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बांग्लादेश विमान त्रासदी: भारत की मानवीय कूटनीति का नया अध्याय?

बांग्लादेश विमान त्रासदी: भारत की मानवीय कूटनीति का नया अध्याय?

चर्चा में क्यों? (Why in News?):

हाल ही में बांग्लादेश में हुई एक दुखद विमान दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। इस भीषण हादसे में कई लोगों की जान चली गई, वहीं बड़ी संख्या में यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें कई गंभीर रूप से जलने वाले भी शामिल थे। इस संकट की घड़ी में, भारत ने अपने पड़ोसी धर्म का पालन करते हुए तुरंत सहायता का हाथ बढ़ाया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि वह घायलों के इलाज के लिए बर्न स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की एक टीम बांग्लादेश भेजेगा। यह त्वरित और संवेदनशील प्रतिक्रिया न केवल भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का एक मजबूत प्रमाण है, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और मानवीय कूटनीति के महत्व को भी रेखांकित करती है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे आपदाएँ राष्ट्रों को एक साथ ला सकती हैं और द्विपक्षीय संबंधों को एक नया आयाम दे सकती हैं।

घटना का विस्तृत विश्लेषण: मानवीय संकट और त्वरित प्रतिक्रिया

विमान दुर्घटनाएँ हमेशा दिल दहला देने वाली होती हैं, और बांग्लादेश में हुई यह त्रासदी कोई अपवाद नहीं थी। यह केवल एक तकनीकी विफलता या मानवीय त्रुटि का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया और दर्जनों लोगों को गंभीर चोटों के साथ संघर्ष करने के लिए छोड़ दिया। इस प्रकार की दुर्घटनाओं में, विशेष रूप से जलने वाले मामलों में, तत्काल और विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता जीवन बचाने के लिए महत्वपूर्ण होती है। बांग्लादेश, अपनी चिकित्सा क्षमताओं के बावजूद, शायद इतनी बड़ी संख्या में गंभीर रूप से जले हुए रोगियों के लिए विशिष्ट विशेषज्ञता और सुविधाओं की कमी महसूस कर रहा था। ऐसे में, भारत की ओर से ‘बर्न स्पेशलिस्ट’ डॉक्टरों की टीम भेजने का प्रस्ताव एक अत्यंत महत्वपूर्ण और समयोचित कदम था।

यह कदम केवल एक सहायता पैकेज से कहीं अधिक है; यह एक पड़ोसी देश के प्रति गहरी सहानुभूति और जिम्मेदारी का प्रदर्शन है। यह दिखाता है कि भारत संकट की घड़ी में अपने पड़ोसियों के साथ खड़ा है, न केवल शब्दों में, बल्कि ठोस कार्यों के साथ। इस प्रतिक्रिया ने न केवल बांग्लादेश के लोगों को सांत्वना दी होगी, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास और सद्भावना को भी मजबूत किया होगा। यह एक मानवीय पुल का निर्माण करता है, जो देशों को भौगोलिक सीमाओं से परे जोड़ता है।

भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति: एक जीवंत प्रतिज्ञा

भारत की विदेश नीति का एक मूलभूत सिद्धांत ‘पड़ोसी प्रथम’ (Neighborhood First) है। यह नीति भारत के निकटतम पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्राथमिकता देने, उनके विकास में सहयोग करने और साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देना है। बांग्लादेश विमान हादसे पर भारत की प्रतिक्रिया इसी नीति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के प्रमुख स्तंभ:

  1. विकास सहयोग: भारत अपने पड़ोसियों को विभिन्न विकास परियोजनाओं में सहायता प्रदान करता है, जैसे कि बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण।
  2. कनेक्टिविटी: सड़क, रेल, जलमार्ग और हवाई मार्गों के माध्यम से बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर, जिससे व्यापार, पर्यटन और लोगों से लोगों के बीच संपर्क बढ़ता है।
  3. सुरक्षा सहयोग: आतंकवाद, सीमा पार अपराध और प्राकृतिक आपदाओं जैसी साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग।
  4. आपदा राहत (HADR): प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित मानवीय सहायता और आपदा राहत।
  5. सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध: साझा सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करना।

