नमस्ते भविष्य के समाजशास्त्रियों!
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अपनी तैयारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हो जाइए। आज का यह विशेष क्विज़ न केवल आपकी याददाश्त, बल्कि आपकी विश्लेषणात्मक क्षमता का भी कड़ा परीक्षण करेगा। समाजशास्त्रीय सिद्धांतों की गहराई में उतरें और अपनी वैचारिक स्पष्टता को और मजबूत करें। चलिए, इस बौद्धिक चुनौती को शुरू करते हैं!
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- कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘अलगाव’ (Alienation) की स्थिति मुख्य रूप से किस कारण से उत्पन्न होती है?\n
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- (A) सामाजिक अंतःक्रिया की कमी
- (B) पूंजीवादी उत्पादन पद्धति और श्रम का विभाजन
- (C) धार्मिक विश्वासों का प्रभाव
- (D) राजनीतिक अस्थिरता
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\nसही उत्तर: (B) पूंजीवादी उत्पादन पद्धति और श्रम का विभाजन\n
\nविस्तृत व्याख्या: मार्क्स के अनुसार, पूंजीवाद में श्रमिक अपने उत्पाद, उत्पादन की प्रक्रिया, अपने सहकर्मियों और अंततः स्वयं के ‘मानवीय essence’ से अलग हो जाता है। यह अलगाव तब होता है जब उत्पादन के साधनों पर पूंजीपतियों का नियंत्रण होता है और श्रमिक केवल एक मशीन का पुर्जा बनकर रह जाता है।\n
संदर्भ: मार्क्स का ‘Economic and Philosophic Manuscripts of 1844’।\n
गलत विकल्प: विकल्प A, C और D सामाजिक समस्याओं के कारण हो सकते हैं, लेकिन मार्क्स ने ‘अलगाव’ को विशेष रूप से आर्थिक संरचना और उत्पादन पद्धति से जोड़ा है।\n\n
- मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) क्या है?\n
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- (A) समाज का एक वास्तविक और सटीक विवरण
- (B) एक नैतिक मानक जिसे समाज को अपनाना चाहिए
- (C) एक मानसिक निर्माण या वैचारिक उपकरण जो तुलना के लिए उपयोग किया जाता है
- (D) समाज का सबसे उन्नत रूप
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\nसही उत्तर: (C) एक मानसिक निर्माण या वैचारिक उपकरण जो तुलना के लिए उपयोग किया जाता है\n
\nविस्तृत व्याख्या: ‘आदर्श प्रारूप’ कोई वास्तविक वास्तविकता नहीं है, बल्कि एक विश्लेषणात्मक उपकरण है जिसमें किसी घटना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है ताकि वास्तविक दुनिया की घटनाओं के साथ उसकी तुलना की जा सके।\n
संदर्भ: वेबर की समाजशास्त्रीय पद्धति (Methodology)।\n
गलत विकल्प: यह न तो वास्तविक विवरण है (A) और न ही कोई नैतिक आदर्श (B)।\n\n
- एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति कब उत्पन्न होती है?\n
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- (A) जब समाज में बहुत अधिक नियम होते हैं
- (B) जब सामाजिक मानदंडों का अभाव होता है या वे अस्पष्ट होते हैं
- (C) जब व्यक्ति समाज से पूरी तरह अलग हो जाता है
- (D) जब धर्म का प्रभाव बढ़ जाता है
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\nसही उत्तर: (B) जब सामाजिक मानदंडों का अभाव होता है या वे अस्पष्ट होते हैं\n
\nविस्तृत व्याख्या: ‘एनोमी’ या ‘नियमहीनता’ वह स्थिति है जहाँ समाज के सामूहिक मानक टूट जाते हैं, जिससे व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है। यह अक्सर तीव्र सामाजिक परिवर्तनों या आर्थिक संकटों के दौरान होता है।\n
संदर्भ: दुर्खीम की पुस्तक ‘Suicide’ (1897)।\n
गलत विकल्प: अत्यधिक नियम ‘Fatalistic’ आत्महत्या का कारण बनते हैं (A), न कि एनोमी का।\n\n
- टैलकोट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ का क्या अर्थ है?\n
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- (A) Legitimation (वैधता)
