समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें
प्रिय उम्मीदवारों, “The Sociology Scholar” के साथ अपनी समाजशास्त्रीय यात्रा में आपका स्वागत है! प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समाजशास्त्रीय अवधारणाओं की गहन समझ अत्यंत आवश्यक है। यह दैनिक अभ्यास सेट आपके लिए एक चुनौती है, जिसमें समाजशास्त्र के प्रमुख विचारकों, सिद्धांतों और समकालीन मुद्दों से जुड़े 25 उच्च-स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न शामिल हैं। अपनी वैचारिक स्पष्टता और विश्लेषणात्मक कौशल का परीक्षण करें और देखें कि आप एक विद्वान के रूप में कहां खड़े हैं। शुभकामनाएं!
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प्रश्न 1: ‘आत्महत्या’ (Suicide) के समाजशास्त्रीय अध्ययन में, परोपकारी आत्महत्या (Altruistic Suicide) का संबंध किससे है?
- समाज में अत्यधिक एकीकरण
- समाज में कम एकीकरण
- समाज में अत्यधिक विनियमन
- समाज में कम विनियमन
सही उत्तर: a) समाज में अत्यधिक एकीकरण
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘आत्महत्या’ में आत्महत्या के चार प्रकार बताए हैं। परोपकारी आत्महत्या तब होती है जब व्यक्ति का समाज के साथ अत्यधिक एकीकरण होता है, और वह समूह के आदर्शों के लिए अपने जीवन का बलिदान कर देता है (जैसे सैनिक का युद्ध में शहीद होना)।
- क्यों सही है: दुर्खीम के अनुसार, अत्यधिक सामाजिक एकीकरण व्यक्ति को समूह के हितों के आगे अपने व्यक्तिगत जीवन को गौण मानने के लिए प्रेरित करता है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: कम एकीकरण से अहंवादी आत्महत्या होती है; कम विनियमन से अमानकीकरण (Anomic) आत्महत्या होती है; अत्यधिक विनियमन से भाग्यवादी (Fatalistic) आत्महत्या होती है।
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प्रश्न 2: कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी समाज में ‘वस्तु पूज्यता’ (Commodity Fetishism) क्या है?
- उत्पादकों के बीच सामाजिक संबंधों को वस्तुओं के बीच संबंधों के रूप में देखना।
- वस्तुओं को उनकी उपयोगिता मूल्य के बजाय विनिमय मूल्य के आधार पर महत्व देना।
- वस्तुओं के उत्पादन में लगने वाले श्रम को महत्व न देना।
- उपरोक्त सभी।
सही उत्तर: d) उपरोक्त सभी
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने ‘दास कैपिटल’ में वस्तु पूज्यता की अवधारणा प्रस्तुत की। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ पूंजीवादी समाज में उत्पादकों (लोगों) के बीच के सामाजिक संबंध वस्तुओं (बाजार में बिकने वाले उत्पादों) के संबंधों के रूप में प्रकट होते हैं, और वस्तुओं को एक रहस्यमय, स्वतंत्र शक्ति के रूप में देखा जाता है, जो उनके उत्पादन में लगे मानवीय श्रम को छिपा देती है।
- क्यों सही है: यह अवधारणा बताती है कि कैसे पूंजीवाद में वस्तुएं मानवीय श्रम और सामाजिक संबंधों से कटकर एक स्वतंत्र अस्तित्व प्राप्त कर लेती हैं, जिससे उनके वास्तविक सामाजिक मूल्य को नजरअंदाज किया जाता है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a, b, और c सभी वस्तु पूज्यता के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं और एक साथ मिलकर इसकी पूर्ण परिभाषा बनाते हैं।
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प्रश्न 3: मैक्स वेबर के अनुसार, तर्कसंगत-कानूनी प्राधिकार (Rational-Legal Authority) का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है?
- परंपरागत राजा का शासन
- एक करिश्माई धार्मिक नेता
- लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार
- एक कबीले का मुखिया
सही उत्तर: c) लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार
विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने प्राधिकार (Authority) के तीन शुद्ध प्रकारों की पहचान की: परंपरागत, करिश्माई और तर्कसंगत-कानूनी। तर्कसंगत-कानूनी प्राधिकार नियमों और कानूनों की एक संहिता पर आधारित होता है जिसे वैध माना जाता है, न कि व्यक्तिगत नेता या परंपरा पर।
- क्यों सही है: एक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार अपनी शक्ति वैध कानूनों और प्रक्रियाओं से प्राप्त करती है, न कि किसी व्यक्ति के करिश्मे या वंशानुगत अधिकार से।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: परंपरागत राजा का शासन और कबीले का मुखिया परंपरागत प्राधिकार के उदाहरण हैं, जबकि करिश्माई धार्मिक नेता करिश्माई प्राधिकार का उदाहरण है।
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प्रश्न 4: ‘प्रकट और अप्रकट प्रकार्य’ (Manifest and Latent Functions) की अवधारणा किसने विकसित की?
