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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

नमस्ते, समाजशास्त्र के उत्साही अध्येताओं! “The Sociology Scholar” के रूप में, मैं आपके लिए एक और बौद्धिक चुनौती लेकर आया हूँ। यह दैनिक क्विज़ प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं (UGC-NET, UPSC, State PSCs) के लिए आपकी वैचारिक पकड़ और विश्लेषणात्मक कौशल का परीक्षण करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आज के इन 25 बहुविकल्पीय प्रश्नों के सेट के साथ अपनी तैयारी को परखाएं और समाजशास्त्रीय सोच की गहराइयों में गोता लगाएँ।

समाजशास्त्र बहुविकल्पीय प्रश्न

  1. किस समाजशास्त्री ने ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसका उपयोग सामाजिक घटनाओं को समझने के लिए एक विश्लेषणात्मक उपकरण के रूप में किया जाता है?

    • (A) एमिल दुर्खीम
    • (B) कार्ल मार्क्स
    • (C) मैक्स वेबर
    • (D) अगस्ट कॉम्टे

    सही उत्तर: (C)

    विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने ‘आदर्श प्रारूप’ की अवधारणा विकसित की। यह एक विश्लेषणात्मक उपकरण है, न कि नैतिक आदर्श, जिसका उपयोग सामाजिक वास्तविकताओं की जटिलताओं का अध्ययन और तुलना करने के लिए किया जाता है। वेबर ने नौकरशाही जैसे विभिन्न सामाजिक-ऐतिहासिक घटनाओं को समझने के लिए इसका इस्तेमाल किया। दुर्खीम ने ‘सामाजिक तथ्य’ पर ध्यान केंद्रित किया, मार्क्स ने वर्ग संघर्ष पर और कॉम्टे को समाजशास्त्र का जनक माना जाता है।

  2. एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब:

    • (A) समाज में अत्यधिक एकता होती है।
    • (B) सामाजिक मानदंड कमजोर या अनुपस्थित होते हैं।
    • (C) व्यक्तियों में अत्यधिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता होती है।
    • (D) वर्ग संघर्ष अपनी चरम सीमा पर होता है।

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने ‘एनोमी’ को एक ऐसी स्थिति के रूप में वर्णित किया जहां सामाजिक मानदंड कमजोर या अनुपस्थित हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों को मार्गदर्शन की कमी महसूस होती है और वे दिशाहीनता का अनुभव करते हैं। यह स्थिति अक्सर तेजी से सामाजिक परिवर्तन या संकट के समय उत्पन्न होती है और आत्महत्या जैसे विचलनकारी व्यवहारों से जुड़ी होती है।

  3. कार्ल मार्क्स के ‘अलगाव’ (Alienation) के सिद्धांत के अनुसार, पूंजीवादी समाज में श्रमिक किससे अलग हो जाते हैं?

    • (A) उत्पाद
    • (B) उत्पादन प्रक्रिया
    • (C) अपनी प्रजाति-सत्ता (species-being)
    • (D) उपरोक्त सभी

    सही उत्तर: (D)

    विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी उत्पादन के तहत श्रमिकों के ‘अलगाव’ के चार आयामों की पहचान की: उत्पाद से अलगाव, उत्पादन की प्रक्रिया से अलगाव, अपनी प्रजाति-सत्ता (मानव सार) से अलगाव और अन्य मनुष्यों से अलगाव। ये सभी कारक मिलकर श्रमिकों को उनके श्रम और मानव क्षमता से वंचित करते हैं।

  4. टैल्कॉट पार्सन्स के सामाजिक क्रिया सिद्धांत में, ‘पैटर्न चर’ (Pattern Variables) किस अवधारणा से संबंधित हैं?

    • (A) भूमिका संघर्ष
    • (B) भूमिका उम्मीदें
    • (C) सामाजिक प्रणाली में अभिनेता के उन्मुखीकरण
    • (D) सामाजिक गतिशीलता के प्रकार

    सही उत्तर: (C)

    विस्तृत व्याख्या: टैल्कॉट पार्सन्स ने ‘पैटर्न चर’ की अवधारणा को सामाजिक प्रणाली के भीतर अभिनेता के विभिन्न उन्मुखीकरणों और व्यवहारिक विकल्पों का विश्लेषण करने के लिए विकसित किया। ये पाँच द्विध्रुवीय जोड़े हैं (जैसे भावात्मकता बनाम भावात्मक तटस्थता, विशिष्टता बनाम सार्वभौमिकता) जो अभिनेताओं के अपने सामाजिक वातावरण के साथ बातचीत करने के तरीके का वर्णन करते हैं।

  5. आर.के. मर्टन द्वारा प्रस्तुत ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अव्यक्त कार्य’ (Latent Function) की अवधारणाएँ किससे संबंधित हैं?

