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11,000 ‘घोस्ट वोटर्स’ बिहार में: निर्वाचन आयोग की अप्रवासन चुनौती का डिकोडिंग

11,000 ‘घोस्ट वोटर्स’ बिहार में: निर्वाचन आयोग की अप्रवासन चुनौती का डिकोडिंग

चर्चा में क्यों? (Why in News?):

हाल ही में बिहार से आई एक खबर ने न केवल राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि देश भर में अवैध आप्रवासन और चुनावी शुद्धता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर बहस छेड़ दी है। बिहार में निर्वाचन आयोग (Election Commission – EC) के मतदाता सूची संशोधन अभियान के दौरान लगभग 11,000 ऐसे मतदाता ‘लापता’ पाए गए हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। इन ‘ट्रेस न किए जा सकने वाले’ मतदाताओं को लेकर चुनाव आयोग ने चिंता व्यक्त की है कि ये अवैध आप्रवासी हो सकते हैं। यह घटना एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे को राष्ट्रीय पटल पर ले आई है कि कैसे अवैध आप्रवासन हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा, जनसांख्यिकी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जड़ों को प्रभावित कर सकता है।

यह सिर्फ बिहार की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक राष्ट्रीय चिंता का प्रतीक है। चुनावी सूचियों में ‘घोस्ट वोटर्स’ या ऐसे नाम, जिनका सत्यापन नहीं हो सकता, न केवल चुनावों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं, बल्कि यदि इनके पीछे अवैध आप्रवासियों का हाथ हो, तो यह देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन जाती है। आइए, इस जटिल विषय की गहराइयों में उतरते हैं और समझने का प्रयास करते हैं कि अवैध आप्रवासन क्या है, यह भारत के लिए क्यों एक गंभीर चुनौती है, इससे निपटने के लिए हमारे पास क्या कानूनी और संस्थागत ढाँचा है, और निर्वाचन आयोग की भूमिका व चुनौतियाँ क्या हैं।

अवैध आप्रवासन: एक जटिल चुनौती (Illegal Immigration: A Complex Challenge)

अवैध आप्रवासन का अर्थ उन व्यक्तियों के देश में प्रवेश या निवास से है जो संबंधित देश के कानूनों का उल्लंघन करते हैं। इसमें ऐसे लोग शामिल होते हैं जो बिना वैध दस्तावेजों के प्रवेश करते हैं, या जिनके वीज़ा/परमिट की अवधि समाप्त हो जाती है और वे देश में रुक जाते हैं। भारत के संदर्भ में, यह एक बहुआयामी चुनौती है जिसके ऐतिहासिक, भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक आयाम हैं।

भारत में अवैध आप्रवासन की स्थिति

भारत की लंबी और छिद्रपूर्ण सीमाएँ इसे पड़ोसी देशों, विशेषकर बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार से अवैध आप्रवासन के लिए संवेदनशील बनाती हैं।

  • बांग्लादेश: भारत के पूर्वी पड़ोसी बांग्लादेश से आप्रवासन की समस्या सबसे बड़ी और पुरानी है। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में लोग भारत आए थे, जिनमें से कई कभी वापस नहीं गए। गरीबी, बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश, राजनीतिक उत्पीड़न और धार्मिक भेदभाव जैसे कारण आज भी लोगों को सीमा पार करने के लिए प्रेरित करते हैं।
  • म्यांमार: म्यांमार से रोहिंग्या शरणार्थियों का लगातार भारत में आना एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है, विशेषकर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में। हालांकि रोहिंग्या शरणार्थी होने का दावा करते हैं, भारत सरकार उन्हें अवैध आप्रवासी मानती है क्योंकि भारत ने 1951 के शरणार्थी कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
  • नेपाल: भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा के कारण लोगों की आवाजाही अपेक्षाकृत आसान है। हालांकि, कुछ लोग इसका फायदा उठाकर अवैध गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं या फिर तीसरे देशों के नागरिकों को भारत में प्रवेश कराने में मदद करते हैं।
  • पाकिस्तान और श्रीलंका: इनसे भी कुछ हद तक अवैध आप्रवासन होता है, अक्सर समुद्र या अन्य मार्गों से।

