परिचय
समाजशास्त्र के अभ्यर्थियों, अपनी तैयारी को नई ऊँचाई देने के लिए तैयार हो जाइए! यह दैनिक क्विज़ आपके सैद्धांतिक ज्ञान और विश्लेषणात्मक कौशल का गहन परीक्षण करेगा। हमने समकालीन सामाजिक मुद्दों और प्रतिष्ठित समाजशास्त्रीय अवधारणाओं का मिश्रण तैयार किया है ताकि आप प्रत्येक प्रश्न के साथ अपनी वैचारिक स्पष्टता को परख सकें। प्रत्येक प्रश्न का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करें और विस्तृत व्याख्याओं के माध्यम से अपनी समझ को मजबूत करें।
समाजशास्त्र दैनिक क्विज़: 25 प्रश्न
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कार्ल मार्क्स के अनुसार, उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण का अभाव श्रमिक में अलगाव (alienation) की किस स्थिति को जन्म देता है?
- A) स्वयं से अलगाव
- B) कार्य की प्रक्रिया से अलगाव
- C) उत्पाद से अलगाव
- D) उपरोक्त सभी
सही उत्तर: D) उपरोक्त सभी
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने अपनी कृति ‘1844 के आर्थिक और दार्शनिक पांडुलिपियां’ में अलगाव के चार आयामों का वर्णन किया है: उत्पाद से अलगाव (जो श्रमिक बनाता है, उस पर उसका नियंत्रण नहीं होता), कार्य की प्रक्रिया से अलगाव (कार्य पर उसका नियंत्रण नहीं होता), स्वयं से अलगाव (मानवीय क्षमता का एहसास नहीं होता), और अन्य मनुष्यों से अलगाव (प्रतिस्पर्धात्मक माहौल के कारण)। पूँजीवादी व्यवस्था में, श्रमिकों को इन सभी स्तरों पर अलगाव का अनुभव होता है।
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मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित ‘आदर्श प्रकार’ (Ideal Type) की अवधारणा का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- A) सामाजिक वास्तविकता का सटीक वर्णन करना
- B) सामाजिक घटनाओं का अनुभवजन्य (empirical) विश्लेषण करने के लिए एक विश्लेषणात्मक उपकरण प्रदान करना
- C) एक आदर्श समाज की रूपरेखा प्रस्तुत करना
- D) भविष्यवाणी करने के लिए एक मॉडल बनाना
सही उत्तर: B) सामाजिक घटनाओं का अनुभवजन्य (empirical) विश्लेषण करने के लिए एक विश्लेषणात्मक उपकरण प्रदान करना
विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर के ‘आदर्श प्रकार’ अमूर्त, वैचारिक निर्माण हैं जो किसी भी सामाजिक घटना की सभी प्रमुख विशेषताओं को एक तार्किक रूप में संकलित करते हैं। यह एक शोध उपकरण है, वास्तविक दुनिया का सटीक चित्रण नहीं। इसका उपयोग सामाजिक वास्तविकता को मापने और तुलना करने के लिए एक बेंचमार्क के रूप में किया जाता है, न कि एक आदर्श समाज का वर्णन करने या सटीक भविष्यवाणी करने के लिए।
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एमिल दुर्खीम द्वारा ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Fact) की अवधारणा की मुख्य विशेषता क्या है?
