समाजशास्त्र की वैचारिक यात्रा: दैनिक अभ्यास सेट
दैनिक समाजशास्त्र क्विज़ के एक नए सेट के साथ अपनी वैचारिक स्पष्टता और विश्लेषणात्मक कौशल का परीक्षण करने के लिए तैयार हो जाइए। यह सेट आपको समाजशास्त्रीय विचारकों, सिद्धांतों और समकालीन मुद्दों की गहरी समझ का पता लगाने के लिए चुनौती देगा। चाहे आप UGC-NET, UPSC, या किसी भी राज्य PSC की तैयारी कर रहे हों, ये प्रश्न आपकी तैयारी को नई धार देंगे। तो, अपनी किताबों को किनारे रख दें और इस बौद्धिक चुनौती को स्वीकार करें!
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किस समाजशास्त्री ने ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) की अवधारणा का प्रतिपादन किया था?
- एमिल दुर्खीम
- मैक्स वेबर
- कार्ल मार्क्स
- टैल्कॉट पार्सन्स
सही उत्तर: b) मैक्स वेबर
विस्तृत व्याख्या:
मैक्स वेबर ने आदर्श प्रारूप (Ideal Type) की अवधारणा का विकास किया, जो सामाजिक घटनाओं का विश्लेषण करने के लिए एक विश्लेषणात्मक उपकरण है। यह एक अमूर्त निर्माण है जो किसी विशेष सामाजिक घटना की मुख्य विशेषताओं को अतिरंजित करके प्रस्तुत करता है, ताकि वास्तविक दुनिया की घटनाओं को समझने और उनकी तुलना करने में मदद मिल सके। यह एक आदर्श या नैतिक मानक नहीं है, बल्कि एक methodological construct है। -
‘आत्महत्या’ (Suicide) के अध्ययन में ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा का उपयोग किस विचारक ने किया था?
- कार्ल मार्क्स
- मैक्स वेबर
- एमिल दुर्खीम
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड
सही उत्तर: c) एमिल दुर्खीम
विस्तृत व्याख्या:
एमिल दुर्खीम ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘ली सुसाइड’ (Le Suicide) में आत्महत्या के विभिन्न प्रकारों का विश्लेषण किया, जिनमें से एक ‘एनोमिक आत्महत्या’ (Anomic Suicide) थी। एनोमी एक ऐसी सामाजिक स्थिति को संदर्भित करती है जहाँ सामाजिक नियम और मानदंड कमजोर या अनुपस्थित हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों में दिशाहीनता और अर्थहीनता की भावना पैदा होती है। दुर्खीम ने तर्क दिया कि समाज के विनियमन की कमी से आत्महत्या दर में वृद्धि होती है। -
‘सामाजिक तथ्य’ (Social Fact) की अवधारणा किसने दी, जिसके अनुसार समाजशास्त्रीय अध्ययन का केंद्र सामाजिक तथ्य होने चाहिए?
- अगस्त कॉम्ते
- हर्बर्ट स्पेंसर
- एमिल दुर्खीम
- फर्डिनेंड टॉनीज
सही उत्तर: c) एमिल दुर्खीम
विस्तृत व्याख्या:
एमिल दुर्खीम ने ‘सामाजिक तथ्य’ की अवधारणा को समाजशास्त्र के अध्ययन की केंद्रीय वस्तु के रूप में परिभाषित किया। उनके अनुसार, सामाजिक तथ्य वे व्यवहार के तरीके, विचार और भावनाएँ हैं जो व्यक्ति के बाहर मौजूद होते हैं और उस पर एक बाध्यकारी शक्ति रखते हैं। ये सामूहिक चेतना (Collective Conscience) का हिस्सा होते हैं और व्यक्तियों के व्यवहार को आकार देते हैं। -
कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘अलगाव’ (Alienation) मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
- धार्मिक प्रथाएँ
- राजनीतिक शक्ति
- उत्पादन प्रक्रिया
- परिवार संरचना
सही उत्तर: c) उत्पादन प्रक्रिया
विस्तृत व्याख्या:
कार्ल मार्क्स ने अपनी ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा को पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली के संदर्भ में विकसित किया। उन्होंने तर्क दिया कि पूंजीवाद श्रमिकों को उनके श्रम के उत्पाद, स्वयं की गतिविधि, प्रजाति-सार (species-being), और अन्य मनुष्यों से अलग कर देता है। यह अलगाव मुख्य रूप से उत्पादन प्रक्रिया में श्रमिकों के नियंत्रण के अभाव और श्रम के परकीयकरण के कारण होता है। -
किस विचारक ने ‘सामाजिक क्रिया’ (Social Action) के चार प्रकारों – तार्किक, मूल्यांकनात्मक, भावात्मक और पारंपरिक – का उल्लेख किया है?
