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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

प्रिय उम्मीदवारों, समाजशास्त्र की जटिल दुनिया में आपका स्वागत है! यह दैनिक अभ्यास सेट आपकी वैचारिक समझ और विश्लेषणात्मक कौशल को चुनौती देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आज के क्विज़ में, हम क्लासिकल विचारों से लेकर समकालीन सामाजिक मुद्दों तक, समाजशास्त्र के विभिन्न आयामों का पता लगाएंगे। प्रत्येक प्रश्न आपको गहन चिंतन और महत्वपूर्ण विश्लेषण के लिए प्रेरित करेगा। अपनी तैयारी का परीक्षण करें और देखें कि आप इन बौद्धिक चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं! शुभकामनाएँ!


  1. एमिल दुर्खीम के अनुसार, समाज में अत्यधिक विनियमन (over-regulation) के परिणामस्वरूप होने वाली आत्महत्या का प्रकार क्या है जहाँ व्यक्ति को समाज द्वारा अत्यधिक एकीकृत महसूस कराया जाता है?

    • A) अनामियाई आत्महत्या (Anomic suicide)
    • B) अहंवादी आत्महत्या (Egoistic suicide)
    • C) परोपकारी आत्महत्या (Altruistic suicide)
    • D) भाग्यवादी आत्महत्या (Fatalistic suicide)

    सही उत्तर: D) भाग्यवादी आत्महत्या (Fatalistic suicide)

    विस्तृत व्याख्या: भाग्यवादी आत्महत्या (Fatalistic suicide) एमिल दुर्खीम द्वारा वर्णित आत्महत्या का एक प्रकार है, जो समाज में अत्यधिक विनियमन (over-regulation) या दमनकारी परिस्थितियों के कारण होती है, जहाँ व्यक्ति को लगता है कि उसका कोई भविष्य नहीं है और उसके जुनून का अत्यधिक दमन किया जाता है। इसका उल्लेख उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘Le Suicide’ (1897) में किया है। अनामियाई आत्महत्या (Anomic suicide) सामाजिक मानदंडों के टूटने या अनुपस्थिति के कारण होती है। अहंवादी आत्महत्या (Egoistic suicide) तब होती है जब व्यक्ति का सामाजिक एकीकरण बहुत कम होता है। परोपकारी आत्महत्या (Altruistic suicide) अत्यधिक सामाजिक एकीकरण के कारण होती है, जहाँ व्यक्ति समाज के लिए खुद को बलिदान कर देता है।

  2. सामाजिक स्तरीकरण (Social stratification) के किस स्वरूप में व्यक्ति की स्थिति जन्म से निर्धारित होती है और जीवन भर अपरिवर्तनीय रहती है?

    • A) वर्ग (Class)
    • B) जाति (Caste)
    • C) जागीर (Estate)
    • D) पदवी (Status)

    सही उत्तर: B) जाति (Caste)

    विस्तृत व्याख्या: जाति (Caste) सामाजिक स्तरीकरण का एक बंद स्वरूप है जहाँ व्यक्ति की स्थिति जन्म से निर्धारित होती है और आजीवन स्थिर रहती है, वंशानुक्रम पर आधारित होती है और व्यवसायों के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी होती है। यह प्रणाली भारत में ऐतिहासिक रूप से प्रबल रही है। वर्ग (Class) एक अधिक खुला स्तरीकरण प्रणाली है जो आर्थिक कारकों और व्यक्तिगत उपलब्धि पर आधारित है, जहाँ गतिशीलता संभव है। जागीर (Estate) एक सामंती प्रणाली थी जहाँ भूमि के स्वामित्व पर आधारित पदानुक्रम था। पदवी (Status) सामाजिक सम्मान या प्रतिष्ठा से संबंधित है जो विभिन्न प्रणालियों में मौजूद हो सकती है।

  3. आधुनिक भारतीय संदर्भ में, एम.एन. श्रीनिवास द्वारा “संस्कृतिकरण” (Sanskritization) की अवधारणा का उपयोग मुख्य रूप से क्या समझाने के लिए किया गया है?

    • A) निम्न जातियों द्वारा पश्चिमी जीवन शैली को अपनाना।
    • B) उच्च जातियों द्वारा अपनी परंपराओं को छोड़ना।
    • C) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों की जीवन शैली, रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास।
    • D) आदिवासी समुदायों का शहरी जीवन में एकीकरण।

    सही उत्तर: C) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों की जीवन शैली, रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास।

    विस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण (Sanskritization) एम.एन. श्रीनिवास द्वारा गढ़ी गई एक अवधारणा है जो उस प्रक्रिया को संदर्भित करती है जिसके द्वारा एक ‘निम्न’ जाति, जनजाति या अन्य समूह अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने के लिए एक ‘उच्च’ या ‘द्विज’ जाति के अनुष्ठानों, रीति-रिवाजों, विचारधाराओं और जीवन शैली को अपनाता है। यह सामाजिक गतिशीलता के ऊर्ध्वगामी रूप को दर्शाता है। यह अवधारणा उनकी पुस्तक ‘Religion and Society among the Coorgs of South India’ (1952) में सामने आई। अन्य विकल्प इस अवधारणा के मूल अर्थ को गलत बताते हैं।

  4. गुणात्मक अनुसंधान विधि (Qualitative research method) का एक प्रमुख उद्देश्य क्या है?

