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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

प्रिय उम्मीदवारों, समाजशास्त्र की गहरी दुनिया में आपका स्वागत है! यह दैनिक अभ्यास सेट आपकी वैचारिक स्पष्टता, विश्लेषणात्मक कौशल और समाजशास्त्रीय समझ को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रमुख विचारकों के सिद्धांतों से लेकर समकालीन भारतीय समाज के मुद्दों तक, हर प्रश्न को आपकी प्रतियोगी परीक्षाओं (UGC-NET, UPSC, State PSCs आदि) के लिए एक उच्च-स्तरीय चुनौती पेश करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। अपनी तैयारी को परखने और समाजशास्त्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए तैयार हो जाइए!


अभ्यास सेट

  1. प्रश्न 1: एमिल दुर्खीम के अनुसार, समाज में अत्यधिक विनियमन और नियंत्रण के कारण उत्पन्न होने वाली सामाजिक स्थिति को क्या कहा जाता है?

    (A) एनोमी

    (B) एल्बोट्रोसी

    (C) फेटालिज़्म

    (D) एल्मी

    सही उत्तर: (C) फेटालिज़्म

    विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने आत्महत्या के चार प्रकारों का वर्णन किया है, जिनमें से एक ‘फेटालिज़्म’ (नियतिवादी आत्महत्या) है। यह तब होती है जब व्यक्ति अत्यधिक विनियमन और नियंत्रण महसूस करता है, जिसके कारण वह अपने जीवन में कोई आशा या स्वतंत्रता नहीं देखता। यह अत्यधिक सामाजिक दबाव और कठोर नियमों का परिणाम है, जहाँ व्यक्ति को लगता है कि उसका भविष्य पूर्वनिर्धारित है और वह इसे बदल नहीं सकता।

    • एनोमी (Anomie): यह तब होती है जब समाज में नैतिक नियम या मूल्य टूट जाते हैं या अस्पष्ट हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों में दिशाहीनता और मानकहीनता की भावना आती है।
    • एल्बोट्रोसी और एल्मी: ये दुर्खीम के सिद्धांतों में संदर्भित शब्द नहीं हैं।

    अतः, अत्यधिक विनियमन के कारण उत्पन्न स्थिति ‘फेटालिज़्म’ है।

  2. प्रश्न 2: कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी समाज में श्रमिक द्वारा अपने श्रम के उत्पाद से विमुख होने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?

    (A) अलगाव (Alienation)

    (B) विखंडन (Fragmentation)

    (C) विस्थापन (Displacement)

    (D) विमुद्रीकरण (Demonetization)

    सही उत्तर: (A) अलगाव (Alienation)

    विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में श्रमिकों के ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा दी है। उनके अनुसार, श्रमिक चार स्तरों पर अलगाव महसूस करता है: अपने श्रम के उत्पाद से, अपनी उत्पादन प्रक्रिया से, अपनी प्रजाति-सत्ता (species-being) से, और अन्य मनुष्यों से। पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिक अपने उत्पाद पर नियंत्रण खो देता है और वह केवल एक वस्तु बन जाता है।

    • विखंडन (Fragmentation): यह किसी बड़ी चीज़ के छोटे टुकड़ों में टूटने को संदर्भित करता है, हालाँकि मार्क्सवादी विश्लेषण में यह श्रम विभाजन के संदर्भ में आ सकता है, लेकिन ‘अलगाव’ अधिक व्यापक अवधारणा है।
    • विस्थापन (Displacement): यह किसी व्यक्ति या वस्तु को उसके मूल स्थान से हटाने को दर्शाता है।
    • विमुद्रीकरण (Demonetization): यह मुद्रा को कानूनी निविदा के रूप में वापस लेने की प्रक्रिया है।

    अलगाव, मार्क्स के पूंजीवाद के विश्लेषण का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

  3. प्रश्न 3: मैक्स वेबर द्वारा वर्णित ‘सामाजिक क्रिया’ के कितने आदर्श प्रकार हैं?

