समाजशास्त्र की गहन समझ: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक विशेष अभ्यास सेट
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समाजशास्त्र केवल सिद्धांतों का अध्ययन नहीं है, बल्कि समाज की जटिल संरचनाओं और उनके बीच के संबंधों को समझने की एक कला है। यदि आप UGC-NET, UPSC या किसी राज्य PSC परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपकी वैचारिक स्पष्टता और विश्लेषणात्मक क्षमता ही आपकी सफलता की कुंजी होगी। आइए, आज के इस चुनौतीपूर्ण मॉक टेस्ट के माध्यम से अपनी तैयारी का मूल्यांकन करें और समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण को और अधिक गहरा करें।
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- अगस्त कॉम्टे ने समाजशास्त्र के अध्ययन के लिए किस पद्धति का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने ‘सकारात्मकवाद’ (Positivism) कहा?\n
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- (A) केवल गुणात्मक पद्धति
- (B) केवल व्यक्तिपरक व्याख्या
- (C) वैज्ञानिक अवलोकन, प्रयोग और तुलना
- (D) केवल ऐतिहासिक विश्लेषण
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\nउत्तर: (C) वैज्ञानिक अवलोकन, प्रयोग और तुलना\n
विस्तृत व्याख्या: अगस्त कॉम्टे को ‘समाजशास्त्र का जनक’ माना जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि समाज का अध्ययन उसी तरह वैज्ञानिक तरीकों (अवलोकन, प्रयोग और तुलना) से किया जाना चाहिए जैसे भौतिकी या रसायन विज्ञान का किया जाता है। इसे ‘सकारात्मकवाद’ कहा गया, जो अनुभवजन्य प्रमाणों (empirical evidence) पर आधारित है। विकल्प (B) मैक्स वेबर की ‘Verstehen’ पद्धति से संबंधित है, न कि कॉम्टे से।
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- एमिल दुर्खीम के अनुसार ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति कब उत्पन्न होती है?\n
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- (A) जब समाज में नियम बहुत अधिक सख्त होते हैं।
- (B) जब सामाजिक मानदंडों का अभाव होता है या वे टूट जाते हैं।
- (C) जब व्यक्ति समाज से पूरी तरह अलग हो जाता है।
- (D) जब आर्थिक समृद्धि चरम पर होती है।
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\nउत्तर: (B) जब सामाजिक मानदंडों का अभाव होता है या वे टूट जाते हैं।\n
विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने ‘एनोमी’ का उपयोग उस स्थिति के लिए किया जहाँ तीव्र सामाजिक परिवर्तन के कारण पुराने नियम काम नहीं करते और नए नियम अभी बने नहीं होते, जिससे समाज में ‘नियमहीनता’ की स्थिति पैदा होती है। यह अक्सर तीव्र आर्थिक मंदी या अचानक आई समृद्धि के दौरान देखा जाता है। विकल्प (C) मार्क्स के ‘अलगाव’ (Alienation) के करीब है।
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- मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) क्या है?\n
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- (A) एक नैतिक रूप से सही समाज का मॉडल
- (B) एक ऐसा मानक जिसका उपयोग वास्तविकता की तुलना करने के लिए किया जाता है।
- (C) समाज की एक काल्पनिक और असंभव स्थिति
- (D) एक ऐसा समाज जहाँ कोई संघर्ष न हो
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\nउत्तर: (B) एक ऐसा मानक जिसका उपयोग वास्तविकता की तुलना करने के लिए किया जाता है।\n
विस्तृत व्याख्या: वेबर के लिए ‘आदर्श प्रारूप’ कोई ‘परफेक्ट’ समाज नहीं था, बल्कि एक मानसिक निर्माण (mental construct) था। यह किसी घटना की मुख्य विशेषताओं को उजागर करके एक मानक बनाता है ताकि समाजशास्त्री वास्तविक दुनिया की घटनाओं की तुलना उससे कर सकें और विचलनों को समझ सकें।
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- कार्ल मार्क्स के ‘ऐतिहासिक भौतिकवाद’ (Historical Materialism) का मुख्य केंद्र क्या है?\n
