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भारतीय राजव्यवस्था क्विज़: अपने संवैधानिक ज्ञान की परीक्षा लें

भारतीय राजव्यवस्था क्विज़: अपने संवैधानिक ज्ञान की परीक्षा लें

प्रिय उम्मीदवारों, भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को समझना किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह दैनिक अभ्यास सेट आपको भारतीय संविधान और राजव्यवस्था की आपकी समझ का परीक्षण करने और उसे गहरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हमारे “संविधान विशेषज्ञ” द्वारा तैयार किए गए इन चुनौतीपूर्ण प्रश्नों के माध्यम से अपनी वैचारिक स्पष्टता और विश्लेषणात्मक कौशल का मूल्यांकन करें। यह क्विज़ आपको महत्वपूर्ण संवैधानिक अनुच्छेदों, ऐतिहासिक निर्णयों और शासन संरचना की जटिलताओं को समझने में मदद करेगा।


  1. भारत के संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा जोड़े गए?

    1. 40वां संशोधन अधिनियम
    2. 42वां संशोधन अधिनियम
    3. 44वां संशोधन अधिनियम
    4. 52वां संशोधन अधिनियम

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (B) 42वां संशोधन अधिनियम है। भारत के संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द 1976 के 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा जोड़े गए थे। इस संशोधन को ‘लघु संविधान’ के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसने संविधान में कई बड़े बदलाव किए थे। ‘समाजवादी’ शब्द का अर्थ है लोकतांत्रिक समाजवाद, जो गरीबी, अज्ञानता, बीमारी और अवसर की असमानता को समाप्त करना चाहता है। ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द का अर्थ है कि भारत में सभी धर्मों को राज्य से समान सम्मान, सुरक्षा और समर्थन प्राप्त है, और राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है।

    विकल्प (A) 40वां संशोधन (1976) मुख्य रूप से भूमि और अन्य कानूनों को नौवीं अनुसूची में शामिल करने से संबंधित था। विकल्प (C) 44वां संशोधन (1978) ने आपातकाल के प्रावधानों को संशोधित किया और संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से कानूनी अधिकार बना दिया। विकल्प (D) 52वां संशोधन (1985) दलबदल विरोधी कानून से संबंधित है।

  2. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद ‘अस्पृश्यता के उन्मूलन’ से संबंधित है?

    1. अनुच्छेद 14
    2. अनुच्छेद 15
    3. अनुच्छेद 17
    4. अनुच्छेद 19

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) अनुच्छेद 17 है। यह मौलिक अधिकार भारत में अस्पृश्यता को समाप्त करता है और किसी भी रूप में इसके अभ्यास को प्रतिबंधित करता है। यह एक पूर्ण निषेध है और इसे किसी भी अपवाद के बिना लागू किया जाता है। अनुच्छेद 17 सामाजिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    विकल्प (A) अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण से संबंधित है। विकल्प (B) अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव के निषेध से संबंधित है। विकल्प (D) अनुच्छेद 19 वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित छह स्वतंत्रताओं की गारंटी देता है।

  3. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में ग्राम पंचायतों के संगठन का प्रावधान है?

    1. अनुच्छेद 39
    2. अनुच्छेद 40
    3. अनुच्छेद 43
    4. अनुच्छेद 48

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (B) अनुच्छेद 40 है। यह राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का हिस्सा है और राज्य को ग्राम पंचायतों को संगठित करने और उन्हें ऐसी शक्तियाँ और अधिकार प्रदान करने का निर्देश देता है जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों। यह 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से पंचायती राज प्रणाली के संवैधानिककरण का आधार बना।

    विकल्प (A) अनुच्छेद 39 राज्य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति सिद्धांतों से संबंधित है, जैसे आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार। विकल्प (C) अनुच्छेद 43 उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी से संबंधित है। विकल्प (D) अनुच्छेद 48 कृषि और पशुपालन के संगठन से संबंधित है।

  4. मौलिक कर्तव्यों को किस समिति की सिफारिशों पर भारतीय संविधान में शामिल किया गया था?

