प्रिय उम्मीदवारों, ‘The Sociology Scholar’ के इस विशेष सत्र में आपका स्वागत है!
समाजशास्त्र की जटिल दुनिया में अपनी पकड़ को मज़बूत करने के लिए तैयार हो जाइए। यह दैनिक क्विज़ आपको न केवल प्रमुख समाजशास्त्रीय अवधारणाओं, विचारकों और सिद्धांतों से परिचित कराएगा, बल्कि समकालीन सामाजिक मुद्दों पर आपकी समझ को भी परखेगा। अपनी विश्लेषणात्मक क्षमता को चुनौती दें और अपनी तैयारी को एक नई दिशा दें।
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हालिया अध्ययनों के अनुसार, सोशल मीडिया एल्गोरिदम का राजनीतिक ध्रुवीकरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह घटना समाजशास्त्र में किस अवधारणा से सबसे निकटता से संबंधित है?
- A) एनोमी
- B) सांस्कृतिक विलंबना
- C) डिजिटल विभाजन
- D) तकनीकी नियतिवाद
सही उत्तर: D) तकनीकी नियतिवाद
विस्तृत व्याख्या: तकनीकी नियतिवाद (Technological Determinism) यह विचार है कि प्रौद्योगिकी समाज और संस्कृति के विकास को आकार देती है। इस संदर्भ में, सोशल मीडिया एल्गोरिदम की संरचना और कार्यप्रणाली यह निर्धारित करती है कि लोग सूचनाओं को कैसे प्राप्त करते हैं और राजनीतिक रूप से कैसे ध्रुवीकृत होते हैं, जैसा कि हालिया शोध में टिकटॉक के एल्गोरिदम के दाहिने झुकाव वाले सामग्री की ओर झुकाव से स्पष्ट है।
- एनोमी (Anomie): दुर्खीम द्वारा प्रस्तुत यह स्थिति सामाजिक मानदंडों के अभाव या भ्रम को संदर्भित करती है, जो व्यक्तिगत भटकाव का कारण बनती है।
- सांस्कृतिक विलंबना (Cultural Lag): यह ओगबर्न द्वारा दी गई अवधारणा है, जहां भौतिक संस्कृति में परिवर्तन तेजी से होता है, लेकिन अभौतिक संस्कृति (मूल्य, मानदंड) अनुकूलन में पीछे रह जाती है।
- डिजिटल विभाजन (Digital Divide): यह समाज के उन वर्गों के बीच असमानता को संदर्भित करता है जिनके पास सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) तक पहुंच है और जिनके पास नहीं है।
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अमेरिकी व्यापार और कानून स्कूलों में बढ़ती नस्लीय विविधता को उच्च शैक्षणिक प्रदर्शन और अधिक समावेशी परिसर जलवायु से जोड़ा गया है। यह समाजशास्त्रीय रूप से किस सिद्धांत को पुष्ट करता है?
- A) संघर्ष सिद्धांत
- B) प्रकार्यात्मक सिद्धांत
- C) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद
- D) सामाजिक विनिमय सिद्धांत
सही उत्तर: B) प्रकार्यात्मक सिद्धांत
विस्तृत व्याख्या: प्रकार्यात्मक सिद्धांत (Functionalist Theory) समाज को एक ऐसी प्रणाली के रूप में देखता है जिसके विभिन्न भाग सामाजिक व्यवस्था और स्थिरता बनाए रखने के लिए एक साथ काम करते हैं। इस मामले में, नस्लीय विविधता को एक घटक के रूप में देखा जा सकता है जो शैक्षणिक संस्थानों के समग्र कार्य और प्रदर्शन (जैसे उच्च शैक्षणिक परिणाम और समावेशी जलवायु) में सकारात्मक योगदान देता है, जिससे सामाजिक एकजुटता और सीखने के अवसर बढ़ते हैं।
- संघर्ष सिद्धांत (Conflict Theory): यह समाज को संसाधनों और शक्ति के लिए संघर्ष के अखाड़े के रूप में देखता है।
- प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism): यह सूक्ष्म स्तर पर व्यक्तियों के बीच प्रतीकों के माध्यम से होने वाली अंतःक्रियाओं और अर्थों पर केंद्रित है।
- सामाजिक विनिमय सिद्धांत (Social Exchange Theory): यह मानता है कि सामाजिक व्यवहार लागत-लाभ विश्लेषण और प्रतिफल की अपेक्षा पर आधारित है।
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AI-संचालित गिग-इकोनॉमी प्लेटफॉर्म श्रम संबंधों को नया आकार दे रहे हैं और कम-कुशल श्रमिकों के लिए अनिश्चितता को बढ़ा रहे हैं। इस परिघटना को समझने के लिए कार्ल मार्क्स की कौन सी अवधारणा सर्वाधिक प्रासंगिक है?
