समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें
प्रिय उम्मीदवारों, क्या आप अपनी समाजशास्त्रीय अवधारणाओं की समझ को अगले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं? यह दैनिक क्विज़ आपके ज्ञान का परीक्षण करने, आपकी विश्लेषणात्मक क्षमताओं को निखारने और आपको प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यहाँ दिए गए प्रश्न समाजशास्त्र के विभिन्न पहलुओं से संबंधित हैं, जो आपको एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करेंगे। तो, अपनी किताबों को एक तरफ रखें और इस बौद्धिक चुनौती को स्वीकार करें!
1. प्रश्न: एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘समाजशास्त्रीय विधि के नियम’ (The Rules of Sociological Method) में ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Fact) की मुख्य विशेषता क्या है?
- यह व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित होता है।
- यह व्यक्ति के बाहर विद्यमान होता है और उस पर बाध्यकारी होता है।
- यह केवल मनोवैज्ञानिक कारकों से निर्धारित होता है।
- यह केवल आर्थिक कारकों से प्रभावित होता है।
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने ‘सामाजिक तथ्य’ को उन तरीकों से परिभाषित किया जो व्यक्ति के बाहर विद्यमान होते हैं और उस पर बाध्यकारी शक्ति का प्रयोग करते हैं। ये सामूहिक चेतना (Collective Conscience) का हिस्सा होते हैं और व्यक्ति के व्यवहार को निर्देशित करते हैं, जैसे कानून, नैतिकता, धार्मिक विश्वास और सामाजिक रीति-रिवाज। ये व्यक्तिगत इच्छाओं से स्वतंत्र होते हैं और समाज द्वारा व्यक्ति पर थोपे जाते हैं।
- विकल्प A गलत है क्योंकि सामाजिक तथ्य व्यक्तिगत अनुभव से परे होते हैं।
- विकल्प C और D गलत हैं क्योंकि दुर्खीम ने सामाजिक तथ्यों की व्याख्या के लिए मनोवैज्ञानिक या केवल आर्थिक कारकों की बजाय सामाजिक कारकों पर बल दिया।
2. प्रश्न: मैक्स वेबर द्वारा प्रस्तुत ‘सामाजिक क्रिया’ (Social Action) के आदर्श प्रकारों में से कौन-सा प्रकार तर्कसंगत लक्ष्य-उन्मुखता पर आधारित है?
- भावात्मक क्रिया (Affectual Action)
- परंपरागत क्रिया (Traditional Action)
- मूल्य-तर्कसंगत क्रिया (Value-Rational Action)
- लक्ष्य-तर्कसंगत क्रिया (Instrumental-Rational Action)
सही उत्तर: D
विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया के चार आदर्श प्रकार बताए हैं: भावात्मक, परंपरागत, मूल्य-तर्कसंगत और लक्ष्य-तर्कसंगत। ‘लक्ष्य-तर्कसंगत क्रिया’ (Zweckrational Action) वह क्रिया है जिसमें व्यक्ति किसी विशिष्ट लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सबसे कुशल साधनों का चयन करता है और अपने कार्यों को इस लक्ष्य के प्रति तर्कसंगत रूप से निर्देशित करता है। उदाहरण के लिए, एक इंजीनियर द्वारा पुल बनाने के लिए सबसे कुशल तकनीक का उपयोग करना।
- विकल्प A (भावात्मक क्रिया) भावनाओं से प्रेरित होती है।
- विकल्प B (परंपरागत क्रिया) स्थापित आदतों और रिवाजों से प्रेरित होती है।
- विकल्प C (मूल्य-तर्कसंगत क्रिया) किसी नैतिक, धार्मिक या सौंदर्यवादी मूल्य के प्रति प्रतिबद्धता से प्रेरित होती है, भले ही उसके परिणाम तर्कसंगत न हों।
3. प्रश्न: कार्ल मार्क्स के अलगाव (Alienation) के सिद्धांत के अनुसार, पूंजीवादी समाज में श्रमिक किससे अलगाव का अनुभव करता है?