    • A) चर के बीच कारण-प्रभाव संबंध स्थापित करना।
    • B) बड़े पैमाने पर डेटा का सांख्यिकीय विश्लेषण करना।
    • C) सामाजिक घटनाओं की गहराई से समझ और व्याख्या प्राप्त करना।
    • D) सामान्यीकरण योग्य मात्रात्मक डेटा एकत्र करना।

    सही उत्तर: C) सामाजिक घटनाओं की गहराई से समझ और व्याख्या प्राप्त करना।

    विस्तृत व्याख्या: गुणात्मक अनुसंधान विधि (Qualitative research method) का प्राथमिक उद्देश्य सामाजिक घटनाओं, अनुभवों और व्यवहारों की गहराई से समझ और व्याख्या प्राप्त करना है। यह अक्सर छोटे नमूना आकारों, गहन साक्षात्कार, प्रतिभागी अवलोकन और केस स्टडी जैसे तरीकों का उपयोग करता है। अन्य विकल्प मात्रात्मक अनुसंधान के उद्देश्यों से अधिक संबंधित हैं, जो सांख्यिकीय विश्लेषण, सामान्यीकरण और कारण-प्रभाव संबंधों पर ध्यान केंद्रित करता है।

  5. मैक्स वेबर के अनुसार, तर्कसंगत-कानूनी प्राधिकार (Rational-legal authority) का सबसे प्रमुख उदाहरण क्या है?

    • A) एक करिश्माई धार्मिक नेता।
    • B) एक पारंपरिक राजा या वंशानुगत शासक।
    • C) आधुनिक नौकरशाही प्रणाली।
    • D) एक क्रांतिकारी आंदोलन का नेता।

    सही उत्तर: C) आधुनिक नौकरशाही प्रणाली।

    विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने तीन प्रकार के वैध प्राधिकार (legitimate authority) की पहचान की: पारंपरिक, करिश्माई और तर्कसंगत-कानूनी। तर्कसंगत-कानूनी प्राधिकार (Rational-legal authority) कानून और नियमों पर आधारित होता है, और आधुनिक नौकरशाही (modern bureaucracy) इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें व्यक्तियों को उनकी स्थिति के बजाय नियमों के आधार पर अधिकार प्राप्त होता है। एक करिश्माई धार्मिक नेता करिश्माई प्राधिकार का उदाहरण है, जबकि एक पारंपरिक राजा पारंपरिक प्राधिकार का उदाहरण है।

  6. पुरुषत्व के वे व्यवहार और अपेक्षाएँ जो अक्सर पुरुषों और समाज के लिए हानिकारक होती हैं, जैसे भावनात्मक दमन, प्रभुत्व की आवश्यकता और हिंसा का महिमामंडन, उन्हें समाजशास्त्र में किस अवधारणा से संदर्भित किया जा सकता है?

    • A) फेमिनिन मास्किुलिनिटी (Feminine Masculinity)
    • B) हेगेमोनिक मास्किुलिनिटी (Hegemonic Masculinity)
    • C) टॉक्सिक मास्किुलिनिटी (Toxic Masculinity)
    • D) लिबरल मास्किुलिनिटी (Liberal Masculinity)

    सही उत्तर: C) टॉक्सिक मास्किुलिनिटी (Toxic Masculinity)

    विस्तृत व्याख्या: टॉक्सिक मास्किुलिनिटी (Toxic Masculinity) पुरुषों में उन सांस्कृतिक रूप से परिभाषित व्यवहारों और अपेक्षाओं को संदर्भित करती है जो हानिकारक और दमनकारी हो सकते हैं, जैसे कि भावनात्मक दमन, आक्रामकता का प्रदर्शन, और प्रभुत्व या नियंत्रण की आवश्यकता। यह अवधारणा लैंगिक भूमिकाओं के नकारात्मक पहलुओं पर प्रकाश डालती है। हेगेमोनिक मास्किुलिनिटी (Hegemonic Masculinity) पुरुषों की प्रमुख स्थिति को बनाए रखने वाली प्रथाओं को संदर्भित करती है, जबकि टॉक्सिक मास्किुलिनिटी इसके विशेष रूप से हानिकारक पहलुओं पर केंद्रित है। अन्य विकल्प सटीक नहीं हैं।

  7. स्वास्थ्य परिणामों पर सामाजिक नीतियों, आर्थिक असमानताओं और भौगोलिक कारकों के प्रभाव का अध्ययन समाजशास्त्र के किस विशेष क्षेत्र के अंतर्गत आता है?

    • A) पर्यावरण समाजशास्त्र (Environmental Sociology)
    • B) चिकित्सा समाजशास्त्र (Medical Sociology)
    • C) शहरी समाजशास्त्र (Urban Sociology)
    • D) जनसंख्या समाजशास्त्र (Demography)

    सही उत्तर: B) चिकित्सा समाजशास्त्र (Medical Sociology)

    विस्तृत व्याख्या: चिकित्सा समाजशास्त्र (Medical Sociology) स्वास्थ्य, बीमारी, स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा प्रथाओं पर सामाजिक कारकों के प्रभाव का अध्ययन करता है। इसमें सामाजिक असमानताएँ, नीतियाँ और भौगोलिक कारक कैसे स्वास्थ्य परिणामों को आकार देते हैं, यह समझना शामिल है। यह क्षेत्र स्वास्थ्य को केवल जैविक घटना के बजाय एक सामाजिक निर्माण के रूप में देखता है। पर्यावरण समाजशास्त्र प्राकृतिक पर्यावरण और मानवीय अंतःक्रिया पर केंद्रित है। शहरी समाजशास्त्र शहरी जीवन का अध्ययन करता है, और जनसंख्या समाजशास्त्र जनसंख्या के आकार, संरचना और वितरण का अध्ययन करता है।

  8. समाज में मानदंडों और मूल्यों के टूटने या अनुपस्थिति की स्थिति, जिससे व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है, दुर्खीम द्वारा किस अवधारणा से वर्णित की गई है?

    • A) अलगाव (Alienation)
    • B) अनामिया (Anomie)
    • C) असमानता (Inequality)
    • D) विचलन (Deviance)

    सही उत्तर: B) अनामिया (Anomie)

    विस्तृत व्याख्या: अनामिया (Anomie) एमिल दुर्खीम द्वारा गढ़ी गई एक अवधारणा है जो सामाजिक मानदंडों और नैतिक दिशानिर्देशों के टूटने या अनुपस्थिति की स्थिति को संदर्भित करती है, जिससे व्यक्ति भ्रमित, दिशाहीन और असुरक्षित महसूस करता है। यह अक्सर तेजी से सामाजिक परिवर्तन या संकट के समय उत्पन्न होती है। अलगाव (Alienation) मार्क्स द्वारा पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिकों की स्थिति का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। असमानता (Inequality) संसाधनों और अवसरों के असमान वितरण को संदर्भित करती है। विचलन (Deviance) सामाजिक मानदंडों से हटकर व्यवहार को दर्शाता है।

  9. भारत में जनजातीय समुदायों के एकीकरण के संबंध में, एल्विन (Verrier Elwin) द्वारा प्रतिपादित दृष्टिकोण क्या था?

