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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

समाजशास्त्र: दैनिक अभ्यास क्विज़

प्रिय उम्मीदवारों, “The Sociology Scholar” के इस दैनिक क्विज़ में आपका स्वागत है। आज का अभ्यास सेट समाजशास्त्रीय अवधारणाओं, विचारकों और समकालीन मुद्दों की आपकी समझ को गहरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इन चुनौतीपूर्ण प्रश्नों के माध्यम से अपनी विश्लेषणात्मक क्षमताओं का परीक्षण करें और अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं। शुभकामनाएँ!


  1. किस समाजशास्त्री ने “सामाजिक तथ्य” (Social Facts) की अवधारणा को समाजशास्त्र के अध्ययन की केंद्रीय वस्तु के रूप में परिभाषित किया?

    • (A) मैक्स वेबर
    • (B) कार्ल मार्क्स
    • (C) एमिल दुर्खीम
    • (D) हर्बर्ट स्पेंसर

    सही उत्तर: (C) एमिल दुर्खीम

    विस्तृत व्याख्या:

    एमिल दुर्खीम ने “सामाजिक तथ्य” की अवधारणा को समाजशास्त्र के लिए एक अद्वितीय अध्ययन वस्तु के रूप में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, सामाजिक तथ्य व्यवहार, विचार और भावना के ऐसे तरीके हैं जो व्यक्ति के लिए बाह्य होते हैं और उस पर एक बाध्यकारी शक्ति रखते हैं। ये तथ्य व्यक्तिगत इच्छाओं से स्वतंत्र होते हैं और सामूहिक चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं। दुर्खीम ने अपनी पुस्तक “द रूल्स ऑफ सोशियोलॉजिकल मेथड” (The Rules of Sociological Method) में इस अवधारणा को विस्तृत किया। वेबर ने सामाजिक क्रिया पर ध्यान केंद्रित किया, मार्क्स ने आर्थिक संरचना और वर्ग संघर्ष पर, जबकि स्पेंसर ने सामाजिक विकास और सावयवी सादृश्यता (Organic Analogy) पर जोर दिया।

  2. “ब्यूरोक्रेसी” (Bureaucracy) के आदर्श प्रारूप (Ideal Type) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की?

    • (A) कार्ल मार्क्स
    • (B) एमिल दुर्खीम
    • (C) मैक्स वेबर
    • (D) टालकॉट पार्सन्स

    सही उत्तर: (C) मैक्स वेबर

    विस्तृत व्याख्या:

    मैक्स वेबर ने नौकरशाही को आधुनिक समाज में एक तर्कसंगत-कानूनी प्राधिकार (Rational-Legal Authority) के सबसे शुद्ध रूप के रूप में देखा और इसके “आदर्श प्रारूप” को विकसित किया। आदर्श प्रारूप एक विश्लेषणात्मक उपकरण है जो किसी सामाजिक घटना की मुख्य विशेषताओं को अतिरंजित करके प्रस्तुत करता है ताकि उसका अध्ययन और तुलना की जा सके। वेबर के अनुसार, नौकरशाही की मुख्य विशेषताएं पदानुक्रम, नियमों का पालन, अवैयक्तिकता, तकनीकी दक्षता और विशेषज्ञता हैं। मार्क्स ने पूंजीवाद के विश्लेषण में रुचि दिखाई, दुर्खीम ने सामाजिक एकजुटता में, और पार्सन्स ने सामाजिक व्यवस्था और कार्यात्मकता में।

  3. कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी समाज में ‘अलगाव’ (Alienation) का मुख्य कारण क्या है?

    • (A) सामाजिक तथ्य
    • (B) धर्म
    • (C) उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व
    • (D) नौकरशाही संरचना

    सही उत्तर: (C) उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व

    विस्तृत व्याख्या:

    कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिकों के अलगाव का विस्तृत विश्लेषण किया। उनके अनुसार, अलगाव की जड़ें उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व और पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में निहित हैं। श्रमिक चार स्तरों पर अलगाव का अनुभव करते हैं: उत्पाद से अलगाव, उत्पादन की प्रक्रिया से अलगाव, अपनी प्रजाति-सत्ता (Species-Being) से अलगाव, और अन्य मनुष्यों से अलगाव। यह अलगाव श्रमिकों को उनकी रचनात्मक क्षमता और मानवीय सार से वंचित करता है। मार्क्स के लिए धर्म अफीम के समान था, सामाजिक तथ्य दुर्खीम की अवधारणा है, और नौकरशाही वेबर का मुख्य केंद्र बिंदु था।

  4. टालकॉट पार्सन्स के क्रिया सिद्धांत (Action Theory) में AGIL मॉडल का ‘A’ क्या दर्शाता है?