- A) यह व्यक्तिपरक और मनोवैज्ञानिक होता है
- B) यह व्यक्तियों के बाहर मौजूद होता है और उन पर बाध्यकारी शक्ति रखता है
- C) यह केवल व्यक्तिगत चेतना में पाया जाता है
- D) यह केवल भौतिक वस्तुओं से संबंधित होता है
सही उत्तर: B) यह व्यक्तियों के बाहर मौजूद होता है और उन पर बाध्यकारी शक्ति रखता है
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘समाजशास्त्रीय विधि के नियम’ (The Rules of Sociological Method) में ‘सामाजिक तथ्य’ की अवधारणा को पेश किया। उनके अनुसार, सामाजिक तथ्य सोचने, महसूस करने और कार्य करने के तरीके हैं जो व्यक्तियों के बाहर मौजूद होते हैं और उन पर एक बाध्यकारी शक्ति (coercive power) रखते हैं। ये व्यक्तिपरक नहीं होते बल्कि सामूहिक होते हैं और व्यक्तियों के आचरण को नियंत्रित करते हैं।
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रॉबर्ट के. मर्टन द्वारा ‘प्रकट और अप्रकट प्रकार्य’ (Manifest and Latent Functions) की अवधारणा किस सिद्धांत से संबंधित है?
- A) संघर्ष सिद्धांत
- B) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद
- C) संरचनात्मक प्रकार्यवाद
- D) विनिमय सिद्धांत
सही उत्तर: C) संरचनात्मक प्रकार्यवाद
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन ने टालकॉट पार्सन्स के प्रकार्यवाद को संशोधित करते हुए ‘प्रकट और अप्रकट प्रकार्य’ की अवधारणा प्रस्तुत की। प्रकट प्रकार्य वे होते हैं जो किसी सामाजिक पैटर्न के इच्छित और मान्यता प्राप्त परिणाम होते हैं, जबकि अप्रकट प्रकार्य अनपेक्षित और अक्सर अज्ञात परिणाम होते हैं। यह अवधारणा संरचनात्मक प्रकार्यवाद के दायरे में आती है, जो समाज के विभिन्न अंगों के कार्यों और उनके योगदान पर केंद्रित है।
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जॉर्ज हर्बर्ट मीड के ‘स्व’ (Self) के सिद्धांत में, ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) की अवधारणाएँ क्या दर्शाती हैं?
- A) ‘मैं’ सामाजिक उम्मीदों का आंतरिककरण है, ‘मुझे’ व्यक्ति की सहज प्रतिक्रिया है
- B) ‘मैं’ व्यक्ति की सहज और तात्कालिक प्रतिक्रिया है, ‘मुझे’ सामान्यीकृत अन्य (generalized other) के माध्यम से आंतरिककृत सामाजिक उम्मीदें हैं
- C) ‘मैं’ व्यक्ति का सचेत मन है, ‘मुझे’ अवचेतन मन है
- D) ‘मैं’ व्यक्ति का बचपन का चरण है, ‘मुझे’ वयस्क चरण है
सही उत्तर: B) ‘मैं’ व्यक्ति की सहज और तात्कालिक प्रतिक्रिया है, ‘मुझे’ सामान्यीकृत अन्य (generalized other) के माध्यम से आंतरिककृत सामाजिक उम्मीदें हैं
विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद के सिद्धांत में, ‘स्व’ दो घटकों से मिलकर बना है: ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me)। ‘मैं’ व्यक्ति की तात्कालिक, अनियोजित और सहज प्रतिक्रिया का प्रतिनिधित्व करता है – यह आत्म-अभिव्यक्ति का रचनात्मक हिस्सा है। ‘मुझे’ समाज की आंतरिककृत अपेक्षाओं, दृष्टिकोणों और मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे व्यक्ति ‘सामान्यीकृत अन्य’ के माध्यम से सीखता है। यह आत्म का सामाजिक रूप से संरचित भाग है।
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‘सामाजिक संरचना’ (Social Structure) को परिभाषित करने वाले प्रमुख तत्वों में से एक क्या है?