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- (A) विचारों का विकास
- (B) उत्पादन के साधन और उत्पादन संबंध
- (C) धार्मिक विश्वासों का प्रभाव
- (D) राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका
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\nउत्तर: (B) उत्पादन के साधन और उत्पादन संबंध\n
विस्तृत व्याख्या: मार्क्स का मानना था कि समाज का ‘आधार’ (Base) उसकी आर्थिक संरचना (उत्पादन के साधन और संबंध) होती है, और इसी आधार पर समाज का ‘अधिरचना’ (Superstructure) जैसे धर्म, कानून, राजनीति और संस्कृति निर्मित होते हैं। उनके अनुसार, आर्थिक परिवर्तन ही सामाजिक परिवर्तन का मूल कारण है।
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- जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार ‘स्व’ (Self) का विकास कैसे होता है?\n
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- (A) आनुवंशिक गुणों के माध्यम से
- (B) सामाजिक अंतःक्रिया और प्रतीकों के माध्यम से
- (C) केवल परिवार के अनुशासन से
- (D) जैविक परिपक्वता के साथ स्वतः
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\nउत्तर: (B) सामाजिक अंतःक्रिया और प्रतीकों के माध्यम से\n
विस्तृत व्याख्या: मीड ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) के अग्रदूत थे। उन्होंने तर्क दिया कि ‘स्व’ का विकास तब होता है जब व्यक्ति दूसरों की नजरों से खुद को देखना शुरू करता है (‘Taking the role of the other’)। उन्होंने ‘I’ (स्वयं का सहज रूप) और ‘Me’ (समाज द्वारा देखा गया रूप) के बीच के संवाद को महत्वपूर्ण माना।
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- टैल्कोट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ का क्या अर्थ है?\n
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- (A) Legitimation (वैधता)
- (B) Latency (प्रसुप्तता/पैटर्न रखरखाव)
- (C) Leadership (नेतृत्व)
- (D) Liberalization (उदारीकरण)
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\nउत्तर: (B) Latency (प्रसुप्तता/पैटर्न रखरखाव)\n
विस्तृत व्याख्या: पार्सन्स के अनुसार किसी भी सामाजिक प्रणाली को जीवित रहने के लिए चार कार्य करने होते हैं: A (Adaptation – अनुकूलन), G (Goal Attainment – लक्ष्य प्राप्ति), I (Integration – एकीकरण), और L (Latency – प्रसुप्तता)। Latency का अर्थ है सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना और तनाव को प्रबंधित करना ताकि सामाजिक व्यवस्था बनी रहे।
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- रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अप्रत्यक्ष कार्य’ (Latent Function) के बीच क्या अंतर बताया है?\n
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- (A) प्रकट कार्य नकारात्मक होते हैं और अप्रत्यक्ष सकारात्मक।
- (B) प्रकट कार्य इच्छित और ज्ञात होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष अनपेक्षित और अज्ञात।
- (C) दोनों एक ही होते हैं, बस नाम अलग हैं।
- (D) प्रकट कार्य केवल धर्म से जुड़े होते हैं।
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\nउत्तर: (B) प्रकट कार्य इच्छित और ज्ञात होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष अनपेक्षित और अज्ञात।\n
विस्तृत व्याख्या: मर्टन ने कार्यात्मकता के सिद्धांत को परिष्कृत किया। उदाहरण के लिए, विश्वविद्यालय का ‘प्रकट कार्य’ शिक्षा प्रदान करना है, लेकिन इसका एक ‘अप्रत्यक्ष कार्य’ सामाजिक नेटवर्किंग या जीवनसाथी खोजना भी हो सकता है, जिसे संस्थान ने योजनाबद्ध नहीं किया था।
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- लुई ड्यूमोंट ने अपनी पुस्तक ‘होमो हिएरार्किकस’ (Homo Hierarchicus) में भारतीय जाति व्यवस्था के किस मुख्य सिद्धांत पर जोर दिया?\n