अवैध आप्रवासन के प्रभाव (Impacts of Illegal Immigration)

अवैध आप्रवासन के भारत पर कई गंभीर और दूरगामी परिणाम होते हैं:

1. आर्थिक प्रभाव (Economic Impact):

  • संसाधनों पर दबाव: अवैध आप्रवासियों की बढ़ती संख्या से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) जैसे बुनियादी संसाधनों और सेवाओं पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, खासकर शहरी और सीमावर्ती क्षेत्रों में।
  • वेतन में कमी: ये आप्रवासी अक्सर कम वेतन पर काम करने को तैयार होते हैं, जिससे स्थानीय श्रमिकों के वेतन में कमी आती है और रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।
  • अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार: वे अक्सर अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं, जिससे श्रम कानूनों का उल्लंघन होता है और सरकार को कर राजस्व का नुकसान होता है।

2. सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव (Social & Cultural Impact):

  • जनसांख्यिकीय परिवर्तन: सीमावर्ती राज्यों में जनसांख्यिकीय संतुलन बदल सकता है, जिससे स्थानीय आबादी की पहचान और संस्कृति खतरे में पड़ सकती है। उदाहरण के लिए, असम और त्रिपुरा में इस मुद्दे पर लंबे समय से तनाव है।
  • सामाजिक तनाव: संसाधनों और रोजगार को लेकर स्थानीय आबादी और आप्रवासियों के बीच संघर्ष हो सकता है, जिससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है।
  • कानून और व्यवस्था: अवैध आप्रवासी कभी-कभी छोटे-मोटे अपराधों से लेकर संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी में भी शामिल पाए जाते हैं।

3. राजनीतिक प्रभाव (Political Impact):

  • चुनावी हेरफेर: यह सबसे चिंताजनक प्रभावों में से एक है। अवैध आप्रवासियों का नाम मतदाता सूची में शामिल होने से चुनाव की पवित्रता भंग होती है और हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होती है। यह वोट बैंक की राजनीति को बढ़ावा देता है, जहाँ राजनीतिक दल अवैध आप्रवासियों को अपना वोट बैंक बनाने की कोशिश करते हैं।
  • स्थानीय राजनीति पर प्रभाव: कुछ क्षेत्रों में, अवैध आप्रवासियों की संख्या इतनी बढ़ जाती है कि वे स्थानीय राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
  • नागरिकता का मुद्दा: अवैध आप्रवासन राष्ट्रीय नागरिकता की अवधारणा को धूमिल करता है और नागरिकता के सत्यापन को जटिल बनाता है।

4. सुरक्षा प्रभाव (Security Impact):

  • राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा: अवैध आप्रवासी देश विरोधी गतिविधियों, जासूसी, आतंकवाद और सीमा पार अपराधों के लिए एक आवरण प्रदान कर सकते हैं। खुफिया एजेंसियां ​​अक्सर अवैध आप्रवासियों के बीच छिपे आतंकवादियों या चरमपंथियों की मौजूदगी को लेकर चिंता व्यक्त करती हैं।
  • सीमा प्रबंधन चुनौतियाँ: अवैध आप्रवासन सीमा पार से घुसपैठ को बढ़ावा देता है, जिससे सीमा प्रबंधन और अधिक जटिल हो जाता है।
  • मानव तस्करी: कमजोर और विवश अवैध आप्रवासियों को अक्सर मानव तस्करों द्वारा शोषण का शिकार बनाया जाता है।

5. पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental Impact):

  • जनसंख्या घनत्व में वृद्धि से वनों की कटाई, अवैध अतिक्रमण और स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर सीमावर्ती वन क्षेत्रों में।