- केवल उत्पाद से
- केवल उत्पादन प्रक्रिया से
- केवल अपने सह-श्रमिकों से
- उपरोक्त सभी से
सही उत्तर: D
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिक के अलगाव के चार आयामों का वर्णन किया है: उत्पाद से अलगाव (क्योंकि उत्पाद उसका नहीं होता), उत्पादन प्रक्रिया से अलगाव (क्योंकि प्रक्रिया पर उसका नियंत्रण नहीं होता), अपनी मानवीय सार-प्रकृति (species-being) से अलगाव (क्योंकि वह रचनात्मक और स्वेच्छा से काम नहीं कर पाता), और अन्य मनुष्यों (सह-श्रमिकों और पूंजीपतियों) से अलगाव (क्योंकि प्रतिस्पर्धी माहौल और सामाजिक संबंधों में कमी होती है)। इस प्रकार, श्रमिक उपरोक्त सभी से अलगाव का अनुभव करता है।
4. प्रश्न: संरचनात्मक-प्रकार्यवादी सिद्धांतकार आर.के. मर्टन द्वारा प्रस्तुत अवधारणा ‘प्रत्यक्ष प्रकार्य’ (Manifest Function) का क्या अर्थ है?
- किसी सामाजिक पैटर्न के अनपेक्षित और अज्ञात परिणाम।
- किसी सामाजिक पैटर्न के वे परिणाम जो समाज के सदस्यों द्वारा इच्छित और मान्यता प्राप्त होते हैं।
- किसी सामाजिक पैटर्न के वे परिणाम जो समाज के लिए हानिकारक होते हैं।
- किसी सामाजिक पैटर्न के वे परिणाम जो सामाजिक परिवर्तन लाते हैं।
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन ने सामाजिक प्रकार्यों को ‘प्रत्यक्ष’ (Manifest) और ‘अप्रत्यक्ष’ (Latent) प्रकार्यों में विभाजित किया। प्रत्यक्ष प्रकार्य वे होते हैं जो समाज के सदस्यों द्वारा इच्छित और मान्यता प्राप्त होते हैं। उदाहरण के लिए, शिक्षा प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रकार्य छात्रों को ज्ञान और कौशल प्रदान करना है। इसके विपरीत, अप्रत्यक्ष प्रकार्य अनपेक्षित और अक्सर अज्ञात परिणाम होते हैं, जैसे शिक्षा के माध्यम से सामाजिक नेटवर्किंग का विकास।
- विकल्प A अप्रत्यक्ष प्रकार्य को दर्शाता है।
- विकल्प C सामाजिक प्रकार्य के बजाय दुष्प्रकार्य (Dysfunction) को संदर्भित करता है।
- विकल्प D सामाजिक परिवर्तन का एक परिणाम हो सकता है, लेकिन यह प्रत्यक्ष प्रकार्य की विशिष्ट परिभाषा नहीं है।
5. प्रश्न: जॉर्ज हर्बर्ट मीड (G.H. Mead) के अनुसार, ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) के बीच क्या संबंध है?
- ‘मैं’ पूरी तरह से ‘मुझे’ को नियंत्रित करता है।
- ‘मुझे’ पूरी तरह से ‘मैं’ को नियंत्रित करता है।
- ‘मैं’ सामाजिक प्रतिक्रियाओं का तात्कालिक, अनियोजित पहलू है, जबकि ‘मुझे’ संगठित सामाजिक अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
- ‘मैं’ और ‘मुझे’ दोनों पूरी तरह से व्यक्तिवादी अवधारणाएँ हैं।
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद के सिद्धांत में ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) आत्म (Self) के दो पहलू हैं। ‘मैं’ आत्म का सहज, रचनात्मक, अनियोजित और तात्कालिक पहलू है जो सामाजिक अपेक्षाओं के प्रति प्रतिक्रिया करता है। ‘मुझे’ आत्म का वह पहलू है जो सामान्यीकृत अन्य (Generalized Other) की सामाजिक अपेक्षाओं, भूमिकाओं और दृष्टिकोणों को आत्मसात करता है, यह समाज का प्रतिनिधित्व करता है। ‘मैं’ ‘मुझे’ की प्रतिक्रिया है। दोनों मिलकर आत्म का निर्माण करते हैं, और वे लगातार एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया करते हैं।
- विकल्प A और B गलत हैं क्योंकि वे एक-दूसरे को नियंत्रित नहीं करते बल्कि अंतःक्रिया करते हैं।
- विकल्प D गलत है क्योंकि ‘मुझे’ स्पष्ट रूप से सामाजिक है।
6. प्रश्न: ग्रामीण समाजशास्त्र के संदर्भ में, ‘ग्राम्य निरंतरता’ (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा क्या दर्शाती है?
