क्या आप अपनी समाजशास्त्रीय समझ को चुनौती देने के लिए तैयार हैं?
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समाजशास्त्र केवल सिद्धांतों का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह समाज की जटिलताओं को समझने का एक लेंस है। यह दैनिक अभ्यास सेट विशेष रूप से UGC-NET, UPSC और राज्य PSC के उन गंभीर उम्मीदवारों के लिए तैयार किया गया है जो न केवल तथ्यों को रटते हैं, बल्कि उनके पीछे के गहरे तर्क को समझते हैं। अपनी विश्लेषणात्मक क्षमता को परखें और समाजशास्त्र के महान विचारकों से लेकर समकालीन डिजिटल चुनौतियों तक के अपने ज्ञान का परीक्षण करें!
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- \n ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा, जो सामाजिक मानदंडों के टूटने या अस्पष्टता की स्थिति को दर्शाती है, मुख्य रूप से किस समाजशास्त्री से जुड़ी है?\n
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- (A) कार्ल मार्क्स
- (B) मैक्स वेबर
- (C) एमिल दुर्खीम
- (D) हरबर्ट स्पेंसर
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सही उत्तर: (C) एमिल दुर्खीम
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\n विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने ‘एनोमी’ शब्द का उपयोग उस स्थिति का वर्णन करने के लिए किया जहां समाज में व्यक्ति को निर्देशित करने वाले नियम या मानदंड कमजोर हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है। यह विशेष रूप से उनकी पुस्तक ‘Suicide’ और ‘The Division of Labour in Society’ में प्रमुखता से आया है।\n
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: मार्क्स ने ‘अलगाव’ (Alienation) की बात की, वेबर ने ‘तार्किकता’ (Rationalization) पर जोर दिया, और स्पेंसर ने ‘सामाजिक डार्विनवाद’ का समर्थन किया।\n\n
- \n कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘अलगाव’ (Alienation) का प्राथमिक कारण क्या है?\n
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- (A) धार्मिक विश्वास
- (B) पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली
- (C) शिक्षा का अभाव
- (D) पारिवारिक विवाद
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सही उत्तर: (B) पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली
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\n विस्तृत व्याख्या: मार्क्स का तर्क था कि पूंजीवाद में श्रमिक अपने उत्पाद, उत्पादन की प्रक्रिया, अपनी मानवीय प्रकृति और अन्य श्रमिकों से अलग (alienated) हो जाता है क्योंकि उत्पादन के साधनों पर उसका नियंत्रण नहीं होता।\n
संदर्भ: यह मार्क्स के ‘Economic and Philosophic Manuscripts of 1844’ का मुख्य केंद्र है।\n\n
- \n मैक्स वेबर द्वारा प्रस्तुत ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) क्या है?\n
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- (A) समाज का एक नैतिक मॉडल
- (B) एक काल्पनिक और पूर्ण समाज की कल्पना
- (C) एक विश्लेषणात्मक उपकरण या मानसिक निर्माण जो तुलना के लिए उपयोग किया जाता है
- (D) एक ऐसी व्यवस्था जो पूरी तरह से त्रुटिहीन हो
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सही उत्तर: (C) एक विश्लेषणात्मक उपकरण या मानसिक निर्माण जो तुलना के लिए उपयोग किया जाता है
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\n विस्तृत व्याख्या: ‘आदर्श प्रारूप’ कोई वास्तविक वास्तविकता नहीं है, बल्कि एक वैचारिक उपकरण है जिसका उपयोग समाजशास्त्री वास्तविक दुनिया की घटनाओं की तुलना करने और उन्हें समझने के लिए करते हैं।\n
नोट: यहाँ ‘आदर्श’ का अर्थ ‘सर्वश्रेष्ठ’ नहीं, बल्कि ‘शुद्ध’ या ‘परिष्कृत’ रूप है।\n\n
- \n टैलकोट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ का क्या अर्थ है?\n
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- (A) Legality (कानूननता)
- (B) Latency (प्रसुप्तता)
- (C) Leadership (नेतृत्व)
- (D) Loyalty (निष्ठा)
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सही उत्तर: (B) Latency (प्रसुप्तता)
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\n विस्तृत व्याख्या: पार्सन्स के अनुसार, किसी भी सामाजिक प्रणाली को जीवित रहने के लिए चार कार्य करने होते हैं: Adaptation (अनुकूलन), Goal Attainment (लक्ष्य प्राप्ति), Integration (एकीकरण), और Latency (प्रसुप्तता/पैटर्न रखरखाव)। प्रसुप्तता का अर्थ है सांस्कृतिक मूल्यों और मानदंडों को बनाए रखना।\n
