भारतीय राजव्यवस्था क्विज़: अपनी संवैधानिक समझ का परीक्षण करें
भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, अपने संविधान की नींव पर खड़ा है। यह दस्तावेज़ न केवल हमारे शासन का मार्गदर्शन करता है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों को भी परिभाषित करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए भारतीय राजव्यवस्था की गहन समझ अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दैनिक अभ्यास सेट आपकी वैचारिक स्पष्टता को चुनौती देने और भारतीय संविधान के विभिन्न पहलुओं पर आपके ज्ञान को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अपनी तैयारी का आकलन करें और संवैधानिक विशेषज्ञ बनें!
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भारत के संविधान के निर्माण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव सीधे भारत के लोगों द्वारा किया गया था।
- संविधान सभा की पहली बैठक दिसंबर 1946 में हुई थी।
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर संविधान सभा के अध्यक्ष थे।
- संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान को अपनाया।
सही विकल्प चुनें:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- केवल 2, 3 और 4
सही उत्तर: b) केवल 2 और 4
विस्तृत व्याख्या:
कथन 1 गलत है: संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया गया था। उन्हें सीधे भारत के लोगों द्वारा नहीं चुना गया था।
कथन 2 सही है: संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी। डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष चुने गए थे।
कथन 3 गलत है: डॉ. बी.आर. अंबेडकर प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे, न कि संविधान सभा के। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जिन्हें 11 दिसंबर 1946 को चुना गया था।
कथन 4 सही है: संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान को अपनाया और अधिनियमित किया। इस दिन को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। संविधान के कुछ प्रावधान उसी दिन लागू हुए, जबकि अधिकांश प्रावधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुए, जिसे इसके ‘प्रारंभ की तिथि’ के रूप में जाना जाता है।
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भारतीय संविधान की निम्नलिखित में से कौन सी विशेषता ब्रिटिश संविधान से नहीं ली गई है?
- संसदीय शासन प्रणाली
- विधि का शासन
- एकल नागरिकता
- न्यायिक समीक्षा
सही उत्तर: d) न्यायिक समीक्षा
विस्तृत व्याख्या:
भारतीय संविधान में कई देशों के संविधानों से प्रावधान उधार लिए गए हैं।
- संसदीय शासन प्रणाली, विधि का शासन, एकल नागरिकता, कैबिनेट प्रणाली, रिट और द्विसदनीयता ब्रिटिश संविधान से ली गई हैं।
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की अवधारणा संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से ली गई है। यह न्यायपालिका की विधायिका द्वारा पारित कानूनों और कार्यपालिका द्वारा जारी आदेशों की संवैधानिक वैधता की जांच करने की शक्ति है।
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भारत के संविधान की प्रस्तावना में शब्दों का सही क्रम क्या है?
- न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व
- स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, न्याय
- समानता, स्वतंत्रता, न्याय, बंधुत्व
- बंधुत्व, समानता, स्वतंत्रता, न्याय
सही उत्तर: a) न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व
विस्तृत व्याख्या:
भारत के संविधान की प्रस्तावना भारत के लोगों के लिए न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक), स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की), समानता (प्रतिष्ठा और अवसर की) और बंधुत्व (व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाला) प्राप्त करने का संकल्प लेती है। यह क्रम संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।
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भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद ‘कानून के समक्ष समानता’ और ‘कानूनों के समान संरक्षण’ की गारंटी देता है?
- अनुच्छेद 13
- अनुच्छेद 14
- अनुच्छेद 15
- अनुच्छेद 16
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 14
विस्तृत व्याख्या:
अनुच्छेद 14 भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कहता है कि “राज्य भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।”
- ‘विधि के समक्ष समता’ (Equality before Law): यह ब्रिटिश मूल की एक नकारात्मक अवधारणा है जिसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। यह कानून के शासन का एक तत्व है।
- ‘विधियों का समान संरक्षण’ (Equal Protection of Laws): यह अमेरिकी संविधान से ली गई एक सकारात्मक अवधारणा है जिसका अर्थ है कि समान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
अनुच्छेद 13 न्यायिक समीक्षा से संबंधित है और कहता है कि कोई भी कानून जो मौलिक अधिकारों के असंगत या अल्पीकरण में है, वह शून्य होगा।
अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव के निषेध से संबंधित है।
अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता की गारंटी देता है।
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में छह से चौदह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है?
- अनुच्छेद 21
- अनुच्छेद 21A
- अनुच्छेद 45
- अनुच्छेद 51A(k)
सही विकल्प चुनें:
- केवल 1
- केवल 2
- केवल 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
सही उत्तर: d) केवल 2, 3 और 4
विस्तृत व्याख्या:
अनुच्छेद 21A को 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। यह छह से चौदह वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए राज्य द्वारा निर्धारित तरीके से मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का मौलिक अधिकार बनाता है।
अनुच्छेद 45 (राज्य के नीति निदेशक तत्वों का एक हिस्सा) मूल रूप से संविधान में बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता था, लेकिन 86वें संशोधन के बाद, इसने 6 साल से कम उम्र के बच्चों की प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा का प्रावधान किया।
अनुच्छेद 51A(k) भी 86वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। यह माता-पिता या अभिभावक का मौलिक कर्तव्य बनाता है कि वे अपने छह से चौदह वर्ष की आयु के बच्चे या वार्ड को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।
अनुच्छेद 21 “जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण” से संबंधित है, जिसमें शिक्षा का अधिकार भी शामिल है, जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई निर्णयों में व्याख्या की गई है, लेकिन 21A विशेष रूप से बच्चों की मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा पर केंद्रित है।
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डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने संविधान के किस अनुच्छेद को ‘संविधान की आत्मा और हृदय’ कहा है?