- टैल्कॉट पार्सन्स
- रॉबर्ट के. मर्टन
- एमिल दुर्खीम
- हरबर्ट स्पेन्सर
सही उत्तर: b) रॉबर्ट के. मर्टन
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन ने अपने गुरु टैल्कॉट पार्सन्स के कार्यात्मकतावादी दृष्टिकोण को परिष्कृत करते हुए ‘प्रकट और अप्रकट प्रकार्य’ की अवधारणा दी। प्रकट प्रकार्य वे होते हैं जो किसी सामाजिक क्रिया या संस्था के स्पष्ट, इच्छित और मान्यता प्राप्त परिणाम होते हैं, जबकि अप्रकट प्रकार्य वे अनपेक्षित और अनजाने परिणाम होते हैं जो अक्सर छिपे रहते हैं।
- क्यों सही है: मर्टन ने बताया कि सामाजिक संरचनाओं और संस्थाओं के कई ऐसे परिणाम होते हैं जिनके बारे में लोग अक्सर जागरूक नहीं होते।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: पार्सन्स ने सामान्य कार्यात्मकता पर काम किया, लेकिन मर्टन ने इन विशिष्ट प्रकारों को परिभाषित किया। दुर्खीम और स्पेन्सर भी कार्यात्मकतावादी थे, लेकिन इस विशिष्ट अवधारणा का श्रेय मर्टन को जाता है।
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प्रश्न 5: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) क्या है?
- एक विशिष्ट व्यक्ति जिसकी बच्चा नकल करता है।
- समाज के समग्र दृष्टिकोण और अपेक्षाओं का आंतरिककरण।
- व्यक्ति का अहं।
- वह अवस्था जब बच्चा केवल अपने परिवार के सदस्यों से अंतःक्रिया करता है।
सही उत्तर: b) समाज के समग्र दृष्टिकोण और अपेक्षाओं का आंतरिककरण।
विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद सिद्धांत में ‘सामान्यीकृत अन्य’ एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह व्यक्ति के समाज के सामान्यीकृत दृष्टिकोण और अपेक्षाओं के आंतरिककरण को संदर्भित करता है। यह वह चरण है जहाँ व्यक्ति न केवल विशिष्ट व्यक्तियों की भूमिकाओं को समझता है, बल्कि पूरे समुदाय के नियमों, मूल्यों और दृष्टिकोणों को भी आत्मसात करता है।
- क्यों सही है: यह सामाजिककरण की अंतिम अवस्था है जहाँ व्यक्ति ‘मुझे’ (Me) विकसित करता है, जो सामाजिक मानदंडों और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a) ‘महत्वपूर्ण अन्य’ (Significant Other) को संदर्भित करता है; c) मनोवैज्ञानिक अवधारणा है, मीड के ‘मैं’ और ‘मुझे’ से भिन्न; d) सामाजिककरण की प्रारंभिक अवस्था को संदर्भित करता है।
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प्रश्न 6: भारतीय संदर्भ में, ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा किसने दी?
- एम.एन. श्रीनिवास
- योगेन्द्र सिंह
- ए.आर. देसाई
- घुरिए
सही उत्तर: a) एम.एन. श्रीनिवास
विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा अपनी पुस्तक ‘Religion and Society Among the Coorgs of South India’ में दी। यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक निम्न जाति या जनजाति या अन्य समूह किसी उच्च, अक्सर ‘द्विज’ जाति के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, विचारधारा और जीवन शैली को अपनाता है, ताकि सामाजिक स्थिति में ऊपर उठ सके।
- क्यों सही है: श्रीनिवास ने भारतीय समाज में सामाजिक गतिशीलता को समझने के लिए इस अवधारणा को विकसित किया।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: योगेन्द्र सिंह ने ‘आधुनिकीकरण’ और ‘परंपरा’ पर काम किया; ए.आर. देसाई मार्क्सवादी दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं; घुरिए ने जाति व्यवस्था और जनजातियों पर महत्वपूर्ण काम किया।
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प्रश्न 7: ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) की अवधारणा के लिए कौन सा समाजशास्त्री प्रसिद्ध है?
