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एक युग का अंत: मिग-21 की सेवानिवृत्ति और भारतीय वायुसेना का आधुनिकीकरण

एक युग का अंत: मिग-21 की सेवानिवृत्ति और भारतीय वायुसेना का आधुनिकीकरण

चर्चा में क्यों? (Why in News?):** 19 सितंबर को भारतीय वायुसेना का एक और मिग-21 फाइटर जेट स्क्वाड्रन सेवानिवृत्त होने जा रहा है। यह घटना भारतीय सैन्य उड्डयन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन करती है। 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद से, मिग-21 ने लगभग छह दशकों तक देश की हवाई सीमाओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तीन बड़े युद्धों में अपनी क्षमता साबित करने वाले इस लड़ाकू विमान के साथ 400 से अधिक दुर्घटनाएँ भी जुड़ी हुई हैं, जिसके कारण इसे ‘फ्लाइंग कॉफिन’ जैसे उपनाम भी मिले। इसकी सेवानिवृत्ति न केवल एक वफादार साथी की विदाई है, बल्कि भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।

मिग-21: एक परिचय और इसका ऐतिहासिक संदर्भ

मिग-21 (MiG-21), जिसे NATO द्वारा ‘फिशबेड’ (Fishbed) नाम दिया गया, सोवियत संघ द्वारा निर्मित एक सुपरसोनिक जेट फाइटर और इंटरसेप्टर विमान है। यह दुनिया के सबसे अधिक उत्पादित सुपरसोनिक जेट विमानों में से एक है, जिसकी संख्या 11,000 से अधिक है। अपने समय में यह एक अत्याधुनिक विमान था, जो अपनी गति, फुर्ती और बहुमुखी प्रतिभा के लिए जाना जाता था।

मिग-21 को अक्सर सैन्य उड्डयन का ‘AK-47’ कहा जाता है। जिस तरह AK-47 राइफल सस्ती, भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध थी, उसी तरह मिग-21 ने भी कई देशों की वायुसेनाओं को एक किफायती और प्रभावी लड़ाकू मंच प्रदान किया। यह इसकी सादगी, मजबूती और अपग्रेड क्षमता का प्रमाण है कि यह दशकों तक सेवा में रहा।

भारतीय वायुसेना में मिग-21 का स्वर्णिम इतिहास

भारत ने 1960 के दशक की शुरुआत में सोवियत संघ के साथ मिग-21 विमानों के अधिग्रहण और लाइसेंस-निर्मित उत्पादन के लिए एक समझौता किया था। यह समझौता भारत के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि उस समय पश्चिमी देश भारत को उन्नत विमान प्रौद्योगिकी देने में हिचकिचा रहे थे। मिग-21 ने जल्द ही भारतीय वायुसेना की रीढ़ की हड्डी बन गया।

  • शामिल होना (1963): पहला मिग-21 विमान 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ। यह एक ऐसा समय था जब भारत को अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता थी, विशेषकर चीन-भारत युद्ध (1962) के बाद।
  • 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध: हालांकि इस युद्ध में मिग-21 ने सीमित भूमिका निभाई, लेकिन इसकी उपस्थिति ने भारतीय हवाई शक्ति को एक नई विश्वसनीयता प्रदान की।
  • 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध: यह युद्ध मिग-21 के लिए एक निर्णायक क्षण था। इसने पाकिस्तानी वायुसेना के सेबर जेट (Sabre Jets) और स्टारफाइटर (Starfighters) जैसे विमानों के खिलाफ प्रभावी ढंग से प्रदर्शन किया। इस युद्ध में मिग-21 ने महत्वपूर्ण हवाई श्रेष्ठता स्थापित करने में मदद की, खासकर बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान।
  • कारगिल युद्ध (1999): “ऑपरेशन सफेद सागर” के दौरान मिग-21 का इस्तेमाल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने के लिए किया गया, जिसमें इसकी बहुमुखी प्रतिभा साबित हुई।
  • बालाकोट एयरस्ट्राइक (2019): हाल ही में 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद, भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने अपने मिग-21 बाइसन (Bison) विमान से पाकिस्तानी वायुसेना के F-16 फाइटर जेट को मार गिराया था। यह घटना मिग-21 की क्षमताओं का एक अभूतपूर्व प्रदर्शन थी, जिसने दुनिया को चौंका दिया।