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच एक स्पष्ट और कठोर विभाजन।
- ग्रामीण और शहरी विशेषताओं का एक क्रमिक संक्रमण, न कि एक तीव्र सीमा।
- केवल ग्रामीण क्षेत्रों का तेजी से शहरीकरण।
- केवल शहरी क्षेत्रों का ग्रामीण विशेषताओं को अपनाना।
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: ‘ग्राम्य निरंतरता’ की अवधारणा यह बताती है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र दो अलग-अलग ध्रुव नहीं हैं, बल्कि विशेषताओं का एक स्पेक्ट्रम है। अर्थात्, एक क्षेत्र में पूरी तरह से ग्रामीण या पूरी तरह से शहरी विशेषताएँ नहीं होतीं, बल्कि एक क्रमिक संक्रमण होता है जहाँ ग्रामीण से शहरी विशेषताओं का मिश्रण होता है। यह एक रैखिक क्रम को दर्शाता है जहां एक छोर पर विशुद्ध रूप से ग्रामीण और दूसरे पर विशुद्ध रूप से शहरी विशेषताएं होती हैं, और बीच में मिश्रित विशेषताएं पाई जाती हैं।
- विकल्प A गलत है क्योंकि यह एक कठोर विभाजन का खंडन करता है।
- विकल्प C और D निरंतरता की पूरी अवधारणा को व्यक्त नहीं करते हैं।
7. प्रश्न: भारतीय समाज में ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की?
- एम.एन. श्रीनिवास
- ए.आर. देसाई
- जी.एस. घुरिये
- डी.पी. मुखर्जी
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा प्रस्तुत की, जो उस प्रक्रिया को संदर्भित करती है जिसमें निम्न जाति या जनजाति के सदस्य अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने के लिए उच्च या ‘द्विज’ जाति के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, विचारधाराओं और जीवन शैली को अपनाते हैं। यह भारतीय जाति व्यवस्था में सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) का एक महत्वपूर्ण रूप है।
- ए.आर. देसाई भारत में राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।
- जी.एस. घुरिये भारतीय समाजशास्त्र के जनक माने जाते हैं और जाति पर उनके महत्वपूर्ण कार्य हैं।
- डी.पी. मुखर्जी भारतीय परंपरा के द्वंद्वात्मक दृष्टिकोण के लिए विख्यात हैं।
8. प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन-सा अनुसंधान विधि ‘प्रयोगात्मक अध्ययन’ (Experimental Study) का एक मुख्य घटक नहीं है?
- नियंत्रण समूह (Control Group)
- स्वतंत्र चर (Independent Variable)
- निर्भर चर (Dependent Variable)
- प्रतिभागी अवलोकन (Participant Observation)
सही उत्तर: D
विस्त विस्तृत व्याख्या: प्रयोगात्मक अध्ययन में, शोधकर्ता एक या एक से अधिक स्वतंत्र चरों में हेरफेर करके उनके प्रभावों को एक निर्भर चर पर मापता है, जबकि अन्य सभी कारकों को नियंत्रित समूह के माध्यम से स्थिर रखता है। यह कार्य-कारण संबंध स्थापित करने का प्रयास करता है। प्रतिभागी अवलोकन एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जहाँ शोधकर्ता एक समूह का हिस्सा बनकर उनके व्यवहार और संस्कृति का अध्ययन करता है; यह प्रयोगात्मक अध्ययन का मुख्य घटक नहीं है।
- विकल्प A, B, C प्रयोगात्मक अध्ययन के आवश्यक घटक हैं।
9. प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन-सा सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) का एक मुख्य प्रकार नहीं है?
- जाति (Caste)
- वर्ग (Class)
- जातीयता (Ethnicity)
- संपदा (Estate)
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: सामाजिक स्तरीकरण समाज में व्यक्तियों या समूहों के पदानुक्रमित विभाजन को संदर्भित करता है। इसके मुख्य ऐतिहासिक और समाजशास्त्रीय रूप हैं: दासता (Slavery), जाति (Caste), संपदा (Estate) और वर्ग (Class)। जातीयता (Ethnicity) एक सामाजिक समूह पहचान का आधार हो सकती है, जो स्तरीकरण को प्रभावित करती है, लेकिन यह स्वयं स्तरीकरण का एक मुख्य प्रकार नहीं है। जातीयता सांस्कृतिक विशेषताओं पर आधारित एक साझा पहचान है, जबकि स्तरीकरण शक्ति, धन और प्रतिष्ठा के आधार पर पदानुक्रमित व्यवस्था है।
- विकल्प A, B, D समाजशास्त्र में स्तरीकरण के स्थापित प्रकार हैं।
10. प्रश्न: ‘उत्तर-आधुनिकतावाद’ (Postmodernism) की अवधारणा किससे संबंधित है?