- अनुच्छेद 19
- अनुच्छेद 21
- अनुच्छेद 32
- अनुच्छेद 14
सही उत्तर: c) अनुच्छेद 32
विस्तृत व्याख्या:
अनुच्छेद 32 ‘संवैधानिक उपचारों का अधिकार’ प्रदान करता है, जो मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में व्यक्तियों को सीधे सर्वोच्च न्यायालय में जाने की अनुमति देता है। सर्वोच्च न्यायालय रिट (जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार पृच्छा) जारी कर सकता है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इस अनुच्छेद को ‘संविधान की आत्मा और हृदय’ कहा है क्योंकि यह मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाता है और उनके प्रवर्तन के बिना, मौलिक अधिकार अर्थहीन हो जाएंगे।
अनुच्छेद 19 भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित छह अधिकारों से संबंधित है।
अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण से संबंधित है।
अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण से संबंधित है।
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राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा अनुच्छेद ग्राम पंचायतों के संगठन से संबंधित है?
- अनुच्छेद 39
- अनुच्छेद 40
- अनुच्छेद 43
- अनुच्छेद 44
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 40
विस्तृत व्याख्या:
अनुच्छेद 40 राज्य के नीति निदेशक तत्वों का एक हिस्सा है जो राज्य को ग्राम पंचायतों को संगठित करने और उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए ऐसी शक्तियां और अधिकार प्रदान करने का निर्देश देता है। यह गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित एक DPSP है।
अनुच्छेद 39 राज्य को कुछ नीति सिद्धांतों का पालन करने का निर्देश देता है, जैसे सभी नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार, धन और उत्पादन के साधनों का समान वितरण, आदि।
अनुच्छेद 43 श्रमिकों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि से संबंधित है।
अनुच्छेद 44 नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) सुनिश्चित करने से संबंधित है।
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का प्रावधान करता है?
- अनुच्छेद 39A
- अनुच्छेद 43A
- अनुच्छेद 44
- अनुच्छेद 48A
सही उत्तर: c) अनुच्छेद 44
विस्तृत व्याख्या:
अनुच्छेद 44 राज्य के नीति निदेशक तत्वों का एक हिस्सा है और इसमें कहा गया है कि “राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।” इसका उद्देश्य धर्म से परे सभी व्यक्तिगत मामलों जैसे विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने के लिए सभी नागरिकों के लिए समान कानून लाना है।
अनुच्छेद 39A गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने से संबंधित है।
अनुच्छेद 43A उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी से संबंधित है।
अनुच्छेद 48A पर्यावरण के संरक्षण और सुधार तथा वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा से संबंधित है।
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निम्नलिखित में से कौन सा मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duty) भारत के संविधान में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था?
- भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना।
- वैज्ञानिक स्वभाव, मानवतावाद और सुधार की भावना को विकसित करना।
- सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा का त्याग करना।
- छह से चौदह वर्ष की आयु के अपने बच्चे या वार्ड को शिक्षा के अवसर प्रदान करना।
सही उत्तर: d) छह से चौदह वर्ष की आयु के अपने बच्चे या वार्ड को शिक्षा के अवसर प्रदान करना।
विस्तृत व्याख्या:
मूल रूप से, 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए थे (भाग IV-A, अनुच्छेद 51A)।
विकल्प a, b, और c में उल्लिखित कर्तव्य (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना; वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करना; सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना) उन मूल 10 कर्तव्यों में शामिल थे।
विकल्प d में उल्लिखित कर्तव्य, ‘छह से चौदह वर्ष की आयु के अपने बच्चे या वार्ड को शिक्षा के अवसर प्रदान करना’, 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया 11वां मौलिक कर्तव्य है। इस संशोधन ने अनुच्छेद 21A को भी जोड़ा, जिसने शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया।
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भारत के राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति का उल्लेख संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है?
- अनुच्छेद 111
- अनुच्छेद 123
- अनुच्छेद 200
- अनुच्छेद 213
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 123
विस्तृत व्याख्या:
अनुच्छेद 123 भारत के राष्ट्रपति को संसद के सत्र में न होने पर अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति प्रदान करता है। ये अध्यादेश संसद के अधिनियमों के समान बल और प्रभाव रखते हैं, लेकिन अस्थायी प्रकृति के होते हैं और संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह के भीतर संसद द्वारा अनुमोदित किए जाने चाहिए।
अनुच्छेद 111 संसद द्वारा पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति की सहमति से संबंधित है (वीटो शक्तियां)।
अनुच्छेद 200 राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर राज्यपाल की सहमति से संबंधित है।
अनुच्छेद 213 राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति से संबंधित है।
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भारत के राष्ट्रपति द्वारा पॉकेट वीटो (Pocket Veto) का प्रयोग किस मामले में किया गया था?
- पेप्सू विनियोग विधेयक, 1954
- भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक, 1986
- डॉवरी निषेध विधेयक, 1961
- उपरोक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर: b) भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक, 1986
विस्तृत व्याख्या:
भारत के राष्ट्रपति को तीन प्रकार की वीटो शक्तियां प्राप्त हैं: पूर्ण वीटो (Absolute Veto), निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto) और पॉकेट वीटो (Pocket Veto)।
पॉकेट वीटो का अर्थ है कि राष्ट्रपति किसी विधेयक पर न तो सहमति देता है, न उसे अस्वीकृत करता है और न ही उसे संसद को पुनर्विचार के लिए लौटाता है, बल्कि उसे अनिश्चित काल के लिए अपनी ‘पॉकेट’ में रखता है। भारत के राष्ट्रपति को संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के विपरीत, विधेयक को लौटाने की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है।
राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने 1986 में भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक के संबंध में पॉकेट वीटो का प्रयोग किया था, क्योंकि इसमें प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कुछ विवादास्पद प्रावधान थे।
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भारत का उपराष्ट्रपति किसका पदेन अध्यक्ष होता है?
