भारतीय राजव्यवस्था क्विज़: संवैधानिक ज्ञान की गहन परीक्षा
भारत का संविधान, हमारे लोकतंत्र की आत्मा, प्रत्येक नागरिक के लिए मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों का संरक्षक है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए भारतीय राजव्यवस्था की गहन समझ अनिवार्य है। यह दैनिक अभ्यास सेट आपको संवैधानिक सिद्धांतों, महत्वपूर्ण अनुच्छेदों और ऐतिहासिक निर्णयों की अपनी वैचारिक स्पष्टता का परीक्षण करने की चुनौती देता है। आइए, अपने ज्ञान का मूल्यांकन करें और भारत के शासन ढांचे पर अपनी पकड़ मजबूत करें।
-
प्रश्न 1: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में “बंधुत्व” शब्द का क्या अर्थ है?
- (A) आर्थिक समानता
- (B) न्यायपालिका की स्वतंत्रता
- (C) राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करना
- (D) व्यक्ति की गरिमा
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में “बंधुत्व” का अर्थ राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने वाली व्यक्ति की गरिमा और भाईचारा है। यह अनुच्छेद 51A (मौलिक कर्तव्य) में भी परिलक्षित होता है, जो भारत के सभी लोगों में समरसता और समान बंधुत्व की भावना के निर्माण की बात करता है। विकल्प (A) और (B) अन्य संवैधानिक सिद्धांतों जैसे सामाजिक-आर्थिक न्याय और न्यायपालिका की स्वतंत्रता से संबंधित हैं। विकल्प (D) व्यक्ति की गरिमा बंधुत्व का एक आवश्यक घटक है, लेकिन बंधुत्व का व्यापक अर्थ राष्ट्र की एकता को भी समाहित करता है।
-
प्रश्न 2: भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद ‘कानून के समक्ष समानता’ और ‘कानूनों का समान संरक्षण’ सुनिश्चित करता है?
- (A) अनुच्छेद 13
- (B) अनुच्छेद 14
- (C) अनुच्छेद 15
- (D) अनुच्छेद 16
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 14 ‘कानून के समक्ष समानता’ (ब्रिटिश मूल) और ‘कानूनों का समान संरक्षण’ (अमेरिकी मूल) दोनों को सुनिश्चित करता है। ‘कानून के समक्ष समानता’ का अर्थ है कि कानून के सामने सभी व्यक्ति समान हैं, कोई भी विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है। ‘कानूनों का समान संरक्षण’ का अर्थ है कि समान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों के लिए समान कानून लागू होंगे। अनुच्छेद 13 कानूनों की संवैधानिकता की न्यायिक समीक्षा से संबंधित है। अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव के निषेध से संबंधित है, और अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता से संबंधित है।
-
प्रश्न 3: राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- (A) ये न्यायोचित (न्यायालय द्वारा लागू करने योग्य) नहीं हैं।
- (B) इनका उद्देश्य भारत में एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।
- (C) इन्हें संविधान के भाग III में शामिल किया गया है।
- (D) ये देश के शासन में मौलिक हैं।
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या: राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में शामिल हैं, न कि भाग III में। भाग III मौलिक अधिकारों से संबंधित है। DPSP न्यायोचित नहीं हैं (अनुच्छेद 37), लेकिन देश के शासन में मौलिक हैं और कानून बनाने में राज्य का कर्तव्य है कि वह इन सिद्धांतों को लागू करे। इनका प्राथमिक उद्देश्य भारत में एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।
-
प्रश्न 4: भारत के राष्ट्रपति को किस अनुच्छेद के तहत सर्वोच्च न्यायालय से सलाह लेने की शक्ति प्राप्त है?
