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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

समाजशास्त्र के विद्वानों और प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए, यह दैनिक क्विज़ आपकी तैयारी को नई ऊँचाई देगा। आज के इस अभ्यास सेट में, हम आपको समाजशास्त्रीय अवधारणाओं, विचारकों और समकालीन मुद्दों पर आधारित 25 चुनौतीपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न प्रस्तुत कर रहे हैं। ये प्रश्न आपकी वैचारिक समझ और विश्लेषणात्मक कौशल का गहन परीक्षण करेंगे। हर प्रश्न का सावधानीपूर्वक उत्तर दें और विस्तृत व्याख्या के साथ अपनी समझ को और मजबूत करें। यह मॉक टेस्ट आपको आगामी परीक्षाओं के लिए तैयार करने में मदद करेगा।


  1. प्रश्न 1: जॉर्ज हर्बर्ट मीड का ‘स्व’ (Self) का सिद्धांत किस अवधारणा पर आधारित है?

    • a) भूमिका-ग्रहण (Role-taking)
    • b) अनुकरण (Imitation)
    • c) पहचान संकट (Identity crisis)
    • d) आत्म-साक्षात्कार (Self-actualization)

    सही उत्तर: a) भूमिका-ग्रहण (Role-taking)

    विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड (George Herbert Mead) का ‘स्व’ (Self) का सिद्धांत मुख्य रूप से भूमिका-ग्रहण (Role-taking) की अवधारणा पर आधारित है। मीड के अनुसार, बच्चे दूसरों की भूमिकाओं को अपनाकर ‘स्व’ विकसित करते हैं, पहले महत्वपूर्ण दूसरों (Significant Others) की भूमिकाएँ और फिर सामान्यीकृत अन्य (Generalized Other) की भूमिका। ‘स्व’ ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) के बीच की बातचीत का परिणाम है, जहाँ ‘मैं’ आत्मस्फूर्त और रचनात्मक हिस्सा है, जबकि ‘मुझे’ समाजीकृत ‘स्व’ है जो दूसरों की अपेक्षाओं को दर्शाता है। अन्य विकल्प मीड के सिद्धांत के केंद्रीय तत्व नहीं हैं।

  2. प्रश्न 2: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके लिंग और गृहकार्य के आरोपण (Gender and Housework Attribution) का अध्ययन किस समाजशास्त्रीय विषय के अंतर्गत आ सकता है?

    • a) ग्रामीण समाजशास्त्र
    • b) राजनीतिक समाजशास्त्र
    • c) लैंगिक समाजशास्त्र और प्रौद्योगिकी का समाजशास्त्र
    • d) धार्मिक समाजशास्त्र

    सही उत्तर: c) लैंगिक समाजशास्त्र और प्रौद्योगिकी का समाजशास्त्र

    विस्तृत व्याख्या: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके लिंग और गृहकार्य के आरोपण का अध्ययन लैंगिक समाजशास्त्र (Sociology of Gender) और प्रौद्योगिकी के समाजशास्त्र (Sociology of Technology) के चौराहे पर स्थित है। यह जांच करता है कि कैसे तकनीकी उपकरण (AI) लिंग भूमिकाओं और घरेलू श्रम के पारंपरिक या विकसित वितरण को प्रभावित करते हैं या दर्शाते हैं। यह समकालीन सामाजिक मुद्दों और डिजिटल युग में सामाजिक संबंधों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।

  3. प्रश्न 3: प्रारंभिक सोशल मीडिया उपयोग और स्कूली परिणामों पर इसके नकारात्मक प्रभाव के अध्ययन में, समाजशास्त्र का कौन सा क्षेत्र सबसे अधिक प्रासंगिक होगा?

    • a) शहरी समाजशास्त्र
    • b) शिक्षा का समाजशास्त्र और संचार का समाजशास्त्र
    • c) आर्थिक समाजशास्त्र
    • d) सांस्कृतिक समाजशास्त्र

    सही उत्तर: b) शिक्षा का समाजशास्त्र और संचार का समाजशास्त्र

    विस्तृत व्याख्या: प्रारंभिक सोशल मीडिया उपयोग और स्कूली परिणामों पर इसके नकारात्मक प्रभाव का अध्ययन शिक्षा के समाजशास्त्र (Sociology of Education) और संचार/मीडिया के समाजशास्त्र (Sociology of Communication/Media) के अंतर्गत आता है। शिक्षा का समाजशास्त्र शैक्षणिक संस्थानों, सीखने की प्रक्रियाओं और उनके सामाजिक संदर्भों की जांच करता है, जबकि संचार का समाजशास्त्र मीडिया के सामाजिक प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें सोशल मीडिया और युवा शामिल हैं।

  4. प्रश्न 4: “क्लिकबेट क्राइम न्यूज़” और स्थानीय न्यूज़ रूम में पेशेवर अधिकार के संबंध में अनुसंधान किस समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से सबसे अच्छा समझा जा सकता है?