- लोकसभा
- राज्यसभा
- योजना आयोग (अब नीति आयोग)
- राष्ट्रीय विकास परिषद
सही उत्तर: b) राज्यसभा
विस्तृत व्याख्या:
भारत का उपराष्ट्रपति (Vice-President of India) राज्यसभा (राज्यों की परिषद) का पदेन अध्यक्ष (ex-officio Chairman) होता है। यह बात संविधान के अनुच्छेद 64 में स्पष्ट रूप से कही गई है। वह राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है, कार्यवाही का संचालन करता है और मत बराबर होने की स्थिति में निर्णायक मत देता है।
लोकसभा का अध्यक्ष स्पीकर होता है, जिसका चुनाव लोकसभा के सदस्य करते हैं।
योजना आयोग (अब नीति आयोग) का अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होता है।
राष्ट्रीय विकास परिषद का अध्यक्ष भी प्रधानमंत्री होता है।
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद स्पष्ट रूप से कहता है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी?
- अनुच्छेद 74(1)
- अनुच्छेद 75(1)
- अनुच्छेद 75(2)
- अनुच्छेद 75(3)
सही उत्तर: d) अनुच्छेद 75(3)
विस्तृत व्याख्या:
अनुच्छेद 75(3) भारतीय संसदीय प्रणाली की एक महत्वपूर्ण विशेषता को बताता है: “मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी।” इसका अर्थ है कि सभी मंत्री एक टीम के रूप में कार्य करते हैं और लोकसभा में विश्वास खोने पर पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।
अनुच्छेद 74(1) कहता है कि राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा।
अनुच्छेद 75(1) कहता है कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करेगा।
अनुच्छेद 75(2) कहता है कि मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेंगे।
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भारत की संसद में क्या शामिल है?
- लोकसभा और राज्यसभा
- लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति
- लोकसभा, राज्यसभा, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री
- लोकसभा, राज्यसभा और भारत के मुख्य न्यायाधीश
सही उत्तर: b) लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति
विस्तृत व्याख्या:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार, “संघ के लिए एक संसद होगी, जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्यसभा और लोकसभा होंगे।” इस प्रकार, भारत की संसद में राष्ट्रपति, लोकसभा (निचला सदन) और राज्यसभा (उच्च सदन) शामिल हैं। राष्ट्रपति संसद का एक अभिन्न अंग है, हालांकि वह किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता है। संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बिना कानून नहीं बन सकता।
प्रधानमंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश संसद के सदस्य हो सकते हैं या नहीं, लेकिन वे संसद के घटक अंग नहीं हैं।
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धन विधेयक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- इसे केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
- इसे राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर ही पेश किया जा सकता है।
- राज्यसभा इसे अस्वीकृत या संशोधित कर सकती है।
- लोकसभा स्पीकर यह निर्णय करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 2 और 4
- उपरोक्त सभी
सही उत्तर: c) केवल 1, 2 और 4
विस्तृत व्याख्या:
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 110(1) के तहत धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
कथन 2 सही है: इसे राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर ही पेश किया जा सकता है।
कथन 3 गलत है: राज्यसभा के पास धन विधेयक के संबंध में सीमित शक्तियां हैं। राज्यसभा इसे अस्वीकृत या संशोधित नहीं कर सकती है। यह केवल 14 दिनों के भीतर सिफारिशें कर सकती है, जिन्हें लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर विधेयक वापस नहीं करती है, तो इसे दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है।
कथन 4 सही है: अनुच्छेद 110(3) के अनुसार, “यदि कोई प्रश्न उठता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, तो उस पर लोकसभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा।”
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में राज्यसभा को अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के निर्माण के लिए कानून बनाने की विशेष शक्ति प्राप्त है?
- अनुच्छेद 249
- अनुच्छेद 312
- अनुच्छेद 252
- अनुच्छेद 300
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 312
विस्तृत व्याख्या:
अनुच्छेद 312 राज्यसभा को यह विशेष शक्ति प्रदान करता है कि वह उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक प्रस्ताव पारित करके संसद को संघ और राज्यों के लिए एक या एक से अधिक अखिल भारतीय सेवाएं (जैसे भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय वन सेवा) बनाने का अधिकार दे। यह राज्यसभा की संघीय प्रकृति को दर्शाता है।
अनुच्छेद 249 राज्यसभा को यह विशेष शक्ति देता है कि वह उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक प्रस्ताव पारित करके संसद को राज्य सूची में उल्लिखित किसी भी विषय पर कानून बनाने का अधिकार दे यदि वह ‘राष्ट्रीय हित’ में आवश्यक हो।
अनुच्छेद 252 तब लागू होता है जब दो या दो से अधिक राज्य संसद से राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बनाने का अनुरोध करते हैं।
अनुच्छेद 300 भारत सरकार को मुकदमा चलाने और मुकदमा चलाए जाने की क्षमता से संबंधित है।
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सर्वोच्च न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction) के तहत निम्नलिखित में से कौन सा मामला आता है?
- केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच विवाद।
- दो या दो से अधिक राज्यों के बीच विवाद।
- मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित विवाद।
- उपरोक्त सभी।
सही उत्तर: d) उपरोक्त सभी।
विस्तृत व्याख्या:
सर्वोच्च न्यायालय का मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction) वे मामले हैं जिन्हें सीधे सर्वोच्च न्यायालय में शुरू किया जा सकता है, बिना किसी अधीनस्थ न्यायालय से अपील के। अनुच्छेद 131 विशेष रूप से केंद्र और राज्यों के बीच या विभिन्न राज्यों के बीच के विवादों को सर्वोच्च न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार के तहत रखता है।
इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 32 के तहत, सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने का अधिकार है, और इस अर्थ में, मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित विवाद भी इसके मूल क्षेत्राधिकार में आते हैं, हालांकि यह विशेष रूप से अनुच्छेद 131 का हिस्सा नहीं है। इसे अक्सर ‘मौलिक क्षेत्राधिकार’ के रूप में संदर्भित किया जाता है क्योंकि यह न्यायालय के अधिकार को सीधे चुनौती दिए गए मौलिक अधिकारों को संबोधित करने की अनुमति देता है।
इसलिए, विकल्प a, b और c तीनों सर्वोच्च न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार में आते हैं।
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भारतीय संविधान के तहत, उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति का उल्लेख किस अनुच्छेद में किया गया है?