- (B) Latency (सुप्तता/पैटर्न रखरखाव)
- (C) Leadership (नेतृत्व)
- (D) Logic (तर्क)
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\nसही उत्तर: (B) Latency (सुप्तता/पैटर्न रखरखाव)\n
\nविस्तृत व्याख्या: AGIL मॉडल में: A = Adaptation, G = Goal Attainment, I = Integration, और L = Latency। ‘Latency’ का अर्थ है समाज के सांस्कृतिक मूल्यों और पैटर्न को बनाए रखना (जैसे परिवार और शिक्षा के माध्यम से)।\n
संदर्भ: संरचनात्मक कार्यात्मकता (Structural Functionalism)।\n
गलत विकल्प: Legitimation और Leadership इस मॉडल के प्राथमिक चार कार्यों में शामिल नहीं हैं।\n\n
- रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अप्रत्यक्ष कार्य’ (Latent Function) के बीच क्या अंतर बताया है?\n
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- (A) प्रकट कार्य हानिकारक होते हैं, अप्रत्यक्ष कार्य लाभदायक
- (B) प्रकट कार्य इच्छित और ज्ञात होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कार्य अनपेक्षित और अज्ञात होते हैं
- (C) प्रकट कार्य केवल धर्म से जुड़े होते हैं, अप्रत्यक्ष कार्य राजनीति से
- (D) दोनों में कोई वास्तविक अंतर नहीं है
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\nसही उत्तर: (B) प्रकट कार्य इच्छित और ज्ञात होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कार्य अनपेक्षित और अज्ञात होते हैं\n
\nविस्तृत व्याख्या: उदाहरण के लिए, विश्वविद्यालय जाने का ‘प्रकट कार्य’ शिक्षा प्राप्त करना और डिग्री लेना है, लेकिन इसका ‘अप्रत्यक्ष कार्य’ जीवनसाथी ढूँढना या नेटवर्किंग करना हो सकता है।\n
संदर्भ: मर्टन का कार्यात्मक विश्लेषण।\n
गलत विकल्प: विकल्प A गलत है क्योंकि अप्रत्यक्ष कार्य ‘अकार्य’ (Dysfunction) भी हो सकते हैं।\n\n
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) में क्या अंतर है?\n
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- (A) ‘मैं’ सामाजिक अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है, ‘मुझे’ व्यक्तिगत इच्छाओं का
- (B) ‘मैं’ रचनात्मक और स्वतःस्फूर्त पक्ष है, ‘मुझे’ समाज का आंतरिक रूप (Internalized society) है
- (C) ‘मैं’ और ‘मुझे’ एक ही चीज़ हैं
- (D) ‘मैं’ केवल बचपन में होता है, ‘मुझे’ वयस्कता में
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\nसही उत्तर: (B) ‘मैं’ रचनात्मक और स्वतःस्फूर्त पक्ष है, ‘मुझे’ समाज का आंतरिक रूप (Internalized society) है\n
\nविस्तृत व्याख्या: मीड के प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद में, ‘Me’ वह हिस्सा है जो समाज के मानदंडों और दूसरों की अपेक्षाओं को समझता है, जबकि ‘I’ उन अपेक्षाओं के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रिया है।\n
संदर्भ: प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism)।\n
गलत विकल्प: विकल्प A इनके अर्थों को उलट देता है।\n\n
- सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) के संदर्भ में ‘बंद स्तरीकरण’ (Closed Stratification) का उदाहरण कौन सा है?\n
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- (A) वर्ग प्रणाली (Class System)
- (B) जाति प्रणाली (Caste System)
- (C) योग्यता आधारित प्रणाली (Meritocracy)
- (D) व्यावसायिक श्रेणी
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\nसही उत्तर: (B) जाति प्रणाली (Caste System)\n
\nविस्तृत व्याख्या: बंद स्तरीकरण वह होता है जहाँ सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) बहुत सीमित या असंभव होती है। जाति जन्म आधारित होती है, इसलिए इसे बदला नहीं जा सकता।\n