इस नीति के तहत, भारत ने अतीत में भी कई बार अपने पड़ोसियों को सहायता प्रदान की है:

केस स्टडी:

  • 2015 नेपाल भूकंप: भारत ने ‘ऑपरेशन मैत्री’ के तहत बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान चलाया।
  • मालदीव जल संकट: 2014 में, भारत ने मालदीव को ताजे पानी की आपूर्ति के लिए ‘ऑपरेशन नीर’ चलाया।
  • श्रीलंका आर्थिक संकट: हाल के वर्षों में, भारत ने श्रीलंका को वित्तीय सहायता, ऋण और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करके महत्वपूर्ण मदद दी है।
  • अफगानिस्तान भूकंप: तालिबान शासन के बावजूद, भारत ने मानवीय सहायता भेजी।

बांग्लादेश विमान त्रासदी पर भारत की प्रतिक्रिया ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को और मजबूत करती है। यह केवल एक सैद्धांतिक अवधारणा नहीं है, बल्कि एक सक्रिय और प्रतिक्रियाशील दृष्टिकोण है जो आवश्यकता पड़ने पर ठोस रूप से प्रकट होता है। यह दर्शाता है कि भारत अपने पड़ोसियों को केवल राजनीतिक या आर्थिक भागीदार के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे साथी के रूप में देखता है जिनके साथ वह संकट साझा कर सकता है और उनसे उबरने में मदद कर सकता है।

मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR): वैश्विक सॉफ्ट पावर का उपकरण

मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief – HADR) किसी भी देश की विदेश नीति का एक अभिन्न अंग बन गया है। यह केवल एक नैतिक दायित्व नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली कूटनीतिक उपकरण भी है जिसे ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) के रूप में जाना जाता है। सॉफ्ट पावर एक देश की संस्कृति, राजनीतिक मूल्यों और विदेश नीति की अपील के माध्यम से दूसरों को आकर्षित करने की क्षमता है, न कि सैन्य शक्ति या आर्थिक दबाव के माध्यम से।

HADR का महत्व:

  • जीवन बचाना: सबसे महत्वपूर्ण, यह लोगों के जीवन और आजीविका को बचाने में मदद करता है।
  • द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना: आपदा की घड़ी में सहायता प्रदान करना देशों के बीच विश्वास और सद्भावना का निर्माण करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा: एक जिम्मेदार और सक्रिय वैश्विक खिलाड़ी के रूप में देश की छवि को बढ़ाता है।
  • क्षेत्रीय स्थिरता: आपदाएँ अक्सर अस्थिरता पैदा करती हैं; HADR इसे कम करने में मदद करता है।
  • साझा चुनौतियों का सामना: जलवायु परिवर्तन और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के युग में, HADR अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है।

भारत की HADR क्षमताएँ काफी मजबूत हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), भारतीय सशस्त्र बल (सेना, नौसेना, वायु सेना), और चिकित्सा दल सहित विभिन्न एजेंसियां ​​आपदा प्रतिक्रिया में विशेषज्ञता रखती हैं। भारत ने न केवल अपने पड़ोस में, बल्कि सुदूर अफ्रीकी देशों, यमन, मोज़ाम्बिक और तुर्की जैसे स्थानों पर भी HADR मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

बांग्लादेश को बर्न स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम भेजना भारत की विशिष्ट चिकित्सा HADR क्षमता का प्रदर्शन है। यह दिखाता है कि भारत केवल सामान्य राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए विशेषज्ञ सहायता भी प्रदान कर सकता है। यह चिकित्सा कूटनीति का एक रूप है जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देता है और भारत को एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में स्थापित करता है।

भारत-बांग्लादेश संबंध: साझेदारी का एक नया आयाम

भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से गहरे हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम में भारत की भूमिका ने इन संबंधों की नींव रखी, जो ‘रक्त संबंध’ के रूप में जाने जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, ये संबंध लगातार मजबूत हुए हैं, और बांग्लादेश विमान हादसे पर भारत की प्रतिक्रिया ने इस साझेदारी में एक और सकारात्मक अध्याय जोड़ा है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:

