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भारतीय राजव्यवस्था क्विज़: अपने संवैधानिक ज्ञान की परीक्षा लें

भारतीय राजव्यवस्था क्विज़: अपने संवैधानिक ज्ञान की परीक्षा लें

भारत का संविधान केवल कानूनों का एक संग्रह नहीं, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों का जीवंत दस्तावेज है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए, भारतीय राजव्यवस्था की गहरी समझ होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दैनिक अभ्यास सेट आपको संवैधानिक अनुच्छेदों, संशोधनों और महत्वपूर्ण निर्णयों पर अपनी वैचारिक स्पष्टता का परीक्षण करने और उसे मजबूत करने में मदद करेगा।

  1. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निम्नलिखित में से कौन सा न्याय का प्रकार शामिल नहीं है?

    1. सामाजिक न्याय
    2. आर्थिक न्याय
    3. राजनीतिक न्याय
    4. धार्मिक न्याय

    सही उत्तर: d) धार्मिक न्याय

    विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान की प्रस्तावना सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने का वादा करती है। ‘धार्मिक न्याय’ का उल्लेख सीधे तौर पर प्रस्तावना में नहीं है, हालांकि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25-28) के माध्यम से धार्मिक समानता और सहिष्णुता को बढ़ावा देता है। न्याय के इन तीन प्रकारों का स्रोत रूसी क्रांति (1917) है।

  2. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत ‘कानून के समक्ष समानता’ और ‘कानूनों का समान संरक्षण’ की गारंटी दी गई है?

    1. अनुच्छेद 13
    2. अनुच्छेद 14
    3. अनुच्छेद 15
    4. अनुच्छेद 16

    सही उत्तर: b) अनुच्छेद 14

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 14 ‘कानून के समक्ष समानता’ (ब्रिटिश अवधारणा) और ‘कानूनों का समान संरक्षण’ (अमेरिकी अवधारणा) दोनों सिद्धांतों को समाहित करता है। यह राज्य को किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता या भारत के क्षेत्र के भीतर कानूनों के समान संरक्षण से वंचित न करने का निर्देश देता है। अनुच्छेद 13 न्यायिक समीक्षा से संबंधित है, अनुच्छेद 15 धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव के निषेध से संबंधित है, और अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता से संबंधित है।

  3. राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) में निम्नलिखित में से कौन सा गांधीवादी सिद्धांत नहीं है?

    1. ग्राम पंचायतों का संगठन
    2. कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना
    3. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना
    4. अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना

    सही उत्तर: d) अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना

    विस्तृत व्याख्या: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना (अनुच्छेद 51) एक उदार-बौद्धिक सिद्धांत है, न कि गांधीवादी। गांधीवादी सिद्धांतों में ग्राम पंचायतों का संगठन (अनुच्छेद 40), कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना (अनुच्छेद 43), और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना (अनुच्छेद 46) शामिल हैं, जो गांधीजी के आदर्शों पर आधारित हैं।

  4. किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा मौलिक कर्तव्यों को भारतीय संविधान में जोड़ा गया था?

    1. 42वां संशोधन अधिनियम
    2. 44वां संशोधन अधिनियम
    3. 73वां संशोधन अधिनियम
    4. 86वां संशोधन अधिनियम

    सही उत्तर: a) 42वां संशोधन अधिनियम

    विस्तृत व्याख्या: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा ‘स्वर्ण सिंह समिति’ की सिफारिशों पर मौलिक कर्तव्यों को संविधान के भाग IV-A में अनुच्छेद 51-A के तहत जोड़ा गया था। प्रारंभ में 10 मौलिक कर्तव्य थे। 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 ने एक और मौलिक कर्तव्य जोड़ा, जिससे उनकी संख्या 11 हो गई। 44वां संशोधन (1978) संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से कानूनी अधिकार बनाने से संबंधित है। 73वां संशोधन (1992) पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित है।

  5. भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के निर्वाचक मंडल में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं होता है?

    1. संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य
    2. राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
    3. केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली और पुडुचेरी) की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
    4. राज्य विधान परिषदों के निर्वाचित सदस्य

    सही उत्तर: d) राज्य विधान परिषदों के निर्वाचित सदस्य

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 54 भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल का प्रावधान करता है। इसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य, राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य और दिल्ली व पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। राज्य विधान परिषदों के सदस्य (चाहे निर्वाचित हों या मनोनीत) राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।

  6. भारत के राष्ट्रपति द्वारा उपयोग की जाने वाली निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto) का क्या अर्थ है?