संदर्भ: सामाजिक स्तरीकरण के सिद्धांत।\n
गलत विकल्प: वर्ग प्रणाली एक ‘खुली प्रणाली’ है जहाँ शिक्षा और धन के माध्यम से ऊपर बढ़ा जा सकता है (A)।\n\n
- संस्कृति के संदर्भ में ‘सांस्कृतिक अंतराल’ (Cultural Lag) की अवधारणा किसने दी थी?\n
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- (A) विलियम ऑगबर्न
- (B) किंग्सले डेविस
- (C) हर्बर्ट स्पेंसर
- (D) अगस्त कॉम्टे
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\nसही उत्तर: (A) विलियम ऑगबर्न\n
\nविस्तृत व्याख्या: ऑगबर्न के अनुसार, जब भौतिक संस्कृति (तकनीक) तेजी से बदलती है, लेकिन गैर-भौतिक संस्कृति (मूल्य, विश्वास, कानून) धीमी गति से बदलती है, तो उनके बीच एक अंतर पैदा हो जाता है जिसे ‘सांस्कृतिक अंतराल’ कहते हैं।\n
संदर्भ: सामाजिक परिवर्तन का सिद्धांत।\n
गलत विकल्प: अन्य विचारक सामाजिक विकास या संरचना पर केंद्रित थे, न कि विशेष रूप से इस अंतराल पर।\n\n
- निम्न में से कौन सी विशेषता ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) की है?\n
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- (A) औपचारिक संबंध और लिखित नियम
- (B) अल्पकालिक और व्यावसायिक उद्देश्य
- (C) घनिष्ठ, आमने-सामने के संबंध और भावनात्मक लगाव
- (D) विशाल आकार और जटिल संरचना
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\nसही उत्तर: (C) घनिष्ठ, आमने-सामने के संबंध और भावनात्मक लगाव\n
\nविस्तृत व्याख्या: सी.एच. कूली ने प्राथमिक समूह (जैसे परिवार, मित्र) की अवधारणा दी थी, जिसमें संबंध गहरे, व्यक्तिगत और स्थायी होते हैं।\n
संदर्भ: चार्ल्स कूली का सामाजिक मनोविज्ञान।\n
गलत विकल्प: विकल्प A, B और D ‘द्वितीयक समूहों’ (Secondary Groups) की विशेषताएं हैं।\n\n
- एमिल दुर्खीम ने ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र/लौकिक’ (Profane) के बीच अंतर को किस संदर्भ में समझाया है?\n
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- (A) सामाजिक स्तरीकरण
- (B) धर्म का समाजशास्त्र
- (C) शहरीकरण
- (D) अपराध विज्ञान
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\nसही उत्तर: (B) धर्म का समाजशास्त्र\n
\nविस्तृत व्याख्या: दुर्खीम के अनुसार, धर्म का आधार पवित्र और लौकिक वस्तुओं के बीच का विभाजन है। पवित्र वे चीजें हैं जिन्हें समाज विशेष सम्मान देता है और अलग रखता है।\n
संदर्भ: पुस्तक ‘The Elementary Forms of the Religious Life’।\n
गलत विकल्प: यह अवधारणा स्तरीकरण या शहरीकरण से संबंधित नहीं है।\n\n
- ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा एम.एन. श्रीनिवास ने किस संदर्भ में प्रस्तुत की थी?\n
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- (A) उच्च जातियों द्वारा निम्न जातियों का उत्पीड़न
- (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति सुधारने का प्रयास
- (C) केवल ब्राह्मणवादी परंपराओं का प्रसार
- (D) पश्चिमी संस्कृति का भारतीय समाज पर प्रभाव
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\nसही उत्तर: (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति सुधारने का प्रयास\n
\nविस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसमें निम्न जातियां या जनजातियां उच्च जातियों (विशेषकर द्विज) के रीति-रिवाजों, विचारधारा और जीवनशैली को अपनाती हैं ताकि वे सामाजिक पदानुक्रम में ऊपर उठ सकें।\n
संदर्भ: एम.एन. श्रीनिवास का भारतीय समाजशास्त्र।\n
गलत विकल्प: यह पश्चिमीकरण (D) या केवल उत्पीड़न (A) नहीं है।\n\n
- जी.एस. घुर्ये ने जाति व्यवस्था के बारे में क्या तर्क दिया था?\n
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- (A) जाति केवल एक आर्थिक विभाजन है
