नमस्कार भविष्य के समाजशास्त्रियों!
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क्या आप अपनी वैचारिक गहराई को परखने और प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी बढ़त बनाने के लिए तैयार हैं? आज का यह दैनिक अभ्यास सेट विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो समाजशास्त्र के जटिल सिद्धांतों और समकालीन सामाजिक बदलावों के बीच सेतु बनाना चाहते हैं। अपनी विश्लेषणात्मक क्षमता को चुनौती दें और जानें कि आप समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से दुनिया को कितनी सटीकता से देखते हैं। चलिए, इस बौद्धिक यात्रा को शुरू करते हैं!
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- शहरी समाजशास्त्र के संदर्भ में, आवास सामर्थ्य संकट (Housing Affordability Crisis) और विभिन्न नस्लीय समूहों पर इसके असमान प्रभाव को किस अवधारणा के माध्यम से सबसे अच्छी तरह समझा जा सकता है?\n
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- (A) शहरी पारिस्थितिकी (Urban Ecology)
- (B) स्थानिक असमानता (Spatial Inequality)
- (C) जेंट्रीफिकेशन (Gentrification)
- (D) शहरी प्रसार (Urban Sprawl)
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\n सही उत्तर: (B) स्थानिक असमानता (Spatial Inequality)
\n विस्तृत व्याख्या: स्थानिक असमानता तब होती है जब सामाजिक और आर्थिक संसाधन भौगोलिक रूप से असमान रूप से वितरित होते हैं। आवास संकट में जब विशिष्ट नस्लीय या सामाजिक-आर्थिक समूहों को सस्ते आवासों से दूर धकेला जाता है, तो यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि ‘स्थानिक अन्याय’ बन जाता है।
\n संदर्भ: यह अवधारणा आधुनिक शहरी समाजशास्त्र और आलोचनात्मक भूगोल से जुड़ी है।
\n गलत विकल्प: (A) शहरी पारिस्थितिकी केवल अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करती है। (C) जेंट्रीफिकेशन एक प्रक्रिया है, लेकिन असमान प्रभाव का व्यापक ढांचा ‘स्थानिक असमानता’ है। (D) शहरी प्रसार केवल शहर के भौतिक विस्तार को संदर्भित करता है।\n\n
- रिमोट-वर्क (Remote Work) संस्कृति के कारण सामाजिक अंतःक्रियाओं (Social Interactions) में आने वाले बदलावों का विश्लेषण करने के लिए कौन सा समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण सबसे उपयुक्त होगा?\n
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- (A) संरचनात्मक कार्यात्मकता (Structural Functionalism)
- (B) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism)
- (C) संघर्ष सिद्धांत (Conflict Theory)
- (D) विनिमय सिद्धांत (Exchange Theory)
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\n सही उत्तर: (B) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism)
\n विस्तृत व्याख्या: रिमोट वर्क ने हमारे संचार के संकेतों, प्रतीकों और गैर-शाब्दिक संकेतों (non-verbal cues) को बदल दिया है। प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि व्यक्ति सूक्ष्म स्तर पर अर्थ कैसे बनाते हैं और डिजिटल माध्यमों ने इन अंतःक्रियाओं के स्वरूप को कैसे बदला है।
\n संदर्भ: जॉर्ज हर्बर्ट मीड और हर्बर्ट ब्लूमर के कार्यों से प्रेरित।
\n गलत विकल्प: (A) यह केवल व्यवस्था के संतुलन पर ध्यान देता है। (C) यह शक्ति संघर्ष पर केंद्रित है। (D) यह केवल लाभ-हानि के लेन-देन पर आधारित है।\n\n