    • A) उन्हें मुख्यधारा में पूरी तरह से आत्मसात करना।
    • B) उन्हें उनकी मूल संस्कृति और जीवन शैली में संरक्षित करना (राष्ट्रीय उद्यान दृष्टिकोण)।
    • C) उन्हें आधुनिकीकरण के पश्चिमी मॉडल को अपनाना सिखाना।
    • D) उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणी में शामिल करना।

    सही उत्तर: B) उन्हें उनकी मूल संस्कृति और जीवन शैली में संरक्षित करना (राष्ट्रीय उद्यान दृष्टिकोण)।

    विस्तृत व्याख्या: वेरियर एल्विन (Verrier Elwin) ने भारत में जनजातीय समुदायों के लिए “राष्ट्रीय उद्यान दृष्टिकोण” (National Park Approach) का समर्थन किया। इस दृष्टिकोण के अनुसार, जनजातियों को बाहरी दुनिया के हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए अलग-थलग और संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि वे अपनी अनूठी संस्कृति और जीवन शैली को बनाए रख सकें। जी.एस. घुर्ये जैसे अन्य समाजशास्त्रियों ने उन्हें हिंदू समाज के “पिछड़े हिंदू” के रूप में आत्मसात करने का तर्क दिया।

  10. कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी समाज में वह प्रक्रिया क्या है जहाँ श्रमिक अपने श्रम के उत्पाद, अपनी श्रम प्रक्रिया, अपनी मानवीय प्रजाति-सार और अन्य मनुष्यों से अलग-थलग हो जाते हैं?

    • A) मानकीकरण (Standardization)
    • B) वस्तुकरण (Commodification)
    • C) अलगाव (Alienation)
    • D) शोषण (Exploitation)

    सही उत्तर: C) अलगाव (Alienation)

    विस्तृत व्याख्या: अलगाव (Alienation) कार्ल मार्क्स की केंद्रीय अवधारणाओं में से एक है, जो पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में श्रमिकों के विभिन्न प्रकार के वियोग को संदर्भित करती है: उत्पाद से, उत्पादन की प्रक्रिया से, अपने स्वयं के प्रजाति-सार से (उनकी रचनात्मक क्षमता से), और अन्य मनुष्यों से। मार्क्स ने इसका विस्तृत वर्णन अपनी ‘1844 Manuscripts’ में किया। वस्तुकरण (Commodification) वस्तुओं और सेवाओं को विनिमय मूल्य वाली वस्तुओं में बदलने की प्रक्रिया है। शोषण (Exploitation) मजदूरों को उनके श्रम का उचित मूल्य न देना है।

  11. संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक परिप्रेक्ष्य (Structural-functional perspective) के अनुसार, परिवार का प्राथमिक कार्य क्या है?

    • A) सामाजिक असमानता को बनाए रखना।
    • B) सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देना।
    • C) समाज के सदस्यों का समाजीकरण और भावनात्मक समर्थन प्रदान करना।
    • D) वर्ग संघर्ष को तीव्र करना।

    सही उत्तर: C) समाज के सदस्यों का समाजीकरण और भावनात्मक समर्थन प्रदान करना।

    विस्तृत व्याख्या: संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक परिप्रेक्ष्य (Structural-functional perspective) परिवार को समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था मानता है जो सामाजिक व्यवस्था और स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्य करती है। प्राथमिक कार्यों में समाजीकरण (बच्चों को समाज के मानदंडों और मूल्यों को सिखाना), भावनात्मक समर्थन, आर्थिक सहयोग और प्रजनन शामिल हैं। अन्य विकल्प संघर्ष सिद्धांत (Conflict theory) या सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांतों से अधिक संबंधित हैं।

  12. किसी समाज के साझा विश्वासों, मूल्यों, मानदंडों, भाषाओं और भौतिक कलाकृतियों को सामूहिक रूप से क्या कहा जाता है?

    • A) सामाजिक संरचना (Social Structure)
    • B) संस्कृति (Culture)
    • C) समाजीकरण (Socialization)
    • D) समूह (Group)

    सही उत्तर: B) संस्कृति (Culture)

    विस्तृत व्याख्या: संस्कृति (Culture) किसी समाज के सदस्यों द्वारा साझा किए गए जीवन के तरीके को संदर्भित करती है, जिसमें उनके विश्वास, मूल्य, मानदंड, भाषा, रीति-रिवाज, व्यवहार और भौतिक वस्तुएं शामिल हैं। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संचारित होती है और सामाजिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सामाजिक संरचना (Social Structure) समाज के भीतर सामाजिक संबंधों के व्यवस्थित पैटर्न को संदर्भित करती है। समाजीकरण (Socialization) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति समाज के मानदंडों और मूल्यों को सीखते हैं।

  13. टैल्कॉट पार्सन्स द्वारा प्रतिपादित सामाजिक क्रिया के चार प्रकार्यात्मक अनिवार्यताएँ (functional imperatives) क्या हैं, जिन्हें AGIL मॉडल के रूप में जाना जाता है?