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- (A) वर्ग संघर्ष
- (B) शुद्धता और अशुद्धता (Purity and Pollution)
- (C) आर्थिक असमानता
- (D) केवल व्यावसायिक विभाजन
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\nउत्तर: (B) शुद्धता और अशुद्धता (Purity and Pollution)\n
विस्तृत व्याख्या: ड्यूमोंट ने तर्क दिया कि भारतीय जाति व्यवस्था का मूल आधार ‘पदानुक्रम’ (Hierarchy) है, जो शुद्धता और अशुद्धता के धार्मिक और वैचारिक सिद्धांतों पर टिका है, न कि केवल आर्थिक या राजनीतिक शक्ति पर।
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- एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
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- (A) निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवन शैली को अपनाना।
- (B) उच्च जातियों का निम्न जातियों के साथ घुलना-मिलना।
- (C) पश्चिमी संस्कृति का भारतीय समाज में समावेश।
- (D) जाति व्यवस्था का पूरी तरह समाप्त हो जाना।
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\nउत्तर: (A) निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवन शैली को अपनाना।\n
विस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसमें कोई निम्न जाति या जनजाति, उच्च जाति (विशेषकर द्विज जातियों) के रीति-रिवाजों, कर्मकांडों और विचारधारा को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करती है।
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- ‘प्रभावी जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा किसने दी थी?\n
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- (A) जी.एस. घुर्ये
- (B) एम.एन. श्रीनिवास
- (C) लुई ड्यूमोंट
- (D) एस.सी. दुबे
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\nउत्तर: (B) एम.एन. श्रीनिवास\n
विस्तृत व्याख्या: श्रीनिवास ने पाया कि ग्रामीण भारत में कुछ जातियां न केवल संख्या में अधिक होती हैं, बल्कि उनके पास जमीन का स्वामित्व और राजनीतिक शक्ति भी होती है, जिससे वे अन्य जातियों पर प्रभुत्व रखती हैं। इसे ही ‘प्रभावी जाति’ कहा गया।
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- समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘सहभागी अवलोकन’ (Participant Observation) किस पद्धति का हिस्सा है?\n
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- (A) मात्रात्मक अनुसंधान (Quantitative Research)
- (B) नृवंशविज्ञान (Ethnography)
- (C) प्रायोगिक अनुसंधान (Experimental Research)
- (D) सर्वेक्षण पद्धति (Survey Method)
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\nउत्तर: (B) नृवंशविज्ञान (Ethnography)\n
विस्तृत व्याख्या: सहभागी अवलोकन में शोधकर्ता स्वयं उस समूह का हिस्सा बन जाता है जिसका वह अध्ययन कर रहा है, ताकि उनकी संस्कृति, व्यवहार और जीवन शैली को गहराई से समझ सके। यह एक गुणात्मक पद्धति है और नृवंशविज्ञान का मुख्य आधार है।
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- विश्वसनीयता (Reliability) और वैधता (Validity) के संदर्भ में सही कथन कौन सा है?\n
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- (A) विश्वसनीयता का अर्थ है कि माप सही है, वैधता का अर्थ है कि वह सुसंगत है।
- (B) विश्वसनीयता का अर्थ है कि माप सुसंगत (consistent) है, जबकि वैधता का अर्थ है कि वह वही माप रहा है जिसे मापने का इरादा था।
- (C) दोनों का अर्थ एक ही होता है।
- (D) समाजशास्त्र में केवल वैधता महत्वपूर्ण है।
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\nउत्तर: (B) विश्वसनीयता का अर्थ है कि माप सुसंगत (consistent) है, जबकि वैधता का अर्थ है कि वह वही माप रहा है जिसे मापने का इरादा था।\n