- चार्ल्स कूली
- जॉर्ज सिमेल
- रॉबर्ट पार्क
- लूईस वर्थ
सही उत्तर: a) चार्ल्स कूली
विस्तृत व्याख्या: चार्ल्स कूली ने ‘प्राथमिक समूह’ की अवधारणा अपनी पुस्तक ‘सोशल ऑर्गनाइजेशन: ए स्टडी ऑफ द लार्जर माइंड’ में प्रस्तुत की। प्राथमिक समूह छोटे सामाजिक समूह होते हैं जो व्यक्तिगत, घनिष्ठ और स्थायी संबंधों की विशेषता रखते हैं, जैसे परिवार, मित्र मंडली और पड़ोस।
- क्यों सही है: कूली ने तर्क दिया कि प्राथमिक समूह व्यक्ति के सामाजिककरण और स्वयं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: सिमेल ने औपचारिक समाजशास्त्र पर काम किया; पार्क और वर्थ शिकागो स्कूल के शहरी समाजशास्त्रियों से संबंधित थे।
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प्रश्न 8: अनुसंधान में ‘सहभागी अवलोकन’ (Participant Observation) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- मात्रात्मक डेटा का संग्रह करना।
- शोधकर्ता को दूर से घटनाओं का अध्ययन करने की अनुमति देना।
- अध्ययन किए जा रहे समूह की संस्कृति और व्यवहार में गहरी अंतर्दृष्टि प्राप्त करना।
- सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए डेटा प्रदान करना।
सही उत्तर: c) अध्ययन किए जा रहे समूह की संस्कृति और व्यवहार में गहरी अंतर्दृष्टि प्राप्त करना।
विस्तृत व्याख्या: सहभागी अवलोकन एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जहाँ शोधकर्ता अध्ययन किए जा रहे समूह के जीवन और गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता है ताकि अंदरूनी दृष्टिकोण से उनकी संस्कृति, व्यवहार और सामाजिक अंतःक्रियाओं को समझा जा सके।
- क्यों सही है: यह विधि ‘एमिक’ (insider) परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है, जो गहरी और प्रासंगिक समझ के लिए महत्वपूर्ण है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a) मात्रात्मक डेटा के लिए सर्वेक्षण या प्रयोग अधिक उपयुक्त हैं; b) सहभागी अवलोकन में शोधकर्ता सक्रिय रूप से शामिल होता है; d) यह विधि मुख्य रूप से गुणात्मक डेटा पर केंद्रित है।
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प्रश्न 9: ‘वर्ग संघर्ष’ (Class Struggle) का सिद्धांत किस समाजशास्त्री से सबसे अधिक जुड़ा हुआ है?
- मैक्स वेबर
- एमिल दुर्खीम
- कार्ल मार्क्स
- टैल्कॉट पार्सन्स
सही उत्तर: c) कार्ल मार्क्स
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स के समाजशास्त्र का केंद्रबिंदु ‘वर्ग संघर्ष’ का सिद्धांत है। उन्होंने तर्क दिया कि इतिहास उत्पादन के साधनों के स्वामित्व वाले वर्गों (पूंजीपति) और उन साधनों से वंचित वर्गों (सर्वहारा) के बीच संघर्ष का इतिहास है।
- क्यों सही है: मार्क्स ने वर्ग संघर्ष को सामाजिक परिवर्तन का प्राथमिक चालक माना।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: वेबर ने वर्ग, स्थिति और शक्ति को बहुआयामी स्तरीकरण के रूप में देखा; दुर्खीम ने सामाजिक एकजुटता पर ध्यान केंद्रित किया; पार्सन्स कार्यात्मकतावादी थे जिन्होंने व्यवस्था और संतुलन पर जोर दिया।
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प्रश्न 10: ‘असामान्य व्यवहार’ (Deviance) के संबंध में ‘लेबलिंग सिद्धांत’ (Labeling Theory) का मुख्य तर्क क्या है?