    • A) अनुकूलन (Adaptation), लक्ष्य प्राप्ति (Goal-attainment), एकीकरण (Integration), विलंबता (Latency)।
    • B) आक्रामकता (Aggression), जनरेशन (Generation), नवाचार (Innovation), लर्निंग (Learning)।
    • C) विश्लेषण (Analysis), गणना (Calculation), प्रेरणा (Motivation), नेतृत्व (Leadership)।
    • D) सहयोग (Cooperation), संघर्ष (Conflict), अनुकूलन (Adaptation), विकास (Development)।

    सही उत्तर: A) अनुकूलन (Adaptation), लक्ष्य प्राप्ति (Goal-attainment), एकीकरण (Integration), विलंबता (Latency)।

    विस्तृत व्याख्या: टैल्कॉट पार्सन्स (Talcott Parsons) ने सामाजिक व्यवस्था के लिए AGIL मॉडल प्रस्तुत किया, जो किसी भी सामाजिक प्रणाली के जीवित रहने के लिए चार प्रकार्यात्मक अनिवार्यताएँ बताता है: अनुकूलन (Adaptation – पर्यावरण से संसाधनों को प्राप्त करना), लक्ष्य प्राप्ति (Goal-attainment – लक्ष्यों को परिभाषित करना और प्राप्त करना), एकीकरण (Integration – आंतरिक सामंजस्य बनाए रखना), और विलंबता (Latency – सांस्कृतिक पैटर्न को बनाए रखना और प्रेरणा को प्रबंधित करना)। यह मॉडल उनके संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक सिद्धांत का एक केंद्रीय हिस्सा है।

  14. समाजशास्त्र के दृष्टिकोण से, यौन शिक्षा (Sex Education) को केवल जैविक तथ्यों तक सीमित रखने के बजाय उसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक आयामों को शामिल करने की वकालत क्यों की जाती है?

    • A) क्योंकि केवल जैविक ज्ञान पर्याप्त नहीं है।
    • B) क्योंकि यौन व्यवहार गहराई से सामाजिक मानदंडों, मूल्यों और शक्ति संबंधों से प्रभावित होता है।
    • C) क्योंकि यह शिक्षकों के लिए अधिक सामग्री प्रदान करता है।
    • D) क्योंकि यह छात्रों को अधिक उन्नत वैज्ञानिक ज्ञान प्रदान करता है।

    सही उत्तर: B) क्योंकि यौन व्यवहार गहराई से सामाजिक मानदंडों, मूल्यों और शक्ति संबंधों से प्रभावित होता है।

    विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्र मानता है कि यौन व्यवहार और शिक्षा केवल जैविक प्रक्रियाएँ नहीं हैं, बल्कि वे गहराई से सामाजिक मानदंडों, सांस्कृतिक मूल्यों, लिंग भूमिकाओं, शक्ति संबंधों और संस्थागत संरचनाओं से प्रभावित होते हैं। एक व्यापक यौन शिक्षा इन सामाजिक आयामों को शामिल करती है ताकि व्यक्ति स्वस्थ संबंध, सहमति और लैंगिक समानता को समझ सकें, जैसा कि “Fixing America’s Lousy Sex Ed—With Sociology” जैसे लेखों में चर्चा की गई है।

  15. ग्रामीण समाजशास्त्र में ‘ग्रामीण-शहरी सातत्य’ (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

    • A) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्पष्ट और अपरिवर्तनीय विभाजन।
    • B) ग्रामीण और शहरी जीवन के तरीके अलग-अलग होने के बजाय एक स्पेक्ट्रम पर मौजूद हैं, जहाँ एक से दूसरे में क्रमिक संक्रमण होता है।
    • C) शहरीकरण की प्रक्रिया जो ग्रामीण क्षेत्रों को पूरी तरह से शहरों में बदल देती है।
    • D) ग्रामीण क्षेत्रों पर शहरी प्रभाव का पूर्ण अभाव।

    सही उत्तर: B) ग्रामीण और शहरी जीवन के तरीके अलग-अलग होने के बजाय एक स्पेक्ट्रम पर मौजूद हैं, जहाँ एक से दूसरे में क्रमिक संक्रमण होता है।

    विस्तृत व्याख्या: ग्रामीण-शहरी सातत्य (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा यह मानती है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र कठोर रूप से अलग नहीं हैं, बल्कि उनके बीच एक क्रमिक परिवर्तन या स्पेक्ट्रम मौजूद है। जीवन के तरीके, सामाजिक संरचनाएं और सांस्कृतिक पैटर्न पूरी तरह से ग्रामीण से पूरी तरह से शहरी तक एक निरंतरता पर स्थित होते हैं, जिसमें अर्ध-शहरी या उपनगरीय क्षेत्र मध्यवर्ती बिंदु होते हैं। रॉबर्ट रेडफ़ील्ड (Robert Redfield) ने ‘लोक-शहरी सातत्य’ (Folk-Urban Continuum) की बात की थी।

  16. जी.एच. मीड (G.H. Mead) के अनुसार, आत्म (Self) के विकास में ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) की अवधारणा क्या दर्शाती है?

    • A) व्यक्ति की मां का दृष्टिकोण।
    • B) व्यक्ति के सबसे अच्छे दोस्त का दृष्टिकोण।
    • C) पूरे समुदाय के संगठित दृष्टिकोण और अपेक्षाएँ, जिन्हें व्यक्ति आंतरिक बनाता है।
    • D) व्यक्ति के स्वयं के व्यक्तिगत विचार और भावनाएँ।

    सही उत्तर: C) पूरे समुदाय के संगठित दृष्टिकोण और अपेक्षाएँ, जिन्हें व्यक्ति आंतरिक बनाता है।

    विस्तृत व्याख्या: जी.एच. मीड (G.H. Mead) के अनुसार, ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) व्यक्ति के आत्म (Self) के विकास में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह पूरे समुदाय या समूह के संगठित दृष्टिकोणों, मानदंडों और अपेक्षाओं को संदर्भित करता है जिन्हें व्यक्ति आंतरिक बनाता है। यह व्यक्ति को यह समझने में मदद करता है कि समाज उनसे क्या अपेक्षा करता है और तदनुसार व्यवहार करने में सक्षम बनाता है। यह समाजीकरण के एक उच्च स्तर का प्रतिनिधित्व करता है।

  17. भारतीय समाज में “आधुनिकीकरण” (Modernization) की प्रक्रिया अक्सर “पश्चिमीकरण” (Westernization) से भिन्न क्यों मानी जाती है, विशेषकर एम.एन. श्रीनिवास के संदर्भ में?

