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Air India Runway Excursion: Decoding Aviation Safety & Future Challenges

Air India Runway Excursion: Decoding Aviation Safety & Future Challenges

चर्चा में क्यों? (Why in News?):

हाल ही में मुंबई हवाई अड्डे पर एक एयर इंडिया एक्सप्रेस की बोइंग 737-800 उड़ान के रनवे से फिसलने की घटना ने विमानन सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंताएं बढ़ा दी हैं। केरल के कोचीन से आ रही यह उड़ान भारी बारिश के बीच लैंडिंग के दौरान रनवे से उतरकर घास के मैदान में चली गई। गनीमत रही कि विमान में सवार सभी 141 यात्री और चालक दल सुरक्षित रहे। इस घटना ने एक बार फिर विमानन सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं, खासकर प्रतिकूल मौसम की स्थिति में, पर प्रकाश डाला है। यह दुर्घटना एक ‘रनवे एक्सकर्शन’ का एक उदाहरण है, जो विमानन सुरक्षा समुदाय के लिए लगातार चिंता का विषय रहा है।

विमानन सुरक्षा: एक वैश्विक अनिवार्यता (Aviation Safety: A Global Imperative)

विमानन सुरक्षा आधुनिक परिवहन प्रणाली की आधारशिला है। यह केवल नियमों और विनियमों का एक समूह नहीं है, बल्कि एक व्यापक संस्कृति है जो पायलटों, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC), इंजीनियरों, रखरखाव कर्मियों और नियामकों से लेकर हर हितधारक के डीएनए में समाहित होनी चाहिए। एक भी छोटी सी चूक के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं, जैसा कि इतिहास में कई बार देखा गया है। विमानन सुरक्षा का मुख्य उद्देश्य दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं को रोकना, जोखिमों को कम करना और हवाई यात्रा को यथासंभव सुरक्षित बनाना है। यह एक निरंतर विकसित होने वाला क्षेत्र है जो नई तकनीकों, डेटा विश्लेषण और सबक सीखने पर आधारित है।

विमानन सुरक्षा को अक्सर एक अदृश्य छत्र की तरह देखा जाता है – जब सब कुछ ठीक होता है तो हम इसके बारे में शायद ही कभी सोचते हैं, लेकिन इसकी अनुपस्थिति तुरंत महसूस होती है। यह मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ ‘लगभग’ पर्याप्त नहीं होता।

रनवे एक्सकर्शन (Runway Excursion): घटना और इसके प्रकार (The Incident and its Types)

मुंबई की हालिया घटना ‘रनवे एक्सकर्शन’ का एक सटीक उदाहरण है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:

रनवे एक्सकर्शन क्या है? (What is a Runway Excursion?)

रनवे एक्सकर्शन तब होता है जब एक विमान टेक-ऑफ या लैंडिंग के दौरान रनवे की परिभाषित सीमाओं से भटक जाता है। यह एक गंभीर घटना मानी जाती है क्योंकि इसमें विमान को नुकसान पहुंचने, यात्रियों को चोट लगने या उससे भी बदतर स्थिति का खतरा होता है। इसे सामान्यतः दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

  1. रनवे ओवररन (Runway Overrun): यह तब होता है जब एक विमान लैंडिंग के बाद रनवे के अंत से आगे निकल जाता है, या टेक-ऑफ के दौरान रनवे के अंत से पहले हवा में नहीं उठ पाता। यह अक्सर अपर्याप्त ब्रेकिंग, उच्च गति या गीले/दूषित रनवे के कारण होता है।
  2. रनवे वीर-ऑफ (Runway Veer-off): यह तब होता है जब विमान लैंडिंग या टेक-ऑफ के दौरान रनवे की पार्श्व (side-to-side) सीमा से भटक जाता है। मुंबई की घटना ‘वीर-ऑफ’ का एक उदाहरण है, जहाँ विमान रनवे से हटकर बगल के घास के मैदान में चला गया।