    • (A) अनुकूलन (Adaptation)
    • (B) एकीकरण (Integration)
    • (C) लक्ष्य-प्राप्ति (Goal Attainment)
    • (D) गुप्त पैटर्न रखरखाव (Latency)

    सही उत्तर: (A) अनुकूलन (Adaptation)

    विस्तृत व्याख्या:

    टालकॉट पार्सन्स ने किसी भी सामाजिक प्रणाली के अस्तित्व और स्थिरता के लिए आवश्यक चार कार्यात्मक अनिवार्यताओं का वर्णन करने के लिए AGIL मॉडल विकसित किया। ये हैं: अनुकूलन (Adaptation), लक्ष्य-प्राप्ति (Goal Attainment), एकीकरण (Integration) और गुप्त पैटर्न रखरखाव (Latency) या पैटर्न रखरखाव। ‘A’ अनुकूलन को संदर्भित करता है, जिसका अर्थ है कि एक सामाजिक प्रणाली को अपने पर्यावरण से संसाधन प्राप्त करने और अपनी आवश्यकताओं के अनुकूल होने की क्षमता होनी चाहिए। लक्ष्य-प्राप्ति उद्देश्यों को प्राप्त करने, एकीकरण भागों के बीच समन्वय और गुप्त पैटर्न रखरखाव मूल्यों और मानदंडों को बनाए रखने से संबंधित है।

  5. रॉबर्ट के. मर्टन द्वारा प्रतिपादित ‘अनुरूपता’ (Conformity) की अवधारणा किस विचलनवादी प्रतिक्रिया का हिस्सा है?

    • (A) नवाचार (Innovation)
    • (B) अनुष्ठानवाद (Ritualism)
    • (C) पीछे हटना (Retreatism)
    • (D) स्वीकृत लक्ष्यों और स्वीकृत साधनों को स्वीकार करना

    सही उत्तर: (D) स्वीकृत लक्ष्यों और स्वीकृत साधनों को स्वीकार करना

    विस्तृत व्याख्या:

    रॉबर्ट के. मर्टन ने अपनी ‘एनोमी सिद्धांत’ (Anomie Theory) में समाज के सांस्कृतिक लक्ष्यों और उन्हें प्राप्त करने के लिए उपलब्ध संस्थागत साधनों के बीच तनाव के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली पांच प्रकार की विचलनवादी प्रतिक्रियाओं का वर्णन किया। अनुरूपता (Conformity) वह प्रतिक्रिया है जिसमें व्यक्ति समाज द्वारा निर्धारित सांस्कृतिक लक्ष्यों (जैसे सफलता) और उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वीकृत संस्थागत साधनों (जैसे कड़ी मेहनत और शिक्षा) दोनों को स्वीकार करता है। यह विचलन नहीं बल्कि सामाजिक मानदंडों का पालन है। नवाचार में लक्ष्य स्वीकार किए जाते हैं लेकिन साधन अस्वीकृत, अनुष्ठानवाद में लक्ष्य अस्वीकृत होते हैं लेकिन साधन स्वीकार किए जाते हैं, और पीछे हटना में लक्ष्य और साधन दोनों अस्वीकृत होते हैं।

  6. जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘स्व’ (Self) के विकास के लिए कौन सा चरण महत्वपूर्ण है जहाँ बच्चा दूसरों की भूमिकाओं को सीखता है और उनकी नकल करता है?

    • (A) अनुकरण चरण (Imitation Stage)
    • (B) खेल चरण (Play Stage)
    • (C) क्रीड़ा चरण (Game Stage)
    • (D) सामान्यीकृत अन्य (Generalized Other)

    सही उत्तर: (B) खेल चरण (Play Stage)

    विस्तृत व्याख्या:

    जॉर्ज हर्बर्ट मीड ने ‘स्व’ के विकास को तीन चरणों में विभाजित किया। खेल चरण (Play Stage) वह चरण है जहाँ बच्चे महत्वपूर्ण अन्य (Significant Others) की भूमिकाओं को अपनाना सीखते हैं, जैसे कि वे माता-पिता, शिक्षक या अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की भूमिका निभाते हैं। इस चरण में वे दूसरों की अलग-अलग भूमिकाओं की नकल करते हैं, लेकिन अभी तक उन्हें एक एकीकृत तरीके से नहीं देख पाते। क्रीड़ा चरण (Game Stage) में वे कई भूमिकाओं को एक साथ समझते हैं और “सामान्यीकृत अन्य” (Generalized Other) की अवधारणा को आत्मसात करते हैं, जो समाज के सामान्यीकृत दृष्टिकोण को दर्शाता है। अनुकरण चरण सबसे शुरुआती चरण है जहाँ केवल नकल होती है।

  7. “द प्रेजेंटेशन ऑफ सेल्फ इन एवरीडे लाइफ” (The Presentation of Self in Everyday Life) पुस्तक के लेखक कौन हैं?