    (A) दो

    (B) तीन

    (C) चार

    (D) पांच

    सही उत्तर: (C) चार

    विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया (Social Action) के चार आदर्श प्रकारों (Ideal Types) का वर्णन किया है:

    1. तार्किक-लक्ष्य क्रिया (Zweckrational action): किसी विशेष लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सबसे कुशल साधनों का उपयोग करना।
    2. मूल्य-तार्किक क्रिया (Wertrational action): नैतिक, सौंदर्य, धार्मिक या अन्य मूल्यों में विश्वास के कारण की गई क्रिया।
    3. भावनात्मक क्रिया (Affectual action): भावनाओं या भावनात्मक अवस्थाओं से प्रेरित क्रिया।
    4. परंपरागत क्रिया (Traditional action): पुरानी आदतों या रीति-रिवाजों द्वारा निर्देशित क्रिया।

    ये आदर्श प्रकार सामाजिक वास्तविकता को समझने के लिए विश्लेषणात्मक उपकरण हैं।

  4. प्रश्न 4: रॉबर्ट के. मर्टन द्वारा विकसित अवधारणा जो समाज में सांस्कृतिक लक्ष्यों और संस्थागत साधनों के बीच बेमेल को दर्शाती है, क्या कहलाती है?

    (A) प्रतिमानहीनता (Anomie)

    (B) विसंगति (Dysfunction)

    (C) विलोपन (Deviance)

    (D) असमानता (Inequality)

    सही उत्तर: (A) प्रतिमानहीनता (Anomie)

    विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन ने दुर्खीम की ‘एनोमी’ की अवधारणा को विस्तारित करते हुए बताया कि जब समाज में सांस्कृतिक लक्ष्य (जैसे आर्थिक सफलता) होते हैं, लेकिन सभी व्यक्तियों के पास उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वैध संस्थागत साधन (जैसे शिक्षा, नौकरी के अवसर) नहीं होते, तो ‘प्रतिमानहीनता’ (Anomie) की स्थिति उत्पन्न होती है। इससे व्यक्ति तनाव महसूस करते हैं और विचलित व्यवहार (जैसे अपराध) अपना सकते हैं। मर्टन ने एनोमी के पांच प्रकारों का वर्णन किया: अनुरूपता, नवाचार, कर्मकाण्डवाद, पीछे हटना और विद्रोह।

    • विसंगति (Dysfunction): यह सामाजिक संरचना या संस्था के उन परिणामों को संदर्भित करता है जो सामाजिक व्यवस्था में बाधा डालते हैं।
    • विलोपन (Deviance): यह सामाजिक मानदंडों से हटकर व्यवहार को दर्शाता है। एनोमी विलोपन का एक कारण हो सकती है।
    • असमानता (Inequality): संसाधनों, अवसरों और सम्मान के असमान वितरण को संदर्भित करता है।
  5. प्रश्न 5: ‘द स्ट्रक्चर ऑफ सोशल एक्शन’ (The Structure of Social Action) नामक पुस्तक किसने लिखी, जिसने संरचनात्मक प्रकार्यवाद की नींव रखी?

    (A) एमिल दुर्खीम

    (B) कार्ल मार्क्स

    (C) मैक्स वेबर

    (D) टालकॉट पार्सन्स

    सही उत्तर: (D) टालकॉट पार्सन्स

    विस्तृत व्याख्या: टालकॉट पार्सन्स ने अपनी सेमिनल कृति ‘द स्ट्रक्चर ऑफ सोशल एक्शन’ (1937) में संरचनात्मक प्रकार्यवाद की नींव रखी। इस पुस्तक में उन्होंने दुर्खीम, वेबर और पारेटो जैसे यूरोपीय विचारकों के कार्यों को संश्लेषित किया और सामाजिक क्रिया के एक स्वयंसेवी सिद्धांत को विकसित किया, जो सामाजिक व्यवस्था और एकीकरण पर केंद्रित था। उनके विचार बाद में आधुनिक समाजशास्त्र में संरचनात्मक प्रकार्यवाद के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हुए।

  6. प्रश्न 6: किस समाजशास्त्री ने ‘मी’ (Me) और ‘आई’ (I) की अवधारणा के माध्यम से ‘स्व’ (Self) के विकास को समझाया?