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- \n रॉबर्ट के. मर्टन के अनुसार, जब व्यक्ति समाज द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वीकृत साधनों का उपयोग नहीं करता और आपराधिक रास्ते चुनता है, तो इसे क्या कहा जाता है?\n
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- (A) अनुरूपता (Conformity)
- (B) नवाचार (Innovation)
- (C) अनुष्ठानवाद (Ritualism)
- (D) विद्रोह (Rebellion)
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सही उत्तर: (B) नवाचार (Innovation)
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\n विस्तृत व्याख्या: मर्टन के ‘Strain Theory’ के अनुसार, ‘नवाचार’ वह स्थिति है जहाँ व्यक्ति लक्ष्य (जैसे धन) को तो स्वीकार करता है, लेकिन उसे पाने के वैध साधनों (जैसे शिक्षा, कड़ी मेहनत) को अस्वीकार कर देता है।\n
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- \n जॉर्ज हरबर्ट मीड के अनुसार, ‘Self’ (स्व) का विकास किन दो चरणों के माध्यम से होता है?\n
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- (A) जन्म और मृत्यु
- (B) बचपन और किशोरावस्था
- (C) ‘I’ (मैं) और ‘Me’ (मुझे)
- (D) व्यक्तिगत और सामाजिक
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सही उत्तर: (C) ‘I’ (मैं) और ‘Me’ (मुझे)
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\n विस्तृत व्याख्या: मीड के अनुसार, ‘I’ व्यक्ति का स्वतःस्फूर्त और रचनात्मक पक्ष है, जबकि ‘Me’ समाज की उम्मीदों और मानदंडों का आंतरिक रूप है। इन दोनों के बीच संवाद से ‘Self’ का निर्माण होता है।\n
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- \n सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) के संदर्भ में ‘बंद स्तरीकरण’ (Closed Stratification) का उदाहरण कौन सा है?\n
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- (A) वर्ग प्रणाली (Class System)
- (B) जाति प्रणाली (Caste System)
- (C) योग्यता आधारित प्रणाली (Meritocracy)
- (D) व्यावसायिक पदसोपान
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सही उत्तर: (B) जाति प्रणाली (Caste System)
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\n विस्तृत व्याख्या: बंद स्तरीकरण वह व्यवस्था है जहाँ व्यक्ति की सामाजिक स्थिति जन्म से निर्धारित होती है और इसमें गतिशीलता (Mobility) लगभग असंभव होती है। जाति प्रणाली इसका सबसे सटीक उदाहरण है।\n
वर्ग प्रणाली: यह एक ‘खुला स्तरीकरण’ है क्योंकि इसमें शिक्षा और धन के माध्यम से स्थिति बदली जा सकती है।\n\n
- \n ‘सांस्कृतिक विलंबन’ (Cultural Lag) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की थी?\n
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- (A) ऑगस्ट कॉम्टे
- (B) डब्ल्यू.एफ. ऑगबर्न
- (C) हर्बर्ट स्पेंसर
- (D) मैक्स वेबर
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सही उत्तर: (B) डब्ल्यू.एफ. ऑगबर्न
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\n विस्तृत व्याख्या: ऑगबर्न के अनुसार, भौतिक संस्कृति (तकनीक, मशीनें) गैर-भौतिक संस्कृति (मान्यताएं, मूल्य, कानून) की तुलना में तेजी से बदलती है। इस अंतराल को ‘सांस्कृतिक विलंबन’ कहा जाता है।\n
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- \n पितृसत्तात्मक परिवार (Patrilineal Family) की मुख्य विशेषता क्या है?\n
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- (A) वंश का निर्धारण माता के नाम से होता है।
- (B) वंश और संपत्ति का हस्तांतरण पिता से पुत्र को होता है।
- (C) परिवार में निर्णय केवल महिलाएं लेती हैं।
- (D) इसमें कोई निश्चित वंश परंपरा नहीं होती।
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सही उत्तर: (B) वंश और संपत्ति का हस्तांतरण पिता से पुत्र को होता है।
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\n विस्तृत व्याख्या: पितृवंशीय या पितृसत्तात्मक व्यवस्था में वंशानुगत अधिकार और पारिवारिक नाम पिता की ओर से चलते हैं। इसके विपरीत, मातृवंशीय (Matrilineal) व्यवस्था में यह माता की ओर से होता है।\n