- जॉर्ज सिमेल
- मैक्स वेबर
- अल्फ्रेड शूट्ज़
- जी.एच. मीड
सही उत्तर: b) मैक्स वेबर
विस्तृत व्याख्या:
मैक्स वेबर ने समाजशास्त्र को ‘सामाजिक क्रिया’ का विज्ञान माना और सामाजिक क्रिया के चार आदर्श प्रारूपिक प्रकारों का वर्गीकरण किया: तार्किक क्रिया (Rational-purposive/Instrumental rationality), मूल्यांकनात्मक क्रिया (Value-rational), भावात्मक क्रिया (Affectual/Emotional), और पारंपरिक क्रिया (Traditional)。 उनके लिए, सामाजिक क्रिया वह क्रिया है जिसका कर्ता अपनी क्रिया के साथ एक व्यक्तिपरक अर्थ संलग्न करता है। -
‘प्रतिमान चर’ (Pattern Variables) की अवधारणा का संबंध किस समाजशास्त्री से है?
- रॉबर्ट के. मर्टन
- टैल्कॉट पार्सन्स
- जूलियन स्टीवर्ड
- क्लाउड लेवी-स्ट्रॉस
सही उत्तर: b) टैल्कॉट पार्सन्स
विस्तृत व्याख्या:
टैल्कॉट पार्सन्स ने ‘प्रतिमान चर’ (Pattern Variables) की अवधारणा को सामाजिक व्यवस्था में कर्ता के सामने आने वाली दुविधाओं और उनके समाधान के रूप में प्रस्तुत किया। ये सामाजिक अंतःक्रियाओं में अपेक्षाओं के पाँच द्विदलीय समूह हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि व्यक्ति सामाजिक भूमिकाओं में कैसे व्यवहार करते हैं। ये हैं: भावात्मकता बनाम भावात्मक तटस्थता, विशिष्टता बनाम सार्वभौमिकता, उपलब्धि बनाम आनुवंशिक स्थिति, विसरण बनाम विशिष्टता, और आत्म-अभिविन्यास बनाम सामूहिक-अभिविन्यास। -
संस्कृति को ‘ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता, कानून, रीति-रिवाज, और समाज के सदस्य के रूप में मनुष्य द्वारा अर्जित किसी भी अन्य क्षमता और आदतों का वह जटिल समग्र’ किसने परिभाषित किया?
- रॉबर्ट बिर्स्टेड
- रॉबर्ट पार्क
- ई.बी. टायलर
- मैक्स वेबर
सही उत्तर: c) ई.बी. टायलर
विस्तृत व्याख्या:
एडवर्ड बर्नेट टायलर (E.B. Tylor) ने अपनी पुस्तक ‘प्रिमिटिव कल्चर’ (Primitive Culture, 1871) में संस्कृति की यह शास्त्रीय परिभाषा दी। यह परिभाषा संस्कृति को मानव समाज में सीखे गए व्यवहार, ज्ञान और उत्पादों के एक जटिल सेट के रूप में देखती है, जो जैविक रूप से विरासत में नहीं मिलता बल्कि सामाजिक रूप से पारित होता है। -
भारतीय समाज के अध्ययन में ‘प्रभुत्वशाली जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा किसने दी?
- एम.एन. श्रीनिवास
- जी.एस. घुरिये
- योगेन्द्र सिंह
- आंद्रे बेतेई
सही उत्तर: a) एम.एन. श्रीनिवास
विस्तृत व्याख्या:
एम.एन. श्रीनिवास ने ग्रामीण भारत के अध्ययन के दौरान ‘प्रभुत्वशाली जाति’ की अवधारणा विकसित की। उनके अनुसार, एक जाति को प्रभुत्वशाली तब कहा जाता है जब वह संख्यात्मक शक्ति, आर्थिक शक्ति (भूमि स्वामित्व), राजनीतिक शक्ति, उच्च अनुष्ठानिक स्थिति और पश्चिमी शिक्षा व नौकरियों तक पहुंच के कारण स्थानीय समाज में अत्यधिक प्रभाव रखती है। -
‘सांस्कृतिक विलंबना’ (Cultural Lag) की अवधारणा का संबंध किस समाजशास्त्री से है?
