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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

प्रिय उम्मीदवारों, ‘The Sociology Scholar’ आपके लिए समाजशास्त्र के गहन ज्ञान और वैचारिक स्पष्टता को परखने के लिए एक और दैनिक चुनौती लेकर आया है। यह क्विज़ समाजशास्त्रीय विचारकों, सिद्धांतों और समकालीन मुद्दों पर आपकी पकड़ को मजबूत करेगा। प्रत्येक प्रश्न को ध्यान से पढ़ें, विश्लेषण करें और अपनी तैयारी के स्तर का मूल्यांकन करें। आइए, समाजशास्त्र के इस महासंग्राम में गोता लगाएँ!


दैनिक अभ्यास सेट

  1. प्रश्न 1: दुर्खीम के अनुसार ‘सामूहिक चेतना’ (Collective Conscience) का क्या अर्थ है?

    • अ) व्यक्तियों की निजी भावनाओं का योग।
    • ब) एक समाज के सदस्यों द्वारा साझा किए गए विश्वासों और नैतिक दृष्टिकोणों का समूह।
    • स) राज्य द्वारा लागू किए गए कानून।
    • द) आर्थिक असमानता का परिणाम।

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। दुर्खीम के अनुसार, सामूहिक चेतना एक समाज के सदस्यों द्वारा साझा किए गए विश्वासों, विचारों और नैतिक दृष्टिकोणों का कुल योग है। यह व्यक्तियों से ऊपर एक सामाजिक तथ्य है जो समाज में एकजुटता और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘द डिविजन ऑफ लेबर इन सोसाइटी’ में इस अवधारणा को विस्तार से समझाया है। ‘अ’ व्यक्तिगत है जबकि सामूहिक चेतना सामाजिक है। ‘स’ और ‘द’ समाज के अन्य पहलुओं को संदर्भित करते हैं, सीधे सामूहिक चेतना को नहीं।

  2. प्रश्न 2: कार्ल मार्क्स के ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा में निम्नलिखित में से क्या शामिल नहीं है?

    • अ) उत्पाद से अलगाव
    • ब) उत्पादन की प्रक्रिया से अलगाव
    • स) मानव प्रजाति के सार से अलगाव
    • द) धार्मिक प्रथाओं से अलगाव

    सही उत्तर: द)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘द’ है। कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिकों के अलगाव की चार मुख्य विमाओं की पहचान की: उत्पाद से अलगाव, उत्पादन की प्रक्रिया से अलगाव, मानव प्रजाति के सार (species-being) से अलगाव, और अन्य मनुष्यों से अलगाव। धार्मिक प्रथाओं से अलगाव उनकी अलगाव की अवधारणा का प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं था, हालांकि उन्होंने धर्म को ‘अफीम’ कहा था जो अलगाव को कम करने के लिए एक अस्थायी राहत प्रदान करता है। मार्क्स की ‘1844 के आर्थिक और दार्शनिक पांडुलिपियाँ’ में यह अवधारणा प्रमुखता से वर्णित है। ‘अ’, ‘ब’, और ‘स’ मार्क्स द्वारा वर्णित अलगाव के प्रमुख पहलू हैं।

  3. प्रश्न 3: “घोषित समाज” (Dominant Caste) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की?

    • अ) जी.एस. घुरिये
    • ब) एम.एन. श्रीनिवास
    • स) आंद्रे बेतेई
    • द) डेविड हार्डीमैन

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। “घोषित समाज” (Dominant Caste) की अवधारणा एम.एन. श्रीनिवास ने दी थी। उन्होंने बताया कि एक जाति को ‘प्रमुख’ कहा जा सकता है यदि उसके पास संख्यात्मक शक्ति, आर्थिक और राजनीतिक शक्ति है, और एक उच्च अनुष्ठानिक स्थिति है। श्रीनिवास ने मैसूर के रामपुरा गांव के अपने अध्ययन में इस अवधारणा का वर्णन किया। अन्य समाजशास्त्रियों ने भारतीय समाज के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया है, लेकिन यह विशिष्ट अवधारणा श्रीनिवास की है।

  4. प्रश्न 4: गुणात्मक अनुसंधान (Qualitative Research) की मुख्य विशेषता क्या है?