- A) केवल भौतिक वातावरण
- B) व्यक्तियों के बीच सामाजिक संबंध और भूमिकाएँ
- C) व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक विशेषताएँ
- D) भौगोलिक स्थिति
सही उत्तर: B) व्यक्तियों के बीच सामाजिक संबंध और भूमिकाएँ
विस्तृत व्याख्या: सामाजिक संरचना से तात्पर्य समाज के भीतर व्यक्तियों, समूहों और संस्थाओं के बीच संबंधों के व्यवस्थित पैटर्न से है। यह सामाजिक भूमिकाओं, मानदंडों, मूल्यों और संस्थानों का एक ढाँचा है जो सामाजिक व्यवहार को आकार देता है। यह केवल भौतिक वातावरण या व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक विशेषताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक अंतःक्रियाओं और उनके परिणामस्वरूप बनने वाले पैटर्न पर केंद्रित है।
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‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा का उपयोग अक्सर किस सामाजिक समस्या का वर्णन करने के लिए किया जाता है?
- A) सामाजिक एकता में वृद्धि
- B) व्यक्तियों और समाज के बीच संबंध विच्छेद की भावना
- C) मजबूत सामुदायिक बंधन
- D) सामाजिक एकीकरण
सही उत्तर: B) व्यक्तियों और समाज के बीच संबंध विच्छेद की भावना
विस्तृत व्याख्या: अलगाव (Alienation) एक सामाजिक-मनोवैज्ञानिक स्थिति है जहाँ व्यक्ति स्वयं, अपने काम, अन्य लोगों और/या समाज से कटा हुआ या अलग-थलग महसूस करता है। यह अक्सर आधुनिक औद्योगिक समाजों या पूँजीवादी प्रणालियों से जुड़ा है, जैसा कि कार्ल मार्क्स ने व्यापक रूप से विश्लेषण किया है। यह सामाजिक एकता या एकीकरण के विपरीत है।
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‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा किससे जुड़ी है, और यह किस स्थिति को संदर्भित करती है?
- A) दुर्खीम; समाज में मानदंडहीनता की स्थिति
- B) मार्क्स; वर्ग संघर्ष की स्थिति
- C) वेबर; नौकरशाही की स्थिति
- D) पार्सन्स; सामाजिक व्यवस्था की स्थिति
सही उत्तर: A) दुर्खीम; समाज में मानदंडहीनता की स्थिति
विस्तृत व्याख्या: एनोमी (Anomie) की अवधारणा एमिल दुर्खीम से जुड़ी है, विशेष रूप से उनकी आत्महत्या पर अध्ययन में। यह एक ऐसी सामाजिक स्थिति को संदर्भित करती है जहाँ सामाजिक मानदंड कमजोर या अनुपस्थित हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों में दिशाहीनता, भ्रम और अर्थहीनता की भावना पैदा होती है। यह सामाजिक नियंत्रण के टूटने का संकेत है और अक्सर तीव्र सामाजिक परिवर्तन या संकट के समय में देखा जाता है।
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निम्नलिखित में से कौन ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) का सबसे अच्छा उदाहरण है?
- A) एक बड़ी व्यापारिक कंपनी के कर्मचारी
- B) एक विश्वविद्यालय के छात्रों का समूह
- C) एक परिवार
- D) एक राजनीतिक दल के सदस्य
सही उत्तर: C) एक परिवार
विस्तृत व्याख्या: चार्ल्स कूली ने प्राथमिक समूह की अवधारणा दी। प्राथमिक समूह छोटे सामाजिक समूह होते हैं जिनके सदस्य व्यक्तिगत और घनिष्ठ संबंधों में संलग्न होते हैं, जो स्थायी और भावनात्मक होते हैं। परिवार, बचपन के दोस्त और पड़ोस के समूह प्राथमिक समूहों के उदाहरण हैं। अन्य विकल्प बड़े, औपचारिक या कम व्यक्तिगत समूह हैं जो द्वितीयक समूह की विशेषताओं को दर्शाते हैं।
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समाजशास्त्र में ‘सामाजिक स्तरीकरण’ (Social Stratification) का क्या अर्थ है?
