Get free Notes

सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Click Here

समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

प्रिय उम्मीदवारों, अपनी बौद्धिक यात्रा शुरू करें!

“The Sociology Scholar” के साथ समाजशास्त्र की दुनिया में गोता लगाएँ! यह दैनिक अभ्यास सेट आपको समाजशास्त्र की गहन अवधारणाओं, विचारकों और समकालीन मुद्दों पर अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद करेगा। प्रत्येक प्रश्न आपकी विश्लेषणात्मक क्षमताओं को चुनौती देने और प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UGC-NET, UPSC और State PSCs में आपकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। अपनी तैयारी के स्तर का मूल्यांकन करें और अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें!


दैनिक समाजशास्त्र क्विज़: 25 प्रश्न

  1. “लाइटनिंग द मेंटल लोड” की अवधारणा अक्सर किस समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से संबंधित है, विशेषकर जब यह लिंग और घरेलू श्रम के विभाजन से संबंधित हो?

    • a) संरचनात्मक-प्रकार्यवादी दृष्टिकोण
    • b) संघर्ष दृष्टिकोण
    • c) नारीवादी दृष्टिकोण
    • d) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद

    सही उत्तर: c) नारीवादी दृष्टिकोण

    विस्तृत व्याख्या:

    नारीवादी दृष्टिकोण “मानसिक बोझ” की अवधारणा को समझने के लिए सबसे उपयुक्त है, जो घरेलू और भावनात्मक श्रम के अदृश्य और अक्सर लिंग-विशिष्ट असमान वितरण को संदर्भित करता है। यह दृष्टिकोण समाज में पितृसत्तात्मक संरचनाओं और शक्ति संबंधों पर प्रकाश डालता है जो महिलाओं पर इस बोझ को डालते हैं।

    • नारीवादी दृष्टिकोण: यह दृष्टिकोण लिंग असमानता, शक्ति संबंधों और महिलाओं के अनुभवों पर केंद्रित है, जो मानसिक बोझ की अवधारणा को सीधे संबोधित करता है।
    • संघर्ष दृष्टिकोण: यह वर्ग संघर्ष और असमानता पर केंद्रित है, हालांकि यह लिंग असमानता को भी देख सकता है, मानसिक बोझ पर इसका सीधा ध्यान कम होता है।
    • संरचनात्मक-प्रकार्यवादी दृष्टिकोण: यह समाज को एक ऐसी प्रणाली के रूप में देखता है जिसके हिस्से सामंजस्य में कार्य करते हैं, और यह मानसिक बोझ जैसी असमानताओं को अक्सर ‘प्रकार्यहीनता’ के रूप में या सामाजिक एकीकरण में बाधा के रूप में देख सकता है, लेकिन लिंग-विशिष्ट शोषण पर इसका जोर कम होता है।
    • प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद: यह सूक्ष्म-स्तरीय अंतःक्रियाओं और प्रतीकों के अर्थ पर केंद्रित है, जो मानसिक बोझ के व्यक्तिगत अनुभवों को समझा सकता है, लेकिन इसके व्यापक संरचनात्मक कारणों पर कम ध्यान देता है।
  2. यूसी इरविन के एक अध्ययन के अनुसार, क्रेडिट-बिल्डिंग संसाधनों की उपलब्धता को कौन सा कारक आकार देता है, जो मौजूदा सामाजिक असमानताओं को दर्शाता है?