    • (A) पीटर बर्गर
    • (B) इरविंग गोफमैन
    • (C) अल्फ्रेड शुट्ज़
    • (D) हेरोल्ड गारफिन्केल

    सही उत्तर: (B) इरविंग गोफमैन

    विस्तृत व्याख्या:

    इरविंग गोफमैन एक प्रमुख प्रतीकात्मक अंतःक्रियावादी (Symbolic Interactionist) थे, जिन्होंने “ड्रैमाटर्जिकल पर्सपेक्टिव” (Dramaturgical Perspective) विकसित किया, जिसमें वे सामाजिक अंतःक्रिया को एक नाटकीय प्रदर्शन के रूप में देखते हैं। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “द प्रेजेंटेशन ऑफ सेल्फ इन एवरीडे लाइफ” में, गोफमैन ने समझाया कि कैसे व्यक्ति दूसरों के सामने अपनी छवि (self) का प्रबंधन करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे एक अभिनेता मंच पर प्रदर्शन करता है। इसमें ‘फ्रंट स्टेज’ और ‘बैक स्टेज’ व्यवहार जैसी अवधारणाएं शामिल हैं। बर्गर और लकमैन ने “द सोशल कंस्ट्रक्शन ऑफ रियलिटी” लिखी, शुट्ज़ ने फेनोमेनोलॉजी पर काम किया, और गारफिन्केल ने एथनोमेथोडोलॉजी विकसित की।

  8. भारत में जाति व्यवस्था के संबंध में, ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की?

    • (A) एम. एन. श्रीनिवास
    • (B) आंद्रे बेतेई
    • (C) जी. एस. घुरिये
    • (D) लुई ड्यूमॉन्ट

    सही उत्तर: (A) एम. एन. श्रीनिवास

    विस्तृत व्याख्या:

    एम. एन. श्रीनिवास ने भारतीय समाज के अध्ययन में ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा प्रस्तुत की। यह एक ऐसी प्रक्रिया को संदर्भित करता है जिसके द्वारा एक ‘निम्न’ जाति या जनजाति या अन्य समूह किसी ‘उच्च’ और अक्सर ‘द्विज’ जाति के अनुष्ठानों, रीति-रिवाजों, विचारधारा और जीवन शैली को अपनाकर अपनी स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करता है। यह एक सांस्कृतिक गतिशीलता की प्रक्रिया है। श्रीनिवास ने यह भी नोट किया कि संस्कृतिकरण हमेशा आर्थिक या राजनीतिक स्थिति में वृद्धि के साथ नहीं होता है। आंद्रे बेतेई ने असमानता का अध्ययन किया, घुरिये ने जाति और जनजाति पर प्रारंभिक कार्य किया, और ड्यूमॉन्ट ने “होमो हायरार्किकस” में जाति को शुद्धता और प्रदूषण के पदानुक्रम के रूप में देखा।

  9. अध्ययन की किस विधि में शोधकर्ता एक विशेष समुदाय या समूह के भीतर रहकर उनके जीवन और संस्कृति का गहन अध्ययन करता है?

    • (A) सर्वेक्षण विधि (Survey Method)
    • (B) प्रयोग विधि (Experimental Method)
    • (C) नृजातिवर्णन (Ethnography)
    • (D) द्वितीयक डेटा विश्लेषण (Secondary Data Analysis)

    सही उत्तर: (C) नृजातिवर्णन (Ethnography)

    विस्तृत व्याख्या:

    नृजातिवर्णन एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जिसमें शोधकर्ता एक लंबी अवधि के लिए अध्ययन किए जा रहे समूह के साथ रहता है, उनकी गतिविधियों में भाग लेता है और उनकी संस्कृति और सामाजिक संरचनाओं की विस्तृत समझ प्राप्त करता है। इसे ‘प्रतिभागी अवलोकन’ (Participant Observation) के रूप में भी जाना जाता है। इस विधि का उपयोग अक्सर मानवशास्त्री और कुछ समाजशास्त्री करते हैं ताकि किसी संस्कृति के आंतरिक दृष्टिकोण को समझा जा सके। सर्वेक्षण विधि बड़ी आबादी से मात्रात्मक डेटा एकत्र करती है, प्रयोग विधि नियंत्रित वातावरण में चरों के बीच संबंध का परीक्षण करती है, और द्वितीयक डेटा विश्लेषण मौजूदा डेटा का उपयोग करता है।

  10. किस प्रकार की असमानता ‘छिपी हुई असमानता’ (Hidden Inequality) के रूप में संदर्भित की जा सकती है, जैसा कि हाल ही में स्नातक छात्र सोफिया जैमे के काम में उल्लेख किया गया है?