    • (A) संघर्ष सिद्धांत
    • (B) संरचनात्मक प्रकार्यवाद
    • (C) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद
    • (D) घटना विज्ञान

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘प्रकट कार्य’ (उद्देश्यपूर्ण और मान्यता प्राप्त परिणाम) और ‘अव्यक्त कार्य’ (अनपेक्षित और अनजाने परिणाम) की अवधारणाएँ संरचनात्मक प्रकार्यवाद के ढांचे के भीतर विकसित कीं। उनका उपयोग सामाजिक संस्थाओं और प्रथाओं के विभिन्न परिणामों का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है।

  6. जी.एच. मीड के सिद्धांत में ‘मी’ (Me) और ‘आई’ (I) के बीच का अंतर किसे दर्शाता है?

    • (A) जैविक स्व और सामाजिक स्व
    • (B) सामाजिककृत स्व और सहज स्व
    • (C) अतीत का स्व और वर्तमान का स्व
    • (D) चेतन स्व और अचेतन स्व

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद के सिद्धांत में, ‘मी’ समाज के दृष्टिकोणों और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है जिसे व्यक्ति ने आंतरिकृत किया है (सामाजिककृत स्व), जबकि ‘आई’ व्यक्ति की सहज, अपरंपरागत और रचनात्मक प्रतिक्रिया है ‘मी’ की अपेक्षाओं के प्रति (सहज स्व)। ये दोनों मिलकर ‘स्व’ (Self) का निर्माण करते हैं।

  7. भारत में जाति व्यवस्था की ‘शुद्धता और प्रदूषण’ की अवधारणा किसने प्रस्तुत की?

    • (A) एम.एन. श्रीनिवास
    • (B) लुई ड्यूमॉन्ट
    • (C) आंद्रे बेतेई
    • (D) जी.एस. घुरिये

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: फ्रांसीसी समाजशास्त्री लुई ड्यूमॉन्ट ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘होमो हायरारकिकस’ में भारत में जाति व्यवस्था को समझने के लिए ‘शुद्धता और प्रदूषण’ (Purity and Pollution) की वैचारिक द्वंद्व की केंद्रीयता पर जोर दिया। उनका मानना था कि यह द्वंद्व भारतीय सामाजिक पदानुक्रम का मूल सिद्धांत है।

  8. ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा किससे संबंधित है?

    • (A) एम.एन. श्रीनिवास
    • (B) योगेंद्र सिंह
    • (C) ए.आर. देसाई
    • (D) डी.पी. मुखर्जी

    सही उत्तर: (A)

    विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें निचली जातियों या जनजातीय समूहों द्वारा उच्च जातियों (विशेष रूप से ब्राह्मणों) के अनुष्ठानों, रीति-रिवाजों, जीवन शैली और मूल्यों को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास किया जाता है।

  9. निम्नलिखित में से कौन ग्रामीण समाजशास्त्र का विषय नहीं है?

    • (A) कृषि संरचना
    • (B) ग्रामीण प्रवासन
    • (C) नगरीय नियोजन
    • (D) ग्रामीण शक्ति संरचना

    सही उत्तर: (C)

    विस्तृत व्याख्या: ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण समुदायों, उनकी सामाजिक संरचनाओं, आर्थिक गतिविधियों (मुख्यतः कृषि), प्रवासन, और शक्ति संरचनाओं का अध्ययन करता है। नगरीय नियोजन (Urban Planning) शहरी समाजशास्त्र और नगर नियोजन से संबंधित है, न कि सीधे ग्रामीण समाजशास्त्र से।

  10. ‘प्रकार्यवादी परिप्रेक्ष्य’ (Functionalist Perspective) समाज को कैसे देखता है?

    • (A) लगातार संघर्ष की स्थिति में
    • (B) एक स्थिर और एकीकृत प्रणाली के रूप में
    • (C) प्रतीकों और अर्थों के माध्यम से निर्मित
    • (D) व्यक्तियों के बीच शक्ति संबंधों के रूप में

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: प्रकार्यवाद समाज को एक जटिल प्रणाली के रूप में देखता है जिसके विभिन्न भाग (संस्थाएँ) एक साथ मिलकर स्थिरता और एकजुटता बनाए रखने के लिए कार्य करते हैं। यह मानता है कि प्रत्येक सामाजिक संस्था का एक विशिष्ट कार्य होता है जो पूरे समाज के संतुलन में योगदान देता है।

  11. निम्नलिखित में से कौन एक ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) का उदाहरण है?