- भर्ती प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के पक्षपात (Bias) को समाजशास्त्र में किस प्रकार देखा जा सकता है?\n
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- (A) तकनीकी नियतिवाद (Technological Determinism)
- (B) संस्थागत भेदभाव (Institutional Discrimination)
- (C) डिजिटल विभाजन (Digital Divide)
- (D) सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility)
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\n सही उत्तर: (B) संस्थागत भेदभाव (Institutional Discrimination)
\n विस्तृत व्याख्या: जब AI एल्गोरिदम ऐतिहासिक डेटा का उपयोग करते हैं, तो वे अनजाने में पुराने पूर्वाग्रहों को दोहराते हैं। यह दर्शाता है कि भेदभाव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उन प्रणालियों और उपकरणों में अंतर्निहित (embedded) है जिनका उपयोग संस्थान करते हैं।
\n संदर्भ: यह समकालीन समाजशास्त्र में ‘एल्गोरिद्मिक पूर्वाग्रह’ (Algorithmic Bias) के अध्ययन का हिस्सा है।
\n गलत विकल्प: (A) यह मानता है कि तकनीक समाज को नियंत्रित करती है। (C) यह केवल पहुँच (access) की कमी की बात करता है, पक्षपात की नहीं। (D) यह स्थिति परिवर्तन से संबंधित है।\n\n
- जलवायु परिवर्तन सक्रियता (Climate Change Activism) और सामुदायिक एकजुटता (Community Cohesion) के बीच संबंध को समाजशास्त्रीय शब्दावली में क्या कहा जा सकता है?\n
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- (A) यांत्रिक एकजुटता (Mechanical Solidarity)
- (B) सामूहिक चेतना (Collective Consciousness)
- (C) सामाजिक विखंडन (Social Fragmentation)
- (D) विमुखता (Alienation)
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\n सही उत्तर: (B) सामूहिक चेतना (Collective Consciousness)
\n विस्तृत व्याख्या: जब एक समुदाय जलवायु परिवर्तन जैसे साझा खतरे के खिलाफ एकजुट होता है, तो उनमें एक साझा विश्वास और भावना विकसित होती है जिसे दुर्खीम ने ‘सामूहिक चेतना’ कहा है। यह साझा उद्देश्य लोगों को एक सूत्र में बांधता है।
\n संदर्भ: एमिल दुर्खीम का सिद्धांत।
\n गलत विकल्प: (A) यांत्रिक एकजुटता समानता पर आधारित होती है, जबकि सक्रियता अक्सर विविध समूहों को जोड़ती है। (C) यह एकजुटता का उल्टा है। (D) यह अलगाव की स्थिति है।\n\n
- महामारी के बाद आर्थिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य असमानताओं के बीच संबंध किस समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य का समर्थन करता है?\n
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- (A) यह कि मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह से जैविक है।
- (B) यह कि सामाजिक संरचना और आर्थिक स्थिति स्वास्थ्य परिणामों को प्रभावित करती है।
- (C) यह कि तनाव केवल व्यक्तिगत मनोविज्ञान का परिणाम है।
- (D) यह कि आर्थिक तनाव का स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
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\n सही उत्तर: (B) यह कि सामाजिक संरचना और आर्थिक स्थिति स्वास्थ्य परिणामों को प्रभावित करती है।
\n विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्र में ‘स्वास्थ्य का समाजशास्त्र’ (Sociology of Health) यह मानता है कि सामाजिक वर्ग, आय और रोजगार की स्थिति मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के वितरण को निर्धारित करती है।
\n संदर्भ: सामाजिक निर्धारकों का सिद्धांत (Social Determinants of Health)।