    • अ) बड़े पैमाने पर सांख्यिकीय डेटा का विश्लेषण।
    • ब) प्रतिभागियों के दृष्टिकोण और अनुभवों को समझना।
    • स) परिकल्पना का परीक्षण करने के लिए प्रयोगात्मक डिजाइन का उपयोग करना।
    • द) मात्रात्मक चर के बीच कारण-प्रभाव संबंधों को स्थापित करना।

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। गुणात्मक अनुसंधान का उद्देश्य व्यक्तियों के अनुभवों, दृष्टिकोणों और अर्थों की गहराई से पड़ताल करना है। यह सामाजिक घटना की जटिलताओं को समझने पर केंद्रित है, अक्सर छोटे, गहन नमूनों के साथ। नृवंशविज्ञान, केस स्टडी, फोकस्ड ग्रुप डिस्कशन जैसे तरीके गुणात्मक अनुसंधान में उपयोग होते हैं। ‘अ’, ‘स’, और ‘द’ मात्रात्मक अनुसंधान की विशेषताओं को संदर्भित करते हैं।

  5. प्रश्न 5: मैक्स वेबर द्वारा वर्णित ‘तर्कसंगत-कानूनी अधिकार’ (Rational-Legal Authority) का आधार क्या है?

    • अ) शासक का करिश्माई व्यक्तित्व।
    • ब) परम्परागत रीति-रिवाज और प्रथाएँ।
    • स) स्थापित नियम और कानून।
    • द) शारीरिक बल का प्रयोग।

    सही उत्तर: स)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘स’ है। मैक्स वेबर ने प्रभुत्व के तीन शुद्ध प्रकार बताए हैं: परम्परागत, करिश्माई और तर्कसंगत-कानूनी। तर्कसंगत-कानूनी अधिकार स्थापित नियमों और कानूनों पर आधारित होता है, और इसमें सत्ता व्यक्ति में नहीं, बल्कि पद में निहित होती है। वेबर की पुस्तक ‘इकोनॉमी एंड सोसाइटी’ में ये अवधारणाएँ विस्तृत हैं। ‘अ’ करिश्माई अधिकार का, और ‘ब’ परम्परागत अधिकार का आधार है। ‘द’ किसी भी वैध अधिकार का आधार नहीं है।

  6. प्रश्न 6: निम्नलिखित में से कौन सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) का एक उदाहरण नहीं है?

    • अ) जाति व्यवस्था
    • ब) वर्ग व्यवस्था
    • स) लिंग-आधारित असमानता
    • द) एक परिवार के भीतर व्यक्तिगत पसंद

    सही उत्तर: द)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘द’ है। सामाजिक स्तरीकरण समाज में व्यक्तियों या समूहों के पदानुक्रमित विभाजन को संदर्भित करता है जो सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शक्ति और प्रतिष्ठा के आधार पर होता है। जाति व्यवस्था, वर्ग व्यवस्था और लिंग-आधारित असमानता सभी सामाजिक स्तरीकरण के सुस्थापित उदाहरण हैं। एक परिवार के भीतर व्यक्तिगत पसंद स्तरीकरण की अवधारणा से सीधे संबंधित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत स्वायत्तता या अंतर-पारिवारिक गतिशीलता का विषय है। सामाजिक स्तरीकरण समाजशास्त्र की एक मौलिक अवधारणा है जो संसाधनों और अवसरों के असमान वितरण को समझाती है। ‘अ’, ‘ब’, और ‘स’ सामाजिक स्तरीकरण के महत्वपूर्ण रूप हैं।

  7. प्रश्न 7: परिवार को ‘मानव व्यक्तित्व की नर्सरी’ के रूप में किसने वर्णित किया है?