- असामान्य व्यवहार जैविक या मनोवैज्ञानिक कारणों से होता है।
- असामान्य व्यवहार समाज के संरचनात्मक असमानताओं का परिणाम है।
- असामान्य व्यवहार समाज द्वारा लगाए गए ‘लेबल’ का परिणाम है।
- असामान्य व्यवहार व्यक्तियों द्वारा सचेत रूप से की गई पसंद है।
सही उत्तर: c) असामान्य व्यवहार समाज द्वारा लगाए गए ‘लेबल’ का परिणाम है।
विस्तृत व्याख्या: लेबलिंग सिद्धांत (जिसे हावर्ड बेकर जैसे समाजशास्त्रियों ने विकसित किया) यह बताता है कि असामान्य व्यवहार अंतर्निहित व्यवहारों की तुलना में सामाजिक प्रतिक्रिया पर अधिक निर्भर करता है। जब किसी व्यक्ति को समाज द्वारा ‘अपराधी’ या ‘असामान्य’ का लेबल दिया जाता है, तो यह लेबल ही उस व्यक्ति के स्वयं की अवधारणा और भविष्य के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है, जिससे वह वास्तव में उस भूमिका में ढल जाता है।
- क्यों सही है: यह सिद्धांत सामाजिक निर्माणवाद (Social Constructionism) पर जोर देता है कि कैसे समाज ‘असामान्य’ क्या है, इसे परिभाषित करता है और व्यक्तियों पर लेबल लगाकर उन्हें उस श्रेणी में धकेलता है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a) चिकित्सा/मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण; b) संघर्ष सिद्धांत का दृष्टिकोण; d) तर्कसंगत पसंद सिद्धांत का दृष्टिकोण।
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प्रश्न 11: ‘भारत में जाति व्यवस्था’ (Caste System in India) के अध्ययन में ‘प्रभुत्वशाली जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा किसने दी?
- आंद्रे बेतेई
- एम.एन. श्रीनिवास
- डेविड हार्डीमैन
- लुई ड्यूमोंट
सही उत्तर: b) एम.एन. श्रीनिवास
विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने ‘प्रभुत्वशाली जाति’ की अवधारणा दी। उनके अनुसार, एक जाति को प्रभुत्वशाली तब कहा जाता है जब वह संख्यात्मक शक्ति, आर्थिक और राजनीतिक शक्ति (भूमि के स्वामित्व और स्थानीय निकाय में प्रतिनिधित्व के माध्यम से) तथा उच्च अनुष्ठानिक स्थिति का एक संयोजन रखती है। यह जाति स्थानीय क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है।
- क्यों सही है: यह अवधारणा भारत में ग्रामीण शक्ति संरचनाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: आंद्रे बेतेई ने जाति, वर्ग और शक्ति के बीच संबंधों पर काम किया; डेविड हार्डीमैन सबाल्टर्न अध्ययन के लिए जाने जाते हैं; लुई ड्यूमोंट ने ‘होमो हायरार्किकस’ और भारतीय जाति व्यवस्था की शुद्धता-अशुद्धता पर ध्यान केंद्रित किया।
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प्रश्न 12: ‘संरचनात्मक प्रकार्यवाद’ (Structural Functionalism) के प्रमुख प्रतिपादक कौन हैं?
- कार्ल मार्क्स
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड
- एमिल दुर्खीम और टैल्कॉट पार्सन्स
- मैक्स वेबर
सही उत्तर: c) एमिल दुर्खीम और टैल्कॉट पार्सन्स
विस्तृत व्याख्या: संरचनात्मक प्रकार्यवाद समाज को एक जटिल प्रणाली के रूप में देखता है जिसके विभिन्न हिस्से मिलकर स्थिरता और एकजुटता को बढ़ावा देते हैं। एमिल दुर्खीम को इसका अग्रदूत माना जाता है, जिन्होंने सामाजिक तथ्यों और सामाजिक एकजुटता पर जोर दिया। टैल्कॉट पार्सन्स ने इस सिद्धांत को एक व्यवस्थित सैद्धांतिक ढांचे के रूप में विकसित किया, जिसमें उन्होंने AGIL मॉडल (अनुकूलन, लक्ष्य प्राप्ति, एकीकरण, प्रतिरूप अनुरक्षण) दिया।
- क्यों सही है: दुर्खीम ने इसकी नींव रखी और पार्सन्स ने इसे प्रमुख सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य के रूप में विकसित किया।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: मार्क्स संघर्ष सिद्धांत से; मीड प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद से; वेबर व्याख्यात्मक समाजशास्त्र से जुड़े हैं।
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प्रश्न 13: ‘तर्कसंगत विकल्प सिद्धांत’ (Rational Choice Theory) समाजशास्त्रीय अध्ययन में किस बात पर जोर देता है?