    • A) क्योंकि आधुनिकीकरण केवल आर्थिक विकास को संदर्भित करता है।
    • B) क्योंकि पश्चिमीकरण में केवल पोशाक और भोजन में बदलाव शामिल है।
    • C) क्योंकि आधुनिकीकरण में तर्कसंगतता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को अपनाना शामिल है, जो पश्चिमी मूल्यों से अलग हो सकता है।
    • D) क्योंकि पश्चिमीकरण केवल उच्च जातियों द्वारा अपनाया जाता है।

    सही उत्तर: C) क्योंकि आधुनिकीकरण में तर्कसंगतता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को अपनाना शामिल है, जो पश्चिमी मूल्यों से अलग हो सकता है।

    विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas) ने आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण के बीच अंतर किया। पश्चिमीकरण विशिष्ट रूप से पश्चिमी सभ्यता की सांस्कृतिक और संस्थागत विशेषताओं को अपनाना है, जबकि आधुनिकीकरण में तर्कसंगतता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, और प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को शामिल किया जाता है, जो जरूरी नहीं कि पश्चिमीकरण के समान हों। भारत में, आधुनिकीकरण अक्सर कुछ पश्चिमी मूल्यों को अपनाता है लेकिन अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखता है।

  18. “हम एक बेहतर शौचालय बना सकते हैं। लेकिन क्या लोग इसका इस्तेमाल करेंगे?” जैसे प्रश्न समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से किस बात पर प्रकाश डालते हैं?

    • A) केवल प्रौद्योगिकी की कमी।
    • B) बुनियादी ढांचे के विकास का महत्व।
    • C) सामाजिक व्यवहार, सांस्कृतिक मानदंड और स्वच्छता संबंधी आदतों के महत्व पर।
    • D) सरकारी नीतियों की प्रभावशीलता पर।

    सही उत्तर: C) सामाजिक व्यवहार, सांस्कृतिक मानदंड और स्वच्छता संबंधी आदतों के महत्व पर।

    विस्तृत व्याख्या: यह प्रश्न इस बात पर प्रकाश डालता है कि सामाजिक व्यवहार, सांस्कृतिक मानदंड, आदतें और स्वास्थ्य संबंधी धारणाएं नई तकनीकों (जैसे बेहतर शौचालय) को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। केवल भौतिक संरचना प्रदान करना पर्याप्त नहीं है; लोगों को इसे अपनाने और उपयोग करने के लिए प्रेरित करने के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं को समझना और दूर करना आवश्यक है। यह समाजशास्त्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य और व्यवहार परिवर्तन के पहलुओं से संबंधित है।

  19. वह प्रक्रिया जिसके द्वारा व्यक्ति जीवन भर समाज के मानदंडों, मूल्यों, विश्वासों और व्यवहारों को सीखता और आंतरिक बनाता है, उसे क्या कहा जाता है?

    • A) आत्मसातकरण (Assimilation)
    • B) समाजीकरण (Socialization)
    • C) अनुकूलन (Adaptation)
    • D) सांस्कृतिककरण (Enculturation)

    सही उत्तर: B) समाजीकरण (Socialization)

    विस्तृत व्याख्या: समाजीकरण (Socialization) वह आजीवन प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति समाज के मानदंडों, मूल्यों, विश्वासों और व्यवहारों को सीखता है और आंतरिक बनाता है, जिससे वे समाज के कार्यात्मक सदस्य बन सकें। इसमें परिवार, स्कूल, सहकर्मी समूह और मीडिया जैसे एजेंट शामिल होते हैं। आत्मसातकरण (Assimilation) एक अल्पसंख्यक समूह द्वारा प्रमुख संस्कृति को पूरी तरह से अपनाना है। अनुकूलन (Adaptation) पर्यावरण के अनुरूप ढलना है। सांस्कृतिककरण (Enculturation) किसी संस्कृति के भीतर मानदंडों और मूल्यों को सीखने पर अधिक केंद्रित है, जबकि समाजीकरण एक व्यापक सामाजिक संदर्भ को दर्शाता है।

  20. पियरे बॉर्डियू (Pierre Bourdieu) द्वारा प्रतिपादित ‘हैबिटस’ (Habitus) की अवधारणा क्या है?

    • A) व्यक्ति की आनुवंशिक प्रवृत्तियाँ।
    • B) व्यक्ति की सचेत आदतें और व्यवहार।
    • C) सामाजिक रूप से प्राप्त स्वभाव, धारणाओं की प्रणालियाँ, विचार और क्रियाएँ जो किसी व्यक्ति को दुनिया में उन्मुख करती हैं।
    • D) एक समूह द्वारा साझा किए गए भौतिक संसाधन।

    सही उत्तर: C) सामाजिक रूप से प्राप्त स्वभाव, धारणाओं की प्रणालियाँ, विचार और क्रियाएँ जो किसी व्यक्ति को दुनिया में उन्मुख करती हैं।

    विस्तृत व्याख्या: पियरे बॉर्डियू (Pierre Bourdieu) के लिए, हैबिटस (Habitus) सामाजिक रूप से प्राप्त स्वभावों की एक प्रणाली है—सोचने, महसूस करने और कार्य करने के तरीके—जो एक व्यक्ति के सामाजिक अनुभवों से आकार लेते हैं और उन्हें दुनिया में उन्मुख करते हैं। यह व्यक्तिपरक और उद्देश्यपूर्ण को जोड़ता है और किसी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति और सांस्कृतिक पूंजी से निकटता से जुड़ा हुआ है। यह व्यक्ति की धारणाओं, मूल्यांकन और कार्यों को प्रभावित करता है।

  21. एमिल दुर्खीम के अनुसार, धर्म का प्राथमिक सामाजिक कार्य क्या है?