मिग-21 ने अपनी सेवा के दौरान कई अपग्रेड देखे हैं, जैसे कि मिग-21 बाइसन संस्करण, जिसमें आधुनिक एवियोनिक्स, रडार और हथियार प्रणालियाँ लगाई गईं। इन अपग्रेड्स ने विमान की युद्धक क्षमता को बनाए रखने में मदद की, लेकिन इसकी मूल डिजाइन की सीमाएँ अभी भी मौजूद थीं।

‘फ्लाइंग कॉफिन’ की सच्चाई और दुर्घटनाओं का आंकड़ा

मिग-21 को ‘फ्लाइंग कॉफिन’ (उड़ता ताबूत) या ‘विधवा निर्माता’ (Widow Maker) जैसे उपनामों से भी जाना जाता है। यह नाम इसकी उच्च दुर्घटना दर के कारण पड़ा है। भारतीय वायुसेना के आंकड़ों के अनुसार, 1963 से अब तक मिग-21 से जुड़ी 400 से अधिक दुर्घटनाएँ हुई हैं, जिनमें 200 से अधिक पायलटों ने अपनी जान गंवाई है।

दुर्घटनाओं के मुख्य कारण:

  • पुरानी तकनीक: मिग-21 एक पुरानी पीढ़ी का विमान है। इसकी मूल डिजाइन लगभग 60 साल पुरानी है। समय के साथ, सामग्री की थकान (material fatigue) और अप्रचलित प्रणालियाँ दुर्घटनाओं का कारण बनीं।
  • रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स: सोवियत संघ के विघटन के बाद स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और गुणवत्ता एक बड़ी चुनौती बन गई थी। विमानों को सेवा में बनाए रखने के लिए अक्सर जुगाड़ या पुराने पुर्जों का इस्तेमाल करना पड़ता था।
  • पायलट त्रुटि: कुछ दुर्घटनाओं में पायलट त्रुटि को भी एक कारक माना गया है, हालांकि यह अक्सर विमान की अप्रत्याशित प्रतिक्रिया या तकनीकी खराबी से जुड़ा होता है। मिग-21 को ‘पायलट-डिमांडिंग’ विमान माना जाता था, यानी इसे उड़ाने के लिए उच्च कौशल की आवश्यकता होती थी।
  • डिजाइन की सीमाएँ: मिग-21 का डिजाइन मूल रूप से एक इंटरसेप्टर के रूप में किया गया था, न कि बहु-भूमिका वाले लड़ाकू विमान के रूप में। इसकी छोटी पंखों वाली डिजाइन उच्च गति पर बेहतरीन प्रदर्शन करती थी, लेकिन कम गति पर यह अस्थिर हो सकती थी।
  • उच्च उड़ान दर: चूंकि मिग-21 भारतीय वायुसेना की रीढ़ था, इसलिए इसकी उड़ान दर बहुत अधिक थी। अधिक उड़ानें, अधिक घंटे और अधिक जोखिम।

इन दुर्घटनाओं ने भारतीय वायुसेना की सुरक्षा प्रथाओं और विमान अधिग्रहण नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि वायुसेना ने हमेशा पायलटों को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण देने और विमानों का कठोर रखरखाव करने का दावा किया है, फिर भी इन पुराने विमानों को इतने लंबे समय तक सेवा में बनाए रखना एक मजबूरी रही है।

मिग-21 की सेवानिवृत्ति: आवश्यकता और चुनौतियाँ

मिग-21 की सेवानिवृत्ति लंबे समय से प्रतीक्षित थी। इसकी आवश्यकता कई कारणों से थी:

  • पायलट सुरक्षा: जैसा कि दुर्घटना दर से स्पष्ट है, मिग-21 पायलटों के लिए एक उच्च जोखिम वाला विमान बन गया था। नए, अधिक सुरक्षित विमानों की आवश्यकता सर्वोपरि थी।
  • तकनीकी अप्रचलन: आधुनिक वायु युद्ध में मिग-21 की सीमित क्षमताएँ स्पष्ट थीं। इसकी रडार, एवियोनिक्स, हथियार प्रणालियाँ और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमताएँ समकालीन खतरों का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं थीं।
  • वायुसेना का आधुनिकीकरण: भारतीय वायुसेना को 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है। मिग-21 का जाना इस आधुनिकीकरण प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा है।

सेवानिवृत्ति से जुड़ी चुनौतियाँ:

  • क्षमता का अंतर (Capacity Gap): मिग-21 के सेवानिवृत्त होने से भारतीय वायुसेना में फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या में और कमी आएगी। वायुसेना को अपनी स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन शक्ति के मुकाबले वर्तमान में लगभग 30-31 स्क्वाड्रन ही उपलब्ध हैं। मिग-21 के हटने से यह अंतर और बढ़ेगा।
  • प्रतिस्थापन की गति: नए विमानों, विशेष रूप से तेजस (Tejas) और राफेल (Rafale) का उत्पादन और अधिग्रहण धीमी गति से हो रहा है। इस अंतर को तेजी से भरना एक बड़ी चुनौती है।
  • लागत: नए लड़ाकू विमानों का अधिग्रहण और उत्पादन अत्यधिक महंगा है, जिससे रक्षा बजट पर भारी दबाव पड़ता है।
  • प्रशिक्षण: नए विमानों के लिए पायलटों और रखरखाव कर्मियों को प्रशिक्षित करने में समय लगता है।

भारतीय वायुसेना का आधुनिकीकरण और भविष्य की योजनाएँ

मिग-21 की विदाई भारतीय वायुसेना के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अगली पीढ़ी की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक मजबूत और सक्षम बल का निर्माण करना है।

मुख्य स्तंभ:

  1. स्वदेशीकरण पर जोर: LCA तेजस और AMCA
    • तेजस (LCA Tejas): यह भारत का स्वदेशी रूप से विकसित हल्का लड़ाकू विमान है। यह मिग-21 के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिस्थापन है। तेजस Mk-1A संस्करण में आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और रखरखाव में आसानी जैसी सुविधाएँ हैं। भविष्य में तेजस Mk-2 और उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) जैसे परियोजनाएं स्वदेशी क्षमताओं को और बढ़ाएंगी।
    • AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft): यह भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान कार्यक्रम है। यह भारतीय वायुसेना को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  2. विदेशी अधिग्रहण: राफेल और सुखोई
    • राफेल (Rafale): फ्रांस से अधिग्रहित राफेल लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता को नाटकीय रूप से बढ़ा रहे हैं। ये बहु-भूमिका वाले लड़ाकू विमान हैं जिनमें उन्नत सेंसर, हथियार और नेटवर्किंग क्षमताएँ हैं।
    • सुखोई Su-30MKI: यह भारतीय वायुसेना की वर्तमान में सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमानों में से एक है। इसका भी उन्नयन किया जा रहा है ताकि यह भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सके।
  3. हेलिकॉप्टर बेड़े का आधुनिकीकरण: हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर (LCH) प्रचंड, अपाचे (Apache) और चिनूक (Chinook) जैसे आधुनिक हेलिकॉप्टरों का अधिग्रहण।
  4. परिवहन बेड़े का विस्तार: C-17 ग्लोबमास्टर, C-130J सुपर हरक्यूलिस और एयरबस C295 जैसे विमानों के साथ।
  5. नेटवर्क-केंद्रित युद्ध और उन्नत तकनीक: हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली (AWACS), एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग, ड्रोन और मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) का एकीकरण।
  6. पायलट प्रशिक्षण और सिमुलेशन: आधुनिक सिमुलेटर और उन्नत प्रशिक्षण विधियों का उपयोग कर पायलटों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना।

भारतीय वायुसेना का आधुनिकीकरण एक शतरंज के खेल के समान है। प्रत्येक चाल, चाहे वह एक पुराने मोहरे (मिग-21) को हटाना हो या एक नया मोहरा (राफेल/तेजस) जोड़ना हो, को सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध किया जाना चाहिए ताकि प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत हो सके। यह केवल संख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि क्षमताओं, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक बढ़त का खेल है।

मिग-21 की विरासत: सबक और आगे की राह

मिग-21 की सेवानिवृत्ति सिर्फ एक विमान के सेवा से हटने की खबर नहीं है, बल्कि यह भारतीय वायुसेना के विकास, उसकी चुनौतियों और उसके भविष्य के पथ का प्रतीक है। इसकी विरासत से कई महत्वपूर्ण सबक सीखने को मिलते हैं:

  • आत्मनिर्भरता की आवश्यकता: मिग-21 पर हमारी लंबे समय तक निर्भरता ने हमें विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर बना दिया। यह स्वदेशी रक्षा उत्पादन और अनुसंधान एवं विकास में निवेश की तात्कालिकता को दर्शाता है। तेजस और AMCA जैसी परियोजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
  • नियमित आधुनिकीकरण: सैन्य परिसंपत्तियों को नियमित रूप से अपग्रेड करना और समय पर अप्रचलित प्रणालियों को बदलना महत्वपूर्ण है ताकि क्षमता का अंतर न बढ़े और पायलटों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
  • तकनीकी क्षमता में निवेश: भविष्य के युद्ध हवाई वर्चस्व पर बहुत अधिक निर्भर करेंगे। भारत को एआई (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में निवेश करना चाहिए ताकि वह अपने विरोधियों से आगे रह सके।
  • मानव पूंजी का मूल्य: पायलटों का उत्कृष्ट प्रशिक्षण और उनका अनुभव अमूल्य है। दुर्घटनाओं से बचने और युद्धक क्षमता बनाए रखने के लिए सर्वश्रेष्ठ संभव उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान करना आवश्यक है।