- ज्ञान, सत्य और तर्क की सार्वभौमिक प्रकृति पर बल देना।
- महान आख्यानों (Grand Narratives) और वस्तुनिष्ठ ज्ञान के दावों का खंडन करना।
- समाज में औद्योगिक उत्पादन के महत्व पर जोर देना।
- सामाजिक संरचनाओं के बजाय व्यक्तिगत एजेंसी पर विशेष ध्यान देना।
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: उत्तर-आधुनिकतावाद एक बौद्धिक और सांस्कृतिक प्रवृत्ति है जो आधुनिकतावादी विचारों, विशेष रूप से सार्वभौमिक सत्य, प्रगति और महान आख्यानों (जैसे धर्म, विज्ञान, इतिहास के व्यापक सिद्धांत) में विश्वास को चुनौती देती है। उत्तर-आधुनिकतावादी विचारक (जैसे ज्यां-फ्रांकोइस ल्योटार्ड, मिशेल फूको, जाक डेरिडा) विविधता, बहुलवाद, सापेक्षता और शक्ति-ज्ञान संबंधों पर जोर देते हैं, और वस्तुनिष्ठता के दावों पर सवाल उठाते हैं।
- विकल्प A आधुनिकतावाद से अधिक संबंधित है।
- विकल्प C औद्योगिक समाज के बजाय उत्तर-औद्योगिक समाज की चर्चा करता है।
- विकल्प D हालांकि उत्तर-आधुनिकतावाद व्यक्तिगत अनुभवों पर ध्यान देता है, लेकिन महान आख्यानों का खंडन इसकी केंद्रीय विशेषता है।
11. प्रश्न: भारतीय ग्रामीण समाज में, ‘जजमानी व्यवस्था’ (Jajmani System) क्या थी?
- एक भूमि-वितरण प्रणाली।
- गांव के परिवारों के बीच पारंपरिक सेवा-आधारित आर्थिक और सामाजिक संबंध।
- एक ग्राम पंचायत का संगठनात्मक ढाँचा।
- केवल धार्मिक अनुष्ठानों का एक सेट।
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: जजमानी व्यवस्था भारतीय ग्रामीण समाज में एक पारंपरिक आर्थिक और सामाजिक प्रणाली थी जिसमें विभिन्न जाति समूहों के परिवार एक दूसरे को वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करते थे। उच्च जाति के ‘जजमान’ (संरक्षक) निम्न जाति के ‘कमीन’ (सेवा प्रदाता) को अनाज या अन्य भुगतान के बदले सेवाएं (जैसे नाई, लोहार, धोबी की सेवाएं) प्रदान करते थे। यह एक अंतरजातीय, अन्योन्याश्रित और वंशानुगत संबंध था।
- यह भूमि-वितरण या पंचायत से संबंधित नहीं था, न ही केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित था।
12. प्रश्न: समाजशास्त्र में ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) का मुख्य जोर किस पर है?
- विशाल सामाजिक संरचनाओं और संस्थाओं पर।
- व्यक्तिगत एजेंसी की बजाय सामाजिक तथ्यों के बाध्यकारी प्रभाव पर।
- सूक्ष्म-स्तर पर व्यक्तियों के बीच प्रतीकों और अर्थों के माध्यम से होने वाली अंतःक्रिया पर।
- सामाजिक परिवर्तन के लिए वर्ग संघर्ष के महत्व पर।
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद एक समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य है जो सूक्ष्म-स्तर पर व्यक्तियों के बीच प्रतीकों (भाषा, हावभाव, वस्तुएं) और अर्थों के माध्यम से होने वाली अंतःक्रिया पर केंद्रित है। यह मानता है कि व्यक्ति अपने सामाजिक दुनिया का निर्माण अर्थों और व्याख्याओं के माध्यम से करते हैं, जो अंतःक्रिया के दौरान विकसित होते हैं। जॉर्ज हर्बर्ट मीड और हर्बर्ट ब्लूमर इसके प्रमुख प्रतिपादक हैं।
- विकल्प A और B प्रकार्यवाद और संघर्ष सिद्धांत जैसे व्यापक परिप्रेक्ष्यों से संबंधित हैं।
- विकल्प D मार्क्सवादी दृष्टिकोण से संबंधित है।
13. प्रश्न: ‘श्वेतपोश अपराध’ (White-Collar Crime) की अवधारणा किसने प्रस्तुत की?