- (A) अनुच्छेद 142
- (B) अनुच्छेद 143
- (C) अनुच्छेद 144
- (D) अनुच्छेद 145
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 143 भारत के राष्ट्रपति को सार्वजनिक महत्व के किसी भी प्रश्न या कानून के किसी भी प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से सलाह लेने की शक्ति प्रदान करता है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी नहीं होती है। अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों और आदेशों के प्रवर्तन से संबंधित है। अनुच्छेद 144 सभी नागरिक और न्यायिक अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय की सहायता में कार्य करने का निर्देश देता है। अनुच्छेद 145 सर्वोच्च न्यायालय के नियमों के निर्माण से संबंधित है।
-
प्रश्न 5: भारतीय संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?
- (A) भारत का राष्ट्रपति
- (B) भारत का उपराष्ट्रपति
- (C) लोकसभा अध्यक्ष
- (D) प्रधानमंत्री
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 118(4) के अनुसार, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) करता है। यदि अध्यक्ष अनुपस्थित है, तो लोकसभा का उपाध्यक्ष अध्यक्षता करता है। यदि उपाध्यक्ष भी अनुपस्थित है, तो राज्यसभा का उपसभापति अध्यक्षता करता है। राष्ट्रपति (अनुच्छेद 108) संयुक्त बैठक बुलाते हैं, लेकिन उसकी अध्यक्षता नहीं करते। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है, लेकिन वह संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करता।
-
प्रश्न 6: भारतीय संविधान के तहत ‘न्यायिक समीक्षा’ की शक्ति का क्या अर्थ है?
- (A) संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को रद्द करने की राष्ट्रपति की शक्ति
- (B) कार्यपालिका के कार्यों की संवैधानिकता की जांच करने की न्यायपालिका की शक्ति
- (C) विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को राज्यपाल द्वारा अस्वीकृत करने की शक्ति
- (D) किसी मामले में निचली अदालतों के फैसलों की समीक्षा करने की सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या: न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) न्यायपालिका की वह शक्ति है जिसके तहत वह विधायिका द्वारा पारित कानूनों और कार्यपालिका द्वारा किए गए आदेशों की संवैधानिकता की जांच करती है। यदि न्यायपालिका को लगता है कि कोई कानून या आदेश संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो वह उसे असंवैधानिक या अवैध घोषित कर सकती है। भारत में न्यायिक समीक्षा की शक्ति अनुच्छेद 13, 32, 136, 142, 226 और 227 में निहित है। यह भारत के संविधान की ‘बुनियादी संरचना’ (Basic Structure) का हिस्सा है (केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य, 1973)।
-
प्रश्न 7: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत संविधान संशोधन की प्रक्रिया का प्रावधान है?
- (A) अनुच्छेद 368
- (B) अनुच्छेद 356
- (C) अनुच्छेद 360
- (D) अनुच्छेद 370
उत्तर: (A)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के भाग XX का अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित है। यह संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्रदान करता है, लेकिन ‘मूल संरचना’ को नष्ट किए बिना। अनुच्छेद 356 राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर राष्ट्रपति शासन से संबंधित है। अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल से संबंधित है। अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर राज्य से संबंधित विशेष प्रावधानों से संबंधित था, जिसे अब निरस्त कर दिया गया है।
-
प्रश्न 8: भारत में पंचायती राज व्यवस्था को किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा संवैधानिक दर्जा दिया गया?
- (A) 71वां संशोधन अधिनियम
- (B) 72वां संशोधन अधिनियम
- (C) 73वां संशोधन अधिनियम
- (D) 74वां संशोधन अधिनियम
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या: 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया। इसने संविधान में एक नया भाग IX जोड़ा, जिसका शीर्षक “पंचायतें” है और इसमें अनुच्छेद 243 से 243O तक के प्रावधान शामिल हैं। इसने एक नई ग्यारहवीं अनुसूची भी जोड़ी जिसमें पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय शामिल हैं। 74वां संशोधन अधिनियम शहरी स्थानीय निकायों (नगर पालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित है।
-
प्रश्न 9: निम्नलिखित में से कौन सा मौलिक कर्तव्य भारतीय संविधान में 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नहीं जोड़ा गया था?