आगे की राह (Way Forward):

  1. तेजस उत्पादन में तेजी: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तेजस के उत्पादन में तेजी लानी होगी ताकि सेवानिवृत्त हो रहे विमानों की जगह जल्द से जल्द भरी जा सके।
  2. AMCA का विकास: पांचवीं पीढ़ी के AMCA कार्यक्रम को समयबद्ध तरीके से पूरा करना भारत की सामरिक क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण है।
  3. भविष्य की प्रौद्योगिकियों में निवेश: मानवरहित लड़ाकू विमानों (UCAVs), झुंड ड्रोन (swarm drones) और हाइपरसोनिक हथियारों जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना।
  4. रक्षा बजट में वृद्धि: आधुनिकीकरण की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का आवंटन।
  5. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना ताकि नवाचार और दक्षता बढ़ाई जा सके।

निष्कर्ष

मिग-21 भारतीय वायुसेना के इतिहास का एक अविस्मरणीय हिस्सा रहेगा। इसने अनगिनत पायलटों को प्रशिक्षित किया, महत्वपूर्ण युद्धों में जीत दिलाई और दशकों तक भारत के आसमान की रखवाली की। इसकी सेवानिवृत्ति एक भावनात्मक क्षण है, लेकिन यह भारतीय वायुसेना के लिए एक नए युग की शुरुआत का भी प्रतीक है। यह आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण और एक ऐसी वायुसेना के निर्माण की ओर एक कदम है जो 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार होगी। ‘फ्लाइंग कॉफिन’ से ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आसमान तक का सफर अभी जारी है, और यह सफर हमें मजबूत, सुरक्षित और सामरिक रूप से स्वतंत्र बनाएगा।

UPSC परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Practice Questions for UPSC Exam)

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) – 10 MCQs

(कृपया नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें और फिर व्याख्या पढ़ें)

  1. मिग-21 फाइटर जेट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
    1. इसे सोवियत संघ द्वारा निर्मित किया गया था।
    2. भारतीय वायुसेना में इसे 1963 में शामिल किया गया था।
    3. इसने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
    (a) केवल एक
    (b) केवल दो
    (c) सभी तीन
    (d) कोई नहीं

    उत्तर: (c)
    व्याख्या: तीनों कथन सही हैं। मिग-21 का निर्माण सोवियत संघ ने किया था, इसे भारतीय वायुसेना में 1963 में शामिल किया गया था, और इसने 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण हवाई श्रेष्ठता स्थापित करने में मदद की थी।

  2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से फाइटर जेट मिग-21 के मुख्य प्रतिस्थापन के रूप में भारतीय वायुसेना में शामिल किए जा रहे हैं?
    1. राफेल
    2. तेजस
    3. सुखोई Su-30MKI

    नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:
    (a) केवल 1
    (b) केवल 1 और 2
    (c) केवल 2 और 3
    (d) 1, 2 और 3

    उत्तर: (b)
    व्याख्या: मिग-21 के मुख्य प्रतिस्थापन के रूप में स्वदेशी LCA तेजस और फ्रांस से अधिग्रहित राफेल शामिल किए जा रहे हैं। सुखोई Su-30MKI पहले से ही वायुसेना का हिस्सा है, हालांकि इसका भी आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

  3. भारतीय वायुसेना में ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ का संबंध किस युद्ध/संघर्ष से है?
    (a) 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध
    (b) 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध
    (c) कारगिल युद्ध
    (d) बालाकोट एयरस्ट्राइक

    उत्तर: (c)
    व्याख्या: ऑपरेशन सफेद सागर कारगिल युद्ध (1999) के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा चलाया गया अभियान था, जिसमें मिग-21 जैसे विमानों का भी उपयोग किया गया था।

  4. मिग-21 फाइटर जेट के लिए ‘फिशबेड’ नामकरण किसने किया था?
    (a) संयुक्त राज्य अमेरिका
    (b) NATO
    (c) संयुक्त राष्ट्र
    (d) रूसी संघ

    उत्तर: (b)
    व्याख्या: ‘फिशबेड’ NATO (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) द्वारा सोवियत और चीनी विमानों को दिए गए रिपोर्टिंग नामों में से एक है।

