परिचय
भारत का संविधान, हमारे लोकतंत्र का आधार स्तंभ, प्रत्येक नागरिक और विशेषकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए गहन अध्ययन का विषय है। यह केवल कानूनों का संग्रह नहीं, बल्कि एक जीवंत दस्तावेज है जो हमारे शासन, अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करता है। यह दैनिक अभ्यास सेट आपको भारतीय राजव्यवस्था की अपनी वैचारिक स्पष्टता और मजबूत पकड़ का परीक्षण करने के लिए चुनौती देता है। आइए, अपने संवैधानिक ज्ञान को परखें और आगामी परीक्षाओं के लिए अपनी तैयारी को और मजबूत करें।
भारतीय राजव्यवस्था पर 25 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1: भारतीय संविधान की प्रस्तावना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह संविधान का भाग है, लेकिन गैर-न्यायसंगत है।
- इसे केवल एक बार संशोधित किया गया है।
- यह संविधान के दर्शन और उद्देश्यों को दर्शाती है।
उपरोक्त में से कौन से कथन सही हैं?
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 और 3
- (D) 1, 2 और 3
उत्तर: (D)
विस्तृत व्याख्या:
भारतीय संविधान की प्रस्तावना भारत के लोगों के आकांक्षाओं और दर्शन को प्रस्तुत करती है।
- कथन 1 सही है: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है। हालांकि, यह गैर-न्यायसंगत है, जिसका अर्थ है कि इसके प्रावधानों को अदालतों में लागू नहीं किया जा सकता है।
- कथन 2 सही है: प्रस्तावना को अब तक केवल एक बार, 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संशोधित किया गया है, जिसने ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े थे।
- कथन 3 सही है: प्रस्तावना संविधान के उद्देश्यों और आदर्शों को संक्षेप में प्रस्तुत करती है, जैसे न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व। यह संविधान के मूल दर्शन को दर्शाती है।
अतः, सभी कथन सही हैं।
प्रश्न 2: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण’ प्रदान किया गया है?
- (A) अनुच्छेद 19
- (B) अनुच्छेद 20
- (C) अनुच्छेद 21
- (D) अनुच्छेद 22
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
- अनुच्छेद 21 सही है: यह प्रावधान करता है कि “किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त वंचित नहीं किया जाएगा।” सर्वोच्च न्यायालय ने मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) मामले में इस अधिकार के दायरे को व्यापक बनाया है, जिसमें गरिमापूर्ण जीवन, स्वच्छ पर्यावरण, निजता का अधिकार आदि शामिल हैं।
- अनुच्छेद 19: यह छह मौलिक स्वतंत्रताओं से संबंधित है, जैसे भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 20: यह अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण प्रदान करता है।
- अनुच्छेद 22: यह कुछ मामलों में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण प्रदान करता है।
प्रश्न 3: राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- (A) वे देश के शासन में मौलिक हैं।
- (B) वे न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।
- (C) वे कानून बनाने में राज्य के लिए बाध्यकारी हैं।
- (D) उनका उद्देश्य एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
- कथन (C) सही नहीं है: अनुच्छेद 37 स्पष्ट रूप से कहता है कि DPSP ‘कानून बनाने में राज्य द्वारा लागू किए जाने चाहिए’, लेकिन वे ‘बाध्यकारी’ नहीं हैं। राज्य उन्हें लागू करने का प्रयास करेगा, लेकिन उनकी अवहेलना के लिए कानूनी रूप से दंडित नहीं किया जा सकता।
- कथन (A) सही है: अनुच्छेद 37 के अनुसार, “ये तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और कानून बनाने में राज्य का कर्तव्य होगा कि इन तत्वों को लागू करे।”
- कथन (B) सही है: DPSP प्रकृति में गैर-न्यायसंगत हैं, अर्थात उन्हें न्यायालयों द्वारा लागू नहीं किया जा सकता है। यह मौलिक अधिकारों से भिन्न हैं।
- कथन (D) सही है: DPSP का मुख्य उद्देश्य एक सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र स्थापित करना और भारत को एक कल्याणकारी राज्य बनाना है।
प्रश्न 4: भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को किस समिति की सिफारिशों पर जोड़ा गया था?
