समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें
समाजशास्त्र के जटिल विचारों की दुनिया में आपका स्वागत है! यह दैनिक अभ्यास सेट विशेष रूप से UGC-NET, UPSC और State PSCs जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यहाँ दिए गए प्रश्न आपको अपनी वैचारिक स्पष्टता और विश्लेषणात्मक कौशल का परीक्षण करने का अवसर देंगे। प्रत्येक प्रश्न, सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ, आपको समाजशास्त्रीय ज्ञान के गहन महासागर में गोता लगाने में मदद करेगा। तैयार हो जाइए इस बौद्धिक चुनौती के लिए!
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प्रश्न 1: कार्ल मार्क्स के अनुसार, उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण रखने वाला वर्ग क्या कहलाता है?
- (A) सर्वहारा वर्ग (Proletariat)
- (B) बुर्जुआ वर्ग (Bourgeoisie)
- (C) निम्न वर्ग (Lumpenproletariat)
- (D) अभिजात वर्ग (Aristocracy)
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है क्योंकि कार्ल मार्क्स ने समाज को मुख्य रूप से दो विरोधी वर्गों में विभाजित किया था: बुर्जुआ वर्ग, जिसके पास उत्पादन के साधन (जैसे कारखाने, भूमि) होते हैं और जो पूंजी का मालिक होता है; और सर्वहारा वर्ग, जो अपने श्रम को बेचकर जीवित रहता है।
- (A) सर्वहारा वर्ग उन श्रमिकों को संदर्भित करता है जिनके पास उत्पादन के कोई साधन नहीं होते।
- (C) निम्न वर्ग समाज के हाशिए पर रहने वाले और बेरोजगार लोगों का एक उपसमूह है।
- (D) अभिजात वर्ग एक सामाजिक वर्ग है जो अक्सर धन, शक्ति और सामाजिक स्थिति में सबसे ऊपर होता है, लेकिन मार्क्सवादी विश्लेषण में बुर्जुआ वर्ग अधिक विशिष्ट है।
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प्रश्न 2: मैक्स वेबर द्वारा प्रस्तुत ‘आदर्श प्रकार’ (Ideal Type) की अवधारणा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- (A) सामाजिक यथार्थ का सटीक चित्रण करना
- (B) सामाजिक घटनाओं का अनुभवजन्य अध्ययन करना
- (C) तुलनात्मक अध्ययन के लिए एक विश्लेषणात्मक उपकरण प्रदान करना
- (D) आदर्श समाज की स्थापना के लिए एक मॉडल बनाना
सही उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (C) सही है। मैक्स वेबर का ‘आदर्श प्रकार’ एक शुद्ध वैचारिक या विश्लेषणात्मक निर्माण है जिसका उपयोग सामाजिक घटनाओं की तुलना करने और उनका अध्ययन करने के लिए एक बेंचमार्क के रूप में किया जाता है। यह यथार्थ का वर्णन नहीं करता, बल्कि यथार्थ को समझने के लिए एक उपकरण है।
- (A) आदर्श प्रकार यथार्थ का सटीक चित्रण नहीं है; यह यथार्थ की कुछ विशेषताओं का अतिशयोक्तिपूर्ण और एकतरफा चयन है।
- (B) आदर्श प्रकार अनुभवजन्य अध्ययन का परिणाम नहीं है, बल्कि एक विश्लेषणात्मक उपकरण है जिसका उपयोग अनुभवजन्य अध्ययन में किया जा सकता है।
- (D) यह एक आदर्श समाज की रूपरेखा नहीं है, बल्कि मौजूदा सामाजिक यथार्थ को समझने का एक तरीका है।
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प्रश्न 3: एमिल दुर्खीम के अनुसार, समाज में नैतिक और भावनात्मक एकता को क्या कहा जाता है, जो सामूहिक चेतना से उत्पन्न होती है?
- (A) एनोमी (Anomie)
- (B) यांत्रिक एकजुटता (Mechanical Solidarity)
- (C) जैविक एकजुटता (Organic Solidarity)
- (D) सामूहिक प्रतिनिधान (Collective Representation)
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। एमिल दुर्खीम ने ‘श्रम विभाजन’ (The Division of Labor in Society) नामक अपनी पुस्तक में यांत्रिक एकजुटता और जैविक एकजुटता की अवधारणाएं प्रस्तुत कीं। यांत्रिक एकजुटता उन समाजों में पाई जाती है जहाँ श्रम का विभाजन कम होता है और लोग विचारों और भावनाओं में अत्यधिक समान होते हैं, जिससे एक मजबूत सामूहिक चेतना और नैतिक एकता बनती है।
- (A) एनोमी सामाजिक मानदंडों की अनुपस्थिति या अस्पष्टता की स्थिति है, जिससे सामाजिक विघटन होता है।
- (C) जैविक एकजुटता उन समाजों में पाई जाती है जहाँ श्रम का उच्च विभाजन होता है और लोग अपनी विशेषज्ञता के कारण एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
- (D) सामूहिक प्रतिनिधान वे प्रतीक और विचार हैं जो समाज के सदस्यों द्वारा साझा किए जाते हैं, लेकिन यह सीधे एकता का प्रकार नहीं है।
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प्रश्न 4: ‘संरचनात्मक-प्रकार्यवाद’ (Structural-Functionalism) से जुड़े प्रमुख समाजशास्त्री कौन हैं?