- A) अलगाव (Alienation)
- B) वर्ग-चेतना (Class Consciousness)
- C) अधोसंरचना और अधिरचना (Base and Superstructure)
- D) पूंजी का संचय (Accumulation of Capital)
सही उत्तर: A) अलगाव (Alienation)
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स का ‘अलगाव’ (Alienation) सिद्धांत आधुनिक पूंजीवादी समाज में श्रमिकों के अनुभव का वर्णन करता है जहां वे अपने श्रम, उत्पादन की प्रक्रिया, उत्पाद और यहां तक कि अपनी मानवीय प्रकृति से भी अलग हो जाते हैं। गिग-इकोनॉमी में, श्रमिक अक्सर प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम द्वारा नियंत्रित होते हैं, उनके पास काम पर बहुत कम नियंत्रण होता है, और उन्हें लाभ के एक छोटे हिस्से के लिए काम करना पड़ता है, जो अलगाव के विभिन्न रूपों (जैसे उत्पाद से अलगाव, प्रक्रिया से अलगाव) को दर्शाता है। यह स्थिति उनकी अनिश्चितता (precarity) को बढ़ाती है।
- वर्ग-चेतना (Class Consciousness): यह तब होता है जब एक ही वर्ग के सदस्य अपनी साझा शोषणकारी स्थिति के बारे में जागरूक होते हैं।
- अधोसंरचना और अधिरचना (Base and Superstructure): मार्क्स के अनुसार, आर्थिक ‘अधोसंरचना’ (उत्पादन के संबंध) सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक ‘अधिरचना’ (संस्कृति, कानून, धर्म) को निर्धारित करती है।
- पूंजी का संचय (Accumulation of Capital): यह पूंजीपतियों द्वारा लाभ को पुनः निवेश करके अपनी पूंजी बढ़ाने की प्रक्रिया है।
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महामारी के बाद युवा वयस्कों में आवास असुरक्षा में तेज वृद्धि हुई है, जो व्यापक सामाजिक-आर्थिक अंतरालों को रेखांकित करती है। यह किस प्रकार की असमानता का उदाहरण है?
- A) लिंग असमानता
- B) जातीय असमानता
- C) संरचनात्मक असमानता
- D) सांस्कृतिक असमानता
सही उत्तर: C) संरचनात्मक असमानता
विस्तृत व्याख्या: संरचनात्मक असमानता (Structural Inequality) से तात्पर्य समाज की अंतर्निहित व्यवस्थाओं और संस्थानों से है जो कुछ समूहों के लिए अवसरों और संसाधनों तक पहुंच को सीमित या बाधित करती हैं, जबकि दूसरों को लाभ होता है। आवास असुरक्षा में वृद्धि केवल व्यक्तिगत विफलताओं का परिणाम नहीं है, बल्कि व्यापक आर्थिक नीतियों, श्रम बाजार के रुझान और सामाजिक सुरक्षा जाल में कमियों जैसे संरचनात्मक कारकों का परिणाम है जो कुछ आबादी के लिए आवास तक पहुंच को और अधिक कठिन बनाते हैं।
- लिंग असमानता (Gender Inequality): लिंग के आधार पर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों और अवसरों में असमानता।
- जातीय असमानता (Ethnic Inequality): जातीय समूह से संबंधित होने के आधार पर अधिकारों और अवसरों में असमानता।
- सांस्कृतिक असमानता (Cultural Inequality): विभिन्न सांस्कृतिक समूहों के मूल्यों या प्रथाओं को अलग-अलग महत्व या सम्मान दिए जाने से उत्पन्न असमानता।
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जलवायु न्याय के इर्द-गिर्द सामुदायिक आयोजन का पुनरुत्थान दर्शा रहा है कि कैसे जमीनी स्तर के आंदोलन व्यवस्थागत पर्यावरणीय नीति परिवर्तनों की मांग के लिए विविध आबादी को जुटा रहे हैं। यह किस प्रकार के सामाजिक आंदोलन का उदाहरण है?
- A) पहचान आंदोलन
- B) सुधारवादी आंदोलन
- C) क्रांतिकारी आंदोलन
- D) वैकल्पिक आंदोलन
सही उत्तर: B) सुधारवादी आंदोलन
विस्तृत व्याख्या: सुधारवादी आंदोलन (Reformative Movements) सामाजिक आंदोलन होते हैं जो समाज के भीतर कुछ विशिष्ट पहलुओं या प्रथाओं को बदलने का लक्ष्य रखते हैं, लेकिन वे पूरे सामाजिक ढांचे को मौलिक रूप से नहीं बदलना चाहते। जलवायु न्याय आंदोलन मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक प्रणालियों के भीतर पर्यावरणीय नीतियों और प्रथाओं में सुधार की मांग कर रहा है, जिससे यह एक सुधारवादी आंदोलन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- पहचान आंदोलन (Identity Movements): ये समूह पहचान (जैसे लिंग, जाति, धर्म) के आधार पर अधिकारों और मान्यता के लिए लड़ते हैं।
- क्रांतिकारी आंदोलन (Revolutionary Movements): ये मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को पूरी तरह से उखाड़ फेंकने और एक नई व्यवस्था स्थापित करने का लक्ष्य रखते हैं।
- वैकल्पिक आंदोलन (Alternative Movements): ये व्यक्तिगत स्तर पर व्यवहार या जीवन शैली में छोटे बदलावों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
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“द आइडिया ऑफ ए सोशल साइंस एंड इट्स रिलेशन टू फिलॉसफी” (The Idea of a Social Science and Its Relation to Philosophy) नामक पुस्तक किसने लिखी है?