- (A) भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना।
- (B) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना और हिंसा से दूर रहना।
- (C) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देना।
- (D) 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना।
उत्तर: (D)
विस्तृत व्याख्या: मौलिक कर्तव्य संविधान में 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए थे, जो भाग IVA के तहत अनुच्छेद 51A में 10 कर्तव्य थे। “6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना” (अनुच्छेद 51A(k)) को 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था, जिससे मौलिक कर्तव्यों की कुल संख्या 11 हो गई। अन्य सभी विकल्प 42वें संशोधन द्वारा जोड़े गए मौलिक कर्तव्य हैं।
-
प्रश्न 10: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची किससे संबंधित है?
- (A) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम
- (B) शपथ और प्रतिज्ञान के प्रारूप
- (C) संघ, राज्य और समवर्ती सूची
- (D) भाषाओं का प्रावधान
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या: सातवीं अनुसूची संघ (Union), राज्य (State) और समवर्ती (Concurrent) सूचियों से संबंधित है, जो केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण को परिभाषित करती है। पहली अनुसूची राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नामों से संबंधित है। तीसरी अनुसूची शपथ और प्रतिज्ञान के प्रारूपों से संबंधित है। आठवीं अनुसूची भाषाओं से संबंधित है।
-
प्रश्न 11: धन विधेयक (Money Bill) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- (A) इसे केवल राज्यसभा में पेश किया जा सकता है।
- (B) इसे केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर पेश किया जा सकता है।
- (C) राज्यसभा इसे 6 महीने तक रोक सकती है।
- (D) लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम नहीं होता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं।
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या: धन विधेयक (अनुच्छेद 110) को केवल लोकसभा में, राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर ही पेश किया जा सकता है। राज्यसभा की शक्तियाँ धन विधेयक के संबंध में बहुत सीमित हैं; यह इसे अधिकतम 14 दिनों के लिए रोक सकती है या सिफारिशें कर सकती है, लेकिन उन सिफारिशों को लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं (अनुच्छेद 110(3))।
-
प्रश्न 12: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल क्या होता है?
- (A) 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
- (B) 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
- (C) 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
- (D) राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) और चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, होता है (अनुच्छेद 324)। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया और आधार पर पद से हटाया जा सकता है।
-
प्रश्न 13: ‘गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार’ भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत निहित है?
- (A) अनुच्छेद 19
- (B) अनुच्छेद 20
- (C) अनुच्छेद 21
- (D) अनुच्छेद 22
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 21 कहता है कि “किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।” सर्वोच्च न्यायालय ने मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) और अन्य कई ऐतिहासिक निर्णयों में ‘प्राण और दैहिक स्वतंत्रता’ की व्यापक व्याख्या की है, जिसमें ‘गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार’ भी शामिल है। इसमें स्वच्छ पर्यावरण, आजीविका, निजता आदि का अधिकार भी शामिल है। अनुच्छेद 19 विभिन्न स्वतंत्रताओं से संबंधित है, अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण से संबंधित है, और अनुच्छेद 22 कुछ मामलों में गिरफ्तारी और हिरासत से संरक्षण से संबंधित है।
-
प्रश्न 14: भारत में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा किस आधार पर की जा सकती है?
- (A) युद्ध
- (B) बाहरी आक्रमण
- (C) सशस्त्र विद्रोह
- (D) उपरोक्त सभी
उत्तर: (D)
विस्तृत व्याख्या: राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की घोषणा राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 352 के तहत की जा सकती है, यदि भारत या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा को युद्ध (War), बाहरी आक्रमण (External Aggression) या सशस्त्र विद्रोह (Armed Rebellion) के कारण खतरा हो। मूल संविधान में ‘सशस्त्र विद्रोह’ के स्थान पर ‘आंतरिक अशांति’ शब्द था, जिसे 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा ‘सशस्त्र विद्रोह’ से प्रतिस्थापित किया गया था।
-
प्रश्न 15: भारत का उपराष्ट्रपति किसका पदेन अध्यक्ष होता है?
