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भारतीय राजव्यवस्था क्विज़: संवैधानिक ज्ञान की गहन परीक्षा

भारतीय राजव्यवस्था क्विज़: संवैधानिक ज्ञान की गहन परीक्षा

भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों का प्रतीक है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए भारतीय राजव्यवस्था की गहन समझ अत्यंत आवश्यक है। यह दैनिक अभ्यास सेट आपको संवैधानिक अनुच्छेदों, प्रावधानों और ऐतिहासिक निर्णयों की अपनी वैचारिक स्पष्टता का परीक्षण करने की चुनौती देता है। आइए, भारत के शासन ढांचे की जटिलताओं को समझने की अपनी यात्रा शुरू करें और देखें कि आप ‘संविधान विशेषज्ञ’ के रूप में कितने तैयार हैं।


1. भारतीय संविधान की प्रस्तावना के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह संविधान का एक अभिन्न अंग है।
  2. इसे संविधान के अन्य भागों के साथ संशोधित किया जा सकता है।
  3. यह न्याय योग्य है, जिसका अर्थ है कि इसे अदालतों में लागू किया जा सकता है।

उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल a
  2. केवल a और b
  3. केवल b और c
  4. a, b और c

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • कथन a सही है: केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है। इससे पहले, बेरुबाड़ी यूनियन मामले (1960) में न्यायालय ने कहा था कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है।
  • कथन b सही है: केशवानंद भारती मामले के बाद, यह स्थापित हो गया कि प्रस्तावना को संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संशोधित किया जा सकता है, बशर्ते कि यह संविधान के ‘मूल ढांचे’ का उल्लंघन न करे। इसे केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संशोधित किया गया है, जिसने ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्दों को जोड़ा।
  • कथन c गलत है: प्रस्तावना न्याय योग्य नहीं है, जिसका अर्थ है कि इसके प्रावधानों को सीधे अदालतों में लागू नहीं किया जा सकता है। यह संविधान की व्याख्या में मार्गदर्शन प्रदान करती है, लेकिन अधिकारों का स्रोत या प्रतिबंध नहीं है।

2. भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद ‘दोहरे दंड से संरक्षण’ प्रदान करता है?

  1. अनुच्छेद 20(1)
  2. अनुच्छेद 20(2)
  3. अनुच्छेद 20(3)
  4. अनुच्छेद 21

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • अनुच्छेद 20(2) ‘दोहरे दंड से संरक्षण’ (Protection against Double Jeopardy) प्रदान करता है। इसके अनुसार, किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा। यह सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि एक बार बरी या दोषी ठहराए जाने के बाद, व्यक्ति को उसी अपराध के लिए दोबारा मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
  • अनुच्छेद 20(1) कार्योत्तर कानून (Ex-post facto law) से संरक्षण प्रदान करता है, जिसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति को उस अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है जो उस समय कानून के तहत अपराध नहीं था।
  • अनुच्छेद 20(3) आत्म-अभिशंसा (Self-incrimination) के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है, यानी किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
  • अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण प्रदान करता है।

3. निम्नलिखित में से कौन सा राज्य के नीति निदेशक तत्वों में से एक नहीं है?

  1. समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता
  2. काम करने का अधिकार
  3. पर्यावरण का संरक्षण
  4. अस्पृश्यता का अंत

सही उत्तर: D

विस्तृत व्याख्या:

  • अस्पृश्यता का अंत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत एक मौलिक अधिकार है। यह राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का हिस्सा नहीं है। मौलिक अधिकार न्यायोचित होते हैं, जबकि DPSP गैर-न्यायोचित होते हैं।
  • समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता (अनुच्छेद 39A), काम करने का अधिकार (अनुच्छेद 41), और पर्यावरण का संरक्षण और सुधार तथा वन और वन्यजीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48A) सभी राज्य के नीति निदेशक तत्वों का हिस्सा हैं। ये 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए थे (अनुच्छेद 39A और 48A)।