- विलियम एफ. ओगबर्न
- रॉबर्ट रेडफील्ड
- मिल्टन सिंगर
- लेविस हेनरी मॉर्गन
सही उत्तर: a) विलियम एफ. ओगबर्न
विस्तृत व्याख्या:
विलियम एफ. ओगबर्न ने अपनी पुस्तक ‘सोशल चेंज विद रेस्पेक्ट टू कल्चर एंड ओरिजिनल नेचर’ (Social Change with Respect to Culture and Original Nature, 1922) में ‘सांस्कृतिक विलंबना’ की अवधारणा प्रस्तुत की। यह उस स्थिति को संदर्भित करती है जब भौतिक संस्कृति (प्रौद्योगिकी) में परिवर्तन तेजी से होते हैं, लेकिन गैर-भौतिक संस्कृति (मानदंड, मूल्य, विश्वास) उनके साथ तालमेल नहीं बिठा पाती, जिससे समाज में समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। -
ग्रामीण-शहरी सातत्य (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा किसने प्रस्तुत की, जिसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को अलग-अलग श्रेणियों के बजाय एक स्पेक्ट्रम पर देखा जाता है?
- लुई विर्थ
- रॉबर्ट रेडफील्ड
- अर्नेस्ट बर्गेस
- होमर होईट
सही उत्तर: b) रॉबर्ट रेडफील्ड
विस्तृत व्याख्या:
रॉबर्ट रेडफील्ड ने ‘लोक समाज’ (Folk Society) और ‘शहरी समाज’ (Urban Society) की अपनी अवधारणाओं के आधार पर ग्रामीण-शहरी सातत्य का विचार प्रस्तुत किया। उनका तर्क था कि समाज के ये दोनों प्रकार निरपेक्ष नहीं हैं, बल्कि एक स्पेक्ट्रम पर स्थित हैं जहां एक छोर पर ‘लोक समाज’ के गुण होते हैं और दूसरे पर ‘शहरी समाज’ के, और इनके बीच एक निरंतरता होती है। उन्होंने मैक्सिकन गांव टेपोज्त्लान के अध्ययन के आधार पर यह विचार विकसित किया। -
सामाजिक स्तरीकरण के ‘संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक सिद्धांत’ (Structural-Functional Theory of Stratification) से कौन से समाजशास्त्री संबंधित हैं?
- कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स
- मैक्स वेबर और रॉबर्ट मिचेल्स
- किंग्सले डेविस और विल्बर्ट मूर
- सी. राइट मिल्स और राल्फ डहरेनडॉर्फ
सही उत्तर: c) किंग्सले डेविस और विल्बर्ट मूर
विस्तृत व्याख्या:
किंग्सले डेविस और विल्बर्ट मूर ने ‘प्रिंसिपल्स ऑफ स्ट्रैटिफिकेशन’ (Principles of Stratification, 1945) नामक अपने निबंध में तर्क दिया कि सामाजिक स्तरीकरण समाज के लिए प्रकार्यात्मक रूप से आवश्यक है। उनका मानना था कि समाज में कुछ पद दूसरों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होते हैं, और इन पदों को भरने के लिए योग्य व्यक्तियों को प्रेरित करने हेतु असमान पुरस्कार ( आय, प्रतिष्ठा, शक्ति) आवश्यक होते हैं। यह सिद्धांत बताता है कि असमानता समाज में दक्षता और उत्पादकता को बढ़ावा देती है। -
निम्नलिखित में से कौन भारतीय समाजशास्त्र में ‘इंडोलॉजिकल परिप्रेक्ष्य’ (Indological Perspective) के प्रमुख समर्थक थे?