  • व्यापार और अर्थव्यवस्था: भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है।
  • ऊर्जा: भारत बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति करता है और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग कर रहा है।
  • कनेक्टिविटी: रेल, सड़क और जलमार्ग कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जैसे अखौरा-अगरतला रेल लिंक और अंतर्देशीय जल पारगमन प्रोटोकॉल।
  • सीमा प्रबंधन: सीमा पार अपराधों से निपटने और सीमा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: साझा विरासत को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोगों से लोगों के बीच संपर्क।
  • रक्षा सहयोग: संयुक्त सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण।
  • क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच: BIMSTEC, SAARC और IORA जैसे मंचों पर साझा हितों के लिए सहयोग।

हालांकि, संबंधों में कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जैसे तीस्ता नदी जल-बंटवारा विवाद, सीमा पार अवैध प्रवासन और रोहिंग्या शरणार्थी संकट। इन चुनौतियों के बावजूद, दोनों देशों ने साझा हितों और सहयोग के महत्व को स्वीकार किया है।

विमान त्रासदी के दौरान भारत की त्वरित और संवेदनशील प्रतिक्रिया ने संबंधों में विश्वास के स्तर को बढ़ाया है। यह दर्शाता है कि मानवीय संकट के समय राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार किया जा सकता है और साझा मानवता को प्राथमिकता दी जा सकती है। यह भविष्य में अधिक घनिष्ठ सहयोग के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है। यह संकट कूटनीति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ एक दुखद घटना भी देशों को करीब ला सकती है और उन्हें एक साथ काम करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

नैतिक आयाम और अंतर्राष्ट्रीय कानून: मानवीयता की सर्वोपरिता

जब आपदाएँ आती हैं, तो वे भौगोलिक या राजनीतिक सीमाओं को नहीं पहचानतीं। ऐसे समय में, मानवीय सहायता प्रदान करने का कार्य केवल एक रणनीतिक निर्णय नहीं होता, बल्कि इसका एक गहरा नैतिक और कानूनी आधार भी होता है। अंतर्राष्ट्रीय कानून मानवीय सहायता के सिद्धांतों को रेखांकित करता है, जबकि नैतिकता इस सहायता के पीछे की प्रेरणा होती है।

अंतर्राष्ट्रीय मानवीय सहायता के सिद्धांत:

  • मानवीयता (Humanity): मानवीय पीड़ा को कम करना और उसकी रोकथाम करना, जहाँ भी वह पाई जाए। यह जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करने और मानव का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए है।
  • निष्पक्षता (Impartiality): सहायता केवल आवश्यकता के आधार पर प्रदान की जानी चाहिए, बिना किसी भेदभाव के राष्ट्रीयता, नस्ल, धार्मिक विश्वास, वर्ग या राजनीतिक राय के आधार पर।
  • तटस्थता (Neutrality): मानवीय अभिनेता युद्धों या अन्य विवादों में किसी भी पक्ष का पक्ष नहीं लेंगे, न ही राजनीतिक, नस्लीय, धार्मिक या वैचारिक प्रकृति के विवादों में किसी भी समय भाग लेंगे।
  • स्वतंत्रता (Independence): मानवीय सहायता राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य या अन्य उद्देश्यों से स्वतंत्र होनी चाहिए।

भारत की प्रतिक्रिया इन सिद्धांतों के अनुरूप है। घायलों को सहायता भेजने का निर्णय पूरी तरह से मानवीय आवश्यकताओं पर आधारित था, न कि किसी राजनीतिक लाभ की अपेक्षा पर। यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में भारत की भूमिका को पुष्ट करता है जो वैश्विक भलाई के लिए योगदान करने को तैयार है।

वैश्विक आपदा प्रतिक्रिया तंत्र:

संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में कई अंतर्राष्ट्रीय संगठन और तंत्र हैं जो आपदा राहत में समन्वय स्थापित करते हैं। इनमें संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों का समन्वय कार्यालय (UNOCHA), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य शामिल हैं। भारत की प्रतिक्रिया इन वैश्विक प्रयासों को पूरक करती है और क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग के महत्व पर जोर देती है। यह एक बहु-स्तरीय दृष्टिकोण का हिस्सा है, जहां द्विपक्षीय सहायता, क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक समन्वय सभी एक बड़े मानवीय जाल का हिस्सा हैं।

चुनौतियाँ और आगे की राह: HADR को मजबूत करना

मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) के मिशन अक्सर कई चुनौतियों से घिरे होते हैं। भारत ने बांग्लादेश को सहायता प्रदान करके अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है, लेकिन इस क्षेत्र में अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

प्रमुख चुनौतियाँ:

  • लॉजिस्टिक्स और समन्वय: आपात स्थिति में तेजी से और प्रभावी ढंग से सहायता पहुँचाना एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती हो सकती है, जिसमें परिवहन, भंडारण और वितरण शामिल है। विभिन्न देशों और एजेंसियों के बीच समन्वय भी आवश्यक है।
  • वित्तीय संसाधन: HADR मिशन महंगे होते हैं और इसके लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
  • स्थानीय क्षमता का अभाव: कई विकासशील देशों में आपदा से निपटने और विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए पर्याप्त स्थानीय क्षमता नहीं होती है।
  • राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी बाधाएँ: कुछ क्षेत्रों में संघर्ष या राजनीतिक अस्थिरता मानवीय सहायता पहुँचाने में बाधा उत्पन्न कर सकती है।
  • विशेषज्ञता की कमी: विशिष्ट प्रकार की आपदाओं (जैसे सामूहिक रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु दुर्घटनाएँ या गंभीर जलन) के लिए विशेष विशेषज्ञता और उपकरण की आवश्यकता होती है जो आसानी से उपलब्ध नहीं होते।

आगे की राह:

  1. क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना: SAARC और BIMSTEC जैसे क्षेत्रीय मंचों को HADR के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित करना चाहिए। इसमें संयुक्त अभ्यास, सूचना साझाकरण और संसाधनों का पूल बनाना शामिल है।
  2. क्षमता निर्माण: भारत को अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर उनकी आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करनी चाहिए। इसमें प्रशिक्षण, उपकरण प्रदान करना और विशेषज्ञ विनिमय कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं।
  3. प्रौद्योगिकी का उपयोग: ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग HADR अभियानों की दक्षता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
  4. अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन: अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून और प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना ताकि सहायता प्रभावी ढंग से और निष्पक्ष रूप से पहुँच सके।
  5. निजी क्षेत्र की भागीदारी: आपदा राहत प्रयासों में निजी क्षेत्र की कंपनियों और गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
  6. दीर्घकालिक पुनर्वास पर जोर: केवल तात्कालिक राहत पर ध्यान केंद्रित न करके, आपदा प्रभावित क्षेत्रों के दीर्घकालिक पुनर्वास और लचीलेपन के निर्माण पर भी जोर देना चाहिए।

भारत की बांग्लादेश को प्रदान की गई सहायता इस बात का एक मजबूत संदेश है कि भारत न केवल अपने पड़ोसियों की परवाह करता है, बल्कि उनके साथ एक विश्वसनीय और सक्षम भागीदार के रूप में खड़ा है। यह केवल एक चिकित्सा मिशन नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संदेश है जो क्षेत्रीय एकजुटता और मानवीयता के महत्व को उजागर करता है।

निष्कर्ष: मानवीयता और कूटनीति का संगम

बांग्लादेश में हुई विमान त्रासदी और उस पर भारत की त्वरित प्रतिक्रिया मानवीय करुणा और सक्षम कूटनीति का एक उत्कृष्ट संगम प्रस्तुत करती है। यह घटना दर्शाती है कि राष्ट्रीय स्वार्थ से परे, एक राष्ट्र के रूप में भारत मानवीय संकटों के प्रति कितनी संवेदनशील प्रतिक्रिया देता है और कैसे वह अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक जीवंत यथार्थ मानता है। बर्न स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम भेजना केवल चिकित्सा सहायता नहीं है, बल्कि विश्वास, सद्भावना और सहयोग का एक शक्तिशाली प्रतीक है।