विस्तृत व्याख्या: यदि एक ही टेस्ट बार-बार लेने पर समान परिणाम दे, तो वह ‘विश्वसनीय’ है। लेकिन यदि वह टेस्ट वास्तव में उस अवधारणा को माप रहा है जिसके लिए उसे बनाया गया था, तो वह ‘वैध’ है।
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- निम्नलिखित में से कौन सा ‘स्तरीकरण’ (Stratification) का एक बंद रूप (Closed System) है?\n
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- (A) वर्ग (Class)
- (B) जाति (Caste)
- (C) पेशा (Occupation)
- (D) शिक्षा (Education)
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\nउत्तर: (B) जाति (Caste)\n
विस्तृत व्याख्या: जाति एक ‘बंद स्तरीकरण’ प्रणाली है क्योंकि इसमें व्यक्ति की स्थिति जन्म से निर्धारित होती है और जीवन भर अपरिवर्तित रहती है (सामाजिक गतिशीलता सीमित होती है)। इसके विपरीत, वर्ग एक ‘खुला’ तंत्र है जहाँ शिक्षा और धन के माध्यम से स्थिति बदली जा सकती है।
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- ‘डिजिटल डिवाइड’ (Digital Divide) का समाजशास्त्रीय प्रभाव क्या है?\n
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- (A) इंटरनेट के उपयोग से केवल मनोरंजन बढ़ा है।
- (B) यह सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को और गहरा करता है।
- (C) इससे सभी वर्गों को समान अवसर प्राप्त हुए हैं।
- (D) इसका सामाजिक संरचना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
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\nउत्तर: (B) यह सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को और गहरा करता है।\n
विस्तृत व्याख्या: डिजिटल डिवाइड का तात्पर्य सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) तक पहुंच रखने वाले और न रखने वाले लोगों के बीच के अंतर से है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में असमानता पैदा करता है, जिससे मौजूदा सामाजिक विभाजन और बढ़ जाते हैं।
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- समकालीन समाजशास्त्र में ‘गिग इकोनॉमी’ (Gig Economy) के संदर्भ में ‘प्रीकेरिटी’ (Precarity) का क्या अर्थ है?\n
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- (A) काम की अधिक उपलब्धता।
- (B) रोजगार की असुरक्षा और लाभों का अभाव।
- (C) उच्च वेतन और लचीला समय।
- (D) स्थायी सरकारी नौकरियाँ।
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\nउत्तर: (B) रोजगार की असुरक्षा और लाभों का अभाव।\n
विस्तृत व्याख्या: गिग इकोनॉमी (जैसे Uber, Zomato के फ्रीलांसर) में श्रमिक ‘स्वतंत्र ठेकेदार’ होते हैं। उन्हें पेंशन, स्वास्थ्य बीमा या नौकरी की सुरक्षा नहीं मिलती। इस अनिश्चित और अस्थिर कार्य स्थिति को समाजशास्त्र में ‘प्रीकेरिटी’ कहा जाता है।
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- एल्गोरिदमिक ध्रुवीकरण (Algorithmic Polarization) का मुख्य सामाजिक परिणाम क्या है?\n
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- (A) सूचनाओं का समान वितरण।
- (B) ‘इको चैम्बर्स’ का निर्माण, जहाँ व्यक्ति केवल अपने विचारों से मेल खाने वाली जानकारी देखता है।
- (C) विभिन्न विचारधाराओं के बीच संवाद में वृद्धि।
- (D) राजनीतिक उदासीनता का अंत।
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\nउत्तर: (B) ‘इको चैम्बर्स’ का निर्माण, जहाँ व्यक्ति केवल अपने विचारों से मेल खाने वाली जानकारी देखता है।\n
विस्तृत व्याख्या: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम उपयोगकर्ता की पसंद के आधार पर कंटेंट दिखाते हैं। इससे व्यक्ति एक ऐसे ‘बबल’ (Bubble) में कैद हो जाता है जहाँ उसे केवल वही विचार दिखते हैं जिन्हें वह पहले से मानता है, जिससे समाज में वैचारिक ध्रुवीकरण और कट्टरता बढ़ती है।
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- बर्गेस (Burgess) के ‘संकेंद्रित क्षेत्र मॉडल’ (Concentric Zone Model) का उपयोग किस अध्ययन के लिए किया जाता है?\n