- एमिल दुर्खीम
- एडविन सदरलैंड (Edwin Sutherland)
- रॉबर्ट के. मर्टन
- हावर्ड बेकर (Howard Becker)
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: एडविन सदरलैंड ने ‘श्वेतपोश अपराध’ की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसे उन्होंने “उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्ग के व्यक्ति द्वारा अपने व्यवसाय के दौरान किया गया अपराध” के रूप में परिभाषित किया। इसमें धोखाधड़ी, गबन, कर चोरी, कॉर्पोरेट कदाचार आदि शामिल हैं। सदरलैंड ने तर्क दिया कि ये अपराध आमतौर पर अदृश्य रहते हैं या कम दंडित होते हैं, जिससे समाज में अपराध की धारणा विकृत होती है।
- दुर्खीम ने अपराध को सामाजिक तथ्य माना।
- मर्टन ने एनोमी और विचलन (Deviance) पर काम किया।
- हावर्ड बेकर लेबलिंग सिद्धांत (Labeling Theory) के लिए जाने जाते हैं।
14. प्रश्न: भारत में ‘सामाजिक परिवर्तन’ (Social Change) के अध्ययन में ‘पश्चिमीकरण’ (Westernization) की अवधारणा का क्या अर्थ है?
- केवल पश्चिमी देशों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करना।
- तकनीकी नवाचारों को अपनाना और उनका स्थानीयकरण करना।
- पश्चिमी जीवन शैली, विचारों, मूल्यों और संस्थाओं को अपनाना।
- केवल राजनीतिक संरचनाओं में परिवर्तन।
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने ‘पश्चिमीकरण’ की अवधारणा का उपयोग भारत में ब्रिटिश शासन के परिणामस्वरूप होने वाले परिवर्तनों का वर्णन करने के लिए किया। इसमें केवल प्रौद्योगिकी या आर्थिक परिवर्तन ही नहीं, बल्कि पश्चिमी जीवन शैली, भोजन की आदतें, पहनावा, विचार, मूल्य (जैसे समानता, धर्मनिरपेक्षता), और शैक्षिक व राजनीतिक संस्थाओं का प्रभाव भी शामिल है। यह एक बहुआयामी प्रक्रिया है।
- विकल्प A, B, D पश्चिमीकरण के केवल आंशिक पहलुओं को दर्शाते हैं।
15. प्रश्न: ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) की अवधारणा किसने विकसित की?
- चार्ल्स कूले (Charles Cooley)
- जॉर्ज सिमेल (Georg Simmel)
- फर्डिनेंड टॉनीज़ (Ferdinand Tönnies)
- रॉबर्ट रेडफ़ील्ड (Robert Redfield)
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या: चार्ल्स कूले ने ‘प्राथमिक समूह’ की अवधारणा विकसित की। प्राथमिक समूह वे छोटे सामाजिक समूह होते हैं जिनकी विशेषता घनिष्ठ, व्यक्तिगत, आमने-सामने की अंतःक्रिया और स्थायी संबंध होते हैं। इन समूहों में सदस्यों के बीच गहरे भावनात्मक बंधन होते हैं, और वे एक-दूसरे के व्यक्तित्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परिवार, मित्र मंडली और पड़ोस प्राथमिक समूह के उदाहरण हैं।
- जॉर्ज सिमेल ने सामाजिक रूपों और द्विपक्षीय/त्रिपक्षीय समूहों पर काम किया।
- फर्डिनेंड टॉनीज़ ने गेमैंशाफ्ट और गेसेलशाफ्ट की अवधारणाएं दीं।
- रॉबर्ट रेडफ़ील्ड ने लोक समाज (Folk Society) और शहरी समाज का अध्ययन किया।
16. प्रश्न: भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद अस्पृश्यता के उन्मूलन से संबंधित है?