- अनुच्छेद 32
- अनुच्छेद 136
- अनुच्छेद 226
- अनुच्छेद 227
सही उत्तर: c) अनुच्छेद 226
विस्तृत व्याख्या:
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए और “किसी अन्य उद्देश्य के लिए” (any other purpose) रिट (जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार पृच्छा) जारी करने की शक्ति प्रदान करता है। ‘किसी अन्य उद्देश्य के लिए’ शब्द उच्च न्यायालयों के रिट क्षेत्राधिकार को सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) की तुलना में व्यापक बनाता है, जो केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन तक सीमित है।
अनुच्छेद 32 सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने की शक्ति देता है और स्वयं एक मौलिक अधिकार है।
अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को ‘अपील करने की विशेष अनुमति’ (Special Leave to Appeal) की शक्ति देता है।
अनुच्छेद 227 उच्च न्यायालय को सभी अधीनस्थ न्यायालयों और न्यायाधिकरणों पर अधीक्षण की शक्ति देता है।
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“न्यायिक समीक्षा” की अवधारणा का क्या अर्थ है?
- न्यायालयों की विधायी कार्यों को बनाने की शक्ति।
- संसद द्वारा पारित कानूनों की संवैधानिक वैधता की जांच करने की न्यायपालिका की शक्ति।
- कार्यपालिका के निर्णयों को सीधे रद्द करने की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अधिनस्थ न्यायालयों के निर्णयों की समीक्षा करने की सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति।
सही उत्तर: b) संसद द्वारा पारित कानूनों की संवैधानिक वैधता की जांच करने की न्यायपालिका की शक्ति।
विस्तृत व्याख्या:
न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) न्यायपालिका की वह शक्ति है जिसके द्वारा वह विधायिका द्वारा पारित कानूनों, कार्यपालिका द्वारा जारी आदेशों और प्रशासनिक कार्यों की संवैधानिक वैधता की जांच करती है। यदि न्यायपालिका को लगता है कि कोई कानून या आदेश संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो वह उसे असंवैधानिक या अवैध घोषित कर सकती है और इस प्रकार उसे शून्य घोषित कर सकती है। भारत में न्यायिक समीक्षा की शक्ति संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों (जैसे अनुच्छेद 13, 32, 226, 131-136, 143) से प्राप्त होती है, और यह संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह अवधारणा मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका से ली गई है।
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भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ जैसे विषय किस सूची में शामिल हैं?
- संघ सूची
- राज्य सूची
- समवर्ती सूची
- अवशिष्ट सूची
सही उत्तर: b) राज्य सूची
विस्तृत व्याख्या:
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित है। इसमें तीन सूचियां हैं:
- संघ सूची (Union List): जिन विषयों पर संसद कानून बना सकती है (जैसे रक्षा, विदेश मामले, रेलवे, मुद्रा)।
- राज्य सूची (State List): जिन विषयों पर राज्य विधानमंडल कानून बना सकता है (जैसे सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस, जन स्वास्थ्य, स्वच्छता, कृषि, स्थानीय शासन)।
- समवर्ती सूची (Concurrent List): जिन विषयों पर संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं (जैसे शिक्षा, वन, वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण, बाट और माप)।
‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ स्पष्ट रूप से राज्य सूची के विषय हैं। यही कारण है कि विभिन्न राज्यों की अपनी पुलिस बल और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है।
अवशिष्ट सूची (Residuary List) में वे विषय शामिल हैं जो तीनों सूचियों में से किसी में भी उल्लेखित नहीं हैं, और इन पर कानून बनाने की शक्ति संसद के पास है (अनुच्छेद 248)।
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अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council) की स्थापना का प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है?
- अनुच्छेद 262
- अनुच्छेद 263
- अनुच्छेद 280
- अनुच्छेद 275
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 263
विस्तृत व्याख्या:
अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि यदि उसे प्रतीत होता है कि सार्वजनिक हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वह राज्यों के बीच विवादों की जांच और सलाह देने के लिए, या केंद्र और राज्यों के सामान्य हित के विषयों पर जांच और चर्चा करने के लिए एक अंतर-राज्य परिषद की स्थापना कर सकता है। सरकारिया आयोग की सिफारिशों पर 1990 में एक अंतर-राज्य परिषद की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों के आपस में समन्वय स्थापित करना है।
अनुच्छेद 262 अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों से संबंधित विवादों के न्यायनिर्णयन से संबंधित है।
अनुच्छेद 280 वित्त आयोग की स्थापना से संबंधित है।
अनुच्छेद 275 कुछ राज्यों को संघ से अनुदान से संबंधित है।
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भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- यह एक संवैधानिक निकाय है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है।
- चुनाव आयुक्तों की सेवा शर्तें और कार्यकाल राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
सही उत्तर: d) चुनाव आयुक्तों की सेवा शर्तें और कार्यकाल राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
विस्तृत व्याख्या:
कथन a सही है: भारत निर्वाचन आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है जिसकी स्थापना संविधान के अनुच्छेद 324 द्वारा की गई है।
कथन b सही है: मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) और अन्य चुनाव आयुक्तों (Election Commissioners) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है (अनुच्छेद 324)।
कथन c सही है: मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उसी तरह और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को (अर्थात संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित महाभियोग प्रस्ताव द्वारा)। यह उसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।
कथन d गलत है: चुनाव आयुक्तों की सेवा शर्तें और कार्यकाल संसद द्वारा बनाए गए कानून द्वारा निर्धारित किए जाते हैं (वर्तमान में, यह ‘चुनाव आयुक्त (सेवा की शर्तें और कार्य संचालन) अधिनियम, 1991’ द्वारा शासित होता है), न कि सीधे राष्ट्रपति द्वारा। हालांकि, अनुच्छेद 324 राष्ट्रपति को संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अधीन, सेवा शर्तें और कार्यकाल निर्धारित करने की शक्ति देता है। लेकिन यह ‘संसद द्वारा बनाए गए कानून’ के अधीन है। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, होता है।
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भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के कर्तव्यों और शक्तियों का उल्लेख संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है?