रनवे एक्सकर्शन का अन्य घटनाओं से अंतर (Distinction from Other Incidents)

यह समझना महत्वपूर्ण है कि रनवे एक्सकर्शन अन्य हवाईअड्डे की घटनाओं से कैसे भिन्न है:

  • रनवे इनकर्सन (Runway Incursion): यह तब होता है जब कोई अनधिकृत विमान, वाहन या व्यक्ति किसी रनवे पर चला जाता है। इसका मतलब यह है कि किसी दूसरे विमान के साथ टक्कर का खतरा होता है। रनवे एक्सकर्शन में विमान खुद ही रनवे से बाहर चला जाता है, जबकि रनवे इनकर्सन में दूसरे ऑब्जेक्ट का रनवे पर अनधिकृत प्रवेश होता है।
  • टैक्सीवे इनकर्सन (Taxiway Incursion): यह रनवे इनकर्सन के समान है, लेकिन यह टैक्सीवे पर होता है, जहाँ विमानों को चलने की अनुमति है लेकिन वे किसी अन्य विमान या वाहन के रास्ते में आ जाते हैं।

कारणों की पड़ताल: रनवे एक्सकर्शन क्यों होते हैं? (Probing the Causes: Why do Runway Excursions Occur?)

रनवे एक्सकर्शन एक जटिल घटना है जिसके कई अंतर्निहित कारण हो सकते हैं, अक्सर कई कारक मिलकर इसे अंजाम देते हैं। इनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  1. मानवीय कारक (Human Factors):

    • पायलट त्रुटि: लैंडिंग गति का गलत आकलन, गलत थ्रस्ट रिवर्सर का उपयोग, अनुचित ब्रेकिंग तकनीक, या खराब मौसम में कम दृश्यता में सही निर्णय न ले पाना।
    • थकान (Fatigue): पायलट की थकान से निर्णय लेने की क्षमता और प्रतिक्रिया समय प्रभावित हो सकता है।
    • सिचुएशनल अवेयरनेस की कमी: आसपास की स्थिति, रनवे की स्थिति या विमान के प्रदर्शन को ठीक से न समझ पाना।
    • टीम समन्वय की कमी: कॉकपिट क्रू के बीच संचार और समन्वय का अभाव।
  2. मौसम की स्थिति (Weather Conditions):

    • भारी बारिश: जलभराव (aquaplaning) का कारण बन सकता है, जिससे टायरों और रनवे के बीच घर्षण कम हो जाता है।
    • तेज हवाएँ/विंड शियर (Wind Shear): हवा की दिशा या गति में अचानक और नाटकीय बदलाव से विमान का नियंत्रण बिगड़ सकता है, खासकर लैंडिंग या टेक-ऑफ के दौरान।
    • कम दृश्यता: घने कोहरे या भारी बारिश के कारण रनवे एंड या एप्रोच लाइट को देखना मुश्किल हो सकता है।
    • बर्फ/पानी का जमाव: रनवे पर बर्फ, पानी या कीचड़ होने से ब्रेकिंग दक्षता कम हो जाती है।
  3. विमान की खराबी (Aircraft Malfunction):

    • ब्रेकिंग सिस्टम की विफलता: एंटी-स्किड सिस्टम, ब्रेक, या थ्रस्ट रिवर्सर में खराबी।
    • स्टीयरिंग कंट्रोल की समस्या: नोज-व्हील स्टीयरिंग या रडर कंट्रोल में यांत्रिक खराबी।
    • टायर की खराबी: टायर का फट जाना या उसमें हवा कम होना।
  4. रनवे की स्थिति (Runway Conditions):

    • सतह की गुणवत्ता: रनवे की खराब सतह, दरारें, असमानता या रबर जमाव ब्रेकिंग प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।
    • प्रदूषण (Contamination): पानी, बर्फ, बर्फ, तेल या मलबा रनवे की घर्षण विशेषताओं को कम कर सकता है।
    • लंबाई की कमी: विशेष रूप से गीली या दूषित परिस्थितियों में, कुछ रनवे की लंबाई बड़े विमानों के लिए अपर्याप्त हो सकती है।
  5. एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) कारक:

    • गलत जानकारी: ATC द्वारा पायलट को रनवे की स्थिति या मौसम के बारे में गलत या अधूरी जानकारी देना।
    • अनुचित क्लियरेंस: प्रतिकूल परिस्थितियों में लैंडिंग या टेक-ऑफ के लिए समय पर या उपयुक्त क्लियरेंस न देना।
  6. रखरखाव के मुद्दे (Maintenance Issues):

    • विमान या हवाईअड्डे के उपकरण का अपर्याप्त या अनुचित रखरखाव, जिससे सुरक्षा प्रणालियों में खराबी आती है।

इन सभी कारकों का एक जटिल अंतर्संबंध होता है, और एक घटना अक्सर एक से अधिक कारकों के संयोजन का परिणाम होती है। यही कारण है कि विमानन दुर्घटनाओं की जांच इतनी गहन और बहुआयामी होती है।

सुरक्षा तंत्र: भारत में विमानन सुरक्षा नियामक ढाँचा (Safety Mechanisms: India’s Aviation Safety Regulatory Framework)

भारत में विमानन सुरक्षा एक मजबूत और बहु-स्तरीय नियामक ढांचे द्वारा शासित होती है, जो अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) द्वारा निर्धारित वैश्विक मानकों और अनुशंसित प्रथाओं (SARPs – Standards and Recommended Practices) के अनुरूप है। प्रमुख नियामक निकाय और तंत्र इस प्रकार हैं:

  1. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (Directorate General of Civil Aviation – DGCA):

    • भूमिका: यह भारत में विमानन सुरक्षा को विनियमित करने वाला प्राथमिक नियामक निकाय है। यह नागरिक उड्डयन अधिनियम, 1934 के तहत गठित है।
    • कार्य:
      • विमानन सुरक्षा मानकों को तैयार करना और लागू करना।
      • एयरलाइंस, पायलटों, इंजीनियरों, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स और हवाईअड्डों को लाइसेंस और प्रमाणीकरण जारी करना।
      • उड़ानों की सुरक्षा निगरानी और ऑडिट करना।
      • विमान दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं की जांच में सहायता करना (हालांकि मुख्य जांच AAIB द्वारा की जाती है)।
      • विमानों की एयरवर्थनेस सुनिश्चित करना।
      • अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना।
  2. विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (Aircraft Accident Investigation Bureau – AAIB):

    • भूमिका: यह भारत में विमान दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं की स्वतंत्र जांच के लिए जिम्मेदार प्रमुख एजेंसी है। यह नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
    • कार्य:
      • दुर्घटनाओं और घटनाओं के कारणों का पता लगाना।
      • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा सिफारिशें जारी करना।
      • यह सुनिश्चित करना कि जांच निष्पक्ष, वस्तुनिष्ठ और तकनीकी रूप से सटीक हो।
    • महत्व: इसकी स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है ताकि जांच के निष्कर्षों पर कोई बाहरी दबाव न पड़े, और वास्तविक कारण सामने आ सकें।
  3. नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (Bureau of Civil Aviation Security – BCAS):

    • भूमिका: यह नागरिक उड्डयन सुरक्षा (Aviation Security) के लिए नियामक निकाय है, जो हवाईअड्डों और एयरलाइंस पर सुरक्षा प्रोटोकॉल सुनिश्चित करता है।
    • कार्य: सुरक्षा मानकों को तैयार करना, सुरक्षा उपकरणों का परीक्षण करना, सुरक्षा कर्मियों को प्रशिक्षित करना और हवाईअड्डा सुरक्षा की निगरानी करना।
  4. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airports Authority of India – AAI):