4. भारत के राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में शुरू किया जा सकता है।
  2. प्रस्ताव को सदन की कुल सदस्यता के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना चाहिए।
  3. यह एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है।

उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल a
  2. केवल a और b
  3. केवल b और c
  4. a, b और c

सही उत्तर: D

विस्तृत व्याख्या:

  • अनुच्छेद 61 राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया से संबंधित है।
  • कथन a सही है: महाभियोग का आरोप संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) द्वारा शुरू किया जा सकता है।
  • कथन b सही है: आरोप संबंधी प्रस्ताव पर उस सदन की कुल सदस्यता के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए जिसने इसे प्रस्तावित किया है, और 14 दिनों का नोटिस राष्ट्रपति को देना होता है। उसके बाद, जिस सदन में इसे प्रस्तावित किया गया है, उसे अपनी कुल सदस्यता के दो-तिहाई बहुमत से इसे पारित करना होता है। फिर इसे दूसरे सदन में भेजा जाता है।
  • कथन c सही है: दूसरा सदन आरोपों की जांच करता है। राष्ट्रपति को ऐसी जांच में उपस्थित होने और प्रतिनिधित्व करने का अधिकार होता है। यदि दूसरा सदन भी आरोपों को सही पाता है और अपनी कुल सदस्यता के दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करता है, तो राष्ट्रपति को प्रस्ताव पारित होने की तिथि से पद से हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया में न्यायिक जाँच के तत्व शामिल होने के कारण इसे अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया कहा जाता है।

5. लोकसभा की स्पीकर के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?

  1. वह सदन के सदस्यों में से चुनी जाती है।
  2. वह सदन को भंग कर सकती है।
  3. वह अपना इस्तीफा उपाध्यक्ष को सौंपती है।
  4. मत बराबर होने की स्थिति में वह निर्णायक मत का प्रयोग कर सकती है।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • कथन B असत्य है: लोकसभा की स्पीकर सदन को भंग नहीं कर सकती। लोकसभा को भंग करने का अधिकार भारत के राष्ट्रपति (अनुच्छेद 85(2)(b)) के पास है, मंत्रिपरिषद की सलाह पर।
  • कथन A सही है: स्पीकर लोकसभा के सदस्यों में से चुने जाते हैं (अनुच्छेद 93)।
  • कथन C सही है: स्पीकर अपना इस्तीफा लोकसभा के उपाध्यक्ष को सौंपते हैं (अनुच्छेद 94(b))।
  • कथन D सही है: मत बराबर होने की स्थिति में, स्पीकर अपने निर्णायक मत (Casting Vote) का प्रयोग कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि निर्णय लिया जा सके और गतिरोध दूर हो (अनुच्छेद 100(1))।

6. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. यह केवल सर्वोच्च न्यायालय के पास है।
  2. यह संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।
  3. यह सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों के पास है।
  4. यह केवल कानूनों की संवैधानिकता की जाँच तक सीमित है, प्रशासनिक कार्यों की नहीं।

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

  • कथन C सही है: न्यायिक समीक्षा की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32 और 136, 142) और उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226 और 227) दोनों के पास है। यह न्यायपालिका को विधायिका और कार्यपालिका द्वारा किए गए कार्यों की संवैधानिकता की जांच करने की शक्ति देती है।
  • कथन A गलत है: जैसा कि ऊपर बताया गया है, उच्च न्यायालयों के पास भी यह शक्ति है।
  • कथन B गलत है: न्यायिक समीक्षा शब्द का संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है, लेकिन इसके अंतर्निहित सिद्धांत विभिन्न अनुच्छेदों (जैसे 13, 32, 226, 227) से उत्पन्न होते हैं। यह संयुक्त राज्य अमेरिका से प्रेरित एक अवधारणा है।
  • कथन D गलत है: न्यायिक समीक्षा न केवल कानूनों बल्कि कार्यपालिका (प्रशासनिक कार्यों) द्वारा लिए गए निर्णयों की भी संवैधानिकता की जांच करती है, यदि वे मौलिक अधिकारों या संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।

7. भारतीय संविधान की किस अनुसूची में संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ शामिल हैं, जो केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का वितरण करती हैं?