- A) समाज में व्यक्तियों का समतावादी वितरण
- B) सामाजिक पदानुक्रम में व्यक्तियों और समूहों की व्यवस्था
- C) केवल आर्थिक असमानता का अध्ययन
- D) केवल राजनीतिक शक्ति का वितरण
सही उत्तर: B) सामाजिक पदानुक्रम में व्यक्तियों और समूहों की व्यवस्था
विस्तृत व्याख्या: सामाजिक स्तरीकरण से तात्पर्य समाज में व्यक्तियों और समूहों के पदानुक्रमित विभाजन से है जो धन, शक्ति, प्रतिष्ठा और स्थिति जैसी असमानताओं पर आधारित होता है। यह एक व्यवस्थित संरचना है जो सामाजिक संसाधनों के असमान वितरण को दर्शाती है। यह सिर्फ आर्थिक या राजनीतिक असमानता तक सीमित नहीं है, बल्कि इन सभी कारकों के जटिल अंतर्संबंध को देखता है।
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धर्म के समाजशास्त्रीय अध्ययन में, एमिल दुर्खीम ने ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र’ (Profane) के बीच अंतर क्यों किया?
- A) धर्म और विज्ञान के बीच अंतर करने के लिए
- B) यह दिखाने के लिए कि धर्म सामाजिक एकता का स्रोत है
- C) यह स्पष्ट करने के लिए कि धर्म समाज का एक प्रतिबिंब है
- D) B और C दोनों
सही उत्तर: D) B और C दोनों
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘द एलिमेंटरी फॉर्म्स ऑफ द रिलीजियस लाइफ’ में पवित्र (अलौकिक, विशेष, श्रद्धास्पद) और अपवित्र (रोजमर्रा का, सामान्य) के बीच अंतर को धर्म का आधारभूत तत्व माना। इस विभाजन के माध्यम से, उन्होंने तर्क दिया कि धर्म समाज का एक प्रतिनिधित्व है (पवित्र वस्तुएँ वास्तव में समाज की ही मूर्त अभिव्यक्ति हैं) और यह सामाजिक एकता (सामूहिक चेतना) को बढ़ावा देता है।
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एकल परिवार (Nuclear Family) की मुख्य विशेषता क्या है?
- A) तीन या अधिक पीढ़ियों का एक साथ रहना
- B) पति, पत्नी और उनके अविवाहित बच्चों से बना समूह
- C) पति, पत्नी और उनके विवाहित बच्चों से बना समूह
- D) विस्तारित नातेदारी संबंधों का एक बड़ा नेटवर्क
सही उत्तर: B) पति, पत्नी और उनके अविवाहित बच्चों से बना समूह
विस्तृत व्याख्या: एकल परिवार एक छोटा पारिवारिक इकाई है जिसमें केवल माता-पिता और उनके अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं। यह विस्तारित परिवार के विपरीत है जिसमें कई पीढ़ियाँ या विवाहित भाई-बहन और उनके परिवार एक साथ रहते हैं। यह आधुनिक औद्योगिक समाजों में अधिक प्रचलित है।
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समाजशास्त्र में ‘समाजीकरण’ (Socialization) की प्रक्रिया का प्राथमिक लक्ष्य क्या है?
- A) व्यक्तिगत पहचान को नष्ट करना
- B) व्यक्तियों को सामाजिक मानदंड, मूल्य और भूमिकाएँ सिखाना
- C) जैविक आवश्यकताओं को पूरा करना
- D) व्यक्तियों को समाज से अलग करना
सही उत्तर: B) व्यक्तियों को सामाजिक मानदंड, मूल्य और भूमिकाएँ सिखाना
विस्तृत व्याख्या: समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति समाज के मानदंडों, मूल्यों, विश्वासों और व्यवहारों को सीखते हैं और आंतरिककृत करते हैं। यह उन्हें समाज के सदस्यों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाता है और व्यक्तिगत पहचान के निर्माण में भी योगदान देता है। परिवार, शिक्षा, साथी समूह और मीडिया समाजीकरण के महत्वपूर्ण एजेंट हैं।
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ग्रामीण समाजशास्त्र के संदर्भ में, ‘लाल-काउंटी अर्थव्यवस्थाओं’ (Red-county economies) का शैक्षिक प्राप्ति में लैंगिक अंतर को फिर से आकार देने में क्या प्रभाव हो सकता है, जैसा कि हाल के शोध में बताया गया है?