- A) अल्फ्रेड शुट्ज़
- B) पीटर बर्जर
- C) एंथनी गिडेंस
- D) पीटर विंच
सही उत्तर: D) पीटर विंच
विस्तृत व्याख्या: पीटर विंच (Peter Winch) एक ब्रिटिश दार्शनिक थे जिन्होंने लुडविग विट्गेन्स्टाइन के विचारों से प्रभावित होकर समाजशास्त्र के दर्शनशास्त्र पर महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी पुस्तक “द आइडिया ऑफ ए सोशल साइंस एंड इट्स रिलेशन टू फिलॉसफी” (1958) सामाजिक विज्ञानों की पद्धति और प्रकृति पर एक मौलिक पाठ है, जो प्राकृतिक विज्ञानों से उनके अंतर पर जोर देती है और मानव क्रियाओं को समझने के लिए अर्थ और नियमों के महत्व पर बल देती है।
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एमिल दुर्खीम के अनुसार, आधुनिक समाजों में व्यक्तियों के बीच सामाजिक एकजुटता का आधार क्या है?
- A) यांत्रिक एकजुटता (Mechanical Solidarity)
- B) जैविक एकजुटता (Organic Solidarity)
- C) धार्मिक एकजुटता (Religious Solidarity)
- D) पारंपरिक एकजुटता (Traditional Solidarity)
सही उत्तर: B) जैविक एकजुटता (Organic Solidarity)
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने अपनी कृति “द डिवीज़न ऑफ लेबर इन सोसाइटी” (The Division of Labor in Society) में सामाजिक एकजुटता के दो रूपों का वर्णन किया है: यांत्रिक और जैविक। आधुनिक समाजों में, जहां श्रम का उच्च विभाजन होता है और लोग विभिन्न विशेष कार्यों में लगे होते हैं, वे एक-दूसरे पर अपनी आवश्यकताओं के लिए निर्भर करते हैं। यह अन्योन्याश्रयता (interdependence) जैविक एकजुटता का आधार बनती है, जो जटिलता और विशेषज्ञता से उत्पन्न होती है। यांत्रिक एकजुटता सरल, सजातीय समाजों की विशेषता है।
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मैक्स वेबर के नौकरशाही (Bureaucracy) के आदर्श प्रकार (Ideal Type) की निम्नलिखित में से कौन सी विशेषता नहीं है?
- A) नियम-आधारित संचालन
- B) अवैयक्तिकता
- C) पदसोपानिक संरचना
- D) व्यक्तिगत वफादारी पर आधारित निर्णय
सही उत्तर: D) व्यक्तिगत वफादारी पर आधारित निर्णय
विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने नौकरशाही को आधुनिक तर्कसंगत-कानूनी सत्ता का एक कुशल रूप माना। उनके आदर्श प्रकार की नौकरशाही की विशेषताओं में नियम-आधारित संचालन, अवैयक्तिकता (निर्णय व्यक्तियों के बजाय नियमों पर आधारित होते हैं), पदसोपानिक संरचना, विशेषज्ञता, लिखित दस्तावेज और तकनीकी योग्यता के आधार पर भर्ती शामिल है। व्यक्तिगत वफादारी पर आधारित निर्णय लेना नौकरशाही के सिद्धांतों के विपरीत है, क्योंकि यह तर्कसंगतता और अवैयक्तिकता को कमजोर करता है।
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कार्ल मार्क्स के अनुसार, उत्पादन के साधनों के निजी स्वामित्व के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली प्रमुख सामाजिक असमानता क्या है?
- A) लिंग असमानता
- B) जातीय असमानता
- C) वर्ग असमानता
- D) शक्ति असमानता
सही उत्तर: C) वर्ग असमानता
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स के सिद्धांत का केंद्रीय विषय वर्ग संघर्ष है, जो उत्पादन के साधनों (भूमि, कारखाने, पूंजी) के निजी स्वामित्व से उत्पन्न होता है। यह स्वामित्व समाज को दो मुख्य विरोधी वर्गों में विभाजित करता है: पूंजीपति (Bourgeoisie), जो उत्पादन के साधनों के मालिक हैं, और सर्वहारा (Proletariat), जो अपनी श्रम शक्ति बेचते हैं। यह विभाजन वर्ग असमानता का मूल कारण है और मार्क्स के सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांत का आधार है।
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संरचनात्मक प्रकार्यवाद (Structural Functionalism) के प्रमुख प्रतिपादकों में से एक कौन हैं, जिन्होंने “पैटर्न वेरिएबल” (Pattern Variables) की अवधारणा प्रस्तुत की?