- (B) जाति एक बंद वर्ग है जिसका कोई प्रभाव नहीं है
- (C) जाति की विशेषताएँ जैसे श्रेणीबद्धता और अंतर्विवाह हैं
- (D) जाति पूरी तरह से पश्चिमी प्रभाव का परिणाम है
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\nसही उत्तर: (C) जाति की विशेषताएँ जैसे श्रेणीबद्धता और अंतर्विवाह हैं\n
\nविस्तृत व्याख्या: घुर्ये ने जाति के छह मुख्य लक्षण बताए थे, जिनमें श्रेणीबद्धता (Hierarchy), अंतर्विवाह (Endogamy) और नागरिक/धार्मिक अक्षमताएं शामिल थीं।\n
संदर्भ: घुर्ये का भारतीय समाज का अध्ययन।\n
गलत विकल्प: विकल्प A और B जाति की जटिल सामाजिक-धार्मिक प्रकृति को नज़रअंदाज़ करते हैं।\n\n
- ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) का तात्पर्य क्या है?\n
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- (A) इंटरनेट पर केवल उच्च जातियों का उपयोग
- (B) डिजिटल तकनीक और सूचना तक पहुँच में मौजूद सामाजिक और जातीय असमानता
- (C) सोशल मीडिया पर जाति आधारित समूह बनाना
- (D) कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के माध्यम से जाति का उन्मूलन
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\nसही उत्तर: (B) डिजिटल तकनीक और सूचना तक पहुँच में मौजूद सामाजिक और जातीय असमानता\n
\nविस्तृत व्याख्या: यह समकालीन अवधारणा है जो बताती है कि कैसे पारंपरिक सामाजिक असमानताएं (जैसे जाति) अब डिजिटल डिवाइड के रूप में प्रकट हो रही हैं, जहाँ कुछ समूहों की तकनीक और डिजिटल साक्षरता तक पहुँच दूसरों की तुलना में अधिक है।\n
संदर्भ: समकालीन भारतीय समाजशास्त्र और डिजिटल समाजशास्त्र।\n
गलत विकल्प: यह केवल समूह बनाने (C) तक सीमित नहीं है, बल्कि संसाधनों की असमानता के बारे में है।\n\n
- लुई वेर्थ (Louis Wirth) ने शहरीकरण को किस रूप में परिभाषित किया था?\n
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- (A) केवल जनसंख्या का घनत्व
- (B) जीवन जीने का एक तरीका (Urbanism as a way of life)
- (C) ग्रामीण क्षेत्रों का विनाश
- (D) औद्योगिक क्रांति का अंतिम चरण
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\nसही उत्तर: (B) जीवन जीने का एक तरीका (Urbanism as a way of life)\n
\nविस्तृत व्याख्या: वेर्थ का तर्क था कि शहरी जीवन केवल जनसंख्या और आकार के बारे में नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के व्यवहार, मनोविज्ञान और सामाजिक संबंधों (जैसे अनौपचारिक संबंधों की कमी) को बदल देता है।\n
संदर्भ: शहरी समाजशास्त्र (Urban Sociology)।\n
गलत विकल्प: केवल जनसंख्या (A) शहरीकरण का एक भौतिक पहलू है, न कि समाजशास्त्रीय परिभाषा।\n\n
- नृवंशविज्ञान (Ethnography) अनुसंधान की किस पद्धति के अंतर्गत आता है?\n
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- (A) मात्रात्मक पद्धति (Quantitative Method)
- (B) गुणात्मक पद्धति (Qualitative Method)
- (C) प्रयोगात्मक पद्धति (Experimental Method)
- (D) सांख्यिकीय पद्धति (Statistical Method)
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\nसही उत्तर: (B) गुणात्मक पद्धति (Qualitative Method)\n
\nविस्तृत व्याख्या: नृवंशविज्ञान में शोधकर्ता किसी समूह के बीच रहकर, सहभागी अवलोकन (Participant Observation) के माध्यम से उनके जीवन और संस्कृति का गहरा अध्ययन करता है।\n
संदर्भ: समाजशास्त्रीय अनुसंधान विधियाँ।\n
गलत विकल्प: मात्रात्मक (A) और सांख्यिकीय (D) विधियाँ संख्याओं और डेटा पर आधारित होती हैं, न कि गहरे अनुभवों पर।\n\n
- हालिया शोधों के अनुसार, शहरी अपराध अनुसंधान में ‘कंप्यूटेशनल डेटासेट्स’ (Computational Datasets) का उपयोग क्या बदल रहा है?\n