    • अ) एमाइल दुर्खीम
    • ब) टालकॉट पार्सन्स
    • स) किंग्सले डेविस
    • द) जॉर्ज मर्डोक

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। टालकॉट पार्सन्स ने परिवार को ‘मानव व्यक्तित्व की नर्सरी’ के रूप में वर्णित किया है। उनका मानना था कि परिवार प्राथमिक समाजीकरण और व्यक्तित्व स्थिरीकरण के लिए जिम्मेदार है, जो व्यक्तियों को समाज में उनकी भूमिकाओं के लिए तैयार करता है। पार्सन्स ने अपने कार्यों में परिवार के कार्यात्मकवादी दृष्टिकोण पर जोर दिया। अन्य समाजशास्त्रियों ने परिवार का अध्ययन किया है, लेकिन यह विशिष्ट विवरण पार्सन्स से जुड़ा है।

  8. प्रश्न 8: “आधुनिकीकरण” (Modernization) की अवधारणा किस प्रक्रिया को संदर्भित करती है?

    • अ) केवल पश्चिमीकरण की प्रक्रिया।
    • ब) परंपराओं को पूरी तरह से त्याग देना।
    • स) आर्थिक विकास, औद्योगिकीकरण और तर्कसंगतता की ओर एक सामाजिक परिवर्तन।
    • द) केवल सांस्कृतिक परिवर्तन।

    सही उत्तर: स)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘स’ है। आधुनिकीकरण एक बहुआयामी प्रक्रिया है जिसमें आर्थिक विकास, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, शिक्षा का विस्तार, तर्कसंगतता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रसार शामिल है। यह केवल पश्चिमीकरण या केवल सांस्कृतिक परिवर्तन से अधिक व्यापक है। आधुनिकीकरण सिद्धांत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के युग में प्रमुख था, जिसमें विकासशील देशों के सामाजिक परिवर्तन को समझने की कोशिश की गई थी। ‘अ’ और ‘द’ आधुनिकीकरण के सीमित पहलू हैं, जबकि ‘ब’ अतिसरलीकृत है।

  9. प्रश्न 9: ‘एथनोसेंट्रिज्म’ (Ethnocentrism) का अर्थ क्या है?

    • अ) अपनी संस्कृति को दूसरों की संस्कृतियों से बेहतर मानना।
    • ब) अन्य संस्कृतियों को समझने की इच्छा।
    • स) सभी संस्कृतियों को समान मानना।
    • द) एक संस्कृति के भीतर उप-संस्कृतियों का अध्ययन।

    सही उत्तर: अ)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘अ’ है। एथनोसेंट्रिज्म का अर्थ है अपनी संस्कृति को दूसरों की संस्कृतियों से बेहतर या मानक मानना और अन्य संस्कृतियों का मूल्यांकन अपनी सांस्कृतिक मानदंडों के आधार पर करना। यह अवधारणा सांस्कृतिक भिन्नताओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण है और अक्सर पूर्वाग्रहों से जुड़ी होती है। ‘ब’ और ‘स’ सांस्कृतिक सापेक्षवाद की ओर इशारा करते हैं, जो एथनोसेंट्रिज्म के विपरीत है। ‘द’ उप-संस्कृति अध्ययन का विषय है।

  10. प्रश्न 10: रॉबर्ट किंग मर्टन द्वारा प्रस्तुत ‘संदर्भ समूह’ (Reference Group) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

    • अ) एक व्यक्ति का तत्काल परिवार।
    • ब) वे समूह जिनसे एक व्यक्ति सीधे संबंधित होता है।
    • स) वे समूह जिनके मूल्यों और मानदंडों को एक व्यक्ति अपनाना चाहता है या जिनके साथ वह अपनी तुलना करता है।
    • द) एक शोधकर्ता द्वारा अध्ययन किए गए समूह।

    सही उत्तर: स)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘स’ है। रॉबर्ट किंग मर्टन ने ‘संदर्भ समूह’ की अवधारणा विकसित की। यह उन समूहों को संदर्भित करता है जिनके मूल्यों, विश्वासों और मानदंडों को एक व्यक्ति अपनाना चाहता है या जिनके साथ वह अपनी तुलना करता है, चाहे वह उस समूह का सदस्य हो या न हो। यह व्यक्ति के व्यवहार, दृष्टिकोण और आत्म-छवि को प्रभावित करता है। मर्टन ने ‘सोशल थ्योरी एंड सोशल स्ट्रक्चर’ में इस अवधारणा को लोकप्रिय बनाया। ‘अ’ और ‘ब’ प्राथमिक या सदस्यता समूहों को संदर्भित करते हैं। ‘द’ शोध का विषय है।

  11. प्रश्न 11: “ग्राम समुदाय” (Rural Community) की मुख्य विशेषताओं में से एक क्या है?