    • a) विचलन का समाजशास्त्र
    • b) मीडिया का समाजशास्त्र
    • c) ज्ञान का समाजशास्त्र
    • d) उपरोक्त सभी

    सही उत्तर: d) उपरोक्त सभी

    विस्तृत व्याख्या: “क्लिकबेट क्राइम न्यूज़” और स्थानीय न्यूज़ रूम में पेशेवर अधिकार का अध्ययन कई समाजशास्त्रीय दृष्टिकोणों को समाहित करता है। विचलन का समाजशास्त्र (Sociology of Deviance) अपराध के चित्रण और सार्वजनिक धारणा को समझने में मदद करता है। मीडिया का समाजशास्त्र (Sociology of Media) न्यूज़ उत्पादन, वितरण और मीडिया के सामाजिक प्रभावों पर केंद्रित है। ज्ञान का समाजशास्त्र (Sociology of Knowledge) यह जांच करता है कि ज्ञान (इस मामले में, ‘समाचार’) कैसे सामाजिक रूप से निर्मित और प्रसारित होता है, और पेशेवर अधिकार इसका एक महत्वपूर्ण पहलू है। इसलिए, ये सभी दृष्टिकोण प्रासंगिक हैं।

  5. प्रश्न 5: अकादमिक कला संचार में लैंगिक बाधाओं का अध्ययन किस सामाजिक संस्था की पड़ताल करता है?

    • a) परिवार
    • b) शिक्षा और कला संस्थाएँ
    • c) अर्थव्यवस्था
    • d) धर्म

    सही उत्तर: b) शिक्षा और कला संस्थाएँ

    विस्तृत व्याख्या: अकादमिक कला संचार में लैंगिक बाधाओं का अध्ययन शिक्षा की संस्था (जैसे विश्वविद्यालय, अकादमिक प्रकाशन) और कला की संस्था (जैसे गैलरी, कला समीक्षक) की पड़ताल करता है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे इन संस्थाओं के भीतर की संरचनाएं और मानदंड लैंगिक असमानताओं को जन्म दे सकते हैं या उन्हें बनाए रख सकते हैं, जिससे कुछ लिंगों के लिए कलात्मक अभिव्यक्तियों और विचारों के संचार में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।

  6. प्रश्न 6: “दुनिया के श्रमिकों, एकजुट हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी बेड़ियों के अलावा कुछ नहीं है!” यह आह्वान कार्ल मार्क्स की किस अवधारणा से जुड़ा है?

    • a) अलगाव (Alienation)
    • b) वर्ग संघर्ष (Class Struggle)
    • c) पूंजीवाद (Capitalism)
    • d) ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism)

    सही उत्तर: b) वर्ग संघर्ष (Class Struggle)

    विस्तृत व्याख्या: यह प्रसिद्ध आह्वान कार्ल मार्क्स (Karl Marx) के वर्ग संघर्ष (Class Struggle) के सिद्धांत से जुड़ा है। मार्क्स का मानना था कि पूंजीवादी समाज में, उत्पादन के साधनों के स्वामित्व के आधार पर समाज दो प्रमुख वर्गों (बुर्जुआ और सर्वहारा) में विभाजित होता है, और इन वर्गों के बीच अंतर्निहित विरोधाभास और संघर्ष अनिवार्य है। श्रमिकों को एकजुट होने का आह्वान इसी संघर्ष का हिस्सा है। अलगाव, पूंजीवाद और ऐतिहासिक भौतिकवाद मार्क्स के अन्य महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं, लेकिन यह विशेष उद्धरण सीधे वर्ग संघर्ष की ओर इशारा करता है।

  7. प्रश्न 7: मैक्स वेबर के अनुसार, समाज में सत्ता (Power) के तीन शुद्ध प्रकार कौन से हैं?