- व्यक्तिगत क्रियाएं सामाजिक संरचनाओं द्वारा निर्धारित होती हैं।
- व्यक्ति अपने स्व-हित को अधिकतम करने के लिए तर्कसंगत निर्णय लेते हैं।
- भावनात्मक और गैर-तर्कसंगत कारक मानव व्यवहार को आकार देते हैं।
- सामाजिक मानदंड और मूल्य मुख्य रूप से व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।
सही उत्तर: b) व्यक्ति अपने स्व-हित को अधिकतम करने के लिए तर्कसंगत निर्णय लेते हैं।
विस्तृत व्याख्या: तर्कसंगत विकल्प सिद्धांत यह मानता है कि व्यक्ति अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने और अपनी प्राथमिकताओं को अधिकतम करने के लिए लागत-लाभ विश्लेषण के आधार पर तर्कसंगत रूप से निर्णय लेते हैं। यह सिद्धांत व्यक्तिगत स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर जोर देता है।
- क्यों सही है: यह व्यक्तियों को सक्रिय एजेंटों के रूप में देखता है जो अपनी परिस्थितियों के भीतर सर्वोत्तम संभव परिणाम प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a) संरचनात्मकवादी दृष्टिकोण; c) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद या फेनोमेनोलॉजी से संबंधित; d) कार्यात्मकतावाद या सामाजिक मानदंड सिद्धांतों से संबंधित।
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प्रश्न 14: ‘शहरीकरण’ (Urbanization) के संबंध में ‘गेमीनशाफ्ट और गेसेलशाफ्ट’ (Gemeinschaft and Gesellschaft) की अवधारणा किसने दी?
- फर्डिनेंड टोनीज़
- मैक्स वेबर
- एमिल दुर्खीम
- जॉर्ज सिमेल
सही उत्तर: a) फर्डिनेंड टोनीज़
विस्तृत व्याख्या: फर्डिनेंड टोनीज़ ने इन अवधारणाओं को समाज के दो आदर्श प्रकारों के रूप में प्रस्तुत किया। ‘गेमीनशाफ्ट’ (समुदाय) घनिष्ठ, व्यक्तिगत और भावनात्मक संबंधों पर आधारित है, जो ग्रामीण समाजों की विशेषता है। ‘गेसेलशाफ्ट’ (समाज) अवैयक्तिक, तर्कसंगत और संविदात्मक संबंधों पर आधारित है, जो शहरी समाजों की विशेषता है।
- क्यों सही है: टोनीज़ ने सामाजिक संबंधों के प्रकारों के आधार पर ग्रामीण से शहरी समाजों में संक्रमण को समझाया।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: वेबर ने शहरों के इतिहास पर काम किया, दुर्खीम ने यांत्रिक और सावयवी एकजुटता पर; सिमेल ने शहरी जीवन के मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर काम किया।
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प्रश्न 15: ‘पुरुषसत्ता’ (Patriarchy) को किस नारीवादी दृष्टिकोण ने एक प्रमुख सामाजिक स्तरीकरण के रूप में देखा?
- उदारवादी नारीवाद
- कट्टरपंथी नारीवाद
- समाजवादी नारीवाद
- उत्तर-आधुनिक नारीवाद
सही उत्तर: b) कट्टरपंथी नारीवाद
विस्तृत व्याख्या: कट्टरपंथी नारीवाद (Radical Feminism) यह तर्क देता है कि पुरुषसत्ता सभी समाजों में महिलाओं के उत्पीड़न का मूल कारण है। वे पितृसत्तात्मक संरचनाओं को ही समाप्त करने की वकालत करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि लिंग-आधारित असमानता सभी अन्य असमानताओं की जड़ है।
- क्यों सही है: कट्टरपंथी नारीवादी पुरुषसत्ता को एक सार्वभौमिक और मौलिक स्तरीकरण प्रणाली मानते हैं।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: उदारवादी नारीवाद कानून और शिक्षा में समानता पर जोर देता है; समाजवादी नारीवाद पूंजीवाद और पुरुषसत्ता के अंतर्संबंधों पर; उत्तर-आधुनिक नारीवाद पहचान और विखंडन पर जोर देता है।
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प्रश्न 16: ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) के लिए कौन सा अवधारणा केंद्रीय है?
- सामाजिक तथ्य
- वर्ग चेतना
- स्वयं और अर्थों का सामाजिक निर्माण
- कार्य-कारण संबंध
सही उत्तर: c) स्वयं और अर्थों का सामाजिक निर्माण
विस्तृत व्याख्या: प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद, जॉर्ज हर्बर्ट मीड और हरबर्ट ब्लूमर जैसे समाजशास्त्रियों से जुड़ा एक सूक्ष्म-स्तरीय परिप्रेक्ष्य है। यह इस विचार पर केंद्रित है कि लोग प्रतीकों (भाषा, हावभाव, वस्तुएं) के माध्यम से अंतःक्रिया करते हैं और इन प्रतीकों के माध्यम से ही स्वयं की अवधारणा और सामाजिक दुनिया के अर्थों का निर्माण होता है।
- क्यों सही है: इस सिद्धांत के अनुसार, सामाजिक वास्तविकता और व्यक्तिगत पहचान निरंतर सामाजिक अंतःक्रिया और अर्थ-निर्माण की प्रक्रियाओं से निर्मित होती हैं।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a) दुर्खीम से संबंधित; b) मार्क्स से संबंधित; d) प्रत्यक्षवादी अनुसंधान का लक्ष्य।
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प्रश्न 17: भारतीय समाज में ‘अस्पृश्यता’ (Untouchability) को समाप्त करने के लिए कौन सा संवैधानिक अनुच्छेद प्रावधान करता है?