\n गलत विकल्प: (A) और (C) समाजशास्त्रीय नहीं बल्कि जैविक या मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण हैं। (D) यह तथ्यात्मक रूप से गलत है।\n\n
- कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘अलगाव’ (Alienation) की स्थिति का मुख्य कारण क्या है?\n
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- (A) सामाजिक मानदंडों का अभाव
- (B) पूंजीवादी उत्पादन की पद्धति और निजी स्वामित्व
- (C) धर्म का प्रभाव
- (D) शिक्षा की कमी
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\n सही उत्तर: (B) पूंजीवादी उत्पादन की पद्धति और निजी स्वामित्व
\n विस्तृत व्याख्या: मार्क्स के अनुसार, पूंजीवाद में श्रमिक अपनी उत्पादित वस्तु, उत्पादन की प्रक्रिया, अपने साथी श्रमिकों और अंततः स्वयं से अलग (alienated) हो जाता है क्योंकि उत्पादन के साधनों पर उसका नियंत्रण नहीं होता।
\n संदर्भ: मार्क्स की पुस्तक ‘1844 Manuscripts’।
\n गलत विकल्प: (A) यह दुर्खीम की ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति है। (C) धर्म अलगाव का परिणाम या पूरक हो सकता है, मुख्य कारण नहीं। (D) शिक्षा इसका समाधान हो सकती है, कारण नहीं।\n\n
- मैक्स वेबर ने ‘आदर्श प्रकार’ (Ideal Type) की अवधारणा का उपयोग किस उद्देश्य से किया था?\n
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- (A) समाज के लिए एक नैतिक मानक स्थापित करने के लिए
- (B) सामाजिक वास्तविकता के विश्लेषण के लिए एक तुलनात्मक उपकरण के रूप में
- (C) यह बताने के लिए कि समाज को कैसा होना चाहिए
- (D) केवल सांख्यिकीय डेटा एकत्र करने के लिए
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\n सही उत्तर: (B) सामाजिक वास्तविकता के विश्लेषण के लिए एक तुलनात्मक उपकरण के रूप में
\n विस्तृत व्याख्या: ‘आदर्श प्रकार’ कोई वास्तविक वस्तु नहीं है, बल्कि एक मानसिक निर्माण है जो किसी घटना के मुख्य लक्षणों को उजागर करता है ताकि वास्तविक मामलों की तुलना उससे की जा सके।
\n संदर्भ: वेबर की पद्धतिशास्त्र (Methodology)।
\n गलत विकल्प: (A) और (C) इसे ‘आदर्श’ शब्द के कारण गलत समझा जाता है, लेकिन यह नैतिक श्रेष्ठता के बारे में नहीं है। (D) यह एक गुणात्मक उपकरण है।\n\n
- एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति कब उत्पन्न होती है?\n
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- (A) जब समाज में बहुत अधिक नियम होते हैं।
- (B) जब सामाजिक मानदंडों का टूटना होता है और व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है।
- (C) जब व्यक्ति समाज से पूरी तरह कट जाता है।
- (D) जब वर्ग संघर्ष चरम पर होता है।
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\n सही उत्तर: (B) जब सामाजिक मानदंडों का टूटना होता है और व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है।
\n विस्तृत व्याख्या: एनोमी (नियमहीनता) तब होती है जब तेजी से होने वाले सामाजिक परिवर्तनों के कारण पुराने नियम काम नहीं करते और नए नियम अभी बने नहीं होते, जिससे व्यक्ति में असंतोष और दिशाहीनता आती है।
\n संदर्भ: दुर्खीम की पुस्तक ‘The Division of Labour in Society’ और ‘Suicide’।
\n गलत विकल्प: (A) यह अत्यधिक नियमन (Over-regulation) है। (C) यह सामाजिक अलगाव है। (D) यह मार्क्सवादी दृष्टिकोण है।\n\n
- ‘खुली स्तरीकरण प्रणाली’ (Open Stratification System) की मुख्य विशेषता क्या है?\n
