Get free Notes

सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Click Here

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान: अपनी तैयारी को परखने के लिए उच्च-स्तरीय अभ्यास सेट

भारतीय संविधान और राजव्यवस्था: वैचारिक स्पष्टता के लिए विशेष अभ्यास सेट

\n\n

भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवंत लोकतंत्र की आत्मा और मार्गदर्शक सिद्धांत है। UPSC, SSC और राज्य PSC जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए संवैधानिक अनुच्छेदों के रटने के बजाय उनके पीछे के तर्क और न्यायिक व्याख्याओं को समझना अनिवार्य है। यह उच्च-स्तरीय अभ्यास सेट आपकी वैचारिक स्पष्टता का परीक्षण करने और आपकी तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।

\n\n


\n\n

    \n\n

  1. भारतीय संविधान की प्रस्तावना के संदर्भ में, ‘पंथनिरपेक्ष’ (Secular) शब्द का सबसे सटीक अर्थ क्या है?\n
      \n

    • (A) राज्य का अपना कोई धर्म नहीं है और वह सभी धर्मों का विरोध करता है।
    • \n

    • (B) राज्य सभी धर्मों को समान संरक्षण और सम्मान प्रदान करता है।
    • \n

    • (C) राज्य केवल अल्पसंख्यक धर्मों की रक्षा करता है।
    • \n

    • (D) राज्य केवल बहुमत के धर्म को मान्यता देता है।
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: भारत का ‘पंथनिरपेक्षता’ का मॉडल पश्चिमी अवधारणा (धर्म और राज्य का पूर्ण अलगाव) से अलग है। भारतीय संदर्भ में इसका अर्थ है ‘सर्व धर्म समभाव’, जहाँ राज्य का अपना कोई आधिकारिक धर्म नहीं है, लेकिन वह सभी धर्मों के प्रति तटस्थ है और उन्हें समान सम्मान और सुरक्षा प्रदान करता है। यह अवधारणा अनुच्छेद 25-28 के मौलिक अधिकारों के साथ मिलकर काम करती है। विकल्प (A) गलत है क्योंकि राज्य धर्मों का विरोध नहीं करता, बल्कि तटस्थ रहता है।

    \n\n

  2. किस ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ‘मूल संरचना’ (Basic Structure) के सिद्धांत का प्रतिपादन किया था?\n
      \n

    • (A) गोलकनाथ मामला (1967)
    • \n

    • (B) मेनका गांधी मामला (1978)
    • \n

    • (C) केशवानंद भारती मामला (1973)
    • \n

    • (D) मिनर्वा मिल्स मामला (1980)
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: 1973 के केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले में 13 न्यायाधीशों की सबसे बड़ी पीठ ने निर्णय दिया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन तो कर सकती है, लेकिन वह संविधान के ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। यह निर्णय न्यायिक समीक्षा की शक्ति को सुदृढ़ करता है। गोलकनाथ मामले में कहा गया था कि मौलिक अधिकारों को संशोधित नहीं किया जा सकता, जिसे बाद में बदला गया।

    \n\n

  3. अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार’ में निम्नलिखित में से क्या शामिल नहीं है?\n
      \n

    • (A) निजता का अधिकार (Right to Privacy)
    • \n

    • (B) स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार
    • \n

    • (C) त्वरित सुनवाई का अधिकार
    • \n

    • (D) संपत्ति का अधिकार
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (D)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: संपत्ति का अधिकार पहले एक मौलिक अधिकार था (अनुच्छेद 31), लेकिन 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इसे मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत एक ‘कानूनी अधिकार’ बना दिया गया। वहीं, पुट्टस्वामी मामले के बाद ‘निजता का अधिकार’ और मेनका गांधी मामले के बाद ‘गरिमापूर्ण जीवन’ और ‘त्वरित सुनवाई’ को अनुच्छेद 21 का हिस्सा माना गया है।

    \n\n

  4. राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) और मौलिक अधिकारों (FR) के बीच संघर्ष की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान दृष्टिकोण क्या है?\n
      \n

    • (A) मौलिक अधिकार हमेशा नीति निदेशक तत्वों पर हावी रहेंगे।
    • \n

    • (B) नीति निदेशक तत्व मौलिक अधिकारों पर प्राथमिकता रखते हैं।
    • \n

    • (C) दोनों के बीच सामंजस्य (Harmonious Construction) स्थापित किया जाना चाहिए।
    • \n