    • भूमिका: यह भारत में हवाईअड्डों के प्रबंधन, संचालन और विकास के लिए जिम्मेदार है। इसमें एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट (ATM) सेवाएं भी शामिल हैं।
    • कार्य: हवाईअड्डा अवसंरचना का रखरखाव, नेविगेशनल एड्स का प्रावधान और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेवाएं प्रदान करना।
  5. अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (International Civil Aviation Organization – ICAO):

    • भूमिका: यह संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो अंतर्राष्ट्रीय हवाई नेविगेशन के सिद्धांतों और तकनीकों को विनियमित और समन्वयित करती है, और अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन के विकास की योजना और विकास को बढ़ावा देती है।
    • कार्य: यह अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन के लिए मानक और अनुशंसित प्रथाएं (SARPs) विकसित करता है, जिनका पालन सदस्य देशों द्वारा किया जाता है। DGCA और अन्य भारतीय नियामक ICAO के इन मानकों का पालन करते हैं।

यह नियामक ढाँचा सुनिश्चित करता है कि विमानन सुरक्षा के हर पहलू – विमान की डिज़ाइन से लेकर पायलट के प्रशिक्षण तक, और हवाईअड्डे के संचालन से लेकर दुर्घटना की जांच तक – को कड़े निरीक्षण और मानकों के तहत रखा जाए।

विमानन सुरक्षा में प्रमुख चुनौतियाँ (Major Challenges in Aviation Safety)

भारत में विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इस वृद्धि के साथ कई चुनौतियाँ भी आती हैं जो विमानन सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं:

  1. तीव्र विस्तार बनाम अवसंरचना (Rapid Expansion vs. Infrastructure):

    • भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है। यात्रियों और उड़ानों की संख्या में वृद्धि मौजूदा हवाईअड्डा अवसंरचना (रनवे, टर्मिनल, पार्किंग) पर दबाव डालती है।
    • कई हवाईअड्डे अपनी अधिकतम क्षमता पर काम कर रहे हैं, जिससे भीड़भाड़ और सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं। नए हवाईअड्डों का निर्माण और मौजूदा हवाईअड्डों का उन्नयन धीमी गति से होता है।
  2. पुराने विमान बेड़े बनाम रखरखाव (Aging Aircraft Fleet vs. Maintenance):

    • भारत में कुछ एयरलाइंस अभी भी अपेक्षाकृत पुराने विमान बेड़े का संचालन करती हैं। पुराने विमानों को अधिक गहन रखरखाव की आवश्यकता होती है।
    • उचित रखरखाव सुविधाओं और कुशल तकनीशियनों की कमी से सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं।
  3. पायलट प्रशिक्षण और थकान प्रबंधन (Pilot Training & Fatigue Management):

    • उड़ानों की बढ़ती संख्या के साथ, प्रशिक्षित पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की मांग भी बढ़ रही है। कुशल कर्मियों की कमी से कार्यभार बढ़ता है, जिससे थकान और मानवीय त्रुटि का खतरा होता है।
    • पायलटों और अन्य परिचालन कर्मियों के लिए प्रभावी थकान जोखिम प्रबंधन प्रणाली (FRMS) को लागू करना एक चुनौती बनी हुई है।
  4. ATC आधुनिकीकरण और क्षमता (ATC Modernization & Capacity):

    • भारतीय हवाई क्षेत्र की बढ़ती जटिलता और हवाई यातायात की मात्रा को संभालने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) प्रणालियों के निरंतर आधुनिकीकरण की आवश्यकता है।
    • ATC कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या में भर्ती और प्रशिक्षण भी एक चुनौती है।
  5. मौसम पूर्वानुमान और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव (Weather Forecasting & Climate Change Impacts):

    • भारत में मानसून के दौरान भारी बारिश, कोहरा और खराब दृश्यता एक नियमित चुनौती है। सटीक और समय पर मौसम पूर्वानुमान महत्वपूर्ण है।
    • जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति विमानन संचालन के लिए नई चुनौतियाँ पेश करती है।
  6. उभरती प्रौद्योगिकियाँ और साइबर सुरक्षा (Emerging Technologies & Cybersecurity):

    • ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग जैसी नई प्रौद्योगिकियां विमानन में क्रांति ला रही हैं, लेकिन साथ ही नए सुरक्षा जोखिम (जैसे ड्रोन से टक्कर) और साइबर सुरक्षा चुनौतियाँ (जैसे ATC सिस्टम पर हमले) भी पैदा कर रही हैं।
  7. बुनियादी ढांचे और अनुसंधान के लिए धन (Funding for Infrastructure & Research):

    • विमानन सुरक्षा में सुधार के लिए अत्याधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश की आवश्यकता होती है। पर्याप्त धन जुटाना एक निरंतर चुनौती है।
  8. मानवीय कारक और सुरक्षा संस्कृति (Human Factors & Safety Culture):

    • मानवीय त्रुटि अभी भी अधिकांश विमानन घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। एक मजबूत सुरक्षा संस्कृति विकसित करना, जहां कर्मचारी बिना डर के गलतियों की रिपोर्ट कर सकें और उनसे सीख सकें, महत्वपूर्ण है।

इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जिसमें सरकार, नियामक, एयरलाइंस, हवाईअड्डे और अंतर्राष्ट्रीय निकाय सभी मिलकर काम करें।

आगे की राह: भारत में विमानन सुरक्षा को मजबूत करना (Way Forward: Strengthening Aviation Safety in India)

भारत के बढ़ते विमानन क्षेत्र को देखते हुए, सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अनिवार्य है। आगे की राह में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल होने चाहिए:

  1. उन्नत प्रशिक्षण और कौशल विकास (Enhanced Training & Skill Development):

    • पायलटों, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स, रखरखाव इंजीनियरों और सुरक्षा कर्मियों के लिए अत्याधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश।
    • विशेष रूप से प्रतिकूल मौसम की स्थिति में आपातकालीन प्रक्रियाओं और निर्णय लेने पर ध्यान केंद्रित करना।
    • थकान प्रबंधन प्रणाली (Fatigue Risk Management Systems – FRMS) को सख्ती से लागू करना।
  2. प्रौद्योगिकी का उपयोग (Technology Adoption):

    • उन्नत मौसम प्रणाली: अधिक सटीक और समय पर मौसम पूर्वानुमान और रनवे की स्थिति की जानकारी के लिए रडार, उपग्रह और सेंसर आधारित प्रणालियों का उपयोग।
    • नेविगेशनल एड्स: इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS), ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) आधारित एप्रोच और अन्य सटीक नेविगेशनल एड्स का उन्नयन।
    • डेटा एनालिटिक्स और AI: सुरक्षा डेटा का विश्लेषण करने के लिए AI और मशीन लर्निंग का उपयोग करना ताकि संभावित जोखिमों की पहचान की जा सके और निवारक उपाय किए जा सकें।
    • रनवे सुरक्षा संवर्द्धन: रनवे ओवररन प्रिवेंशन सिस्टम (ROPS) और रनवे एलीगेशन फैसिलिटीज़ (RESA) का कार्यान्वयन।
  3. बुनियादी ढांचे का उन्नयन (Infrastructure Upgrade):

    • हवाईअड्डे का विस्तार: बढ़ती यातायात आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए हवाईअड्डों का निर्माण और मौजूदा हवाईअड्डों की क्षमता बढ़ाना।
    • रनवे का रखरखाव: रनवे की सतह की गुणवत्ता, ड्रेनेज सिस्टम और लाइटिंग का नियमित और उच्च गुणवत्ता वाला रखरखाव सुनिश्चित करना।
    • पर्याप्त रनवे लंबाई: भारी बारिश और उच्च तापमान जैसी स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रनवे की पर्याप्त लंबाई सुनिश्चित करना।
  4. नियामक निरीक्षण और प्रवर्तन (Regulatory Oversight & Enforcement):