    • (A) एक फुटबॉल टीम
    • (B) एक परिवार
    • (C) एक राजनीतिक दल
    • (D) एक बड़ी कंपनी के कर्मचारी

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: चार्ल्स कूली द्वारा प्रतिपादित ‘प्राथमिक समूह’ छोटे सामाजिक समूह होते हैं जिनमें सदस्यों के बीच घनिष्ठ, व्यक्तिगत और स्थायी संबंध होते हैं, जैसे परिवार और दोस्तों का समूह। इनमें भावनात्मक जुड़ाव और आमने-सामने की बातचीत महत्वपूर्ण होती है। अन्य विकल्प द्वितीयक समूहों के उदाहरण हैं।

  12. अनुसंधान में ‘प्रमाणीकरण’ (Reliability) से क्या अभिप्राय है?

    • (A) मापने की सटीकता
    • (B) माप की स्थिरता
    • (C) माप की वैधता
    • (D) माप का सामान्यीकरण

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: अनुसंधान में ‘प्रमाणीकरण’ (Reliability) इस बात को संदर्भित करता है कि यदि कोई माप उपकरण या प्रक्रिया बार-बार उपयोग की जाती है तो वह कितने सुसंगत और स्थिर परिणाम देती है। वैधता (Validity) यह सुनिश्चित करती है कि आप वही माप रहे हैं जो आप मापना चाहते हैं, जबकि प्रमाणीकरण माप की निरंतरता पर केंद्रित है।

  13. किस प्रकार के शोध में प्रतिभागियों के गहन और विस्तृत अनुभवों का अध्ययन किया जाता है?

    • (A) मात्रात्मक शोध
    • (B) गुणात्मक शोध
    • (C) प्रयोगात्मक शोध
    • (D) सर्वेक्षण शोध

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: गुणात्मक शोध (Qualitative Research) सामाजिक घटनाओं को उनकी प्राकृतिक सेटिंग में, प्रतिभागियों के दृष्टिकोण से गहराई से समझने पर केंद्रित होता है। यह अक्सर साक्षात्कार, फोकस समूह और नृवंशविज्ञान जैसे तरीकों का उपयोग करके समृद्ध, वर्णनात्मक डेटा एकत्र करता है। मात्रात्मक शोध इसके विपरीत संख्याओं और सांख्यिकीय विश्लेषण पर जोर देता है।

  14. ‘प्रच्छन्न बेरोजगारी’ (Disguised Unemployment) की अवधारणा मुख्य रूप से किस क्षेत्र से संबंधित है?

    • (A) औद्योगिक क्षेत्र
    • (B) सेवा क्षेत्र
    • (C) कृषि क्षेत्र
    • (D) सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र

    सही उत्तर: (C)

    विस्तृत व्याख्या: ‘प्रच्छन्न बेरोजगारी’ वह स्थिति है जहाँ किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक से अधिक लोग कार्यरत होते हैं, और यदि इनमें से कुछ लोगों को हटा भी दिया जाए तो उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में देखा जाता है, विशेषकर विकासशील देशों में, जहाँ एक ही खेत पर परिवार के सभी सदस्य काम करते प्रतीत होते हैं।

  15. किसने ‘जीवन की संभावनाओं’ (Life Chances) की अवधारणा का उपयोग सामाजिक असमानता को समझाने के लिए किया?

    • (A) कार्ल मार्क्स
    • (B) मैक्स वेबर
    • (C) पीटर बर्गर
    • (D) राल्फ डहरेंडोर्फ

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने ‘जीवन की संभावनाओं’ की अवधारणा को सामाजिक स्तरीकरण को समझाने के लिए इस्तेमाल किया। यह उन अवसरों को संदर्भित करता है जो व्यक्तियों को सामाजिक वर्ग, स्थिति और शक्ति जैसे कारकों के आधार पर जीवन में मिलते हैं, जैसे कि बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और आर्थिक सुरक्षा तक पहुंच। मार्क्स ने मुख्य रूप से आर्थिक वर्ग पर ध्यान केंद्रित किया।

  16. ‘आधुनिकता का प्रोजेक्ट’ (The Project of Modernity) के आलोचक के रूप में किसे जाना जाता है?