- A) पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए उच्च शिक्षा तक समान पहुंच को बढ़ावा देना
- B) ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में कमी लाना
- C) पारंपरिक लिंग भूमिकाओं को सुदृढ़ करके शैक्षिक विकल्पों को प्रभावित करना
- D) B और C दोनों
सही उत्तर: D) B और C दोनों
विस्तृत व्याख्या: हालिया शोध से पता चला है कि ग्रामीणता, ‘लाल-काउंटी अर्थव्यवस्थाएँ’ (जो अक्सर विशिष्ट उद्योगों और रूढ़िवादी मूल्यों से जुड़ी होती हैं) और स्थानीय स्थितियाँ संयुक्त राज्य भर में शैक्षिक प्राप्ति में लैंगिक अंतर को फिर से आकार दे रही हैं। इसका तात्पर्य यह हो सकता है कि ये अर्थव्यवस्थाएँ और संबंधित सांस्कृतिक मूल्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा तक पहुँच को सीमित कर सकते हैं और पारंपरिक लिंग भूमिकाओं को सुदृढ़ कर सकते हैं, जिससे उनके शैक्षिक और करियर विकल्प प्रभावित हो सकते हैं।
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‘सामाजिक पूंजी’ (Social Capital) की अवधारणा में क्या शामिल है?
- A) केवल मौद्रिक संपत्ति
- B) व्यक्तियों के सामाजिक नेटवर्क और उनके माध्यम से प्राप्त संसाधन
- C) केवल शिक्षा और कौशल
- D) भूमि और अचल संपत्ति
सही उत्तर: B) व्यक्तियों के सामाजिक नेटवर्क और उनके माध्यम से प्राप्त संसाधन
विस्तृत व्याख्या: ‘सामाजिक पूंजी’ से तात्पर्य उन संसाधनों (जैसे जानकारी, समर्थन, अवसर) से है जो व्यक्तियों को उनके सामाजिक नेटवर्क और संबंधों के माध्यम से उपलब्ध होते हैं। यह पियरे बॉर्डियू और जेम्स कोलमैन जैसे समाजशास्त्रियों द्वारा व्यापक रूप से विकसित की गई अवधारणा है, और हालिया शोध इसके आर्थिक कल्याण पर प्रभाव को भी उजागर करता है। यह केवल भौतिक या मानव पूंजी तक सीमित नहीं है।
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डिजिटल युग में ‘क्लिकबेट अपराध सुर्खियों’ (clickbait crime headlines) का स्थानीय समाचार कक्षों में पेशेवर अधिकार पर क्या प्रभाव हो सकता है?
- A) पत्रकारिता की विश्वसनीयता को बढ़ाना
- B) सनसनीखेज रिपोर्टिंग को बढ़ावा देकर पेशेवर मानकों को कम करना
- C) अपराध रिपोर्टिंग में सटीकता सुनिश्चित करना
- D) सामुदायिक सुरक्षा में सुधार करना
सही उत्तर: B) सनसनीखेज रिपोर्टिंग को बढ़ावा देकर पेशेवर मानकों को कम करना
विस्तृत व्याख्या: हालिया शोध, जैसा कि सोशियोलॉजिकल साइंस में एक 2026 के अध्ययन में बताया गया है, क्लिकबेट अपराध सुर्खियों के उदय और स्थानीय समाचार कक्षों में पेशेवर अधिकार पर उनके प्रभाव की जाँच करता है। क्लिकबेट सुर्खियाँ अक्सर सनसनीखेज होती हैं और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर सकती हैं, जिससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता कम हो सकती है और अंततः समाचार पेशेवरों के अधिकार और विश्वसनीयता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘AI-जनित दृश्य संयुक्त’ (AI-generated visual conjoints) का उपयोग किस प्रकार उपयोगी हो सकता है?