यह पहल न केवल भारत-बांग्लादेश संबंधों को और मजबूत करती है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक उदाहरण स्थापित करती है कि कैसे देश आपदाओं के दौरान एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं। यह भारत की बढ़ती सॉफ्ट पावर और एक जिम्मेदार वैश्विक नागरिक के रूप में उसकी भूमिका को रेखांकित करता है। भविष्य में, जैसे-जैसे दुनिया को अधिक जटिल और अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वैसे-वैसे क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय HADR सहयोग का महत्व और बढ़ेगा। भारत की यह प्रतिक्रिया उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो एक अधिक मानवीय, सहयोगी और लचीले विश्व के निर्माण की दिशा में आशा की किरण जगाती है। यह दिखाता है कि सबसे गंभीर चुनौतियों के सामने भी, मानवता की भावना और साझा जिम्मेदारी की प्रतिबद्धता हमें एकजुट कर सकती है।

UPSC परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Practice Questions for UPSC Exam)

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) – 10 MCQs

(निम्नलिखित प्रश्नों पर विचार करें और सही विकल्प चुनें। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर और विस्तृत व्याख्या नीचे दी गई है।)

प्रश्न 1: भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह नीति केवल आर्थिक सहयोग और व्यापार संबंधों पर केंद्रित है।
  2. इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है।
  3. भारत ने इस नीति के तहत अतीत में नेपाल भूकंप और मालदीव जल संकट में सहायता प्रदान की है।

उपरोक्त कथनों में से कौन से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

प्रश्न 2: मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) के सिद्धांतों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. निष्पक्षता का अर्थ है कि सहायता केवल उन्हीं को दी जानी चाहिए जो सहायताकर्ता देश के राजनीतिक विचारों का समर्थन करते हैं।
  2. तटस्थता का अर्थ है कि मानवीय अभिनेता सशस्त्र संघर्षों में किसी भी पक्ष का पक्ष नहीं लेंगे।
  3. मानवीयता का अर्थ केवल जीवन बचाना है, न कि मानव सम्मान सुनिश्चित करना।

उपरोक्त कथनों में से कौन से सही हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

प्रश्न 3: भारत और बांग्लादेश के संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. दोनों देशों के बीच 1971 के मुक्ति संग्राम से ‘रक्त संबंध’ स्थापित हुए।
  2. तीस्ता नदी जल-बंटवारा दोनों देशों के बीच सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र रहा है जिसमें कोई विवाद नहीं है।
  3. भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है।

उपरोक्त कथनों में से कौन से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

प्रश्न 4: सॉफ्ट पावर के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अच्छा वर्णन करता है?

(a) यह किसी देश की सैन्य शक्ति और उसकी तैनाती की क्षमता है।
(b) यह किसी देश की संस्कृति, राजनीतिक मूल्यों और विदेश नीति की अपील के माध्यम से दूसरों को आकर्षित करने की क्षमता है।
(c) यह किसी देश की आर्थिक प्रतिबंध लगाने या आर्थिक सहायता रोकने की क्षमता है।
(d) यह किसी देश की किसी अन्य देश के आंतरिक मामलों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करने की क्षमता है।

प्रश्न 5: राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह भारत में आपदा प्रबंधन के लिए एक विशेष बल है।
  2. यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  3. यह केवल भारत के भीतर ही आपदा राहत अभियानों में भाग लेता है।

उपरोक्त कथनों में से कौन से सही हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

प्रश्न 6: ‘चिकित्सा कूटनीति’ (Medical Diplomacy) शब्द का सबसे अच्छा वर्णन क्या करता है?

