प्रिय उम्मीदवारों, समाजशास्त्र की जटिल दुनिया में आपका स्वागत है!
यह दैनिक अभ्यास सेट आपकी वैचारिक समझ और विश्लेषणात्मक कौशल को चुनौती देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रमुख समाजशास्त्रीय विचारकों से लेकर समकालीन सामाजिक मुद्दों तक, प्रत्येक प्रश्न आपको अपनी तैयारी का गहन मूल्यांकन करने का अवसर प्रदान करेगा। अपनी बौद्धिक यात्रा के लिए तैयार हो जाइए और देखिए कि आप इन उच्च-स्तरीय चुनौतियों का कितनी अच्छी तरह सामना करते हैं!
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एलिया एंडरसन द्वारा प्रतिपादित “कोड ऑफ़ द स्ट्रीट” की अवधारणा मुख्य रूप से किस विषय पर केंद्रित है?
- शहरी नियोजन और विकास
- शहरी क्षेत्रों में सम्मान और हिंसा के मानदंड
- ग्रामीण समाज में सामाजिक नियंत्रण
- प्रवासन और सांस्कृतिक एकीकरण
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: एलिया एंडरसन (Elijah Anderson) एक प्रसिद्ध अमेरिकी समाजशास्त्री हैं जो शहरी समाजशास्त्र और नृवंशविज्ञान (ethnography) में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उनकी पुस्तक “कोड ऑफ़ द स्ट्रीट: डिग्निटी, मोरालिटी, एंड द कल्चर ऑफ़ द अर्बन स्ट्रीट (Code of the Street: Dignity, Morality, and the Culture of the Urban Street)” (1999) में उन्होंने शहरी भीतरी शहरों में रहने वाले युवाओं के बीच सम्मान (respect) और हिंसा (violence) के अनौपचारिक नियमों का विस्तृत वर्णन किया है। यह अवधारणा बताती है कि कैसे वंचित समुदायों में व्यक्ति अपनी सुरक्षा और स्थिति बनाए रखने के लिए एक विशिष्ट “स्ट्रीट कोड” का पालन करते हैं, जो मुख्यधारा के मानदंडों से भिन्न हो सकता है।
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जॉर्ज हर्बर्ट मीड (George Herbert Mead) के अनुसार, “आई” (I) और “मी” (Me) की अवधारणाएँ किससे संबंधित हैं?
- सामाजिक संरचना के दो भिन्न रूप
- व्यक्ति के आत्म (Self) के दो पहलू
- भौतिक और अभौतिक संस्कृति
- सामाजिक नियंत्रण की प्राथमिक और द्वितीयक विधियाँ
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) के प्रमुख विचारकों में से एक हैं। उनके अनुसार, आत्म (Self) सामाजिक अंतःक्रिया के माध्यम से विकसित होता है और इसके दो मुख्य पहलू होते हैं: “आई” (I) और “मी” (Me)। “आई” आत्म का तात्कालिक, सहज और रचनात्मक पहलू है, जो नए अनुभव पैदा करता है। “मी” आत्म का वह पहलू है जो सामान्यीकृत अन्य (generalized other) के दृष्टिकोण से विकसित होता है, जिसमें व्यक्ति समाज के मानदंडों और अपेक्षाओं को आंतरिक करता है और आत्म-नियंत्रण और आत्म-मूल्यांकन करता है।
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“हेटेरोपैसेमिज्म” (Heteropessimism) शब्द समकालीन समाजशास्त्र में किस प्रकार की निराशा को संदर्भित करता है?
- जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली निराशा
- पुष्टिपरक विषमलैंगिक संबंधों के भीतर पुरुषों द्वारा व्यक्त की गई निराशा
- महिलाओं द्वारा विषमलैंगिक संबंधों के बारे में व्यक्त की गई निराशा
- आधुनिक समाज में बढ़ती राजनीतिक ध्रुवीकरण से उत्पन्न निराशा
सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: हेटेरोपैसेमिज्म एक समकालीन अवधारणा है जो महिलाओं द्वारा विषमलैंगिक संबंधों (heterosexual relationships) के बारे में व्यक्त की गई निराशा या नकारात्मकता को संदर्भित करती है। यह अक्सर इस विचार से जुड़ा है कि विषमलैंगिक संबंध महिलाओं के लिए संतोषजनक या सम्मानजनक नहीं होते हैं, या वे महिलाओं पर असंगत बोझ डालते हैं। यह अवधारणा लिंग और संबंध गतिशीलता (gender and relationship dynamics) के आलोचनात्मक विश्लेषण का हिस्सा है, खासकर नारीवादी दृष्टिकोणों में।
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अनुसंधान विधियों में “डिजिटल नृवंशविज्ञान” (Digital Ethnography) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- ऐतिहासिक अभिलेखागार का विश्लेषण करना
- भौतिक प्रयोगशाला सेटिंग्स में व्यवहार का अध्ययन करना
- ऑनलाइन समुदायों और डिजिटल संस्कृतियों का अध्ययन करना
- आँकड़ों का मात्रात्मक विश्लेषण करना
सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: डिजिटल नृवंशविज्ञान एक गुणात्मक अनुसंधान पद्धति है जो ऑनलाइन समुदायों, डिजिटल संस्कृतियों और इंटरनेट के माध्यम से मध्यस्थता वाले सामाजिक जीवन का अध्ययन करती है। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, ऑनलाइन फ़ोरम, वर्चुअल वर्ल्ड और अन्य डिजिटल स्थानों पर लोगों के व्यवहार, अंतःक्रियाओं और अर्थ-निर्माण की गहन समझ प्राप्त करने के लिए अवलोकन, साक्षात्कार और सामग्री विश्लेषण जैसी तकनीकें शामिल हैं। यह पारंपरिक नृवंशविज्ञान का विस्तार है जो डिजिटल क्षेत्र में मानव अनुभव का पता लगाता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा दुर्खीम (Durkheim) के ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Fact) का एक प्रमुख उदाहरण है?
- व्यक्तिगत भावनाएँ
- राजनीतिक दल की विचारधारा
- एक व्यक्ति का निजी विचार
- एक परिवार की निजी पसंद
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: एमील दुर्खीम के लिए, सामाजिक तथ्य “कार्य करने के तरीके, सोचने और महसूस करने के तरीके हैं, जो व्यक्ति के लिए बाहरी होते हैं और जिनमें ज़बरदस्ती की शक्ति होती है जिसके आधार पर वे व्यक्ति को नियंत्रित करते हैं।” ये व्यक्ति की चेतना से स्वतंत्र होते हैं और बाहरी रूप से व्यक्ति पर दबाव डालते हैं। राजनीतिक दल की विचारधारा (जो व्यापक सामाजिक मूल्यों और संरचनाओं से उत्पन्न होती है), कानून, नैतिक संहिता, धार्मिक विश्वास और सामाजिक संस्थाएँ सामाजिक तथ्य के उदाहरण हैं।
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मैक्स वेबर (Max Weber) के अनुसार, किसी समाज में शक्ति (power) के तीन आयाम कौन से हैं?
- उत्पादन, उपभोग, वितरण
- वर्ग, प्रस्थिति (status), शक्ति
- प्रकार्य, दुष्प्रकार्य, अप्रकार्य
- परंपरा, करिश्मा, तर्कसंगत-कानूनी
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने समाज में शक्ति और स्तरीकरण (stratification) के बहुआयामी दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया। उन्होंने शक्ति के तीन प्राथमिक आयामों की पहचान की: 1) वर्ग (Class): आर्थिक शक्ति पर आधारित, उत्पादन के साधनों के स्वामित्व या नियंत्रण से संबंधित; 2) प्रस्थिति (Status): सामाजिक सम्मान, प्रतिष्ठा और जीवनशैली पर आधारित; और 3) शक्ति (Party/Power): राजनीतिक क्षेत्र में संगठित समूह जो सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करने और दूसरों पर अपनी इच्छा थोपने की क्षमता रखते हैं। विकल्प ‘d’ वेबर द्वारा प्रतिपादित सत्ता (authority) के प्रकार हैं, न कि शक्ति के आयाम।
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कार्ल मार्क्स (Karl Marx) के ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा का तात्पर्य क्या है?