- (A) जॉर्ज मीड (George Mead)
- (B) अल्फ्रेड शुट्ज़ (Alfred Schutz)
- (C) टैल्कॉट पार्सन्स (Talcott Parsons)
- (D) मिशेल फूको (Michel Foucault)
सही उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (C) सही है। टैल्कॉट पार्सन्स संरचनात्मक-प्रकार्यवादी दृष्टिकोण के सबसे प्रभावशाली प्रतिपादकों में से एक हैं। उन्होंने AGIL मॉडल (अनुकूलन, लक्ष्य प्राप्ति, एकीकरण, प्रतिरूप अनुरक्षण) जैसे ढांचे विकसित किए, जो बताते हैं कि समाज की संरचनाएं कैसे कार्य करती हैं ताकि सामाजिक व्यवस्था बनी रहे।
- (A) जॉर्ज मीड प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद से जुड़े हैं।
- (B) अल्फ्रेड शुट्ज़ घटना-क्रिया विज्ञान (Phenomenology) से जुड़े हैं।
- (D) मिशेल फूको उत्तर-संरचनावाद और शक्ति-ज्ञान (power-knowledge) के विश्लेषण से जुड़े हैं।
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प्रश्न 5: रॉबर्ट के. मर्टन द्वारा प्रस्तुत अवधारणा ‘एनोमी’ को दुर्खीम की अवधारणा से कैसे भिन्न किया जा सकता है?
- (A) मर्टन की एनोमी व्यक्तियों के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा का परिणाम है।
- (B) मर्टन की एनोमी सांस्कृतिक लक्ष्यों और संस्थागत साधनों के बीच बेमेल से उत्पन्न होती है।
- (C) मर्टन की एनोमी केवल आधुनिक औद्योगिक समाजों में पाई जाती है।
- (D) मर्टन की एनोमी सामूहिक चेतना के कमजोर होने का परिणाम है।
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। मर्टन ने दुर्खीम की एनोमी की अवधारणा को आगे बढ़ाया और इसे सांस्कृतिक लक्ष्यों (जैसे धन, सफलता) और उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संस्थागत रूप से स्वीकृत साधनों (जैसे शिक्षा, कड़ी मेहनत) के बीच बेमेल या तनाव के रूप में परिभाषित किया। जब लोगों के पास वैध साधन नहीं होते तो वे विचलन का सहारा ले सकते हैं।
- (A) तीव्र प्रतिस्पर्धा एनोमी का एक कारक हो सकती है, लेकिन यह मर्टन की परिभाषा का केंद्रीय बिंदु नहीं है।
- (C) मर्टन की एनोमी आधुनिक समाजों में अधिक स्पष्ट हो सकती है, लेकिन उनकी परिभाषा दुर्खीम की तरह एक सामान्य सामाजिक स्थिति के बजाय व्यक्तिगत और उपसमूह प्रतिक्रियाओं पर केंद्रित है।
- (D) यह दुर्खीम की एनोमी की परिभाषा के करीब है, जो सामूहिक चेतना के कमजोर होने और मानदंडों की कमी पर केंद्रित थी।
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प्रश्न 6: भारतीय समाज में ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा किसने दी, और इसका क्या अर्थ है?