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- (A) सामाजिक स्थिति जन्म से निर्धारित होती है।
- (B) सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) की संभावना होती है।
- (C) जाति व्यवस्था इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।
- (D) इसमें स्थिति परिवर्तन असंभव होता है।
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\n सही उत्तर: (B) सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) की संभावना होती है।
\n विस्तृत व्याख्या: खुली प्रणाली में व्यक्ति अपनी योग्यता, शिक्षा और प्रयास से अपनी सामाजिक स्थिति बदल सकता है (जैसे वर्ग व्यवस्था)।
\n संदर्भ: सामाजिक स्तरीकरण का सिद्धांत।
\n गलत विकल्प: (A) और (D) बंद प्रणालियों (Closed Systems) जैसे जाति व्यवस्था की विशेषताएं हैं। (C) जाति एक बंद प्रणाली है।\n\n
- विलियम ओगबर्न द्वारा प्रतिपादित ‘सांस्कृतिक पिछड़ापन’ (Cultural Lag) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) जब संस्कृति का विकास रुक जाता है।
- (B) भौतिक संस्कृति का अभौतिक संस्कृति की तुलना में तेजी से बदलना।
- (C) प्राचीन संस्कृति का आधुनिक संस्कृति में विलीन होना।
- (D) केवल ग्रामीण क्षेत्रों में संस्कृति का पिछड़ा होना।
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\n सही उत्तर: (B) भौतिक संस्कृति का अभौतिक संस्कृति की तुलना में तेजी से बदलना।
\n विस्तृत व्याख्या: भौतिक संस्कृति (तकनीक, गैजेट्स) तेजी से बदलती है, जबकि अभौतिक संस्कृति (मूल्य, विश्वास, कानून) धीमी गति से बदलती है। इनके बीच का यह अंतर ‘सांस्कृतिक पिछड़ापन’ कहलाता है।
\n संदर्भ: विलियम ओगबर्न का सिद्धांत।
\n गलत विकल्प: (A) यह विकास के रुकने की बात नहीं, बल्कि गति के अंतर की बात है। (C) यह सांस्कृतिक आत्मसातीकरण है। (D) यह भौगोलिक नहीं बल्कि वैचारिक अवधारणा है।\n\n
- टैल्कोट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ (Latency) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) अनुकूलन (Adaptation)
- (B) लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment)
- (C) एकीकरण (Integration)
- (D) प्रतिरूप अनुरक्षण (Latency/Pattern Maintenance)
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\n सही उत्तर: (D) प्रतिरूप अनुरक्षण (Latency/Pattern Maintenance)
\n विस्तृत व्याख्या: Latency का अर्थ है समाज के सांस्कृतिक मूल्यों और मानदंडों को बनाए रखना और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुँचाना (जैसे परिवार और शिक्षा के माध्यम से)।
\n संदर्भ: पार्सन्स का संरचनात्मक कार्यात्मकता सिद्धांत।
\n गलत विकल्प: (A) यह ‘A’ है। (B) यह ‘G’ है। (C) यह ‘I’ है।\n\n
- रॉबर्ट के. मर्टन के अनुसार, ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अंतर्निहित कार्य’ (Latent Function) में क्या अंतर है?\n
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- (A) प्रकट कार्य नकारात्मक होते हैं, अंतर्निहित सकारात्मक।
- (B) प्रकट कार्य इच्छित और ज्ञात होते हैं, जबकि अंतर्निहित अनपेक्षित और अज्ञात होते हैं।
- (C) दोनों एक ही होते हैं, केवल नाम अलग हैं।
- (D) अंतर्निहित कार्य केवल धर्म से संबंधित होते हैं।
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\n सही उत्तर: (B) प्रकट कार्य इच्छित और ज्ञात होते हैं, जबकि अंतर्निहित अनपेक्षित और अज्ञात होते हैं।