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- \n समाजशास्त्र में ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र/लौकिक’ (Profane) के बीच का अंतर किसने स्पष्ट किया?\n
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- (A) मैक्स वेबर
- (B) एमिल दुर्खीम
- (C) कार्ल मार्क्स
- (D) लुईस ड्युमों
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सही उत्तर: (B) एमिल दुर्खीम
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\n विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘The Elementary Forms of the Religious Life’ में तर्क दिया कि धर्म का सार चीजों को पवित्र और अपवित्र में विभाजित करना है। पवित्र वे चीजें हैं जिन्हें विशेष सम्मान और सुरक्षा दी जाती है।\n
समकालीन संदर्भ: हालिया शोध (जैसे फिल गोर्स्की की पुस्तक) भी इस बात की जांच करते हैं कि आधुनिक युग में ‘पवित्रता’ की अवधारणा कैसे विकसित हुई है।\n\n
- \n ‘हिडन करिकुलम’ (Hidden Curriculum) या ‘प्रच्छन्न पाठ्यक्रम’ का तात्पर्य क्या है?\n
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- (A) वह पाठ्यक्रम जो गुप्त रूप से पढ़ाया जाता है।
- (B) वह अनौपचारिक मूल्य, मानदंड और व्यवहार जो छात्र स्कूल में अनजाने में सीखते हैं।
- (C) शिक्षकों द्वारा छिपाया गया सिलेबस।
- (D) केवल व्यावसायिक प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम।
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सही उत्तर: (B) वह अनौपचारिक मूल्य, मानदंड और व्यवहार जो छात्र स्कूल में अनजाने में सीखते हैं।
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\n विस्तृत व्याख्या: यह वह शिक्षा है जो औपचारिक पाठ्यपुस्तकों से बाहर होती है, जैसे अनुशासन, सत्ता का सम्मान और सामाजिक पदानुक्रम को स्वीकार करना।\n
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- \n ‘प्रत्यक्षवाद’ (Positivism) का जनक किसे माना जाता है?\n
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- (A) मैक्स वेबर
- (B) ऑगस्ट कॉम्टे
- (C) एमिल दुर्खीम
- (D) जॉर्ज सिमेल
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सही उत्तर: (B) ऑगस्ट कॉम्टे
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\n विस्तृत व्याख्या: कॉम्टे ने तर्क दिया कि समाज का अध्ययन प्राकृतिक विज्ञानों (जैसे भौतिकी और रसायन शास्त्र) की तरह ही वैज्ञानिक विधियों, अवलोकन और प्रयोगों के आधार पर किया जाना चाहिए।\n
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- \n समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘एथ्नोग्राफी’ (Ethnography) का मुख्य उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) केवल सांख्यिकीय डेटा एकत्र करना।
- (B) किसी संस्कृति या समूह का गहराई से अवलोकन और सहभागी अनुभव प्राप्त करना।
- (C) प्रयोगशाला में नियंत्रित प्रयोग करना।
- (D) केवल पुस्तकालयों से द्वितीयक डेटा एकत्र करना।
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सही उत्तर: (B) किसी संस्कृति या समूह का गहराई से अवलोकन और सहभागी अनुभव प्राप्त करना।
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\n विस्तृत व्याख्या: एथ्नोग्राफी एक गुणात्मक विधि है जिसमें शोधकर्ता अध्ययन समूह के साथ रहकर उनके दैनिक जीवन और व्यवहार को करीब से देखता है।\n
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- \n एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
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- (A) संस्कृत भाषा सीखना।
- (B) निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और विचारधाराओं को अपनाकर अपनी स्थिति सुधारने का प्रयास।
- (C) उच्च जातियों का निम्न जातियों के साथ घुलना-मिलना।
- (D) केवल धार्मिक ग्रंथों का अनुवाद करना।
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सही उत्तर: (B) निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और विचारधाराओं को अपनाकर अपनी स्थिति सुधारने का प्रयास।
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\n विस्तृत व्याख्या: श्रीनिवास ने पाया कि भारतीय समाज में कुछ निम्न जातियां अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए उच्च जातियों (विशेषकर ब्राह्मणों) के कर्मकांडों और जीवनशैली को अपनाती हैं।\n
