नमस्कार उम्मीदवारों!
\n
समाजशास्त्र की जटिलताओं को समझने और अपनी तैयारी को धार देने के लिए यह दैनिक क्विज़ एक बेहतरीन अवसर है। चाहे वह शास्त्रीय विचारक हों या समकालीन सामाजिक मुद्दे, ये प्रश्न आपकी विश्लेषणात्मक क्षमता को चुनौती देंगे और आपकी वैचारिक स्पष्टता को बढ़ाएंगे। आइए, अपनी तैयारी का आकलन करें और समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से दुनिया को देखना सीखें!
\n
\n\n
- \n \n
- एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब:\n
- \n
- (A) समाज में बहुत अधिक नियम होते हैं।
- (B) सामाजिक मानदंडों और मूल्यों का पतन हो जाता है।
- (C) व्यक्ति समाज से पूरी तरह कट जाता है।
- (D) आर्थिक असमानता समाप्त हो जाती है।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) सामाजिक मानदंडों और मूल्यों का पतन हो जाता है।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने ‘एनोमी’ शब्द का उपयोग उस स्थिति के लिए किया जहाँ समाज में नियमहीनता (normlessness) व्याप्त हो जाती है। यह अक्सर तीव्र सामाजिक परिवर्तन या आर्थिक संकट के समय होता है, जिससे व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है। यह अवधारणा उनकी प्रसिद्ध कृति ‘Suicide’ में विस्तार से वर्णित है। अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि एनोमी नियमों की अधिकता नहीं, बल्कि उनके अभाव या विखंडन की स्थिति है।\n
\n
- कार्ल मार्क्स के ‘अलगाव’ (Alienation) के सिद्धांत में, श्रमिक सबसे पहले किससे अलग होता है?\n
- \n
- (A) समाज से
- (B) अपने सहकर्मियों से
- (C) अपने द्वारा उत्पादित वस्तु से
- (D) अपनी मानवीय प्रकृति से
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (C) अपने द्वारा उत्पादित वस्तु से
\n
\n विस्तृत व्याख्या: मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिक का अपनी मेहनत से बनाई गई वस्तु पर कोई नियंत्रण नहीं रहता। वह उत्पाद उसके लिए एक बाहरी शक्ति बन जाता है। मार्क्स ने अलगाव के चार स्तर बताए हैं: उत्पाद से, उत्पादन की प्रक्रिया से, अपनी प्रजाति (Species-being) से और अन्य मनुष्यों से।\n
\n
- मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) क्या है?\n
- \n
- (A) समाज का एक नैतिक लक्ष्य।
- (B) एक वास्तविक सामाजिक वास्तविकता का हूबहू चित्रण।
- (C) एक विश्लेषणात्मक उपकरण जो विशिष्ट लक्षणों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है।
- (D) एक ऐसा समाज जहाँ कोई संघर्ष न हो।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (C) एक विश्लेषणात्मक उपकरण जो विशिष्ट लक्षणों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: ‘आदर्श प्रारूप’ कोई वास्तविक वस्तु नहीं है, बल्कि एक मानसिक निर्माण (Mental Construct) है। इसका उपयोग समाजशास्त्री जटिल सामाजिक घटनाओं की तुलना करने और उन्हें समझने के लिए एक मानक के रूप में करते हैं। यह नैतिकता से संबंधित ‘आदर्श’ नहीं है, बल्कि पद्धतिगत (Methodological) है।\n
\n
- निम्नलिखित में से कौन सा सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) का एक ‘बंद’ (Closed) तंत्र है?\n
- \n
- (A) वर्ग (Class)
- (B) जाति (Caste)
- (C) पेशेवर स्थिति (Professional Status)
- (D) शैक्षणिक योग्यता
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) जाति (Caste)
\n