- अनुच्छेद 14
- अनुच्छेद 17
- अनुच्छेद 19
- अनुच्छेद 21
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 ‘अस्पृश्यता के उन्मूलन’ का प्रावधान करता है। यह किसी भी रूप में अस्पृश्यता के अभ्यास को प्रतिबंधित करता है और इसके उल्लंघन को कानून द्वारा दंडनीय अपराध बनाता है। यह सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांत को स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।
- अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता से संबंधित है।
- अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित विभिन्न स्वतंत्रताओं से संबंधित है।
- अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से संबंधित है।
17. प्रश्न: समाजशास्त्र में ‘साक्षात्कार’ (Interview) को एक अनुसंधान उपकरण के रूप में प्रयोग करने का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- बड़ी संख्या में मात्रात्मक डेटा एकत्र करना।
- कार्य-कारण संबंध स्थापित करना।
- प्रतिभागियों के दृष्टिकोण, अनुभवों और भावनाओं में गहराई से अंतर्दृष्टि प्राप्त करना।
- सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए सटीक संख्यात्मक डेटा प्राप्त करना।
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्रीय अनुसंधान में साक्षात्कार का प्राथमिक उद्देश्य प्रतिभागियों के दृष्टिकोण, अनुभवों, भावनाओं, प्रेरणाओं और अर्थों में गहराई से अंतर्दृष्टि प्राप्त करना है। यह एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जो व्यक्तिगत कहानियों और विस्तृत वर्णनों के माध्यम से सामाजिक दुनिया की जटिलता को समझने में मदद करती है। संरचित या असंरचित साक्षात्कार के माध्यम से शोधकर्ता विषयों की दुनिया को उनके नजरिए से समझने का प्रयास करता है।
- विकल्प A और D सर्वेक्षण और मात्रात्मक विधियों से अधिक संबंधित हैं।
- विकल्प B प्रयोगात्मक अनुसंधान का लक्ष्य है।
18. प्रश्न: ‘सार्वजनिक और निजी क्षेत्र’ (Public and Private Sphere) की अवधारणा का उपयोग मुख्य रूप से किस सामाजिक मुद्दे का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है?
- आर्थिक असमानता
- सामाजिक गतिशीलता
- लिंग भूमिकाएँ और शक्ति संबंध
- अपराध और विचलन
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: ‘सार्वजनिक और निजी क्षेत्र’ की अवधारणा का उपयोग विशेष रूप से नारीवादी समाजशास्त्र में लिंग भूमिकाओं, शक्ति संबंधों और लिंग आधारित असमानताओं का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है। पारंपरिक रूप से, पुरुषों को सार्वजनिक क्षेत्र (काम, राजनीति) से जोड़ा गया है, जबकि महिलाओं को निजी क्षेत्र (घर, परिवार) से। यह विभाजन अक्सर महिलाओं के अधीनता और उनके श्रम के अवमूल्यन का कारण बनता है।
- हालांकि अन्य विकल्प भी सामाजिक मुद्दे हैं, यह अवधारणा मुख्य रूप से लिंग के संदर्भ में विकसित हुई है।
19. प्रश्न: ‘सर्किल ऑफ़ इनक्लूज़न एंड एक्सक्लूज़न’ (Circle of Inclusion and Exclusion) की अवधारणा किस विचारक से जुड़ी है, जो यह दर्शाती है कि प्रत्येक सामाजिक समूह अपनी पहचान स्थापित करने के लिए दूसरों को बाहर करता है?
- एमिल दुर्खीम
- मैक्स वेबर
- जॉर्ज सिमेल
- कार्ल मार्क्स
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: जर्मन समाजशास्त्री जॉर्ज सिमेल ने सामाजिक जीवन के ‘रूपों’ पर ध्यान केंद्रित किया। उनकी अंतर्दृष्टि में से एक यह थी कि सामाजिक समूह अपनी पहचान और एकजुटता को बनाए रखने के लिए अक्सर ‘समावेशन’ (Inclusion) और ‘बहिष्करण’ (Exclusion) के चक्र बनाते हैं। वे सदस्यों को अंदर खींचते हैं और गैर-सदस्यों को बाहर रखते हैं, जो समूह की सीमाओं को परिभाषित करता है। यह अवधारणा सामाजिक दूरी, संघर्ष और समूह सामंजस्य को समझने में मदद करती है।
- दुर्खीम ने सामाजिक एकीकरण और अनैतिकता पर ध्यान केंद्रित किया।
- वेबर ने सामाजिक क्रिया और शक्ति पर बल दिया।
- मार्क्स ने वर्ग संघर्ष और अलगाव पर काम किया।
20. प्रश्न: ‘जनजाति’ (Tribe) की मुख्य विशेषता क्या है?