- (A) बलवंत राय मेहता समिति
- (B) स्वर्ण सिंह समिति
- (C) अशोक मेहता समिति
- (D) केलकर समिति
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- स्वर्ण सिंह समिति सही है: 1976 में कांग्रेस पार्टी द्वारा गठित स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा मौलिक कर्तव्यों को संविधान के भाग IV-A में अनुच्छेद 51A के तहत जोड़ा गया था।
- बलवंत राय मेहता समिति और अशोक मेहता समिति: ये दोनों पंचायती राज व्यवस्था से संबंधित हैं।
- केलकर समिति: यह भारत में कर सुधारों से संबंधित है।
प्रश्न 5: भारत के राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया के संबंध में कौन सा कथन असत्य है?
- (A) महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में शुरू किया जा सकता है।
- (B) प्रस्ताव पर सदन के कुल सदस्यों के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
- (C) राष्ट्रपति को 7 दिन का पूर्व नोटिस दिया जाना चाहिए।
- (D) महाभियोग प्रस्ताव को सदन की कुल सदस्यता के दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना चाहिए।
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
- कथन (C) असत्य है: अनुच्छेद 61 के अनुसार, राष्ट्रपति को 14 दिन का पूर्व नोटिस दिया जाना चाहिए, 7 दिन का नहीं।
- कथन (A) सही है: अनुच्छेद 61(2) के अनुसार, महाभियोग का आरोप संसद के किसी भी सदन द्वारा लगाया जा सकता है।
- कथन (B) सही है: अनुच्छेद 61(2)(a) के अनुसार, आरोप लगाने वाले सदन के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों द्वारा उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए।
- कथन (D) सही है: अनुच्छेद 61(2)(b) और 61(4) के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव को संबंधित सदन की कुल सदस्यता के दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना चाहिए।
प्रश्न 6: संसद के दो सत्रों के बीच अधिकतम कितना अंतराल हो सकता है?
- (A) 3 महीने
- (B) 4 महीने
- (C) 6 महीने
- (D) 12 महीने
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
- 6 महीने सही है: अनुच्छेद 85(1) के अनुसार, “राष्ट्रपति समय-समय पर संसद के सदनों को ऐसे समय और स्थान पर, जैसा वह ठीक समझे, अधिवेशन के लिए बुलाएगा: परंतु एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के लिए नियत तारीख के बीच छह मास से अधिक का अंतराल नहीं होगा।”
प्रश्न 7: भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को ‘अभिलेख न्यायालय’ (Court of Record) घोषित करता है?
- (A) अनुच्छेद 124
- (B) अनुच्छेद 129
- (C) अनुच्छेद 131
- (D) अनुच्छेद 137
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- अनुच्छेद 129 सही है: यह घोषणा करता है कि सर्वोच्च न्यायालय ‘अभिलेख न्यायालय’ होगा और उसके पास अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति सहित ऐसे सभी न्यायालयों की शक्तियां होंगी। इसका अर्थ है कि इसके सभी निर्णय और कार्यवाही रिकॉर्ड के रूप में रखे जाते हैं और अधीनस्थ न्यायालयों के लिए मिसाल के रूप में कार्य करते हैं।
- अनुच्छेद 124: सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और गठन से संबंधित है।
- अनुच्छेद 131: सर्वोच्च न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार से संबंधित है।
- अनुच्छेद 137: सर्वोच्च न्यायालय की अपने निर्णयों की समीक्षा करने की शक्ति से संबंधित है (न्यायिक समीक्षा)।
प्रश्न 8: भारतीय संविधान के किस भाग में संवैधानिक संशोधन का प्रावधान है?
- (A) भाग X
- (B) भाग XV
- (C) भाग XX
- (D) भाग XXI
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
- भाग XX सही है: भारतीय संविधान का भाग XX (अनुच्छेद 368) संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसकी प्रक्रिया से संबंधित है।
- भाग X: अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों से संबंधित है।
- भाग XV: निर्वाचन (चुनाव) से संबंधित है।
- भाग XXI: अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधानों से संबंधित है।
प्रश्न 9: पंचायती राज प्रणाली को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन अधिनियम द्वारा दिया गया था?