\n विस्तृत व्याख्या: ‘बंद तंत्र’ वह होता है जहाँ व्यक्ति की सामाजिक स्थिति जन्म से निर्धारित होती है और इसमें गतिशीलता (Mobility) लगभग असंभव होती है। जाति व्यवस्था इसका सटीक उदाहरण है। इसके विपरीत, वर्ग एक ‘खुला तंत्र’ है जहाँ शिक्षा और धन के माध्यम से स्थिति बदली जा सकती है।\n
\n
- ‘सामाजिक संरचना’ (Social Structure) शब्द का सबसे सटीक अर्थ क्या है?\n
- \n
- (A) समाज के सभी व्यक्तियों का समूह।
- (B) सामाजिक संबंधों और संस्थाओं की एक व्यवस्थित व्यवस्था।
- (C) केवल सरकार और कानून का ढांचा।
- (D) किसी शहर की भौतिक बनावट।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) सामाजिक संबंधों और संस्थाओं की एक व्यवस्थित व्यवस्था।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्र में संरचना का तात्पर्य उन स्थिर और पुनरावर्ती संबंधों से है जो समाज को एक निश्चित आकार देते हैं। इसमें परिवार, धर्म, राज्य और आर्थिक व्यवस्था जैसी संस्थाएं शामिल होती हैं जो व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करती हैं।\n
\n
- टैलकोट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ का क्या अर्थ है?\n
- \n
- (A) Legitimation (वैधीकरण)
- (B) Latency (सुप्त अवस्था/तनाव प्रबंधन)
- (C) Leadership (नेतृत्व)
- (D) Law (कानून)
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) Latency (सुप्त अवस्था/तनाव प्रबंधन)
\n
\n विस्तृत व्याख्या: पार्सन्स का AGIL मॉडल समाज की स्थिरता के लिए चार कार्यात्मक आवश्यकताएं बताता है: Adaptation (अनुकूलन), Goal Attainment (लक्ष्य प्राप्ति), Integration (एकीकरण) और Latency (सुप्त अवस्था)। Latency का अर्थ है सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना और तनाव को प्रबंधित करना ताकि व्यवस्था बनी रहे।\n
\n
- रॉबर्ट के. मर्टन के अनुसार ‘अव्यक्त कार्य’ (Latent Function) क्या होता है?\n
- \n
- (A) वह कार्य जो स्पष्ट रूप से घोषित किया गया हो।
- (B) समाज के लिए हानिकारक कार्य।
- (C) वह अनपेक्षित और अनजाने में होने वाला परिणाम।
- (D) वह कार्य जो पूरी तरह से विफल हो गया हो।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (C) वह अनपेक्षित और अनजाने में होने वाला परिणाम।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: मर्टन ने कार्यों को दो भागों में बांटा: प्रकट (Manifest) और अव्यक्त (Latent)। प्रकट कार्य वह है जिसका उद्देश्य ज्ञात होता है, जबकि अव्यक्त कार्य वह परिणाम है जिसकी उम्मीद नहीं की गई थी। उदाहरण के लिए, कॉलेज जाने का प्रकट कार्य डिग्री पाना है, लेकिन अव्यक्त कार्य जीवनसाथी खोजना या नेटवर्किंग करना हो सकता है।\n
\n
- उस नातेदारी प्रणाली को क्या कहते हैं जिसमें वंश केवल पिता की ओर से गिना जाता है?\n
- \n
- (A) द्विपक्षीय (Bilateral)
- (B) मातृवंशीय (Matrilineal)
- (C) पितृवंशीय (Patrilineal)
- (D) सामूहिक (Collective)
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (C) पितृवंशीय (Patrilineal)
\n
\n विस्तृत व्याख्या: पितृवंशीय व्यवस्था में वंश, संपत्ति और नाम का हस्तांतरण पिता से पुत्र को होता है। मातृवंशीय में यह माता की ओर से होता है, और द्विपक्षीय में दोनों पक्षों को समान महत्व दिया जाता है।\n
\n
- पवित्र (Sacred) और अपवित्र (Profane) के बीच का अंतर किस समाजशास्त्री ने स्थापित किया?\n