    • (D) संसद इनमें से किसी को भी मनमाने ढंग से हटा सकती है।
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: मिनर्वा मिल्स मामले (1980) में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान मौलिक अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों के बीच एक नाजुक संतुलन पर आधारित है। इन्हें एक-दूसरे का पूरक माना जाना चाहिए न कि विरोधी। जहाँ मौलिक अधिकार नकारात्मक निषेध (राज्य क्या नहीं करेगा) हैं, वहीं DPSP सकारात्मक निर्देश (राज्य क्या करेगा) हैं।

    \n\n

  5. मौलिक कर्तव्यों को भारतीय संविधान में किस समिति की सिफारिश पर जोड़ा गया था?\n
      \n

    • (A) वर्मा समिति
    • \n

    • (B) स्वर्ण सिंह समिति
    • \n

    • (C) सरकारिया आयोग
    • \n

    • (D) बलवंत राय मेहता समिति
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर जोड़ा गया था। इन्हें संविधान के भाग IV-A और अनुच्छेद 51A के तहत रखा गया है। मूल रूप से 10 कर्तव्य थे, लेकिन 86वें संशोधन (2002) द्वारा 11वाँ कर्तव्य (शिक्षा का अवसर प्रदान करना) जोड़ा गया।

    \n\n

  6. भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (Pardoning Power) किस अनुच्छेद के तहत निहित है?\n
      \n

    • (A) अनुच्छेद 61
    • \n

    • (B) अनुच्छेद 72
    • \n

    • (C) अनुच्छेद 123
    • \n

    • (D) अनुच्छेद 161
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा को क्षमा करने, कम करने या निलंबित करने की शक्ति देता है। यह शक्ति मृत्युदंड के मामलों में भी लागू होती है। अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को भी समान शक्तियाँ प्राप्त हैं, लेकिन राज्यपाल मृत्युदंड को पूरी तरह क्षमा नहीं कर सकते। अनुच्छेद 61 महाभियोग (Impeachment) से संबंधित है।

    \n\n

  7. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?\n
      \n

    • (A) राष्ट्रपति के प्रति
    • \n

    • (B) प्रधानमंत्री के प्रति
    • \n

    • (C) लोकसभा के प्रति
    • \n

    • (D) संसद के दोनों सदनों के प्रति
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: भारतीय संसदीय प्रणाली में अनुच्छेद 75(3) स्पष्ट करता है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा (निचले सदन) के प्रति उत्तरदायी होगी। इसका अर्थ है कि यदि लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है, भले ही प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत विश्वास बना रहे।

    \n\n

  8. राज्यसभा को ‘स्थायी सदन’ कहा जाता है क्योंकि:\n
      \n

    • (A) इसके सदस्यों का कार्यकाल आजीवन होता है।
    • \n

    • (B) इसे राष्ट्रपति द्वारा कभी भंग नहीं किया जा सकता।
    • \n

    • (C) इसके सदस्य चुनाव के लिए नहीं जाते।
    • \n

    • (D) यह केवल केंद्र सरकार के प्रति उत्तरदायी है।
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: राज्यसभा एक निरंतर चलने वाला सदन है। इसे भंग नहीं किया जा सकता। इसके एक-तिहाई सदस्य हर दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं और उनके स्थान पर नए सदस्य चुने जाते हैं। प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। इसके विपरीत, लोकसभा एक अस्थायी सदन है जिसे 5 वर्ष में या उससे पहले भंग किया जा सकता है।

    \n\n

  9. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) की अध्यक्षता कौन करता है?\n
      \n

    • (A) भारत का राष्ट्रपति
    • \n

    • (B) भारत का उपराष्ट्रपति
    • \n

    • (C) लोकसभा का अध्यक्ष (Speaker)
    • \n

    • (D) राज्यसभा का सभापति
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 108 के तहत जब किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों में गतिरोध होता है, तो राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाते हैं। हालांकि, इस बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है। यदि वह अनुपस्थित हो, तो उपाध्यक्ष और यदि वह भी अनुपस्थित हो, तो राज्यसभा का उप-सभापति अध्यक्षता करता है। ध्यान दें कि राज्यसभा का सभापति (उपराष्ट्रपति) कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करता।

    \n\n

  10. ‘विनियोग विधेयक’ (Appropriation Bill) का मुख्य उद्देश्य क्या है?\n
      \n

    • (A) नए कर लगाने की अनुमति देना।
    • \n

    • (B) भारत की संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देना।
    • \n