    • DGCA और AAIB जैसे नियामक निकायों को और मजबूत करना, उन्हें पर्याप्त संसाधन और जनशक्ति प्रदान करना।
    • सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना।
    • स्वतंत्र दुर्घटना जांच में तेजी लाना और सिफारिशों को समय पर लागू करना।
  5. मजबूत सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देना (Promoting a Robust Safety Culture):

    • एयरलाइंस और हवाईअड्डा संचालकों के बीच एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देना जहाँ कर्मचारी सुरक्षा चिंताओं को बिना किसी डर के रिपोर्ट कर सकें (Non-Punitive Reporting System)।
    • सुरक्षा को एक सतत सीखने की प्रक्रिया के रूप में देखना, जहाँ हर घटना से सबक सीखा जाता है।
    • प्रबंधन स्तर पर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और इसके लिए आवश्यक संसाधनों का आवंटन करना।
  6. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (International Collaboration):

    • ICAO और अन्य वैश्विक विमानन संगठनों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं और नवीनतम सुरक्षा तकनीकों को अपनाया जा सके।
    • वैश्विक सुरक्षा डेटा साझाकरण पहलों में भाग लेना।
  7. पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव (Environmental and Climate Change Impacts):

    • जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न होने वाली नई चुनौतियों (जैसे अधिक तीव्र तूफान, तापमान में वृद्धि) का आकलन करना और उनके लिए संचालन प्रोटोकॉल को अनुकूलित करना।

इन उपायों का एक समन्वित और समग्र कार्यान्वयन भारत में विमानन सुरक्षा के स्तर को और बढ़ाएगा, जिससे हवाई यात्रा देश की बढ़ती आबादी के लिए सबसे सुरक्षित और कुशल परिवहन विकल्प बनी रहेगी।

निष्कर्ष (Conclusion)

मुंबई में एयर इंडिया एक्सप्रेस की घटना एक चेतावनी है कि विमानन सुरक्षा कभी भी कमतर नहीं आंकी जा सकती। यह याद दिलाता है कि भले ही विमानन दुनिया में सबसे सुरक्षित परिवहन माध्यमों में से एक हो, लेकिन सुरक्षा के लिए निरंतर सतर्कता, निवेश और विकास की आवश्यकता है। भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वह अपनी अवसंरचना, प्रशिक्षण, नियामक तंत्र और सुरक्षा संस्कृति को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप लगातार मजबूत करता रहे। हर छोटी से छोटी घटना से सबक लेना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना ही वास्तव में एक मजबूत और लचीली विमानन सुरक्षा प्रणाली का निर्माण करेगा। अंततः, विमानन सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं है, बल्कि प्रत्येक हितधारक द्वारा सुरक्षित संचालन के प्रति गहरी प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी की भावना है।

UPSC परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Practice Questions for UPSC Exam)

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) – 10 MCQs

(निम्नलिखित प्रश्नों पर विचार करें और सही उत्तर चुनें)

  1. प्रश्न 1: भारत में नागरिक उड्डयन सुरक्षा के लिए नियामक निकाय कौन सा है?

    1. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI)
    2. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA)
    3. विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (AAIB)
    4. भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (AERA)

    उत्तर: b) नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA)

    व्याख्या: DGCA भारत में नागरिक उड्डयन सुरक्षा को विनियमित करने वाला प्राथमिक निकाय है, जो सुरक्षा मानकों को निर्धारित करता है और उनका अनुपालन सुनिश्चित करता है। AAIB दुर्घटना जांच के लिए है, AAI हवाई अड्डों का प्रबंधन करता है, और AERA आर्थिक विनियमन करता है।

  2. प्रश्न 2: ‘रनवे ओवररन’ शब्द का सबसे सटीक वर्णन क्या है?