    • a) परम्परागत, करिश्माई, कानूनी-तार्किक
    • b) आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक
    • c) संपत्ति, प्रतिष्ठा, शक्ति
    • d) उत्पादन, वितरण, उपभोग

    सही उत्तर: a) परम्परागत, करिश्माई, कानूनी-तार्किक

    विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर (Max Weber) ने सत्ता के तीन ‘शुद्ध प्रकार’ (Ideal Types) प्रस्तुत किए: परम्परागत सत्ता (Traditional Authority), जो रीति-रिवाजों और इतिहास पर आधारित होती है; करिश्माई सत्ता (Charismatic Authority), जो नेता के असाधारण व्यक्तिगत गुणों पर आधारित होती है; और कानूनी-तार्किक सत्ता (Legal-Rational Authority), जो नियमों, विनियमों और कानूनों पर आधारित होती है। ये अवधारणाएँ वेबर के नौकरशाही और प्रभुत्व के अध्ययन का हिस्सा हैं।

  8. प्रश्न 8: एमिल दुर्खीम द्वारा प्रतिपादित ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

    • a) सामाजिक मानदंडों का पूर्ण अभाव
    • b) व्यक्तिगत अलगाव
    • c) सामाजिक मानदंडों का भ्रम या कमजोर होना
    • d) समूह सहभागिता का अभाव

    सही उत्तर: c) सामाजिक मानदंडों का भ्रम या कमजोर होना

    विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim) ने ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा का उपयोग एक ऐसी सामाजिक स्थिति का वर्णन करने के लिए किया जिसमें सामाजिक मानदंड (Social Norms) कमजोर, भ्रमित या अनुपस्थित हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों को मार्गदर्शन की कमी महसूस होती है और वे उद्देश्यहीनता या निराशा का अनुभव करते हैं। दुर्खीम ने इस अवधारणा का विस्तार से अपनी पुस्तक “आत्महत्या” (Suicide) में किया, जहाँ उन्होंने एनोमी को आत्महत्या के एक प्रकार से जोड़ा। यह सामाजिक मानदंडों के पूर्ण अभाव से अधिक, उनकी कमजोर या अस्पष्ट स्थिति को दर्शाता है।

  9. प्रश्न 9: टैल्कॉट पार्सन्स के क्रिया सिद्धांत (Action Theory) में AGIL मॉडल का ‘I’ क्या दर्शाता है?

    • a) एकीकरण (Integration)
    • b) अनुकूलन (Adaptation)
    • c) लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment)
    • d) विलम्बता (Latency)

    सही उत्तर: a) एकीकरण (Integration)

    विस्तृत व्याख्या: टैल्कॉट पार्सन्स (Talcott Parsons) ने सामाजिक व्यवस्थाओं के अस्तित्व के लिए चार कार्यात्मक आवश्यकताओं का वर्णन करने के लिए AGIL योजना विकसित की: Adaptation (अनुकूलन), Goal Attainment (लक्ष्य प्राप्ति), Integration (एकीकरण), और Latency (विलम्बता या पैटर्न रखरखाव)। ‘I’ एकीकरण को दर्शाता है, जिसका अर्थ है कि सामाजिक व्यवस्था के विभिन्न हिस्सों को एक सामंजस्यपूर्ण तरीके से एक साथ काम करना चाहिए और एकजुटता बनाए रखनी चाहिए ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से कार्य कर सके।

  10. प्रश्न 10: रॉबर्ट के. मर्टन द्वारा प्रस्तुत ‘संदर्भ समूह’ (Reference Group) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

    • a) एक समूह जिससे व्यक्ति संबंधित है।
    • b) एक समूह जिसका सदस्य बनने की व्यक्ति आकांक्षा रखता है या जिसके मानदंडों को अपनाता है।
    • c) एक समूह जो व्यक्ति को सामाजिक सहायता प्रदान करता है।
    • d) एक समूह जिसके साथ व्यक्ति नियमित रूप से बातचीत करता है।

    सही उत्तर: b) एक समूह जिसका सदस्य बनने की व्यक्ति आकांक्षा रखता है या जिसके मानदंडों को अपनाता है।

    विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन (Robert K. Merton) ने ‘संदर्भ समूह’ (Reference Group) की अवधारणा को विकसित किया, जो उन समूहों को संदर्भित करती है जिनके मानकों, मूल्यों और व्यवहारों को व्यक्ति अपने स्वयं के मूल्यांकन और मार्गदर्शन के लिए उपयोग करता है, भले ही वह उस समूह का सदस्य हो या न हो। व्यक्ति उन समूहों का सदस्य बनने की आकांक्षा कर सकता है या उनके मानदंडों को अपना सकता है, जिनके कारण वह अपने स्वयं के समूह के संबंध में सापेक्ष वंचना (Relative Deprivation) का अनुभव कर सकता है।

  11. प्रश्न 11: इरविंग गोफमैन का ‘सामाजिक जीवन एक नाटक है’ दृष्टिकोण किस अवधारणा से संबंधित है?