“अवैध आप्रवासन एक धीमा ज़हर है जो किसी भी देश की आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा संरचना को अंदर से खोखला कर सकता है। यह सिर्फ एक कानून और व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्तित्व का प्रश्न है।”
– आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञ।

भारत में अवैध आप्रवासन से निपटने के लिए कानूनी और संस्थागत ढाँचा (Legal & Institutional Framework to Tackle Illegal Immigration in India)

भारत सरकार ने अवैध आप्रवासन से निपटने के लिए विभिन्न कानूनों और संस्थाओं का एक जटिल जाल बिछा रखा है।

1. प्रमुख कानून (Key Laws):

  • विदेशी अधिनियम, 1946 (Foreigners Act, 1946): यह अधिनियम भारत में विदेशियों के प्रवेश, निवास और निष्कासन को विनियमित करने वाला मुख्य कानून है। यह केंद्र सरकार को किसी भी विदेशी को देश से बाहर निकालने का अधिकार देता है यदि उसका रहना हानिकारक माना जाता है। इस कानून के तहत, एक अवैध आप्रवासी को गिरफ्तार किया जा सकता है, हिरासत में लिया जा सकता है और वापस भेजा जा सकता है।
  • नागरिकता अधिनियम, 1955 (The Citizenship Act, 1955): यह अधिनियम भारतीय नागरिकता प्राप्त करने और उसे खोने से संबंधित प्रावधानों को परिभाषित करता है। इसमें अवैध आप्रवासियों को नागरिकता प्रदान न करने के स्पष्ट प्रावधान हैं। 2019 के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) ने इस अधिनियम में कुछ बदलाव किए, जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए कुछ धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया, जो भारतीय नागरिकता कानून के तहत अवैध आप्रवासी माने जाते थे।
  • पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 (Passport (Entry into India) Act, 1920): यह कानून उन सभी व्यक्तियों के लिए वैध यात्रा दस्तावेज (जैसे पासपोर्ट) को अनिवार्य करता है जो भारत में प्रवेश करना चाहते हैं।
  • पंजीकरण विदेशी अधिनियम, 1939 (Registration of Foreigners Act, 1939): यह भारत में आने वाले सभी विदेशियों के लिए खुद को पंजीकरण अधिकारियों के साथ पंजीकृत कराना अनिवार्य बनाता है।

2. संस्थागत ढाँचा (Institutional Framework):

  • गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA): यह भारत में आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और अवैध आप्रवासन से संबंधित नीतियों का निर्माण और कार्यान्वयन करने वाली नोडल एजेंसी है।
  • सीमा सुरक्षा बल (Border Guarding Forces – BSF, SSB, ITBP, Assam Rifles):
    • सीमा सुरक्षा बल (BSF): भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात।
    • सशस्त्र सीमा बल (SSB): भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा पर तैनात।
    • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP): भारत-चीन सीमा पर तैनात।
    • असम राइफल्स: भारत-म्यांमार सीमा और पूर्वोत्तर में आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार।

    ये बल सीमाओं पर गश्त, घुसपैठ को रोकना और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने का काम करते हैं।

  • राज्य पुलिस/सीआईडी/विशेष शाखाएँ: राज्य स्तर पर, पुलिस बल अवैध आप्रवासियों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष शाखाएँ खुफिया जानकारी एकत्र करती हैं।
  • निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI): भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित ECI, भारत में चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है। इसमें मतदाता सूची तैयार करना और उसमें संशोधन करना शामिल है। ECI का प्रयास होता है कि केवल पात्र भारतीय नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल हों।
  • विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners Tribunals): ये असम जैसे राज्यों में स्थापित अर्ध-न्यायिक निकाय हैं जो किसी व्यक्ति की नागरिकता स्थिति का निर्धारण करते हैं। यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर पाता, तो उसे ‘विदेशी’ घोषित कर दिया जाता है।
  • भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) / आधार: हालांकि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, यह पहचान स्थापित करने और डेटाबेस को अद्यतन करने में सहायक हो सकता है। यह डुप्लिकेट प्रविष्टियों को रोकने में मदद कर सकता है, लेकिन अवैध आप्रवासियों को इसे प्राप्त करने से रोकना एक चुनौती है।