    • (A) आय असमानता (Income Inequality)
    • (B) धन असमानता (Wealth Inequality)
    • (C) संरचनात्मक असमानता जो स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती लेकिन प्रणाली में अंतर्निहित होती है
    • (D) शिक्षा का अभाव

    सही उत्तर: (C) संरचनात्मक असमानता जो स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती लेकिन प्रणाली में अंतर्निहित होती है

    विस्तृत व्याख्या:

    समाचार डेटा में सोफिया जैमे द्वारा ‘छिपी हुई असमानता’ पर किए गए कार्य का उल्लेख है। ‘छिपी हुई असमानता’ उन संरचनात्मक असमानताओं को संदर्भित करती है जो समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती हैं या आसानी से पहचानी नहीं जाती हैं, लेकिन सामाजिक प्रणालियों, नीतियों या सांस्कृतिक मानदंडों में गहराई से अंतर्निहित होती हैं। ये सूक्ष्म भेद, पूर्वाग्रह या बाधाएं हो सकती हैं जो कुछ समूहों के लिए अवसरों को सीमित करती हैं, भले ही सतह पर समान अवसर मौजूद दिखें। यह आय या धन की प्रत्यक्ष माप से परे जाकर सामाजिक प्रक्रियाओं में निहित असमानताओं की पड़ताल करता है।

  11. “प्रतिक्रियात्मक व्यवहार” (Responsive Behavior) की अवधारणा का संबंध किस समाजशास्त्री से है?

    • (A) अल्फ्रेड शुट्ज़
    • (B) हेरोल्ड गारफिन्केल
    • (C) जॉर्ज हर्बर्ट मीड
    • (D) इरविंग गोफमैन

    सही उत्तर: (C) जॉर्ज हर्बर्ट मीड

    विस्तृत व्याख्या:

    जॉर्ज हर्बर्ट मीड के प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद में, ‘प्रतिक्रियात्मक व्यवहार’ (Responsive Behavior) उस सामाजिक क्रिया को संदर्भित करता है जो अन्य व्यक्तियों की क्रियाओं और प्रतीकों के प्रति एक प्रतिक्रिया के रूप में उत्पन्न होती है। मीड ने तर्क दिया कि मनुष्य केवल उत्तेजनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं करते हैं बल्कि ‘आत्म’ (Self) के माध्यम से अपनी प्रतिक्रियाओं की व्याख्या और चयन करते हैं। यह ‘आत्म’ दूसरों के साथ अंतःक्रिया से विकसित होता है। शुट्ज़ और गारफिन्केल ने फेनोमेनोलॉजी और एथनोमेथोडोलॉजी पर काम किया, जबकि गोफमैन ने ड्रैमाटर्जी पर ध्यान केंद्रित किया।

  12. समाजशास्त्र में ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा किससे जुड़ी है?

    • (A) कार्ल मार्क्स
    • (B) एमिल दुर्खीम
    • (C) मैक्स वेबर
    • (D) टालकॉट पार्सन्स

    सही उत्तर: (B) एमिल दुर्खीम

    विस्तृत व्याख्या:

    ‘एनोमी’ की अवधारणा एमिल दुर्खीम द्वारा प्रस्तुत की गई थी। यह एक ऐसी सामाजिक स्थिति को संदर्भित करता है जहाँ सामाजिक मानदंड कमजोर या अनुपस्थित हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्तियों में दिशाहीनता, उद्देश्यहीनता और मोहभंग की भावना पैदा होती है। दुर्खीम ने अपनी पुस्तक “आत्महत्या” (Suicide) में एनोमी का विस्तृत विश्लेषण किया, यह तर्क देते हुए कि यह कुछ प्रकार की आत्महत्याओं का एक प्रमुख कारण है, विशेष रूप से तीव्र सामाजिक परिवर्तनों या आर्थिक संकटों के दौरान। मार्क्स अलगाव पर केंद्रित थे, वेबर नौकरशाही पर, और पार्सन्स कार्यात्मकता पर।

  13. भारत में ‘संयुक्त परिवार’ (Joint Family) की मुख्य विशेषता क्या है?