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- \n ‘प्रभावी जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा के लिए कौन सा कारक आवश्यक नहीं है?\n
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- (A) भूमि का स्वामित्व
- (B) संख्यात्मक शक्ति
- (C) राजनीतिक प्रभाव
- (D) उच्च अनुष्ठानिक स्थिति (Ritual Status)
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सही उत्तर: (D) उच्च अनुष्ठानिक स्थिति (Ritual Status)
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\n विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास के अनुसार, एक जाति ‘प्रभावी’ तब होती है जब उसके पास पर्याप्त भूमि, संख्यात्मक शक्ति और राजनीतिक प्रभाव हो, भले ही उसकी अनुष्ठानिक स्थिति (जाति पदानुक्रम में स्थान) सबसे ऊपर न हो।\n
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- \n जी.एस. घुरिये और वेरियर एल्विन के बीच जनजातियों (Tribes) के संबंध में मुख्य मतभेद क्या था?\n
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- (A) घुरिये उन्हें अलग मानते थे, एल्विन उन्हें समाज का हिस्सा।
- (B) घुरिये उन्हें ‘पिछड़े हिंदू’ मानते थे, जबकि एल्विन उन्हें बाहरी प्रभाव से बचाने के लिए ‘अलगाव’ (Isolation) का समर्थन करते थे।
- (C) दोनों जनजातियों के पूर्ण आत्मसातीकरण के समर्थक थे।
- (D) एल्विन उन्हें केवल आर्थिक दृष्टि से देखते थे।
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सही उत्तर: (B) घुरिये उन्हें ‘पिछड़े हिंदू’ मानते थे, जबकि एल्विन उन्हें बाहरी प्रभाव से बचाने के लिए ‘अलगाव’ (Isolation) का समर्थन करते थे।
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\n विस्तृत व्याख्या: घुरिये का मानना था कि जनजातियाँ भारतीय सभ्यता का हिस्सा हैं, जबकि एल्विन का मानना था कि बाहरी हस्तक्षेप उनकी संस्कृति को नष्ट कर देगा, इसलिए उन्हें संरक्षित रखा जाना चाहिए।\n
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- \n ग्रामीण समाजशास्त्र में ‘जजमानी व्यवस्था’ (Jajmani System) क्या है?\n
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- (A) भूमि का सरकारी वितरण।
- (B) जातियों के बीच सेवाओं और वस्तुओं के आदान-प्रदान की एक पारंपरिक पारस्परिक व्यवस्था।
- (C) केवल कृषि ऋण देने की एक प्रणाली।
- (D) शहरीकरण की एक प्रक्रिया।
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सही उत्तर: (B) जातियों के बीच सेवाओं और वस्तुओं के आदान-प्रदान की एक पारंपरिक पारस्परिक व्यवस्था।
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\n विस्तृत व्याख्या: जजमानी व्यवस्था में सेवा प्रदाता जातियां (जैसे नाई, लुहार) सेवा प्राप्तकर्ता (जजमान) को सेवा देती थीं और बदले में उन्हें अनाज या अन्य वस्तुएं मिलती थीं।\n
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- \n लुईस विर्थ के अनुसार, ‘शहरीवाद’ (Urbanism) क्या है?\n
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- (A) केवल शहरों में रहना।
- (B) जीवन जीने का एक तरीका (A way of life) जो उच्च जनसंख्या घनत्व और विविधता से प्रेरित है।
- (C) गांवों का शहरों में बदलना।
- (D) औद्योगिक उत्पादन की एक विधि।
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सही उत्तर: (B) जीवन जीने का एक तरीका (A way of life) जो उच्च जनसंख्या घनत्व और विविधता से प्रेरित है।
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\n विस्तृत व्याख्या: विर्थ ने तर्क दिया कि शहरी वातावरण सामाजिक संबंधों को अधिक औपचारिक, सतही और व्यक्तिगत बनाता है, जिससे एक विशिष्ट ‘शहरी जीवनशैली’ विकसित होती है।\n
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- \n ‘एल्गोरिथमिक बायस’ (Algorithmic Bias) का समाजशास्त्रीय प्रभाव क्या हो सकता है?\n
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- (A) यह केवल तकनीकी त्रुटि है, इसका सामाजिक प्रभाव नहीं होता।
- (B) यह डिजिटल इको-चेम्बर्स बनाकर राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक पूर्वाग्रहों को गहरा कर सकता है।
- (C) यह समाज में पूरी तरह से समानता लाता है।
- (D) यह केवल इंटरनेट की गति को प्रभावित करता है।
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सही उत्तर: (B) यह डिजिटल इको-चेम्बर्स बनाकर राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक पूर्वाग्रहों को गहरा कर सकता है।