निर्वाचन आयोग की भूमिका और चुनौतियाँ (Role and Challenges of the Election Commission)

लोकतंत्र की नींव सही और विश्वसनीय मतदाता सूची पर टिकी होती है। निर्वाचन आयोग (ECI) की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची त्रुटिहीन हो और केवल योग्य भारतीय नागरिकों के नाम ही इसमें शामिल हों।

निर्वाचन आयोग की भूमिका (Role of ECI):

  • मतदाता सूची का रखरखाव: ECI नियमित रूप से मतदाता सूची का पुनरीक्षण (revision) करता है, जिसमें नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं और मृत या स्थानांतरित व्यक्तियों के नाम हटाए जाते हैं।
  • शुद्धिकरण अभियान: आयोग समय-समय पर मतदाता सूची में विसंगतियों, डुप्लिकेट प्रविष्टियों और अयोग्य मतदाताओं (जैसे कि अवैध आप्रवासी) के नामों को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाता है।
  • स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव: एक शुद्ध मतदाता सूची यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी हों, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता बनी रहे।

निर्वाचन आयोग के सामने चुनौतियाँ (Challenges for ECI):

हालांकि ECI अपनी भूमिका में सक्रिय है, उसे अवैध आप्रवासियों के मुद्दे से निपटने में कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:

  • पहचान की जटिलता: अवैध आप्रवासियों की पहचान करना अत्यंत कठिन है। वे अक्सर जाली दस्तावेज, जैसे राशन कार्ड, आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर लेते हैं, जिससे उन्हें भारतीय नागरिक के रूप में प्रस्तुत करना आसान हो जाता है। बिहार में ‘ट्रेस न किए जा सकने वाले’ 11,000 मतदाताओं का मामला इसी चुनौती को उजागर करता है।
  • नागरिकता साबित करने का अभाव: ECI के पास किसी व्यक्ति की नागरिकता को सीधे तौर पर साबित करने या खंडन करने की शक्ति नहीं है। यह कार्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों (जैसे पुलिस) और न्यायाधिकरणों (जैसे विदेशी न्यायाधिकरण) के दायरे में आता है। ECI केवल उन नामों को हटा सकता है जो सत्यापन प्रक्रिया में ‘ट्रेस न किए जा सकने वाले’ या ‘संदिग्ध’ पाए जाते हैं, और फिर मामले को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित कर सकता है।
  • राजनीतिक हस्तक्षेप और वोट बैंक की राजनीति: अवैध आप्रवासियों का मुद्दा अक्सर राजनीतिक रूप से संवेदनशील होता है। कुछ राजनीतिक दल उन्हें वोट बैंक के रूप में देखते हैं और उनकी पहचान या निष्कासन के प्रयासों का विरोध कर सकते हैं, जिससे ECI के लिए अपना काम करना मुश्किल हो जाता है।
  • कानूनी अड़चनें और न्यायिक हस्तक्षेप: मतदाता सूची से किसी भी नाम को हटाने के लिए एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है, जिसमें व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना भी शामिल है। गलत निष्कासन के खिलाफ अदालती चुनौतियाँ भी प्रक्रिया को धीमा कर सकती हैं।
  • संसाधन और जनशक्ति की कमी: देश भर में करोड़ों मतदाताओं की पहचान और सत्यापन एक विशाल कार्य है जिसके लिए पर्याप्त संसाधनों, प्रशिक्षित जनशक्ति और तकनीकी सहायता की आवश्यकता होती है।
  • राज्य सरकारों का सहयोग: मतदाता सूची का पुनरीक्षण और अवैध आप्रवासियों की पहचान राज्य प्रशासन के सहयोग के बिना संभव नहीं है। कुछ मामलों में, आवश्यक सहयोग की कमी प्रक्रिया को बाधित कर सकती है।