- एम.एन. श्रीनिवास
- ए.आर. देसाई
- जी.एस. घुरिये
- डी.पी. मुखर्जी
सही उत्तर: c) जी.एस. घुरिये
विस्तृत व्याख्या:
जी.एस. घुरिये को भारतीय समाजशास्त्र में ‘इंडोलॉजिकल परिप्रेक्ष्य’ के जनक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भारतीय समाज को समझने के लिए शास्त्रों, ग्रंथों, और प्राचीन भारतीय साहित्य का गहन अध्ययन किया। उनका मानना था कि भारतीय समाज की विशिष्टता को समझने के लिए पश्चिमी अवधारणाओं के बजाय भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ को समझना महत्वपूर्ण है। -
‘संकेतात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) का जनक किसे माना जाता है?
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड
- इरविन गॉफमैन
- चार्ल्स कूले
- हरबर्ट ब्लूमर
सही उत्तर: a) जॉर्ज हर्बर्ट मीड
विस्तृत व्याख्या:
जॉर्ज हर्बर्ट मीड को ‘संकेतात्मक अंतःक्रियावाद’ के सैद्धांतिक आधारशिला रखने वाले विचारक के रूप में जाना जाता है। हालांकि हरबर्ट ब्लूमर ने इस शब्द को गढ़ा और सिद्धांत को व्यवस्थित किया, मीड के विचार (विशेषकर ‘स्व’ (Self) और ‘मी’ (Me) की अवधारणाएं) इस दृष्टिकोण के मूल में हैं। यह सिद्धांत व्यक्तियों के बीच प्रतीकों के माध्यम से होने वाली अंतःक्रिया और अर्थ निर्माण पर केंद्रित है। -
‘लघु समुदाय’ (Little Community) की अवधारणा किसने दी?
- रॉबर्ट रेडफील्ड
- मैक्स वेबर
- टैल्कॉट पार्सन्स
- एमिल दुर्खीम
सही उत्तर: a) रॉबर्ट रेडफील्ड
विस्तृत व्याख्या:
रॉबर्ट रेडफील्ड ने अपनी मेक्सिकन लोक-समुदायों के अध्ययन के आधार पर ‘लघु समुदाय’ की अवधारणा विकसित की। उन्होंने ‘लघु समुदाय’ के चार मुख्य गुण बताए: विशिष्टता (Distinctiveness), लघुता (Smallness), समरूपता (Homogeneity) और आत्मनिर्भरता (Self-sufficiency)। यह अवधारणा उन छोटे, पारंपरिक समाजों को समझने में सहायक है जहां रिश्ते व्यक्तिगत और घनिष्ठ होते हैं। -
समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘केस स्टडी’ (Case Study) विधि का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- बड़ी आबादी के लिए सामान्यीकरण करना
- दो या अधिक चरों के बीच सहसंबंध स्थापित करना
- एक इकाई (व्यक्ति, समूह, संगठन) का गहन, विस्तृत अध्ययन करना
- मात्रात्मक डेटा का संग्रह और विश्लेषण करना
सही उत्तर: c) एक इकाई (व्यक्ति, समूह, संगठन) का गहन, विस्तृत अध्ययन करना
विस्तृत व्याख्या:
केस स्टडी विधि में एक विशिष्ट इकाई – चाहे वह एक व्यक्ति हो, एक छोटा समूह हो, एक समुदाय हो, या एक संगठन हो – का गहन और विस्तृत अध्ययन किया जाता है। इसका उद्देश्य उस इकाई के बारे में व्यापक और गहराई से समझना होता है, न कि बड़ी आबादी के लिए सामान्यीकरण करना। यह विधि अक्सर गुणात्मक अनुसंधान में उपयोग की जाती है और जटिल सामाजिक घटनाओं की सूक्ष्मताओं को उजागर करती है। -
हालिया समाचारों में उल्लिखित ‘सामाजिक माध्यमों पर सामुदायिक हानि के नैतिक आतंक’ (Moral Panic surrounding community loss on social media) की अवधारणा किस विचारक के कार्य से संबंधित है?