- अनुच्छेद 148
- अनुच्छेद 149
- अनुच्छेद 150
- अनुच्छेद 151
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 149
विस्तृत व्याख्या:
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India – CAG) एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है (संविधान के भाग V, अनुच्छेद 148 से 151)।
अनुच्छेद 148 भारत के CAG के पद का प्रावधान करता है।
अनुच्छेद 149 CAG के कर्तव्यों और शक्तियों से संबंधित है। यह अनुच्छेद संसद को CAG के कर्तव्यों और शक्तियों को निर्धारित करने का अधिकार देता है, जिसे ‘CAG (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971’ द्वारा किया गया है।
अनुच्छेद 150 कहता है कि संघ और राज्यों के खाते राष्ट्रपति के अनुमोदन से CAG की सलाह पर ऐसे प्रारूप में रखे जाएंगे जैसा कि वह निर्धारित करे।
अनुच्छेद 151 कहता है कि संघ के खातों से संबंधित CAG की रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत की जाएगी, जो उसे संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा, और राज्य के खातों से संबंधित रिपोर्ट राज्यपाल को प्रस्तुत की जाएगी, जो उसे राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाएगा।
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पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा दिया गया?
- 42वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 44वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 73वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 74वां संविधान संशोधन अधिनियम
सही उत्तर: c) 73वां संविधान संशोधन अधिनियम
विस्तृत व्याख्या:
73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 भारत में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को संवैधानिक दर्जा देने के लिए अधिनियमित किया गया था। इस संशोधन ने संविधान में एक नया भाग IX ‘पंचायतें’ जोड़ा और एक नई ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी, जिसमें पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय शामिल हैं। इसने अनुच्छेद 243 से 243O तक के प्रावधान भी शामिल किए।
74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 शहरी स्थानीय निकायों (नगर पालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित है।
42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 और 44वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 विभिन्न अन्य संवैधानिक परिवर्तनों से संबंधित हैं, विशेष रूप से प्रस्तावना और मौलिक अधिकारों में।
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता (राष्ट्रपति शासन) से संबंधित है?
- अनुच्छेद 352
- अनुच्छेद 356
- अनुच्छेद 360
- अनुच्छेद 365
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 356
विस्तृत व्याख्या:
भारतीय संविधान के भाग XVIII में आपातकालीन प्रावधान (Emergency Provisions) शामिल हैं।
- अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) से संबंधित है, जो युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण उत्पन्न होता है।
- अनुच्छेद 356 राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता, जिसे आमतौर पर ‘राष्ट्रपति शासन’ (President’s Rule) के रूप में जाना जाता है, से संबंधित है। यह तब लागू होता है जब राष्ट्रपति को राज्यपाल की रिपोर्ट से या अन्यथा यह समाधान हो जाता है कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है।
- अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency) से संबंधित है।
अनुच्छेद 365 भी राष्ट्रपति शासन से संबंधित है, लेकिन यह तब लागू होता है जब कोई राज्य केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है। अनुच्छेद 356 और 365 दोनों ही राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार बन सकते हैं।
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निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Territory) का दर्जा दिया गया?
- 61वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 69वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 71वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 74वां संविधान संशोधन अधिनियम
सही उत्तर: b) 69वां संविधान संशोधन अधिनियम
विस्तृत व्याख्या:
69वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1991 ने केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली को विशेष दर्जा दिया और इसे ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली’ के रूप में नामित किया। इस संशोधन ने दिल्ली के लिए एक विधानसभा और मंत्रिपरिषद का भी प्रावधान किया।
61वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1989 ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों में मतदान की आयु को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया।
71वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने संविधान की आठवीं अनुसूची में कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली भाषाओं को जोड़ा।
74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित है।
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निम्नलिखित में से कौन सा मौलिक अधिकार आपातकाल के दौरान भी निलंबित नहीं किया जा सकता?
- अनुच्छेद 19
- अनुच्छेद 20 और 21
- अनुच्छेद 22
- अनुच्छेद 25
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 20 और 21
विस्तृत व्याख्या:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 359 के तहत, राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान कुछ मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित कर सकते हैं। हालांकि, 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 ने यह प्रावधान किया कि अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण) द्वारा गारंटीकृत मौलिक अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है, यहां तक कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी।
अनुच्छेद 19 (छह अधिकारों का संरक्षण) राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान (युद्ध या बाहरी आक्रमण के आधार पर) निलंबित हो जाता है।
अनुच्छेद 22 (कुछ मामलों में गिरफ्तारी और हिरासत से संरक्षण) को आपातकाल के दौरान निलंबित किया जा सकता है।
अनुच्छेद 25 (अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता) भी आपातकाल के दौरान निलंबित किया जा सकता है।
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भारत के अटॉर्नी जनरल (Attorney General of India) की नियुक्ति कौन करता है?
- प्रधानमंत्री
- भारत के मुख्य न्यायाधीश
- राष्ट्रपति
- लोकसभा अध्यक्ष
सही उत्तर: c) राष्ट्रपति
विस्तृत व्याख्या:
भारत के अटॉर्नी जनरल देश के सर्वोच्च कानून अधिकारी होते हैं। उनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 76 के तहत की जाती है। अटॉर्नी जनरल को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता होनी चाहिए। वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं और उनका पारिश्रमिक भी राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाता है। वह सरकार को कानूनी मामलों पर सलाह देते हैं और सरकार से संबंधित मामलों में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने का प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में है?