- (A) जी.एस. घुर्ये; निचली जातियों का अपनी परंपराओं को छोड़ना।
- (B) एम.एन. श्रीनिवास; निचली जाति या समूह का उच्च जाति के अनुष्ठानों, प्रथाओं और जीवन शैली को अपनाना।
- (C) आंद्रे बेतेई; जाति व्यवस्था में पश्चिमीकरण का प्रभाव।
- (D) डी.पी. मुखर्जी; भारतीय संस्कृति में आधुनिकता का समावेश।
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें एक निम्न जाति या जनजातीय समूह या अन्य समूह उच्च, अक्सर ‘द्विज’ जाति की जीवनशैली, अनुष्ठानों और विचारधारा को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करता है।
- (A) जी.एस. घुर्ये जाति व्यवस्था और भारतीय समाज के अन्य पहलुओं पर महत्वपूर्ण कार्य के लिए जाने जाते हैं, लेकिन संस्कृतिकरण उनकी केंद्रीय अवधारणा नहीं है।
- (C) आंद्रे बेतेई जाति, वर्ग और शक्ति पर अपने अध्ययनों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन पश्चिमीकरण संस्कृतिकरण से भिन्न एक प्रक्रिया है।
- (D) डी.पी. मुखर्जी भारतीय समाज में परंपरा और आधुनिकता के द्वंद्व पर अपने विचारों के लिए प्रसिद्ध हैं।
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प्रश्न 7: परिवार को ‘सार्वभौमिक संस्था’ (Universal Institution) क्यों माना जाता है?
- (A) क्योंकि यह केवल शहरी समाजों में पाया जाता है।
- (B) क्योंकि यह प्रत्येक ज्ञात मानव समाज में किसी न किसी रूप में मौजूद है।
- (C) क्योंकि यह सभी समाजों में समान कार्यों को पूरा करता है।
- (D) क्योंकि इसका स्वरूप और संरचना सभी समाजों में समान है।
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। परिवार को एक सार्वभौमिक संस्था माना जाता है क्योंकि विश्व के प्रत्येक ज्ञात मानव समाज में, चाहे उसका स्वरूप या कार्य कुछ भी हो, किसी न किसी प्रकार की पारिवारिक इकाई मौजूद होती है। यह सामाजिककरण, प्रजनन और भावनात्मक समर्थन जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती है।
- (A) परिवार ग्रामीण और जनजातीय समाजों में भी पाया जाता है।
- (C) परिवार के कार्य समाज-दर-समाज भिन्न हो सकते हैं (जैसे आर्थिक कार्य कुछ समाजों में अधिक प्रमुख हो सकते हैं)।
- (D) परिवार का स्वरूप और संरचना सभी समाजों में समान नहीं है (जैसे संयुक्त परिवार बनाम एकल परिवार)।
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प्रश्न 8: ‘सामाजिक स्तरीकरण’ (Social Stratification) का सबसे अच्छा वर्णन क्या है?
- (A) समाज में व्यक्तियों के बीच व्यक्तिगत मतभेद।
- (B) समाज में धन और शक्ति का यादृच्छिक वितरण।
- (C) सामाजिक समूहों या व्यक्तियों का उनकी स्थिति, धन और शक्ति के आधार पर पदानुक्रमित विभाजन।
- (D) विभिन्न संस्कृतियों के बीच भिन्नताएं।
सही उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (C) सही है। सामाजिक स्तरीकरण समाज में व्यक्तियों या समूहों का एक पदानुक्रमित विभाजन है जो उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति, धन, शक्ति और प्रतिष्ठा जैसे कारकों पर आधारित होता है। यह एक व्यवस्थित असमानता है।
- (A) यह केवल व्यक्तिगत मतभेदों से अधिक है; यह प्रणालीगत असमानताओं को दर्शाता है।
- (B) धन और शक्ति का वितरण यादृच्छिक नहीं होता, बल्कि सामाजिक संरचनाओं द्वारा निर्धारित होता है।
- (D) यह सांस्कृतिक भिन्नताओं के बजाय सामाजिक असमानताओं से संबंधित है।
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प्रश्न 9: ‘ज्ञान की पुरातत्व’ (Archaeology of Knowledge) और ‘शक्ति/ज्ञान’ (Power/Knowledge) की अवधारणाओं के लिए कौन सा विचारक प्रसिद्ध है?
- (A) जूलिया क्रिस्टेवा (Julia Kristeva)
- (B) जैक्स डेरिडा (Jacques Derrida)
- (C) मिशेल फूको (Michel Foucault)
- (D) जर्गेन हैबरमास (Jürgen Habermas)
सही उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (C) सही है। मिशेल फूको एक फ्रांसीसी दार्शनिक और सामाजिक सिद्धांतकार थे जिन्होंने शक्ति, ज्ञान और प्रवचन (discourse) के संबंधों पर महत्वपूर्ण काम किया। उनकी अवधारणाएं, जैसे ‘ज्ञान की पुरातत्व’ और ‘शक्ति/ज्ञान’, यह बताती हैं कि ज्ञान कैसे उत्पन्न होता है और शक्ति संबंधों के माध्यम से कैसे बनाए रखा जाता है।
- (A) जूलिया क्रिस्टेवा एक बल्गेरियाई-फ्रांसीसी साहित्यिक आलोचक, सिद्धांतकार और मनोविश्लेषक हैं।
- (B) जैक्स डेरिडा विखंडनवाद (deconstruction) के लिए जाने जाते हैं।
- (D) जर्गेन हैबरमास महत्वपूर्ण सिद्धांत और संचार संबंधी क्रिया (communicative action) के लिए जाने जाते हैं।
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प्रश्न 10: ‘लुकिंग-ग्लास सेल्फ’ (Looking-Glass Self) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की, जिसमें हमारा आत्म-अवधारणा दूसरों की प्रतिक्रियाओं से बनती है?