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\n विस्तृत व्याख्या: जैसा कि हालिया समाचारों (जैसे TikTok एल्गोरिदम अध्ययन) में देखा गया है, जब एल्गोरिदम उपयोगकर्ता को केवल उसकी पसंद की या एक तरफा विचारधारा वाली सामग्री दिखाता है, तो यह समाज में वैचारिक विभाजन को बढ़ाता है।\n
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- \n शैक्षणिक संस्थानों में ‘नस्लीय या सामाजिक विविधता’ (Diversity) का छात्र प्रदर्शन पर क्या प्रभाव पड़ता है?\n
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- (A) इससे शैक्षणिक प्रदर्शन गिर जाता है।
- (B) इससे केवल प्रशासनिक कठिनाइयां बढ़ती हैं।
- (C) यह नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देता है और छात्रों की आलोचनात्मक सोच को विकसित करता है।
- (D) इसका प्रदर्शन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
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सही उत्तर: (C) यह नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देता है और छात्रों की आलोचनात्मक सोच को विकसित करता है।
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\n विस्तृत व्याख्या: हालिया शोध (जैसे अमेरिकी बिजनेस और लॉ स्कूलों का अध्ययन) संकेत देते हैं कि विविध पृष्ठभूमि के फैकल्टी और छात्रों के बीच संवाद से नए विचारों का जन्म होता है और समग्र शैक्षणिक परिणाम बेहतर होते हैं।\n
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- \n प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) का मुख्य केंद्र क्या है?\n
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- (A) बड़े पैमाने पर सामाजिक संरचनाएं।
- (B) सूक्ष्म स्तर पर व्यक्तियों के बीच प्रतीकों और अर्थों का आदान-प्रदान।
- (C) केवल आर्थिक वर्ग संघर्ष।
- (D) जैविक विकासवाद।
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सही उत्तर: (B) सूक्ष्म स्तर पर व्यक्तियों के बीच प्रतीकों और अर्थों का आदान-प्रदान।
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\n विस्तृत व्याख्या: यह विचारधारा मानती है कि समाज व्यक्तियों द्वारा साझा किए गए प्रतीकों और उनके द्वारा दिए गए अर्थों के माध्यम से निर्मित होता है।\n
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- \n कार्यक्षमतावाद (Functionalism) के अनुसार, समाज की स्थिति क्या होती है?\n
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- (A) निरंतर संघर्ष और युद्ध की स्थिति।
- (B) एक संतुलन (Equilibrium) की स्थिति जहाँ सभी अंग मिलकर स्थिरता बनाए रखते हैं।
- (C) पूरी तरह से अराजक।
- (D) केवल सत्ता के खेल द्वारा संचालित।
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सही उत्तर: (B) एक संतुलन (Equilibrium) की स्थिति जहाँ सभी अंग मिलकर स्थिरता बनाए रखते हैं।
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\n विस्तृत व्याख्या: कार्यात्मकतावादी समाज को एक जैविक शरीर की तरह देखते हैं जहाँ परिवार, धर्म और शिक्षा जैसे संस्थान समाज की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए विशिष्ट कार्य करते हैं।\n
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- \n ‘संघर्ष सिद्धांत’ (Conflict Theory) समाज को कैसे देखता है?\n
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- (A) सद्भाव और सहयोग के रूप में।
- (B) सीमित संसाधनों के लिए विभिन्न समूहों के बीच निरंतर प्रतिस्पर्धा और शक्ति संघर्ष के रूप में।
- (C) एक स्थिर और अपरिवर्तनीय व्यवस्था के रूप में।
- (D) केवल व्यक्तिगत इच्छाओं के योग के रूप में।
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सही उत्तर: (B) सीमित संसाधनों के लिए विभिन्न समूहों के बीच निरंतर प्रतिस्पर्धा और शक्ति संघर्ष के रूप में।
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\n विस्तृत व्याख्या: यह सिद्धांत (मुख्यतः मार्क्सवादी) मानता है कि सामाजिक परिवर्तन संघर्ष से आता है, न कि धीरे-धीरे होने वाले अनुकूलन से।\n
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- \n ‘सामाजिक परिवर्तन’ (Social Change) के विकासवादी सिद्धांत (Evolutionary Theory) का मुख्य तर्क क्या है?\n