    1. जब कोई अनधिकृत वाहन रनवे पर प्रवेश करता है।
    2. जब कोई विमान लैंडिंग के बाद रनवे के अंत से आगे निकल जाता है।
    3. जब कोई विमान टेक-ऑफ के दौरान रनवे की पार्श्व सीमा से भटक जाता है।
    4. जब विमान में तकनीकी खराबी के कारण उड़ान रद्द करनी पड़ती है।

    उत्तर: b) जब कोई विमान लैंडिंग के बाद रनवे के अंत से आगे निकल जाता है।

    व्याख्या: रनवे ओवररन विशेष रूप से तब होता है जब विमान लैंडिंग के बाद रनवे की परिभाषित लंबाई से आगे निकल जाता है। ‘रनवे वीर-ऑफ’ पार्श्व भटकने को संदर्भित करता है, जबकि ‘रनवे इनकर्सन’ अनधिकृत प्रवेश है।

  3. प्रश्न 3: भारत में विमान दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं की स्वतंत्र जांच के लिए कौन सी एजेंसी जिम्मेदार है?

    1. नागरिक उड्डयन मंत्रालय
    2. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA)
    3. विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (AAIB)
    4. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI)

    उत्तर: c) विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (AAIB)

    व्याख्या: AAIB भारत में विमान दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं की स्वतंत्र जांच करने वाला प्राथमिक निकाय है, जिसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिफारिशें जारी करना है।

  4. प्रश्न 4: अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

    1. यह संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है।
    2. यह अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन के लिए मानक और अनुशंसित प्रथाएं (SARPs) विकसित करता है।
    3. भारत ICAO का सदस्य नहीं है।

    उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

    1. केवल 1
    2. केवल 2
    3. 1 और 2 दोनों
    4. 1, 2 और 3

    उत्तर: c) 1 और 2 दोनों

    व्याख्या: ICAO संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो वैश्विक विमानन मानकों को स्थापित करती है। भारत इसका एक संस्थापक सदस्य है।

  5. प्रश्न 5: ‘एक्वाप्लेनिंग’ (Aquaplaning) किस स्थिति से संबंधित है, जो विमानन सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है?

    1. इंजन की खराबी के कारण विमान का नियंत्रण खोना।
    2. भारी बारिश के कारण रनवे पर पानी की परत पर विमान के टायरों का कर्षण खोना।
    3. तेज हवाओं के कारण विमान का असामान्य रूप से हिलना।
    4. कम दृश्यता के कारण पायलट का रनवे से भटक जाना।

    उत्तर: b) भारी बारिश के कारण रनवे पर पानी की परत पर विमान के टायरों का कर्षण खोना।

    व्याख्या: एक्वाप्लेनिंग तब होता है जब रनवे पर पानी की एक परत बन जाती है, जिससे टायरों और रनवे के बीच का संपर्क टूट जाता है और ब्रेकिंग दक्षता कम हो जाती है।

  6. प्रश्न 6: निम्नलिखित में से कौन सा कारक ‘रनवे एक्सकर्शन’ का एक संभावित कारण नहीं है?

    1. पायलट की थकान
    2. रनवे पर पानी का जमाव
    3. एवियन फ्लू का प्रकोप
    4. विमान के ब्रेकिंग सिस्टम की खराबी

    उत्तर: c) एवियन फ्लू का प्रकोप

    व्याख्या: एवियन फ्लू एक संक्रामक बीमारी है जो पक्षियों को प्रभावित करती है और प्रत्यक्ष रूप से रनवे एक्सकर्शन का कारण नहीं बनती। अन्य सभी विकल्प रनवे एक्सकर्शन के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कारण हो सकते हैं।

  7. प्रश्न 7: भारत में हवाईअड्डों पर नागरिक उड्डयन सुरक्षा उपायों के विनियमन और निगरानी के लिए कौन सा निकाय जिम्मेदार है?