“एक शुद्ध मतदाता सूची ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की आत्मा होती है। ECI के लिए यह सुनिश्चित करना एक धर्मयुद्ध के समान है कि इस पवित्र सूची में कोई भी अवैध तत्व शामिल न हो, भले ही चुनौतियाँ कितनी भी बड़ी क्यों न हों।”

आगे की राह: स्थायी समाधान की ओर (Way Forward: Towards Sustainable Solutions)

अवैध आप्रवासन एक बहुआयामी समस्या है जिसके लिए एक व्यापक, समन्वित और स्थायी समाधान की आवश्यकता है। इसमें केवल कानून प्रवर्तन ही नहीं, बल्कि राजनयिक, सामाजिक और तकनीकी उपाय भी शामिल होने चाहिए।

1. सीमा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना (Strengthening Border Management):

  • भौतिक बाधाएँ: शेष अविराम सीमा क्षेत्रों में प्रभावी बाड़ लगाना और दीवारें बनाना।
  • तकनीकी निगरानी: अत्याधुनिक निगरानी तकनीक जैसे ड्रोन, सेंसर, नाइट-विज़न कैमरे और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करना ताकि सीमा पार घुसपैठ का वास्तविक समय पर पता लगाया जा सके।
  • खुफिया जानकारी साझाकरण: सीमा सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस के बीच खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और समन्वय को मजबूत करना।
  • सीमा चौकीकरण: पर्याप्त संख्या में सीमा चौकियों की स्थापना और उनमें कर्मियों की तैनाती।

2. नागरिकता सत्यापन तंत्र में सुधार (Improving Citizenship Verification Mechanism):

  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens – NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register – NPR): हालांकि ये विवादास्पद मुद्दे रहे हैं, एक अद्यतन और त्रुटिहीन NRC या NPR, जो पूरी तरह से कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करता हो, अवैध आप्रवासियों की पहचान करने और भारतीय नागरिकों को सूचीबद्ध करने में मदद कर सकता है।
  • डेटाबेस एकीकरण: आधार, पैन, मतदाता पहचान पत्र, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, और संपत्ति के रिकॉर्ड जैसे विभिन्न डेटाबेस को आपस में जोड़ना। यह डुप्लिकेट या संदिग्ध प्रविष्टियों को ट्रैक करने और हटाने में मदद करेगा।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग: बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट, आइरिस स्कैन) और फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक का उपयोग करके पहचान की सटीकता बढ़ाना।

3. कानूनी ढाँचे को मजबूत करना (Strengthening Legal Framework):

  • कठोर कानून: अवैध आप्रवासियों को शरण देने, नौकरी देने या जाली दस्तावेज बनाने में मदद करने वालों के खिलाफ अधिक कठोर दंड का प्रावधान करना।
  • शीघ्र निर्वासन प्रक्रिया: अवैध आप्रवासियों के निर्वासन (deportation) की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना। निर्वासन के लिए पड़ोसी देशों के साथ मजबूत द्विपक्षीय संधियाँ और समझौते आवश्यक हैं।
  • विदेशी न्यायाधिकरणों को सशक्त बनाना: विदेशी न्यायाधिकरणों की संख्या बढ़ाना, उनकी कार्यप्रणाली में सुधार करना और उन्हें पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना ताकि मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके।

4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (International Cooperation):

  • द्विपक्षीय वार्ता: बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ नियमित उच्च-स्तरीय राजनयिक वार्ताएं करना ताकि अवैध आप्रवासन के मूल कारणों का समाधान किया जा सके और उनके नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।
  • सूचना साझाकरण: सीमा पार अपराधों और आतंकवादियों के बारे में जानकारी साझा करने के लिए सीमावर्ती देशों के साथ खुफिया सहयोग बढ़ाना।