- A) रॉबर्ट के. मर्टन
- B) तालकोट पार्सन्स
- C) अल्फ्रेड शुट्ज़
- D) एर्विंग गोफमैन
सही उत्तर: B) तालकोट पार्सन्स
विस्तृत व्याख्या: तालकोट पार्सन्स (Talcott Parsons) संरचनात्मक प्रकार्यवाद के प्रमुख संस्थापकों में से एक हैं। उन्होंने सामाजिक प्रणालियों को समझने के लिए कई विश्लेषणात्मक उपकरण विकसित किए, जिनमें ‘पैटर्न वेरिएबल’ (Pattern Variables) भी शामिल हैं। पैटर्न वेरिएबल पांच द्विपक्षीय विकल्प हैं (जैसे भावात्मक तटस्थता बनाम भावात्मकता, सार्वभौमिकता बनाम विशिष्टता) जो व्यक्तियों को सामाजिक अंतःक्रियाओं में सामना होते हैं और उनके व्यवहार को प्रभावित करते हैं, जिससे सामाजिक भूमिकाओं और मानदंडों का निर्माण होता है।
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“मीडियन” (Median) क्या है?
- A) आंकड़ों का औसत मान
- B) आंकड़ों में सबसे अधिक बारंबारता वाला मान
- C) आंकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर केंद्रीय मान
- D) आंकड़ों में सबसे बड़ा और सबसे छोटा मान का अंतर
सही उत्तर: C) आंकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर केंद्रीय मान
विस्तृत व्याख्या: मीडियन (Median) केंद्रीय प्रवृत्ति का एक माप है। जब आंकड़ों के एक सेट को आरोही (सबसे छोटे से सबसे बड़े) या अवरोही (सबसे बड़े से सबसे छोटे) क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो मीडियन वह मध्य मान होता है जो सेट को दो बराबर हिस्सों में विभाजित करता है। यदि कुल डेटा बिंदुओं की संख्या विषम है, तो मीडियन एक ही केंद्रीय मान होता है; यदि सम है, तो यह दो केंद्रीय मानों का औसत होता है।
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भारतीय समाज में, “संस्कृतिकरण” (Sanskritization) की अवधारणा किसने दी?
- A) एम.एन. श्रीनिवास
- B) आंद्रे बेतेई
- C) जी.एस. घुरिये
- D) योगेंद्र सिंह
सही उत्तर: A) एम.एन. श्रीनिवास
विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas) ने भारतीय समाज के अध्ययन में ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा प्रस्तुत की। इसके अनुसार, निचली जाति या जनजातीय समूह, सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए, उच्च या “द्विज” जातियों के अनुष्ठानों, रीति-रिवाजों, जीवन-शैली और मूल्यों को अपनाते हैं। यह एक प्रकार का सामाजिक गतिशीलता (social mobility) है जो पारंपरिक जाति व्यवस्था के भीतर होता है।
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प्रत्यक्ष अवलोकन (Participant Observation) किस प्रकार के गुणात्मक अनुसंधान (Qualitative Research) विधि का एक उदाहरण है?
- A) सर्वेक्षण
- B) प्रयोग
- C) नृवंशविज्ञान (Ethnography)
- D) सामग्री विश्लेषण (Content Analysis)
सही उत्तर: C) नृवंशविज्ञान (Ethnography)
विस्तृत व्याख्या: प्रत्यक्ष अवलोकन (Participant Observation) नृवंशविज्ञान (Ethnography) अनुसंधान का एक मुख्य घटक है। नृवंशविज्ञान एक गुणात्मक अनुसंधान पद्धति है जिसमें शोधकर्ता एक विशेष सांस्कृतिक समूह या समुदाय के साथ लंबे समय तक रहता है, उनकी गतिविधियों में भाग लेता है, और उनके जीवन के तरीके, विश्वासों और प्रथाओं को भीतर से समझने का प्रयास करता है। प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से, शोधकर्ता समूह के आंतरिक दृष्टिकोण और अर्थों को ग्रहण कर सकता है।
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“एनोमी” (Anomie) की अवधारणा के संदर्भ में, एमिल दुर्खीम ने आत्महत्या के कितने प्रकारों की पहचान की?
- A) दो
- B) तीन
- C) चार
- D) पाँच
सही उत्तर: C) चार
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “आत्महत्या” (Suicide) में चार प्रकार की आत्महत्याओं की पहचान की है जो सामाजिक एकीकरण और विनियमन के स्तर से संबंधित हैं: अहंवादी (Egoistic), परोपकारी (Altruistic), अस्वाभाविक (Anomic), और भाग्यवादी (Fatalistic)। एनोमी (Anomic) आत्महत्या तब होती है जब व्यक्तियों पर सामाजिक विनियमन कम हो जाता है या जब सामाजिक मानदंड स्पष्ट नहीं होते हैं, जिससे उन्हें दिशाहीनता और निराशा का अनुभव होता है।
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वर्ग स्थिति, प्रस्थिति (Status) और शक्ति (Power) के आधार पर सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) के बहु-आयामी दृष्टिकोण की वकालत किसने की?