    1. राष्ट्रपति किसी विधेयक को अनिश्चित काल के लिए रोक सकते हैं।
    2. राष्ट्रपति किसी विधेयक को संसद को पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं, लेकिन यदि संसद उसे फिर से पारित कर देती है तो उन्हें सहमति देनी होगी।
    3. राष्ट्रपति किसी विधेयक को अपनी सहमति देने से पूरी तरह मना कर सकते हैं।
    4. राष्ट्रपति केवल धन विधेयकों को रोक सकते हैं।

    सही उत्तर: b) राष्ट्रपति किसी विधेयक को संसद को पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं, लेकिन यदि संसद उसे फिर से पारित कर देती है तो उन्हें सहमति देनी होगी।

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 111 के तहत राष्ट्रपति की वीटो शक्तियाँ परिभाषित हैं। निलंबनकारी वीटो तब होती है जब राष्ट्रपति किसी विधेयक को संसद को पुनर्विचार के लिए लौटाते हैं। यदि संसद विधेयक को बिना संशोधन के या संशोधन के साथ फिर से पारित करती है, तो राष्ट्रपति को उस पर अपनी सहमति देनी होगी। पॉकेट वीटो (अनुच्छेद 111) में राष्ट्रपति किसी विधेयक को अनिश्चित काल के लिए रोक सकते हैं। पूर्ण वीटो में राष्ट्रपति किसी विधेयक पर अपनी सहमति देने से पूरी तरह मना कर सकते हैं। धन विधेयक को राष्ट्रपति पुनर्विचार के लिए नहीं लौटा सकते, उन्हें या तो सहमति देनी होती है या रोक कर रखना होता है।

  7. उपराष्ट्रपति अपना त्यागपत्र किसे सौंपते हैं?

    1. लोकसभा अध्यक्ष
    2. भारत के मुख्य न्यायाधीश
    3. भारत के राष्ट्रपति
    4. प्रधानमंत्री

    सही उत्तर: c) भारत के राष्ट्रपति

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 67(क) के अनुसार, उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकते हैं। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को स्वीकार करते हैं।

  8. निम्नलिखित में से कौन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 के तहत ‘सामूहिक उत्तरदायित्व’ के सिद्धांत का सबसे अच्छा वर्णन करता है?

    1. मंत्री व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
    2. मंत्री संसद के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
    3. मंत्री परिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
    4. प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद के अन्य मंत्री व्यक्तिगत रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं।

    सही उत्तर: c) मंत्री परिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 75(3) स्पष्ट रूप से कहता है कि “मंत्री परिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी”। इसका अर्थ है कि यदि लोकसभा मंत्री परिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर देती है, तो सभी मंत्रियों को त्यागपत्र देना होगा, भले ही व्यक्तिगत मंत्री के विरुद्ध कोई आरोप न हो। यह संसदीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

  9. भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?

    1. लोकसभा अध्यक्ष
    2. भारत के राष्ट्रपति
    3. भारत के मुख्य न्यायाधीश
    4. बहुमत प्राप्त दल के सदस्य

    सही उत्तर: b) भारत के राष्ट्रपति

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 75 में कहा गया है कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाएगी। राष्ट्रपति आमतौर पर उस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं जो लोकसभा में बहुमत दल का नेता होता है।

  10. संसद के दो सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?

    1. भारत के राष्ट्रपति
    2. भारत के उपराष्ट्रपति
    3. लोकसभा अध्यक्ष
    4. राज्यसभा के सभापति

    सही उत्तर: c) लोकसभा अध्यक्ष

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 108 संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान करता है, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष (अनुच्छेद 118) करते हैं। यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित हों, तो लोकसभा के उपाध्यक्ष और यदि वे भी अनुपस्थित हों, तो राज्यसभा के उपसभापति इसकी अध्यक्षता करते हैं। राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाते हैं, लेकिन अध्यक्षता नहीं करते।

  11. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में ‘धन विधेयक’ को परिभाषित किया गया है?

    1. अनुच्छेद 109
    2. अनुच्छेद 110
    3. अनुच्छेद 111
    4. अनुच्छेद 112

    सही उत्तर: b) अनुच्छेद 110

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 110 ‘धन विधेयक’ की परिभाषा से संबंधित है। यह उन विषयों को सूचीबद्ध करता है जिन्हें धन विधेयक में शामिल किया जा सकता है, जैसे कर लगाना, समाप्त करना, बदलना, या किसी भी शुल्क का विनियमन; भारत सरकार द्वारा धन उधार लेना या किसी गारंटी का विनियमन; भारत की संचित निधि से धन का विनियोग आदि। अनुच्छेद 109 धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया से संबंधित है। अनुच्छेद 111 विधेयकों पर राष्ट्रपति की सहमति से संबंधित है। अनुच्छेद 112 वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) से संबंधित है।

  12. किसी राज्य में विधान परिषद के गठन या उन्मूलन का अधिकार किसे है?