    • अ) संबंधों का अवैयक्तिक और खंडित होना।
    • ब) सजातीयता (Homogeneity) और प्राथमिक संबंधों की प्रधानता।
    • स) उच्च सामाजिक गतिशीलता।
    • द) व्यावसायिक विशेषज्ञता की उच्च डिग्री।

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। ग्राम समुदाय आमतौर पर सजातीयता (सामान्य जीवनशैली, विश्वास) और प्राथमिक संबंधों (गहरे, व्यक्तिगत संबंध) की प्रधानता से चिह्नित होते हैं। यहाँ सामाजिक गतिशीलता कम होती है और व्यावसायिक विशेषज्ञता भी अपेक्षाकृत कम होती है। ग्रामीण और शहरी समाजशास्त्र में समुदाय के प्रकारों का अध्ययन किया जाता है। ‘अ’, ‘स’, और ‘द’ शहरी समुदायों की अधिक विशिष्ट विशेषताएँ हैं।

  12. प्रश्न 12: ‘सापेक्षिक अभाव’ (Relative Deprivation) की अवधारणा का संबंध किससे है?

    • अ) सभी संसाधनों की पूर्ण कमी।
    • ब) दूसरों की तुलना में स्वयं को वंचित महसूस करना।
    • स) केवल आर्थिक रूप से गरीब होना।
    • द) प्राकृतिक आपदाओं के कारण संसाधनों का अभाव।

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। सापेक्षिक अभाव की अवधारणा बताती है कि व्यक्ति या समूह तब वंचित महसूस करते हैं जब वे अपनी स्थिति की तुलना दूसरों से करते हैं और महसूस करते हैं कि उनके पास वह नहीं है जो दूसरों के पास है या जो उन्हें लगता है कि उनके पास होना चाहिए। यह पूर्ण गरीबी से भिन्न है। यह अवधारणा अक्सर सामाजिक आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को समझाने में सहायक होती है, और इसे रॉबर्ट मर्टन और स्टाउफर जैसे समाजशास्त्रियों ने विकसित किया। ‘अ’ पूर्ण अभाव है। ‘स’ केवल आर्थिक पहलू पर केंद्रित है। ‘द’ बाहरी घटना है।

  13. प्रश्न 13: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) क्या है?

    • अ) व्यक्ति के माता-पिता।
    • ब) समाज के सामान्य मूल्य, मानदंड और अपेक्षाएँ।
    • स) एक व्यक्ति का सबसे अच्छा दोस्त।
    • द) एक विशेष भूमिका में एक विशिष्ट व्यक्ति।

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। जॉर्ज हर्बर्ट मीड के प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद सिद्धांत में, ‘सामान्यीकृत अन्य’ समाज के संगठित दृष्टिकोण, सामान्य मूल्य, मानदंड और अपेक्षाएँ हैं जिन्हें एक व्यक्ति आत्मसात करता है। यह व्यक्ति को यह समझने में मदद करता है कि समाज उससे क्या अपेक्षा करता है, और इस प्रकार आत्म-विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मीड ने अपनी पुस्तक ‘माइंड, सेल्फ एंड सोसाइटी’ में इस अवधारणा का वर्णन किया। ‘अ’, ‘स’, और ‘द’ विशिष्ट व्यक्तियों या निकटवर्ती लोगों को संदर्भित करते हैं, जबकि ‘सामान्यीकृत अन्य’ समग्र सामाजिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है।

  14. प्रश्न 14: एमाइल दुर्खीम ने ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा का उपयोग किस स्थिति का वर्णन करने के लिए किया था?