- एमिल दुर्खीम
- स्टेनली कोहेन
- हरबर्ट ब्लूमर
- इरविन गॉफमैन
सही उत्तर: b) स्टेनली कोहेन
विस्तृत व्याख्या:
स्टेनली कोहेन ने अपनी पुस्तक ‘फोल्क डेविल्स एंड मोरल पैनिक्स’ (Folk Devils and Moral Panics, 1972) में ‘नैतिक आतंक’ (Moral Panic) की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया। नैतिक आतंक एक ऐसी स्थिति है जहाँ समाज के एक समूह या स्थिति को समाज के मूल्यों और सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है, जिससे मीडिया और सार्वजनिक प्रतिक्रिया में अत्यधिक भय और चिंता फैल जाती है। सामाजिक माध्यमों पर सामुदायिक हानि के बारे में चिंताएँ अक्सर इसी प्रकार के नैतिक आतंक का रूप ले लेती हैं। -
‘नस्लीय पूंजीवाद’ (Racial Capitalism) और शहरी नियोजन पर केंद्रित ‘पोस्टकॉलोनी में नस्ल और स्थान’ (Race and Space in the Postcolony) के हालिया अध्ययन किस क्षेत्र से संबंधित हैं?
- आर्थिक समाजशास्त्र
- नगरीय समाजशास्त्र और पोस्टकोलोनियल अध्ययन
- पर्यावरण समाजशास्त्र
- ज्ञान का समाजशास्त्र
सही उत्तर: b) नगरीय समाजशास्त्र और पोस्टकोलोनियल अध्ययन
विस्तृत व्याख्या:
यह अध्ययन ‘नस्लीय पूंजीवाद’ के तहत शहरी नियोजन की तुलना ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में करता है, जो स्पष्ट रूप से नगरीय समाजशास्त्र और पोस्टकोलोनियल अध्ययन के चौराहे पर स्थित है। ‘नस्लीय पूंजीवाद’ का सिद्धांत बताता है कि पूंजीवाद का विकास हमेशा नस्लीय शोषण से जुड़ा रहा है। ‘पोस्टकॉलोनी’ उन समाजों को संदर्भित करता है जो उपनिवेशवाद से मुक्त हो गए हैं लेकिन अभी भी उपनिवेशवाद के संरचनात्मक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभावों से जूझ रहे हैं। यह अध्ययन विशेष रूप से शहर के स्थान के माध्यम से नस्लीय असमानताओं के निरंतर पुनरुत्पादन पर ध्यान केंद्रित करता है। -
हालिया समाचारों में इब्न खालदुन के ‘श्रम के मूल्य के सिद्धांत’ (Labor Theory of Value) पर नस्लीय दृष्टिकोण से पुनर्विचार का उल्लेख है। इब्न खालदुन मुख्य रूप से किस परंपरा से संबंधित थे?
- पश्चिमी प्रबोधन
- प्राचीन यूनानी दर्शन
- अरबी-इस्लामिक छात्रवृत्ति
- आधुनिक अर्थशास्त्र
सही उत्तर: c) अरबी-इस्लामिक छात्रवृत्ति
विस्तृत व्याख्या:
इब्न खालदुन (1332-1406) एक प्रभावशाली अरबी बहुश्रुत थे जिन्हें अक्सर समाजशास्त्र, इतिहास और अर्थशास्त्र के अग्रदूतों में से एक माना जाता है। उनकी कृति ‘मुकद्दमा’ (Muqaddimah) में समाज, संस्कृति, और राज्यों के उदय व पतन पर महत्वपूर्ण विचार शामिल हैं, जिसमें श्रम के मूल्य के सिद्धांत का प्रारंभिक रूप भी मिलता है। हालिया शोध उनके विचारों को नस्लीय न्याय और असमानता के समकालीन विमर्श से जोड़ रहा है, जो उनकी अवधारणाओं की बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है। -
‘ग्राम्य नगर सातत्य’ (Folk-Urban Continuum) की अवधारणा किस अमेरिकी समाजशास्त्री ने विकसित की?
- रॉबर्ट ई. पार्क
- अर्नेस्ट बर्गेस
- लुई विर्थ
- रॉबर्ट रेडफील्ड
सही उत्तर: d) रॉबर्ट रेडफील्ड
विस्तृत व्याख्या:
रॉबर्ट रेडफील्ड ने अपनी ‘ग्राम्य-शहरी सातत्य’ की अवधारणा में ‘लोक समाज’ और ‘शहरी समाज’ को एक ध्रुवीय पैमाने के दो सिरों के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने मेक्सिको के टेपोज्त्लान गांव के अपने अध्ययन के आधार पर यह विचार विकसित किया, जिसमें बताया गया कि समाज पूरी तरह से ग्रामीण या पूरी तरह से शहरी नहीं होते, बल्कि दोनों के गुणों का मिश्रण होते हैं जो एक सातत्य पर स्थित होते हैं। -
‘यांत्रिक और सावयवी एकजुटता’ (Mechanical and Organic Solidarity) की अवधारणाएँ किससे संबंधित हैं?