  5. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
    1. LCA तेजस भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है।
    2. AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के लिए एक हल्का लड़ाकू विमान विकसित करना है।

    उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
    (a) केवल 1
    (b) केवल 2
    (c) 1 और 2 दोनों
    (d) न तो 1 और न ही 2

    उत्तर: (d)
    व्याख्या: LCA तेजस चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, न कि पांचवीं पीढ़ी का। AMCA पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान कार्यक्रम है, जबकि तेजस हल्का लड़ाकू विमान है। अतः दोनों कथन गलत हैं।

  6. निम्नलिखित में से कौन-सी भारतीय वायुसेना के मिग-21 के साथ जुड़ी दुर्घटनाओं के संभावित कारण हो सकते हैं?
    1. पुरानी तकनीक और सामग्री की थकान
    2. स्पेयर पार्ट्स की कमी और गुणवत्ता के मुद्दे
    3. उच्च उड़ान दर और कठिन रखरखाव

    नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:
    (a) केवल 1
    (b) केवल 1 और 2
    (c) केवल 2 और 3
    (d) 1, 2 और 3

    उत्तर: (d)
    व्याख्या: ये सभी कारक मिग-21 दुर्घटनाओं के संभावित कारण रहे हैं। विमान की उम्र, पुर्जों की उपलब्धता और उपयोग की तीव्रता ने इसकी सुरक्षा रिकॉर्ड को प्रभावित किया।

  7. भारतीय वायुसेना में स्वीकृत फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या कितनी है?
    (a) 25
    (b) 32
    (c) 42
    (d) 50

    उत्तर: (c)
    व्याख्या: भारतीय वायुसेना में स्वीकृत फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या 42 है, हालांकि वर्तमान में उपलब्ध संख्या इससे काफी कम है।

  8. विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने 2019 में जिस पाकिस्तानी फाइटर जेट को अपने मिग-21 बाइसन से मार गिराया था, वह कौन-सा था?
    (a) J-10C
    (b) F-16
    (c) जेएफ-17
    (d) मिराज 2000

    उत्तर: (b)
    व्याख्या: विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने 2019 में पाकिस्तानी वायुसेना के F-16 फाइटर जेट को अपने मिग-21 बाइसन से मार गिराया था।

  9. भारतीय रक्षा उत्पादन में ‘आत्मनिर्भरता’ के संदर्भ में, LCA तेजस किस संस्था द्वारा विकसित किया गया है?
    (a) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
    (b) हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)
    (c) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
    (d) भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL)

    उत्तर: (b)
    व्याख्या: LCA तेजस हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित और निर्मित किया गया है, जिसमें DRDO की वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA) डिजाइन का काम करती है।

  10. मिग-21 की सेवानिवृत्ति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय वायुसेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती को दर्शाता है?
    (a) विदेशी स्पेयर पार्ट्स पर निर्भरता में वृद्धि
    (b) मौजूदा फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या और स्वीकृत संख्या के बीच बढ़ता अंतर
    (c) पायलटों के लिए प्रशिक्षण लागत में वृद्धि
    (d) पुराने विमानों के रखरखाव की बढ़ती लागत

    उत्तर: (b)
    व्याख्या: मिग-21 के हटने से भारतीय वायुसेना के पास उपलब्ध फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या में और कमी आएगी, जो स्वीकृत संख्या 42 से पहले ही काफी कम है। यह भारत की हवाई रक्षा क्षमता के लिए सबसे बड़ी सामरिक चुनौती है।

मुख्य परीक्षा (Mains)

  1. मिग-21 फाइटर जेट की भारतीय वायुसेना में लंबी सेवा अवधि के पीछे के कारणों और इससे जुड़ी दुर्घटनाओं के बहुआयामी कारकों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें।
  2. भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण प्रयासों में LCA तेजस और AMCA कार्यक्रमों की भूमिका का मूल्यांकन करें। मिग-21 की सेवानिवृत्ति के बाद भारतीय हवाई शक्ति में ‘क्षमता अंतर’ को पाटने में इनकी सफलता के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?
  3. “मिग-21 की सेवानिवृत्ति भारतीय वायुसेना के लिए केवल एक पुराने विमान को सेवा से हटाना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और अगली पीढ़ी की चुनौतियों के लिए तैयारी का प्रतीक है।” इस कथन के आलोक में भारतीय रक्षा उत्पादन में ‘आत्मनिर्भरता’ की अवधारणा और इसके रणनीतिक निहितार्थों पर प्रकाश डालें।

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