    • अ) अत्यधिक सामाजिक विनियमन।
    • ब) मानदंडों और मूल्यों की अनुपस्थिति या टूटना।
    • स) व्यक्तिगत स्वतंत्रता की पूर्ण प्राप्ति।
    • द) वर्ग संघर्ष की स्थिति।

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। दुर्खीम ने ‘एनोमी’ की अवधारणा का उपयोग एक ऐसी सामाजिक स्थिति का वर्णन करने के लिए किया था जहाँ मानदंडों और मूल्यों का टूटना या अनुपस्थिति होती है, जिससे व्यक्तियों के लिए अपने व्यवहार को विनियमित करना मुश्किल हो जाता है। यह अक्सर तेजी से सामाजिक परिवर्तन या संकट के समय होता है और व्यक्तियों में दिशाहीनता और निराशा की भावना पैदा कर सकता है। दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘आत्महत्या’ (Suicide) में एनोमी का व्यापक विश्लेषण किया है। ‘अ’ अत्यधिक विनियमन ‘घातक आत्महत्या’ से संबंधित हो सकता है। ‘स’ और ‘द’ दुर्खीम की एनोमी की अवधारणा से संबंधित नहीं हैं।

  15. प्रश्न 15: वेबर के अनुसार, प्रोटेस्टेंट नैतिकता (Protestant Ethic) और पूंजीवाद की भावना (Spirit of Capitalism) के बीच क्या संबंध था?

    • अ) प्रोटेस्टेंट नैतिकता पूंजीवाद के विकास में बाधक थी।
    • ब) प्रोटेस्टेंट नैतिकता ने पूंजीवाद के विकास को बढ़ावा दिया।
    • स) दोनों असंबंधित थे।
    • द) पूंजीवाद ने प्रोटेस्टेंट नैतिकता को जन्म दिया।

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। मैक्स वेबर ने अपनी क्लासिक कृति ‘द प्रोटेस्टेंट एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैपिटलिज्म’ में तर्क दिया कि प्रोटेस्टेंट (विशेषकर कैल्विनवादी) नैतिकता के कुछ पहलू, जैसे कि कड़ी मेहनत, बचत, सांसारिक सफलता को ईश्वर की कृपा का संकेत मानना, और भोग-विलास से बचना, आधुनिक पूंजीवाद के विकास के लिए अनुकूल थे। यह वेबर की सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है। ‘अ’ और ‘स’ वेबर के सिद्धांत के विपरीत हैं। ‘द’ कारण-प्रभाव संबंध को उल्टा कर देता है।

  16. प्रश्न 16: भारतीय जनजातीय समुदायों के लिए ‘एकीकरण’ (Integration) और ‘आत्मसात्करण’ (Assimilation) के बीच अंतर किसने स्पष्ट किया है?

    • अ) जी.एस. घुरिये
    • ब) वेरियर एल्विन
    • स) जे.एच. हट्टन
    • द) बी.आर. अम्बेडकर

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। वेरियर एल्विन ने भारतीय जनजातीय समुदायों के लिए ‘एकीकरण’ (उनके सांस्कृतिक विशिष्टता को बनाए रखते हुए मुख्यधारा के समाज के साथ जुड़ना) और ‘आत्मसात्करण’ (मुख्यधारा की संस्कृति में पूरी तरह से घुलमिल जाना और अपनी पहचान खोना) के बीच अंतर स्पष्ट किया था। वह जनजातियों के लिए एकीकरण के पक्षधर थे। एल्विन ने भारतीय जनजातियों पर व्यापक शोध किया और उनकी वकालत की। अन्य समाजशास्त्री भी भारतीय जनजातियों से संबंधित हैं, लेकिन यह विशिष्ट भेद एल्विन का है।

  17. प्रश्न 17: “यादृच्छिक नमूनाकरण” (Random Sampling) की मुख्य विशेषता क्या है?