    • (A) केवल पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे
    • (B) कई पीढ़ियों के सदस्य एक साथ एक ही छत के नीचे रहते हैं
    • (C) एकल माता-पिता परिवार
    • (D) आधुनिक शहरी परिवार

    सही उत्तर: (B) कई पीढ़ियों के सदस्य एक साथ एक ही छत के नीचे रहते हैं

    विस्तृत व्याख्या:

    संयुक्त परिवार भारतीय समाज की एक पारंपरिक विशेषता है, जिसमें कई पीढ़ियों के सदस्य (जैसे दादा-दादी, माता-पिता, बच्चे, चाचा-चाची, चचेरे भाई-बहन) एक साथ एक ही छत के नीचे रहते हैं। वे आमतौर पर एक सामान्य रसोई साझा करते हैं, संपत्ति का स्वामित्व संयुक्त होता है, और एक सामान्य मुखिया (अक्सर सबसे बुजुर्ग पुरुष सदस्य) के अधीन होते हैं। विकल्प (A) नाभिकीय परिवार (Nuclear Family) की परिभाषा है, और अन्य विकल्प संयुक्त परिवार की विशेषता नहीं दर्शाते हैं।

  14. समाजशास्त्र में ‘लिंग’ (Gender) और ‘सेक्स’ (Sex) के बीच मुख्य अंतर क्या है?

    • (A) लिंग जैविक है जबकि सेक्स सामाजिक है
    • (B) लिंग सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से निर्मित है जबकि सेक्स जैविक है
    • (C) दोनों एक ही अवधारणा को संदर्भित करते हैं
    • (D) दोनों केवल व्यक्तिगत पहचान से संबंधित हैं

    सही उत्तर: (B) लिंग सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से निर्मित है जबकि सेक्स जैविक है

    विस्तृत व्याख्या:

    समाजशास्त्र में ‘लिंग’ (Gender) और ‘सेक्स’ (Sex) दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं। ‘सेक्स’ एक जैविक अवधारणा है जो शारीरिक और शारीरिक विशेषताओं (जैसे गुणसूत्र, जननांग, हार्मोन) पर आधारित होती है, जो किसी व्यक्ति को पुरुष या महिला के रूप में वर्गीकृत करती है। इसके विपरीत, ‘लिंग’ एक सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से निर्मित अवधारणा है जो समाज द्वारा पुरुषों और महिलाओं के लिए निर्धारित भूमिकाओं, व्यवहारों, अपेक्षाओं और पहचानों को संदर्भित करती है। यह इस बात से संबंधित है कि समाज में “पुरुषत्व” और “स्त्रीत्व” का क्या अर्थ है।

  15. समाचार डेटा में AI द्वारा उत्पन्न विज़ुअल कॉन्जोइंट्स का उपयोग करके ‘लिंग और गृहकार्य निर्धारण’ (Gender and Housework Attribution) के अध्ययन का उल्लेख किस व्यापक समाजशास्त्रीय क्षेत्र से संबंधित है?

    • (A) धर्म का समाजशास्त्र
    • (B) राजनीतिक समाजशास्त्र
    • (C) परिवार का समाजशास्त्र और अनुसंधान के तरीके
    • (D) शिक्षा का समाजशास्त्र

    सही उत्तर: (C) परिवार का समाजशास्त्र और अनुसंधान के तरीके

    विस्तृत व्याख्या:

    समाचार में उल्लेखित AI-जनरेटेड विज़ुअल कॉन्जोइंट्स का उपयोग करके ‘लिंग और गृहकार्य निर्धारण’ का अध्ययन सीधे तौर पर परिवार के समाजशास्त्र से संबंधित है, क्योंकि यह घर के भीतर लिंग-आधारित भूमिकाओं और कार्यों (जैसे गृहकार्य) की पड़ताल करता है। इसके अलावा, AI-जनरेटेड विज़ुअल कॉन्जोइंट्स का उपयोग एक नवीन अनुसंधान विधि को दर्शाता है, जो अनुसंधान के तरीकों के समाजशास्त्र के अंतर्गत आता है। यह दर्शाता है कि कैसे नई तकनीकें सामाजिक व्यवहार का अध्ययन करने के लिए उपयोग की जा रही हैं, खासकर लिंग और परिवार के संदर्भ में।

  16. निम्नलिखित में से कौन ‘आदिवासी समुदाय’ (Tribal Community) की एक विशेषता नहीं है?