- A) कार्ल मार्क्स
- B) मैक्स वेबर
- C) एमिल दुर्खीम
- D) तालकोट पार्सन्स
सही उत्तर: B) मैक्स वेबर
विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने कार्ल मार्क्स के केवल आर्थिक ‘वर्ग’ पर आधारित स्तरीकरण के दृष्टिकोण को विस्तारित किया। वेबर ने तर्क दिया कि सामाजिक स्तरीकरण को तीन अलग-अलग आयामों के माध्यम से समझा जाना चाहिए: ‘वर्ग’ (आर्थिक स्थिति से संबंधित), ‘प्रस्थिति’ (सामाजिक सम्मान या प्रतिष्ठा से संबंधित), और ‘शक्ति’ (राजनीतिक प्रभाव या दूसरों पर इच्छा थोपने की क्षमता से संबंधित)। ये तीनों आयाम अक्सर संबंधित होते हैं लेकिन एक दूसरे से स्वतंत्र भी हो सकते हैं।
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भारत में ग्रामीण समाजशास्त्र के अध्ययन में, “प्रमुख जाति” (Dominant Caste) की अवधारणा किससे जुड़ी है?
- A) योगेंद्र सिंह
- B) एम.एन. श्रीनिवास
- C) आंद्रे बेतेई
- D) ए.आर. देसाई
सही उत्तर: B) एम.एन. श्रीनिवास
विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas) ने ‘प्रमुख जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा का प्रतिपादन किया। उनके अनुसार, एक जाति को प्रमुख तब माना जाता है जब वह संख्यात्मक रूप से मजबूत हो, आर्थिक और राजनीतिक शक्ति रखती हो, और पश्चिमी शिक्षा तथा सरकारी नौकरियों से लाभान्वित हुई हो। यह अवधारणा ग्रामीण भारत में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक गतिशीलता को समझने में महत्वपूर्ण है।
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“प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद” (Symbolic Interactionism) किस समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से सबसे अधिक संबंधित है?
- A) मैक्रो-स्तर का विश्लेषण
- B) सूक्ष्म-स्तर का विश्लेषण
- C) संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक विश्लेषण
- D) मार्क्सवादी विश्लेषण
सही उत्तर: B) सूक्ष्म-स्तर का विश्लेषण
विस्तृत व्याख्या: प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) समाजशास्त्र में एक सूक्ष्म-स्तर (micro-level) का दृष्टिकोण है जो इस बात पर केंद्रित है कि व्यक्ति अपनी सामाजिक दुनिया में अर्थ कैसे उत्पन्न करते हैं और उन्हें कैसे बनाए रखते हैं। यह मानता है कि लोग प्रतीकों (भाषा, हावभाव, वस्तुएं) के माध्यम से एक-दूसरे के साथ बातचीत करते हैं और इन प्रतीकों को दिए गए अर्थों के आधार पर अपनी वास्तविकताओं का निर्माण करते हैं। जॉर्ज हर्बर्ट मीड और हर्बर्ट ब्लूमर इस दृष्टिकोण के प्रमुख विचारक हैं।
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“अनौपचारिक सामाजिक नियंत्रण” (Informal Social Control) का एक उदाहरण क्या है?
- A) कानून और पुलिस व्यवस्था
- B) सामाजिक बहिष्कार या गपशप
- C) जेल और दंड प्रणाली
- D) सरकारी विनियमन
सही उत्तर: B) सामाजिक बहिष्कार या गपशप
विस्तृत व्याख्या: अनौपचारिक सामाजिक नियंत्रण (Informal Social Control) उन अनौपचारिक तरीकों को संदर्भित करता है जिनके माध्यम से समाज अपने सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित करता है। इसमें परिवार, मित्र मंडली, समुदाय और सहकर्मियों के माध्यम से लागू होने वाले सामाजिक मानदंड और अपेक्षाएं शामिल हैं। गपशप, उपहास, निंदा, सामाजिक बहिष्कार और स्वीकृत व्यवहार के लिए प्रशंसा या अनुमोदन इसके सामान्य उदाहरण हैं। इसके विपरीत, कानून और पुलिस व्यवस्था औपचारिक सामाजिक नियंत्रण के उदाहरण हैं।
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किसने “पवित्र और अपवित्र” (The Sacred and The Profane) की अवधारणा के माध्यम से धर्म के समाजशास्त्रीय विश्लेषण में योगदान दिया?
- A) मैक्स वेबर
- B) एमिल दुर्खीम
- C) कार्ल मार्क्स
- D) तालकोट पार्सन्स
सही उत्तर: B) एमिल दुर्खीम
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम (Emile Durkheim) ने अपनी पुस्तक “धर्मिक जीवन के प्रारंभिक रूप” (The Elementary Forms of the Religious Life) में धर्म का विश्लेषण करते हुए ‘पवित्र’ (The Sacred) और ‘अपवित्र’ (The Profane) की अवधारणाएं प्रस्तुत कीं। पवित्र वे वस्तुएं, प्रथाएं और विश्वास हैं जिन्हें असाधारण, अलौकिक और सम्मान के योग्य माना जाता है, जबकि अपवित्र वे सांसारिक, सामान्य वस्तुएं और अनुभव हैं। दुर्खीम के लिए, पवित्र सामूहिक चेतना (collective consciousness) का प्रतिनिधित्व करता है और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करता है।
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सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) का वह प्रकार जिसमें एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में अपनी सामाजिक स्थिति बदलता है, क्या कहलाता है?