    1. भारत के राष्ट्रपति
    2. संबंधित राज्य की विधानसभा
    3. संसद
    4. राज्यपाल

    सही उत्तर: c) संसद

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 169 के तहत, किसी राज्य में विधान परिषद के गठन या उन्मूलन का अंतिम अधिकार संसद के पास है। हालाँकि, संसद यह तभी कर सकती है जब संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का एक प्रस्ताव विशेष बहुमत से पारित करे। यह एक संघीय प्रणाली में राज्यों और केंद्र के बीच शक्तियों के संतुलन का उदाहरण है।

  13. भारतीय संविधान के तहत सर्वोच्च न्यायालय की ‘मूल अधिकारिता’ (Original Jurisdiction) से क्या तात्पर्य है?

    1. अपील द्वारा मुकदमों की सुनवाई करना।
    2. मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करना।
    3. केंद्र और राज्यों के बीच विवादों का निपटारा करना।
    4. संविधान की व्याख्या से संबंधित मामलों पर सलाह देना।

    सही उत्तर: c) केंद्र और राज्यों के बीच विवादों का निपटारा करना।

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 131 सर्वोच्च न्यायालय की ‘मूल अधिकारिता’ को परिभाषित करता है। इसके तहत, सर्वोच्च न्यायालय उन विवादों का निपटारा करता है जो भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच; या भारत सरकार और किसी राज्य या राज्यों और एक या एक से अधिक अन्य राज्यों के बीच; या दो या अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न होते हैं। मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करना (अनुच्छेद 32) इसकी रिट अधिकारिता है, और अपील द्वारा मुकदमों की सुनवाई करना अपीलीय अधिकारिता है। संविधान की व्याख्या से संबंधित मामलों पर सलाह देना इसकी सलाहकार अधिकारिता (अनुच्छेद 143) है।

  14. उच्च न्यायालय किस अनुच्छेद के तहत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है?

    1. अनुच्छेद 32
    2. अनुच्छेद 226
    3. अनुच्छेद 139
    4. अनुच्छेद 142

    सही उत्तर: b) अनुच्छेद 226

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य उद्देश्य के लिए भी रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा) जारी करने की शक्ति प्रदान करता है। अनुच्छेद 32 सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने की शक्ति देता है और स्वयं एक मौलिक अधिकार भी है। उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता सर्वोच्च न्यायालय से अधिक व्यापक है क्योंकि यह ‘किसी अन्य उद्देश्य’ के लिए भी रिट जारी कर सकता है।

  15. ‘संविधान की मूल संरचना का सिद्धांत’ (Basic Structure Doctrine) किस ऐतिहासिक मामले में प्रतिपादित किया गया था?

    1. गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य मामला (1967)
    2. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामला (1973)
    3. मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ मामला (1980)
    4. एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ मामला (1994)

    सही उत्तर: b) केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामला (1973)

    विस्तृत व्याख्या: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामला (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने ‘संविधान की मूल संरचना का सिद्धांत’ प्रतिपादित किया। इस निर्णय में कहा गया कि संसद संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, लेकिन वह संविधान की मूल संरचना को नहीं बदल सकती। यह न्यायिक सक्रियता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जिसने संविधान की सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की।

  16. भारतीय संविधान के अनुसार, अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary Powers) किसके पास निहित हैं?

    1. राज्यों के पास
    2. केंद्र सरकार के पास
    3. राज्य और केंद्र सरकार दोनों के पास
    4. राष्ट्रपति के पास

    सही उत्तर: b) केंद्र सरकार के पास

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 248 के अनुसार, अवशिष्ट शक्तियाँ, यानी ऐसे विषय जो संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में से किसी में भी शामिल नहीं हैं, केंद्र सरकार (संसद) के पास निहित हैं। यह कनाडा मॉडल पर आधारित है और भारत के संघीय ढांचे में केंद्र को एक मजबूत स्थिति प्रदान करता है।

  17. केंद्र-राज्य संबंधों से संबंधित ‘अंतर-राज्य परिषद’ (Inter-State Council) का गठन किस अनुच्छेद के तहत किया जाता है?

    1. अनुच्छेद 262
    2. अनुच्छेद 263
    3. अनुच्छेद 280
    4. अनुच्छेद 275

    सही उत्तर: b) अनुच्छेद 263

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को केंद्र और राज्यों के बीच या राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए ‘अंतर-राज्य परिषद’ गठित करने का अधिकार देता है। इसका मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जांच और सलाह देना, सभी या कुछ राज्यों या संघ और एक या अधिक राज्यों के सामान्य हित के विषयों पर जांच और चर्चा करना है। अनुच्छेद 262 अंतर-राज्यीय नदियों के जल विवादों से संबंधित है, और अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से संबंधित है।

  18. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?