(a) किसी देश द्वारा अन्य देशों को सैन्य चिकित्सा सहायता प्रदान करना।
(b) स्वास्थ्य मुद्दों को विदेश नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने के एक साधन के रूप में उपयोग करना।
(c) अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों के बीच द्विपक्षीय संधियों पर बातचीत करना।
(d) केवल सीमा पार बीमारियों के प्रसार को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित करना।

प्रश्न 7: निम्नलिखित में से कौन सा संगठन अंतर्राष्ट्रीय मानवीय मामलों के समन्वय के लिए जिम्मेदार है?

(a) विश्व व्यापार संगठन (WTO)
(b) संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों का समन्वय कार्यालय (UNOCHA)
(c) अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)
(d) संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO)

प्रश्न 8: कनेक्टिविटी परियोजनाओं के संदर्भ में, भारत और बांग्लादेश के बीच निम्नलिखित में से कौन सी एक महत्वपूर्ण परियोजना है?

(a) तीस्ता नदी पर एक नया जलविद्युत बांध बनाना।
(b) अखौरा-अगरतला रेल लिंक।
(c) सुंदरबन में एक नया बंदरगाह विकसित करना।
(d) दोनों देशों के बीच एक नया सैन्य अड्डा स्थापित करना।

प्रश्न 9: प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारत द्वारा किए गए HADR अभियानों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित है?

(a) ऑपरेशन मैत्री – श्रीलंका आर्थिक संकट
(b) ऑपरेशन नीर – नेपाल भूकंप
(c) ऑपरेशन राहत – यमन निकासी
(d) ऑपरेशन गंगा – मालदीव जल संकट

प्रश्न 10: भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

(a) अपने पड़ोसी देशों पर सैन्य प्रभुत्व स्थापित करना।
(b) अपने पड़ोसियों के आंतरिक राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करना।
(c) अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्राथमिकता देना और साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करना।
(d) केवल उन पड़ोसियों के साथ व्यापार संबंध बढ़ाना जो भारत की आर्थिक नीतियों का पालन करते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा – उत्तर और व्याख्या

1. उत्तर: (b) केवल 2 और 3
व्याख्या: ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास सहयोग, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, आपदा राहत और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सहित कई आयामों को शामिल करती है। इसलिए, कथन 1 गलत है। कथन 2 और 3 सही हैं, क्योंकि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है, और भारत ने अतीत में नेपाल भूकंप और मालदीव जल संकट जैसी आपदाओं में सहायता प्रदान की है।

2. उत्तर: (b) केवल 2
व्याख्या: निष्पक्षता का अर्थ है कि सहायता केवल आवश्यकता के आधार पर दी जानी चाहिए, बिना किसी भेदभाव के राष्ट्रीयता, नस्ल, धर्म, वर्ग या राजनीतिक राय के आधार पर। इसलिए, कथन 1 गलत है। तटस्थता का अर्थ है कि मानवीय अभिनेता युद्धों या अन्य विवादों में किसी भी पक्ष का पक्ष नहीं लेंगे। इसलिए, कथन 2 सही है। मानवीयता का अर्थ मानवीय पीड़ा को कम करना और उसकी रोकथाम करना है, जिसमें जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करना और मानव का सम्मान सुनिश्चित करना दोनों शामिल हैं। इसलिए, कथन 3 गलत है।

3. उत्तर: (b) केवल 1 और 3
व्याख्या: भारत और बांग्लादेश के संबंध 1971 के मुक्ति संग्राम से ‘रक्त संबंध’ के रूप में स्थापित हुए। इसलिए, कथन 1 सही है। तीस्ता नदी जल-बंटवारा दोनों देशों के बीच एक प्रमुख विवाद का क्षेत्र रहा है, न कि सहयोग का क्षेत्र जिसमें कोई विवाद नहीं है। इसलिए, कथन 2 गलत है। भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। इसलिए, कथन 3 सही है।

4. उत्तर: (b) यह किसी देश की संस्कृति, राजनीतिक मूल्यों और विदेश नीति की अपील के माध्यम से दूसरों को आकर्षित करने की क्षमता है।
व्याख्या: सॉफ्ट पावर सैन्य शक्ति या आर्थिक दबाव के बजाय आकर्षक शक्ति पर आधारित है। यह संस्कृति, मूल्यों और नीतियों के माध्यम से दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता है।