    • a) शिक्षा का स्तर
    • b) आय
    • c) नस्ल (Race)
    • d) भौगोलिक स्थान

    सही उत्तर: c) नस्ल (Race)

    विस्तृत व्याख्या:

    हालिया शोध, जैसा कि यूसी इरविन के अध्ययन में बताया गया है, दर्शाता है कि नस्ल (Race) क्रेडिट-बिल्डिंग संसाधनों की उपलब्धता को महत्वपूर्ण रूप से आकार देती है। यह इंगित करता है कि नस्लीय अल्पसंख्यक समूहों को अक्सर ऋण तक पहुंचने और वित्तीय स्थिरता बनाने में संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे मौजूदा सामाजिक असमानताएं और गहरी होती हैं। यह सामाजिक स्तरीकरण और नस्लीय असमानता के समाजशास्त्रीय अध्ययनों से संबंधित है।

  3. एमिल दुर्खीम के अनुसार, “एनोमी” की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब:

    • a) सामाजिक नियम और मानदंड बहुत कठोर होते हैं।
    • b) व्यक्ति सामाजिक मानदंडों और मूल्यों के अभाव का अनुभव करते हैं।
    • c) समाज में अत्यधिक सामाजिक एकीकरण होता है।
    • d) आर्थिक असमानता बहुत कम होती है।

    सही उत्तर: b) व्यक्ति सामाजिक मानदंडों और मूल्यों के अभाव का अनुभव करते हैं।

    विस्तृत व्याख्या:

    एमिल दुर्खीम ने ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा का प्रतिपादन अपनी पुस्तक “आत्महत्या” (Suicide, 1897) में किया था। उनके अनुसार, एनोमी एक ऐसी सामाजिक स्थिति है जहाँ व्यक्ति सामाजिक मानदंडों और मूल्यों के अभाव या भ्रम का अनुभव करते हैं, जिससे उनमें दिशाहीनता और निराशा की भावना पैदा होती है। यह स्थिति अक्सर तीव्र सामाजिक परिवर्तन या आर्थिक संकट के दौरान देखी जाती है।

    • सही होने का कारण: दुर्खीम ने एनोमी को मानदंडों की कमी या अस्पष्टता के रूप में परिभाषित किया, जिससे व्यक्ति यह नहीं जान पाते कि उनसे क्या अपेक्षा की जाती है और वे सामाजिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में असमर्थ महसूस करते हैं।
    • अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
      • a) अत्यधिक कठोर नियम एनोमी नहीं, बल्कि ‘नियतिवादी आत्महत्या’ (fatalistic suicide) का कारण बन सकते हैं।
      • c) अत्यधिक सामाजिक एकीकरण ‘परोपकारी आत्महत्या’ (altruistic suicide) का कारण बन सकता है।
      • d) आर्थिक असमानता का कम होना एनोमी का प्रत्यक्ष कारण नहीं है।
  4. मैक्स वेबर के नौकरशाही के आदर्श प्रकार में, निम्नलिखित में से कौन सी विशेषता शामिल नहीं है?

    • a) विशेषज्ञता और श्रम का विभाजन
    • b) अलिखित नियम और मनमानी निर्णय
    • c) पदानुक्रमित प्राधिकरण संरचना
    • d) अवैयक्तिकता और तटस्थता

    सही उत्तर: b) अलिखित नियम और मनमानी निर्णय

    विस्तृत व्याख्या:

    मैक्स वेबर ने नौकरशाही (Bureaucracy) को आधुनिक समाज में प्रशासन के सबसे कुशल और तर्कसंगत रूप के रूप में वर्णित किया। उनकी “आदर्श प्रकार” (Ideal Type) नौकरशाही की विशेषताओं में विशेषज्ञता, श्रम का विभाजन, पदानुक्रमित प्राधिकरण संरचना, लिखित नियम और प्रक्रियाएं, अवैयक्तिकता और तकनीकी योग्यता पर आधारित पदोन्नति शामिल हैं।

    • सही होने का कारण: वेबर की नौकरशाही की अवधारणा में अलिखित नियम और मनमानी निर्णय बिल्कुल शामिल नहीं हैं; इसके विपरीत, यह स्पष्ट, लिखित नियमों और प्रक्रियाओं पर आधारित होती है ताकि निर्णय वस्तुनिष्ठ और सुसंगत हों।
  5. कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी समाज में ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा का संबंध किससे है?