    1. प्रधानमंत्री
    2. संसद
    3. भारत के राष्ट्रपति
    4. भारत के मुख्य न्यायाधीश

    सही उत्तर: c) भारत के राष्ट्रपति

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 324(2) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक निकाय है जो भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।

  19. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्यों को उनके पद से कौन हटा सकता है?

    1. प्रधानमंत्री
    2. संसद
    3. भारत के राष्ट्रपति
    4. लोकसभा अध्यक्ष

    सही उत्तर: c) भारत के राष्ट्रपति

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 317 के तहत, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर हटाया जा सकता है, यदि वह दुर्व्यवहार का दोषी पाया जाता है। यह UPSC की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।

  20. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति कौन करता है?

    1. प्रधानमंत्री
    2. भारत के राष्ट्रपति
    3. संसद
    4. केंद्रीय वित्त मंत्री

    सही उत्तर: b) भारत के राष्ट्रपति

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 148 के अनुसार, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। CAG भारत सरकार और राज्य सरकारों के खातों का लेखा-परीक्षण करने वाला एक स्वतंत्र प्राधिकरण है। यह सार्वजनिक पर्स का संरक्षक होता है और संसद के प्रति जवाबदेह होता है।

  21. वित्त आयोग का गठन भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत किया जाता है?

    1. अनुच्छेद 266
    2. अनुच्छेद 280
    3. अनुच्छेद 282
    4. अनुच्छेद 307

    सही उत्तर: b) अनुच्छेद 280

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 280 राष्ट्रपति को हर पाँचवें वर्ष या उससे पहले एक ‘वित्त आयोग’ का गठन करने का अधिकार देता है। वित्त आयोग का मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण और राज्यों के बीच ऐसे आगमों के आवंटन के संबंध में राष्ट्रपति को सिफारिशें करना है। यह भारत के संघीय वित्तीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय है।

  22. पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन अधिनियम द्वारा दिया गया था?

    1. 72वां संशोधन अधिनियम
    2. 73वां संशोधन अधिनियम
    3. 74वां संशोधन अधिनियम
    4. 75वां संशोधन अधिनियम

    सही उत्तर: b) 73वां संशोधन अधिनियम

    विस्तृत व्याख्या: 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया। इसने संविधान में एक नया भाग IX और ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी, जिसमें पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय शामिल हैं। यह ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था (अनुच्छेद 243 से 243-O)।

  23. शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) से संबंधित संवैधानिक प्रावधान किस संशोधन अधिनियम द्वारा जोड़े गए थे?

    1. 73वां संशोधन अधिनियम
    2. 74वां संशोधन अधिनियम
    3. 61वां संशोधन अधिनियम
    4. 97वां संशोधन अधिनियम

    सही उत्तर: b) 74वां संशोधन अधिनियम

    विस्तृत व्याख्या: 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा शहरी स्थानीय निकायों (नगरपालिकाएँ) को संवैधानिक दर्जा दिया गया। इसने संविधान में एक नया भाग IX-A और बारहवीं अनुसूची जोड़ी, जिसमें नगरपालिकाओं के 18 कार्यात्मक विषय शामिल हैं। यह शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए लाया गया था (अनुच्छेद 243-P से 243-ZG)।

  24. भारत में राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की घोषणा किस आधार पर की जा सकती है?

    1. केवल युद्ध या बाहरी आक्रमण
    2. केवल सशस्त्र विद्रोह
    3. युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह
    4. आंतरिक गड़बड़ी

    सही उत्तर: c) युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 352 के तहत, राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं यदि उन्हें यह समाधान हो जाए कि गंभीर आपातकाल मौजूद है जिसके कारण भारत या उसके किसी भाग की सुरक्षा को युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से खतरा है। मूल संविधान में ‘सशस्त्र विद्रोह’ के स्थान पर ‘आंतरिक गड़बड़ी’ शब्द था, जिसे 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदला गया था ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके।

  25. भारतीय संविधान में संशोधन करने की प्रक्रिया किस अनुच्छेद में दी गई है?

    1. अनुच्छेद 360
    2. अनुच्छेद 368
    3. अनुच्छेद 370
    4. अनुच्छेद 356

    सही उत्तर: b) अनुच्छेद 368

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 368 भारतीय संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसकी प्रक्रिया का वर्णन करता है। यह संविधान के भाग XX में स्थित है। संविधान में तीन प्रकार से संशोधन किया जा सकता है: संसद के साधारण बहुमत द्वारा, संसद के विशेष बहुमत द्वारा, और संसद के विशेष बहुमत तथा राज्यों के आधे से अधिक की विधानसभाओं की पुष्टि द्वारा। हालांकि, अनुच्छेद 368 केवल विशेष बहुमत और राज्यों के आधे से अधिक की पुष्टि वाले संशोधन से संबंधित है।

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