- (A) लोकसभा
- (B) राज्यसभा
- (C) नीति आयोग
- (D) राष्ट्रीय विकास परिषद
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 64 के अनुसार, भारत का उपराष्ट्रपति (Vice-President) राज्यसभा का पदेन अध्यक्ष (Ex-officio Chairman) होता है। वह राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है। नीति आयोग और राष्ट्रीय विकास परिषद गैर-संवैधानिक निकाय हैं, जिनका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। लोकसभा का अध्यक्ष लोकसभा सदस्यों द्वारा चुना जाता है।
-
प्रश्न 16: भारतीय संविधान की कौन सी विशेषता इसे अर्ध-संघीय (Quasi-federal) बनाती है?
- (A) लिखित संविधान
- (B) स्वतंत्र न्यायपालिका
- (C) केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का वितरण
- (D) आपातकाल के दौरान एकात्मक स्वरूप ग्रहण करना
उत्तर: (D)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान की अर्ध-संघीय प्रकृति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आपातकाल के दौरान यह एक मजबूत एकात्मक स्वरूप (Unitary form) ग्रहण कर लेता है, जहां केंद्र सरकार को राज्यों पर अधिक शक्ति मिल जाती है। लिखित संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका और शक्तियों का वितरण संघीय प्रणाली की सामान्य विशेषताएं हैं, लेकिन आपातकाल में शक्तियों का केंद्रीकरण इसे एक मजबूत केंद्र वाला संघ बनाता है, जिसे के.सी. व्हेयर ने ‘अर्ध-संघीय’ कहा था।
-
प्रश्न 17: ‘संविधान की मूल संरचना’ (Basic Structure of the Constitution) का सिद्धांत किस वाद में प्रतिपादित किया गया था?
- (A) गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
- (B) केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
- (C) मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
- (D) वामन राव बनाम भारत संघ
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या: ‘संविधान की मूल संरचना’ का सिद्धांत केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इस निर्णय में कहा गया कि संसद के पास संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति है, लेकिन वह संविधान की ‘मूल संरचना’ को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। गोलकनाथ मामले (1967) में कहा गया था कि मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं किया जा सकता। मिनर्वा मिल्स मामले (1980) में मूल संरचना सिद्धांत को और मजबूत किया गया।
-
प्रश्न 18: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) किस प्रकार का निकाय है?
- (A) संवैधानिक निकाय
- (B) वैधानिक निकाय
- (C) कार्यकारी निकाय
- (D) न्यायिक निकाय
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है। इसे संथानम समिति की सिफारिशों पर 1964 में स्थापित किया गया था, और बाद में 2003 में केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 द्वारा इसे वैधानिक दर्जा दिया गया। यह एक संवैधानिक निकाय नहीं है क्योंकि इसका उल्लेख संविधान में नहीं है।
-
प्रश्न 19: राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- (A) मुख्यमंत्री की नियुक्ति।
- (B) राज्य विधानसभा को भंग करना।
- (C) किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखना।
- (D) राज्य चुनाव आयुक्तों को हटाना।
उत्तर: (D)
विस्तृत व्याख्या: राज्यपाल को मुख्यमंत्री की नियुक्ति (जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत न हो), राज्य विधानसभा को भंग करना (मंत्रिपरिषद की सलाह पर नहीं), और किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखना (अनुच्छेद 200) जैसी विवेकाधीन शक्तियाँ प्राप्त हैं। हालांकि, राज्य चुनाव आयुक्तों को हटाना राज्यपाल की विवेकाधीन शक्ति नहीं है। राज्य चुनाव आयुक्त को केवल उसी प्रक्रिया और आधार पर पद से हटाया जा सकता है जैसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है (अनुच्छेद 243K)।
-
प्रश्न 20: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा निम्नलिखित में से कौन सा परिवर्तन किया गया था?