    • अ) शोधकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रतिभागियों का चयन करता है।
    • ब) जनसंख्या के प्रत्येक सदस्य को नमूने में चुने जाने का समान और ज्ञात अवसर होता है।
    • स) नमूना गैर-प्रतिनिधि होता है।
    • द) केवल विशेष ज्ञान वाले व्यक्तियों का चयन किया जाता है।

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। यादृच्छिक नमूनाकरण (या संभाव्यता नमूनाकरण) में, जनसंख्या के प्रत्येक सदस्य के पास नमूने में चुने जाने का समान और ज्ञात अवसर होता है। यह सुनिश्चित करता है कि नमूना जनसंख्या का प्रतिनिधि हो और परिणामों को सामान्यीकृत किया जा सके। यह मात्रात्मक अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण विधि है। ‘अ’ सुविधा नमूनाकरण है, जो गैर-यादृच्छिक है। ‘स’ और ‘द’ यादृच्छिक नमूनाकरण के विपरीत हैं।

  18. प्रश्न 18: टालकॉट पार्सन्स के अनुसार, एक सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए किन चार कार्यात्मक आवश्यकताओं (AGIL Scheme) की आवश्यकता होती है?

    • अ) अनुकूलन, लक्ष्य प्राप्ति, एकीकरण, प्रतिरूप अनुरक्षण (Adaptation, Goal Attainment, Integration, Latency/Pattern Maintenance)
    • ब) वर्ग संघर्ष, क्रांति, अलगाव, साम्यवाद
    • स) धर्म, परिवार, शिक्षा, राज्य
    • द) तर्कसंगतता, परंपरा, करिश्मा, शक्ति

    सही उत्तर: अ)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘अ’ है। टालकॉट पार्सन्स ने अपनी AGIL योजना के माध्यम से किसी भी सामाजिक व्यवस्था के चार कार्यात्मक पूर्व-आवश्यकताओं की पहचान की: 1. A (Adaptation): पर्यावरण से पर्याप्त संसाधन प्राप्त करना। 2. G (Goal Attainment): समाज के लक्ष्यों को परिभाषित करना और प्राप्त करना। 3. I (Integration): समाज के विभिन्न भागों को एक सुसंगत पूरे के रूप में समन्वयित करना। 4. L (Latency/Pattern Maintenance): सांस्कृतिक पैटर्न को बनाए रखना और सदस्यों को प्रेरित करना। यह पार्सन्स के कार्यात्मकवादी सिद्धांत का एक केंद्रीय तत्व है। ‘ब’ मार्क्सवादी अवधारणाएं हैं। ‘स’ सामाजिक संस्थाएं हैं। ‘द’ वेबर के सत्ता के प्रकार हैं।

  19. प्रश्न 19: जब कोई व्यक्ति अपने जीवनकाल में अपनी सामाजिक स्थिति बदलता है, तो उसे क्या कहा जाता है?

    • अ) अंतर-पीढ़ीगत गतिशीलता (Inter-generational Mobility)
    • ब) अंतरा-पीढ़ीगत गतिशीलता (Intra-generational Mobility)
    • स) संरचनात्मक गतिशीलता (Structural Mobility)
    • द) ऊर्ध्वाधर गतिशीलता (Vertical Mobility)

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। अंतरा-पीढ़ीगत गतिशीलता (Intra-generational Mobility) एक व्यक्ति के अपने जीवनकाल के भीतर सामाजिक स्थिति में बदलाव को संदर्भित करती है (उदाहरण के लिए, एक क्लर्क से प्रबंधक बनना)। सामाजिक गतिशीलता सामाजिक स्तरीकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू है। ‘अ’ पीढ़ियों के बीच गतिशीलता है। ‘स’ व्यापक सामाजिक परिवर्तनों के कारण गतिशीलता है। ‘द’ केवल दिशा (ऊपर या नीचे) को दर्शाता है, जीवनकाल के संदर्भ को नहीं।

  20. प्रश्न 20: ‘छिपा हुआ पाठ्यक्रम’ (Hidden Curriculum) की अवधारणा का संबंध किससे है?