    • (C) सरकार के वार्षिक खर्चों का विवरण देना।
    • \n

    • (D) राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति देना।
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 114 के अनुसार, बिना विनियोग विधेयक पारित हुए भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से कोई भी पैसा नहीं निकाला जा सकता। यह सुनिश्चित करता है कि सरकार का खर्च केवल संसद की मंजूरी के बाद ही हो। बजट का वित्तीय विधेयक केवल मांगें प्रस्तुत करता है, लेकिन वास्तविक भुगतान विनियोग विधेयक के माध्यम से होता है।

    \n\n

  11. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति का मुख्य स्रोत क्या है?\n
      \n

    • (A) केवल अनुच्छेद 32
    • \n

    • (B) केवल अनुच्छेद 226
    • \n

    • (C) अनुच्छेद 13, 32, 131-136 और 226 का संयोजन
    • \n

    • (D) राष्ट्रपति की विवेकाधीन शक्तियाँ
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: न्यायिक समीक्षा का अर्थ है न्यायपालिका द्वारा विधायी अधिनियमों और कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता की जांच करना। अनुच्छेद 13 स्पष्ट करता है कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला कोई भी कानून शून्य होगा। अनुच्छेद 32 (SC) और 226 (HC) रिट जारी करने की शक्ति देते हैं, जो न्यायिक समीक्षा के उपकरण हैं। यह अमेरिकी संविधान से प्रेरित अवधारणा है।

    \n\n

  12. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए ‘कॉलेजियम प्रणाली’ का आधार क्या है?\n
      \n

    • (A) संविधान का अनुच्छेद 124(2)
    • \n

    • (B) संसद द्वारा पारित एक अधिनियम
    • \n

    • (C) सुप्रीम कोर्ट के स्वयं के निर्णय (Three Judges Cases)
    • \n

    • (D) राष्ट्रपति का विवेकाधीन आदेश
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: कॉलेजियम प्रणाली का उल्लेख न तो संविधान में है और न ही किसी कानून में। यह सुप्रीम कोर्ट के तीन निर्णयों (First, Second, and Third Judges Cases) के माध्यम से विकसित हुई है। इसके तहत मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठतम न्यायाधीशों का एक समूह न्यायाधीशों के नाम की सिफारिश राष्ट्रपति को करता है।

    \n\n

  13. रिट (Writ) जारी करने की शक्ति के संदर्भ में, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के बीच क्या अंतर है?\n
      \n

    • (A) केवल उच्चतम न्यायालय रिट जारी कर सकता है।
    • \n

    • (B) उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता अनुच्छेद 226 के तहत उच्चतम न्यायालय (अनुच्छेद 32) से व्यापक है।
    • \n

    • (C) उच्चतम न्यायालय केवल कानूनी अधिकारों के लिए रिट जारी करता है।
    • \n

    • (D) दोनों की शक्तियाँ बिल्कुल समान हैं।
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है। लेकिन अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट मौलिक अधिकारों के साथ-साथ ‘किसी अन्य उद्देश्य’ (Any other purpose) के लिए भी रिट जारी कर सकता है। इसलिए, हाई कोर्ट की रिट अधिकारिता का दायरा अधिक विस्तृत है।

    \n\n

  14. अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council) की स्थापना किस अनुच्छेद के तहत की जाती है?\n
      \n

    • (A) अनुच्छेद 262
    • \n

    • (B) अनुच्छेद 263
    • \n

    • (C) अनुच्छेद 280
    • \n

    • (D) अनुच्छेद 356
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को एक अंतर-राज्य परिषद स्थापित करने की शक्ति देता है ताकि राज्यों के बीच समन्वय स्थापित किया जा सके और विवादों को सुलझाया जा सके। इसकी सिफारिश सरकारिया आयोग ने की थी। अनुच्छेद 262 नदी जल विवादों से संबंधित है और अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से।

    \n\n

  15. सातवीं अनुसूची में ‘समवर्ती सूची’ (Concurrent List) का क्या अर्थ है?\n
      \n

    • (A) केवल केंद्र सरकार कानून बना सकती है।
    • \n

    • (B) केवल राज्य सरकार कानून बना सकती है।
    • \n

    • (C) केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन टकराव की स्थिति में केंद्र का कानून मान्य होगा।
    • \n

    • (D) इसमें केवल स्थानीय शासन के विषय शामिल हैं।
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: समवर्ती सूची में ऐसे विषय (जैसे शिक्षा, वन, विवाह) होते हैं जिन पर केंद्र और राज्य दोनों को अधिकार है। यदि दोनों ने कानून बनाया है और उनमें विरोधाभास है, तो अनुच्छेद 254 के अनुसार केंद्रीय कानून प्रभावी होगा, जब तक कि राज्य के कानून को राष्ट्रपति की सहमति न मिल गई हो।