    (A) जॉर्ज हरबर्ट मीड

    (B) चार्ल्स कूले

    (C) इरविंग गोफमैन

    (D) हरबर्ट ब्लूमर

    सही उत्तर: (A) जॉर्ज हरबर्ट मीड

    विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हरबर्ट मीड (George Herbert Mead) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) के एक प्रमुख विचारक थे। उन्होंने ‘स्व’ (Self) के विकास को ‘मी’ (संगठित सामाजिक आत्म, जो दूसरों की अपेक्षाओं और दृष्टिकोणों को आंतरिक करता है) और ‘आई’ (तत्काल, अप्रतिबंधित, रचनात्मक आत्म) के बीच की बातचीत के रूप में समझाया। ‘आई’ की प्रतिक्रिया ‘मी’ की संगठित अपेक्षाओं के संदर्भ में होती है।

    • चार्ल्स कूले: ‘लुकिंग-ग्लास सेल्फ’ की अवधारणा के लिए जाने जाते हैं।
    • इरविंग गोफमैन: ‘ड्रमाटर्जी’ और ‘फेसवर्क’ जैसी अवधारणाओं के लिए जाने जाते हैं।
    • हरबर्ट ब्लूमर: ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ शब्द गढ़ा और मीड के विचारों को आगे बढ़ाया।
  7. प्रश्न 7: निम्नलिखित में से कौन सी अवधारणा ‘संस्कृति के सांस्कृतिक विलंबना’ (Cultural Lag) के सिद्धांत से संबंधित है?

    (A) विलियम एफ. ओगबर्न

    (B) रॉबर्ट ई. पार्क

    (C) जॉर्ज सिमेल

    (D) टॉम बोट्टोमोर

    सही उत्तर: (A) विलियम एफ. ओगबर्न

    विस्तृत व्याख्या: विलियम एफ. ओगबर्न (William F. Ogburn) ने ‘सांस्कृतिक विलंबना’ (Cultural Lag) की अवधारणा दी है। यह तब होती है जब समाज के भौतिक पहलुओं (जैसे प्रौद्योगिकी) में तेजी से परिवर्तन होता है, लेकिन इसके गैर-भौतिक पहलू (जैसे मानदंड, मूल्य, कानून) उनके साथ तालमेल बिठाने में पिछड़ जाते हैं। इसका परिणाम सामाजिक समस्याओं और तनाव के रूप में सामने आता है। उदाहरण के लिए, साइबर अपराधों से निपटने के लिए कानूनों का धीमी गति से विकास।

  8. प्रश्न 8: ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की?

    (A) चार्ल्स कूले

    (B) डब्ल्यू.जी. समनर

    (C) रॉबर्ट बीरेस्टेड

    (D) जॉर्ज सिमेल

    सही उत्तर: (A) चार्ल्स कूले

    विस्तृत व्याख्या: चार्ल्स हॉर्टन कूले (Charles Horton Cooley) ने ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) की अवधारणा का प्रतिपादन किया। प्राथमिक समूह वे समूह होते हैं जिनकी विशेषता घनिष्ठ, आमने-सामने के संबंध और सहयोग होती है। ये समूह व्यक्ति के समाजीकरण और आत्म-पहचान के लिए मौलिक होते हैं, जैसे परिवार, खेल समूह और पड़ोस के समूह।

    • डब्ल्यू.जी. समनर: ‘इन-ग्रुप’ और ‘आउट-ग्रुप’ की अवधारणाओं के लिए जाने जाते हैं।
    • रॉबर्ट बीरेस्टेड: समाजशास्त्रीय अवधारणाओं पर अपने लेखन के लिए जाने जाते हैं।
    • जॉर्ज सिमेल: सूक्ष्म-स्तर पर सामाजिक अंतःक्रियाओं और ‘फॉर्म ऑफ सोशिएशन’ पर काम किया।
  9. प्रश्न 9: भारत में ‘प्रभावी जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा किसने दी?