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- (A) अब पुलिस की आवश्यकता नहीं है
- (B) अपराध की भविष्यवाणी और पैटर्न विश्लेषण की सटीकता बढ़ रही है
- (C) अपराध पूरी तरह समाप्त हो रहे हैं
- (D) यह केवल ग्रामीण अपराधों के लिए उपयोगी है
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\nसही उत्तर: (B) अपराध की भविष्यवाणी और पैटर्न विश्लेषण की सटीकता बढ़ रही है\n
\nविस्तृत व्याख्या: बिग डेटा और एल्गोरिदम के उपयोग से समाजशास्त्री अब वास्तविक समय में अपराध के हॉटस्पॉट और सामाजिक कारकों के बीच संबंधों का विश्लेषण कर सकते हैं, जो पारंपरिक सर्वेक्षणों से कठिन था।\n
संदर्भ: डिजिटल समाजशास्त्र और आधुनिक अपराध विज्ञान (Criminology)।\n
गलत विकल्प: तकनीक पुलिस को प्रतिस्थापित नहीं करती (A), बल्कि उसकी मदद करती है।\n\n
- ‘हेजेमोनिक मैस्कुलिनिटी’ (Hegemonic Masculinity) के संदर्भ में, पुरुष ब्रेडविनर (Breadwinner) के रूप में स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक गिरावट का मुख्य कारण क्या हो सकता है?\n
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- (A) पर्याप्त धन की कमी
- (B) सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव कि उन्हें हमेशा मजबूत और एकमात्र प्रदाता होना चाहिए
- (C) महिलाओं की बढ़ती शिक्षा
- (D) शारीरिक श्रम की कमी
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\nसही उत्तर: (B) सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव कि उन्हें हमेशा मजबूत और एकमात्र प्रदाता होना चाहिए\n
\nविस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से, जब पुरुषों पर ‘एकमात्र प्रदाता’ होने का अत्यधिक दबाव होता है, तो वे अपनी भावनात्मक समस्याओं को व्यक्त नहीं कर पाते, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य गिरता है। इसे ‘विषाक्त पुरुषत्व’ (Toxic Masculinity) के दबाव के रूप में भी देखा जा सकता है।\n
संदर्भ: लिंग समाजशास्त्र (Sociology of Gender)।\n
गलत विकल्प: यह केवल आर्थिक कमी (A) नहीं, बल्कि एक सामाजिक संरचनात्मक दबाव है।\n\n
- ‘पब्लिक सोशियोलॉजी’ (Public Sociology) का मुख्य उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) केवल अकादमिक पत्रिकाओं में शोध प्रकाशित करना
- (B) समाजशास्त्रीय ज्ञान को आम जनता तक पहुँचाना और सामाजिक समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाना
- (C) सरकार के लिए गुप्त रिपोर्ट तैयार करना
- (D) समाजशास्त्र को एक गुप्त विज्ञान बनाना
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\nसही उत्तर: (B) समाजशास्त्रीय ज्ञान को आम जनता तक पहुँचाना और सामाजिक समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाना\n
\nविस्तृत व्याख्या: माइकल बुरावोय (Michael Burawoy) द्वारा लोकप्रिय इस अवधारणा का अर्थ है कि समाजशास्त्रियों को अपने ज्ञान का उपयोग समाज के वंचित वर्गों के साथ मिलकर सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए करना चाहिए।\n
संदर्भ: आधुनिक समाजशास्त्रीय विमर्श।\n
गलत विकल्प: विकल्प A ‘प्रोफेशनल सोशियोलॉजी’ का वर्णन करता है, पब्लिक सोशियोलॉजी का नहीं।\n\n
- जाजमानी व्यवस्था (Jajmani System) का संबंध मुख्य रूप से किससे है?\n
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- (A) शहरी व्यापारिक नेटवर्क
- (B) ग्रामीण भारत में जातियों के बीच पारस्परिक सेवा और विनिमय संबंध
- (C) आधुनिक बैंकिंग प्रणाली
- (D) जनजातीय विवाह प्रथाएं
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\nसही उत्तर: (B) ग्रामीण भारत में जातियों के बीच पारस्परिक सेवा और विनिमय संबंध\n