- व्यक्ति का प्रकृति से संबंध विच्छेद
- पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिकों का अपने श्रम, उत्पाद, स्वयं और अन्य से विच्छेद
- धार्मिक विश्वासों से विच्छेद
- ग्रामीण जीवन से शहरी जीवन में परिवर्तन
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स की अलगाव की अवधारणा पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली की एक महत्वपूर्ण आलोचना है। मार्क्स के अनुसार, पूंजीवाद के तहत, श्रमिक चार तरीकों से अलगाव का अनुभव करते हैं: 1) अपने उत्पाद से (उन्हें अपने श्रम के फल पर कोई नियंत्रण नहीं होता); 2) अपनी उत्पादन गतिविधि से (काम जबरन होता है, आत्म-पूर्ति नहीं); 3) अपनी प्रजाति-सत्ता से (अपनी रचनात्मक मानव क्षमता से विच्छेद); और 4) अन्य मनुष्यों से (प्रतिस्पर्धा के कारण)। यह उनके “आर्थिक और दार्शनिक पांडुलिपियाँ 1844” (Economic and Philosophical Manuscripts of 1844) में गहराई से वर्णित है।
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रॉबर्ट के. मर्टन (Robert K. Merton) ने सामाजिक संरचना के भीतर विचलन (Deviance) को समझाने के लिए कौन सी अवधारणा प्रस्तुत की?
- सामाजिक तथ्य
- वर्ग संघर्ष
- एनोमी (Anomie) और अनुकूलन के प्रकार
- प्रतीकात्मक अंतःक्रिया
सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन ने दुर्खीम की एनोमी की अवधारणा को आगे बढ़ाया। उन्होंने तर्क दिया कि विचलन तब उत्पन्न होता है जब समाज सांस्कृतिक रूप से स्वीकृत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संस्थागत साधनों को प्रतिबंधित करता है। उन्होंने एनोमी से निपटने के लिए व्यक्तियों द्वारा अपनाए जाने वाले अनुकूलन के पांच प्रकारों की पहचान की: अनुरूपता (conformity), नवाचार (innovation), कर्मकाण्डवाद (ritualism), वापसीवाद (retreatism) और विद्रोह (rebellion)। यह अवधारणा उनके “सोशल थ्योरी एंड सोशल स्ट्रक्चर” (Social Theory and Social Structure) कार्य का हिस्सा है।
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तालकोट पार्सन्स (Talcott Parsons) के क्रियात्मक अनिवार्यता मॉडल (Functional Imperative Model) को किस संक्षिप्त रूप से जाना जाता है?
- GPAI
- AGIL
- SIPS
- FIST
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: तालकोट पार्सन्स, एक प्रमुख संरचनात्मक प्रकार्यवादी (structural functionalist), ने AGIL मॉडल प्रस्तुत किया, जो किसी भी सामाजिक प्रणाली के चार आवश्यक कार्यों का प्रतिनिधित्व करता है जो जीवित रहने और बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। AGIL का अर्थ है: अनुकूलन (Adaptation), लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment), एकीकरण (Integration), और अव्यक्त प्रतिमान रखरखाव (Latency/Pattern Maintenance)। यह मॉडल बताता है कि कैसे सामाजिक प्रणालियाँ संतुलन बनाए रखती हैं और बदलती हैं।
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पियरे बॉर्डियू (Pierre Bourdieu) की अवधारणा “हैबिटस” (Habitus) क्या संदर्भित करती है?
- व्यक्तिगत आदतों का एक यादृच्छिक संग्रह
- सामाजिक रूप से अर्जित प्रवृत्तियों की एक प्रणाली जो व्यवहार, धारणाओं और विचारों को संरचित करती है
- भौतिक वस्तुओं का संग्रह
- एक वैज्ञानिक प्रयोगशाला में प्रयोग करने की विधि
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: पियरे बॉर्डियू के लिए, हैबिटस सामाजिक रूप से अर्जित प्रवृत्तियों, योजनाओं और स्वभावों की एक प्रणाली है जो किसी व्यक्ति के सामाजिक अनुभव के माध्यम से विकसित होती है। यह व्यक्तियों के व्यवहार, धारणाओं, विचारों और क्रियाओं को संरचित करती है और एक विशिष्ट सामाजिक क्षेत्र (field) में उनके “खेलने के तरीके” को आकार देती है। यह व्यक्तिपरक होने के बावजूद वस्तुनिष्ठ सामाजिक संरचनाओं से गहरे रूप से जुड़ा हुआ है। हैबिटस व्यक्तियों और सामाजिक संरचनाओं के बीच मध्यस्थता करता है।
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माइकल फूको (Michel Foucault) की “शक्ति-ज्ञान” (Power-Knowledge) की अवधारणा का केंद्रीय विचार क्या है?