- A) केवल डेटा संग्रह में तेजी लाने के लिए
- B) सामाजिक धारणाओं और विशेषताओं के बारे में सूक्ष्म अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए
- C) शोधकर्ताओं की मानवीय पूर्वाग्रहों को बढ़ाने के लिए
- D) केवल मात्रात्मक डेटा का विश्लेषण करने के लिए
सही उत्तर: B) सामाजिक धारणाओं और विशेषताओं के बारे में सूक्ष्म अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए
विस्तृत व्याख्या: AI-जनित दृश्य संयुक्त हाल ही में लिंग-आधारित घरेलू कार्य के आरोपण (gendered attributions of housework) जैसी सामाजिक धारणाओं की जांच के लिए पेश किए गए हैं। ये उपकरण शोधकर्ताओं को छवियों या परिदृश्यों को हेरफेर करके जटिल सामाजिक मुद्दों का अधिक बारीकी से अध्ययन करने की अनुमति देते हैं, जिससे मानवीय पूर्वाग्रहों को कम करने और सूक्ष्म अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में मदद मिलती है, जो पारंपरिक तरीकों से मुश्किल हो सकता है। यह गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों तरह के विश्लेषण में सहायक हो सकता है।
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समाजशास्त्र में ‘सांस्कृतिक अनुकूलन’ (Cultural Adaptation) और ‘सामाजिक स्थिरता’ (Social Sustainability) के बीच क्या संबंध है?
- A) सांस्कृतिक अनुकूलन हमेशा सामाजिक स्थिरता को कम करता है
- B) सांस्कृतिक अनुकूलन सामाजिक स्थिरता को प्राप्त करने के मार्गों में से एक हो सकता है
- C) इन दोनों अवधारणाओं के बीच कोई संबंध नहीं है
- D) सामाजिक स्थिरता केवल आर्थिक विकास से प्राप्त होती है
सही उत्तर: B) सांस्कृतिक अनुकूलन सामाजिक स्थिरता को प्राप्त करने के मार्गों में से एक हो सकता है
विस्तृत व्याख्या: नेचर के समाजशास्त्र खंड में सांस्कृतिक और संगीत अनुकूलन को सामाजिक स्थिरता के मार्ग के रूप में दर्शाने वाले कार्य शामिल हैं। सांस्कृतिक अनुकूलन, जिसमें समाज अपनी बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी प्रथाओं, विश्वासों और मूल्यों को समायोजित करता है, सामाजिक सामंजस्य, लचीलेपन और दीर्घकालिक कल्याण को बढ़ावा देकर सामाजिक स्थिरता में योगदान दे सकता है। यह एक गतिशील प्रक्रिया है जो समाज को बदलती दुनिया में पनपने में मदद करती है।
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भारतीय समाज के संदर्भ में ‘जाति व्यवस्था’ (Caste System) की मुख्य विशेषता क्या है?
- A) सामाजिक गतिशीलता की उच्च दर
- B) खुला स्तरीकरण और अंतर्विवाह
- C) बंद स्तरीकरण, वंशानुगत स्थिति और बहिर्विवाह
- D) बंद स्तरीकरण, वंशानुगत स्थिति और अंतर्विवाह
सही उत्तर: D) बंद स्तरीकरण, वंशानुगत स्थिति और अंतर्विवाह
विस्तृत व्याख्या: भारतीय जाति व्यवस्था एक बंद सामाजिक स्तरीकरण प्रणाली है जहाँ व्यक्ति की स्थिति जन्म से निर्धारित होती है (वंशानुगत स्थिति) और आजीवन बनी रहती है। यह कठोर सामाजिक पदानुक्रम, व्यावसायिक विशेषज्ञता और अंतर्विवाह (अपने ही समूह के भीतर विवाह) की प्रथाओं से चिह्नित है। इसमें सामाजिक गतिशीलता बहुत कम होती है।
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‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) की अवधारणा क्या दर्शाती है?