- A) अंतःपीढ़ी गतिशीलता (Intergenerational Mobility)
- B) अंतर-पीढ़ी गतिशीलता (Intragenerational Mobility)
- C) क्षैतिज गतिशीलता (Horizontal Mobility)
- D) संरचनात्मक गतिशीलता (Structural Mobility)
सही उत्तर: B) अंतर-पीढ़ी गतिशीलता (Intragenerational Mobility)
विस्तृत व्याख्या: अंतर-पीढ़ी गतिशीलता (Intragenerational Mobility) एक व्यक्ति के अपने स्वयं के जीवनकाल के भीतर सामाजिक स्थिति में परिवर्तन को संदर्भित करती है (उदाहरण के लिए, एक फैक्ट्री मजदूर से प्रबंधक बनना)। अंतःपीढ़ी गतिशीलता (Intergenerational Mobility) पीढ़ियों के बीच सामाजिक स्थिति में परिवर्तन को संदर्भित करती है (जैसे एक मजदूर का बेटा डॉक्टर बनता है)। क्षैतिज गतिशीलता समान सामाजिक स्थिति के भीतर भूमिका या व्यवसाय में परिवर्तन है, जबकि संरचनात्मक गतिशीलता बड़े पैमाने पर सामाजिक संरचना में परिवर्तनों के कारण होती है।
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“प्रच्छन्न बेरोजगारी” (Disguised Unemployment) का अर्थ क्या है?
- A) लोग अपनी योग्यता से कम वेतन वाली नौकरी कर रहे हैं।
- B) लोग काम करने के इच्छुक हैं लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा है।
- C) एक कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हुए हैं, और यदि कुछ को हटा दिया जाए तो उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- D) लोग अस्थायी या मौसमी काम में लगे हुए हैं।
सही उत्तर: C) एक कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हुए हैं, और यदि कुछ को हटा दिया जाए तो उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विस्तृत व्याख्या: प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment) या अदृश्य बेरोजगारी तब होती है जब कार्यबल का एक हिस्सा वास्तव में आवश्यकता से अधिक संख्या में किसी कार्य में लगा होता है, और उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य होती है। इसका मतलब है कि यदि उन अतिरिक्त श्रमिकों को हटा भी दिया जाए, तो कुल उत्पादन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह अक्सर कृषि क्षेत्र में देखा जाता है जहां परिवार के सभी सदस्य खेतों में काम करते प्रतीत होते हैं, भले ही कुछ के बिना भी वही काम हो सकता है।
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सामाजिक अनुसंधान में “प्राथमिक डेटा” (Primary Data) का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है?
- A) सरकारी जनगणना रिपोर्ट
- B) एक शोधकर्ता द्वारा एकत्र किए गए सर्वेक्षण प्रतिक्रियाएं
- C) प्रकाशित अकादमिक लेख
- D) समाचार पत्र के अभिलेखागार
सही उत्तर: B) एक शोधकर्ता द्वारा एकत्र किए गए सर्वेक्षण प्रतिक्रियाएं
विस्तृत व्याख्या: प्राथमिक डेटा (Primary Data) वह डेटा होता है जिसे शोधकर्ता स्वयं किसी विशिष्ट अनुसंधान उद्देश्य के लिए सीधे स्रोत से एकत्र करता है। इसमें सर्वेक्षण, साक्षात्कार, अवलोकन, और प्रयोगों के माध्यम से एकत्र की गई जानकारी शामिल होती है। सरकारी जनगणना रिपोर्ट, अकादमिक लेख और समाचार पत्र के अभिलेखागार द्वितीयक डेटा (Secondary Data) के उदाहरण हैं, क्योंकि इन्हें पहले ही किसी और ने किसी अन्य उद्देश्य के लिए एकत्र और प्रकाशित किया है।
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जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, “मी” (Me) क्या दर्शाता है?
- A) व्यक्ति की सहज, अपरिवर्तित आत्म (Self)
- B) समाज के संगठित दृष्टिकोण और अपेक्षाओं का आंतरिककरण
- C) व्यक्ति की रचनात्मक और सहज प्रतिक्रिया
- D) व्यक्ति का अचेतन मन
सही उत्तर: B) समाज के संगठित दृष्टिकोण और अपेक्षाओं का आंतरिककरण
विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड (George Herbert Mead) ने आत्म (Self) के विकास की व्याख्या करने के लिए ‘आई’ (I) और ‘मी’ (Me) की अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं। ‘मी’ आत्म का वह हिस्सा है जो दूसरों (सामान्यीकृत अन्य – Generalized Other) की अपेक्षाओं और सामाजिक मानदंडों के आंतरिककरण से विकसित होता है। यह आत्म का सामाजिक पहलू है जो व्यक्ति को सामाजिक नियमों के अनुसार कार्य करने में सक्षम बनाता है। ‘आई’ आत्म का रचनात्मक, सहज और अप्रत्याशित पहलू है जो ‘मी’ की संरचनाओं पर प्रतिक्रिया करता है।
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“आधुनिकता की परियोजना” (The Project of Modernity) के एक प्रमुख आलोचक और उत्तर-आधुनिकतावाद (Postmodernism) के विचारकों में से कौन हैं?