    \n\n

  16. भारत के चुनाव आयोग (ECI) के बारे में कौन सा कथन सही है?\n
      \n

    • (A) यह एक वैधानिक निकाय है।
    • \n

    • (B) मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, लेकिन हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी होती है।
    • \n

    • (C) यह केवल लोकसभा चुनावों का संचालन करता है।
    • \n

    • (D) इसके सदस्यों की नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाने की प्रक्रिया वही है जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की होती है (संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव)। यह उन्हें राजनीतिक दबाव से सुरक्षित रखता है। विकल्प (A) गलत है क्योंकि यह संवैधानिक है, वैधानिक नहीं।

    \n\n

  17. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति और कार्यकाल किस अनुच्छेद में वर्णित है?\n
      \n

    • (A) अनुच्छेद 148
    • \n

    • (B) अनुच्छेद 76
    • \n

    • (C) अनुच्छेद 110
    • \n

    • (D) अनुच्छेद 280
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (A)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 148 CAG के पद का प्रावधान करता है। CAG को ‘लोक वित्त का संरक्षक’ कहा जाता है। वह सरकारी खर्चों का ऑडिट करता है और अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे संसद के सामने रखा जाता है। अनुच्छेद 76 महान्यायवादी (Attorney General) से संबंधित है।

    \n\n

  18. वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन हर कितने वर्ष बाद राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है?\n
      \n

    • (A) प्रत्येक 3 वर्ष
    • \n

    • (B) प्रत्येक 4 वर्ष
    • \n

    • (C) प्रत्येक 5 वर्ष
    • \n

    • (D) आवश्यकतानुसार कभी भी
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 280 के तहत, राष्ट्रपति प्रत्येक 5 वर्ष में (या आवश्यकता पड़ने पर उससे पहले) एक वित्त आयोग का गठन करते हैं। इसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच करों (Taxes) के वितरण का सूत्र निर्धारित करना है। यह एक अर्ध-न्यायिक संवैधानिक निकाय है।

    \n\n

  19. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है?\n
      \n

    • (A) प्रधानमंत्री
    • \n

    • (B) गृह मंत्री
    • \n

    • (C) राष्ट्रपति
    • \n

    • (D) मुख्य न्यायाधीश
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 315-323 के तहत UPSC और SPSC का प्रावधान है। सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। हालाँकि, SPSC के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है, लेकिन उन्हें हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास होती है, जो एक महत्वपूर्ण संवैधानिक बिंदु है।

    \n\n

  20. नीति आयोग (NITI Aayog) के संदर्भ में कौन सा कथन सत्य है?\n
      \n

    • (A) यह एक संवैधानिक निकाय है।
    • \n

    • (B) यह एक वैधानिक निकाय है।
    • \n

    • (C) यह एक कार्यकारी निकाय (Executive Body) है।
    • \n

    • (D) यह योजना आयोग का ही नाम बदला हुआ रूप है।
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: नीति आयोग (National Institution for Transforming India) का गठन 1 जनवरी 2015 को एक कैबिनेट प्रस्ताव के माध्यम से किया गया था। यह न तो संविधान में वर्णित है और न ही किसी संसद अधिनियम द्वारा बना है, इसलिए यह एक ‘कार्यकारी निकाय’ है। यह ‘Bottom-up’ दृष्टिकोण पर काम करता है, जबकि योजना आयोग ‘Top-down’ था।

    \n\n

  21. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की प्रकृति क्या है?\n
      \n

    • (A) संवैधानिक निकाय
    • \n

    • (B) वैधानिक निकाय
    • \n

    • (C) गैर-संवैधानिक निकाय
    • \n

    • (D) न्यायिक निकाय
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: NHRC की स्थापना ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत की गई थी। चूंकि इसकी स्थापना संसद द्वारा पारित एक कानून (Act) के माध्यम से हुई है, इसलिए यह एक ‘वैधानिक निकाय’ (Statutory Body) है। इसकी शक्तियाँ मुख्य रूप से सिफ़ारिशी होती हैं, यह दंड नहीं दे सकता।

    \n\n

  22. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम (1992) ने ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को किस रूप में मान्यता दी?\n
      \n