- A) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारंपरिक जातिगत पहचान का पूर्ण उन्मूलन
- B) डिजिटल विभाजन (digital divide) के माध्यम से जाति-आधारित असमानताओं का पुनरुत्पादन या सुदृढीकरण
- C) डिजिटल साक्षरता का सार्वभौमिक वितरण
- D) केवल इंटरनेट तक पहुंच की कमी
सही उत्तर: B) डिजिटल विभाजन (digital divide) के माध्यम से जाति-आधारित असमानताओं का पुनरुत्पादन या सुदृढीकरण
विस्तृत व्याख्या: ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ एक उभरती हुई अवधारणा है जो इस विचार को दर्शाती है कि डिजिटल विभाजन (डिजिटल तकनीक तक पहुंच और उपयोग में असमानता) भारत में पारंपरिक जाति-आधारित असमानताओं को फिर से उत्पन्न या मजबूत कर सकता है। हाशिए के समुदायों के पास अक्सर डिजिटल संसाधनों, कौशल और अवसरों तक कम पहुंच होती है, जिससे नई प्रकार की असमानताएँ पैदा होती हैं जो पारंपरिक जातिगत पदानुक्रमों को दर्शाती हैं या उनसे जुड़ी होती हैं।
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समाजशास्त्र में ‘गुणात्मक अनुसंधान’ (Qualitative Research) का प्राथमिक ध्यान क्या है?
- A) बड़ी संख्या में उत्तरदाताओं से संख्यात्मक डेटा एकत्र करना
- B) सामाजिक घटनाओं की गहरी समझ और व्याख्या प्राप्त करना
- C) सांख्यिकीय विश्लेषण के माध्यम से परिकल्पनाओं का परीक्षण करना
- D) सामान्यीकरण और भविष्यवाणी करना
सही उत्तर: B) सामाजिक घटनाओं की गहरी समझ और व्याख्या प्राप्त करना
विस्तृत व्याख्या: गुणात्मक अनुसंधान का उद्देश्य सामाजिक घटनाओं, अनुभवों और व्यवहारों की गहरी, समृद्ध और विस्तृत समझ प्राप्त करना है। इसमें अक्सर साक्षात्कार, सहभागी अवलोकन और केस स्टडी जैसे तरीके शामिल होते हैं, और यह व्याख्यात्मक दृष्टिकोण पर जोर देता है। इसके विपरीत, मात्रात्मक अनुसंधान संख्यात्मक डेटा एकत्र करने और सांख्यिकीय विश्लेषण के माध्यम से परिकल्पनाओं का परीक्षण करने पर केंद्रित है।
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निम्नलिखित में से कौन ‘मानवविज्ञान अनुसंधान’ (Ethnographic Research) की विशेषता है?
- A) प्रयोगशाला-आधारित प्रयोग
- B) एक विशिष्ट सामाजिक समूह या संस्कृति का गहन, प्रत्यक्ष अवलोकन
- C) बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण डेटा का विश्लेषण
- D) पूर्व-निर्धारित चरों के साथ सांख्यिकीय मॉडलिंग
सही उत्तर: B) एक विशिष्ट सामाजिक समूह या संस्कृति का गहन, प्रत्यक्ष अवलोकन
विस्तृत व्याख्या: मानवविज्ञान अनुसंधान (Ethnography) एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जिसमें एक शोधकर्ता एक विशिष्ट सामाजिक समूह, समुदाय या संस्कृति के जीवन में डूब जाता है ताकि उनके अनुभवों, व्यवहारों और अंतःक्रियाओं की गहन समझ प्राप्त कर सके। इसमें लंबे समय तक क्षेत्र कार्य और प्रतिभागी अवलोकन शामिल होता है, जैसा कि बिगफुट शिकारी समुदायों के समाजशास्त्रीय निहितार्थों जैसे विषयों पर हाल के शोध में देखा जा सकता है।
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समाजशास्त्र में ‘सामूहिक चेतना’ (Collective Conscience) की अवधारणा का प्रतिपादन किसने किया?