    (A) एम.एन. श्रीनिवास

    (B) जी.एस. घुरिये

    (C) एस.सी. दूबे

    (D) आंद्रे बेतेई

    सही उत्तर: (A) एम.एन. श्रीनिवास

    विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas) ने भारतीय समाज के अध्ययन में ‘प्रभावी जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा को प्रतिपादित किया। उनके अनुसार, एक जाति को प्रभावी तब माना जाता है जब वह संख्यात्मक शक्ति, भूमि के स्वामित्व, आर्थिक और राजनीतिक शक्ति, तथा स्थानीय सांस्कृतिक प्रभाव जैसे कारकों के संयोजन में मजबूत होती है। प्रभावी जाति अक्सर गांव के मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और अन्य जातियों पर अपना प्रभाव डालती है।

  10. प्रश्न 10: ‘संस्कृतीकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया में, एक निम्न जाति या जनजाति क्या करने की कोशिश करती है?

    (A) अपनी स्वयं की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करना।

    (B) उच्च जातियों, विशेषकर ब्राह्मणों के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों और जीवन शैली का अनुकरण करना।

    (C) पश्चिमीकरण को अपनाना।

    (D) आधुनिक शिक्षा प्राप्त करना।

    सही उत्तर: (B) उच्च जातियों, विशेषकर ब्राह्मणों के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों और जीवन शैली का अनुकरण करना।

    विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतीकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा दी है। यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक ‘निम्न’ हिंदू जाति या एक आदिवासी या अन्य समूह एक ‘उच्च’ या द्विज जाति के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, विचारधारा और जीवन शैली को अपनाकर सामाजिक पदानुक्रम में अपनी स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करता है। यह एक सांस्कृतिक गतिशीलता की प्रक्रिया है।

    • पश्चिमीकरण: यह पश्चिमी जीवन शैली, मूल्यों और संस्थानों को अपनाने को संदर्भित करता है, जो संस्कृतीकरण से अलग है।
  11. प्रश्न 11: निम्नलिखित में से कौन एक ‘अदृश्य अवलोकन’ (Unobtrusive Observation) का उदाहरण है?

    (A) शोधकर्ता प्रतिभागियों के साथ घुलमिलकर जानकारी एकत्र करता है।

    (B) प्रतिभागियों को पता होता है कि उनका अवलोकन किया जा रहा है।

    (C) शोधकर्ता सामाजिक व्यवहार के भौतिक अवशेषों या अभिलेखों का विश्लेषण करता है।

    (D) एक संरचित साक्षात्कार का आयोजन।

    सही उत्तर: (C) शोधकर्ता सामाजिक व्यवहार के भौतिक अवशेषों या अभिलेखों का विश्लेषण करता है।

    विस्तृत व्याख्या: अदृश्य अवलोकन (Unobtrusive Observation) एक शोध विधि है जहाँ शोधकर्ता प्रतिभागियों के व्यवहार को बिना उनकी जानकारी के या उनके व्यवहार को प्रभावित किए बिना अध्ययन करता है। इसमें अक्सर भौतिक अवशेषों (जैसे कूड़ा-करकट का विश्लेषण) या मौजूदा अभिलेखों (जैसे ऐतिहासिक दस्तावेज, मीडिया सामग्री) का विश्लेषण शामिल होता है। इसका उद्देश्य अवलोकन प्रभाव (Hawthorne effect) को कम करना है।

    • (A) और (B) सहभागी अवलोकन या प्रत्यक्ष अवलोकन के प्रकार हैं, जहाँ प्रतिभागियों को शोधकर्ता की उपस्थिति का पता हो सकता है।
    • (D) साक्षात्कार एक प्रत्यक्ष डेटा संग्रह विधि है।
  12. प्रश्न 12: ‘प्रत्यक्षवाद’ (Positivism) के सिद्धांत को समाजशास्त्र में किसने लागू किया?

    (A) हरबर्ट स्पेंसर

    (B) ऑगस्ट कॉम्टे

    (C) जॉर्ज सिमेल

    (D) कार्ल मार्क्स

    सही उत्तर: (B) ऑगस्ट कॉम्टे

    विस्तृत व्याख्या: ऑगस्ट कॉम्टे (Auguste Comte) को समाजशास्त्र का जनक माना जाता है और उन्होंने ‘प्रत्यक्षवाद’ (Positivism) के सिद्धांत को प्रतिपादित किया। कॉम्टे का मानना था कि समाज का वैज्ञानिक अध्ययन प्राकृतिक विज्ञानों के समान ही किया जा सकता है, जिसमें अवलोकन, प्रयोग और तुलना जैसी अनुभवजन्य विधियों का उपयोग करके सामाजिक तथ्यों की खोज की जा सकती है। उन्होंने ‘तीन चरणों के नियम’ (Law of Three Stages) का भी प्रस्ताव रखा।

  13. प्रश्न 13: समाजशास्त्र में ‘संदर्भ समूह’ (Reference Group) की अवधारणा का श्रेय किसे दिया जाता है?