- (A) जॉर्ज हरबर्ट मीड (George Herbert Mead)
- (B) चार्ल्स हॉर्टन कूले (Charles Horton Cooley)
- (C) इरविंग गोफमैन (Erving Goffman)
- (D) अल्फ्रेड शुट्ज़ (Alfred Schutz)
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। चार्ल्स हॉर्टन कूले ने ‘लुकिंग-ग्लास सेल्फ’ की अवधारणा दी, जिसमें हमारा आत्म-अवधारणा तीन चरणों में विकसित होती है: हम कल्पना करते हैं कि दूसरे हमें कैसे देखते हैं, हम कल्पना करते हैं कि दूसरे उस धारणा के बारे में क्या निर्णय लेते हैं, और हम उस कथित निर्णय के परिणामस्वरूप कुछ भावनाओं (जैसे गौरव या शर्म) का अनुभव करते हैं।
- (A) जॉर्ज हरबर्ट मीड ‘मैं’ और ‘मुझे’ (I and Me) की अवधारणा और आत्म (self) के विकास पर महत्वपूर्ण कार्य के लिए जाने जाते हैं।
- (C) इरविंग गोफमैन नाट्यकला संबंधी विश्लेषण (dramaturgical analysis) और आत्म के प्रदर्शन पर अपने कार्य के लिए जाने जाते हैं।
- (D) अल्फ्रेड शुट्ज़ घटना-क्रिया विज्ञान (Phenomenology) से जुड़े हैं।
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प्रश्न 11: ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) के अनुसार, सामाजिक यथार्थ का निर्माण कैसे होता है?
- (A) बड़े पैमाने पर सामाजिक संरचनाओं के माध्यम से।
- (B) व्यक्तिपरक अर्थों और प्रतीकों के माध्यम से अंतःक्रिया द्वारा।
- (C) शक्ति संबंधों और संघर्षों के माध्यम से।
- (D) जैविक आवश्यकताओं की पूर्ति के माध्यम से।
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद एक सूक्ष्म-स्तरीय परिप्रेक्ष्य है जो इस बात पर जोर देता है कि कैसे व्यक्ति प्रतीकों (जैसे भाषा, हावभाव) के माध्यम से एक-दूसरे के साथ बातचीत करते हैं और इन अंतःक्रियाओं के माध्यम से सामाजिक यथार्थ का निर्माण होता है।
- (A) यह एक स्थूल-स्तरीय परिप्रेक्ष्य (जैसे प्रकार्यवाद या संघर्ष सिद्धांत) की विशेषता है।
- (C) यह संघर्ष सिद्धांत का केंद्रीय विचार है।
- (D) यह जैविक नियतिवाद के करीब है, जो समाजशास्त्र का केंद्रीय विषय नहीं है।
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प्रश्न 12: कौन सी अनुसंधान विधि गहन, विस्तृत जानकारी एकत्र करने और सामाजिक घटनाओं की गहरी समझ प्राप्त करने पर केंद्रित है?