- A) मैक्स वेबर
- B) कार्ल मार्क्स
- C) एमिल दुर्खीम
- D) जॉर्ज हर्बर्ट मीड
सही उत्तर: C) एमिल दुर्खीम
विस्तृत व्याख्या: ‘सामूहिक चेतना’ की अवधारणा एमिल दुर्खीम से जुड़ी है। यह एक समाज के सदस्यों द्वारा साझा किए गए सामान्य विश्वासों, विचारों और नैतिक दृष्टिकोणों के कुल योग को संदर्भित करती है। दुर्खीम ने तर्क दिया कि यह सामूहिक चेतना समाज को एक साथ बांधती है और सामाजिक एकता (विशेषकर यांत्रिक एकता) का आधार है।
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‘सामाजिक गतिशीलता’ (Social Mobility) का सबसे अच्छा वर्णन क्या है?
- A) एक व्यक्ति या समूह की भौगोलिक स्थिति में परिवर्तन
- B) सामाजिक पदानुक्रम में एक व्यक्ति या समूह की स्थिति में परिवर्तन
- C) केवल व्यक्ति की शिक्षा का स्तर
- D) सामाजिक संबंधों में कोई परिवर्तन नहीं
सही उत्तर: B) सामाजिक पदानुक्रम में एक व्यक्ति या समूह की स्थिति में परिवर्तन
विस्तृत व्याख्या: सामाजिक गतिशीलता से तात्पर्य सामाजिक स्तरीकरण प्रणाली के भीतर एक व्यक्ति या समूह की सामाजिक स्थिति में ऊपर या नीचे की ओर गति से है। यह अंतर-पीढ़ीगत (intergenerational) हो सकती है (माता-पिता की तुलना में बच्चों की स्थिति) या अंतर-व्यक्तिगत (intragenerational) हो सकती है (व्यक्ति के अपने जीवनकाल में स्थिति में परिवर्तन)। यह सिर्फ भौगोलिक गतिशीलता या शिक्षा के स्तर तक सीमित नहीं है।
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पियरे बॉर्डियू की अवधारणा ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) में क्या शामिल है?
- A) केवल भौतिक संपत्ति
- B) शिक्षा, ज्ञान, कौशल और सांस्कृतिक वस्तुओं का संग्रह जो किसी को सामाजिक लाभ प्रदान करता है
- C) सामाजिक नेटवर्क और संबंध
- D) राजनीतिक शक्ति और प्रभाव
सही उत्तर: B) शिक्षा, ज्ञान, कौशल और सांस्कृतिक वस्तुओं का संग्रह जो किसी को सामाजिक लाभ प्रदान करता है
विस्तृत व्याख्या: पियरे बॉर्डियू ने ‘सांस्कृतिक पूंजी’ की अवधारणा विकसित की, जो शिक्षा, ज्ञान, कौशल, भाषा, शिष्टाचार और सांस्कृतिक वस्तुओं (जैसे किताबें, कला) के संग्रह को संदर्भित करती है जो व्यक्तियों को सामाजिक स्थानों में लाभ प्रदान करते हैं। यह तीन रूपों में मौजूद हो सकती है: सन्निहित (embodied – ज्ञान, कौशल), वस्तुनिष्ठ (objectified – सांस्कृतिक वस्तुएँ), और संस्थागत (institutionalized – शैक्षणिक योग्यताएँ)। यह व्यक्ति की सामाजिक स्थिति को प्रभावित करती है।
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