    • A) व्यक्तियों के बीच संघर्ष को बढ़ावा देना।
    • B) सामाजिक स्तरीकरण को बनाए रखना।
    • C) सामाजिक एकजुटता और सामूहिकता की भावना को मजबूत करना।
    • D) वैज्ञानिक ज्ञान को प्रतिस्थापित करना।

    सही उत्तर: C) सामाजिक एकजुटता और सामूहिकता की भावना को मजबूत करना।

    विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम (Emile Durkheim) के अनुसार, धर्म का प्राथमिक सामाजिक कार्य सामाजिक एकजुटता और सामूहिकता की भावना को मजबूत करना है। अनुष्ठानों और प्रतीकों के माध्यम से, धर्म लोगों को एक साथ लाता है, एक साझा नैतिक समुदाय बनाता है और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने में मदद करता है। उन्होंने धर्म को समाज का ही एक प्रतिबिंब माना।

  22. सामाजिक अनुसंधान में प्रतिभागियों की सूचित सहमति (Informed Consent) का क्या महत्व है?

    • A) यह सुनिश्चित करता है कि शोधकर्ता कानूनी रूप से सुरक्षित हैं।
    • B) यह प्रतिभागियों को अनुसंधान में भाग लेने के लिए मजबूर करता है।
    • C) यह सुनिश्चित करता है कि प्रतिभागियों को अनुसंधान के उद्देश्य, प्रक्रियाओं और संभावित जोखिमों के बारे में पूरी जानकारी हो और वे स्वेच्छा से भाग लेने के लिए सहमत हों।
    • D) यह केवल मात्रात्मक अनुसंधान के लिए आवश्यक है।

    सही उत्तर: C) यह सुनिश्चित करता है कि प्रतिभागियों को अनुसंधान के उद्देश्य, प्रक्रियाओं और संभावित जोखिमों के बारे में पूरी जानकारी हो और वे स्वेच्छा से भाग लेने के लिए सहमत हों।

    विस्तृत व्याख्या: सामाजिक अनुसंधान में सूचित सहमति (Informed Consent) एक महत्वपूर्ण नैतिक सिद्धांत है। इसका अर्थ है कि प्रतिभागियों को अनुसंधान के उद्देश्य, इसमें उनकी भागीदारी की प्रकृति, गोपनीयता और गोपनीयता के उपाय, और किसी भी संभावित जोखिम या लाभ के बारे में पूरी तरह से सूचित किया जाना चाहिए, और उन्हें स्वेच्छा से भाग लेने के लिए सहमत होना चाहिए। यह प्रतिभागियों के अधिकारों और स्वायत्तता की रक्षा करता है।

  23. शहरी समाजशास्त्र में ‘गेमिनशाफ़्ट’ (Gemeinschaft) और ‘गेज़ेलशाफ़्ट’ (Gesellschaft) की अवधारणाएँ किसने प्रस्तुत कीं?

    • A) मैक्स वेबर (Max Weber)
    • B) जॉर्ज सिम्मेल (Georg Simmel)
    • C) फर्डिनेंड टोनीज़ (Ferdinand Tönnies)
    • D) लुईस विर्थ (Louis Wirth)

    सही उत्तर: C) फर्डिनेंड टोनीज़ (Ferdinand Tönnies)

    विस्तृत व्याख्या: फर्डिनेंड टोनीज़ (Ferdinand Tönnies) ने ‘गेमिनशाफ़्ट’ (Gemeinschaft) और ‘गेज़ेलशाफ़्ट’ (Gesellschaft) की अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं। गेमिनशाफ़्ट एक समुदाय को संदर्भित करता है जो व्यक्तिगत, घनिष्ठ और पारंपरिक संबंधों पर आधारित होता है, जैसा कि ग्रामीण समाजों में पाया जाता है। गेज़ेलशाफ़्ट एक समाज को संदर्भित करता है जो अवैयक्तिक, तर्कसंगत और औपचारिक संबंधों पर आधारित होता है, जैसा कि शहरी समाजों में पाया जाता है।

  24. रॉबर्ट मर्टन (Robert Merton) द्वारा प्रतिपादित ‘आत्म-पूर्ति भविष्यवाणी’ (Self-Fulfilling Prophecy) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

    • A) भविष्य की घटनाओं का सटीक अनुमान लगाने की क्षमता।
    • B) एक गलत धारणा जो, एक बार परिभाषित होने के बाद, एक ऐसे व्यवहार को उकसाती है जो मूल रूप से गलत स्थिति को सच कर देता है।
    • C) किसी व्यक्ति के स्वयं के गुणों का अतिरंजित मूल्यांकन।
    • D) भविष्यवाणी का वैज्ञानिक सत्यापन।

    सही उत्तर: B) एक गलत धारणा जो, एक बार परिभाषित होने के बाद, एक ऐसे व्यवहार को उकसाती है जो मूल रूप से गलत स्थिति को सच कर देता है।

    विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट मर्टन (Robert Merton) की ‘आत्म-पूर्ति भविष्यवाणी’ (Self-Fulfilling Prophecy) की अवधारणा यह बताती है कि एक गलत धारणा या भविष्यवाणी, एक बार जब उसे सच मान लिया जाता है, तो वह ऐसे व्यवहारों को जन्म देती है जो अंततः मूल रूप से गलत स्थिति को सत्य बना देते हैं। उदाहरण के लिए, यदि बैंक दिवालिया होने की अफवाह फैलती है, तो लोग अपना पैसा निकालने लगते हैं, जिससे बैंक वास्तव में दिवालिया हो सकता है।

  25. डिजिटल इंडिया पहल के संदर्भ में, डिजिटल विभाजन (Digital Divide) भारतीय समाज में किस प्रकार की असमानता को उजागर करता है?