- शक्ति और ज्ञान पूरी तरह से स्वतंत्र हैं
- ज्ञान हमेशा शक्ति को दबाता है
- ज्ञान का उत्पादन शक्ति संबंधों से अविभाज्य है और उन्हें बनाए रखता है
- शक्ति केवल राज्य के संस्थानों में पाई जाती है
सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: माइकल फूको के लिए, शक्ति और ज्ञान एक दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़े हुए हैं। वे तर्क देते हैं कि ज्ञान कभी भी तटस्थ नहीं होता है, बल्कि हमेशा शक्ति संबंधों में निहित होता है और उनका उत्पादन करता है। वे दिखाते हैं कि कैसे कुछ प्रकार के ज्ञान (जैसे चिकित्सा, मनोरोग विज्ञान) का उदय विशिष्ट शक्ति विन्यासों को जन्म देता है और उन्हें वैधता प्रदान करता है, जिससे कुछ व्यवहारों को सामान्य या असामान्य के रूप में परिभाषित किया जाता है। उनकी पुस्तक “अनुशासन और दंड” (Discipline and Punish) इस अवधारणा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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एन्थनी गिडेंस (Anthony Giddens) की ‘संरचनाकरण सिद्धांत’ (Structuration Theory) क्या समझाने का प्रयास करती है?
- सामाजिक संरचनाएँ केवल व्यक्तियों के व्यवहार को निर्धारित करती हैं
- व्यक्तिगत क्रियाएँ केवल सामाजिक संरचनाओं का निर्माण करती हैं
- सामाजिक संरचनाएँ और व्यक्तिगत क्रियाएँ एक दूसरे को निरंतर रूप से बनाती और पुनरुत्पादित करती हैं
- प्रकृति और समाज के बीच का संबंध
सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: एन्थनी गिडेंस का संरचनाकरण सिद्धांत यह समझाने का प्रयास करता है कि सामाजिक संरचनाएँ (नियम और संसाधन) और मानव क्रियाएँ (एजेंसी) एक दूसरे से कैसे जुड़ी हुई हैं और परस्पर निर्भर हैं। वे तर्क देते हैं कि संरचनाएँ केवल व्यक्ति की क्रियाओं के माध्यम से मौजूद होती हैं, लेकिन ये क्रियाएँ स्वयं संरचनाओं द्वारा सक्षम और विवश होती हैं। यह “संरचना की द्वैतता” (duality of structure) की अवधारणा पर आधारित है, जहां संरचनाएँ क्रिया का माध्यम और परिणाम दोनों हैं।
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एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas) द्वारा प्रतिपादित ‘प्रभुत्वशाली जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा के लिए क्या विशेषताएँ आवश्यक हैं?
- जनसंख्या में संख्यात्मक बहुमत, आर्थिक और राजनीतिक शक्ति, और उच्च अनुष्ठानिक प्रस्थिति
- केवल अनुष्ठानिक पवित्रता
- केवल संख्यात्मक अल्पसंख्यक होना
- केवल आर्थिक रूप से वंचित होना
सही उत्तर: a)
विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने भारतीय गाँवों के अध्ययन में ‘प्रभुत्वशाली जाति’ की अवधारणा दी। उनके अनुसार, एक जाति को प्रभुत्वशाली माना जाता है यदि उसके पास निम्नलिखित विशेषताएँ हों: 1) संख्यात्मक बहुमत (numerical majority); 2) भूमि के स्वामित्व के माध्यम से आर्थिक शक्ति (economic power through land ownership); 3) राजनीतिक शक्ति (political power), और 4) पारंपरिक रूप से उच्च अनुष्ठानिक प्रस्थिति (ritual status)। इन कारकों के संयोजन से एक जाति गाँव के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
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भारतीय समाज में संयुक्त परिवार (Joint Family) की एक प्रमुख विशेषता क्या है?