- कार्ल मार्क्स
- मैक्स वेबर
- एमिल दुर्खीम
- जॉर्ज सिमेल
सही उत्तर: c) एमिल दुर्खीम
विस्तृत व्याख्या:
एमिल दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘द डिविजन ऑफ लेबर इन सोसाइटी’ (The Division of Labor in Society) में ‘यांत्रिक एकजुटता’ और ‘सावयवी एकजुटता’ की अवधारणाओं को प्रस्तुत किया। ‘यांत्रिक एकजुटता’ कम श्रम विभाजन वाले पारंपरिक समाजों में पाई जाती है जहाँ व्यक्ति समान मूल्यों, विश्वासों और जीवन शैली को साझा करते हैं। ‘सावयवी एकजुटता’ उच्च श्रम विभाजन वाले आधुनिक समाजों में पाई जाती है जहाँ व्यक्ति अपनी विशिष्ट विशेषज्ञता के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। -
भारत में ‘सामाजिक परिवर्तन’ को समझने के लिए ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा किसने विकसित की?
- डी.पी. मुखर्जी
- एम.एन. श्रीनिवास
- योगेन्द्र सिंह
- सतीश सबरवाल
सही उत्तर: b) एम.एन. श्रीनिवास
विस्तृत व्याख्या:
एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा को भारतीय समाज में सामाजिक गतिशीलता और परिवर्तन की प्रक्रिया को समझाने के लिए विकसित किया। यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक ‘निम्न’ हिंदू जाति, या एक जनजातीय या अन्य समूह, एक ‘उच्च’ और अक्सर ‘द्विज’ जाति के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, विचारधारा और जीवन शैली को अपनाता है, ताकि अनुष्ठानिक सोपान में अपनी स्थिति को ऊपर उठा सके। -
कार्ल मार्क्स के ‘द्वंद्वात्मक भौतिकवाद’ (Dialectical Materialism) में, सामाजिक परिवर्तन का मुख्य चालक क्या है?
- विचारों का टकराव
- नैतिक और धार्मिक मूल्य
- उत्पादन के साधनों और उत्पादन संबंधों के बीच का विरोधाभास
- महान नेताओं की भूमिका
सही उत्तर: c) उत्पादन के साधनों और उत्पादन संबंधों के बीच का विरोधाभास
विस्तृत व्याख्या:
कार्ल मार्क्स के द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के अनुसार, सामाजिक परिवर्तन मुख्य रूप से भौतिक परिस्थितियों, विशेष रूप से ‘उत्पादन के साधनों’ (Forces of Production) और ‘उत्पादन संबंधों’ (Relations of Production) के बीच के विरोधाभासों और अंतर्विरोधों से प्रेरित होता है। जब उत्पादन के साधन विकसित होते हैं, तो वे मौजूदा उत्पादन संबंधों के साथ संघर्ष में आ जाते हैं, जिससे वर्ग संघर्ष होता है और अंततः समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन होता है। -
‘सामाजिक तथ्य’ (Social Facts) की विशेषताएँ क्या हैं?
- व्यक्तिगत, आंतरिक और लचीले
- बाह्य, बाध्यकारी और सामान्य
- जैविक, सहज और अपरिवर्तनीय
- मनोवैज्ञानिक, स्वैच्छिक और अद्वितीय
सही उत्तर: b) बाह्य, बाध्यकारी और सामान्य
विस्तृत व्याख्या:
एमिल दुर्खीम ने सामाजिक तथ्यों को ऐसी घटनाओं के रूप में परिभाषित किया जो व्यक्ति के बाहर मौजूद होती हैं (बाह्य), व्यक्तियों पर बाध्यकारी दबाव डालती हैं (बाध्यकारी), और किसी दिए गए समाज में व्यापक रूप से वितरित होती हैं (सामान्य)। ये व्यक्ति की व्यक्तिगत चेतना से स्वतंत्र होते हैं और उसे नियंत्रित करते हैं। -
हालिया समाचारों में विज्ञान कथा (Science-fiction) कथाओं के समाजशास्त्रीय आयामों का विश्लेषण किस अध्ययन क्षेत्र से संबंधित हो सकता है?