- (A) मात्रात्मक अनुसंधान (Quantitative Research)
- (B) गुणात्मक अनुसंधान (Qualitative Research)
- (C) प्रायोगिक अनुसंधान (Experimental Research)
- (D) सर्वेक्षण अनुसंधान (Survey Research)
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। गुणात्मक अनुसंधान उन विधियों का एक समूह है जो सामाजिक घटनाओं की गहरी और समृद्ध समझ प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, अक्सर व्यक्तिगत अनुभवों, अर्थों और संदर्भों की खोज करते हुए। इसमें साक्षात्कार, नृवंशविज्ञान और केस स्टडी जैसे तरीके शामिल हैं।
- (A) मात्रात्मक अनुसंधान संख्यात्मक डेटा एकत्र करने और सांख्यिकीय विश्लेषण के माध्यम से पैटर्न और संबंधों की पहचान करने पर केंद्रित है।
- (C) प्रायोगिक अनुसंधान कारण और प्रभाव संबंधों का परीक्षण करने के लिए चर के हेरफेर पर केंद्रित है।
- (D) सर्वेक्षण अनुसंधान बड़ी आबादी से संरचित डेटा एकत्र करने के लिए प्रश्नावली का उपयोग करता है।
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प्रश्न 13: हाल ही में लिंग और घरेलू कार्य के atribución के अध्ययन के लिए ‘AI-जनरेटेड विज़ुअल कॉन्ज्वाइंट्स’ (AI-generated visual conjoints) का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
- (A) नए प्रकार के उपभोक्ता व्यवहार के विश्लेषण हेतु।
- (B) समाजशास्त्रीय अनुसंधान में एक नवीन कार्यप्रणाली के रूप में।
- (C) कला और सौंदर्यशास्त्र के अध्ययन में।
- (D) बच्चों के सीखने के पैटर्न को समझने के लिए।
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। हाल ही में ‘सोशियोलॉजिकल साइंस’ नामक पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में AI-जनरेटेड विज़ुअल कॉन्ज्वाइंट्स को लिंग और घरेलू कार्य के atribución का अध्ययन करने के लिए एक विधि के रूप में उपयोग किया गया है। यह समाजशास्त्रीय अनुसंधान में डेटा एकत्र करने और सामाजिक धारणाओं का विश्लेषण करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नवीन उपयोग को दर्शाता है।
- (A) यद्यपि AI उपभोक्ता व्यवहार के लिए उपयोग होता है, यहां संदर्भ विशेष रूप से लिंग और घरेलू कार्य के atribución के समाजशास्त्रीय अध्ययन का है।
- (C) AI कला के लिए भी प्रयोग होता है, लेकिन यहां संदर्भ समाजशास्त्रीय अनुसंधान कार्यप्रणाली का है।
- (D) बच्चों के सीखने के पैटर्न के लिए भी AI के उपयोग होते हैं, लेकिन यह दिए गए संदर्भ से मेल नहीं खाता।
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प्रश्न 14: ‘सामाजिक गतिशीलता’ (Social Mobility) से आप क्या समझते हैं?
- (A) समाज में भौतिक वस्तुओं का आवागमन।
- (B) व्यक्तियों या समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में परिवर्तन।
- (C) एक स्थान से दूसरे स्थान पर लोगों का भौगोलिक आवागमन।
- (D) सामाजिक मानदंडों में तेजी से बदलाव।
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। सामाजिक गतिशीलता व्यक्तियों या समूहों की सामाजिक स्तरीकरण प्रणाली के भीतर एक सामाजिक स्थिति से दूसरी सामाजिक स्थिति में जाने को संदर्भित करती है। यह ऊर्ध्वाधर (ऊपर या नीचे) या क्षैतिज (समान स्तर पर) हो सकती है, और अंतर-पीढ़ीगत (intergenerational) या अंतरा-पीढ़ीगत (intragenerational) भी हो सकती है।
- (A) यह आर्थिक गतिविधि का हिस्सा है, सामाजिक गतिशीलता का नहीं।
- (C) यह भौगोलिक प्रवास है, सामाजिक गतिशीलता नहीं।
- (D) यह सामाजिक परिवर्तन का एक पहलू है, विशेष रूप से सांस्कृतिक परिवर्तन का।
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प्रश्न 15: ‘सामूहिक चेतना’ (Collective Conscience) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की?
- (A) मैक्स वेबर (Max Weber)
- (B) कार्ल मार्क्स (Karl Marx)
- (C) एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim)
- (D) जॉर्ज सिमेल (Georg Simmel)
सही उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (C) सही है। एमिल दुर्खीम ने ‘सामूहिक चेतना’ की अवधारणा प्रस्तुत की, जो किसी विशेष समाज के अधिकांश सदस्यों द्वारा साझा की गई मान्यताओं, विचारों और नैतिक दृष्टिकोणों का एक समूह है। यह समाज के भीतर एकजुटता और एकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- (A) मैक्स वेबर सामाजिक क्रिया और नौकरशाही पर अपने काम के लिए जाने जाते हैं।
- (B) कार्ल मार्क्स वर्ग संघर्ष और पूंजीवाद के विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं।
- (D) जॉर्ज सिमेल औपचारिक समाजशास्त्र और शहरी जीवन पर अपने काम के लिए जाने जाते हैं।
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प्रश्न 16: ‘तटस्थ अवलोकन’ (Value-Neutrality) का सिद्धांत किससे संबंधित है, जिसमें शोधकर्ता को अपने व्यक्तिगत मूल्यों को अनुसंधान से दूर रखना चाहिए?