- (A) 73वां संशोधन अधिनियम
- (B) 74वां संशोधन अधिनियम
- (C) 42वां संशोधन अधिनियम
- (D) 44वां संशोधन अधिनियम
उत्तर: (A)
विस्तृत व्याख्या:
- 73वां संशोधन अधिनियम सही है: 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया और संविधान में भाग IX और ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई। यह ग्रामीण स्थानीय स्वशासन से संबंधित है।
- 74वां संशोधन अधिनियम: यह शहरी स्थानीय निकायों (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा देता है और संविधान में भाग IXA और बारहवीं अनुसूची जोड़ता है।
- 42वां संशोधन अधिनियम: इसे ‘लघु संविधान’ कहा जाता है; इसने प्रस्तावना में ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े और मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया।
- 44वां संशोधन अधिनियम: इसने संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार की सूची से हटा दिया और आंतरिक अशांति शब्द के स्थान पर ‘सशस्त्र विद्रोह’ शब्द का प्रयोग किया।
प्रश्न 10: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में ‘पुलिस’ विषय किस सूची के अंतर्गत आता है?
- (A) संघ सूची
- (B) राज्य सूची
- (C) समवर्ती सूची
- (D) अवशिष्ट शक्तियां
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- राज्य सूची सही है: सातवीं अनुसूची संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित है। ‘पुलिस’ (सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव सहित) राज्य सूची का विषय है (प्रविष्टि 2)। इसका अर्थ है कि राज्य सरकारों के पास पुलिस के संबंध में कानून बनाने और उसे प्रशासित करने की अनन्य शक्ति है।
- संघ सूची: रक्षा, विदेश मामले, रेलवे आदि जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों को शामिल करती है।
- समवर्ती सूची: शिक्षा, वन, विवाह आदि जैसे विषय शामिल करती है, जिन पर संघ और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
- अवशिष्ट शक्तियां: वे विषय जो तीनों सूचियों में से किसी में भी शामिल नहीं हैं, वे संघ संसद के अधिकार क्षेत्र में आते हैं (अनुच्छेद 248)।
प्रश्न 11: राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की घोषणा के लिए किस आधार का उल्लेख भारतीय संविधान में नहीं है?
- (A) युद्ध
- (B) बाहरी आक्रमण
- (C) आंतरिक अशांति
- (D) सशस्त्र विद्रोह
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
- आंतरिक अशांति सही है: मूल संविधान में राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) घोषित करने के लिए ‘युद्ध’, ‘बाहरी आक्रमण’ और ‘आंतरिक अशांति’ आधार थे। लेकिन 44वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा ‘आंतरिक अशांति’ शब्द को ‘सशस्त्र विद्रोह’ से प्रतिस्थापित कर दिया गया था, ताकि आपातकाल के दुरुपयोग को रोका जा सके।
- युद्ध, बाहरी आक्रमण और सशस्त्र विद्रोह: ये अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के वैध आधार हैं।
प्रश्न 12: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से कैसे हटाया जा सकता है?
- (A) राष्ट्रपति के आदेश से
- (B) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान
- (C) संसद के दोनों सदनों द्वारा साधारण बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा
- (D) प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान सही है: अनुच्छेद 324(5) के परंतुक के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित एक प्रस्ताव की आवश्यकता होती है।
- अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि वे हटाने की प्रक्रिया को बहुत सरल बनाते हैं या गलत प्राधिकरण का उल्लेख करते हैं, जो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के खिलाफ होगा।
प्रश्न 13: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 किससे संबंधित है?