    • a) भूमिका-ग्रहण (Role-taking)
    • b) नाटकशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य (Dramaturgical Perspective)
    • c) विचलित व्यवहार (Deviant Behavior)
    • d) अनुष्ठान अंतःक्रिया (Ritual Interaction)

    सही उत्तर: b) नाटकशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य (Dramaturgical Perspective)

    विस्तृत व्याख्या: इरविंग गोफमैन (Erving Goffman) का ‘सामाजिक जीवन एक नाटक है’ दृष्टिकोण उनके नाटकशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य (Dramaturgical Perspective) से संबंधित है। इस दृष्टिकोण में, गोफमैन ने सुझाव दिया कि सामाजिक अंतःक्रियाएं रंगमंच पर प्रदर्शन के समान होती हैं, जहाँ व्यक्ति अपनी भूमिकाएँ निभाते हैं और दूसरों के सामने एक निश्चित ‘चेहरा’ या छवि प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। इसमें ‘फ्रंट स्टेज’ और ‘बैक स्टेज’ जैसे विचार शामिल हैं।

  12. प्रश्न 12: समाजशास्त्रीय संदर्भ में ‘सामाजिक संरचना’ (Social Structure) से क्या अभिप्राय है?

    • a) व्यक्तियों का यादृच्छिक संग्रह
    • b) सामाजिक संबंधों और पैटर्न की अपेक्षाकृत स्थिर व्यवस्था
    • c) एक विशेष समाज की भौगोलिक विशेषताएं
    • d) व्यक्तियों के बीच अनौपचारिक बातचीत

    सही उत्तर: b) सामाजिक संबंधों और पैटर्न की अपेक्षाकृत स्थिर व्यवस्था

    विस्तृत व्याख्या: सामाजिक संरचना (Social Structure) समाजशास्त्रीय अवधारणा है जो सामाजिक संबंधों और पैटर्न की अपेक्षाकृत स्थिर और नियमित व्यवस्था को संदर्भित करती है जो व्यक्तियों और समूहों के व्यवहार को आकार देती है। इसमें भूमिकाएं, मानदंड, संस्थाएं और सामाजिक स्तरीकरण के रूप शामिल हैं, जो एक समाज में व्यवस्था और पूर्वानुमेयता प्रदान करते हैं। यह व्यक्तियों के यादृच्छिक संग्रह या अनौपचारिक बातचीत से कहीं अधिक है।

  13. प्रश्न 13: वह कौन सा समाजशास्त्रीय शब्द है जो किसी समाज के साझा विश्वासों, मूल्यों, मानदंडों, भाषाओं और भौतिक वस्तुओं को संदर्भित करता है?

    • a) सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification)
    • b) संस्कृति (Culture)
    • c) समाजीकरण (Socialization)
    • d) सामाजिक नियंत्रण (Social Control)

    सही उत्तर: b) संस्कृति (Culture)

    विस्तृत व्याख्या: संस्कृति (Culture) वह व्यापक समाजशास्त्रीय अवधारणा है जो किसी समाज के साझा विश्वासों, मूल्यों, मानदंडों, रीति-रिवाजों, भाषाओं, कलाकृतियों और भौतिक वस्तुओं के जटिल पूरे को संदर्भित करती है। यह वह तरीका है जिससे एक समूह के लोग अपने जीवन को जीते हैं, और यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती है। अन्य विकल्प समाजशास्त्र में महत्वपूर्ण अवधारणाएं हैं, लेकिन वे संस्कृति की व्यापक परिभाषा में समाहित नहीं हैं।

  14. प्रश्न 14: ‘सामाजिक स्तरीकरण’ (Social Stratification) किस प्रक्रिया को संदर्भित करता है?