    • अ) स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले औपचारिक पाठ्यक्रम से।
    • ब) स्कूलों में अनौपचारिक रूप से सिखाए जाने वाले मूल्य, मानदंड और व्यवहार।
    • स) घर पर बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा।
    • द) व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम।

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। ‘छिपा हुआ पाठ्यक्रम’ (Hidden Curriculum) उन अनौपचारिक और अक्सर अनजाने में सिखाए जाने वाले मूल्यों, मानदंडों, दृष्टिकोणों और व्यवहारों को संदर्भित करता है जो स्कूल प्रणाली के माध्यम से बच्चों को प्रदान किए जाते हैं। इसमें आज्ञाकारिता, समय की पाबंदी, अधिकार का सम्मान आदि शामिल हो सकते हैं, जो अक्सर लिखित पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होते हैं। यह शिक्षा के समाजशास्त्र में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, विशेष रूप से संघर्ष सिद्धांतकारों द्वारा उपयोग की जाती है। ‘अ’ और ‘द’ औपचारिक शिक्षा के पहलू हैं। ‘स’ पारिवारिक समाजीकरण है।

  21. प्रश्न 21: ‘समाजशास्त्र में भावनाओं’ (Sociology of Emotions) के अध्ययन में निम्नलिखित में से कौन सी अवधारणा महत्वपूर्ण है?

    • अ) भावनात्मक कार्य (Emotional Labor)
    • ब) सांस्कृतिक लैग (Cultural Lag)
    • स) संचयी कारणता (Cumulative Causation)
    • द) विचलित व्यवहार (Deviant Behavior)

    सही उत्तर: अ)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘अ’ है। ‘भावनात्मक कार्य’ (Emotional Labor) समाजशास्त्र में भावनाओं के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जिसे आर्ली होचचाइल्ड ने विकसित किया था। यह उन स्थितियों को संदर्भित करता है जहाँ व्यक्तियों से अपनी भावनाओं को प्रबंधित करने और व्यक्त करने की अपेक्षा की जाती है ताकि एक संगठन या पेशे के लक्ष्यों को पूरा किया जा सके, जैसे कि ग्राहक सेवा में मुस्कुराना। आर्ली होचचाइल्ड की पुस्तक ‘द मैनेज्ड हार्ट’ (The Managed Heart) इस अवधारणा का आधार है। ‘ब’ ऑग्बर्न से संबंधित है। ‘स’ गुन्नार मर्डल से संबंधित है। ‘द’ दुर्खीम, मर्टन आदि से संबंधित है।

  22. प्रश्न 22: ‘डिजिटल विभाजन’ (Digital Divide) शब्द का क्या अर्थ है?

    • अ) इंटरनेट पर अत्यधिक समय बिताना।
    • ब) सामाजिक समूहों के बीच सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) तक पहुंच और उपयोग में असमानता।
    • स) डिजिटल मीडिया में नकली खबरें फैलाना।
    • द) केवल ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी।

    सही उत्तर: ब)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘ब’ है। ‘डिजिटल विभाजन’ (Digital Divide) सामाजिक समूहों, क्षेत्रों या देशों के बीच सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (विशेषकर इंटरनेट) तक पहुंच, उपयोग और लाभ प्राप्त करने में मौजूद असमानता को संदर्भित करता है। यह आय, शिक्षा, भूगोल और अन्य कारकों से प्रभावित हो सकता है। यह समकालीन समाजशास्त्र और संचार अध्ययन में एक महत्वपूर्ण सामाजिक समस्या है। ‘अ’ डिजिटल लत का एक पहलू है। ‘स’ गलत सूचना है। ‘द’ केवल एक आयाम है, पूर्ण अर्थ नहीं।

  23. प्रश्न 23: एंथनी गिडन्स द्वारा प्रतिपादित ‘संरचनाकरण सिद्धांत’ (Structuration Theory) का मुख्य जोर क्या है?