- (A) शोषण के विरुद्ध अधिकार
- (B) धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
- (C) समानता का अधिकार
- (D) संवैधानिक उपचारों का अधिकार
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
- समानता का अधिकार सही है: अनुच्छेद 14 “विधि के समक्ष समानता और विधियों के समान संरक्षण” का प्रावधान करता है, जो समानता के अधिकार का मूल सिद्धांत है। यह भारत के सभी व्यक्तियों, नागरिकों और विदेशियों दोनों पर लागू होता है।
- शोषण के विरुद्ध अधिकार: अनुच्छेद 23 और 24 से संबंधित है।
- धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार: अनुच्छेद 25 से 28 से संबंधित है।
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार: अनुच्छेद 32 से संबंधित है।
प्रश्न 14: निम्नलिखित में से किस वीटो शक्ति का प्रयोग भारत के राष्ट्रपति द्वारा नहीं किया जाता है?
- (A) पूर्ण वीटो (Absolute Veto)
- (B) निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto)
- (C) पॉकेट वीटो (Pocket Veto)
- (D) योग्य वीटो (Qualified Veto)
उत्तर: (D)
विस्तृत व्याख्या:
- योग्य वीटो (Qualified Veto) सही है: योग्य वीटो का प्रयोग अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, जहां विधेयक को संसद द्वारा उच्च बहुमत से पुन: पारित करके राष्ट्रपति के वीटो को रद्द किया जा सकता है। भारतीय राष्ट्रपति के पास यह शक्ति नहीं है।
- पूर्ण वीटो: राष्ट्रपति किसी विधेयक पर अपनी सहमति रोक सकता है।
- निलंबनकारी वीटो: राष्ट्रपति विधेयक को संसद के पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है (धन विधेयक को छोड़कर)। यदि संसद इसे साधारण बहुमत से फिर से पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति को सहमति देनी होगी।
- पॉकेट वीटो: राष्ट्रपति न तो विधेयक पर सहमति देता है और न ही उसे अस्वीकार करता है और न ही उसे लौटाता है, बल्कि उसे अनिश्चित काल के लिए अपने पास रखता है।
प्रश्न 15: भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
- (A) 26 जनवरी 1946
- (B) 9 दिसंबर 1946
- (C) 15 अगस्त 1947
- (D) 26 नवंबर 1949
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- 9 दिसंबर 1946 सही है: भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी। इस बैठक में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
- 26 जनवरी 1946: इस दिन संविधान सभा अस्तित्व में नहीं थी। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ था।
- 15 अगस्त 1947: भारत को स्वतंत्रता मिली।
- 26 नवंबर 1949: संविधान सभा ने भारत के संविधान को अपनाया।
प्रश्न 16: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का मुख्य कार्य क्या है?
- (A) केंद्र और राज्य सरकारों के खातों का लेखा-परीक्षण करना
- (B) संघ और राज्यों के बीच राजस्व का वितरण करना
- (C) चुनाव आयोजित करना
- (D) लोकपाल की नियुक्ति करना
उत्तर: (A)
विस्तृत व्याख्या:
- केंद्र और राज्य सरकारों के खातों का लेखा-परीक्षण करना सही है: अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित CAG, केंद्र और राज्य सरकारों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों सहित सभी सरकारी व्यय की लेखा परीक्षा करने और रिपोर्ट संसद और राज्य विधानसभाओं को प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार है। यह सुनिश्चित करता है कि सार्वजनिक धन का उचित और प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए।
- संघ और राज्यों के बीच राजस्व का वितरण: यह वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) का कार्य है।
- चुनाव आयोजित करना: यह भारत के चुनाव आयोग (अनुच्छेद 324) का कार्य है।
- लोकपाल की नियुक्ति करना: लोकपाल एक वैधानिक निकाय है, संवैधानिक नहीं।
प्रश्न 17: भारत में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?
- (A) भारत का मुख्य न्यायाधीश
- (B) संबंधित राज्य का राज्यपाल
- (C) भारत का राष्ट्रपति
- (D) प्रधानमंत्री
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
- भारत का राष्ट्रपति सही है: अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश, संबंधित राज्य के राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश के अलावा किसी अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति के मामले में उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करने के बाद की जाती है।
- अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि वे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए उचित संवैधानिक प्राधिकरण नहीं हैं।
प्रश्न 18: भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के तहत वित्त आयोग का गठन किया जाता है?