    (A) चार्ल्स कूले

    (B) रॉबर्ट के. मर्टन

    (C) जॉर्ज हरबर्ट मीड

    (D) टालकॉट पार्सन्स

    सही उत्तर: (B) रॉबर्ट के. मर्टन

    विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन (Robert K. Merton) ने ‘संदर्भ समूह’ (Reference Group) की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया, हालाँकि इसके शुरुआती विचार हरबर्ट हाइमन के कार्यों में भी पाए जाते हैं। संदर्भ समूह वे समूह होते हैं जिनका उपयोग व्यक्ति अपने स्वयं के व्यवहार, दृष्टिकोण और आत्म-मूल्यांकन के लिए एक मानक के रूप में करता है। व्यक्ति या तो सदस्यता समूह (membership group) या गैर-सदस्यता समूह को अपने संदर्भ समूह के रूप में चुन सकता है। यह ‘सापेक्षिक अभावबोध’ (Relative Deprivation) से भी जुड़ा है।

  14. प्रश्न 14: निम्नलिखित में से कौन भारतीय ग्रामीण समाज की एक विशेषता नहीं है?

    (A) कृषि प्राथमिक व्यवसाय है।

    (B) संयुक्त परिवार प्रणाली।

    (C) जाति व्यवस्था का प्रभुत्व।

    (D) उच्च सामाजिक गतिशीलता।

    सही उत्तर: (D) उच्च सामाजिक गतिशीलता।

    विस्तृत व्याख्या: भारतीय ग्रामीण समाज पारंपरिक रूप से कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, संयुक्त परिवार प्रणाली, और जाति व्यवस्था के प्रभुत्व के लिए जाना जाता है, जो सामाजिक स्तरीकरण को प्रभावित करती है। इस संरचना में, सामाजिक गतिशीलता (एक सामाजिक वर्ग या स्थिति से दूसरे में जाना) अपेक्षाकृत कम होती है, खासकर पारंपरिक संदर्भ में। शहरी क्षेत्रों में गतिशीलता अधिक देखी जाती है।

  15. प्रश्न 15: ‘लोकवे’ (Folkways) और ‘लोकरीतियाँ’ (Mores) की अवधारणा किसने दी?

    (A) डब्ल्यू.जी. समनर

    (B) एमिल दुर्खीम

    (C) मैक्स वेबर

    (D) रॉबर्ट बीरेस्टेड

    सही उत्तर: (A) डब्ल्यू.जी. समनर

    विस्तृत व्याख्या: डब्ल्यू.जी. समनर (William Graham Sumner) ने अपनी पुस्तक ‘फोक्वेज़’ (Folkways, 1906) में ‘लोकवे’ और ‘लोकरीतियाँ’ (Mores) की अवधारणाओं को प्रतिपादित किया।

    • लोकवे (Folkways): ये समाज में व्यवहार के सामान्य, दिन-प्रतिदिन के, अनौपचारिक मानदंड हैं, जैसे शिष्टाचार या ड्रेस कोड। इनके उल्लंघन पर मामूली सामाजिक प्रतिबंध होते हैं।
    • लोकरीतियाँ (Mores): ये नैतिक महत्व वाले मानदंड हैं, जो समाज के मूल मूल्यों से जुड़े होते हैं। इनके उल्लंघन पर अधिक गंभीर सामाजिक प्रतिबंध होते हैं (जैसे चोरी, धोखा)।
  16. प्रश्न 16: ‘प्रतिक्रिया सिद्धांत’ (Reaction Theory) किससे संबंधित है, जो व्यक्ति के निजी स्थान या अधिकारों पर अतिक्रमण होने पर उसके प्रतिरोध को दर्शाता है?