    • a) प्रकृति से अलगाव
    • b) श्रम की प्रक्रिया से अलगाव
    • c) परिवार से अलगाव
    • d) स्वयं से अलगाव
    • e) उपरोक्त सभी

    सही उत्तर: e) उपरोक्त सभी

    विस्तृत व्याख्या:

    कार्ल मार्क्स ने अपनी पुस्तक “1844 के आर्थिक और दार्शनिक हस्तलेख” (Economic and Philosophic Manuscripts of 1844) में पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिकों के ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने अलगाव के चार मुख्य आयाम बताए, जिनमें श्रम की प्रक्रिया से, श्रम के उत्पाद से, अपनी प्रजाति-सत्ता से और अन्य मनुष्यों से अलगाव शामिल है। ये सभी प्रकार के अलगाव अंततः श्रमिक को स्वयं से भी अलग कर देते हैं। इसलिए, उपरोक्त सभी विकल्प सही हैं।

  6. समाजशास्त्र में ‘सामाजिक स्तरीकरण’ (Social Stratification) का क्या अर्थ है?

    • a) समाज में सांस्कृतिक विविधता का अध्ययन
    • b) व्यक्तियों और समूहों का उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर पदानुक्रमित व्यवस्थापन
    • c) सामाजिक परिवर्तन की गतिशीलता का विश्लेषण
    • d) सामाजिक मानदंडों का अध्ययन

    सही उत्तर: b) व्यक्तियों और समूहों का उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर पदानुक्रमित व्यवस्थापन

    विस्तृत व्याख्या:

    सामाजिक स्तरीकरण समाजशास्त्र की एक केंद्रीय अवधारणा है, जो समाज में व्यक्तियों और समूहों के पदानुक्रमित व्यवस्थापन को संदर्भित करती है। यह व्यवस्थापन धन, शक्ति, प्रतिष्ठा, शिक्षा और सामाजिक स्थिति जैसे कारकों के आधार पर होता है, जिसके परिणामस्वरूप समाज में असमानताएं पैदा होती हैं। स्तरीकरण के सामान्य रूपों में वर्ग, जाति और लिंग शामिल हैं।

  7. भारत में जाति व्यवस्था की ‘शुद्धता और प्रदूषण’ (Purity and Pollution) की अवधारणा किससे निकटता से संबंधित है?

    • a) जी.एस. घुर्ये
    • b) एम.एन. श्रीनिवास
    • c) लुई ड्यूमॉन्ट
    • d) आंद्रे बेतेई

    सही उत्तर: c) लुई ड्यूमॉन्ट

    विस्तृत व्याख्या:

    फ्रांसीसी समाजशास्त्री लुई ड्यूमॉन्ट (Louis Dumont) अपनी पुस्तक “होमो हायरार्किकस: द कास्ट सिस्टम एंड इट्स इम्प्लिकेशन्स” (Homo Hierarchicus: The Caste System and Its Implications, 1966) के लिए जाने जाते हैं। इस पुस्तक में उन्होंने भारतीय जाति व्यवस्था को समझने के लिए ‘शुद्धता और प्रदूषण’ (Purity and Pollution) की द्वंद्वात्मक अवधारणा को केंद्रीय माना। उनके अनुसार, यह वैचारिक विपक्ष ही भारतीय समाज के पदानुक्रमित संगठन का मूल सिद्धांत है।

  8. आधुनिक औद्योगिक समाजों में, परिवार के किस रूप को सबसे आम माना जाता है?