- \n
- (A) मैक्स वेबर
- (B) एमिल दुर्खीम
- (C) कार्ल मार्क्स
- (D) अगस्त कॉम्टे
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) एमिल दुर्खीम
\n
\n विस्तृत व्याख्या: अपनी पुस्तक ‘The Elementary Forms of the Religious Life’ में दुर्खीम ने बताया कि धर्म का आधार पवित्र और अपवित्र का विभाजन है। पवित्र वह है जिसे समाज ने विशेष सम्मान दिया है और जो सामान्य दैनिक जीवन (अपवित्र) से अलग है।\n
\n
- ‘एथ्नोग्राफी’ (Ethnography) अनुसंधान की किस विधि का हिस्सा है?\n
- \n
- (A) मात्रात्मक विधि (Quantitative)
- (B) गुणात्मक विधि (Qualitative)
- (C) प्रयोगात्मक विधि (Experimental)
- (D) सर्वेक्षण विधि (Survey)
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) गुणात्मक विधि (Qualitative)
\n
\n विस्तृत व्याख्या: एथ्नोग्राफी में शोधकर्ता किसी विशिष्ट सांस्कृतिक समूह के बीच रहकर, उनके व्यवहार और परंपराओं का गहन अवलोकन (Participant Observation) करता है। इसमें आंकड़ों के बजाय शब्दों, अनुभवों और अर्थों पर ध्यान दिया जाता है।\n
\n
- अनुसंधान में ‘विश्वसनीयता’ (Reliability) का क्या अर्थ है?\n
- \n
- (A) यह मापना कि क्या उपकरण वास्तव में वही माप रहा है जिसे मापने का दावा किया गया है।
- (B) परिणामों की स्थिरता, यानी बार-बार परीक्षण करने पर समान परिणाम मिलना।
- (C) डेटा का पूरी तरह से निष्पक्ष होना।
- (D) नमूने का जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) परिणामों की स्थिरता, यानी बार-बार परीक्षण करने पर समान परिणाम मिलना।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: विश्वसनीयता का संबंध स्थिरता (Consistency) से है। यदि एक ही टेस्ट को अलग-अलग समय पर दोहराया जाए और परिणाम समान आएं, तो वह विश्वसनीय है। विकल्प (A) ‘वैधता’ (Validity) की परिभाषा है।\n
\n
- एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
- \n
- (A) उच्च जातियों का निम्न जातियों के रीति-रिवाजों को अपनाना।
- (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाना।
- (C) पश्चिमी संस्कृति का भारतीय समाज में प्रवेश।
- (D) जाति व्यवस्था का पूरी तरह से समाप्त हो जाना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाना।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कोई ‘निम्न’ हिंदू जाति या समूह किसी ‘उच्च’ जाति (विशेषकर द्विज जातियों) के रीति-रिवाजों, कर्मकांडों और विचारधारा को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करता है।\n
\n
- जी.एस. घुर्ये ने जनजातियों (Tribes) को क्या माना था?\n
- \n
- (A) पूरी तरह से अलग नस्लीय समूह।
- (B) पिछड़े हुए हिंदू (Backward Hindus)।
- (C) बाहरी आक्रमणकारियों के वंशज।
- (D) आधुनिक समाज के अग्रदूत।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) पिछड़े हुए हिंदू (Backward Hindus)
\n
\n विस्तृत व्याख्या: जी.एस. घुर्ये का मानना था कि भारतीय जनजातियाँ वास्तव में हिंदू समाज का ही हिस्सा हैं, जो केवल भौगोलिक अलगाव के कारण पिछड़ गईं। यह दृष्टिकोण जनजातियों और जाति व्यवस्था के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है।\n
\n
- शहरीकरण (Urbanization) का नातेदारी प्रणालियों (Kinship Networks) पर सामान्य प्रभाव क्या पड़ता है?\n
- \n
- (A) नातेदारी संबंधों का और अधिक मजबूत होना।