- अनुच्छेद 14
- अनुच्छेद 17
- अनुच्छेद 19
- अनुच्छेद 21
सही उत्तर: b) अनुच्छेद 17
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 ‘अस्पृश्यता के उन्मूलन’ का प्रावधान करता है। यह किसी भी रूप में अस्पृश्यता के अभ्यास को निषिद्ध करता है और इसे दंडनीय अपराध बनाता है। यह समानता के अधिकार के तहत एक मौलिक अधिकार है।
- क्यों सही है: यह सीधे तौर पर अस्पृश्यता की सामाजिक बुराई को लक्षित करता है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता का अधिकार प्रदान करता है; अनुच्छेद 19 स्वतंत्रता के कुछ अधिकारों की रक्षा करता है (जैसे भाषण और अभिव्यक्ति); अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करता है।
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प्रश्न 18: ‘सामाजिक गतिशीलता’ (Social Mobility) में ‘अंतःपीढ़ीगत गतिशीलता’ (Intergenerational Mobility) का क्या अर्थ है?
- एक व्यक्ति के जीवनकाल में सामाजिक स्थिति में परिवर्तन।
- एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी में सामाजिक स्थिति में परिवर्तन।
- व्यक्ति की भौगोलिक स्थिति में परिवर्तन।
- किसी व्यक्ति के व्यवसाय में परिवर्तन।
सही उत्तर: b) एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी में सामाजिक स्थिति में परिवर्तन।
विस्तृत व्याख्या: अंतःपीढ़ीगत गतिशीलता (Intergenerational Mobility) तब होती है जब बच्चों की सामाजिक स्थिति उनके माता-पिता की सामाजिक स्थिति से भिन्न होती है। उदाहरण के लिए, यदि एक मजदूर का बेटा डॉक्टर बन जाता है, तो यह अंतःपीढ़ीगत ऊर्ध्वगामी गतिशीलता है।
- क्यों सही है: यह पीढ़ी दर पीढ़ी सामाजिक संरचना में परिवर्तन और अवसरों की उपलब्धता को दर्शाता है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a) अंतरापीढ़ीगत गतिशीलता (Intragenerational Mobility) है; c) भौगोलिक गतिशीलता है; d) यह अंतरापीढ़ीगत या अंतःपीढ़ीगत दोनों हो सकता है, लेकिन विशिष्ट रूप से गतिशीलता का एक प्रकार नहीं है जो केवल व्यावसायिक परिवर्तन को दर्शाता हो।
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प्रश्न 19: ‘उत्तर-आधुनिकतावाद’ (Postmodernism) समाजशास्त्र में किस बात पर जोर देता है?
- सार्वभौमिक सत्य और भव्य आख्यानों में विश्वास।
- सामाजिक संरचनाओं की वस्तुनिष्ठ वास्तविकता।
- ज्ञान के विखंडन, बहुलवाद और सापेक्षता।
- आधुनिकता के मूल्यों और प्रगति पर विश्वास।
सही उत्तर: c) ज्ञान के विखंडन, बहुलवाद और सापेक्षता।
विस्तृत व्याख्या: उत्तर-आधुनिकतावाद एक सैद्धांतिक दृष्टिकोण है जो आधुनिकता के प्रमुख विचारों (जैसे प्रगति, तर्कसंगतता, सार्वभौमिक सत्य, भव्य आख्यान) की आलोचना करता है। यह ज्ञान, पहचान और वास्तविकता के विखंडन, बहुलवाद और सापेक्षता पर जोर देता है। जैक्स डेरिडा, मिशेल फूको और जीन-फ्रांकोइस ल्योटार्ड इसके प्रमुख विचारक हैं।
- क्यों सही है: यह मानता है कि कोई एक वस्तुनिष्ठ सत्य या वास्तविकता नहीं है, बल्कि कई दृष्टिकोण और व्याख्याएं हैं।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a) आधुनिकता का केंद्रीय विचार है; b) प्रत्यक्षवादी या मार्क्सवादी दृष्टिकोण का हिस्सा; d) आधुनिकता का केंद्रीय विचार है।
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प्रश्न 20: ‘अकादमिक पाखंड’ (Academic Hypocrisy) की अवधारणा किस समाजशास्त्री से जुड़ी है, जो यह बताते हैं कि कैसे बौद्धिक कार्य सामाजिक शक्ति संरचनाओं को मजबूत कर सकते हैं?