\n विस्तृत व्याख्या: उदाहरण के लिए, विश्वविद्यालय जाने का प्रकट कार्य डिग्री प्राप्त करना और ज्ञान बढ़ाना है, लेकिन अंतर्निहित कार्य सामाजिक नेटवर्क बनाना या जीवनसाथी खोजना हो सकता है।
\n संदर्भ: रॉबर्ट मर्टन का कार्यात्मक विश्लेषण।
\n गलत विकल्प: (A) दोनों सकारात्मक या नकारात्मक हो सकते हैं। (C) इनके बीच स्पष्ट अंतर है। (D) यह किसी भी सामाजिक संस्था पर लागू होता है।\n\n
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘I’ (मैं) और ‘Me’ (मुझे) में क्या अंतर है?\n
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- (A) ‘I’ सामाजिक अपेक्षाएं हैं और ‘Me’ व्यक्तिगत इच्छा।
- (B) ‘I’ व्यक्ति का रचनात्मक और स्वतःस्फूर्त हिस्सा है, जबकि ‘Me’ समाज द्वारा निर्मित आत्म है।
- (C) ‘I’ और ‘Me’ के बीच कोई अंतर नहीं है।
- (D) ‘Me’ केवल बचपन में होता है और ‘I’ वयस्कता में।
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\n सही उत्तर: (B) ‘I’ व्यक्ति का रचनात्मक और स्वतःस्फूर्त हिस्सा है, जबकि ‘Me’ समाज द्वारा निर्मित आत्म है।
\n विस्तृत व्याख्या: ‘Me’ वह प्रतिबिंब है जो हम दूसरों की नजरों से देखते हैं (सामाजिक आत्म), जबकि ‘I’ उस प्रतिबिंब के प्रति हमारी प्रतिक्रिया है।
\n संदर्भ: मीड का ‘Mind, Self and Society’।
\n गलत विकल्प: (A) यह ठीक उल्टा है। (C) ये आत्म के दो अलग-अलग पहलू हैं। (D) ये जीवनभर साथ चलते हैं।\n\n
- ‘पितृसत्तात्मक परिवार’ (Patriarchal Family) की मुख्य विशेषता क्या है?\n
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- (A) परिवार का नेतृत्व सबसे बुजुर्ग महिला करती है।
- (B) अधिकार और सत्ता का केंद्र पुरुष (पिता) होता है।
- (C) संपत्ति का समान वितरण होता है।
- (D) यह केवल मातृसत्तात्मक समाजों में पाया जाता है।
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\n सही उत्तर: (B) अधिकार और सत्ता का केंद्र पुरुष (पिता) होता है।
\n विस्तृत व्याख्या: पितृसत्ता में वंशानुगत अधिकार, संपत्ति का स्वामित्व और निर्णय लेने की शक्ति पिता या परिवार के वरिष्ठ पुरुष के पास होती है।
\n संदर्भ: परिवार और नातेदारी का समाजशास्त्र।
\n गलत विकल्प: (A) यह मातृसत्तात्मक परिवार है। (C) इसमें आमतौर पर संपत्ति पुरुषों तक सीमित रहती है। (D) यह पितृसत्तात्मक समाज की विशेषता है।\n\n
- ‘धर्मनिरपेक्षीकरण’ (Secularization) का समाजशास्त्रीय अर्थ क्या है?\n
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- (A) धर्म का पूरी तरह से समाप्त हो जाना।
- (B) समाज के सार्वजनिक जीवन और संस्थानों में धर्म के प्रभाव की कमी होना।
- (C) सभी धर्मों का एक हो जाना।
- (D) केवल व्यक्तिगत स्तर पर धर्म का पालन करना।
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\n सही उत्तर: (B) समाज के सार्वजनिक जीवन और संस्थानों में धर्म के प्रभाव की कमी होना।
\n विस्तृत व्याख्या: धर्मनिरपेक्षीकरण का मतलब यह नहीं है कि लोग नास्तिक हो गए हैं, बल्कि यह है कि राजनीति, शिक्षा और कानून जैसे क्षेत्रों में अब धार्मिक नियमों का प्रभाव कम हो गया है।
\n संदर्भ: आधुनिकता और धर्म का समाजशास्त्र।
\n गलत विकल्प: (A) धर्म समाप्त नहीं होता, बल्कि उसका स्वरूप बदलता है। (C) यह धार्मिक समन्वय है। (D) यह निजी धार्मिकता है, जबकि धर्मनिरपेक्षीकरण एक सामाजिक प्रक्रिया है।\n\n
- ‘नृवंशविज्ञान’ (Ethnography) अनुसंधान की वह विधि है जिसमें शोधकर्ता:\n