5. उत्तर: (b) केवल 1 और 2
व्याख्या: NDRF भारत में आपदा प्रबंधन के लिए एक विशेष बल है और यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसलिए, कथन 1 और 2 सही हैं। NDRF ने न केवल भारत के भीतर बल्कि विदेशों में भी कई आपदा राहत अभियानों में भाग लिया है, जैसे नेपाल भूकंप, जापान सुनामी, तुर्की भूकंप। इसलिए, कथन 3 गलत है।

6. उत्तर: (b) स्वास्थ्य मुद्दों को विदेश नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने के एक साधन के रूप में उपयोग करना।
व्याख्या: चिकित्सा कूटनीति का अर्थ है स्वास्थ्य को कूटनीति के एक उपकरण के रूप में उपयोग करना, जिसमें चिकित्सा सहायता प्रदान करना, चिकित्सा प्रशिक्षण साझा करना या वैश्विक स्वास्थ्य पहलों में सहयोग करना शामिल है, जिससे द्विपक्षीय संबंध मजबूत होते हैं और सॉफ्ट पावर बढ़ती है।

7. उत्तर: (b) संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों का समन्वय कार्यालय (UNOCHA)
व्याख्या: UNOCHA संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख इकाई है जो अंतर्राष्ट्रीय मानवीय सहायता के समन्वय के लिए जिम्मेदार है, विशेष रूप से जटिल आपात स्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं में।

8. उत्तर: (b) अखौरा-अगरतला रेल लिंक।
व्याख्या: अखौरा-अगरतला रेल लिंक भारत और बांग्लादेश के बीच एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना है, जिसका उद्देश्य सीमा पार व्यापार और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना है। अन्य विकल्प या तो विवादित हैं (तीस्ता बांध, सैन्य अड्डा) या वर्तमान संदर्भ में कम प्रासंगिक हैं (सुंदरबन बंदरगाह)।

9. उत्तर: (c) ऑपरेशन राहत – यमन निकासी
व्याख्या:
* ऑपरेशन मैत्री – नेपाल भूकंप (2015)
* ऑपरेशन नीर – मालदीव जल संकट (2014)
* ऑपरेशन राहत – यमन से भारतीय नागरिकों और अन्य विदेशियों की निकासी (2015)
* ऑपरेशन गंगा – यूक्रेन से भारतीय नागरिकों की निकासी (2022)

10. उत्तर: (c) अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्राथमिकता देना और साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करना।
व्याख्या: ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का प्राथमिक उद्देश्य अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ संबंधों को गहरा करना, आपसी विश्वास बनाना और आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है। यह प्रभुत्व, हस्तक्षेप या केवल सशर्त व्यापार संबंधों पर केंद्रित नहीं है।

मुख्य परीक्षा (Mains)

(निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 150-250 शब्दों में दें।)

प्रश्न 1: भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को उसकी विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ क्यों माना जाता है? हाल ही में बांग्लादेश को प्रदान की गई मानवीय सहायता के आलोक में इसकी प्रासंगिकता का विश्लेषण करें।

प्रश्न 2: मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों को सॉफ्ट पावर के एक प्रभावी उपकरण के रूप में कैसे देखा जा सकता है? भारत के संदर्भ में उदाहरणों सहित विस्तृत व्याख्या करें।

प्रश्न 3: भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में, आपदा राहत में सहयोग दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को कैसे मजबूत करता है? संबंधों में मौजूदा चुनौतियों के बावजूद इस सहयोग के महत्व पर प्रकाश डालें।

प्रश्न 4: भविष्य में HADR (मानवीय सहायता और आपदा राहत) अभियानों को अधिक प्रभावी और कुशल बनाने के लिए भारत और उसके क्षेत्रीय साझेदार कौन से कदम उठा सकते हैं? चुनौतियों का उल्लेख करते हुए आगे की राह सुझाएँ।

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