- A) जुरगेन हैबरमास
- B) एंथनी गिडेंस
- C) मिशेल फूको
- D) रॉबर्ट पुटनम
सही उत्तर: C) मिशेल फूको
विस्तृत व्याख्या: मिशेल फूको (Michel Foucault) एक फ्रांसीसी दार्शनिक और इतिहासकार थे जिन्हें उत्तर-संरचनावाद और उत्तर-आधुनिकतावाद से जोड़ा जाता है। उन्होंने ज्ञान, शक्ति और प्रवचन (discourse) के संबंधों का विश्लेषण किया और आधुनिकता की तर्कसंगतता, प्रगति और मुक्ति की परियोजनाओं की तीखी आलोचना की। उनके कार्य में शक्ति के सूक्ष्म तंत्रों और ज्ञान के निर्माण की जांच शामिल है जो सामाजिक नियंत्रण और अधीनता को बढ़ावा देते हैं। जुरगेन हैबरमास, इसके विपरीत, आधुनिकता की परियोजना का बचाव करते हैं।
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भारतीय ग्रामीण समाज में, ‘जजमानी व्यवस्था’ (Jajmani System) क्या थी?
- A) एक विवाह प्रणाली
- B) भूमि स्वामित्व की एक प्रणाली
- C) सेवाओं और वस्तुओं के आदान-प्रदान पर आधारित एक पारंपरिक सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था
- D) एक राजनीतिक निर्णय लेने वाली संस्था
सही उत्तर: C) सेवाओं और वस्तुओं के आदान-प्रदान पर आधारित एक पारंपरिक सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था
विस्तृत व्याख्या: जजमानी व्यवस्था (Jajmani System) भारतीय ग्रामीण समाज में एक पारंपरिक सामाजिक-आर्थिक और अनुष्ठानिक व्यवस्था थी। इसमें विभिन्न जातियों के परिवारों के बीच सेवाओं और वस्तुओं का वंशानुगत आधार पर आदान-प्रदान होता था। ‘जजमान’ (उच्च जाति के परिवार) विभिन्न ‘कमीन’ (निम्न जाति के सेवा प्रदाता) को उनकी सेवाओं (जैसे नाई, लोहार, धोबी) के बदले में अनाज, भोजन या अन्य लाभ प्रदान करते थे। यह प्रणाली आर्थिक विनिमय से अधिक थी, जिसमें अनुष्ठानिक और सामाजिक संबंध भी शामिल थे, जो जाति पदानुक्रम को बनाए रखते थे।
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उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization) और वैश्वीकरण (Globalization) (LPG मॉडल) ने भारतीय समाज में किस प्रकार के सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा दिया है?
- A) पारंपरिक मूल्यों की वापसी
- B) आर्थिक असमानता में कमी
- C) नव-मध्यम वर्ग का उदय और उपभोग संस्कृति का विस्तार
- D) ग्रामीण आत्मनिर्भरता में वृद्धि
सही उत्तर: C) नव-मध्यम वर्ग का उदय और उपभोग संस्कृति का विस्तार
विस्तृत व्याख्या: 1990 के दशक में भारत में अपनाई गई उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) नीतियों ने भारतीय समाज पर गहरा प्रभाव डाला है। इन नीतियों ने आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया, जिससे एक बड़े नव-मध्यम वर्ग का उदय हुआ जिसकी आय और क्रय शक्ति में वृद्धि हुई। इसने उपभोग संस्कृति (consumer culture) के विस्तार को भी जन्म दिया, जिसमें जीवनशैली, आकांक्षाएं और सामाजिक मूल्य तेजी से बदल रहे हैं। जबकि इसने अवसर पैदा किए, इसने आर्थिक असमानता में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों पर मिश्रित प्रभावों जैसी चुनौतियां भी पेश कीं।
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दुर्खीम के अनुसार, “सामूहिक चेतना” (Collective Conscience) क्या है?