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- (A) केवल प्रश्नावली भेजकर डेटा एकत्र करता है।
- (B) प्रयोगशाला में प्रयोग करता है।
- (C) अध्ययन समूह के साथ लंबे समय तक रहकर उनका अवलोकन करता है।
- (D) केवल पुस्तकालयों में मौजूद दस्तावेजों का विश्लेषण करता है।
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\n सही उत्तर: (C) अध्ययन समूह के साथ लंबे समय तक रहकर उनका अवलोकन करता है।
\n विस्तृत व्याख्या: नृवंशविज्ञान में ‘प्रतिभागी अवलोकन’ (Participant Observation) मुख्य होता है, जहाँ शोधकर्ता लोगों की संस्कृति और व्यवहार को उनके प्राकृतिक वातावरण में समझता है।
\n संदर्भ: गुणात्मक अनुसंधान पद्धतियाँ (Qualitative Research Methods)।
\n गलत विकल्प: (A) यह सर्वेक्षण विधि है। (B) यह प्रयोगात्मक विधि है। (D) यह सामग्री विश्लेषण (Content Analysis) है।\n\n
- अनुसंधान में ‘विश्वसनीयता’ (Reliability) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) शोध के परिणाम पूरी तरह से सच हों।
- (B) यदि उसी शोध को दोबारा किया जाए, तो परिणाम समान प्राप्त हों।
- (C) शोधकर्ता का निष्पक्ष होना।
- (D) डेटा का बहुत अधिक मात्रा में होना।
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\n सही उत्तर: (B) यदि उसी शोध को दोबारा किया जाए, तो परिणाम समान प्राप्त हों।
\n विस्तृत व्याख्या: विश्वसनीयता का संबंध स्थिरता (Consistency) से है। यदि एक ही उपकरण का उपयोग करके बार-बार समान परिणाम मिलते हैं, तो वह विश्वसनीय है।
\n संदर्भ: समाजशास्त्रीय अनुसंधान पद्धति।
\n गलत विकल्प: (A) यह ‘वैधता’ (Validity) की परिभाषा है। (C) यह वस्तुनिष्ठता (Objectivity) है। (D) यह डेटा की मात्रा है।\n\n
- एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
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- (A) उच्च जातियों का निम्न जातियों के रीति-रिवाजों को अपनाना।
- (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवन शैली को अपनाना।
- (C) जाति व्यवस्था का पूरी तरह से समाप्त हो जाना।
- (D) केवल संस्कृत भाषा का सीखना।
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\n सही उत्तर: (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवन शैली को अपनाना।
\n विस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसमें निम्न जातियां अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने के लिए उच्च जातियों (विशेषकर द्विज) के रीति-रिवाजों, कर्मकांडों और विचारधारा को अपनाती हैं।
\n संदर्भ: एम.एन. श्रीनिवास की अवधारणा।
\n गलत विकल्प: (A) यह संभवतः ‘वि-संस्कृतिकरण’ हो सकता है, लेकिन यह मुख्य प्रक्रिया नहीं है। (C) यह जाति व्यवस्था के भीतर गतिशीलता है, उसका अंत नहीं। (D) यह केवल भाषाई नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रक्रिया है।\n\n
- भारतीय समाज के संदर्भ में ‘आत्मसातीकरण’ (Assimilation) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) अपनी मूल संस्कृति को पूरी तरह बचाकर रखना।
- (B) एक अल्पसंख्यक समूह का मुख्यधारा की संस्कृति में पूरी तरह विलीन हो जाना।
- (C) दो संस्कृतियों का मिलकर एक नई संस्कृति बनाना।
- (D) अन्य संस्कृतियों के प्रति नफरत रखना।
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\n सही उत्तर: (B) एक अल्पसंख्यक समूह का मुख्यधारा की संस्कृति में पूरी तरह विलीन हो जाना।