\nविस्तृत व्याख्या: जाजमानी व्यवस्था एक पारंपरिक आर्थिक व्यवस्था थी जहाँ सेवा प्रदाता जातियाँ (जैसे नाई, लुहार) उच्च जातियों (जजमान) को सेवाएँ देती थीं और बदले में उन्हें अनाज या अन्य लाभ मिलते थे।\n
संदर्भ: ग्रामीण समाजशास्त्र।\n
गलत विकल्प: यह शहरी (A) या बैंकिंग (C) प्रणाली नहीं है।\n\n
- ‘सामाजिक नियंत्रण’ (Social Control) के संदर्भ में, ‘अनौपचारिक नियंत्रण’ (Informal Control) का उदाहरण क्या है?\n
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- (A) अदालत द्वारा जुर्माना लगाना
- (B) पुलिस द्वारा गिरफ्तारी
- (C) समाज द्वारा किसी व्यक्ति की आलोचना या बहिष्कार करना
- (D) जेल की सजा
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\nसही उत्तर: (C) समाज द्वारा किसी व्यक्ति की आलोचना या बहिष्कार करना\n
\nविस्तृत व्याख्या: अनौपचारिक नियंत्रण वह होता है जो लिखित कानूनों के बजाय सामाजिक मानदंडों, परंपराओं और अंतःक्रियाओं के माध्यम से लागू होता है।\n
संदर्भ: समाजशास्त्रीय अवधारणाएं।\n
गलत विकल्प: A, B और D ‘औपचारिक नियंत्रण’ (Formal Control) के उदाहरण हैं क्योंकि ये राज्य और कानून द्वारा संचालित हैं।\n\n
- निम्नलिखित में से कौन सा विचारक ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) से गहराई से नहीं जुड़ा है?\n
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- (A) जी.एच. मीड
- (B) हर्बर्ट ब्लूमर
- (C) इरविंग गोफमैन
- (D) एमिल दुर्खीम
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\nसही उत्तर: (D) एमिल दुर्खीम\n
\nविस्तृत व्याख्या: दुर्खीम एक ‘प्रकार्यवाद’ (Functionalism) के प्रणेता थे, जो मैक्रो-लेवल (बड़े स्तर) के विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित करते थे। जबकि मीड, ब्लूमर और गोफमैन माइक्रो-लेवल (छोटे स्तर) और प्रतीकों के अर्थ पर ध्यान केंद्रित करते थे।\n
संदर्भ: समाजशास्त्रीय विचारधाराएं।\n
गलत विकल्प: अन्य तीनों विचारक अंतःक्रियावाद के स्तंभ माने जाते हैं।\n\n
- ‘सामाजिक गतिशीलता’ (Social Mobility) के संदर्भ में, जब एक व्यक्ति अपनी ही सामाजिक श्रेणी के भीतर पद बदलता है, तो उसे क्या कहते हैं?\n
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- (A) ऊर्ध्वगामी गतिशीलता (Upward Mobility)
- (B) अधोगामी गतिशीलता (Downward Mobility)
- (C) क्षैतिज गतिशीलता (Horizontal Mobility)
- (D) अंतर-पीढ़ीगत गतिशीलता (Inter-generational Mobility)
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\nसही उत्तर: (C) क्षैतिज गतिशीलता (Horizontal Mobility)\n
\nविस्तृत व्याख्या: क्षैतिज गतिशीलता तब होती है जब कोई व्यक्ति एक ही स्तर या पद से दूसरे समान स्तर के पद पर जाता है (जैसे एक शिक्षक का दूसरे स्कूल में उसी पद पर जाना)।\n
संदर्भ: सामाजिक स्तरीकरण।\n
गलत विकल्प: ऊर्ध्वगामी (A) और अधोगामी (B) में स्तर बदलता है।\n\n
- ‘मैत्रीपूर्ण संबंधों’ के बजाय ‘संविदात्मक संबंधों’ (Contractual Relations) का बढ़ना किस प्रक्रिया का संकेत है?\n
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- (A) सामुदायिक समाज से नागरिक समाज (Gemeinschaft to Gesellschaft) की ओर संक्रमण
- (B) शहरीकरण से ग्रामीणकरण की ओर जाना
- (C) धर्म का प्रभाव बढ़ना
- (D) संयुक्त परिवार का पुनरुत्थान
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\nसही उत्तर: (A) सामुदायिक समाज से नागरिक समाज (Gemeinschaft to Gesellschaft) की ओर संक्रमण\n
\nविस्तृत व्याख्या: फर्डिनेंड टोनीज़ ने ‘Gemeinschaft’ (समुदाय – जहाँ संबंध भावनात्मक और घनिष्ठ होते हैं) और ‘Gesellschaft’ (समाज/नागरिक समाज – जहाँ संबंध औपचारिक और स्वार्थ-आधारित होते हैं) के बीच अंतर बताया था।\n