    • (A) पृथक निवास (Isolated Habitation)
    • (B) सामान्य संस्कृति और भाषा
    • (C) स्तरीकृत सामाजिक संरचना और जाति पदानुक्रम
    • (D) जीविका के लिए प्रकृति पर निर्भरता

    सही उत्तर: (C) स्तरीकृत सामाजिक संरचना और जाति पदानुक्रम

    विस्तृत व्याख्या:

    आदिवासी समुदाय अपनी विशिष्ट विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं, जिनमें अक्सर पृथक निवास स्थान, एक अद्वितीय सामान्य संस्कृति, भाषा और पारंपरिक विश्वास प्रणाली शामिल होती है। वे जीविका के लिए प्रकृति पर अत्यधिक निर्भर होते हैं (जैसे शिकार, इकट्ठा करना, झूम खेती)। हालांकि, जाति पदानुक्रम और कठोर स्तरीकृत सामाजिक संरचना भारतीय जाति व्यवस्था की विशेषता है, न कि पारंपरिक आदिवासी समाजों की। आदिवासी समाजों में आमतौर पर अधिक समतावादी संरचनाएं होती हैं, हालांकि आंतरिक स्तरीकरण के कुछ रूप मौजूद हो सकते हैं।

  17. ‘सामाजिक गतिशीलता’ (Social Mobility) क्या है?

    • (A) एक समाज से दूसरे समाज में लोगों का पलायन
    • (B) एक व्यक्ति या समूह की सामाजिक स्थिति में परिवर्तन
    • (C) सामाजिक आंदोलन और क्रांति
    • (D) सांस्कृतिक आदान-प्रदान

    सही उत्तर: (B) एक व्यक्ति या समूह की सामाजिक स्थिति में परिवर्तन

    विस्तृत व्याख्या:

    सामाजिक गतिशीलता एक व्यक्ति या समूह की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में परिवर्तन को संदर्भित करती है। यह ऊपर की ओर (ऊंची स्थिति में जाना), नीचे की ओर (निम्न स्थिति में जाना), अंतर-पीढ़ीगत (Inter-generational – एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में परिवर्तन), या अंतरा-पीढ़ीगत (Intra-generational – एक ही पीढ़ी के भीतर व्यक्ति की स्थिति में परिवर्तन) हो सकती है। यह वर्ग, जाति, या आय जैसे सामाजिक स्तरीकरण के पैमाने पर स्थिति में बदलाव का अध्ययन करती है। लोगों का पलायन ‘प्रवास’ है, और सामाजिक आंदोलन ‘सामाजिक परिवर्तन’ से संबंधित हैं।

  18. समाचार में ‘स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने के अनुसंधान’ (Health and Aging Research) के लिए संघीय अनुदान का उल्लेख किस सामाजिक संस्था के समाजशास्त्र से निकटता से संबंधित है?

    • (A) परिवार
    • (B) शिक्षा
    • (C) अर्थव्यवस्था
    • (D) चिकित्सा और जनसांख्यिकी

    सही उत्तर: (D) चिकित्सा और जनसांख्यिकी

    विस्तृत व्याख्या:

    ‘स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने के अनुसंधान’ के लिए संघीय अनुदान का उल्लेख सीधे तौर पर चिकित्सा के समाजशास्त्र (Sociology of Medicine) से संबंधित है, जो स्वास्थ्य, बीमारी और चिकित्सा प्रणालियों के सामाजिक पहलुओं का अध्ययन करता है। यह जनसांख्यिकी (Demography) से भी निकटता से जुड़ा है, जो जनसंख्या के आकार, संरचना, वितरण और परिवर्तनों का अध्ययन करता है, जिसमें उम्र बढ़ने वाली आबादी भी शामिल है। ये दोनों क्षेत्र सामाजिक प्रवृत्तियों और सामाजिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखते हैं। अन्य विकल्प प्रासंगिक हैं, लेकिन ‘चिकित्सा और जनसांख्यिकी’ सबसे सीधा संबंध दर्शाते हैं।

  19. किसने तर्क दिया कि पूंजीवाद का विकास ‘प्रोटेस्टेंट नैतिकता’ (Protestant Ethic) से प्रभावित था?

    • (A) कार्ल मार्क्स
    • (B) मैक्स वेबर
    • (C) एमिल दुर्खीम
    • (D) जॉर्ज सिमेल

    सही उत्तर: (B) मैक्स वेबर

    विस्तृत व्याख्या:

    मैक्स वेबर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “द प्रोटेस्टेंट एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैपिटलिज्म” (The Protestant Ethic and the Spirit of Capitalism) में तर्क दिया कि प्रोटेस्टेंट धर्म, विशेष रूप से केल्विनवाद, में कुछ ऐसी नैतिक मूल्य प्रणालियाँ थीं जिन्होंने पूंजीवाद के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाईं। ‘कार्य नीति’, ‘तपस्या’, ‘पुनर्विनियोग’ (reinvestment) और ‘बचत’ जैसे मूल्य पूंजीवादी उद्यमशीलता और धन संचय को बढ़ावा देते थे। वेबर ने धर्म और आर्थिक प्रणाली के बीच एक जटिल संबंध पर जोर दिया। मार्क्स ने पूंजीवाद को आर्थिक कारकों से समझा, दुर्खीम ने सामाजिक एकजुटता पर ध्यान केंद्रित किया, और सिमेल ने महानगरीय जीवन का अध्ययन किया।

  20. समाजशास्त्र में ‘आत्मसातकरण’ (Assimilation) क्या है?