- केन्द्रीय परिवार इकाई पर जोर
- एक ही छत के नीचे कई पीढ़ियों का निवास
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अत्यधिक जोर
- बच्चों के पालन-पोषण में केवल माता-पिता की भूमिका
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: संयुक्त परिवार भारतीय समाज की एक पारंपरिक और महत्वपूर्ण संस्था है। इसकी प्रमुख विशेषता एक ही छत के नीचे कई पीढ़ियों (जैसे दादा-दादी, माता-पिता, बच्चे, चाचा-चाची, चचेरे भाई-बहन) का निवास, सामान्य रसोई, संपत्ति का साझा स्वामित्व, और साझा पूजा-पाठ और अनुष्ठान हैं। इसमें वरिष्ठ सदस्यों का अधिकार होता है और निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं, जिसमें व्यक्तिगत से अधिक सामूहिक हितों पर जोर दिया जाता है।
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समाजशास्त्र में ‘सांस्कृतिक विलंबना’ (Cultural Lag) की अवधारणा किसने प्रस्तुत की?
- रॉबर्ट रेडफ़ील्ड
- विलियम एफ. ओगबर्न
- रॉबर्ट पार्क
- लुईस विर्थ
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: विलियम एफ. ओगबर्न (William F. Ogburn) ने 1922 में अपनी पुस्तक “सोशल चेंज” (Social Change) में ‘सांस्कृतिक विलंबना’ की अवधारणा प्रस्तुत की। यह अवधारणा बताती है कि समाज के भौतिक और अभौतिक पहलुओं में परिवर्तन की गति असमान होती है। आमतौर पर, भौतिक संस्कृति (जैसे प्रौद्योगिकी) तेजी से बदलती है, जबकि अभौतिक संस्कृति (जैसे मूल्य, मानदंड, कानून, रीति-रिवाज) धीरे-धीरे बदलती है, जिससे दोनों के बीच एक “विलंबना” या अंतराल पैदा होता है। यह अंतराल सामाजिक समस्याओं को जन्म दे सकता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) का एक बंद तंत्र है?
- वर्ग (Class)
- जाति (Caste)
- लिंग (Gender)
- नृजातीयता (Ethnicity)
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: सामाजिक स्तरीकरण के तंत्रों को खुला या बंद वर्गीकृत किया जा सकता है। बंद तंत्र वे होते हैं जहाँ सामाजिक गतिशीलता (social mobility) बहुत सीमित या न के बराबर होती है, और व्यक्ति की स्थिति जन्म से निर्धारित होती है। जाति व्यवस्था इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहाँ व्यक्ति की सामाजिक स्थिति जन्म से तय होती है और जीवन भर बनी रहती है। वर्ग प्रणाली एक अपेक्षाकृत खुला तंत्र है जहाँ सामाजिक गतिशीलता संभव है। लिंग और नृजातीयता स्तरीकरण के आधार हो सकते हैं, लेकिन वे स्वयं में एक पूर्ण “तंत्र” नहीं हैं जैसे जाति या वर्ग।
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‘गुणात्मक अनुसंधान’ (Qualitative Research) की एक प्रमुख विशेषता क्या है?
- सांख्यिकीय विश्लेषण पर अत्यधिक निर्भरता
- अवधारणाओं और अनुभवों की गहरी समझ प्राप्त करना
- व्यापक सर्वेक्षणों का उपयोग
- परिकल्पनाओं का परीक्षण करना
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: गुणात्मक अनुसंधान का प्राथमिक उद्देश्य सामाजिक घटनाओं, अनुभवों, अर्थों और विचारों की गहरी और विस्तृत समझ प्राप्त करना है। यह व्यक्तियों के दृष्टिकोणों, भावनाओं और प्रेरणाओं का पता लगाने पर केंद्रित है। इसमें अक्सर छोटे नमूने, गहन साक्षात्कार, सहभागी अवलोकन और सामग्री विश्लेषण जैसी विधियाँ शामिल होती हैं। इसके विपरीत, मात्रात्मक अनुसंधान संख्यात्मक डेटा और सांख्यिकीय विश्लेषण पर जोर देता है।
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भारत में ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा किसके द्वारा दी गई?