    1. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI)
    2. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA)
    3. नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS)
    4. एयरपोर्ट आर्थिक नियामक प्राधिकरण (AERA)

    उत्तर: c) नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS)

    व्याख्या: BCAS भारत में नागरिक उड्डयन सुरक्षा के लिए नियामक प्राधिकरण है, जो सुरक्षा मानकों को निर्धारित करता है और हवाईअड्डे की सुरक्षा की निगरानी करता है।

  8. प्रश्न 8: ‘रनवे इनकर्सन’ और ‘रनवे एक्सकर्शन’ के बीच प्राथमिक अंतर क्या है?

    1. इनकर्सन हमेशा लैंडिंग के दौरान होता है जबकि एक्सकर्शन टेक-ऑफ के दौरान होता है।
    2. इनकर्सन एक अनधिकृत प्रवेश को संदर्भित करता है, जबकि एक्सकर्शन विमान का रनवे की सीमाओं से भटकना है।
    3. एक्सकर्शन में हमेशा मानवीय त्रुटि शामिल होती है, जबकि इनकर्सन में तकनीकी खराबी होती है।
    4. इनकर्सन अधिक गंभीर होता है क्योंकि इसमें हमेशा दुर्घटना होती है।

    उत्तर: b) इनकर्सन एक अनधिकृत प्रवेश को संदर्भित करता है, जबकि एक्सकर्शन विमान का रनवे की सीमाओं से भटकना है।

    व्याख्या: रनवे इनकर्सन तब होता है जब कोई अनधिकृत विमान, वाहन या व्यक्ति रनवे पर चला जाता है। रनवे एक्सकर्शन तब होता है जब विमान खुद ही रनवे की परिभाषित सीमाओं से बाहर चला जाता है।

  9. प्रश्न 9: निम्नलिखित में से कौन सा ICAO द्वारा निर्धारित मानक और अनुशंसित प्रथाओं (SARPs) के अनुपालन का एक लाभ है?

    1. यह अंतर्राष्ट्रीय हवाई यातायात को प्रतिबंधित करता है।
    2. यह सदस्य देशों के लिए विमानन उत्पादों का निर्यात अनिवार्य करता है।
    3. यह अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन में सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित करने में मदद करता है।
    4. यह केवल सैन्य विमानन पर लागू होता है।

    उत्तर: c) यह अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन में सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित करने में मदद करता है।

    व्याख्या: ICAO SARPs का उद्देश्य वैश्विक विमानन में सुरक्षा, दक्षता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक सामान्य ढांचा प्रदान करना है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय यात्रा सुगम हो सके।

  10. प्रश्न 10: भारत में हवाई यातायात प्रबंधन (Air Traffic Management – ATM) सेवाओं के प्रावधान के लिए मुख्य रूप से कौन जिम्मेदार है?

    1. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA)
    2. विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (AAIB)
    3. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI)
    4. नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS)

    उत्तर: c) भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI)

    व्याख्या: AAI भारत में हवाईअड्डों के प्रबंधन, संचालन और विकास के साथ-साथ एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट (ATM) सेवाएं प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है।

मुख्य परीक्षा (Mains)

(निम्नलिखित विश्लेषणात्मक प्रश्नों के विस्तृत उत्तर लिखें)

  1. हाल ही में मुंबई में हुई ‘रनवे एक्सकर्शन’ की घटना के संदर्भ में, भारत में विमानन सुरक्षा नियामक ढांचे का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। सुरक्षा में सुधार के लिए आप कौन से संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक सुधार सुझाएंगे?
  2. “विमानन दुर्घटनाओं को रोकने में मानवीय कारक, तकनीकी उन्नयन और पर्यावरणीय परिस्थितियों का एक जटिल अंतर्संबंध होता है।” इस कथन के प्रकाश में, भारत में विमानन सुरक्षा के लिए प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करें और उनके शमन के लिए प्रभावी रणनीतियों का सुझाव दें।
  3. भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है। इस तीव्र वृद्धि से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करें, विशेष रूप से हवाईअड्डा अवसंरचना और एयर ट्रैफिक प्रबंधन के संदर्भ में। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए ‘आगे की राह’ के रूप में आप किन कदमों को प्राथमिकता देंगे?

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