    (A) विचलित व्यवहार

    (B) सामाजिक नियंत्रण

    (C) सामाजिक दूरी

    (D) अतिक्रमण

    सही उत्तर: (A) विचलित व्यवहार

    विस्तृत व्याख्या: ‘प्रतिक्रिया सिद्धांत’ (Reactance Theory) मनोविज्ञान और समाजशास्त्र दोनों में प्रासंगिक है। यह इस विचार से संबंधित है कि जब व्यक्ति अपनी कथित स्वतंत्रता, स्वायत्तता या अधिकारों पर अतिक्रमण या खतरा महसूस करता है, तो वह उस स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता है। यह अक्सर विचलित व्यवहार या विरोध के माध्यम से प्रकट हो सकता है। समाजशास्त्रीय संदर्भ में, यह सामाजिक नियंत्रण के प्रति प्रतिक्रियाओं को समझने में मदद करता है।

  17. प्रश्न 17: ‘आत्महत्या’ (Suicide) पर अपने विस्तृत अध्ययन के लिए कौन सा समाजशास्त्री प्रसिद्ध है?

    (A) मैक्स वेबर

    (B) एमिल दुर्खीम

    (C) कार्ल मार्क्स

    (D) ऑगस्ट कॉम्टे

    सही उत्तर: (B) एमिल दुर्खीम

    विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम (Emile Durkheim) ने 1897 में अपनी क्लासिक पुस्तक ‘आत्महत्या’ (Suicide) प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने यह प्रदर्शित करने का प्रयास किया कि व्यक्तिगत रूप से देखे जाने वाले व्यवहार (जैसे आत्महत्या) के भी सामाजिक कारण होते हैं। उन्होंने आत्महत्या के विभिन्न सामाजिक प्रकारों – अहंवादी, परोपकारी, एनोमिक और नियतिवादी – का विश्लेषण करके समाजशास्त्र की वैधता को स्थापित किया। यह समाजशास्त्रीय अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

  18. प्रश्न 18: ‘संरचनात्मक प्रकार्यवाद’ (Structural Functionalism) के प्रमुख प्रतिपादकों में से कौन है?

    (A) जॉर्ज सिमेल

    (B) टालकॉट पार्सन्स

    (C) हरबर्ट ब्लूमर

    (D) रैल्फ डारेनडॉर्फ

    सही उत्तर: (B) टालकॉट पार्सन्स

    विस्तृत व्याख्या: टालकॉट पार्सन्स (Talcott Parsons) संरचनात्मक प्रकार्यवाद के सबसे प्रभावशाली प्रतिपादकों में से एक हैं। उन्होंने समाज को एक जटिल प्रणाली के रूप में देखा जिसके विभिन्न भाग मिलकर काम करते हैं ताकि स्थिरता और एकजुटता बनी रहे। उन्होंने ‘AGIL प्रतिमान’ (Adaptation, Goal Attainment, Integration, Latency) जैसे अवधारणाओं के माध्यम से सामाजिक प्रणालियों के कार्यों को समझाया।

    • जॉर्ज सिमेल: प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद और संघर्ष सिद्धांत के अग्रदूत।
    • हरबर्ट ब्लूमर: प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद से जुड़े।
    • रैल्फ डारेनडॉर्फ: एक प्रमुख संघर्ष सिद्धांतकार।
  19. प्रश्न 19: भारतीय समाज में ‘वर्ग’ (Class) और ‘जाति’ (Caste) के बीच संबंधों पर किस समाजशास्त्री ने महत्वपूर्ण कार्य किया है?

    (A) आंद्रे बेतेई

    (B) एम.एन. श्रीनिवास

    (C) जी.एस. घुरिये

    (D) डेविड हार्डीमैन

    सही उत्तर: (A) आंद्रे बेतेई

    विस्तृत व्याख्या: आंद्रे बेतेई (André Béteille) ने भारतीय समाज में वर्ग, स्थिति और शक्ति के विश्लेषण पर व्यापक कार्य किया है, विशेषकर जाति व्यवस्था के संदर्भ में। उन्होंने ‘टिनवेल्ली जिले के श्रीपुरम गांव’ पर अपने अध्ययन में दिखाया कि कैसे जाति, वर्ग और शक्ति अलग-अलग सिद्धांतों पर काम करते हुए भी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने भारतीय समाज में सामाजिक स्तरीकरण की जटिलताओं को उजागर किया।

  20. प्रश्न 20: ‘सामुदायिकता और समाज’ (Gemeinschaft and Gesellschaft) के बीच अंतर करने वाले समाजशास्त्री कौन थे?