- पियरे बोर्डिएयू
- जूडी बटलर
- नोम चोम्स्की
- एडवर्ड सईद
सही उत्तर: d) एडवर्ड सईद
विस्तृत व्याख्या: एडवर्ड सईद, अपनी पुस्तक ‘ओरिएंटलिज्म’ में, ‘अकादमिक पाखंड’ या ‘बौद्धिकों की भूमिका’ पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने बताया कि कैसे ज्ञान का उत्पादन (विशेषकर ‘ओरिएंट’ के बारे में पश्चिमी विद्वानों द्वारा) अक्सर शक्ति संबंधों से जुड़ा होता है और उपनिवेशवाद को वैध बनाने में मदद करता है। हालांकि उन्होंने ‘अकादमिक पाखंड’ शब्द का सीधे तौर पर उपयोग नहीं किया, उनका काम इस विचार की ओर इशारा करता है कि बौद्धिक कैसे अनजाने में या जानबूझकर शक्ति संरचनाओं को बनाए रख सकते हैं।
- क्यों सही है: सईद का काम यह उजागर करता है कि कैसे ज्ञान उत्पादन और शैक्षणिक संस्थान अक्सर पश्चिमी वर्चस्व और उपनिवेशवादी दृष्टिकोणों को बढ़ावा देते हैं।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: पियरे बोर्डिएयू ने ‘अभ्यास के सिद्धांत’ और सांस्कृतिक पूंजी पर काम किया; जूडी बटलर लिंग प्रदर्शनकारिता (gender performativity) पर काम करती हैं; नोम चोम्स्की भाषाविज्ञान और मीडिया आलोचना के लिए जाने जाते हैं।
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प्रश्न 21: ‘संस्थानों की लौह कुलीनतंत्र’ (Iron Law of Oligarchy) का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया, जो बताता है कि सभी संगठन, चाहे कितने भी लोकतांत्रिक क्यों न हों, अंततः कुछ लोगों द्वारा शासित हो जाते हैं?
- मैक्स वेबर
- रॉबर्ट मिशेल्स
- एमिल दुर्खीम
- वी. परेटो
सही उत्तर: b) रॉबर्ट मिशेल्स
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट मिशेल्स ने अपनी पुस्तक ‘पॉलिटिकल पार्टीज’ में ‘संस्थानों की लौह कुलीनतंत्र’ का सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, किसी भी बड़े और जटिल संगठन में, चाहे उसका मूल उद्देश्य कितना भी लोकतांत्रिक क्यों न हो, सत्ता अनिवार्य रूप से एक छोटे से अभिजात वर्ग (कुलीनतंत्र) के हाथों में केंद्रित हो जाती है।
- क्यों सही है: मिशेल्स ने तर्क दिया कि यह नौकरशाही की आंतरिक आवश्यकताओं, नेतृत्व की विशेषज्ञता और संगठन को बनाए रखने की आवश्यकता के कारण होता है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: वेबर ने नौकरशाही पर काम किया, लेकिन इस विशिष्ट सिद्धांत को मिशेल्स ने दिया; दुर्खीम ने एकजुटता पर काम किया; परेटो ने अभिजात वर्ग के संचलन का सिद्धांत दिया।
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प्रश्न 22: ‘ग्रामीण-शहरी सातत्य’ (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा किस पर जोर देती है?
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्पष्ट विभाजन।
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच क्रमिक संक्रमण और समानताएं।
- केवल शहरी क्षेत्रों की अनूठी विशेषताएं।
- केवल ग्रामीण क्षेत्रों की अनूठी विशेषताएं।
सही उत्तर: b) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच क्रमिक संक्रमण और समानताएं।
विस्तृत व्याख्या: ग्रामीण-शहरी सातत्य (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा यह मानती है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र पूर्णतः अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि विशेषताओं के एक स्पेक्ट्रम पर स्थित हैं, जहाँ एक छोर पर विशुद्ध ग्रामीण और दूसरे पर विशुद्ध शहरी क्षेत्र होते हैं, और इनके बीच कई ऐसे क्षेत्र होते हैं जिनमें दोनों की विशेषताएं मिलती-जुली होती हैं।
- क्यों सही है: यह दृष्टिकोण ग्रामीण और शहरी जीवन के बीच एक निरंतरता और अंतर्संबंध को दर्शाता है, बजाय एक कठोर द्विभाजन के।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a) यह अवधारणा इसके विपरीत तर्क देती है; c) और d) यह केवल एक पक्ष पर ध्यान केंद्रित करते हैं, सातत्य पर नहीं।
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प्रश्न 23: ‘निजी समस्याओं को सार्वजनिक मुद्दों में बदलना’ (Turning Private Troubles into Public Issues) की अवधारणा किस समाजशास्त्री से जुड़ी है?