संदर्भ: फर्डिनेंड टोनीज़ का समाजशास्त्र।\n
गलत विकल्प: यह ग्रामीणकरण (B) नहीं, बल्कि शहरीकरण और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया है।\n\n
- ‘द लेबर थ्योरी ऑफ वैल्यू’ (The Labour Theory of Value) का संबंध किस विचारक से है?\n
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- (A) मैक्स वेबर
- (B) कार्ल मार्क्स
- (C) टैलकोट पार्सन्स
- (D) अगस्त कॉम्टे
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\nसही उत्तर: (B) कार्ल मार्क्स\n
\nविस्तृत व्याख्या: मार्क्स का मानना था कि किसी वस्तु का मूल्य उसमें लगे ‘सामाजिक रूप से आवश्यक श्रम समय’ (Socially necessary labour time) से निर्धारित होता है। पूंजीपति इस श्रम मूल्य और वस्तु की बिक्री मूल्य के बीच के अंतर (Surplus Value) को मुनाफे के रूप में रख लेते हैं।\n
संदर्भ: मार्क्स का आर्थिक सिद्धांत।\n
गलत विकल्प: अन्य विचारक मूल्य के बजाय अर्थ या कार्य पर अधिक ध्यान देते थे।\n\n
- निम्नलिखित में से कौन सी एक ‘जनजातीय पहचान’ (Tribal Identity) की मुख्य विशेषता है?\n
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- (A) केवल शहरी क्षेत्रों में निवास
- (B) एक साझा संस्कृति, विशिष्ट भाषा और अक्सर भौगोलिक अलगाव
- (C) जाति पदानुक्रम का पूर्ण पालन
- (D) आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था पर पूर्ण निर्भरता
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\nसही उत्तर: (B) एक साझा संस्कृति, विशिष्ट भाषा और अक्सर भौगोलिक अलगाव\n
\nविस्तृत व्याख्या: जनजातियाँ आमतौर पर एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में रहती हैं और उनकी अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक और भाषाई पहचान होती है जो उन्हें व्यापक समाज से अलग करती है।\n
संदर्भ: भारतीय समाजशास्त्र – जनजातीय अध्ययन।\n
गलत विकल्प: जनजातियाँ जाति पदानुक्रम (C) का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि उनसे अलग पहचान रखती हैं।\n\n
- ‘सामाजिक संस्था’ (Social Institution) की सबसे सटीक परिभाषा क्या है?\n
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- (A) एक भौतिक इमारत जहाँ लोग मिलते हैं
- (B) स्थापित व्यवहार के पैटर्न और नियम जो समाज की बुनियादी जरूरतों को पूरा करते हैं
- (C) केवल सरकार और संसद
- (D) एक छोटा समूह जिसमें केवल 5 लोग हों
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\nसही उत्तर: (B) स्थापित व्यवहार के पैटर्न और नियम जो समाज की बुनियादी जरूरतों को पूरा करते हैं\n
\nविस्तृत व्याख्या: परिवार, धर्म, शिक्षा और अर्थव्यवस्था सामाजिक संस्थाएँ हैं क्योंकि वे समाज में व्यवहार को व्यवस्थित करती हैं और निरंतरता प्रदान करती हैं।\n
संदर्भ: बुनियादी समाजशास्त्रीय अवधारणाएं।\n
गलत विकल्प: संस्था केवल भौतिक इमारत (A) नहीं, बल्कि एक सामाजिक संरचना है।\n\n
- ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ में ‘लुकिंग ग्लास सेल्फ’ (Looking Glass Self) की अवधारणा किसने दी थी?\n
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- (A) चार्ल्स कूली
- (B) जॉर्ज हर्बर्ट मीड
- (C) मैक्स वेबर
- (D) हर्बर्ट स्पेंसर
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\nसही उत्तर: (A) चार्ल्स कूली\n
\nविस्तृत व्याख्या: कूली के अनुसार, हमारा ‘स्व’ (Self) इस बात से बनता है कि हम सोचते हैं कि दूसरे हमें कैसे देखते हैं। हम दूसरों को एक दर्पण (Mirror) की तरह उपयोग करते हैं।\n
संदर्भ: सामाजिक मनोविज्ञान।\n
गलत विकल्प: मीड (B) ने ‘I’ और ‘Me’ की बात की थी, लेकिन ‘लुकिंग ग्लास’ कूली की देन है।\n\n
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