    (A) एमिल दुर्खीम

    (B) फर्डिनेंड टोनीज़

    (C) मैक्स वेबर

    (D) जॉर्ज सिमेल

    सही उत्तर: (B) फर्डिनेंड टोनीज़

    विस्तृत व्याख्या: फर्डिनेंड टोनीज़ (Ferdinand Tönnies) ने अपनी 1887 की पुस्तक ‘गेमिंसशाफ्ट एंड गेसेलशाफ्ट’ में इन दो आदर्श प्रकारों को प्रस्तुत किया।

    • गेमिंसशाफ्ट (Gemeinschaft – सामुदायिकता): यह पारंपरिक, ग्रामीण समाजों की विशेषता है, जहाँ संबंध घनिष्ठ, व्यक्तिगत और भावनात्मक होते हैं, जो साझा मूल्यों और विश्वासों पर आधारित होते हैं (जैसे परिवार)।
    • गेसेलशाफ्ट (Gesellschaft – समाज): यह आधुनिक, शहरी समाजों की विशेषता है, जहाँ संबंध अवैयक्तिक, कार्यात्मक और तर्कसंगत होते हैं, जो स्व-हित और अनुबंधों पर आधारित होते हैं (जैसे बड़े शहर)।
  21. प्रश्न 21: ‘द Protestant Ethic and the Spirit of Capitalism’ नामक प्रसिद्ध पुस्तक के लेखक कौन हैं?

    (A) कार्ल मार्क्स

    (B) एमिल दुर्खीम

    (C) मैक्स वेबर

    (D) टालकॉट पार्सन्स

    सही उत्तर: (C) मैक्स वेबर

    विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर (Max Weber) की यह क्लासिक कृति (1905 में प्रकाशित) इस बात का विश्लेषण करती है कि प्रोटेस्टेंट नैतिकता (विशेष रूप से कैल्विनवाद) किस प्रकार पूंजीवादी भावना और आधुनिक पूंजीवाद के विकास में सहायक रही है। वेबर ने तर्क दिया कि प्रोटेस्टेंट धर्म की कुछ मान्यताओं (जैसे परिश्रम, मितव्ययिता और सांसारिक सफलता को ईश्वर की कृपा का संकेत मानना) ने उन मूल्यों को बढ़ावा दिया जो पूंजीवादी आर्थिक प्रणाली के लिए अनुकूल थे।

  22. प्रश्न 22: निम्नलिखित में से कौन सामाजिक शोध में ‘प्रायोगिक डिजाइन’ (Experimental Design) का मुख्य उद्देश्य है?

    (A) सहभागी अवलोकन के माध्यम से गहरी अंतर्दृष्टि प्राप्त करना।

    (B) चरों के बीच कारण और प्रभाव संबंध स्थापित करना।

    (C) एक बड़े पैमाने पर जनसंख्या के विचारों का सर्वेक्षण करना।

    (D) ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या करना।

    सही उत्तर: (B) चरों के बीच कारण और प्रभाव संबंध स्थापित करना।

    विस्तृत व्याख्या: प्रायोगिक डिजाइन (Experimental Design) मात्रात्मक शोध (Quantitative Research) का एक महत्वपूर्ण तरीका है जिसका प्राथमिक उद्देश्य दो या दो से अधिक चरों (Variables) के बीच कारण और प्रभाव (Cause and Effect) संबंध स्थापित करना है। इसमें एक स्वतंत्र चर (independent variable) में हेरफेर किया जाता है और एक आश्रित चर (dependent variable) पर इसके प्रभाव को नियंत्रित परिस्थितियों में मापा जाता है, जबकि अन्य बाहरी चरों को नियंत्रित किया जाता है।