- (B) विस्तारित परिवार का एकल परिवार (Nuclear Family) में बदलना।
- (C) सामुदायिक बंधनों में वृद्धि होना।
- (D) पारंपरिक रीति-रिवाजों का पूर्णतः लोप।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) विस्तारित परिवार का एकल परिवार (Nuclear Family) में बदलना।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण लोग काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं, जिससे संयुक्त परिवारों का विखंडन होता है और एकल परिवारों का चलन बढ़ता है। हालिया शोध (जैसे चीन के लियांगशान गांवों का अध्ययन) भी दिखाते हैं कि तीव्र शहरीकरण नातेदारी नेटवर्क को पुनर्गठित कर रहा है।\n
\n
- आधुनिक समाजशास्त्र में, AI डिटेक्शन और अकादमिक अखंडता (Academic Integrity) का मुद्दा किस उप-क्षेत्र से संबंधित है?\n
- \n
- (A) ग्रामीण समाजशास्त्र
- (B) शिक्षा का समाजशास्त्र (Sociology of Education)
- (C) औद्योगिक समाजशास्त्र
- (D) राजनीतिक समाजशास्त्र
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) शिक्षा का समाजशास्त्र (Sociology of Education)
\n
\n विस्तृत व्याख्या: AI का उपयोग ज्ञान के सृजन, मूल्यांकन और शिक्षण विधियों को बदल रहा है। यह शिक्षा के समाजशास्त्र के दायरे में आता है क्योंकि यह इस बात का विश्लेषण करता है कि कैसे तकनीक शैक्षणिक संस्थानों की संरचना और नैतिक मानदंडों को प्रभावित करती है।\n
\n
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) में क्या अंतर है?\n
- \n
- (A) ‘मैं’ सामाजिक अपेक्षाएं हैं और ‘मुझे’ व्यक्तिगत इच्छा।
- (B) ‘मैं’ व्यक्ति का स्वतःस्फूर्त (Spontaneous) पक्ष है और ‘मुझे’ समाज का आंतरिक रूप।
- (C) दोनों एक ही हैं और इनमें कोई अंतर नहीं है।
- (D) ‘मुझे’ जन्मजात होता है और ‘मैं’ सीखा जाता है।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) ‘मैं’ व्यक्ति का स्वतःस्फूर्त (Spontaneous) पक्ष है और ‘मुझे’ समाज का आंतरिक रूप।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: मीड के प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) में, ‘Me’ वह हिस्सा है जो समाज के नियमों और दूसरों की अपेक्षाओं को आत्मसात करता है, जबकि ‘I’ वह प्रतिक्रिया है जो व्यक्ति उन अपेक्षाओं के प्रति देता है।\n
\n
- ‘सांस्कृतिक सापेक्षवाद’ (Cultural Relativism) का क्या अर्थ है?\n
- \n
- (A) अपनी संस्कृति को सर्वश्रेष्ठ मानना।
- (B) अन्य संस्कृतियों को अपनी संस्कृति के मानदंडों से आंकना।
- (C) किसी संस्कृति को उसके अपने संदर्भ और मूल्यों के आधार पर समझना।
- (D) सभी संस्कृतियों का एक ही वैश्विक संस्कृति में विलीन हो जाना।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (C) किसी संस्कृति को उसके अपने संदर्भ और मूल्यों के आधार पर समझना।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: सांस्कृतिक सापेक्षवाद यह मानता है कि कोई भी संस्कृति दूसरी संस्कृति से ‘श्रेष्ठ’ या ‘निम्न’ नहीं होती। विकल्प (A) और (B) ‘नृजातीयता’ (Ethnocentrism) के उदाहरण हैं।\n
\n
- पियरे बोर्ड्यू (Pierre Bourdieu) के अनुसार ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) का क्या प्रभाव पड़ता है?\n
- \n
- (A) यह सभी बच्चों को समान अवसर प्रदान करती है।
- (B) यह केवल आर्थिक धन से संबंधित है।