5. जागरूकता और जनभागीदारी (Awareness and Public Participation):

  • नागरिकों को अवैध आप्रवासन के खतरों के बारे में शिक्षित करना और उन्हें संदिग्ध गतिविधियों या व्यक्तियों की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • स्थानीय समुदायों को सीमा प्रबंधन और पहचान प्रक्रिया में शामिल करना।

6. मानवीय दृष्टिकोण और शरणार्थी नीति (Humanitarian Approach and Refugee Policy):

  • यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि अवैध आप्रवासियों और वास्तविक शरणार्थियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए। भारत को एक व्यापक और स्पष्ट शरणार्थी नीति विकसित करने पर विचार करना चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप हो, जबकि साथ ही अवैध प्रवेश को दृढ़ता से रोके।

7. राजनीतिक इच्छाशक्ति (Political Will):

  • इन सभी उपायों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए मजबूत और अटूट राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करना कि यह मुद्दा वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित के रूप में देखा जाए।

निष्कर्ष (Conclusion)

बिहार में 11,000 ‘ट्रेस न किए जा सकने वाले’ मतदाताओं का मामला अवैध आप्रवासन की चुनौती की गंभीरता का एक स्पष्ट संकेत है। यह केवल एक राज्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की संप्रभुता, सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता से जुड़ा एक राष्ट्रीय मुद्दा है। निर्वाचन आयोग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन उसे इस जटिल समस्या से निपटने के लिए सरकार की अन्य शाखाओं और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भी आवश्यकता है।

यह आवश्यक है कि भारत एक बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाए जो कठोर सीमा नियंत्रण और मजबूत कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ एक सुदृढ़ पहचान और सत्यापन तंत्र को भी शामिल करे। साथ ही, राजनयिक प्रयासों और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग को भी मजबूत किया जाना चाहिए। लोकतंत्र की नींव को मजबूत बनाए रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, हमें अवैध आप्रवासन की इस चुनौती का सामना दृढ़ता, बुद्धिमत्ता और मानवीय संवेदनशीलता के साथ करना होगा। तभी हम यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि हमारी मतदाता सूची केवल भारतीय नागरिकों का ही प्रतिनिधित्व करती है, और हमारे चुनाव हमारी संप्रभुता के सच्चे प्रतिबिंब हों।

UPSC परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Practice Questions for UPSC Exam)

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) – 10 MCQs

निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

1. कथन: विदेशी अधिनियम, 1946 भारत में विदेशियों के प्रवेश, निवास और निष्कासन को विनियमित करने वाला प्राथमिक कानून है।
कथन: इस अधिनियम के तहत, एक अवैध आप्रवासी को गिरफ्तार किया जा सकता है, हिरासत में लिया जा सकता है और वापस भेजा जा सकता है।

  1. कथन 1 सही है लेकिन कथन 2 गलत है।
  2. कथन 2 सही है लेकिन कथन 1 गलत है।
  3. कथन 1 और कथन 2 दोनों सही हैं और कथन 2, कथन 1 की सही व्याख्या करता है।
  4. कथन 1 और कथन 2 दोनों सही हैं लेकिन कथन 2, कथन 1 की सही व्याख्या नहीं करता है।

उत्तर: c)
व्याख्या: विदेशी अधिनियम, 1946 वास्तव में भारत में विदेशियों से संबंधित प्राथमिक कानून है, और यह सरकार को अवैध आप्रवासियों को गिरफ्तार करने, हिरासत में लेने और निर्वासित करने का अधिकार देता है। इसलिए, दोनों कथन सही हैं और कथन 2, कथन 1 का व्यावहारिक निहितार्थ बताता है।

2. निम्नलिखित में से कौन सा बल भारत-म्यांमार सीमा की रक्षा के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार है?