- अनुच्छेद 111
- अनुच्छेद 200
- अनुच्छेद 201
- अनुच्छेद 213
सही उत्तर: c) अनुच्छेद 201
विस्तृत व्याख्या:
जब एक विधेयक राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किया जाता है, तो उसे राज्यपाल की सहमति के लिए भेजा जाता है (अनुच्छेद 200)। राज्यपाल के पास कई विकल्प होते हैं: वह सहमति दे सकता है, सहमति रोक सकता है, विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है (यदि वह धन विधेयक नहीं है), या विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित कर सकता है।
अनुच्छेद 201 उस स्थिति से संबंधित है जब राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करता है। इस स्थिति में, राष्ट्रपति के पास भी सहमति देने, सहमति रोकने, या (यदि वह धन विधेयक नहीं है) राज्यपाल को विधेयक लौटाने का विकल्प होता है ताकि उसे राज्य विधानमंडल को पुनर्विचार के लिए लौटाया जा सके।
अनुच्छेद 111 संसद द्वारा पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति की सहमति से संबंधित है।
अनुच्छेद 213 राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति से संबंधित है।
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भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची का संबंध किससे है?
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम
- दलबदल के आधार पर अयोग्यता
- पंचायती राज
- जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन
सही उत्तर: b) दलबदल के आधार पर अयोग्यता
विस्तृत व्याख्या:
दसवीं अनुसूची को 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। यह ‘दलबदल विरोधी कानून’ (Anti-defection Law) के रूप में भी जानी जाती है। यह उन सदस्यों की अयोग्यता से संबंधित प्रावधानों को निर्धारित करती है जो एक राजनीतिक दल से दूसरे दल में दल बदलते हैं, ताकि राजनीतिक अस्थिरता को रोका जा सके।
पहली अनुसूची राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम और उनके क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार से संबंधित है।
ग्यारहवीं अनुसूची पंचायती राज से संबंधित है (73वें संशोधन द्वारा जोड़ी गई)।
पांचवीं और छठी अनुसूची जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा संवैधानिक निकाय नहीं है?
- भारत निर्वाचन आयोग
- संघ लोक सेवा आयोग
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
- वित्त आयोग
सही उत्तर: c) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
विस्तृत व्याख्या:
संवैधानिक निकाय (Constitutional Bodies) वे निकाय होते हैं जिनका उल्लेख सीधे संविधान में किया गया है, और उनके प्रावधान संविधान के अनुच्छेदों में निहित होते हैं।
- भारत निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 324), संघ लोक सेवा आयोग (अनुच्छेद 315-323) और वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) संवैधानिक निकाय हैं।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission – NHRC) एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसे संसद के एक अधिनियम, ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत स्थापित किया गया है। यह संविधान में उल्लिखित नहीं है।
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भारत सरकार (Government of India) का मुख्य कानूनी सलाहकार कौन होता है?
- भारत के मुख्य न्यायाधीश
- भारत के सॉलिसिटर जनरल
- भारत के अटॉर्नी जनरल
- कानून मंत्री
सही उत्तर: c) भारत के अटॉर्नी जनरल
विस्तृत व्याख्या:
भारत के अटॉर्नी जनरल (Attorney General of India) भारत सरकार के मुख्य कानूनी सलाहकार और सर्वोच्च कानून अधिकारी होते हैं। वह भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त किए जाते हैं और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता रखते हैं। वह सरकार को कानूनी मामलों पर सलाह देते हैं और सरकार से संबंधित सभी मामलों में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भारत के सॉलिसिटर जनरल अटॉर्नी जनरल के अधीन काम करते हैं और उनकी सहायता करते हैं। वे भी कानूनी अधिकारी होते हैं लेकिन अटॉर्नी जनरल जितने वरिष्ठ नहीं होते और उनका पद संवैधानिक नहीं है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख होते हैं।
कानून मंत्री केंद्रीय मंत्रिपरिषद का सदस्य होता है जो कानून और न्याय मंत्रालय का प्रमुख होता है।
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शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) से संबंधित प्रावधान भारतीय संविधान के किस भाग में निहित हैं?
- भाग IX
- भाग IXA
- भाग X
- भाग XI
सही उत्तर: b) भाग IXA
विस्तृत व्याख्या:
74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने भारतीय संविधान में एक नया भाग IXA ‘नगर पालिकाओं’ शीर्षक से जोड़ा। यह शहरी स्थानीय निकायों (जैसे नगर पालिकाएं, नगर निगम) को संवैधानिक दर्जा और संरचना प्रदान करता है। इस संशोधन ने बारहवीं अनुसूची को भी जोड़ा, जिसमें नगर पालिकाओं के 18 कार्यात्मक विषय शामिल हैं।
भाग IX 73वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था और पंचायती राज से संबंधित है।
भाग X अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों से संबंधित है।
भाग XI संघ और राज्यों के बीच संबंधों से संबंधित है।
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राज्य लोक सेवा आयोग (State Public Service Commission) के अध्यक्ष और सदस्यों को कौन हटा सकता है?
- राज्यपाल
- मुख्यमंत्री
- राष्ट्रपति
- भारत के मुख्य न्यायाधीश
सही उत्तर: c) राष्ट्रपति
विस्तृत व्याख्या:
राज्य लोक सेवा आयोग (State Public Service Commission – SPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। हालांकि, उन्हें केवल राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है, उसी प्रक्रिया और आधारों पर जिन पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष या सदस्यों को हटाया जाता है। यह SPSC के सदस्यों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान है (संविधान के अनुच्छेद 317)।
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किस संविधान संशोधन अधिनियम ने सहकारी समितियों (Co-operative Societies) को संवैधानिक दर्जा और संरक्षण प्रदान किया?