- (C) यह उच्च वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्रणाली में लाभ पहुँचाकर असमानता को बनाए रखती है।
- (D) यह जाति व्यवस्था को समाप्त करती है।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (C) यह उच्च वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्रणाली में लाभ पहुँचाकर असमानता को बनाए रखती है।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: बोर्ड्यू का तर्क है कि शिक्षा प्रणाली केवल ज्ञान नहीं देती, बल्कि उच्च वर्ग के भाषाई कौशल, शिष्टाचार और ज्ञान (सांस्कृतिक पूंजी) को मान्यता देती है, जिससे निम्न वर्ग के बच्चे पिछड़ जाते हैं। यह ‘सामाजिक पुनरुत्पादन’ (Social Reproduction) की प्रक्रिया है।\n
\n
- प्राथमिक समाजीकरण (Primary Socialization) मुख्य रूप से कहाँ होता है?\n
- \n
- (A) स्कूल में
- (B) कार्यस्थल पर
- (C) परिवार में
- (D) मीडिया के माध्यम से
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (C) परिवार में
\n
\n विस्तृत व्याख्या: प्राथमिक समाजीकरण बचपन के शुरुआती वर्षों में होता है, जहाँ बच्चा अपने परिवार से बुनियादी भाषा, व्यवहार और मूल्य सीखता है। स्कूल और कार्यस्थल ‘द्वितीयक समाजीकरण’ (Secondary Socialization) के केंद्र हैं।\n
\n
- ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) से क्या तात्पर्य है?\n
- \n
- (A) इंटरनेट का उपयोग केवल उच्च जातियों द्वारा किया जाना।
- (B) तकनीक तक पहुँच में जाति-आधारित असमानता और डिजिटल स्पेस में जातिगत भेदभाव का बने रहना।
- (C) जाति व्यवस्था को खत्म करने के लिए डिजिटल ऐप्स का उपयोग।
- (D) केवल ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) तकनीक तक पहुँच में जाति-आधारित असमानता और डिजिटल स्पेस में जातिगत भेदभाव का बने रहना।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: समकालीन समाजशास्त्र में यह देखा गया है कि डिजिटल क्रांति के बावजूद, तकनीक तक पहुँच (Access) और उसके उपयोग के तरीके अभी भी सामाजिक स्तरीकरण (जैसे जाति) से प्रभावित हैं। यह डिजिटल डिवाइड का एक सामाजिक आयाम है।\n
\n
- फर्डिनेंड टोनीज़ (Ferdinand Tönnies) ने ‘गेमेनशाफ्ट’ (Gemeinschaft) और ‘गेसेलशाफ्ट’ (Gesellschaft) के बीच क्या अंतर बताया?\n
- \n
- (A) गेमेनशाफ्ट शहरी समाज है और गेसेलशाफ्ट ग्रामीण।
- (B) गेमेनशाफ्ट सामुदायिक (पारंपरिक) संबंध हैं और गेसेलशाफ्ट औपचारिक (आधुनिक) संबंध हैं।
- (C) दोनों में कोई अंतर नहीं है।
- (D) गेमेनशाफ्ट केवल राजनीतिक संबंधों को दर्शाता है।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) गेमेनशाफ्ट सामुदायिक (पारंपरिक) संबंध हैं और गेसेलशाफ्ट औपचारिक (आधुनिक) संबंध हैं।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: ‘गेमेनशाफ्ट’ (Community) में संबंध गहरे, व्यक्तिगत और भावनात्मक होते हैं (जैसे गाँव), जबकि ‘गेसेलशाफ्ट’ (Society) में संबंध स्वार्थी, औपचारिक और संविदात्मक होते हैं (जैसे शहर या बाजार)।\n
\n
- ‘स्तरीकृत नमूनाकरण’ (Stratified Sampling) का उपयोग कब किया जाता है?\n
- \n
- (A) जब जनसंख्या बहुत छोटी हो।
- (B) जब जनसंख्या में अलग-अलग उप-समूह (Strata) हों और प्रत्येक का प्रतिनिधित्व आवश्यक हो।
- (C) जब शोधकर्ता केवल अपनी सुविधा के अनुसार नमूने चुनता है।