- एक जटिल, स्तरीकृत समाज।
- एक सजातीय समूह जिसकी अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा और क्षेत्र होता है।
- आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था पर पूर्ण निर्भरता।
- विकसित शहरी जीवन शैली।
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: जनजाति एक सामाजिक समूह है जिसकी पहचान एक विशिष्ट संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाजों और भौगोलिक क्षेत्र से होती है। वे अक्सर छोटे, सजातीय होते हैं, पारंपरिक जीवन शैली जीते हैं, और एक साझा वंश या पहचान के आधार पर एकजुट होते हैं। उनकी अर्थव्यवस्था आमतौर पर निर्वाह आधारित होती है और वे प्रकृति से घनिष्ठ रूप से जुड़े होते हैं।
- विकल्प A जटिल स्तरीकृत समाजों जैसे राज्यों या आधुनिक राष्ट्रों की विशेषता है।
- विकल्प C और D आधुनिक शहरी समाजों की विशेषता है, जबकि जनजातियाँ अक्सर मुख्यधारा से अलग रहती हैं।
21. प्रश्न: ‘विचलन’ (Deviance) का ‘लेबलिंग सिद्धांत’ (Labeling Theory) मुख्य रूप से किस बात पर जोर देता है?
- विचलन व्यक्ति के आनुवंशिक मेकअप का परिणाम है।
- विचलन सामाजिक संरचना में तनाव और दबाव का परिणाम है।
- विचलन एक सामाजिक निर्माण है, और यह इस बात पर निर्भर करता है कि समाज किसी व्यवहार को कैसे लेबल करता है।
- विचलन व्यक्ति के नैतिक पतन का परिणाम है।
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: लेबलिंग सिद्धांत (जिसे हावर्ड बेकर और अन्य ने प्रतिपादित किया) यह तर्क देता है कि विचलन किसी विशेष कार्य की अंतर्निहित गुणवत्ता नहीं है, बल्कि उस समाज या समूह की प्रतिक्रिया का परिणाम है जो उस कार्य को ‘विचलनकारी’ के रूप में लेबल करता है। यह सिद्धांत बताता है कि कैसे समाज के शक्ति समूह यह निर्धारित करते हैं कि किसे ‘विचलनकारी’ माना जाएगा, और यह लेबल व्यक्तियों के आत्म-अवधारणा और भविष्य के व्यवहार को कैसे प्रभावित कर सकता है।
- विकल्प A जैविक सिद्धांतों से संबंधित है।
- विकल्प B मर्टन के एनोमी सिद्धांत जैसे संरचनात्मक कार्यात्मक सिद्धांतों से संबंधित है।
- विकल्प D एक नैतिक दृष्टिकोण है, न कि समाजशास्त्रीय सिद्धांत।
22. प्रश्न: ‘सांस्कृतिक विलंबना’ (Cultural Lag) की अवधारणा किसने दी?
- विलियम ओगबर्न (William Ogburn)
- टालकॉट पार्सन्स (Talcott Parsons)
- इरविंग गोफमैन (Erving Goffman)
- एल्विन गॉल्डनर (Alvin Gouldner)
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या: विलियम ओगबर्न ने ‘सांस्कृतिक विलंबना’ की अवधारणा प्रस्तुत की। यह तब होता है जब समाज की भौतिक संस्कृति (जैसे प्रौद्योगिकी और नवाचार) गैर-भौतिक संस्कृति (जैसे मूल्य, मानदंड, कानून, रीति-रिवाज) की तुलना में तेजी से बदलती है। इस अंतर के कारण समाज में तनाव और समस्याएं उत्पन्न होती हैं क्योंकि सामाजिक मानदंड भौतिक परिवर्तनों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते। उदाहरण के लिए, साइबर अपराध के बढ़ने के बावजूद कानूनों का धीमी गति से अनुकूलन।
- टालकॉट पार्सन्स संरचनात्मक-प्रकार्यवाद के प्रमुख विचारक हैं।
- इरविंग गोफमैन नाटकशास्त्रीय दृष्टिकोण और आत्म-प्रस्तुति के लिए जाने जाते हैं।
- एल्विन गॉल्डनर प्रतिवर्तक समाजशास्त्र (Reflexive Sociology) पर काम किया।
23. प्रश्न: ‘तीव्र आर्थिक विकास के बावजूद उच्च असमानता’ की स्थिति को भारतीय संदर्भ में समझने के लिए कौन-सी अवधारणा सबसे उपयुक्त है?