    • (A) सहभागी अवलोकन गुणात्मक शोध की विशेषता है।
    • (C) सर्वेक्षण एक अन्य मात्रात्मक विधि है जो राय मापने के लिए है।
    • (D) ऐतिहासिक शोध ऐतिहासिक घटनाओं से संबंधित है।
  23. प्रश्न 23: भारत में ‘नागरिक समाज’ (Civil Society) की अवधारणा में शामिल नहीं है:

    (A) गैर-सरकारी संगठन (NGOs)

    (B) समुदाय-आधारित संगठन (CBOs)

    (C) राजनीतिक दल

    (D) स्वयं सहायता समूह (SHGs)

    सही उत्तर: (C) राजनीतिक दल

    विस्तृत व्याख्या: नागरिक समाज (Civil Society) राज्य और बाजार से परे सामाजिक जीवन का वह क्षेत्र है जहाँ व्यक्ति और समूह अपने सामूहिक हितों, मूल्यों और लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए स्वैच्छिक रूप से संगठित होते हैं। इसमें गैर-सरकारी संगठन (NGOs), समुदाय-आधारित संगठन (CBOs), स्वयं सहायता समूह (SHGs), श्रमिक संघ, धार्मिक समूह, पेशेवर संघ आदि शामिल हैं। राजनीतिक दल, हालांकि वे समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, आमतौर पर उन्हें राज्य (सरकार) की ओर या सीधे सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाली संस्थाओं के रूप में देखा जाता है, न कि नागरिक समाज के सीधे हिस्से के रूप में।

  24. प्रश्न 24: ‘अधिरचना’ (Superstructure) और ‘आधार’ (Base) की अवधारणा का संबंध किस विचारक से है?

    (A) मैक्स वेबर

    (B) कार्ल मार्क्स

    (C) एमिल दुर्खीम

    (D) फ्रेडरिक एंगेल्स

    सही उत्तर: (B) कार्ल मार्क्स

    विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स (Karl Marx) ने अपने ऐतिहासिक भौतिकवाद के सिद्धांत में ‘आधार’ (Base) और ‘अधिरचना’ (Superstructure) की अवधारणाओं का प्रयोग किया।

    • आधार (Base): यह उत्पादन के साधनों (उत्पादन शक्ति और उत्पादन संबंध) को संदर्भित करता है, जो समाज की आर्थिक संरचना है।
    • अधिरचना (Superstructure): इसमें समाज के गैर-आर्थिक पहलू शामिल हैं, जैसे कानून, राजनीति, धर्म, शिक्षा, कला और विचारधारा। मार्क्स का तर्क था कि आधार अधिरचना को आकार देता है, और अधिरचना अंततः आधार को बनाए रखने का कार्य करती है।

    यह मार्क्सवादी विश्लेषण का एक केंद्रीय बिंदु है।

  25. प्रश्न 25: ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र’ (Profane) के बीच अंतर किस समाजशास्त्री ने किया?

    (A) मैक्स वेबर

    (B) एमिल दुर्खीम

    (C) टालकॉट पार्सन्स

    (D) जॉर्ज हरबर्ट मीड

    सही उत्तर: (B) एमिल दुर्खीम

    विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम (Emile Durkheim) ने अपनी पुस्तक ‘द एलिमेंटरी फॉर्म्स ऑफ द रिलीजियस लाइफ’ (The Elementary Forms of the Religious Life) में धर्म के समाजशास्त्रीय विश्लेषण के केंद्र में ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र’ (Profane) के बीच के अंतर को रखा।

    • पवित्र (Sacred): वे वस्तुएं, प्रतीक, विश्वास और अनुष्ठान जो असाधारण, रहस्यमय और आदरणीय माने जाते हैं, और जिन्हें समुदाय द्वारा अलग रखा जाता है।
    • अपवित्र (Profane): वे सामान्य, रोजमर्रा की वस्तुएं और अनुभव जो पवित्र से भिन्न होते हैं।

    दुर्खीम का मानना था कि समाज ही पवित्र की रचना करता है, और इस अंतर के माध्यम से सामाजिक एकजुटता और सामूहिकता मजबूत होती है।

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