    • a) विस्तारित परिवार (Extended Family)
    • b) संयुक्त परिवार (Joint Family)
    • c) नाभिकीय परिवार (Nuclear Family)
    • d) मातृसत्तात्मक परिवार (Matriarchal Family)

    सही उत्तर: c) नाभिकीय परिवार (Nuclear Family)

    विस्तृत व्याख्या:

    नाभिकीय परिवार (Nuclear Family), जिसमें माता-पिता और उनके अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं, को आधुनिक औद्योगिक समाजों में सबसे आम पारिवारिक इकाई माना जाता है। औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण गतिशीलता की आवश्यकता बढ़ी है, जिससे विस्तारित परिवारों की तुलना में नाभिकीय परिवार अधिक अनुकूल बन गए हैं।

  9. समाजशास्त्र में ‘सहभागी अवलोकन’ (Participant Observation) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

    • a) सामाजिक घटना की मात्रात्मक माप करना
    • b) एक विशेष सामाजिक समूह के अंदरूनी दृष्टिकोण को समझना
    • c) बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह के लिए सर्वेक्षण करना
    • d) कारण और प्रभाव संबंधों को स्थापित करने के लिए प्रयोग करना

    सही उत्तर: b) एक विशेष सामाजिक समूह के अंदरूनी दृष्टिकोण को समझना

    विस्तृत व्याख्या:

    सहभागी अवलोकन गुणात्मक अनुसंधान विधि का एक प्रमुख तरीका है जहाँ शोधकर्ता एक विशिष्ट सामाजिक समूह या समुदाय के जीवन में सक्रिय रूप से भाग लेता है ताकि उनके अनुभवों, व्यवहारों और दृष्टिकोणों को भीतर से समझा जा सके। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों के दृष्टिकोण से सामाजिक वास्तविकता की गहरी और समृद्ध समझ प्राप्त करना है।

  10. वह प्रक्रिया जिसके माध्यम से व्यक्ति समाज के मानदंडों, मूल्यों और विश्वासों को सीखता और आंतरिक करता है, क्या कहलाती है?

    • a) सामाजिक नियंत्रण
    • b) विचलन
    • c) समाजीकरण (Socialization)
    • d) सामाजिक गतिशीलता

    सही उत्तर: c) समाजीकरण (Socialization)

    विस्तृत व्याख्या:

    समाजीकरण वह आजीवन प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति सामाजिक मानदंडों, मूल्यों, विश्वासों और व्यवहारों को सीखता और आंतरिक करता है जो उसे समाज में प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाते हैं। यह प्रक्रिया परिवार, स्कूल, सहकर्मी समूह और मीडिया जैसे विभिन्न अभिकर्ताओं द्वारा होती है।

  11. टैल्कॉट पार्सन्स के अनुसार, सामाजिक व्यवस्था के लिए ‘एजीआईएल’ (AGIL) मॉडल के घटक क्या हैं?

    • a) अनुकूलन (Adaptation), लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment), एकीकरण (Integration), गुप्त रखरखाव (Latency)
    • b) आत्मसात (Assimilation), गतिशीलता (Growth), नवाचार (Innovation), नेतृत्व (Leadership)
    • c) आत्मनिर्भरता (Autonomy), शासन (Governance), अंतःक्रिया (Interaction), सीखने (Learning)
    • d) उपरोक्त में से कोई नहीं

    सही उत्तर: a) अनुकूलन (Adaptation), लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment), एकीकरण (Integration), गुप्त रखरखाव (Latency)

    विस्तृत व्याख्या:

    टैल्कॉट पार्सन्स (Talcott Parsons) ने सामाजिक व्यवस्था को समझने के लिए ‘एजीआईएल’ (AGIL) प्रतिमान विकसित किया। उनके अनुसार, किसी भी सामाजिक व्यवस्था को जीवित रहने और कार्य करने के लिए चार कार्यात्मक आवश्यकताओं को पूरा करना होता है: अनुकूलन, लक्ष्य प्राप्ति, एकीकरण और गुप्त रखरखाव (या पैटर्न रखरखाव)।

  12. भारत में ‘जजमानी व्यवस्था’ निम्नलिखित में से किसका एक उदाहरण है?