- (A) ऑगस्ट कॉम्ते (Auguste Comte)
- (B) मैक्स वेबर (Max Weber)
- (C) हर्बर्ट स्पेंसर (Herbert Spencer)
- (D) जॉर्ज हरबर्ट मीड (George Herbert Mead)
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। मैक्स वेबर ने समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘मूल्य-तटस्थता’ (Wertfreiheit) के सिद्धांत पर जोर दिया। उनका मानना था कि समाजशास्त्रियों को अपने व्यक्तिगत मूल्यों और राजनीतिक विचारों को अपने अनुसंधान और विश्लेषण से अलग रखना चाहिए ताकि वस्तुनिष्ठता बनी रहे।
- (A) ऑगस्ट कॉम्ते प्रत्यक्षवाद (Positivism) के संस्थापक हैं।
- (C) हर्बर्ट स्पेंसर सामाजिक डार्विनवाद (Social Darwinism) के लिए जाने जाते हैं।
- (D) जॉर्ज हरबर्ट मीड प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद से जुड़े हैं।
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प्रश्न 17: भारतीय समाज में ‘जाति व्यवस्था’ (Caste System) की कौन सी विशेषता नहीं है?
- (A) प्रदत्त स्थिति (Ascribed Status)
- (B) अंतर्विवाही समूह (Endogamous Group)
- (C) व्यावसायिक विशेषज्ञता (Occupational Specialization)
- (D) सामाजिक गतिशीलता में उच्च लचीलापन (High Flexibility in Social Mobility)
सही उत्तर: (D)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (D) सही है। जाति व्यवस्था एक बंद स्तरीकरण प्रणाली है जहाँ सामाजिक गतिशीलता में बहुत कम या न के बराबर लचीलापन होता है। व्यक्ति अपनी जाति में जन्म लेता है और उसी में मरता है, और उसकी स्थिति जन्म से निर्धारित होती है।
- (A) प्रदत्त स्थिति जाति व्यवस्था की एक मूलभूत विशेषता है।
- (B) जाति समूह अंतर्विवाही होते हैं, जिसका अर्थ है कि विवाह आमतौर पर उसी जाति के भीतर होता है।
- (C) पारंपरिक जाति व्यवस्था में प्रत्येक जाति को एक विशिष्ट व्यवसाय या कार्य सौंपा गया था।
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प्रश्न 18: ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Fact) की अवधारणा किसने दी, जिसका अध्ययन समाजशास्त्र का मुख्य विषय है?
- (A) हरबर्ट स्पेंसर (Herbert Spencer)
- (B) एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim)
- (C) फर्डिनेंड टोनिस (Ferdinand Tönnies)
- (D) जॉर्ज सिमेल (Georg Simmel)
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। एमिल दुर्खीम ने ‘सामाजिक तथ्य’ की अवधारणा दी, जिसमें वे व्यवहार के तरीके, विचार और भावनाएं शामिल हैं जो व्यक्ति के बाहर मौजूद होती हैं और उस पर एक बाध्यकारी शक्ति लगाती हैं। उन्होंने दावा किया कि समाजशास्त्र को सामाजिक तथ्यों का वस्तुनिष्ठ रूप से अध्ययन करना चाहिए।
- (A) हरबर्ट स्पेंसर ने समाज को एक जीवित जीव के रूप में देखा।
- (C) फर्डिनेंड टोनिस ने गेमिनशाफ्ट और गेसेलशाफ्ट (Gemeinschaft and Gesellschaft) की अवधारणाएं प्रस्तुत कीं।
- (D) जॉर्ज सिमेल ने औपचारिक समाजशास्त्र और सामाजिक अंतःक्रियाओं के रूपों का अध्ययन किया।
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प्रश्न 19: ‘उत्पीड़न का सिद्धांत’ (Theory of Oppression) किस परिप्रेक्ष्य से संबंधित है, जिसमें समाज में असमानता को प्रमुख कारक के रूप में देखा जाता है?
- (A) प्रकार्यवाद (Functionalism)
- (B) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism)
- (C) संघर्ष सिद्धांत (Conflict Theory)
- (D) घटना-क्रिया विज्ञान (Phenomenology)
सही उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (C) सही है। संघर्ष सिद्धांत, विशेष रूप से कार्ल मार्क्स से प्रेरित, समाज को शक्ति, असमानता और संघर्ष से चिह्नित मानता है। यह मानता है कि समाज में विभिन्न समूह सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे उत्पीड़न और प्रभुत्व पैदा होता है।
- (A) प्रकार्यवाद समाज को एक सुसंगत प्रणाली के रूप में देखता है जिसके हिस्से एक साथ काम करते हैं।
- (B) प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद सूक्ष्म-स्तरीय अंतःक्रियाओं और प्रतीकों पर केंद्रित है।
- (D) घटना-क्रिया विज्ञान व्यक्तिगत अनुभवों के व्यक्तिपरक अर्थों पर केंद्रित है।
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प्रश्न 20: ‘गेमिनशाफ्ट’ (Gemeinschaft) और ‘गेसेलशाफ्ट’ (Gesellschaft) की अवधारणाओं के माध्यम से पारंपरिक और आधुनिक समाजों के बीच अंतर किसने बताया?