- चिकित्सा समाजशास्त्र
- ज्ञान का समाजशास्त्र और संस्कृति का समाजशास्त्र
- शिक्षा का समाजशास्त्र
- जनसंख्या का समाजशास्त्र
सही उत्तर: b) ज्ञान का समाजशास्त्र और संस्कृति का समाजशास्त्र
विस्तृत व्याख्या:
विज्ञान कथा कथाओं (जैसे *Project Hail Mary*, *Star Trek*, *Broken Earth* trilogy) का समाजशास्त्रीय विश्लेषण मुख्य रूप से ज्ञान के समाजशास्त्र और संस्कृति के समाजशास्त्र से संबंधित है। ज्ञान का समाजशास्त्र इस बात का अध्ययन करता है कि सामाजिक संरचनाएं ज्ञान के निर्माण और प्रसार को कैसे प्रभावित करती हैं, और संस्कृति का समाजशास्त्र प्रतीकात्मक प्रणालियों, मूल्यों, और सांस्कृतिक उत्पादों (जैसे साहित्य, कला) को कैसे आकार देता है और उन्हें कैसे समझा जाता है, इसका अध्ययन करता है। विज्ञान कथाएं अक्सर समकालीन सामाजिक चिंताओं, भविष्य की संभावनाओं और मानवीय संबंधों पर विचार करने का एक मंच प्रदान करती हैं। -
हाल ही में ‘कागज पत्रकारिता’ (Paper Journalism) के भविष्य और समाजशास्त्रीय अनुसंधान के लिए इसके निहितार्थों पर चर्चा की गई है। यह किस समाजशास्त्रीय उप-क्षेत्र से सबसे अधिक प्रासंगिक है?
- परिवार का समाजशास्त्र
- धर्म का समाजशास्त्र
- मीडिया का समाजशास्त्र और अनुसंधान विधियां
- पर्यावरण का समाजशास्त्र
सही उत्तर: c) मीडिया का समाजशास्त्र और अनुसंधान विधियां
विस्तृत व्याख्या:
कागज पत्रकारिता का भविष्य और समाजशास्त्रीय अनुसंधान के लिए इसके निहितार्थ सीधे तौर पर मीडिया के समाजशास्त्र और अनुसंधान विधियों से संबंधित हैं। मीडिया का समाजशास्त्र मीडिया के सामाजिक प्रभावों, उत्पादन और खपत का अध्ययन करता है, जबकि अनुसंधान विधियां डेटा संग्रह के स्रोत के रूप में पत्रकारिता के दस्तावेजों पर निर्भरता और नए डिजिटल मीडिया स्रोतों की उभरती भूमिका पर ध्यान केंद्रित करती हैं। पारंपरिक मीडिया के क्षरण से सूचना तक पहुंच, डेटा अभिलेखागार और सामाजिक मुद्दों की सार्वजनिक समझ प्रभावित होती है। -
नाइजीरिया में बड़े पैमाने पर ‘दस्युता’ (Banditry) पर हुए नए शोध और इसके सामाजिक निहितार्थ किस समाजशास्त्रीय अध्ययन क्षेत्र से संबंधित हैं?
- शिक्षा का समाजशास्त्र
- जनसंख्या का समाजशास्त्र
- अपराध और विचलन का समाजशास्त्र
- स्वास्थ्य का समाजशास्त्र
सही उत्तर: c) अपराध और विचलन का समाजशास्त्र
विस्तृत व्याख्या:
नाइजीरिया में व्यापक दस्युता और इसके सामाजिक निहितार्थों पर नया शोध सीधे तौर पर अपराध और विचलन के समाजशास्त्र से संबंधित है। यह उप-क्षेत्र अपराध, सामाजिक नियंत्रण, कानून प्रवर्तन, और विचलन के सामाजिक कारणों और परिणामों का अध्ययन करता है। दस्युता जैसे बड़े पैमाने के अपराधों का विश्लेषण अक्सर सामाजिक-आर्थिक असमानताओं, शासन की कमजोरी, जातीय तनावों और सामाजिक विघटन जैसे व्यापक संरचनात्मक कारकों को ध्यान में रखता है।
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