  1. छठी अनुसूची
  2. सातवीं अनुसूची
  3. आठवीं अनुसूची
  4. नौवीं अनुसूची

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित है। इसमें तीन सूचियाँ शामिल हैं: संघ सूची (Union List), राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List)। इन सूचियों में विभिन्न विषयों को सूचीबद्ध किया गया है जिन पर केंद्र और राज्य सरकारें कानून बना सकती हैं।
  • छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है।
  • आठवीं अनुसूची भारतीय भाषाओं से संबंधित है जिसे संविधान द्वारा मान्यता दी गई है।
  • नौवीं अनुसूची कुछ अधिनियमों और विनियमों के सत्यापन से संबंधित है, जिन्हें न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिए जोड़ा गया था (हालांकि, केशवानंद भारती मामले के बाद, 24 अप्रैल 1973 के बाद जोड़े गए कानून न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं)।

8. भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. वह राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  2. वह संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में भाग ले सकता है।
  3. उसके पास संसद में मतदान का अधिकार होता है।

उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल a
  2. केवल a और b
  3. केवल b और c
  4. a, b और c

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • अनुच्छेद 76 भारत के महान्यायवादी के पद से संबंधित है।
  • कथन a सही है: महान्यायवादी की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
  • कथन b सही है: महान्यायवादी संसद के किसी भी सदन या उनकी संयुक्त बैठक और संसद की किसी समिति की कार्यवाही में भाग ले सकता है, लेकिन मतदान का अधिकार नहीं रखता।
  • कथन c गलत है: महान्यायवादी संसद का सदस्य नहीं होता है, इसलिए उसे संसद में मतदान का अधिकार नहीं होता है (अनुच्छेद 88)। वह केवल सरकार को कानूनी मामलों पर सलाह देने वाला सर्वोच्च कानूनी अधिकारी होता है।

9. भारतीय संविधान के किस भाग में पंचायती राज से संबंधित प्रावधान हैं?

  1. भाग IX
  2. भाग IXA
  3. भाग X
  4. भाग XI

सही उत्तर: A

विस्तृत व्याख्या:

  • भाग IX ‘पंचायतें’ (The Panchayats) से संबंधित है और इसे 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया था। यह भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है।
  • भाग IXA ‘नगर पालिकाएँ’ (The Municipalities) से संबंधित है और इसे 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया था, जो शहरी स्थानीय स्वशासन से संबंधित है।
  • भाग X अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों से संबंधित है।
  • भाग XI संघ और राज्यों के बीच संबंधों से संबंधित है।

10. भारत में राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) के उद्घोषणा के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा आधार नहीं है?

  1. युद्ध
  2. बाहरी आक्रमण
  3. सशस्त्र विद्रोह
  4. आंतरिक अशांति

सही उत्तर: D

विस्तृत व्याख्या:

  • भारत में राष्ट्रीय आपातकाल अनुच्छेद 352 के तहत घोषित किया जाता है। मूल संविधान में, इसके आधार ‘युद्ध’, ‘बाहरी आक्रमण’ और ‘आंतरिक अशांति’ थे।
  • लेकिन 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा ‘आंतरिक अशांति’ (Internal Disturbance) शब्द को ‘सशस्त्र विद्रोह’ (Armed Rebellion) शब्द से प्रतिस्थापित कर दिया गया। यह संशोधन 1975 के आपातकाल के दुरुपयोग को रोकने के लिए किया गया था, जब ‘आंतरिक अशांति’ के आधार पर आपातकाल लगाया गया था।
  • इसलिए, वर्तमान में, राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के आधार हैं: युद्ध, बाहरी आक्रमण, या सशस्त्र विद्रोह।

11. ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) के रूप में किस संवैधानिक संशोधन को जाना जाता है?