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- (A) समाज अचानक बदलता है।
- (B) समाज सरल रूप से जटिल रूप की ओर धीरे-धीरे विकसित होता है।
- (C) समाज एक चक्र में घूमता है और वहीं वापस आता है।
- (D) परिवर्तन केवल राजनीतिक क्रांतियों से आता है।
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सही उत्तर: (B) समाज सरल रूप से जटिल रूप की ओर धीरे-धीरे विकसित होता है।
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\n विस्तृत व्याख्या: स्पेंसर जैसे विचारकों का मानना था कि समाज सरल (जैसे शिकारी-संग्रहकर्ता) से जटिल (जैसे आधुनिक औद्योगिक समाज) की ओर विकसित होता है।\n
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- \n ‘डिजिटल डिवाइड’ (Digital Divide) का समाजशास्त्रीय अर्थ क्या है?\n
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- (A) कंप्यूटर के अलग-अलग ब्रांडों का उपयोग।
- (B) सूचना और संचार तकनीक (ICT) तक पहुंच रखने वाले और न रखने वाले लोगों के बीच की सामाजिक-आर्थिक खाई।
- (C) केवल इंटरनेट की गति में अंतर।
- (D) सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के बीच का अंतर।
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सही उत्तर: (B) सूचना और संचार तकनीक (ICT) तक पहुंच रखने वाले और न रखने वाले लोगों के बीच की सामाजिक-आर्थिक खाई।
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\n विस्तृत व्याख्या: यह केवल तकनीक की उपलब्धता नहीं है, बल्कि यह भी है कि कौन इसका उपयोग अपने लाभ के लिए कर सकता है। यह वर्ग और जातिगत असमानताओं को और गहरा कर सकता है।\n
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- \n सामाजिक संस्थाओं के संदर्भ में ‘धर्म’ का प्राथमिक कार्य क्या है?\n
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- (A) केवल व्यक्तिगत शांति प्रदान करना।
- (B) सामाजिक एकजुटता (Social Solidarity) और साझा मूल्यों का निर्माण करना।
- (C) समाज में केवल अंधविश्वास फैलाना।
- (D) राजनीतिक सत्ता का विरोध करना।
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सही उत्तर: (B) सामाजिक एकजुटता (Social Solidarity) और साझा मूल्यों का निर्माण करना।
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\n विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम के अनुसार, धर्म लोगों को एक सामूहिक चेतना (Collective Conscience) से जोड़ता है, जिससे समाज में एकता और स्थिरता आती है।\n
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- \n पियरे बोर्दियू (Pierre Bourdieu) द्वारा प्रतिपादित ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) से क्या तात्पर्य है?\n
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- (A) बैंक में जमा पैसा।
- (B) वे ज्ञान, कौशल, शिक्षा और भाषा जो एक व्यक्ति को समाज में उच्च स्थिति दिलाने में मदद करते हैं।
- (C) केवल प्राचीन स्मारकों का संग्रह।
- (D) किसी देश की कुल जीडीपी।
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सही उत्तर: (B) वे ज्ञान, कौशल, शिक्षा और भाषा जो एक व्यक्ति को समाज में उच्च स्थिति दिलाने में मदद करते हैं।
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\n विस्तृत व्याख्या: बोर्दियू का तर्क था कि उच्च वर्ग के बच्चे स्कूल में बेहतर प्रदर्शन इसलिए करते हैं क्योंकि उनके पास पहले से ही वह ‘सांस्कृतिक पूंजी’ होती है जिसे स्कूल मूल्यवान मानता है।\n
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- \n ‘पब्लिक स्फीयर’ (Public Sphere) की अवधारणा किसने दी, जहाँ नागरिक स्वतंत्र रूप से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं?\n
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- (A) जुर्गन हैबरमास
- (B) एंथनी गिडिन्स
- (C) मिशेल फूको
- (D) ज़िगमुंट बॉमन
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सही उत्तर: (A) जुर्गन हैबरमास
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\n विस्तृत व्याख्या: हैबरमास ने तर्क दिया कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ‘सार्वजनिक क्षेत्र’ का होना आवश्यक है जहाँ तर्कसंगत बहस (Rational-critical debate) हो सके। डिजिटल युग में, एल्गोरिथमिक बायस इस क्षेत्र को सीमित कर रहा है।\n
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