- एमिल दुर्खीम
- सी. राइट मिल्स
- पियरे बोर्डिएयू
- एंटोनी ग्राम्स्की
सही उत्तर: b) सी. राइट मिल्स
विस्तृत व्याख्या: सी. राइट मिल्स ने अपनी पुस्तक ‘द सोशियोलॉजिकल इमेजिनेशन’ में ‘निजी समस्याओं’ और ‘सार्वजनिक मुद्दों’ के बीच अंतर किया। उन्होंने तर्क दिया कि व्यक्तियों की कई समस्याएं जो निजी लगती हैं, वास्तव में व्यापक सामाजिक संरचनाओं और ऐतिहासिक ताकतों के कारण उत्पन्न होती हैं, और इसलिए उन्हें सार्वजनिक मुद्दों के रूप में देखा जाना चाहिए।
- क्यों सही है: मिल्स ने समाजशास्त्रियों से आग्रह किया कि वे व्यक्तिगत दुखों को केवल व्यक्तिगत विफलताओं के रूप में न देखें, बल्कि उन्हें सामाजिक संरचनाओं में अंतर्निहित समस्याओं के लक्षणों के रूप में पहचानें।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: दुर्खीम ने सामाजिक तथ्यों पर ध्यान केंद्रित किया; बोर्डिएयू ने हैबिटस और पूंजी पर; ग्राम्स्की ने आधिपत्य (hegemony) पर काम किया।
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प्रश्न 24: ‘पर्यावरण समाजशास्त्र’ (Environmental Sociology) का मुख्य फोकस क्या है?
- प्रकृति और पर्यावरण के भौतिक पहलुओं का अध्ययन।
- पर्यावरणीय समस्याओं के तकनीकी समाधान।
- समाज और प्राकृतिक पर्यावरण के बीच अंतर्संबंधों का अध्ययन।
- मानव आबादी के वितरण का अध्ययन।
सही उत्तर: c) समाज और प्राकृतिक पर्यावरण के बीच अंतर्संबंधों का अध्ययन।
विस्तृत व्याख्या: पर्यावरण समाजशास्त्र समाजशास्त्र का एक उप-क्षेत्र है जो मानव समाजों और उनके प्राकृतिक पर्यावरण के बीच जटिल अंतःक्रियाओं की पड़ताल करता है। यह पर्यावरणीय समस्याओं के सामाजिक कारणों और परिणामों को देखता है, जैसे प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, संसाधन क्षरण, और ये कैसे सामाजिक असमानताओं से जुड़े हैं।
- क्यों सही है: यह मानवीय क्रियाओं, सामाजिक संरचनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों के पर्यावरणीय प्रभावों को समझने का प्रयास करता है, और बदले में पर्यावरण कैसे समाज को प्रभावित करता है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a) यह भूगोल या पारिस्थितिकी का क्षेत्र है; b) यह इंजीनियरिंग या प्राकृतिक विज्ञान का क्षेत्र है; d) यह जनसांख्यिकी का क्षेत्र है।
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प्रश्न 25: ‘डिजिटल विभाजन’ (Digital Divide) शब्द का क्या अर्थ है?
- विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच अंतर।
- सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों (आईसीटी) तक पहुंच, उपयोग और प्रभाव में असमानता।
- इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा।
- डिजिटल उपकरणों की लागत में अंतर।
सही उत्तर: b) सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों (आईसीटी) तक पहुंच, उपयोग और प्रभाव में असमानता।
विस्तृत व्याख्या: डिजिटल विभाजन उन लोगों और समूहों के बीच का अंतर है जिनके पास सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों (जैसे इंटरनेट, कंप्यूटर, स्मार्टफोन) तक पहुंच है और जो उनका उपयोग प्रभावी ढंग से कर सकते हैं, और जिनके पास नहीं है। यह असमानता अक्सर सामाजिक-आर्थिक स्थिति, भौगोलिक स्थान, आयु, लिंग और शिक्षा जैसे कारकों से जुड़ी होती है।
- क्यों सही है: यह समाज में एक महत्वपूर्ण समकालीन असमानता को दर्शाता है जिसका सामाजिक गतिशीलता, शिक्षा और आर्थिक अवसरों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
- क्यों गलत हैं अन्य विकल्प: a) तकनीकी भिन्नता है; c) बाजार प्रतिस्पर्धा का पहलू है; d) डिजिटल विभाजन का एक कारक हो सकता है, लेकिन यह स्वयं विभाजन की पूर्ण परिभाषा नहीं है।
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