    • (A) अगस्ट कॉम्टे
    • (B) एंथनी गिडेंस
    • (C) जुरगेन हैबरमास
    • (D) मिशेल फूको

    सही उत्तर: (D)

    विस्तृत व्याख्या: मिशेल फूको एक प्रमुख उत्तर-आधुनिक विचारक हैं जिन्होंने ‘आधुनिकता के प्रोजेक्ट’ की आलोचना की। उन्होंने ज्ञान, शक्ति और प्रवचन के बीच संबंधों का विश्लेषण किया और यह दिखाया कि कैसे आधुनिक संस्थाएं (जैसे जेल, अस्पताल, विद्यालय) व्यक्तियों को अनुशासित और नियंत्रित करती हैं। जबकि कॉम्टे आधुनिकता के समर्थक थे, गिडेंस और हैबरमास आधुनिकता की निरंतरता और पुनर्मूल्यांकन में विश्वास रखते थे।

  17. भारत में ‘डिजिटल डिवाइड’ (Digital Divide) का मुख्य कारण क्या है?

    • (A) तकनीकी उपकरणों की कमी
    • (B) इंटरनेट तक पहुंच का अभाव
    • (C) डिजिटल साक्षरता की कमी
    • (D) उपरोक्त सभी

    सही उत्तर: (D)

    विस्तृत व्याख्या: भारत में ‘डिजिटल डिवाइड’ एक बहुआयामी समस्या है जिसके कई कारण हैं। इनमें तकनीकी उपकरणों (स्मार्टफोन, कंप्यूटर) तक पहुंच में असमानता, इंटरनेट कनेक्टिविटी की उपलब्धता और सामर्थ्य में अंतर, और डिजिटल कौशल व साक्षरता की कमी शामिल है। ये सभी कारक मिलकर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच डिजिटल तकनीकों के उपयोग में महत्वपूर्ण अंतर पैदा करते हैं।

  18. सामाजिक व्यवहार को आकार देने वाली ‘डिजिटल कथाओं’ (Digital Narratives) के अध्ययन में निम्नलिखित में से कौन-सा समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण सबसे अधिक प्रासंगिक होगा?

    • (A) संघर्ष सिद्धांत
    • (B) प्रकार्यवाद
    • (C) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद
    • (D) विनिमय सिद्धांत

    सही उत्तर: (C)

    विस्तृत व्याख्या: प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) व्यक्तियों और समूहों द्वारा प्रतीकों और अर्थों के निर्माण और व्याख्या पर केंद्रित है। ‘डिजिटल कथाएँ’ (जैसे सोशल मीडिया पर साझा की गई कहानियाँ, मीम्स, ट्रेंड्स) प्रतीकों और अर्थों के माध्यम से सामाजिक व्यवहार को आकार देती हैं। इसलिए, यह दृष्टिकोण इन कथाओं की शक्ति और उनके प्रभाव को समझने के लिए सबसे उपयुक्त है।

  19. पर्यावरण समाजशास्त्र (Environmental Sociology) का मुख्य सरोकार क्या है?

    • (A) मानव और प्रकृति के बीच अंतःक्रिया
    • (B) आर्थिक विकास और औद्योगीकरण
    • (C) केवल प्रदूषण नियंत्रण
    • (D) प्राकृतिक आपदाओं का प्रबंधन

    सही उत्तर: (A)

    विस्तृत व्याख्या: पर्यावरण समाजशास्त्र मानव समाजों और उनके प्राकृतिक वातावरण के बीच जटिल अंतःक्रिया का अध्ययन करता है। यह इस बात की पड़ताल करता है कि कैसे सामाजिक कारक पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म देते हैं, कैसे पर्यावरण समाज को प्रभावित करता है, और पर्यावरणीय मुद्दों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आयाम क्या हैं। यह केवल प्रदूषण या आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं है।

  20. ‘प्रवासन’ (Migration) को प्रभावित करने वाले ‘पुश और पुल कारकों’ (Push and Pull Factors) में कौन-सा कारक सेनेगल में गंभीर सूखे जैसी पर्यावरणीय घटना से संबंधित होगा, जैसा कि हाल ही में देखा गया?

    • (A) बेहतर शिक्षा के अवसर (पुल)
    • (B) राजनीतिक स्थिरता (पुल)
    • (C) पर्यावरणीय गिरावट (पुश)
    • (D) उच्च मजदूरी (पुल)

    सही उत्तर: (C)

    विस्तृत व्याख्या: ‘पुश और पुल कारक’ प्रवासन को समझने के लिए उपयोग किए जाते हैं। ‘पुश कारक’ वे नकारात्मक स्थितियाँ हैं जो लोगों को अपने मूल स्थान से दूर जाने के लिए मजबूर करती हैं, जैसे गरीबी, युद्ध, और पर्यावरणीय गिरावट। सेनेगल में गंभीर सूखा एक मजबूत पर्यावरणीय ‘पुश कारक’ होगा जो लोगों को बेहतर परिस्थितियों की तलाश में पलायन करने के लिए प्रेरित करेगा। अन्य विकल्प ‘पुल कारक’ हैं जो लोगों को किसी नए स्थान की ओर आकर्षित करते हैं।

  21. परिवार के समाजशास्त्र में, ‘एकल-अभिभावक परिवार’ (Single-Parent Family) के उदय के लिए जिम्मेदार कारकों में से एक क्या है?