  1. 73वाँ संशोधन
  2. 42वाँ संशोधन
  3. 44वाँ संशोधन
  4. 61वाँ संशोधन

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 को ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) के रूप में जाना जाता है क्योंकि इसने संविधान में व्यापक बदलाव किए। इसमें प्रस्तावना में नए शब्द (समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, अखंडता) जोड़े गए, मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया (भाग IVA), राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य किया गया, और न्यायिक समीक्षा की शक्ति को सीमित करने का प्रयास किया गया (हालांकि बाद में इसे बहाल कर दिया गया)।
  • 73वाँ संशोधन (1992) पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया।
  • 44वाँ संशोधन (1978) ने 42वें संशोधन द्वारा किए गए कुछ अत्यधिक परिवर्तनों को पलटा और आपातकालीन प्रावधानों को अधिक सख्त बनाया (जैसे ‘आंतरिक अशांति’ को ‘सशस्त्र विद्रोह’ से बदलना)।
  • 61वाँ संशोधन (1989) ने मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी।

12. मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) किस समिति की सिफारिशों पर भारतीय संविधान में जोड़े गए थे?

  1. बलवंत राय मेहता समिति
  2. अशोक मेहता समिति
  3. स्वर्ण सिंह समिति
  4. एल.एम. सिंघवी समिति

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

  • मौलिक कर्तव्य स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVA में अनुच्छेद 51A के तहत जोड़े गए थे। प्रारंभ में, 10 मौलिक कर्तव्य थे, और बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा 11वाँ मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया।
  • बलवंत राय मेहता समिति और अशोक मेहता समिति पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित थीं।
  • एल.एम. सिंघवी समिति भी पंचायती राज के पुनरोद्धार से संबंधित थी।

13. भारत के उपराष्ट्रपति को पद से हटाने के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. उन्हें केवल राज्यसभा में प्रस्ताव पारित करके हटाया जा सकता है।
  2. प्रस्ताव को राज्यसभा की कुल सदस्यता के पूर्ण बहुमत से पारित किया जाना चाहिए।
  3. लोकसभा की सहमति सामान्य बहुमत से आवश्यक है।

उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल a
  2. केवल a और c
  3. केवल b और c
  4. a, b और c

सही उत्तर: D

विस्तृत व्याख्या:

  • अनुच्छेद 67(b) के अनुसार, उपराष्ट्रपति को राज्यसभा द्वारा अपने तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित एक प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है, जिससे लोकसभा सहमत होती है।
  • कथन a सही है: उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही शुरू किया जा सकता है, क्योंकि वह राज्यसभा का पदेन अध्यक्ष होता है।
  • कथन b सही है: प्रस्ताव को ‘राज्यसभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत’ (absolute majority of the then members of the Rajya Sabha) से पारित किया जाना चाहिए, जिसका अर्थ है कुल सदस्यता का बहुमत (50% से अधिक) न कि केवल उपस्थित और मतदान करने वालों का बहुमत।
  • कथन c सही है: इस प्रस्ताव को लोकसभा द्वारा साधारण बहुमत (Simple Majority) से सहमत होना चाहिए। महाभियोग के विपरीत, इसमें कोई ‘आधार’ या ‘जांच’ शामिल नहीं होती है।

14. निम्नलिखित में से कौन सी संसदीय समिति संसद के व्यय और वित्तीय अनियमिताओं की जाँच करती है?

  1. प्राक्कलन समिति (Estimates Committee)
  2. लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee)
  3. सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति (Committee on Public Undertakings)
  4. अधिवेशन समिति (Committee on Assurances)

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC) भारत सरकार के व्यय की लेखा परीक्षा करती है। यह भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट की जांच करती है और यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का व्यय संसद द्वारा अनुमोदित तरीके से किया गया है। इसमें 22 सदस्य (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से) होते हैं।
  • प्राक्कलन समिति सरकारी व्यय में किफायत और दक्षता पर सुझाव देती है। यह सबसे बड़ी संसदीय समिति है, जिसमें केवल 30 लोकसभा सदस्य होते हैं।
  • सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की रिपोर्टों और खातों की जांच करती है।
  • अधिवेशन समिति मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों और वादों के कार्यान्वयन की निगरानी करती है।

15. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत संविधान संशोधन की प्रक्रिया दी गई है?