    • A) केवल शहरी और ग्रामीण आबादी के बीच अंतर।
    • B) डिजिटल प्रौद्योगिकी तक पहुंच, उपयोग और लाभों में सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जाति, लिंग और भौगोलिक स्थान के आधार पर असमानताएँ।
    • C) केवल इंटरनेट की उपलब्धता में अंतर।
    • D) स्मार्टफोन के स्वामित्व में अंतर।

    सही उत्तर: B) डिजिटल प्रौद्योगिकी तक पहुंच, उपयोग और लाभों में सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जाति, लिंग और भौगोलिक स्थान के आधार पर असमानताएँ।

    विस्तृत व्याख्या: डिजिटल विभाजन (Digital Divide) डिजिटल प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से इंटरनेट और संबंधित सेवाओं तक पहुंच, उपयोग और लाभों में मौजूदा सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को संदर्भित करता है। भारतीय संदर्भ में, यह असमानता जाति, वर्ग, लिंग, शिक्षा और भौगोलिक स्थान (ग्रामीण बनाम शहरी) जैसे कारकों से प्रभावित होती है, जिससे कुछ समूहों को डिजिटल क्रांति के लाभों से वंचित होना पड़ता है। यह मौजूदा सामाजिक स्तरीकरण को बढ़ा सकता है या नए रूप ले सकता है।

  26. समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘प्राथमिक डेटा’ (Primary Data) का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है?

    • A) जनगणना के आंकड़े।
    • B) एक शोधकर्ता द्वारा स्वयं एकत्र किए गए साक्षात्कार या सर्वेक्षण प्रतिक्रियाएं।
    • C) सरकारी रिपोर्टें।
    • D) प्रकाशित पुस्तकें और लेख।

    सही उत्तर: B) एक शोधकर्ता द्वारा स्वयं एकत्र किए गए साक्षात्कार या सर्वेक्षण प्रतिक्रियाएं।

    विस्तृत व्याख्या: प्राथमिक डेटा (Primary Data) वह डेटा होता है जिसे शोधकर्ता द्वारा विशिष्ट अनुसंधान उद्देश्य के लिए पहली बार सीधे एकत्र किया जाता है। इसमें साक्षात्कार, सर्वेक्षण, अवलोकन और प्रयोगों से प्राप्त प्रतिक्रियाएं शामिल हैं। जनगणना के आंकड़े, सरकारी रिपोर्टें, और प्रकाशित पुस्तकें/लेख द्वितीयक डेटा (Secondary Data) के उदाहरण हैं, जिन्हें किसी और ने पहले ही एकत्र और संसाधित कर लिया है।

  27. माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत (Malthusian theory of population) के अनुसार, जनसंख्या की वृद्धि किस प्रकार होती है?

    • A) अंकगणितीय प्रगति में (arithmetic progression)।
    • B) ज्यामितीय प्रगति में (geometric progression)।
    • C) स्थिर दर पर।
    • D) यादृच्छिक रूप से।

    सही उत्तर: B) ज्यामितीय प्रगति में (geometric progression)।

    विस्तृत व्याख्या: थॉमस रॉबर्ट माल्थस (Thomas Robert Malthus) ने अपने जनसंख्या सिद्धांत में तर्क दिया कि जनसंख्या ज्यामितीय प्रगति (geometric progression) में बढ़ती है (जैसे 1, 2, 4, 8, 16…), जबकि खाद्य उत्पादन अंकगणितीय प्रगति (arithmetic progression) में बढ़ता है (जैसे 1, 2, 3, 4, 5…)। इस अंतर के कारण अंततः संसाधनों की कमी और संकट (जैसे अकाल, बीमारी, युद्ध) होंगे, जो जनसंख्या को नियंत्रित करेंगे।

  28. संरचनात्मक कार्यात्मकता (Structural Functionalism) के प्रमुख प्रतिपादकों में से एक कौन है, जिन्होंने समाज को एक जटिल प्रणाली के रूप में देखा जिसके हिस्से एक साथ काम करते हैं ताकि स्थिरता और एकजुटता को बढ़ावा मिल सके?

    • A) कार्ल मार्क्स (Karl Marx)
    • B) मैक्स वेबर (Max Weber)
    • C) एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim)
    • D) मिशेल फ़ूको (Michel Foucault)

    सही उत्तर: C) एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim)

    विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim) संरचनात्मक कार्यात्मकता (Structural Functionalism) के प्रमुख संस्थापकों में से एक हैं। उन्होंने समाज को एक जटिल प्रणाली के रूप में देखा जहाँ प्रत्येक सामाजिक संस्था (जैसे परिवार, धर्म, शिक्षा) समाज के समग्र कार्य और स्थिरता में योगदान करती है। उन्होंने सामाजिक तथ्य, श्रम का विभाजन और सामूहिकता की अवधारणाओं के माध्यम से सामाजिक एकजुटता पर जोर दिया। कार्ल मार्क्स संघर्ष सिद्धांत से जुड़े हैं, और मैक्स वेबर व्याख्यात्मक समाजशास्त्र से।

  29. ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Fact) की अवधारणा किसने प्रस्तुत की, जिसे समाजशास्त्र के अध्ययन की अनूठी वस्तु के रूप में परिभाषित किया गया है?

    • A) मैक्स वेबर (Max Weber)
    • B) एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim)
    • C) कार्ल मार्क्स (Karl Marx)
    • D) हर्बर्ट स्पेंसर (Herbert Spencer)

    सही उत्तर: B) एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim)

    विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim) ने ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Fact) की अवधारणा को समाजशास्त्र के अध्ययन की केंद्रीय वस्तु के रूप में पेश किया। उन्होंने सामाजिक तथ्यों को व्यवहार, सोचने और महसूस करने के उन तरीकों के रूप में परिभाषित किया जो व्यक्ति से बाहरी होते हैं और उन पर बाध्यकारी शक्ति रखते हैं। ये समाज की सामूहिक चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं और व्यक्तिगत इच्छा से स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। उनकी पुस्तक ‘The Rules of Sociological Method’ (1895) में इसका विस्तृत वर्णन है।

  30. भारत में ग्राम पंचायतों की स्थापना किस संवैधानिक संशोधन के माध्यम से की गई, जिसने उन्हें संवैधानिक दर्जा प्रदान किया?