    • a) समाज में व्यक्तियों का एकीकरण
    • b) समाज में व्यक्तियों का पदानुक्रमित विभाजन
    • c) सामाजिक गतिशीलता में वृद्धि
    • d) सामाजिक संघर्षों का समाधान

    सही उत्तर: b) समाज में व्यक्तियों का पदानुक्रमित विभाजन

    विस्तृत व्याख्या: सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) समाज में व्यक्तियों और समूहों के पदानुक्रमित विभाजन की एक व्यवस्थित प्रक्रिया को संदर्भित करता है, जहाँ उन्हें धन, शक्ति और प्रतिष्ठा जैसे संसाधनों के असमान वितरण के आधार पर विभिन्न स्तरों या ‘स्तरों’ में वर्गीकृत किया जाता है। जाति, वर्ग और लिंग स्तरीकरण के सामान्य रूप हैं।

  15. प्रश्न 15: परिवार का वह प्रकार जिसमें माता-पिता और उनके अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं, क्या कहलाता है?

    • a) संयुक्त परिवार (Joint Family)
    • b) विस्तृत परिवार (Extended Family)
    • c) नाभिकीय परिवार (Nuclear Family)
    • d) बहुविवाह परिवार (Polygamous Family)

    सही उत्तर: c) नाभिकीय परिवार (Nuclear Family)

    विस्तृत व्याख्या: नाभिकीय परिवार (Nuclear Family) परिवार का वह प्रकार है जिसमें एक विवाहित जोड़ा और उनके जैविक या दत्तक बच्चे शामिल होते हैं जो अभी भी अविवाहित हैं। यह परिवार का सबसे छोटा और सबसे सामान्य रूप है। संयुक्त परिवार में कई पीढ़ियाँ एक साथ रहती हैं, और विस्तृत परिवार में नाभिकीय परिवार के साथ अन्य संबंधी भी शामिल होते हैं।

  16. प्रश्न 16: एमिल दुर्खीम के अनुसार, धर्म का प्राथमिक कार्य क्या है?

    • a) व्यक्तियों को नैतिक दिशा प्रदान करना
    • b) सामाजिक एकजुटता और सामंजस्य बनाए रखना
    • c) अलौकिक शक्तियों में विश्वास विकसित करना
    • d) सामाजिक नियंत्रण स्थापित करना

    सही उत्तर: b) सामाजिक एकजुटता और सामंजस्य बनाए रखना

    विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim) ने अपनी पुस्तक “धर्मिक जीवन के प्राथमिक रूप” (The Elementary Forms of the Religious Life) में तर्क दिया कि धर्म का प्राथमिक कार्य व्यक्तियों को नैतिक दिशा प्रदान करने या अलौकिक में विश्वास विकसित करने से भी अधिक, सामाजिक एकजुटता (Social Solidarity) और सामंजस्य (Cohesion) को बनाए रखना है। सामूहिक अनुष्ठान और साझा विश्वास एक समुदाय को एक साथ बांधते हैं, जिससे ‘सामूहिक चेतना’ (Collective Conscience) मजबूत होती है।

  17. प्रश्न 17: एक शोधकर्ता विभिन्न आयु समूहों के बीच मतदान व्यवहार में अंतर का अध्ययन करने के लिए सर्वेक्षण (Survey) का उपयोग करता है। यह किस प्रकार के अनुसंधान विधि का एक उदाहरण है?

    • a) गुणात्मक अनुसंधान (Qualitative Research)
    • b) मात्रात्मक अनुसंधान (Quantitative Research)
    • c) नृवंशविज्ञान (Ethnography)
    • d) केस स्टडी (Case Study)

    सही उत्तर: b) मात्रात्मक अनुसंधान (Quantitative Research)

    विस्तृत व्याख्या: सर्वेक्षण (Survey) विधि, विशेषकर जब बड़ी संख्या में उत्तरदाताओं से संख्यात्मक डेटा एकत्र करने के लिए उपयोग की जाती है, मात्रात्मक अनुसंधान (Quantitative Research) का एक प्रमुख उदाहरण है। मात्रात्मक अनुसंधान का उद्देश्य पैटर्न, सहसंबंधों और सामान्यीकरणों की पहचान करना होता है, जो अक्सर सांख्यिकीय विश्लेषण के माध्यम से किया जाता है। गुणात्मक अनुसंधान गहराई से समझ पर केंद्रित होता है, जबकि नृवंशविज्ञान और केस स्टडी विशिष्ट संदर्भों में गहन अन्वेषण हैं।

  18. प्रश्न 18: एक समाजशास्त्री किसी विशेष आदिवासी समुदाय के दैनिक जीवन और रीति-रिवाजों को समझने के लिए उनके साथ रहता और भाग लेता है। यह कौन सी अनुसंधान विधि है?