- आंद्रे बेते
- जी.एस. घुरिये
- एम.एन. श्रीनिवास
- योगेंद्र सिंह
सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा एम.एन. श्रीनिवास ने अपनी पुस्तक “रिलीजन एंड सोसाइटी अमंग द कूर्ग्स ऑफ़ साउथ इंडिया” (Religion and Society Among the Coorgs of South India) में प्रस्तुत की थी। यह एक ऐसी प्रक्रिया को संदर्भित करती है जिसमें एक निम्न जाति या आदिवासी समूह या अन्य समूह उच्च, अक्सर ‘द्विज’ (twice-born) जाति की जीवनशैली, रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों और विचारधाराओं को अपनाकर सामाजिक पदानुक्रम में अपनी स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करता है। यह सामाजिक गतिशीलता का एक रूप है जो भारत में जाति व्यवस्था के लचीलेपन को दर्शाता है।
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शहरी समाजशास्त्र में ‘शहरीकरण’ (Urbanization) की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप आमतौर पर क्या देखा जाता है?
- केवल ग्रामीण क्षेत्रों का विस्तार
- कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
- जनसंख्या का शहरों में प्रवास और शहरी जीवनशैली का प्रसार
- पारंपरिक मूल्यों और प्रथाओं का संरक्षण
सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: शहरीकरण जनसंख्या के शहरों और नगरीय क्षेत्रों में प्रवास और वृद्धि की प्रक्रिया है, जिसके परिणामस्वरूप एक समाज के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं। इसमें शहरी जीवनशैली, मूल्य और व्यवहार पैटर्न का प्रसार शामिल है। यह औद्योगीकरण और आधुनिकीकरण से निकटता से जुड़ा हुआ है। इसके परिणाम स्वरूप अक्सर ग्रामीण-शहरी अंतर कम होता है, लेकिन यह सामाजिक समस्याओं जैसे भीड़भाड़, प्रदूषण और अपराध को भी जन्म दे सकता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा ‘सामाजिक आंदोलन’ (Social Movement) का एक उदाहरण नहीं है?
- पर्यावरण संरक्षण आंदोलन
- नारीवादी आंदोलन
- एक राजनीतिक दल द्वारा चुनाव अभियान
- दलित अधिकार आंदोलन
सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: एक सामाजिक आंदोलन व्यक्तियों और संगठनों का एक सामूहिक प्रयास है जो एक सामान्य उद्देश्य को बढ़ावा देने या उसका विरोध करने के लिए कार्य करते हैं, आमतौर पर सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए। पर्यावरण आंदोलन, नारीवादी आंदोलन और दलित अधिकार आंदोलन इसके विशिष्ट उदाहरण हैं। एक राजनीतिक दल द्वारा चुनाव अभियान, हालांकि इसमें सामूहिक भागीदारी होती है, लेकिन यह मुख्य रूप से मौजूदा राजनीतिक ढांचे के भीतर सत्ता प्राप्त करने पर केंद्रित होता है, न कि व्यापक सामाजिक परिवर्तन के लिए एक स्थायी, सामूहिक प्रयास पर।
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पर्यावरण समाजशास्त्र (Environmental Sociology) किस बात पर जोर देता है?
- केवल भौतिक पर्यावरण का अध्ययन
- केवल मानव समाज का अध्ययन
- मानव समाज और प्राकृतिक पर्यावरण के बीच की अंतःक्रिया का अध्ययन
- प्रौद्योगिकी के विकास का अध्ययन
सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: पर्यावरण समाजशास्त्र समाजशास्त्र का एक उपक्षेत्र है जो मानव समाज और प्राकृतिक पर्यावरण के बीच जटिल अंतःक्रिया का अध्ययन करता है। यह इस बात पर केंद्रित है कि सामाजिक कारक पर्यावरणीय समस्याओं को कैसे प्रभावित करते हैं (जैसे प्रदूषण, संसाधन क्षरण), और कैसे पर्यावरणीय परिवर्तन सामाजिक जीवन, असमानता और नीति को प्रभावित करते हैं। यह जलवायु परिवर्तन नागरिक सभाओं (citizen assemblies) जैसे प्रयासों का भी विश्लेषण करता है।
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पितृसत्ता (Patriarchy) की अवधारणा से क्या तात्पर्य है?