  1. सीमा सुरक्षा बल (BSF)
  2. सशस्त्र सीमा बल (SSB)
  3. असम राइफल्स
  4. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)

उत्तर: c)
व्याख्या: असम राइफल्स भारत-म्यांमार सीमा की रक्षा के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार है। BSF भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा, SSB भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा, तथा ITBP भारत-चीन सीमा पर तैनात है।

3. भारत में अवैध आप्रवासन के संदर्भ में, ‘विदेशी न्यायाधिकरण’ (Foreigners Tribunals) का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. अवैध आप्रवासियों को नागरिकता प्रदान करना।
  2. सीमा पार व्यापार विवादों का समाधान करना।
  3. किसी व्यक्ति की नागरिकता स्थिति का निर्धारण करना।
  4. अवैध आप्रवासियों के लिए पुनर्वास शिविर स्थापित करना।

उत्तर: c)
व्याख्या: विदेशी न्यायाधिकरण अर्ध-न्यायिक निकाय हैं जो विशेष रूप से किसी व्यक्ति की नागरिकता स्थिति का निर्धारण करने के लिए स्थापित किए गए हैं, विशेषकर असम जैसे राज्यों में जहां अवैध आप्रवासन एक गंभीर मुद्दा है।

4. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद भारत में चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) से संबंधित है?

  1. अनुच्छेद 320
  2. अनुच्छेद 324
  3. अनुच्छेद 326
  4. अनुच्छेद 329

उत्तर: b)
व्याख्या: अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग को भारत में चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्तियाँ प्रदान करता है। अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार से संबंधित है।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा/से अवैध आप्रवासन का/के संभावित प्रभाव है/हैं?

  1. स्थानीय संसाधनों पर दबाव में वृद्धि।
  2. डेमोग्राफिक संतुलन में परिवर्तन।
  3. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: d)
व्याख्या: अवैध आप्रवासन स्थानीय संसाधनों पर दबाव डालता है, जनसांख्यिकीय संरचना को बदलता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है, क्योंकि अवैध गतिविधियों और घुसपैठ को बढ़ावा मिल सकता है।

6. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा गलत है?

  1. नागरिकता अधिनियम, 1955 भारतीय नागरिकता प्राप्त करने और उसे खोने से संबंधित प्रावधानों को परिभाषित करता है।
  2. भारत ने 1951 के शरणार्थी कन्वेंशन और उसके 1967 प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं।
  3. आधार कार्ड भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
  4. निर्वाचन आयोग के पास सीधे तौर पर किसी व्यक्ति की नागरिकता को साबित करने या खंडन करने की शक्ति नहीं है।

उत्तर: b)
व्याख्या: भारत ने 1951 के शरणार्थी कन्वेंशन और उसके 1967 प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। यह अक्सर रोहिंग्या शरणार्थियों जैसे मुद्दों पर भारत की स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण होता है। अन्य सभी कथन सही हैं।

7. ‘घोस्ट वोटर्स’ शब्द का क्या अर्थ है, जैसा कि लेख में संदर्भित है?

  1. ऐसे मतदाता जो किसी विशेष उम्मीदवार को गुप्त रूप से वोट देते हैं।
  2. मतदाता सूची में शामिल ऐसे नाम जिनका कोई अता-पता नहीं है या जिनकी पहचान सत्यापित नहीं की जा सकती।
  3. वे मतदाता जो चुनाव के दिन मतदान करने नहीं आते हैं।
  4. मतदान केंद्रों पर स्वयंसेवकों के रूप में काम करने वाले लोग।

उत्तर: b)
व्याख्या: लेख में ‘घोस्ट वोटर्स’ का प्रयोग मतदाता सूची में उन नामों के लिए किया गया है जो ‘ट्रेस न किए जा सकने वाले’ हैं और जिनके अवैध आप्रवासी होने का संदेह है, अर्थात वे ऐसे नाम हैं जिनकी कोई वास्तविक, सत्यापित पहचान नहीं है।

8. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह भारत के सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है।
  2. इसे नागरिकता अधिनियम, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम, 2003 के प्रावधानों के तहत तैयार किया जा रहा है।
  3. यह भारतीय नागरिकों के लिए एक अनिवार्य दस्तावेज है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: b)
व्याख्या: NPR भारत के सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है और यह नागरिकता अधिनियम, 1955 और संबंधित नियमों के तहत तैयार किया जा रहा है। हालांकि, यह भारतीय नागरिकों के लिए एक अनिवार्य दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह सामान्य निवासियों का रजिस्टर है, जिसमें नागरिक और विदेशी दोनों शामिल हो सकते हैं यदि वे 6 महीने या उससे अधिक समय से एक स्थानीय क्षेत्र में रह रहे हैं या अगले 6 महीने तक रहने का इरादा रखते हैं।

9. भारत में अवैध आप्रवासन के आर्थिक प्रभावों में से एक है:

  1. पड़ोसी देशों के साथ व्यापार संबंधों में सुधार।
  2. सरकारी खजाने में कर राजस्व में वृद्धि।
  3. स्थानीय श्रमिकों के वेतन में कमी और रोजगार अवसरों का प्रभावित होना।
  4. पर्यटन क्षेत्र में तेजी से विकास।

उत्तर: c)
व्याख्या: अवैध आप्रवासी अक्सर कम मजदूरी पर काम करने को तैयार होते हैं, जिससे स्थानीय श्रम बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और स्थानीय श्रमिकों के वेतन में कमी आती है, साथ ही उनके रोजगार के अवसर भी प्रभावित होते हैं। अन्य विकल्प अवैध आप्रवासन के प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव नहीं हैं, बल्कि इसके विपरीत हैं।

10. भारत में अवैध आप्रवासन से निपटने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘आगे की राह’ के लिए एक प्रभावी उपाय हो सकता है/सकते हैं?

  1. सीमा पर तकनीकी निगरानी और सेंसर का उपयोग बढ़ाना।
  2. आधार जैसे विभिन्न डेटाबेस को आपस में जोड़ना।
  3. पड़ोसी देशों के साथ अवैध आप्रवासियों के निर्वासन के लिए द्विपक्षीय समझौते करना।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: d)
व्याख्या: ये सभी उपाय अवैध आप्रवासन से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। तकनीकी निगरानी सीमा घुसपैठ को रोकने में मदद करती है, डेटाबेस एकीकरण पहचान प्रक्रिया को मजबूत करता है, और द्विपक्षीय समझौते निर्वासन प्रक्रिया को सुगम बनाते हैं।

मुख्य परीक्षा (Mains)

1. “बिहार में 11,000 ‘ट्रेस न किए जा सकने वाले’ मतदाताओं का मामला भारत में अवैध आप्रवासन की जटिल चुनौती को उजागर करता है।” इस कथन के आलोक में, भारत पर अवैध आप्रवासन के विभिन्न प्रभावों (आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सुरक्षा) का विश्लेषण करें और इस समस्या से निपटने के लिए भारत के मौजूदा कानूनी व संस्थागत ढांचे की सीमाओं पर प्रकाश डालें।

2. भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को सुनिश्चित करने में निर्वाचन आयोग (ECI) की भूमिका की विवेचना करें। अवैध आप्रवासियों के मतदाता सूची में शामिल होने की चुनौती से निपटने में ECI के सामने आने वाली प्रमुख बाधाओं और उनके संभावित समाधानों पर चर्चा करें।

3. अवैध आप्रवासन भारत के लिए एक बहु-आयामी चुनौती है जिसके लिए एक समन्वित और व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक विस्तृत ‘आगे की राह’ प्रस्तुत करें, जिसमें सीमा प्रबंधन, पहचान तंत्र, कानूनी सुधार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया हो।

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