    • a) द्वितीयक डेटा विश्लेषण (Secondary Data Analysis)
    • b) प्रयोग (Experiment)
    • c) प्रतिभागी अवलोकन (Participant Observation)
    • d) सामग्री विश्लेषण (Content Analysis)

    सही उत्तर: c) प्रतिभागी अवलोकन (Participant Observation)

    विस्तृत व्याख्या: प्रतिभागी अवलोकन (Participant Observation) एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जहाँ शोधकर्ता एक सामाजिक समूह या समुदाय के दैनिक जीवन में सक्रिय रूप से भाग लेता है ताकि उनके व्यवहार, बातचीत और संस्कृति की गहरी समझ प्राप्त कर सके। यह नृवंशविज्ञान अनुसंधान की एक मूलभूत विधि है और शोधकर्ता को अंदरूनी दृष्टिकोण प्राप्त करने में मदद करती है।

  19. प्रश्न 19: भारत में जाति व्यवस्था की ‘शुद्धता और प्रदूषण’ (Purity and Pollution) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की?

    • a) एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas)
    • b) लुई ड्यूमॉन्ट (Louis Dumont)
    • c) जी.एस. घुरिये (G.S. Ghurye)
    • d) आंद्रे बेटेल (André Béteille)

    सही उत्तर: b) लुई ड्यूमॉन्ट (Louis Dumont)

    विस्तृत व्याख्या: फ्रांसीसी मानवविज्ञानी लुई ड्यूमॉन्ट (Louis Dumont) ने अपनी क्लासिक पुस्तक “होमो हायरार्किकस” (Homo Hierarchicus) में भारतीय जाति व्यवस्था को ‘शुद्धता और प्रदूषण’ (Purity and Pollution) के एक पदानुक्रमित सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया। उनका तर्क था कि ब्राह्मण सबसे शुद्ध और सबसे ऊपर हैं, जबकि दलित सबसे प्रदूषित और सबसे नीचे हैं। यह अवधारणा जाति व्यवस्था की विचारधारा को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

  20. प्रश्न 20: ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा किस भारतीय समाजशास्त्री से जुड़ी है?

    • a) ए.आर. देसाई (A.R. Desai)
    • b) एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas)
    • c) योगेन्द्र सिंह (Yogendra Singh)
    • d) इरावती कर्वे (Irawati Karve)

    सही उत्तर: b) एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas)

    विस्तृत व्याख्या: ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा भारतीय समाजशास्त्री एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas) द्वारा प्रतिपादित की गई थी। यह उस प्रक्रिया को संदर्भित करती है जिसके द्वारा एक ‘निम्न’ जाति, जनजाति या अन्य समूह अपनी स्थिति को बढ़ाने के लिए एक ‘उच्च’ या ‘द्विज’ जाति के अनुष्ठानों, रीति-रिवाजों, विचारधारा और जीवन शैली को अपनाता है। यह भारत में सामाजिक परिवर्तन को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।

  21. प्रश्न 21: भारतीय जनजातियों को ‘पिछड़े हिंदू’ (Backward Hindus) किसने कहा था?

    • a) बी.आर. अम्बेडकर
    • b) जी.एस. घुरिये
    • c) वेरियर एल्विन
    • d) ठक्कर बापा

    सही उत्तर: b) जी.एस. घुरिये

    विस्तृत व्याख्या: जी.एस. घुरिये (G.S. Ghurye) ने भारतीय जनजातियों को ‘पिछड़े हिंदू’ (Backward Hindus) के रूप में वर्णित किया था। उनका मानना था कि जनजातियाँ मूल रूप से हिंदू समाज का हिस्सा थीं, लेकिन बाहरी दुनिया से कट जाने के कारण पिछड़ गईं। उन्होंने इन समुदायों को हिंदू समाज में एकीकृत करने की वकालत की। इसके विपरीत, वेरियर एल्विन जैसे विद्वानों ने जनजातियों के लिए अलगाव और उनकी अनूठी संस्कृति के संरक्षण की वकालत की।

  22. प्रश्न 22: ग्रामीण समाजशास्त्र में ‘ग्राम्य समुदाय’ (Rural Community) की मुख्य विशेषता क्या है?