- (A) मैक्स वेबर (Max Weber)
- (B) एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim)
- (C) फर्डिनेंड टोनिस (Ferdinand Tönnies)
- (D) जॉर्ज सिमेल (Georg Simmel)
सही उत्तर: (C)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (C) सही है। फर्डिनेंड टोनिस ने इन दो प्रकार के सामाजिक संबंधों को वर्णित किया: गेमिनशाफ्ट (समुदाय) छोटे, घनिष्ठ, पारंपरिक समुदायों को संदर्भित करता है जो व्यक्तिगत संबंधों, साझा मूल्यों और मजबूत सामाजिक बंधनों पर आधारित होते हैं। गेसेलशाफ्ट (समाज) बड़े, अनाम, आधुनिक समाजों को संदर्भित करता है जो अवैयक्तिक, तर्कसंगत और संविदात्मक संबंधों पर आधारित होते हैं।
- (A) मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया के प्रकारों पर काम किया।
- (B) एमिल दुर्खीम ने यांत्रिक और जैविक एकजुटता का विश्लेषण किया।
- (D) जॉर्ज सिमेल ने शहरी जीवन के सामाजिक प्रभावों का अध्ययन किया।
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प्रश्न 21: ग्रामीण समाजशास्त्र में, ‘छोटे शहर’ (Little Community) की अवधारणा किसने प्रस्तुत की, जिसमें विशिष्टता, समरूपता, आत्म-निर्भरता और सर्वव्यापकता जैसी विशेषताएं होती हैं?
- (A) रॉबर्ट रेडफील्ड (Robert Redfield)
- (B) एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas)
- (C) ऑस्कर लुईस (Oscar Lewis)
- (D) ए.आर. देसाई (A.R. Desai)
सही उत्तर: (A)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (A) सही है। रॉबर्ट रेडफील्ड ने अपनी पुस्तक ‘The Little Community’ में पारंपरिक ग्रामीण समाजों की विशेषताओं का वर्णन करने के लिए ‘छोटे शहर’ (Little Community) की अवधारणा का प्रयोग किया। इन विशेषताओं में विशिष्टता (distinctiveness), समरूपता (homogeneity), आत्म-निर्भरता (self-sufficiency) और सर्वव्यापकता (all-providing) शामिल हैं।
- (B) एम.एन. श्रीनिवास संस्कृतिकरण और प्रभावी जाति के लिए जाने जाते हैं।
- (C) ऑस्कर लुईस गरीबी की संस्कृति (Culture of Poverty) की अवधारणा के लिए जाने जाते हैं।
- (D) ए.आर. देसाई भारतीय राष्ट्रवाद और राज्य समाजशास्त्र पर मार्क्सवादी परिप्रेक्ष्य के लिए जाने जाते हैं।
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प्रश्न 22: ‘पूंजीवादी समाज’ में ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा का वर्णन किसने किया?
- (A) मैक्स वेबर (Max Weber)
- (B) कार्ल मार्क्स (Karl Marx)
- (C) एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim)
- (D) हर्बर्ट मार्क्यूस (Herbert Marcuse)
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिकों के ‘अलगाव’ (या वि-मानवीकरण) की अवधारणा का विस्तृत विश्लेषण किया। उनके अनुसार, श्रमिक उत्पादन के उत्पाद, उत्पादन की प्रक्रिया, अपनी मानवीय प्रजाति-सार (species-being) और अन्य श्रमिकों से अलग-थलग पड़ जाते हैं।
- (A) मैक्स वेबर ने नौकरशाही में तर्कहीनता और ‘लोहे के पिंजरे’ (Iron Cage) की बात की, लेकिन अलगाव उनका केंद्रीय विषय नहीं था जैसे मार्क्स का था।
- (C) एमिल दुर्खीम ने एनोमी की अवधारणा दी, जो अलगाव से भिन्न है।
- (D) हर्बर्ट मार्क्यूस फ्रैंकफर्ट स्कूल के एक प्रमुख विचारक थे जिन्होंने उपभोक्ता समाज में अलगाव पर भी लिखा, लेकिन मूल अवधारणा मार्क्स द्वारा विकसित की गई थी।
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प्रश्न 23: ‘भूमिका-संघर्ष’ (Role Conflict) का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है?