- हरित क्रांति
- विकास का विरोधाभास
- समानता का मॉडल
- गाँधीवादी अर्थव्यवस्था
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: ‘विकास का विरोधाभास’ (Paradox of Development) की अवधारणा भारत जैसे देशों के संदर्भ में अत्यधिक प्रासंगिक है जहाँ तीव्र आर्थिक विकास हुआ है, लेकिन इसके साथ ही आय और धन की असमानता में वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि आर्थिक वृद्धि हमेशा समावेशी नहीं होती और इसके लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचते, जिससे सामाजिक-आर्थिक विभाजन और बढ़ जाता है।
- हरित क्रांति कृषि उत्पादकता से संबंधित है।
- समानता का मॉडल एक आदर्श स्थिति है, वास्तविक नहीं।
- गाँधीवादी अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भरता और ग्रामोद्योग पर केंद्रित है, जो इस विशेष विरोधाभास का सीधा वर्णन नहीं करती।
24. प्रश्न: दुर्खीम के अनुसार, आधुनिक समाजों में ‘यांत्रिक एकजुटता’ (Mechanical Solidarity) के स्थान पर कौन-सी एकजुटता प्रमुख होती है?
- सामुदायिक एकजुटता
- जैविक एकजुटता (Organic Solidarity)
- परंपरागत एकजुटता
- आत्मीय एकजुटता
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘समाज में श्रम विभाजन’ (The Division of Labour in Society) में समाज में एकजुटता के दो प्रकारों का वर्णन किया: ‘यांत्रिक एकजुटता’ और ‘जैविक एकजुटता’। यांत्रिक एकजुटता उन समाजों में पाई जाती है जहाँ श्रम विभाजन कम होता है और लोग विचारों व विश्वासों में समान होते हैं (सामूहिक चेतना मजबूत)। इसके विपरीत, आधुनिक समाजों में जटिल श्रम विभाजन और विशेषीकरण के कारण ‘जैविक एकजुटता’ विकसित होती है। इसमें व्यक्ति एक-दूसरे पर अपनी भिन्नताओं के बावजूद कार्यिक रूप से निर्भर होते हैं, जैसे शरीर के विभिन्न अंग एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
- अन्य विकल्प दुर्खीम द्वारा वर्गीकृत एकजुटता के प्रकार नहीं हैं।
25. प्रश्न: ‘पूंजीवाद और स्वतंत्रता’ (Capitalism and Freedom) नामक पुस्तक, जिसमें नव-उदारवादी विचारों की वकालत की गई, किसने लिखी है?
- कार्ल मार्क्स
- मैक्स वेबर
- मिल्टन फ्रीडमैन (Milton Friedman)
- जॉन मेयनार्ड कीन्स (John Maynard Keynes)
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या: ‘पूंजीवाद और स्वतंत्रता’ (1962) अमेरिकी अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता मिल्टन फ्रीडमैन द्वारा लिखी गई एक प्रभावशाली पुस्तक है। इस पुस्तक में, फ्रीडमैन ने नव-उदारवादी आर्थिक दर्शन की वकालत की, जिसमें मुक्त बाजार, न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर दिया गया है। यह समाजशास्त्रीय विचार में आर्थिक सिद्धांतों के प्रभाव को दर्शाता है।
- कार्ल मार्क्स और मैक्स वेबर क्लासिक समाजशास्त्रीय विचारक हैं जिन्होंने पूंजीवाद का आलोचनात्मक विश्लेषण किया।
- जॉन मेयनार्ड कीन्स एक प्रभावशाली अर्थशास्त्री थे जिन्होंने सरकारी हस्तक्षेप के माध्यम से पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की वकालत की।
सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।