    • a) उच्च जनसंख्या घनत्व
    • b) अनौपचारिक सामाजिक संबंध और सजातीयता
    • c) विशेषीकृत व्यवसाय और अज्ञातता
    • d) अत्यधिक सामाजिक गतिशीलता

    सही उत्तर: b) अनौपचारिक सामाजिक संबंध और सजातीयता

    विस्तृत व्याख्या: ग्रामीण समुदाय (Rural Community) की मुख्य विशेषताएँ अनौपचारिक सामाजिक संबंध (जैसे आमने-सामने की बातचीत, घनिष्ठ पड़ोसी), उच्च सजातीयता (लोगों का समान पृष्ठभूमि, मूल्यों और जीवन शैली का होना), और कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था हैं। उच्च जनसंख्या घनत्व, विशेषीकृत व्यवसाय और अज्ञातता शहरी समुदायों की विशेषताएँ हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक गतिशीलता तुलनात्मक रूप से कम होती है।

  23. प्रश्न 23: ‘मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र’ (Metropolitan Area) की अवधारणा किससे संबंधित है?

    • a) ग्रामीण क्षेत्रों का विस्तार
    • b) एक बड़े शहर और उसके आस-पास के उपनगरीय और शहरीकृत क्षेत्रों का संयोजन
    • c) एक छोटा कस्बा
    • d) कृषि प्रधान क्षेत्र

    सही उत्तर: b) एक बड़े शहर और उसके आस-पास के उपनगरीय और शहरीकृत क्षेत्रों का संयोजन

    विस्तृत व्याख्या: मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र (Metropolitan Area) एक बड़े शहर (कोर सिटी) और उसके आसपास के उन उपनगरीय (Suburban) और शहरीकृत क्षेत्रों (Urbanized Areas) का संयोजन होता है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से कोर सिटी से जुड़े होते हैं। यह शहरी समाजशास्त्र में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो शहरी फैलाव और बड़े शहरी केंद्रों के प्रभाव को समझने में मदद करती है।

  24. प्रश्न 24: ‘सापेक्ष गरीबी’ (Relative Poverty) का क्या अर्थ है?

    • a) बुनियादी जीवन यापन के लिए आवश्यक न्यूनतम संसाधनों का अभाव
    • b) समाज के औसत जीवन स्तर की तुलना में संसाधनों का अभाव
    • c) अस्थायी गरीबी की स्थिति
    • d) अत्यधिक आय असमानता

    सही उत्तर: b) समाज के औसत जीवन स्तर की तुलना में संसाधनों का अभाव

    विस्तृत व्याख्या: सापेक्ष गरीबी (Relative Poverty) का अर्थ है कि व्यक्तियों या परिवारों के पास समाज के औसत जीवन स्तर की तुलना में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, भले ही वे बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हों। यह पूर्ण गरीबी (Absolute Poverty) से भिन्न है, जहाँ बुनियादी जीवन यापन के लिए आवश्यक न्यूनतम संसाधनों का भी अभाव होता है। सापेक्ष गरीबी अक्सर आय असमानता और सामाजिक बहिष्कार से जुड़ी होती है।

  25. प्रश्न 25: वैश्वीकरण (Globalization) के परिणामस्वरूप ‘स्थानीय संस्कृतियों’ पर क्या प्रभाव पड़ता है?

    • a) वे हमेशा मजबूत होती हैं।
    • b) वे हमेशा नष्ट हो जाती हैं।
    • c) वे बाहरी प्रभावों के साथ घुल-मिल सकती हैं, बदल सकती हैं या उनका विरोध कर सकती हैं।
    • d) उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

    सही उत्तर: c) वे बाहरी प्रभावों के साथ घुल-मिल सकती हैं, बदल सकती हैं या उनका विरोध कर सकती हैं।

    विस्तृत व्याख्या: वैश्वीकरण (Globalization) का स्थानीय संस्कृतियों पर एक जटिल और बहुआयामी प्रभाव पड़ता है। वे बाहरी सांस्कृतिक तत्वों को आत्मसात करके घुल-मिल सकती हैं (संकर संस्कृति), वैश्विक रुझानों के अनुकूल होने के लिए बदल सकती हैं, या अपनी पहचान बनाए रखने के लिए बाहरी प्रभावों का सक्रिय रूप से विरोध कर सकती हैं। यह एक सरल ‘मजबूत’ या ‘नष्ट’ होने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि निरंतर बातचीत और अनुकूलन की प्रक्रिया है।

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