    • (A) विवाह की दरों में वृद्धि
    • (B) तलाक और अलगाव की दरों में वृद्धि
    • (C) पारंपरिक परिवार मूल्यों का सुदृढ़ीकरण
    • (D) जन्म दर में गिरावट

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: एकल-अभिभावक परिवारों का उदय एक वैश्विक सामाजिक प्रवृत्ति है, और इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। तलाक और अलगाव की उच्च दर, अविवाहित माताओं की बढ़ती संख्या और जीवनसाथी की मृत्यु, ये सभी एकल-अभिभावक परिवारों के निर्माण में योगदान करते हैं। विवाह दरों में वृद्धि और पारंपरिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण इसके विपरीत होगा।

  22. निम्नलिखित में से कौन ‘माध्यमिक स्तरीकरण’ (Secondary Stratification) का एक उदाहरण है?

    • (A) लिंग
    • (B) जाति
    • (C) वर्ग
    • (D) धर्म

    सही उत्तर: (C)

    विस्तृत व्याख्या: ‘वर्ग’ (Class) सामाजिक स्तरीकरण का एक उदाहरण है। हालांकि, समाजशास्त्र में कुछ प्राथमिक स्तरीकरण के रूप में लिंग, आयु या जाति को मानते हैं जो जन्म से ही व्यक्तियों को कुछ स्थिति प्रदान करते हैं। ‘वर्ग’ को अक्सर माध्यमिक स्तरीकरण के रूप में देखा जाता है क्योंकि यह व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, शिक्षा और व्यवसाय पर आधारित होता है और इसमें गतिशीलता की संभावना अधिक होती है।

  23. भारतीय ग्रामीण समाज में ‘जजमानी व्यवस्था’ (Jajmani System) क्या दर्शाती है?

    • (A) भूमिहीन श्रमिकों का शोषण
    • (B) जाति के आधार पर वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय
    • (C) ग्रामीण क्षेत्रों में नगरीकरण का प्रभाव
    • (D) आधुनिक कृषि पद्धतियों का विकास

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: ‘जजमानी व्यवस्था’ पारंपरिक भारतीय ग्रामीण समाज में पाई जाने वाली एक सामाजिक-आर्थिक प्रणाली थी, जिसमें विभिन्न जातियों के परिवार वंशानुगत रूप से वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय करते थे। ‘जजमान’ (सेवा प्राप्त करने वाला) और ‘कमीन’ (सेवा प्रदान करने वाला) के बीच संबंध होते थे, जो अक्सर जाति-आधारित पदानुक्रम पर आधारित होते थे।

  24. ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) में ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) की अवधारणा किसने विकसित की?

    • (A) एरविंग गोफमैन
    • (B) हरबर्ट ब्लूमर
    • (C) जी.एच. मीड
    • (D) चार्ल्स कूली

    सही उत्तर: (C)

    विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड ने ‘सामान्यीकृत अन्य’ की अवधारणा प्रस्तुत की। यह उस समग्र सामुदायिक दृष्टिकोण या समाज के सामान्यीकृत अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है जिसे व्यक्ति सामाजिककरण की प्रक्रिया के माध्यम से आंतरिककृत करता है। यह व्यक्ति को समाज के नियमों और मानदंडों के अनुसार कार्य करने में मदद करता है।

  25. किस सामाजिक विचारक ने ‘पैनोप्टिकॉन’ (Panopticon) की अवधारणा को निगरानी और शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया?

    • (A) जुरगेन हैबरमास
    • (B) मिशेल फूको
    • (C) एंथनी गिडेंस
    • (D) पियरे बोर्डीयू

    सही उत्तर: (B)

    विस्तृत व्याख्या: मिशेल फूको ने ‘पैनोप्टिकॉन’ की अवधारणा को अपनी पुस्तक ‘डिसिप्लिन एंड पनिश: द बर्थ ऑफ द प्रिजन’ में प्रस्तुत किया। यह एक ऐसी संस्थागत संरचना है जहां एक केंद्रीय बिंदु से सभी को देखा जा सकता है, लेकिन देखने वाला अदृश्य रहता है। फूको ने इसका उपयोग आधुनिक समाजों में निगरानी, अनुशासन और शक्ति संबंधों को समझाने के लिए एक रूपक के रूप में किया।

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