\n विस्तृत व्याख्या: आत्मसातीकरण तब होता है जब कोई समूह अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान खो देता है और प्रभुत्व वाली संस्कृति का हिस्सा बन जाता है।
\n संदर्भ: जनजातीय समाजशास्त्र और सामाजिक परिवर्तन।
\n गलत विकल्प: (A) यह सांस्कृतिक संरक्षण है। (C) यह ‘सांस्कृतिक समन्वय’ (Acculturation) या ‘मेलजोल’ है। (D) यह सामाजिक संघर्ष है।\n\n
- ग्रामीण समाजशास्त्र में ‘जजमानी प्रथा’ (Jajmani System) का मुख्य आधार क्या था?\n
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- (A) केवल मौद्रिक लेनदेन (Cash Transaction)
- (B) पारस्परिक सेवाओं और वस्तुओं का विनिमय (Reciprocal Exchange)
- (C) शहरी उद्योगों के साथ व्यापार
- (D) सरकारी अनुदान पर निर्भरता
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\n सही उत्तर: (B) पारस्परिक सेवाओं और वस्तुओं का विनिमय (Reciprocal Exchange)
\n विस्तृत व्याख्या: जजमानी प्रथा एक पारंपरिक आर्थिक व्यवस्था थी जहाँ सेवा प्रदाता जातियां (जैसे नाई, लोहार) अपनी सेवाएं देती थीं और बदले में उन्हें अनाज या अन्य वस्तुएं प्राप्त होती थीं।
\n संदर्भ: ग्रामीण भारतीय अर्थव्यवस्था का समाजशास्त्र।
\n गलत विकल्प: (A) यह बाजार अर्थव्यवस्था है। (C) यह ग्रामीण-शहरी संपर्क है। (D) यह आधुनिक कल्याणकारी राज्य की विशेषता है।\n\n
- ‘शहरीकरण’ (Urbanization) और ‘नगरकरण’ (Urbanism) में क्या अंतर है?\n
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- (A) दोनों एक ही हैं।
- (B) शहरीकरण जनसंख्या की भौतिक वृद्धि है, जबकि नगरकरण शहरी जीवन शैली और मानसिकता है।
- (C) नगरकरण जनसंख्या की वृद्धि है और शहरीकरण जीवन शैली है।
- (D) शहरीकरण केवल गांवों में होता है।
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\n सही उत्तर: (B) शहरीकरण जनसंख्या की भौतिक वृद्धि है, जबकि नगरकरण शहरी जीवन शैली और मानसिकता है।
\n विस्तृत व्याख्या: शहरीकरण (Urbanization) एक जनसांख्यिकीय प्रक्रिया है (शहरों का बढ़ना), जबकि नगरकरण (Urbanism) एक समाजशास्त्रीय प्रक्रिया है (लुई विर्थ के अनुसार, शहर के जीवन का तरीका)।
\n संदर्भ: लुई विर्थ का ‘Urbanism as a Way of Life’।
\n गलत विकल्प: (C) यह शब्दों का गलत अर्थ है। (D) शहरीकरण शहरों के विस्तार से संबंधित है।\n\n
- ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) का विचार समाजशास्त्र में क्या संकेत देता है?\n
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- (A) इंटरनेट का उपयोग अब केवल उच्च जातियों तक सीमित है।
- (B) डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी पारंपरिक जातिगत पूर्वाग्रह और भेदभाव का बने रहना।
- (C) जाति व्यवस्था का पूरी तरह डिजिटल हो जाना।
- (D) इंटरनेट के कारण जाति व्यवस्था का समाप्त हो जाना।
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\n सही उत्तर: (B) डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी पारंपरिक जातिगत पूर्वाग्रह और भेदभाव का बने रहना।
\n विस्तृत व्याख्या: यह अवधारणा बताती है कि तकनीक निष्पक्ष नहीं होती; सोशल मीडिया और एल्गोरिदम में भी जातिगत श्रेष्ठता और भेदभाव के पैटर्न दिखाई देते हैं।
\n संदर्भ: समकालीन भारतीय समाज और डिजिटल समाजशास्त्र।
\n गलत विकल्प: (A) यह डिजिटल डिवाइड है, डिजिटल जाति नहीं। (C) यह असंभव है। (D) यह एक मिथक है; तकनीक अक्सर पूर्वाग्रहों को बढ़ा देती है।\n\n