- 91वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 97वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 101वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 103वां संविधान संशोधन अधिनियम
सही उत्तर: b) 97वां संविधान संशोधन अधिनियम
विस्तृत व्याख्या:
97वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 ने भारत में सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा और संरक्षण प्रदान किया। इस संशोधन ने संविधान में निम्नलिखित परिवर्तन किए:
- सहकारी समितियों को बढ़ावा देने का अधिकार (अनुच्छेद 19 में मौलिक अधिकार)।
- सहकारी समितियों के प्रचार के लिए एक नया राज्य नीति निदेशक तत्व (अनुच्छेद 43B)।
- संविधान में एक नया भाग IXB ‘सहकारी समितियां’ जोड़ा गया (अनुच्छेद 243ZH से 243ZT)।
91वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 ने मंत्रिपरिषद के आकार को सीमित किया।
101वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 वस्तु एवं सेवा कर (GST) से संबंधित है।
103वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार में 10% आरक्षण का प्रावधान किया।
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नीति आयोग (NITI Aayog) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- यह एक संवैधानिक निकाय है।
- यह एक वैधानिक निकाय है।
- यह एक गैर-संवैधानिक और गैर-वैधानिक निकाय है।
- यह एक सलाहकार निकाय है जिसकी स्थापना संसद के एक अधिनियम द्वारा की गई है।
सही उत्तर: c) यह एक गैर-संवैधानिक और गैर-वैधानिक निकाय है।
विस्तृत व्याख्या:
नीति आयोग (National Institution for Transforming India) की स्थापना 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव द्वारा योजना आयोग के स्थान पर की गई थी। यह न तो संविधान द्वारा बनाया गया है (इसलिए संवैधानिक नहीं है) और न ही संसद के किसी अधिनियम द्वारा (इसलिए वैधानिक नहीं है)। यह एक गैर-संवैधानिक और गैर-वैधानिक निकाय है, जिसे सरकार के ‘थिंक-टैंक’ के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह सहकारी संघवाद के सिद्धांत पर आधारित है और बॉटम-अप दृष्टिकोण पर जोर देता है।
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद भारत के राज्यों में राज्यपाल के पद का प्रावधान करता है?
- अनुच्छेद 152
- अनुच्छेद 153
- अनुच्छेद 154
- अनुच्छेद 155
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 153
विस्तृत व्याख्या:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 में कहा गया है कि “प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा।” हालांकि, 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 ने यह प्रावधान किया कि एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों के लिए राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।
अनुच्छेद 152 राज्यों की परिभाषा से संबंधित है।
अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यकारी शक्ति राज्यपाल में निहित होने से संबंधित है।
अनुच्छेद 155 राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा किए जाने से संबंधित है।
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में यह प्रावधान है कि संसद कानून द्वारा नए राज्यों का निर्माण और मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन कर सकती है?
- अनुच्छेद 2
- अनुच्छेद 3
- अनुच्छेद 4
- अनुच्छेद 1
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 3
विस्तृत व्याख्या:
भारतीय संविधान के भाग I ‘संघ और उसका राज्यक्षेत्र’ (The Union and its Territory) में अनुच्छेद 1 से 4 शामिल हैं।
- अनुच्छेद 1 भारत को ‘राज्यों का संघ’ घोषित करता है।
- अनुच्छेद 2 संसद को ‘भारत संघ में नए राज्यों को प्रवेश देने या स्थापित करने’ की शक्ति देता है। यह उन राज्यों के लिए है जो पहले से मौजूद नहीं हैं।
- अनुच्छेद 3 संसद को ‘नए राज्यों का निर्माण करने और मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने’ की शक्ति देता है। यह संघ के भीतर मौजूदा राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित है।
- अनुच्छेद 4 कहता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाए गए कानूनों को संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन नहीं माना जाएगा, बल्कि एक साधारण विधायी प्रक्रिया द्वारा पारित किया जा सकता है।
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लोकसभा के अध्यक्ष (Speaker of Lok Sabha) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- वह लोकसभा के सदस्यों द्वारा अपने सदस्यों में से चुना जाता है।
- वह अपना इस्तीफा लोकसभा के उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) को संबोधित करता है।
- वह अपना पद राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत धारण करता है।
- उसे केवल लोकसभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है।
सही उत्तर: c) वह अपना पद राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत धारण करता है।
विस्तृत व्याख्या:
कथन a सही है: लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के सदस्यों द्वारा नई लोकसभा की पहली बैठक के बाद किया जाता है (अनुच्छेद 93)।
कथन b सही है: लोकसभा अध्यक्ष अपना इस्तीफा लोकसभा के उपाध्यक्ष को संबोधित करता है (अनुच्छेद 94)।
कथन c गलत है: लोकसभा अध्यक्ष राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण नहीं करता है। वह लोकसभा के कार्यकाल के दौरान पद पर रहता है और नए अध्यक्ष के चुनाव तक अपना पद खाली नहीं करता है। उसकी स्थिरता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उसे हटाने की एक विशेष प्रक्रिया है।
कथन d सही है: अध्यक्ष को केवल लोकसभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत से पारित एक प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है, जिसके लिए 14 दिन का अग्रिम नोटिस देना होता है (अनुच्छेद 94)।
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भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से धन निकालने के लिए किसकी अनुमति अनिवार्य है?
- राष्ट्रपति
- प्रधानमंत्री
- संसद
- वित्त मंत्री
सही उत्तर: c) संसद
विस्तृत व्याख्या:
भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) संविधान के अनुच्छेद 266(1) के तहत स्थापित एक निधि है। भारत सरकार द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, लिए गए सभी ऋण और ऋणों की वसूली से प्राप्त सभी धन इसमें जमा किए जाते हैं। भारत की संचित निधि से कोई भी धन संसद द्वारा कानून पारित किए बिना नहीं निकाला जा सकता है (अनुच्छेद 266(3))। इसके लिए एक विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) पारित करना होता है, जो संसद की स्वीकृति के अधीन होता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान की प्रस्तावना में जोड़ा गया शब्द नहीं है?