- (A) अनुच्छेद 268
- (B) अनुच्छेद 280
- (C) अनुच्छेद 300
- (D) अनुच्छेद 307
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- अनुच्छेद 280 सही है: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 राष्ट्रपति को प्रत्येक पांच वर्ष या उससे पहले एक वित्त आयोग का गठन करने का अधिकार देता है। इसका मुख्य कार्य संघ और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण और राज्यों को सहायता अनुदान के संबंध में राष्ट्रपति को सिफारिशें करना है।
- अनुच्छेद 268: संघ द्वारा लगाए गए लेकिन राज्यों द्वारा एकत्र और विनियोजित किए गए करों से संबंधित है।
- अनुच्छेद 300: सरकार के मुकदमे (Suits and Proceedings) से संबंधित है।
- अनुच्छेद 307: अनुच्छेद 301 से 304 के प्रयोजनों को प्रभावी करने के लिए प्राधिकरण की नियुक्ति से संबंधित है।
प्रश्न 19: राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति का उल्लेख किस अनुच्छेद में किया गया है?
- (A) अनुच्छेद 111
- (B) अनुच्छेद 123
- (C) अनुच्छेद 143
- (D) अनुच्छेद 213
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- अनुच्छेद 123 सही है: यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को संसद के अवकाश के दौरान अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान करता है। इन अध्यादेशों का वही बल और प्रभाव होता है जो संसद के अधिनियमों का होता है, लेकिन इन्हें संसद के फिर से सत्र में आने के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए।
- अनुच्छेद 111: संसद द्वारा पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति की सहमति से संबंधित है।
- अनुच्छेद 143: राष्ट्रपति की सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति से संबंधित है।
- अनुच्छेद 213: राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति से संबंधित है।
प्रश्न 20: निम्नलिखित में से कौन सा राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित नहीं है?
- (A) ग्राम पंचायतों का संगठन
- (B) उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी
- (C) मादक पेयों और हानिकारक नशीले पदार्थों के औषधीय प्रयोजनों से भिन्न उपभोग पर प्रतिबंध
- (D) कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक आधार पर संगठित करना
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी सही है: यह अनुच्छेद 43A में निहित एक समाजवादी सिद्धांत है, जिसे 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। यह गांधीवादी सिद्धांतों से सीधा संबंधित नहीं है।
- ग्राम पंचायतों का संगठन (अनुच्छेद 40): यह एक महत्वपूर्ण गांधीवादी सिद्धांत है जो ग्रामीण स्वशासन पर जोर देता है।
- मादक पेयों और हानिकारक नशीले पदार्थों के औषधीय प्रयोजनों से भिन्न उपभोग पर प्रतिबंध (अनुच्छेद 47): यह भी गांधीवादी दर्शन का हिस्सा है, विशेषकर निषेध के संदर्भ में।
- कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक आधार पर संगठित करना (अनुच्छेद 48): यह गांधीवादी सिद्धांत से प्रभावित है, जिसमें गोहत्या निषेध भी शामिल है।
प्रश्न 21: धन विधेयक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- (A) इसे केवल राज्यसभा में पेश किया जा सकता है।
- (B) इसे केवल राष्ट्रपति की सिफारिश पर लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
- (C) राज्यसभा इसे अस्वीकृत कर सकती है।
- (D) संयुक्त बैठक के प्रावधान धन विधेयक पर लागू होते हैं।
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- कथन (B) सही है: अनुच्छेद 110 (धन विधेयक की परिभाषा) और अनुच्छेद 109 (धन विधेयक के संबंध में विशेष प्रक्रिया) के अनुसार, एक धन विधेयक को केवल लोकसभा में और राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही पेश किया जा सकता है।
- कथन (A) गलत है: इसे केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
- कथन (C) गलत है: राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकृत नहीं कर सकती। वह केवल सिफारिशें कर सकती है, जिन्हें लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। राज्यसभा को 14 दिनों के भीतर विधेयक को वापस करना होता है, अन्यथा इसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
- कथन (D) गलत है: धन विधेयक के मामले में संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108) का कोई प्रावधान नहीं है, क्योंकि लोकसभा के पास इस पर विशेष शक्तियां होती हैं।
प्रश्न 22: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कितने प्रकार के रिट जारी किए जा सकते हैं?