    • a) पारंपरिक शहरी प्रशासन
    • b) अंतर-जातीय आर्थिक और अनुष्ठानिक संबंध
    • c) आधुनिक कृषि विपणन प्रणाली
    • d) सहकारी आंदोलन

    सही उत्तर: b) अंतर-जातीय आर्थिक और अनुष्ठानिक संबंध

    विस्तृत व्याख्या:

    जजमानी व्यवस्था भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित एक पारंपरिक सामाजिक-आर्थिक प्रणाली थी, जो विभिन्न जाति समूहों के बीच अंतर-निर्भरता और वंशानुगत सेवाओं के आदान-प्रदान पर आधारित थी। इसमें ‘जजमान’ (सेवा प्राप्त करने वाला) और ‘कमी’ (सेवा प्रदाता) के बीच संबंध होते थे, जो आर्थिक के साथ-साथ अनुष्ठानिक और सामाजिक भी थे।

  13. समाजशास्त्र में ‘संस्कृति’ (Culture) शब्द में क्या शामिल है?

    • a) केवल ललित कला और संगीत
    • b) समाज के सदस्यों द्वारा साझा किए गए मूल्य, विश्वास, मानदंड और भौतिक वस्तुएं
    • c) केवल किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत स्वाद और प्राथमिकताएं
    • d) केवल कानूनी और राजनीतिक प्रणालियाँ

    सही उत्तर: b) समाज के सदस्यों द्वारा साझा किए गए मूल्य, विश्वास, मानदंड और भौतिक वस्तुएं

    विस्तृत व्याख्या:

    समाजशास्त्र में, संस्कृति एक व्यापक अवधारणा है जिसमें किसी विशेष समाज या समूह के सदस्यों द्वारा साझा किए गए सभी पहलू शामिल होते हैं। इसमें अमूर्त तत्व जैसे मूल्य, विश्वास, मानदंड, भाषा और रीति-रिवाज, साथ ही भौतिक वस्तुएं जैसे कलाकृतियां, प्रौद्योगिकी और वास्तुकला शामिल हैं।

  14. जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, आत्म (Self) के विकास में ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) की अवधारणा का क्या महत्व है?

    • a) यह केवल बचपन की खेल अवस्था को संदर्भित करता है।
    • b) यह दूसरों की विशिष्ट अपेक्षाओं को आंतरिक करने की क्षमता है।
    • c) यह समाज के व्यापक मूल्यों और नैतिक अपेक्षाओं को आत्मसात करने की क्षमता है।
    • d) यह आत्म के ‘मैं’ (I) पहलू का प्रतिनिधित्व करता है।

    सही उत्तर: c) यह समाज के व्यापक मूल्यों और नैतिक अपेक्षाओं को आत्मसात करने की क्षमता है।

    विस्तृत व्याख्या:

    जॉर्ज हर्बर्ट मीड (George Herbert Mead) ने आत्म (Self) के विकास के अपने सिद्धांत में ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) की अवधारणा प्रस्तुत की। उनके अनुसार, यह वह अवस्था है जब एक बच्चा समाज के व्यापक मूल्यों, मानदंडों और नैतिक अपेक्षाओं को आंतरिक करना सीखता है, न कि केवल विशिष्ट व्यक्तियों (महत्वपूर्ण अन्य) की अपेक्षाओं को।

  15. स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने के शोध में डॉक्टरेट छात्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण को निधि देने वाले संघीय अनुदान का समाजशास्त्रीय महत्व क्या है?

    • a) यह केवल चिकित्सा विज्ञान को बढ़ावा देता है।
    • b) यह स्वास्थ्य असमानताओं और उम्र बढ़ने की सामाजिक गतिशीलता के अध्ययन को बढ़ावा देता है।
    • c) यह समाजशास्त्र के दायरे को कम करता है।
    • d) यह केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य व्यवहार पर केंद्रित है।

    सही उत्तर: b) यह स्वास्थ्य असमानताओं और उम्र बढ़ने की सामाजिक गतिशीलता के अध्ययन को बढ़ावा देता है।

    विस्तृत व्याख्या:

    स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने के शोध में संघीय अनुदान का समाजशास्त्रीय महत्व यह है कि यह स्वास्थ्य असमानताओं (जैसे नस्ल, वर्ग, लिंग के आधार पर स्वास्थ्य परिणामों में अंतर) और उम्र बढ़ने की सामाजिक गतिशीलता (जैसे जनसंख्या परिवर्तन, बुजुर्गों की देखभाल, सेवानिवृत्ति के सामाजिक प्रभाव) के अध्ययन को बढ़ावा देता है। समाजशास्त्र इन मुद्दों की व्यापक सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भों में जांच करता है, जो केवल जैविक या व्यक्तिगत स्वास्थ्य दृष्टिकोण से परे है।

  16. रॉबर्ट के. मर्टन के अनुसार, ‘अनपेक्षित परिणाम’ (Unanticipated Consequences) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

    • a) केवल समाज के लिए सकारात्मक परिणाम
    • b) समाज के लिए हानिकारक परिणाम
    • c) सामाजिक क्रियाओं के ऐसे परिणाम जिनकी मूल रूप से अपेक्षा या इरादा नहीं किया गया था
    • d) केवल आकस्मिक घटनाएं

    सही उत्तर: c) सामाजिक क्रियाओं के ऐसे परिणाम जिनकी मूल रूप से अपेक्षा या इरादा नहीं किया गया था

    विस्तृत व्याख्या:

    रॉबर्ट के. मर्टन (Robert K. Merton) ने सामाजिक क्रियाओं के ‘अनपेक्षित परिणामों’ (Unanticipated Consequences) की अवधारणा पर जोर दिया। इसका अर्थ है कि किसी भी सामाजिक क्रिया, नीति या निर्णय के ऐसे परिणाम हो सकते हैं जिनकी मूल रूप से योजना या अपेक्षा नहीं की गई थी, और वे सकारात्मक, नकारात्मक या तटस्थ हो सकते हैं।

  17. ‘आधुनिकीकरण सिद्धांत’ (Modernization Theory) मुख्य रूप से किस प्रकार के समाजों के सामाजिक परिवर्तन की व्याख्या करता है?

    • a) केवल पूंजीवादी समाजों का
    • b) केवल साम्यवादी समाजों का
    • c) पारंपरिक समाजों से औद्योगिक समाजों में संक्रमण का
    • d) केवल सांस्कृतिक क्रांति का

    सही उत्तर: c) पारंपरिक समाजों से औद्योगिक समाजों में संक्रमण का

    विस्तृत व्याख्या:

    आधुनिकीकरण सिद्धांत एक विकासवादी दृष्टिकोण है जो बताता है कि पारंपरिक समाज कैसे औद्योगिक और आधुनिक समाज बनने के लिए संक्रमण करते हैं। यह सिद्धांत आमतौर पर मानता है कि विकासशील देशों को आधुनिक बनने के लिए पश्चिमी समाजों के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक मॉडल का पालन करना चाहिए।

  18. भारत में जनजातीय समुदायों के संबंध में, ‘आत्मसातीकरण’ (Assimilation) नीति के बजाय ‘एकीकरण’ (Integration) नीति की वकालत किसने की?

    • a) जी.एस. घुर्ये
    • b) ए.आर. देसाई
    • c) वेरियर एल्विन
    • d) एम.एन. श्रीनिवास

    सही उत्तर: c) वेरियर एल्विन

    विस्तृत व्याख्या:

    प्रसिद्ध मानवविज्ञानी वेरियर एल्विन (Verrier Elwin) ने भारत में जनजातीय समुदायों के लिए ‘एकीकरण’ (Integration) की नीति की वकालत की। उन्होंने तर्क दिया कि आदिवासियों को मुख्यधारा के समाज में आत्मसात (assimilate) करने के बजाय, उन्हें अपनी विशिष्ट संस्कृति और पहचान बनाए रखने की अनुमति देते हुए धीरे-धीरे एकीकृत किया जाना चाहिए।

  19. ग्रामीण समाजों की तुलना में शहरी समाजों की एक प्रमुख विशेषता क्या है?