- (D) जब नमूने पूरी तरह से यादृच्छिक (Random) हों।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) जब जनसंख्या में अलग-अलग उप-समूह (Strata) हों और प्रत्येक का प्रतिनिधित्व आवश्यक हो।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: स्तरीकृत नमूनाकरण में पूरी जनसंख्या को कुछ श्रेणियों (जैसे लिंग, आयु, आय) में बांटा जाता है और फिर प्रत्येक श्रेणी से यादृच्छिक नमूने लिए जाते हैं ताकि परिणाम अधिक सटीक और समावेशी हों।\n
\n
- प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले विस्थापन और उसके बाद के सामाजिक सामंजस्य (Coping Strategies) का अध्ययन किस क्षेत्र में आता है?\n
- \n
- (A) शहरी समाजशास्त्र
- (B) पर्यावरणीय समाजशास्त्र (Environmental Sociology)
- (C) औद्योगिक समाजशास्त्र
- (D) कानूनी समाजशास्त्र
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) पर्यावरणीय समाजशास्त्र (Environmental Sociology)
\n
\n विस्तृत व्याख्या: पर्यावरणीय समाजशास्त्र इस बात का अध्ययन करता है कि मानव समाज और पर्यावरण एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं। बाढ़, भूकंप या जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाला विस्थापन और उससे उत्पन्न सामाजिक तनाव इसी के अंतर्गत आते हैं।\n
\n
- अगस्त कॉम्टे के ‘तीन स्तरों के नियम’ (Law of Three Stages) का सही क्रम क्या है?\n
- \n
- (A) आध्यात्मिक $\rightarrow$ तत्वमीमांसीय $\rightarrow$ प्रत्यक्षवादी (Positive)
- (B) प्रत्यक्षवादी $\rightarrow$ आध्यात्मिक $\rightarrow$ तत्वमीमांसीय
- (C) तत्वमीमांसीय $\rightarrow$ आध्यात्मिक $\rightarrow$ प्रत्यक्षवादी
- (D) आध्यात्मिक $\rightarrow$ प्रत्यक्षवादी $\rightarrow$ तत्वमीमांसीय
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (A) आध्यात्मिक $\rightarrow$ तत्वमीमांसीय $\rightarrow$ प्रत्यक्षवादी (Positive)
\n
\n विस्तृत व्याख्या: कॉम्टे के अनुसार मानव विचार तीन चरणों से गुजरते हैं: 1. धार्मिक/आध्यात्मिक (Theological), 2. अमूर्त/तत्वमीमांसीय (Metaphysical), और 3. वैज्ञानिक/प्रत्यक्षवादी (Positive), जहाँ केवल अनुभवजन्य प्रमाणों को माना जाता है।\n
\n
- आधुनिक समाज में ‘अति-उपभोक्तावाद’ और उसके कारण होने वाले मानसिक तनाव को समाजशास्त्रीय रूप से कैसे देखा जा सकता है?\n
- \n
- (A) केवल एक मनोवैज्ञानिक समस्या के रूप में।
- (B) सामाजिक लक्ष्यों और उन्हें प्राप्त करने के साधनों के बीच असंतुलन (मर्टन का तनाव सिद्धांत) के रूप में।
- (C) केवल गरीबी के कारण।
- (D) जैविक प्रवृत्ति के रूप में।
\n
\n
\n
\n
\n
सही उत्तर: (B) सामाजिक लक्ष्यों और उन्हें प्राप्त करने के साधनों के बीच असंतुलन (मर्टन का तनाव सिद्धांत) के रूप में।
\n
\n विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट मर्टन का ‘Strain Theory’ बताता है कि जब समाज सफलता के लक्ष्य (जैसे अमीर बनना) तो तय करता है, लेकिन सभी को उन्हें पाने के कानूनी साधन नहीं मिलते, तो व्यक्ति तनाव महसूस करता है और कभी-कभी विचलन (Deviance) या मानसिक अवसाद का शिकार हो जाता है।\n
\n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n\n \n
\n
\n\n
\n
तैयारी टिप: समाजशास्त्र केवल रटने का विषय नहीं है, बल्कि इसे अपने आसपास के समाज से जोड़कर देखने का विषय है। हर अवधारणा को एक वास्तविक उदाहरण के साथ समझने का प्रयास करें। शुभकामनाएँ!
सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।