- समाजवादी
- धर्मनिरपेक्ष
- अखंडता
- गणराज्य
सही उत्तर: d) गणराज्य
विस्तृत व्याख्या:
42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भारत के संविधान की प्रस्तावना में तीन नए शब्द जोड़े गए: ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’। इस संशोधन को अक्सर ‘मिनी-संविधान’ कहा जाता है क्योंकि इसने संविधान में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए।
‘गणराज्य’ शब्द संविधान की मूल प्रस्तावना का हिस्सा था और इसे 42वें संशोधन द्वारा नहीं जोड़ा गया था। यह इंगित करता है कि भारत का राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) वंशानुगत शासक नहीं बल्कि एक निर्वाचित व्यक्ति होता है।
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भारत के संविधान के किस भाग में संघ और राज्यों के बीच विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों का वर्णन है?
- भाग X
- भाग XI
- भाग XII
- भाग XIII
सही उत्तर: b) भाग XI
विस्तृत व्याख्या:
भारतीय संविधान का भाग XI ‘संघ और राज्यों के बीच संबंध’ (Relations between the Union and the States) से संबंधित है। यह भाग दो अध्यायों में विभाजित है:
- अध्याय I: विधायी संबंध (अनुच्छेद 245-255)
- अध्याय II: प्रशासनिक संबंध (अनुच्छेद 256-263)
इसके अतिरिक्त, भाग XII ‘वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद’ (Finance, Property, Contracts and Suits) में संघ और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों से संबंधित प्रावधान (अनुच्छेद 264-290) शामिल हैं। हालांकि, भाग XI सीधे विधायी और प्रशासनिक संबंधों को संबोधित करता है, और भाग XII वित्तीय संबंधों को पूरक करता है। आमतौर पर, जब केंद्र-राज्य संबंधों की बात आती है, तो भाग XI और XII दोनों को एक साथ देखा जाता है। दिए गए विकल्पों में, भाग XI सबसे उपयुक्त है जो विधायी और प्रशासनिक संबंधों को कवर करता है, जबकि वित्तीय संबंध भी एक विस्तृत अर्थ में ‘संबंध’ का हिस्सा हैं।
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निम्नलिखित में से किस आयोग/समिति ने भारत में लोकपाल और लोकायुक्तों की संस्था की स्थापना की सिफारिश की थी?
- सरकारीया आयोग
- प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC)
- राजमन्नार समिति
- पुंछी आयोग
सही उत्तर: b) प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC)
विस्तृत व्याख्या:
भारत में लोकपाल और लोकायुक्तों (अर्थात ‘ओम्बुड्समैन’ जैसी संस्थाएं) की संस्था की स्थापना की सिफारिश पहली बार प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (First Administrative Reforms Commission – ARC) ने 1966 में अपनी रिपोर्ट में की थी। इस आयोग की अध्यक्षता मोरारजी देसाई ने की थी (बाद में के. हनुमंथैया)। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक स्वतंत्र और निष्पक्ष शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने के उद्देश्य से था।
सरकारीया आयोग (1983) केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा से संबंधित था।
राजमन्नार समिति (1969) तमिलनाडु सरकार द्वारा केंद्र-राज्य संबंधों पर नियुक्त की गई थी।
पुंछी आयोग (2007) भी केंद्र-राज्य संबंधों पर एक आयोग था।
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भारत के संविधान में ‘मंत्री’ शब्द को किस संशोधन अधिनियम द्वारा परिभाषित किया गया था?
- 42वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 44वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 91वां संविधान संशोधन अधिनियम
- 97वां संविधान संशोधन अधिनियम
सही उत्तर: c) 91वां संविधान संशोधन अधिनियम
विस्तृत व्याख्या:
मूल संविधान में ‘मंत्री’ शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया था, और मंत्रिपरिषद का आकार भी निर्धारित नहीं था। 91वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 ने इस संबंध में महत्वपूर्ण बदलाव किए:
- इसने केंद्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर मंत्रिपरिषद के सदस्यों की अधिकतम संख्या को लोकसभा/राज्य विधानसभा की कुल संख्या के 15% तक सीमित कर दिया (प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री सहित)।
- इसने अनुच्छेद 75(1A) और 164(1A) के माध्यम से ‘मंत्री’ शब्द को परिभाषित किया ताकि इसमें मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री भी शामिल हों।
- एक सदस्य को दलबदल के आधार पर अयोग्य घोषित किए जाने पर उसे मंत्री के रूप में नियुक्त होने से भी प्रतिबंधित किया।
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किस अनुच्छेद के तहत संसद को किसी भी राज्य के क्षेत्र में कमी या वृद्धि करने का अधिकार है?
- अनुच्छेद 1
- अनुच्छेद 2
- अनुच्छेद 3
- अनुच्छेद 4
सही उत्तर: c) अनुच्छेद 3
विस्तृत व्याख्या:
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्यों के निर्माण, मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों को बढ़ाने या घटाने, किसी राज्य की सीमाओं को बदलने और किसी राज्य के नाम को बदलने का अधिकार देता है। इन परिवर्तनों के लिए संसद में एक साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है, और उन्हें अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाता है (जैसा कि अनुच्छेद 4 में कहा गया है)।
अनुच्छेद 1 भारत को राज्यों का संघ घोषित करता है।
अनुच्छेद 2 नए राज्यों को संघ में प्रवेश या स्थापित करने से संबंधित है जो पहले से संघ के सदस्य नहीं हैं।
अनुच्छेद 4 अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाए गए कानूनों के संबंध में पूरक, आनुषंगिक और परिणामी मामलों के लिए प्रावधान करता है।
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