    • A) 42वां संशोधन अधिनियम
    • B) 73वां संशोधन अधिनियम
    • C) 61वां संशोधन अधिनियम
    • D) 86वां संशोधन अधिनियम

    सही उत्तर: B) 73वां संशोधन अधिनियम

    विस्तृत व्याख्या: 73वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 (जो 1993 में लागू हुआ) ने भारत में पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया। इस अधिनियम ने भारतीय संविधान में भाग IX को जोड़ा, जिसमें पंचायतों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं और स्थानीय स्वशासन को मजबूत किया। 42वां संशोधन ‘लघु संविधान’ के रूप में जाना जाता है, 61वां संशोधन मतदान की उम्र को 21 से 18 तक कम करता है, और 86वां संशोधन शिक्षा के अधिकार से संबंधित है।

  31. ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) परिप्रेक्ष्य किस पर केंद्रित है?

    • A) बड़े पैमाने पर सामाजिक संरचनाएँ और उनके कार्य।
    • B) समाज में संसाधनों के लिए संघर्ष।
    • C) व्यक्ति कैसे प्रतीकों और भाषा के माध्यम से एक-दूसरे के साथ बातचीत करते हैं और अर्थ का निर्माण करते हैं।
    • D) आर्थिक संबंध और वर्ग संघर्ष।

    सही उत्तर: C) व्यक्ति कैसे प्रतीकों और भाषा के माध्यम से एक-दूसरे के साथ बातचीत करते हैं और अर्थ का निर्माण करते हैं।

    विस्तृत व्याख्या: प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) एक सूक्ष्म-स्तरीय समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य है जो इस बात पर केंद्रित है कि व्यक्ति कैसे दैनिक बातचीत में प्रतीकों (जैसे भाषा, हावभाव) का उपयोग करके अर्थ का निर्माण करते हैं। यह मानता है कि समाज व्यक्तियों की अंतःक्रियाओं के माध्यम से बनता है, और ये अंतःक्रियाएं अर्थ और वास्तविकता को आकार देती हैं। जॉर्ज हर्बर्ट मीड और हर्बर्ट ब्लूमर इसके प्रमुख विचारक हैं। अन्य विकल्प बड़े पैमाने के सिद्धांतों (संरचनात्मक-कार्यात्मकवाद और संघर्ष सिद्धांत) से संबंधित हैं।

  32. समाजशास्त्र में ‘गेम थ्योरी’ (Game Theory) का अनुप्रयोग किस क्षेत्र में सबसे अधिक प्रासंगिक है?

    • A) सांस्कृतिक अध्ययन।
    • B) आर्थिक व्यवहार और रणनीतिक निर्णय लेने का विश्लेषण।
    • C) परिवार का अध्ययन।
    • D) सामाजिक आंदोलनों का विश्लेषण।

    सही उत्तर: B) आर्थिक व्यवहार और रणनीतिक निर्णय लेने का विश्लेषण।

    विस्तृत व्याख्या: गेम थ्योरी (Game Theory) गणित का एक सैद्धांतिक ढाँचा है जो रणनीतिक निर्णय लेने का विश्लेषण करता है जहाँ एक एजेंट की सफलता दूसरों की रणनीतिक पसंद पर निर्भर करती है। समाजशास्त्र में, यह अक्सर आर्थिक व्यवहार, राजनीतिक बातचीत, और सामाजिक अंतःक्रियाओं में तर्कसंगत विकल्पों का अध्ययन करने के लिए लागू होता है, खासकर जब व्यक्तियों या समूहों को सीमित संसाधनों या परस्पर विरोधी हितों का सामना करना पड़ता है।

  33. भारत में ‘ग्रीन रेवोल्यूशन’ (Green Revolution) का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव क्या था?

    • A) इसने केवल शहरी क्षेत्रों में खाद्य उत्पादन बढ़ाया।
    • B) इसने कृषि उत्पादकता में वृद्धि की, लेकिन क्षेत्रीय और सामाजिक असमानताओं को भी बढ़ाया।
    • C) इसने ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में प्रवासन को पूरी तरह से रोक दिया।
    • D) इसका भारतीय समाज पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा।

    सही उत्तर: B) इसने कृषि उत्पादकता में वृद्धि की, लेकिन क्षेत्रीय और सामाजिक असमानताओं को भी बढ़ाया।

    विस्तृत व्याख्या: भारत में ग्रीन रेवोल्यूशन (Green Revolution), जो 1960 के दशक के मध्य में शुरू हुआ, ने उच्च उपज वाली किस्मों के बीज, उर्वरकों और सिंचाई तकनीकों के उपयोग के माध्यम से गेहूं और चावल के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की। हालांकि, इसका एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक प्रभाव यह भी था कि इसने उन किसानों को अधिक लाभान्वित किया जिनके पास इन नई तकनीकों में निवेश करने के संसाधन थे, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के बीच और क्षेत्रीय स्तर पर (विशेषकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिक लाभ) असमानताएं बढ़ गईं।

  34. समाजशास्त्र में ‘लैंगिक भूमिका’ (Gender Role) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

    • A) व्यक्ति का जैविक लिंग।
    • B) सामाजिक रूप से निर्धारित अपेक्षाएँ, व्यवहार और विशेषताएँ जो किसी विशेष लिंग से जुड़ी होती हैं।
    • C) यौन अभिविन्यास।
    • D) कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त लिंग पहचान।

    सही उत्तर: B) सामाजिक रूप से निर्धारित अपेक्षाएँ, व्यवहार और विशेषताएँ जो किसी विशेष लिंग से जुड़ी होती हैं।

    विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्र में, लैंगिक भूमिका (Gender Role) जैविक लिंग के बजाय सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से निर्मित अपेक्षाओं, व्यवहारों, गतिविधियों और विशेषताओं को संदर्भित करती है जो किसी विशेष लिंग (पुरुष या महिला) के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। ये भूमिकाएं समाजीकरण के माध्यम से सीखी जाती हैं और समाज से समाज में भिन्न हो सकती हैं। जैविक लिंग (Sex) व्यक्ति के जैविक लक्षणों से संबंधित है, जबकि लैंगिक भूमिकाएं सामाजिक निर्माण हैं।

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