- (A) संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाना।
- (B) मंत्रिमंडल की लिखित सलाह पर ही राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा।
- (C) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष करना।
- (D) उपरोक्त सभी।
उत्तर: (D)
विस्तृत व्याख्या: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए थे। इसने संपत्ति के अधिकार (अनुच्छेद 31) को मौलिक अधिकार से हटाकर केवल एक कानूनी अधिकार (अनुच्छेद 300A) बना दिया। इसने यह भी प्रावधान किया कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा केवल तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को लिखित रूप में इसकी सलाह दे (अनुच्छेद 352)। इसके अलावा, इसने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल को 6 वर्ष से घटाकर पुनः 5 वर्ष कर दिया, जिसे 42वें संशोधन द्वारा 6 वर्ष किया गया था। अतः, सभी विकल्प सही हैं।
-
प्रश्न 21: भारतीय संसद में ‘प्रश्नकाल’ के तुरंत बाद कौन सा काल होता है?
- (A) शून्यकाल
- (B) आधे घंटे की चर्चा
- (C) विशेष उल्लेख
- (D) संकल्प
उत्तर: (A)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संसद में प्रत्येक संसदीय बैठक का पहला घंटा (सुबह 11 बजे से 12 बजे तक) ‘प्रश्नकाल’ होता है। प्रश्नकाल के तुरंत बाद ‘शून्यकाल’ (Zero Hour) आता है, जो दोपहर 12 बजे शुरू होता है और आमतौर पर दोपहर 1 बजे तक चलता है। ‘शून्यकाल’ भारतीय संसदीय नवाचार है और प्रक्रिया के नियमों में इसका उल्लेख नहीं है, जिसमें सदस्य बिना किसी पूर्व सूचना के सार्वजनिक महत्व के मामलों को उठा सकते हैं।
-
प्रश्न 22: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों को कौन नियुक्त करता है?
- (A) प्रधानमंत्री
- (B) संसद
- (C) भारत का राष्ट्रपति
- (D) सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों को भारत का राष्ट्रपति नियुक्त करता है (अनुच्छेद 316)। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा पद से भी हटाया जा सकता है, लेकिन केवल संविधान में उल्लिखित कुछ विशिष्ट आधारों और प्रक्रिया के तहत।
-
प्रश्न 23: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है?
- (A) अनुच्छेद 226
- (B) अनुच्छेद 32
- (C) अनुच्छेद 136
- (D) अनुच्छेद 139
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 32 सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा) जारी करने की शक्ति प्रदान करता है। इसे स्वयं एक मौलिक अधिकार माना गया है और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इसे ‘संविधान की आत्मा और हृदय’ कहा था। अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति देता है।
-
प्रश्न 24: भारत में शहरी स्थानीय स्वशासन से संबंधित संवैधानिक संशोधन कौन सा है?
- (A) 73वां संविधान संशोधन अधिनियम
- (B) 74वां संविधान संशोधन अधिनियम
- (C) 75वां संविधान संशोधन अधिनियम
- (D) 76वां संविधान संशोधन अधिनियम
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या: 74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने शहरी स्थानीय निकायों (नगर पालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा दिया। इसने संविधान में एक नया भाग IXA जोड़ा, जिसका शीर्षक “नगर पालिकाएँ” है और इसमें अनुच्छेद 243P से 243ZG तक के प्रावधान शामिल हैं। इसने एक नई बारहवीं अनुसूची भी जोड़ी जिसमें नगर पालिकाओं के 18 कार्यात्मक विषय शामिल हैं। 73वां संशोधन ग्रामीण स्थानीय स्वशासन (पंचायतों) से संबंधित है।
-
प्रश्न 25: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित आदर्शों का सही क्रम क्या है?
- (A) न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व
- (B) स्वतंत्रता, न्याय, समानता, बंधुत्व
- (C) समानता, स्वतंत्रता, न्याय, बंधुत्व
- (D) बंधुत्व, न्याय, समानता, स्वतंत्रता
उत्तर: (A)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित आदर्शों का सही क्रम है: न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक), स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना), समानता (प्रतिष्ठा और अवसर की), और अंत में बंधुत्व। यह क्रम प्रस्तावना के पाठ में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।
सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।