    • (A) विभिन्न संस्कृतियों का सह-अस्तित्व
    • (B) एक अल्पसंख्यक समूह का प्रभावी संस्कृति में पूरी तरह से एकीकृत होना
    • (C) अपनी संस्कृति को त्याग कर दूसरों की नकल करना
    • (D) संस्कृतियों के बीच संघर्ष

    सही उत्तर: (B) एक अल्पसंख्यक समूह का प्रभावी संस्कृति में पूरी तरह से एकीकृत होना

    विस्तृत व्याख्या:

    आत्मसातकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक अल्पसंख्यक समूह या नवागंतुक संस्कृति प्रभावी या मेजबान संस्कृति की भाषा, मूल्यों, मानदंडों और व्यवहारों को पूरी तरह से अपनाता है, अक्सर अपनी मूल सांस्कृतिक पहचान को त्याग देता है। यह एक सांस्कृतिक एकरूपता की ओर ले जाता है। बहुसंस्कृतिवाद (Multiculturalism) विभिन्न संस्कृतियों के सह-अस्तित्व को संदर्भित करता है, जबकि आत्मसातकरण एकीकरण के एक विशेष रूप को दर्शाता है। यह अक्सर प्रवास और अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक संबंधों के संदर्भ में अध्ययन किया जाता है।

  21. भारत में ग्रामीण समाज की मुख्य विशेषता क्या है?

    • (A) उच्च जनसंख्या घनत्व और तीव्र गतिशीलता
    • (B) कृषि प्राथमिक व्यवसाय और सामुदायिक जीवन का महत्व
    • (C) अवैयक्तिक संबंध और औपचारिक सामाजिक नियंत्रण
    • (D) प्रौद्योगिकी पर उच्च निर्भरता और सेवा क्षेत्र का प्रभुत्व

    सही उत्तर: (B) कृषि प्राथमिक व्यवसाय और सामुदायिक जीवन का महत्व

    विस्तृत व्याख्या:

    ग्रामीण समाज की पारंपरिक विशेषताओं में कम जनसंख्या घनत्व, कृषि का प्राथमिक व्यवसाय होना, घनिष्ठ और व्यक्तिगत संबंध (प्राथमिक समूह), समुदाय और परंपराओं का उच्च महत्व, और सामाजिक नियंत्रण के अनौपचारिक साधन शामिल हैं। विकल्प (A), (C), और (D) शहरी समाजों की विशेषताएँ हैं, जिनमें उच्च जनसंख्या घनत्व, अवैयक्तिक संबंध, औद्योगिक और सेवा क्षेत्र का प्रभुत्व, और प्रौद्योगिकी पर उच्च निर्भरता शामिल है।

  22. समाचार में ‘आपराधिक समाचारों’ (Crime News) के क्लिकबेट प्रकृति का उल्लेख किस समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से सबसे अधिक संबंधित है?

    • (A) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism)
    • (B) संघर्ष सिद्धांत (Conflict Theory)
    • (C) मीडिया का समाजशास्त्र (Sociology of Media)
    • (D) कार्यात्मकता (Functionalism)

    सही उत्तर: (C) मीडिया का समाजशास्त्र (Sociology of Media)

    विस्तृत व्याख्या:

    समाचार में “क्लिकबेट क्राइम न्यूज? मीट्रिक्स एंड प्रोफेशनल अथॉरिटी इन लोकल न्यूज़रूम्स” शीर्षक वाले लेख का उल्लेख सीधे तौर पर मीडिया के समाजशास्त्र से संबंधित है। मीडिया का समाजशास्त्र इस बात का अध्ययन करता है कि मीडिया सामाजिक दुनिया को कैसे आकार देता है, कैसे जानकारी का निर्माण और प्रसार किया जाता है, और मीडिया की संरचनाएं और प्रथाएं समाज को कैसे प्रभावित करती हैं। ‘क्लिकबेट’ और ‘मीट्रिक्स’ डिजिटल युग में समाचार उत्पादन और उपभोग के नए आयामों पर प्रकाश डालते हैं, जो मीडिया के समाजशास्त्र के लिए केंद्रीय विषय हैं। यह विचलन (Deviance) या सामाजिक समस्याओं के समाजशास्त्र से भी संबंधित हो सकता है, लेकिन ‘मीडिया’ मुख्य फोकस है।

  23. दुर्खीम के अनुसार, सामाजिक एकजुटता के लिए आवश्यक ‘सामूहिक चेतना’ (Collective Conscience) किस प्रकार के समाज में अधिक मजबूत होती है?