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- (A) ग्रामीण बस्तियों के विकास के लिए
- (B) शहरी विकास और भूमि उपयोग के पैटर्न के लिए
- (C) जनजातीय क्षेत्रों के मानचित्रण के लिए
- (D) केवल औद्योगिक क्षेत्रों के लिए
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\nउत्तर: (B) शहरी विकास और भूमि उपयोग के पैटर्न के लिए\n
विस्तृत व्याख्या: अर्नेस्ट बर्गेस ने शिकागो स्कूल के हिस्से के रूप में यह मॉडल दिया। उन्होंने बताया कि शहर केंद्र (CBD) से शुरू होकर संकेंद्रित वृत्तों (rings) के रूप में विकसित होते हैं, जिसमें संक्रमण क्षेत्र, श्रमिक वर्ग का क्षेत्र और उच्च वर्ग का क्षेत्र शामिल होते हैं।
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- नृवंशविज्ञान में ‘गहन विवरण’ (Thick Description) की अवधारणा किसने दी थी?\n
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- (A) क्लिफोर्ड गीर्ट्ज़ (Clifford Geertz)
- (B) पीयरे बोर्दियु (Pierre Bourdieu)
- (C) एंथोनी गिडिन्स (Anthony Giddens)
- (D) हर्बर्ट स्पेंसर (Herbert Spencer)
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\nउत्तर: (A) क्लिफोर्ड गीर्ट्ज़ (Clifford Geertz)\n
विस्तृत व्याख्या: गीर्ट्ज़ के अनुसार, समाजशास्त्री को केवल व्यवहार का वर्णन नहीं करना चाहिए, बल्कि उस व्यवहार के पीछे के सांस्कृतिक अर्थ और संदर्भों को भी समझना चाहिए। इसे ही ‘Thick Description’ कहा जाता है।
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- पियरे बोर्दियु (Pierre Bourdieu) के अनुसार ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) क्या है?\n
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- (A) बैंक में जमा पैसा
- (B) ज्ञान, कौशल, शिक्षा और शिष्टाचार जो सामाजिक स्थिति दिलाने में मदद करते हैं।
- (C) केवल पारंपरिक कला और संगीत का ज्ञान।
- (D) भौतिक संपत्ति जैसे जमीन और सोना।
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\nउत्तर: (B) ज्ञान, कौशल, शिक्षा और शिष्टाचार जो सामाजिक स्थिति दिलाने में मदद करते हैं।\n
विस्तृत व्याख्या: बोर्दियु ने तर्क दिया कि केवल आर्थिक पूंजी ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पूंजी (जैसे बोलने का तरीका, डिग्री, कला की समझ) भी वर्ग असमानता को बनाए रखती है क्योंकि उच्च वर्ग अपनी सांस्कृतिक पूंजी को अगली पीढ़ी को हस्तांतरित करता है।
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- ‘शहरीकरण’ (Urbanization) और ‘शहरीकरण की प्रक्रिया’ (Urbanism) के बीच अंतर किसने स्पष्ट किया था?\n
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- (A) लुई वेर्थ (Louis Wirth)
- (B) मैक्स वेबर
- (C) एमिल दुर्खीम
- (D) अगस्त कॉम्टे
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\nउत्तर: (A) लुई वेर्थ (Louis Wirth)\n
विस्तृत व्याख्या: लुई वेर्थ ने ‘Urbanism as a Way of Life’ में तर्क दिया कि शहरीकरण केवल जनसंख्या का बढ़ना नहीं है, बल्कि एक विशिष्ट जीवन शैली है जिसमें सामाजिक संबंध औपचारिक, सतही और व्यक्तिवादी हो जाते हैं।
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- कबीले/जनजाति और जाति के बीच ‘सातत्य’ (Continuum) का विचार किसने प्रस्तुत किया था?\n
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- (A) बी.आर. अंबेडकर
- (B) जी.एस. घुर्ये
- (C) एम.एन. श्रीनिवास
- (D) वेरियर एल्विन
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\nउत्तर: (B) जी.एस. घुर्ये\n
विस्तृत व्याख्या: घुर्ये का मानना था कि भारतीय जनजातियाँ वास्तव में ‘पिछड़ी हिंदू’ (Backward Hindus) हैं और जाति एवं जनजाति के बीच कोई स्पष्ट विभाजन नहीं है, बल्कि एक सातत्य (Continuum) है। इसके विपरीत, वेरियर एल्विन जनजातियों को हिंदू समाज से अलग मानते थे।