    • a) प्राथमिक संबंधों की प्रबलता
    • b) सामाजिक समरूपता
    • c) श्रम का उच्च विभाजन और विशिष्टता
    • d) समुदाय की मजबूत भावना

    सही उत्तर: c) श्रम का उच्च विभाजन और विशिष्टता

    विस्तृत व्याख्या:

    शहरी समाजों की एक प्रमुख विशेषता श्रम का उच्च विभाजन और विशिष्टता (high division of labor and specialization) है। शहरी क्षेत्रों में, लोग विभिन्न प्रकार के विशिष्ट व्यवसायों और भूमिकाओं में लगे होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप एक जटिल सामाजिक संरचना और अंतर-निर्भरता होती है।

  20. पियरे बॉर्डियू की अवधारणा ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) का शिक्षा में क्या महत्व है?

    • a) यह केवल वित्तीय धन को संदर्भित करती है।
    • b) यह उन सांस्कृतिक संसाधनों (ज्ञान, कौशल, स्वाद) को संदर्भित करती है जो व्यक्तियों को सामाजिक लाभ प्रदान करते हैं।
    • c) यह स्कूल भवनों और बुनियादी ढांचे को संदर्भित करती है।
    • d) यह केवल कला और साहित्य के प्रति प्रेम को संदर्भित करती है।

    सही उत्तर: b) यह उन सांस्कृतिक संसाधनों (ज्ञान, कौशल, स्वाद) को संदर्भित करती है जो व्यक्तियों को सामाजिक लाभ प्रदान करते हैं।

    विस्तृत व्याख्या:

    पियरे बॉर्डियू (Pierre Bourdieu) ने ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) की अवधारणा विकसित की, जो सांस्कृतिक संसाधनों (जैसे शिक्षा, ज्ञान, बोलने का तरीका, शैली, स्वाद) को संदर्भित करती है जिन्हें व्यक्ति अपने सामाजिक परिवेश से प्राप्त करते हैं और जो उन्हें सामाजिक गतिशीलता और प्रतिष्ठा में लाभ प्रदान करते हैं।

  21. एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र’ (Profane) के बीच का अंतर किसका आधार है?

    • a) आर्थिक वर्ग विभाजन
    • b) राजनीतिक शक्ति
    • c) धर्म
    • d) लैंगिक पहचान

    सही उत्तर: c) धर्म

    विस्तृत व्याख्या:

    एमिल दुर्खीम ने अपनी पुस्तक “धर्म के प्रारंभिक स्वरूप” (The Elementary Forms of the Religious Life, 1912) में धर्म के समाजशास्त्रीय विश्लेषण के लिए ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र’ (Profane) के बीच के अंतर को केंद्रीय माना। उनके अनुसार, पवित्र वे चीजें हैं जिन्हें अलौकिक शक्तियों से जोड़ा जाता है और अपवित्र वे चीजें हैं जो सामान्य, सांसारिक और दैनिक जीवन का हिस्सा हैं।

  22. संघर्ष सिद्धांत (Conflict Theory) मुख्य रूप से समाज में किस पर ध्यान केंद्रित करता है?

    • a) सामाजिक सद्भाव और एकता
    • b) शक्ति और संसाधनों के असमान वितरण के कारण संघर्ष और असमानता
    • c) समाज के विभिन्न हिस्सों के बीच कार्यात्मक अंतर-निर्भरता
    • d) व्यक्तियों के बीच सूक्ष्म-स्तरीय अंतःक्रियाएं

    सही उत्तर: b) शक्ति और संसाधनों के असमान वितरण के कारण संघर्ष और असमानता

    विस्तृत व्याख्या:

    संघर्ष सिद्धांत एक समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण है जो समाज को विभिन्न समूहों के बीच शक्ति और संसाधनों के लिए चल रहे संघर्ष के रूप में देखता है। यह सिद्धांत सामाजिक असमानता, शोषण और प्रभुत्व पर जोर देता है और तर्क देता है कि सामाजिक व्यवस्था शक्ति के संबंधों और संघर्षों के माध्यम से बनी रहती है।

  23. समाजशास्त्र में ‘बड़े डेटा’ (Big Data) और ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) के एकीकरण से अनुसंधान विधियों में क्या संभावित लाभ हो सकते हैं?