  1. अनुच्छेद 356
  2. अनुच्छेद 360
  3. अनुच्छेद 368
  4. अनुच्छेद 370

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

  • अनुच्छेद 368 भारतीय संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति और प्रक्रिया से संबंधित है। यह संविधान के भाग XX में स्थित है। यह तीन प्रकार के संशोधनों की बात करता है: संसद के साधारण बहुमत से, संसद के विशेष बहुमत से, और संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन से।
  • अनुच्छेद 356 राज्य में संवैधानिक मशीनरी की विफलता के मामले में राष्ट्रपति शासन (State Emergency) लगाने से संबंधित है।
  • अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency) लगाने से संबंधित है।
  • अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर राज्य के लिए विशेष प्रावधानों से संबंधित था, जिसे 2019 में निरस्त कर दिया गया।

16. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद ‘बाल श्रम’ पर प्रतिबंध लगाता है?

  1. अनुच्छेद 21
  2. अनुच्छेद 23
  3. अनुच्छेद 24
  4. अनुच्छेद 25

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

  • अनुच्छेद 24 ‘कारखानों आदि में बच्चों के नियोजन का प्रतिषेध’ करता है। इसके अनुसार, चौदह वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए या किसी अन्य खतरनाक नियोजन में नहीं लगाया जाएगा। यह शोषण के विरुद्ध अधिकार का हिस्सा है।
  • अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 23 मानव दुर्व्यापार और बलात्श्रम का प्रतिषेध करता है, जो बेगार, बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी पर प्रतिबंध लगाता है।
  • अनुच्छेद 25 अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता से संबंधित है।

17. मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निदेशक तत्वों के बीच मुख्य अंतर के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. मौलिक अधिकार न्यायोचित हैं, जबकि DPSP नहीं हैं।
  2. मौलिक अधिकार व्यक्ति के कल्याण को बढ़ावा देते हैं, जबकि DPSP सामुदायिक कल्याण को।
  3. मौलिक अधिकार नकारात्मक दायित्व हैं, जबकि DPSP सकारात्मक दायित्व हैं।
  4. संविधान ने मौलिक अधिकारों पर DPSP को प्राथमिकता दी है।

सही उत्तर: D

विस्तृत व्याख्या:

  • कथन D सही नहीं है: संविधान ने मौलिक अधिकारों पर DPSP को प्राथमिकता नहीं दी है, बल्कि मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 13) DPSP पर प्रभावी होते हैं। हालांकि, 25वें, 42वें और 44वें संशोधन के माध्यम से DPSP को कुछ हद तक मौलिक अधिकारों पर वरीयता देने का प्रयास किया गया (जैसे अनुच्छेद 39(b) और 39(c) को अनुच्छेद 14, 19, 31 पर वरीयता), लेकिन अंततः सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती मामले और मिनर्वा मिल्स मामले में ‘मूल ढांचे’ के सिद्धांत को स्थापित करते हुए यह सुनिश्चित किया कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है।
  • कथन A सही है: मौलिक अधिकार अदालतों द्वारा प्रवर्तनीय (enforceable) हैं, जबकि DPSP नहीं हैं।
  • कथन B सही है: मौलिक अधिकार मुख्य रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा करते हैं, जबकि DPSP एक ‘कल्याणकारी राज्य’ की स्थापना के लिए सामाजिक और आर्थिक न्याय प्रदान करते हैं।
  • कथन C सही है: मौलिक अधिकार राज्य की शक्ति पर प्रतिबंध लगाते हैं (क्या नहीं करना है), जबकि DPSP राज्य को कुछ करने के लिए निर्देशित करते हैं (क्या करना है)।

18. केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission – CVC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह एक संवैधानिक निकाय है।
  2. यह संथानम समिति की सिफारिशों पर स्थापित किया गया था।
  3. इसके पास दीवानी न्यायालय की शक्तियाँ होती हैं।

उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल a
  2. केवल a और b
  3. केवल b और c
  4. a, b और c

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

  • कथन a गलत है: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) एक संवैधानिक निकाय नहीं है। इसे 1964 में संथानम समिति की सिफारिशों पर कार्यपालिका के एक प्रस्ताव द्वारा स्थापित किया गया था। बाद में, इसे 2003 में केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 द्वारा वैधानिक दर्जा दिया गया।
  • कथन b सही है: CVC की स्थापना संथानम समिति (1962-1964) की सिफारिशों पर भ्रष्टाचार को रोकने के लिए की गई थी।
  • कथन c सही है: CVC को जांच करते समय दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, जिसका अर्थ है कि वह व्यक्तियों को समन भेज सकता है, साक्ष्य मांग सकता है, आदि।

19. भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा सही नहीं है?

  1. वह सैन्य न्यायालय द्वारा दिए गए दंड को क्षमा कर सकता है।
  2. वह मृत्युदंड को क्षमा कर सकता है।
  3. क्षमादान की शक्ति पर न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती।
  4. वह लघुकरण (Commutation) का प्रयोग कर सकता है।

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

  • कथन C सही नहीं है: भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) पर न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न मामलों में यह स्पष्ट किया है कि यदि राष्ट्रपति द्वारा शक्ति का प्रयोग मनमानी, तर्कहीन, भेदभावपूर्ण या दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया है, तो अदालत इसकी समीक्षा कर सकती है।
  • कथन A सही है: राष्ट्रपति सैन्य न्यायालय (कोर्ट मार्शल) द्वारा दिए गए दंड को क्षमा कर सकता है।
  • कथन B सही है: राष्ट्रपति मृत्युदंड को भी क्षमा कर सकता है, जबकि राज्यपाल (अनुच्छेद 161) के पास मृत्युदंड को क्षमा करने की शक्ति नहीं होती है (वह केवल उसे निलंबित या कम कर सकता है)।
  • कथन D सही है: लघुकरण (Commutation) का अर्थ है दंड के स्वरूप को बदलना, जैसे मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलना। राष्ट्रपति के पास क्षमा (Pardon), लघुकरण (Commutation), परिहार (Remission), विराम (Respite) और प्रविलंबन (Reprieve) की शक्तियाँ हैं।

20. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. वह राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  2. उसे केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान तरीके और आधार पर पद से हटाया जा सकता है।
  3. उसका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, होता है।

उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल a
  2. केवल a और b
  3. केवल b और c
  4. a, b और c

सही उत्तर: D

विस्तृत व्याख्या:

  • अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग से संबंधित है।
  • कथन a सही है: मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • कथन b सही है: मुख्य चुनाव आयुक्त को उसके पद से उसी प्रकार और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस प्रकार और जिन आधारों पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। यह संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से एक प्रस्ताव पारित करके होता है। अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर राष्ट्रपति हटा सकते हैं।
  • कथन c सही है: मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष की अवधि के लिए या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक होता है, जो भी पहले हो।

21. भारतीय संविधान के किस भाग में संघ राज्य क्षेत्रों (Union Territories) से संबंधित प्रावधान हैं?

  1. भाग VII
  2. भाग VIII
  3. भाग IX
  4. भाग X

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • भाग VIII ‘संघ राज्य क्षेत्र’ (The Union Territories) से संबंधित है और इसमें अनुच्छेद 239 से 242 शामिल हैं। यह संघ शासित प्रदेशों के प्रशासन और उनके विशेष प्रावधानों का वर्णन करता है।
  • भाग VII (राज्यों से संबंधित भाग B, पहली अनुसूची) को 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा निरस्त कर दिया गया था।
  • भाग IX पंचायतों से संबंधित है।
  • भाग X अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों से संबंधित है।

22. लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. यह एक संवैधानिक निकाय है।
  2. इसके अधिकार क्षेत्र में प्रधानमंत्री भी शामिल हैं।
  3. यह लोकायुक्त की स्थापना अनिवार्य नहीं करता है।
  4. यह केवल केंद्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार से निपटता है।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 भारत में सार्वजनिक पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए लोकपाल (केंद्रीय स्तर पर) और लोकायुक्त (राज्य स्तर पर) की स्थापना का प्रावधान करता है।
  • कथन A गलत है: लोकपाल एक वैधानिक (statutory) निकाय है, संवैधानिक नहीं। इसे संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया है।
  • कथन B सही है: यह अधिनियम प्रधानमंत्री को भी अपने अधिकार क्षेत्र में लाता है, हालांकि कुछ सुरक्षा उपायों और विशिष्ट शर्तों के साथ।
  • कथन C गलत है: अधिनियम राज्यों को एक वर्ष की अवधि के भीतर लोकायुक्त संस्थान की स्थापना के लिए कानून बनाने के लिए अनिवार्य करता है।
  • कथन D गलत है: यह केंद्रीय स्तर पर लोकपाल और राज्य स्तर पर लोकायुक्त के माध्यम से भ्रष्टाचार से निपटता है।

23. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद भारत के नागरिकों को ‘शांतिपूर्वक और हथियार रहित’ सभा करने का अधिकार प्रदान करता है?

  1. अनुच्छेद 19(1)(a)
  2. अनुच्छेद 19(1)(b)
  3. अनुच्छेद 19(1)(c)
  4. अनुच्छेद 19(1)(d)

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • अनुच्छेद 19(1) छह मौलिक स्वतंत्रताओं की गारंटी देता है।
  • अनुच्छेद 19(1)(b) भारत के सभी नागरिकों को ‘शांतिपूर्वक और हथियार रहित’ सभा करने का अधिकार प्रदान करता है। इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जैसे सार्वजनिक व्यवस्था या भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में।
  • अनुच्छेद 19(1)(a) वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है।
  • अनुच्छेद 19(1)(c) संघ या संगम या सहकारी समितियां बनाने का अधिकार है।
  • अनुच्छेद 19(1)(d) भारत के पूरे क्षेत्र में अबाध संचरण का अधिकार है।

24. भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन मतदान नहीं कर सकता है?

  1. लोकसभा के निर्वाचित सदस्य
  2. राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य
  3. राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
  4. राज्य विधान परिषदों के निर्वाचित सदस्य

सही उत्तर: D

विस्तृत व्याख्या:

  • अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा किया जाता है जिसमें शामिल होते हैं:
    1. संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य (लोकसभा और राज्यसभा)।
    2. राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
    3. दिल्ली और पुदुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (जो 70वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़े गए)।
  • इसलिए, राज्य विधान परिषदों (State Legislative Councils) के सदस्य, चाहे वे निर्वाचित हों या मनोनीत, राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान करने के हकदार नहीं होते हैं। इसी तरह, संसद के मनोनीत सदस्य भी मतदान नहीं करते हैं।

25. ‘प्रोटेम स्पीकर’ (Pro-tem Speaker) का मुख्य कार्य क्या है?

  1. संसद सत्रों की अध्यक्षता करना।
  2. नए निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाना।
  3. सदन की कार्यवाही को स्थगित करना।
  4. राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया को शुरू करना।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

  • ‘प्रोटेम स्पीकर’ एक अस्थायी स्पीकर होता है जिसे राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है, आमतौर पर लोकसभा चुनाव के बाद पहली बैठक से पहले।
  • उसका मुख्य कार्य नए निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाना और नए स्पीकर के चुनाव तक सदन की कार्यवाही का संचालन करना होता है। जब नया स्पीकर चुन लिया जाता है, तो प्रोटेम स्पीकर का पद समाप्त हो जाता है।
  • वह सदन सत्रों की अध्यक्षता स्थायी रूप से नहीं करता (यह स्पीकर का कार्य है)। वह सदन को भंग नहीं कर सकता (यह राष्ट्रपति का अधिकार है)। महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करना उसका कार्य नहीं है।

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