- (A) 3
- (B) 4
- (C) 5
- (D) 6
उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
- 5 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 (सर्वोच्च न्यायालय) और अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय) के तहत पांच प्रकार के रिट जारी किए जा सकते हैं:
- बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus): अवैध निरोध से मुक्ति के लिए।
- परमादेश (Mandamus): सार्वजनिक अधिकारियों को उनके कर्तव्य का पालन करने का आदेश देने के लिए।
- प्रतिषेध (Prohibition): एक उच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालत को उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकने के लिए।
- उत्प्रेषण (Certiorari): एक उच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालत या न्यायाधिकरण के आदेश को रद्द करने के लिए।
- अधिकार पृच्छा (Quo Warranto): किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक पद पर अवैध रूप से कब्जा करने से रोकने के लिए।
प्रश्न 23: ‘संविधान की मूल संरचना का सिद्धांत’ किस ऐतिहासिक मामले में प्रतिपादित किया गया था?
- (A) गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
- (B) केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
- (C) मेनका गांधी बनाम भारत संघ
- (D) ए.के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) सही है: इस ऐतिहासिक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने ‘संविधान की मूल संरचना का सिद्धांत’ प्रतिपादित किया। न्यायालय ने कहा कि संसद के पास संविधान के किसी भी हिस्से को संशोधित करने की शक्ति है, लेकिन वह संविधान की मूल संरचना को बदल या नष्ट नहीं कर सकती।
- गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967): इस मामले में न्यायालय ने कहा था कि संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं कर सकती। केशवानंद भारती मामले ने इस निर्णय को पलट दिया।
- मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978): इस मामले ने अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ के अधिकार के दायरे को व्यापक बनाया।
- ए.के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य (1950): इस मामले में न्यायालय ने ‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ की संकीर्ण व्याख्या की थी, जिसे मेनका गांधी मामले में ‘उचित प्रक्रिया’ तक विस्तारित किया गया।
प्रश्न 24: भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में निम्नलिखित में से कौन भाग नहीं लेते हैं?
- (A) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य
- (B) राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
- (C) दिल्ली और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
- (D) राज्य विधान परिषदों के निर्वाचित सदस्य
उत्तर: (D)
विस्तृत व्याख्या:
- राज्य विधान परिषदों के निर्वाचित सदस्य सही है: अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति के चुनाव के लिए एक निर्वाचक मंडल होता है जिसमें शामिल होते हैं:
- संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य।
- राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
- दिल्ली और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (69वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया)।
राज्य विधान परिषदों के सदस्य (चाहे निर्वाचित हों या मनोनीत) इस चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।
प्रश्न 25: भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- (A) संशोधन विधेयक को किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
- (B) विधेयक को प्रत्येक सदन में साधारण बहुमत से पारित किया जाना चाहिए।
- (C) राष्ट्रपति संशोधन विधेयक पर सहमति देने के लिए बाध्य है।
- (D) कुछ प्रावधानों में संशोधन के लिए आधे राज्यों की विधानसभाओं के अनुसमर्थन की आवश्यकता होती है।
उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
- कथन (B) सही नहीं है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन विधेयक को संसद के प्रत्येक सदन में ‘विशेष बहुमत’ (सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत) से पारित किया जाना चाहिए, न कि साधारण बहुमत से।
- कथन (A) सही है: अनुच्छेद 368 के अनुसार, संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है।
- कथन (C) सही है: 24वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा अनुच्छेद 368 में संशोधन किया गया, जिसने राष्ट्रपति के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक पर अपनी सहमति देना ‘बाध्यकारी’ बना दिया।
- कथन (D) सही है: संविधान के कुछ संघीय स्वरूप वाले प्रावधानों (जैसे राष्ट्रपति का चुनाव, केंद्र-राज्य संबंधों से संबंधित प्रावधान) में संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत के अलावा आधे राज्यों की विधानसभाओं के साधारण बहुमत से अनुसमर्थन की भी आवश्यकता होती है।
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