- एक ऐसा सामाजिक संगठन जहाँ पुरुष सत्ता में होते हैं और महिलाओं पर हावी होते हैं
- परिवार में सबसे बड़े बच्चे का प्रभुत्व
- सामाजिक व्यवस्था में धार्मिक नेताओं का वर्चस्व
- केवल आर्थिक असमानता की प्रणाली
सही उत्तर: a)
विस्तृत व्याख्या: पितृसत्ता एक सामाजिक व्यवस्था है जिसमें पुरुष प्रमुख सामाजिक भूमिकाएँ निभाते हैं और महिलाओं पर शक्ति और प्रभुत्व रखते हैं। यह सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में पुरुषों की प्रधानता को संदर्भित करता है। नारीवादी सिद्धांतकारों ने इस अवधारणा का व्यापक रूप से विश्लेषण किया है ताकि लिंग आधारित असमानता और उत्पीड़न के स्रोतों को समझा जा सके।
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निम्नलिखित में से कौन एक ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) का सबसे अच्छा उदाहरण है?
- एक बड़ी निगम के कर्मचारी
- एक राजनीतिक दल के सदस्य
- एक परिवार
- एक विशाल विश्वविद्यालय के छात्र
सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: चार्ल्स कूली (Charles Cooley) ने प्राथमिक और द्वितीयक समूहों के बीच अंतर किया। प्राथमिक समूह छोटे, घनिष्ठ, स्थायी और व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित होते हैं, जहाँ सदस्य भावनात्मक रूप से एक दूसरे से जुड़े होते हैं। परिवार, करीबी दोस्त और बचपन के खेल समूह प्राथमिक समूहों के उदाहरण हैं। द्वितीयक समूह बड़े, अवैयक्तिक, अस्थायी और विशिष्ट लक्ष्यों पर केंद्रित होते हैं।
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प्रच्छन्न कार्य (Latent Function) की अवधारणा किसने विकसित की?
- मैक्स वेबर
- रॉबर्ट के. मर्टन
- कार्ल मार्क्स
- एमील दुर्खीम
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन ने “प्रकार्य” (function) की अवधारणा को प्रत्यक्ष प्रकार्य (manifest function) और प्रच्छन्न प्रकार्य (latent function) में विभाजित किया। प्रत्यक्ष प्रकार्य वे होते हैं जो किसी सामाजिक पैटर्न के अपेक्षित और पहचाने गए परिणाम होते हैं। प्रच्छन्न प्रकार्य वे अनपेक्षित और अक्सर अनजाने परिणाम होते हैं जो सामाजिक प्रणाली में योगदान करते हैं। उदाहरण के लिए, कॉलेज शिक्षा का प्रत्यक्ष प्रकार्य ज्ञान प्रदान करना है, जबकि प्रच्छन्न प्रकार्य पति/पत्नी ढूंढना हो सकता है।
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भारत में ग्रामीण-शहरी सातत्य (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा का क्या अर्थ है?
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्पष्ट और अपरिवर्तनीय विभाजन
- ग्रामीण और शहरी जीवनशैली के बीच निरंतरता और अंतःप्रवेश
- केवल ग्रामीण क्षेत्रों का शहरी क्षेत्रों में परिवर्तन
- केवल शहरी क्षेत्रों का ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार
सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: ग्रामीण-शहरी सातत्य (continuum) की अवधारणा बताती है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र पूरी तरह से अलग इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि विशेषताओं (जैसे जीवनशैली, व्यवसाय, सामाजिक संबंध, मूल्य) का एक निरंतर स्पेक्ट्रम बनाते हैं। यह स्वीकार करता है कि इन दोनों के बीच एक अंतःप्रवेश (interpenetration) होता है, जहाँ शहरी प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में और ग्रामीण तत्व शहरी क्षेत्रों में पाए जा सकते हैं। यह लुईस विर्थ (Louis Wirth) जैसे विचारकों द्वारा नगरीयता (urbanism) के अध्ययन के विपरीत, एक अधिक एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करता है।
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