    • (A) नगर पालिकाओं के रूप में
    • \n

    • (B) जिला परिषदों के रूप में
    • \n

    • (C) पंचायती राज संस्थाओं के रूप में
    • \n

    • (D) ग्राम सभाओं के रूप में केवल
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: 73वें संशोधन ने संविधान में भाग IX और 11वीं अनुसूची जोड़ी, जिससे पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला। इसने त्रि-स्तरीय ढांचा (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) अनिवार्य किया। अनुच्छेद 243 से 243O तक इसके प्रावधान हैं।

    \n\n

  23. राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की घोषणा किस अनुच्छेद के तहत की जाती है?\n
      \n

    • (A) अनुच्छेद 352
    • \n

    • (B) अनुच्छेद 356
    • \n

    • (C) अनुच्छेद 360
    • \n

    • (D) अनुच्छेद 365
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (A)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति युद्ध, बाहरी आक्रमण या ‘सशस्त्र विद्रोह’ (Armed Rebellion) के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर सकते हैं। ‘आंतरिक अशांति’ शब्द को 44वें संशोधन द्वारा बदलकर ‘सशस्त्र विद्रोह’ कर दिया गया था ताकि आपातकाल का दुरुपयोग न हो। अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति शासन और 360 वित्तीय आपातकाल से संबंधित है।

    \n\n

  24. 42वें संविधान संशोधन (1976) को ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) क्यों कहा जाता है?\n
      \n

    • (A) क्योंकि इसने संविधान के आकार को छोटा कर दिया।
    • \n

    • (B) क्योंकि इसमें केवल कुछ छोटे बदलाव किए गए थे।
    • \n

    • (C) क्योंकि इसमें व्यापक स्तर पर परिवर्तन किए गए और प्रस्तावना में नए शब्द जोड़े गए।
    • \n

    • (D) क्योंकि इसे केवल एक छोटे समूह ने तैयार किया था।
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (C)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: 42वें संशोधन द्वारा संविधान के कई हिस्सों में बड़े बदलाव किए गए। प्रस्तावना में ‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े गए। मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया गया और डीपीएसपी का दायरा बढ़ाया गया। इसकी व्यापकता के कारण इसे ‘लघु संविधान’ कहा जाता है।

    \n\n

  25. 101वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा किस कर व्यवस्था को लागू किया गया?\n
      \n

    • (A) कॉर्पोरेट टैक्स
    • \n

    • (B) वस्तु एवं सेवा कर (GST)
    • \n

    • (C) कृषि आयकर
    • \n

    • (D) सीमा शुल्क
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: 101वें संशोधन अधिनियम (2016) ने भारत में ‘एक राष्ट्र, एक कर’ के सिद्धांत पर GST लागू किया। इसके लिए संविधान में अनुच्छेद 246A जोड़ा गया और GST परिषद (GST Council) का प्रावधान किया गया, जो केंद्र और राज्यों का एक संयुक्त मंच है।

    \n\n

  26. निम्नलिखित में से कौन सा अधिकार ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ (Habeas Corpus) रिट के माध्यम से संरक्षित किया जाता है?\n
      \n

    • (A) किसी सार्वजनिक अधिकारी को अपना कर्तव्य निभाने के लिए मजबूर करना।
    • \n

    • (B) किसी अवैध रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अदालत के सामने पेश करना।
    • \n

    • (C) किसी निचली अदालत के निर्णय की समीक्षा करना।
    • \n

    • (D) किसी व्यक्ति को सार्वजनिक पद धारण करने से रोकना।
    • \n

    \n

    सही उत्तर: (B)

    \n

    विस्तृत व्याख्या: ‘हैबियस कॉर्पस’ का शाब्दिक अर्थ है ‘शरीर को प्रस्तुत करना’। यह रिट तब जारी की जाती है जब किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया हो। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सबसे बड़ा रक्षक है। विकल्प (A) ‘परमादेश’ (Mandamus), (C) ‘उत्प्रेषण’ (Certiorari) और (D) ‘प्रतिषेध’ (Prohibition) से संबंधित है।

    \n\n

\n\n


\n\n

निष्कर्ष: यह अभ्यास सेट भारतीय राजव्यवस्था के उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करता है जहाँ से अक्सर कठिन प्रश्न पूछे जाते हैं। याद रखें, संविधान केवल अनुच्छेदों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह बदलती परिस्थितियों के साथ विकसित होने वाला एक जीवंत दस्तावेज़ है। निरंतर अभ्यास और न्यायिक निर्णयों के विश्लेषण से ही आप इस विषय पर महारत हासिल कर सकते हैं।

\n

सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

[कोर्स और फ्री नोट्स के लिए यहाँ क्लिक करें]

Leave a Comment