- (A) एक व्यक्ति एक ही भूमिका के भीतर कई उम्मीदों का सामना कर रहा है।
- (B) एक व्यक्ति को एक ही समय में दो या दो से अधिक भूमिकाओं को पूरा करने में कठिनाई हो रही है, जिनकी उम्मीदें परस्पर विरोधी हैं।
- (C) एक व्यक्ति अपनी सामाजिक भूमिकाओं से पूरी तरह से अलग महसूस करता है।
- (D) एक व्यक्ति को अपनी भूमिका को अच्छी तरह से निभाने के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी है।
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। भूमिका-संघर्ष तब उत्पन्न होता है जब एक व्यक्ति को एक ही समय में दो या दो से अधिक भूमिकाओं को निभाना पड़ता है जिनकी अपेक्षाएं एक-दूसरे से मेल नहीं खातीं या एक-दूसरे के विपरीत होती हैं (जैसे एक कामकाजी मां को अपने पेशेवर दायित्वों और अपने बच्चों की देखभाल के बीच संतुलन बनाना)।
- (A) यह ‘भूमिका तनाव’ (Role Strain) का एक उदाहरण है, जहां एक ही भूमिका के भीतर तनाव होता है।
- (C) यह ‘अलगाव’ (Alienation) या ‘अनात्म-बोध’ (Depersonalization) से संबंधित है।
- (D) यह भूमिका निभाने में आने वाली व्यावहारिक समस्या है, लेकिन सीधे तौर पर भूमिका-संघर्ष नहीं।
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प्रश्न 24: ‘सामाजिक नियंत्रण’ (Social Control) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- (A) समाज में सभी प्रकार की भिन्नताओं को समाप्त करना।
- (B) सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना और मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करना।
- (C) व्यक्तिगत स्वतंत्रता को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना।
- (D) केवल कानून और दंड के माध्यम से समाज को नियंत्रित करना।
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। सामाजिक नियंत्रण उन तंत्रों और प्रक्रियाओं को संदर्भित करता है जिनके द्वारा समाज अपने सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित करता है ताकि सामाजिक मानदंडों, मूल्यों और नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके और सामाजिक व्यवस्था बनी रहे। इसमें औपचारिक (जैसे कानून) और अनौपचारिक (जैसे सामाजिक दबाव, प्रथाएं) दोनों तरह के नियंत्रण शामिल हैं।
- (A) सामाजिक नियंत्रण भिन्नताओं को समाप्त नहीं करता, बल्कि उन्हें स्वीकार्य सीमाओं के भीतर रखने का प्रयास करता है।
- (C) जबकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है, इसका उद्देश्य पूरी तरह से प्रतिबंधित करना नहीं है बल्कि समाज के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करना है।
- (D) कानून और दंड औपचारिक नियंत्रण के हिस्से हैं, लेकिन सामाजिक नियंत्रण केवल इन्हीं तक सीमित नहीं है।
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प्रश्न 25: ‘संस्कृति के अध्ययन’ में ‘सांस्कृतिक सापेक्षवाद’ (Cultural Relativism) का क्या अर्थ है?
- (A) सभी संस्कृतियां समान रूप से श्रेष्ठ हैं।
- (B) किसी संस्कृति को उसके अपने संदर्भ और मूल्यों के अनुसार समझा जाना चाहिए, न कि किसी अन्य संस्कृति के मानदंडों से।
- (C) सभी संस्कृतियां अंततः एक-दूसरे से प्रभावित होती हैं।
- (D) एक संस्कृति दूसरी संस्कृति से श्रेष्ठ होती है।
सही उत्तर: (B)
विस्तृत व्याख्या:
विकल्प (B) सही है। सांस्कृतिक सापेक्षवाद यह विचार है कि किसी व्यक्ति की मान्यताओं, मूल्यों और प्रथाओं को उसकी अपनी संस्कृति के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, न कि सार्वभौमिक मानदंडों के खिलाफ आंका जाना चाहिए। यह सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान को बढ़ावा देता है।
- (A) यह ‘सांस्कृतिक सापेक्षवाद’ का अर्थ नहीं है, बल्कि एक अति-सामान्यीकरण है।
- (C) यह ‘सांस्कृतिक विसरण’ (Cultural Diffusion) या ‘सांस्कृतिक संपर्क’ को दर्शाता है।
- (D) यह ‘नृजातिकेंद्रवाद’ (Ethnocentrism) का एक रूप है, जो सांस्कृतिक सापेक्षवाद के विपरीत है।
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