- ‘कांच की छत’ (Glass Ceiling) शब्द का समाजशास्त्र में क्या अर्थ है?\n
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- (A) आधुनिक कार्यालयों की वास्तुकला।
- (B) महिलाओं के लिए करियर में शीर्ष पदों तक पहुँचने में आने वाली अदृश्य बाधाएं।
- (C) उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती संख्या।
- (D) पुरुषों और महिलाओं के बीच समान वेतन।
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\n सही उत्तर: (B) महिलाओं के लिए करियर में शीर्ष पदों तक पहुँचने में आने वाली अदृश्य बाधाएं।
\n विस्तृत व्याख्या: यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ योग्यता के बावजूद, महिलाओं को रूढ़िवादी धारणाओं और भेदभाव के कारण प्रबंधन के शीर्ष स्तरों तक पहुँचने से रोका जाता है।
\n संदर्भ: लिंग समाजशास्त्र (Sociology of Gender)।
\n गलत विकल्प: (A) यह शाब्दिक अर्थ है, समाजशास्त्रीय नहीं। (C) यह प्रगति है, बाधा नहीं। (D) यह समानता है, जबकि ‘ग्लास सीलिंग’ असमानता को दर्शाती है।\n\n
- एंटोनियो ग्राम्शी के अनुसार ‘हेजेमनी’ (Hegemony/सांस्कृतिक प्रभुत्व) क्या है?\n
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- (A) सेना के बल पर शासन करना।
- (B) शासक वर्ग द्वारा सहमति और संस्कृति के माध्यम से अपने मूल्यों को थोपना।
- (C) लोकतंत्र में बहुमत का शासन।
- (D) केवल आर्थिक नियंत्रण करना।
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\n सही उत्तर: (B) शासक वर्ग द्वारा सहमति और संस्कृति के माध्यम से अपने मूल्यों को थोपना।
\n विस्तृत व्याख्या: हेजेमनी वह प्रक्रिया है जिसमें सत्ताधारी वर्ग समाज के अन्य वर्गों को यह विश्वास दिला देता है कि उनका प्रभुत्व ‘स्वाभाविक’ और ‘सही’ है, जिससे बल के बिना सहमति प्राप्त होती है।
\n संदर्भ: ग्राम्शी का राजनीतिक समाजशास्त्र।
\n गलत विकल्प: (A) यह ‘दमन’ (Coercion) है, हेजेमनी नहीं। (C) यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। (D) यह आर्थिक आधार (Base) है, सांस्कृतिक अधिरचना (Superstructure) नहीं।\n\n
- ‘सामाजिक संरचना’ (Social Structure) से क्या तात्पर्य है?\n
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- (A) समाज के सभी व्यक्तियों की सूची।
- (B) सामाजिक संबंधों और संस्थाओं का एक व्यवस्थित और स्थिर ढांचा।
- (C) केवल सरकार और कानून की व्यवस्था।
- (D) किसी समाज में होने वाले आकस्मिक परिवर्तन।
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\n सही उत्तर: (B) सामाजिक संबंधों और संस्थाओं का एक व्यवस्थित और स्थिर ढांचा।
\n विस्तृत व्याख्या: सामाजिक संरचना वह पैटर्न है जिसमें समाज के विभिन्न अंग (जैसे परिवार, धर्म, राज्य) एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और समाज को स्थिरता प्रदान करते हैं।
\n संदर्भ: समाजशास्त्र की मूल अवधारणाएं।
\n गलत विकल्प: (A) यह जनसंख्या का डेटा है। (C) यह केवल राजनीतिक संरचना है। (D) यह सामाजिक परिवर्तन है, संरचना नहीं।\n\n
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टिप: इन प्रश्नों का अभ्यास करने के बाद, संबंधित विचारकों की मूल पुस्तकों को पढ़ने का प्रयास करें। याद रखें, समाजशास्त्र केवल तथ्यों को याद करना नहीं, बल्कि समाज को विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखना है। शुभकामनाएँ!
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