    • a) केवल गुणात्मक अनुसंधान का विस्थापन
    • b) सामाजिक पैटर्नों और प्रवृत्तियों के बड़े पैमाने पर विश्लेषण की क्षमता
    • c) केवल पारंपरिक सर्वेक्षण विधियों का सुदृढीकरण
    • d) मानवीय व्याख्या की आवश्यकता का पूर्ण उन्मूलन

    सही उत्तर: b) सामाजिक पैटर्नों और प्रवृत्तियों के बड़े पैमाने पर विश्लेषण की क्षमता

    विस्तृत व्याख्या:

    समाजशास्त्र में ‘बड़े डेटा’ (Big Data) और ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) का एकीकरण सामाजिक पैटर्नों और प्रवृत्तियों के बड़े पैमाने पर विश्लेषण की क्षमता प्रदान करता है। यह शोधकर्ताओं को ऐसे डेटासेट का विश्लेषण करने की अनुमति देता है जो पारंपरिक तरीकों से अव्यवहार्य होते, जिससे नई अंतर्दृष्टि प्राप्त हो सकती है। हालांकि, मानवीय व्याख्या अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

  24. एंथनी गिडेंस ने ‘संरचनाकरण सिद्धांत’ (Structuration Theory) में किस पर जोर दिया?

    • a) केवल सामाजिक संरचनाओं की प्राथमिकता पर
    • b) केवल व्यक्तिगत एजेंसी की प्राथमिकता पर
    • c) संरचना और एजेंसी के बीच द्वंद्वात्मक संबंध पर
    • d) प्रौद्योगिकी के सामाजिक प्रभावों पर

    सही उत्तर: c) संरचना और एजेंसी के बीच द्वंद्वात्मक संबंध पर

    विस्तृत व्याख्या:

    एंथनी गिडेंस (Anthony Giddens) ने अपने ‘संरचनाकरण सिद्धांत’ (Structuration Theory) में सामाजिक जीवन में ‘संरचना’ (Structure) और ‘एजेंसी’ (Agency) के बीच द्वंद्वात्मक संबंध पर जोर दिया। उनके अनुसार, संरचनाएं व्यक्तियों की क्रियाओं (एजेंसी) को सक्षम और विवश करती हैं, जबकि व्यक्ति अपनी क्रियाओं के माध्यम से इन संरचनाओं का निर्माण और पुनरुत्पादन करते हैं।

  25. भारत में ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) की अवधारणा क्या दर्शाती है?

    • a) केवल डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने वाले विभिन्न जाति समूह
    • b) डिजिटल पहुंच और अवसरों में जाति-आधारित असमानताएं
    • c) जाति व्यवस्था का पूरी तरह से उन्मूलन
    • d) केवल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल डिवाइड

    सही उत्तर: b) डिजिटल पहुंच और अवसरों में जाति-आधारित असमानताएं

    विस्तृत व्याख्या:

    ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ की अवधारणा यह दर्शाती है कि भारत में डिजिटल पहुंच (इंटरनेट, स्मार्टफोन) और उनसे जुड़े अवसरों (डिजिटल साक्षरता, ऑनलाइन सेवाएं, रोजगार) में पारंपरिक जाति-आधारित असमानताएं कैसे कायम हैं या पुनरुत्पादित हो रही हैं। यह बताता है कि निचली जातियों और हाशिए के समूहों को अक्सर डिजिटल बुनियादी ढांचे, शिक्षा और संसाधनों तक पहुंच में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

[कोर्स और फ्री नोट्स के लिए यहाँ क्लिक करें]

Leave a Comment