    • (A) आधुनिक, औद्योगिक समाज
    • (B) सरल, पारंपरिक समाज
    • (C) महानगरीय समाज
    • (D) उत्तर-औद्योगिक समाज

    सही उत्तर: (B) सरल, पारंपरिक समाज

    विस्तृत व्याख्या:

    एमिल दुर्खीम ने दो प्रकार की सामाजिक एकजुटता की पहचान की: यांत्रिक एकजुटता (Mechanical Solidarity) और सावयवी एकजुटता (Organic Solidarity)। यांत्रिक एकजुटता सरल, पारंपरिक समाजों में पाई जाती है जहाँ श्रम का विभाजन कम होता है और लोग विचारों, विश्वासों और भावनाओं में समान होते हैं। ऐसे समाजों में ‘सामूहिक चेतना’ बहुत मजबूत होती है और व्यक्तिगत भिन्नताओं पर प्रबल होती है। आधुनिक, औद्योगिक समाजों में सावयवी एकजुटता होती है, जहाँ श्रम का अत्यधिक विभाजन होता है और व्यक्ति एक-दूसरे पर कार्यात्मक रूप से निर्भर होते हैं, जिससे सामूहिक चेतना कमजोर होती है।

  24. ‘सामाजिक भूमिका’ (Social Role) क्या है?

    • (A) समाज में व्यक्ति की सामाजिक स्थिति
    • (B) किसी विशिष्ट सामाजिक स्थिति से जुड़ी अपेक्षित व्यवहार पद्धतियाँ
    • (C) एक समूह के भीतर व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान
    • (D) समाज में शक्ति संरचना

    सही उत्तर: (B) किसी विशिष्ट सामाजिक स्थिति से जुड़ी अपेक्षित व्यवहार पद्धतियाँ

    विस्तृत व्याख्या:

    समाजशास्त्र में, ‘सामाजिक भूमिका’ उन अपेक्षित व्यवहारों, अधिकारों, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के सेट को संदर्भित करती है जो किसी व्यक्ति से समाज में उसकी विशिष्ट सामाजिक स्थिति (जैसे छात्र, माता-पिता, शिक्षक) के कारण अपेक्षित होते हैं। एक ‘सामाजिक स्थिति’ (Social Status) समाज में व्यक्ति की रैंक या प्रतिष्ठा है, जबकि ‘भूमिका’ उस स्थिति से जुड़ा गतिशील पहलू है – अर्थात, व्यक्ति उस स्थिति में कैसे कार्य करता है। यह सामाजिक अंतःक्रिया और सामाजिक संरचना का एक महत्वपूर्ण घटक है।

  25. समाचार में मार्टिनेज-अरंडा के ‘आप्रवासन निरोध’ (Immigration Detention) के दीर्घकालिक प्रभावों पर शोध का उल्लेख किस व्यापक समाजशास्त्रीय क्षेत्र से संबंधित है?

    • (A) परिवार का समाजशास्त्र
    • (B) विचलन का समाजशास्त्र
    • (C) प्रवासन का समाजशास्त्र और राज्य का समाजशास्त्र
    • (D) शिक्षा का समाजशास्त्र

    सही उत्तर: (C) प्रवासन का समाजशास्त्र और राज्य का समाजशास्त्र

    विस्तृत व्याख्या:

    मार्टिनेज-अरंडा का ‘आप्रवासन निरोध’ के दीर्घकालिक प्रभावों पर शोध सीधे तौर पर प्रवासन के समाजशास्त्र (Sociology of Migration) से संबंधित है, जो प्रवास के कारणों, प्रक्रियाओं और परिणामों का अध्ययन करता है, जिसमें प्रवासियों पर राज्य की नीतियों का प्रभाव भी शामिल है। ‘निरोध’ (Detention) राज्य की शक्ति और नियंत्रण का एक रूप है, इसलिए यह राज्य के समाजशास्त्र (Sociology of the State) से भी निकटता से संबंधित है, जो राज्य के कार्यों, उसकी संस्थाओं और नागरिकों के साथ उसके संबंधों की पड़ताल करता है। यह एक महत्वपूर्ण समकालीन सामाजिक समस्या है।

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