    • अ) सामाजिक संरचना व्यक्ति के कार्यों को पूरी तरह से निर्धारित करती है।
    • ब) व्यक्ति अपनी इच्छा से सामाजिक संरचना से स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं।
    • स) संरचना और एजेंसी (कर्ता) दोनों सामाजिक जीवन में एक दूसरे को परस्पर प्रभावित करते हैं और पुनरुत्पादित करते हैं।
    • द) केवल बड़े पैमाने की सामाजिक संरचनाओं का अध्ययन करना चाहिए।

    सही उत्तर: स)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘स’ है। एंथनी गिडन्स का संरचनाकरण सिद्धांत (Structuration Theory) इस विचार पर केंद्रित है कि सामाजिक संरचनाएं (नियम, संसाधन) और एजेंसी (मानवीय क्रियाएं) परस्पर संबंधित हैं। संरचनाएं मानव क्रियाओं को सक्षम और बाधित करती हैं, जबकि मानव क्रियाएं ही संरचनाओं को समय और स्थान पर पुनरुत्पादित करती हैं। गिडन्स की ‘द कॉन्स्टीट्यूशन ऑफ सोसाइटी’ (The Constitution of Society) इस सिद्धांत का प्रमुख कार्य है। ‘अ’ और ‘ब’ अतिसरलीकृत और एकतरफा दृष्टिकोण हैं। ‘द’ मैक्रो-समाजशास्त्र तक सीमित है।

  24. प्रश्न 24: मिशेल फूको (Michel Foucault) के अनुसार, शक्ति (Power) की प्रकृति कैसी है?

    • अ) यह केवल राज्य के पास केंद्रित होती है।
    • ब) यह मुख्य रूप से आर्थिक संसाधनों पर आधारित है।
    • स) यह विसरित, उत्पादक और ज्ञान से जुड़ी हुई है।
    • द) यह केवल दमनकारी है।

    सही उत्तर: स)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘स’ है। मिशेल फूको ने शक्ति के बारे में एक पारंपरिक दृष्टिकोण को चुनौती दी, जिसमें इसे केवल राज्य के पास केंद्रित और दमनकारी माना जाता था। उनके अनुसार, शक्ति विसरित है, यह हर जगह मौजूद है, संबंधों के जाल में फैली हुई है, और यह केवल दमनकारी नहीं बल्कि उत्पादक भी है, क्योंकि यह ज्ञान का उत्पादन करती है और विषयों को आकार देती है। फूको की ‘डिसिप्लिन एंड पनिश’ (Discipline and Punish) और ‘द हिस्ट्री ऑफ सेक्शुअलिटी’ (The History of Sexuality) में ये विचार मिलते हैं। ‘अ’, ‘ब’, और ‘द’ शक्ति के पारंपरिक या सीमित विचारों को दर्शाते हैं जिन्हें फूको ने चुनौती दी थी।

  25. प्रश्न 25: भारत में ‘हरित क्रांति’ (Green Revolution) के सामाजिक परिणामों में निम्नलिखित में से कौन सा एक शामिल नहीं है?

    • अ) क्षेत्रीय असमानताओं में वृद्धि।
    • ब) बड़े किसानों का सशक्तिकरण।
    • स) ग्रामीण गरीबी में कमी।
    • द) कृषि श्रमिकों का विस्थापन।

    सही उत्तर: स)

    विस्तृत व्याख्या: सही विकल्प ‘स’ है। जबकि हरित क्रांति ने कृषि उत्पादन में वृद्धि की और कुछ क्षेत्रों में खाद्यान्न आत्मनिर्भरता लाई, इसके कई नकारात्मक सामाजिक परिणाम भी हुए। इसमें क्षेत्रीय असमानताओं में वृद्धि (क्योंकि लाभ केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित थे), बड़े किसानों का सशक्तिकरण (जिन्हें नई तकनीकों का खर्च उठाना आसान था), और कृषि श्रमिकों का विस्थापन (यांत्रिकीकरण के कारण) शामिल है। ग्रामीण गरीबी में कमी एक सार्वभौमिक परिणाम नहीं था, बल्कि कुछ क्षेत्रों में इसने छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों की स्थिति को और खराब कर दिया। भारत में सामाजिक परिवर्तन और विकास के समाजशास्त्र में हरित क्रांति का व्यापक अध्ययन किया गया है। ‘अ’, ‘ब’, और ‘द’ हरित क्रांति के सामान्यतः स्वीकृत सामाजिक परिणाम हैं।

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