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- धर्म के समाजशास्त्र में ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र/लौकिक’ (Profane) का वर्गीकरण किसने किया?\n
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- (A) मैक्स वेबर
- (B) एमिल दुर्खीम
- (C) कार्ल मार्क्स
- (D) अगस्त कॉम्टे
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\nउत्तर: (B) एमिल दुर्खीम\n
विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘The Elementary Forms of the Religious Life’ में तर्क दिया कि धर्म का मूल आधार चीजों को पवित्र (Sacred – जो अलग और पूजनीय है) और लौकिक (Profane – जो सामान्य और रोजमर्रा का है) में विभाजित करना है।
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- परिवार के संदर्भ में ‘परमाणु परिवार’ (Nuclear Family) की ओर झुकाव का मुख्य कारण क्या माना जाता है?\n
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- (A) केवल धार्मिक विश्वास।
- (B) औद्योगिकीकरण और शहरीकरण।
- (C) जनसंख्या में वृद्धि।
- (D) केवल व्यक्तिगत इच्छा।
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\nउत्तर: (B) औद्योगिकीकरण और शहरीकरण।\n
विस्तृत व्याख्या: औद्योगिक क्रांति के बाद काम की तलाश में लोगों का शहरों की ओर पलायन हुआ। भौगोलिक गतिशीलता (Geographic Mobility) की आवश्यकता ने बड़े संयुक्त परिवारों को छोटे परमाणु परिवारों में बदलने के लिए प्रेरित किया क्योंकि वे अधिक लचीले और गतिशील होते हैं।
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- ‘छिपा हुआ पाठ्यक्रम’ (Hidden Curriculum) की अवधारणा शिक्षा के समाजशास्त्र में क्या दर्शाती है?\n
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- (A) वह पाठ्यक्रम जो गुप्त रूप से पढ़ाया जाता है।
- (B) वे अनकहे नियम, मूल्य और व्यवहार जो छात्र औपचारिक शिक्षा के साथ सीखते हैं।
- (C) वह सामग्री जो परीक्षा में नहीं पूछी जाती।
- (D) शिक्षकों द्वारा की गई गलतियाँ।
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\nउत्तर: (B) वे अनकहे नियम, मूल्य और व्यवहार जो छात्र औपचारिक शिक्षा के साथ सीखते हैं।\n
विस्तृत व्याख्या: शिक्षा के समाजशास्त्र में, ‘हिडन करिकुलम’ वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से स्कूल छात्रों को आज्ञाकारिता, समय की पाबंदी और सामाजिक पदानुक्रम को स्वीकार करना सिखाते हैं, जो कि लिखित पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होता लेकिन सामाजिक नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है।
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- निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प ‘पर्यावरण समाजशास्त्र’ (Environmental Sociology) का मुख्य विषय है?\n
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- (A) केवल वन्यजीव संरक्षण।
- (B) समाज और प्रकृति के बीच पारस्परिक संबंध और जलवायु न्याय।
- (C) केवल कृषि तकनीक का अध्ययन।
- (D) वन विभाग के नियमों का विश्लेषण।
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\nउत्तर: (B) समाज और प्रकृति के बीच पारस्परिक संबंध और जलवायु न्याय।\n
विस्तृत व्याख्या: पर्यावरण समाजशास्त्र इस बात का अध्ययन करता है कि मानवीय समाज पर्यावरण को कैसे प्रभावित करता है और पर्यावरणीय परिवर्तन (जैसे ग्लोबल वार्मिंग) सामाजिक संरचनाओं, असमानताओं और न्याय (Climate Justice) को कैसे प्रभावित करते हैं।
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टिप: इन प्रश्नों का अभ्यास करते समय केवल उत्तर न देखें, बल्कि व्याख्या में दिए गए विचारकों और उनकी पुस्तकों के नाम नोट करें। यह आपको मुख्य परीक्षा (Mains) में उत्तर लेखन में मदद करेगा।
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