- A) व्यक्ति का निजी नैतिक विवेक
- B) एक समाज के सदस्यों द्वारा साझा किए गए विश्वासों और नैतिक दृष्टिकोणों का समूह
- C) व्यक्तियों के बीच संघर्ष की स्थिति
- D) समूह के भीतर व्यक्तिगत विचारों का योग
सही उत्तर: B) एक समाज के सदस्यों द्वारा साझा किए गए विश्वासों और नैतिक दृष्टिकोणों का समूह
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम के लिए, सामूहिक चेतना (Collective Conscience) एक समाज की साझा मान्यताओं, विचारों और नैतिक दृष्टिकोणों का कुल योग है जो उसके सदस्यों के लिए सामान्य है। यह एक सामूहिक पहचान और एक नैतिक शक्ति के रूप में कार्य करता है जो व्यक्तियों को सामाजिक रूप से एकीकृत करता है और उनके व्यवहार को विनियमित करता है। यह एक ऐसी वास्तविकता है जो व्यक्तियों से परे मौजूद है और उनके ऊपर एक नैतिक अधिकार रखती है।
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किसने “आत्मसातकरण” (Assimilation) की अवधारणा का उपयोग करते हुए यह समझाया कि कैसे प्रवासी समूह मेजबान संस्कृति में घुलमिल जाते हैं?
- A) आर.ई. पार्क और अर्नेस्ट बर्गेस
- B) मैक्स वेबर
- C) डब्ल्यू.ई.बी. डू बॉयस
- D) तालकोट पार्सन्स
सही उत्तर: A) आर.ई. पार्क और अर्नेस्ट बर्गेस
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट ई. पार्क (R.E. Park) और अर्नेस्ट बर्गेस (Ernest Burgess), शिकागो स्कूल ऑफ सोशियोलॉजी के प्रमुख सदस्य थे। उन्होंने अपने “जातीय संबंधों के चक्रीय सिद्धांत” (Race Relations Cycle) में आत्मसातकरण (Assimilation) की अवधारणा को प्रमुखता से उजागर किया। उनके अनुसार, यह वह प्रक्रिया है जिसके तहत एक अल्पसंख्यक समूह धीरे-धीरे प्रमुख समूह की संस्कृति, मूल्यों और सामाजिक संरचनाओं को अपना लेता है, अंततः एक सजातीय समाज में घुलमिल जाता है।
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सामाजिक अनुसंधान में “स्वतंत्र चर” (Independent Variable) क्या है?
- A) वह चर जो आश्रित चर में परिवर्तन का कारण बनता है।
- B) वह चर जिसमें परिवर्तन का अवलोकन किया जाता है।
- C) वह चर जिसे शोधकर्ता द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
- D) वह चर जो परिणाम से अप्रभावित रहता है।
सही उत्तर: A) वह चर जो आश्रित चर में परिवर्तन का कारण बनता है।
विस्तृत व्याख्या: सामाजिक अनुसंधान में, स्वतंत्र चर (Independent Variable) वह चर होता है जिसे शोधकर्ता हेरफेर (manipulate) करता है या जिसमें परिवर्तन करता है ताकि यह देखा जा सके कि इसका आश्रित चर पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह ‘कारण’ चर होता है। आश्रित चर (Dependent Variable) वह चर होता है जिसमें स्वतंत्र चर के परिवर्तन के कारण होने वाले प्रभावों का अवलोकन किया जाता है, यानी यह ‘प्रभाव’ चर होता है।
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“उत्तर-औद्योगिक समाज” (Post-Industrial Society) की अवधारणा किससे जुड़ी है?
- A) डैनियल बेल
- B) एंथनी गिडेंस
- C) मैनुअल कैस्टेल्स
- D) ए.आर. देसाई
सही उत्तर: A) डैनियल बेल
विस्तृत व्याख्या: डैनियल बेल (Daniel Bell) एक अमेरिकी समाजशास्त्री थे जिन्होंने 1970 के दशक में ‘उत्तर-औद्योगिक समाज’ (Post-Industrial Society) की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया। उनके अनुसार, यह एक ऐसा समाज है जो औद्योगिक समाज से आगे निकल जाता है, जहां विनिर्माण की बजाय सेवाओं का प्रभुत्व होता है, ज्ञान और सूचना प्राथमिक संसाधन बन जाते हैं, और पेशेवरों तथा तकनीकी विशेषज्ञों का महत्व बढ़ता है। यह तकनीकी नवाचार और बौद्धिक पूंजी पर आधारित है।
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भारत में “ग्राम सभा” (Gram Sabha) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A) राज्य विधानसभा के सदस्यों का चुनाव करना
- B) पंचायती राज प्रणाली में निर्णय लेने और जवाबदेही में नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करना
- C) पुलिस व्यवस्था का प्रबंधन करना
- D) केवल भूमि रिकॉर्ड बनाए रखना
सही उत्तर: B) पंचायती राज प्रणाली में निर्णय लेने और जवाबदेही में नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करना
विस्तृत व्याख्या: ग्राम सभा (Gram Sabha) पंचायती राज प्रणाली की आधारशिला है। यह एक गाँव के मतदाता सूची में पंजीकृत सभी व्यक्तियों की एक सभा होती है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्वशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, जिससे नागरिक सीधे ग्राम पंचायत के निर्णयों, योजनाओं और विकास कार्यों की निगरानी और उन पर चर्चा कर सकें। यह जमीनी स्तर पर प्रत्यक्ष लोकतंत्र का प्रतीक है।
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