    1. बलवंत राय मेहता समिति
    2. सरकारिया आयोग
    3. स्वर्ण सिंह समिति
    4. एल. एम. सिंघवी समिति

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) स्वर्ण सिंह समिति है। 1976 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा गठित स्वर्ण सिंह समिति ने मौलिक कर्तव्यों की आवश्यकता की सिफारिश की थी। इन सिफारिशों के आधार पर, 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV-A में अनुच्छेद 51A के तहत 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए। बाद में, 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा एक और मौलिक कर्तव्य (शिक्षा का अधिकार) जोड़ा गया, जिससे कुल संख्या 11 हो गई।

    विकल्प (A) बलवंत राय मेहता समिति (1957) पंचायती राज प्रणाली से संबंधित थी। विकल्प (B) सरकारिया आयोग (1983) केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए स्थापित किया गया था। विकल्प (D) एल. एम. सिंघवी समिति (1986) ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक मान्यता देने की सिफारिश की थी।

  5. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया का उल्लेख है?

    1. अनुच्छेद 58
    2. अनुच्छेद 60
    3. अनुच्छेद 61
    4. अनुच्छेद 62

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) अनुच्छेद 61 है। यह अनुच्छेद भारतीय संविधान के उल्लंघन के आधार पर राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया का विवरण देता है। महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में शुरू किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर और 14 दिन का नोटिस आवश्यक है। इसे दोनों सदनों द्वारा कुल सदस्यता के दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना चाहिए।

    विकल्प (A) अनुच्छेद 58 राष्ट्रपति के पद के लिए योग्यता से संबंधित है। विकल्प (B) अनुच्छेद 60 राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान से संबंधित है। विकल्प (D) अनुच्छेद 62 राष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए चुनाव आयोजित करने के समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए चुने गए व्यक्ति के कार्यकाल से संबंधित है।

  6. उपराष्ट्रपति को पद से हटाने का प्रस्ताव सबसे पहले किस सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है?

    1. लोकसभा
    2. राज्यसभा
    3. किसी भी सदन में
    4. संसद के संयुक्त सत्र में

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (B) राज्यसभा है। संविधान के अनुच्छेद 67(b) के अनुसार, उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है और जिसे लोकसभा सहमत हो। चूंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, इसलिए उन्हें हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही शुरू किया जा सकता है।

    विकल्प (A) लोकसभा में यह प्रस्ताव सीधे प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। विकल्प (C) गलत है क्योंकि यह केवल राज्यसभा में ही शुरू हो सकता है। विकल्प (D) संसद के संयुक्त सत्र का प्रावधान कुछ विधेयकों पर गतिरोध की स्थिति में होता है, उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए नहीं।

  7. भारत में मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?

    1. राष्ट्रपति
    2. प्रधानमंत्री
    3. लोकसभा
    4. राज्यसभा

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) लोकसभा है। संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। इसका अर्थ यह है कि पूरी मंत्रिपरिषद एक इकाई के रूप में कार्य करती है और लोकसभा में विश्वास खोने पर उसे इस्तीफा देना पड़ता है। यदि लोकसभा किसी एक मंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करती है, तो पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।

    विकल्प (A) राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद का गठन करते हैं लेकिन सामूहिक उत्तरदायित्व लोकसभा के प्रति होता है। विकल्प (B) प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है, लेकिन वह भी लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व का हिस्सा है। विकल्प (D) राज्यसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व नहीं होता है, क्योंकि मंत्रिपरिषद लोकसभा से उत्पन्न होती है और उसी के प्रति जवाबदेह होती है।

  8. धन विधेयक को राज्यसभा द्वारा अधिकतम कितने दिनों तक रोका जा सकता है?

    1. 14 दिन
    2. 1 महीने
    3. 3 महीने
    4. 6 महीने

    सही उत्तर: A

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (A) 14 दिन है। संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार, धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है और लोकसभा द्वारा पारित होने के बाद इसे राज्यसभा में उसकी सिफारिशों के लिए भेजा जाता है। राज्यसभा को इसे 14 दिनों के भीतर लोकसभा को वापस भेजना होता है। यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर विधेयक को वापस नहीं करती है, तो इसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है। राज्यसभा धन विधेयक में संशोधन या उसे अस्वीकार नहीं कर सकती।

    विकल्प (B), (C), (D) गलत हैं क्योंकि धन विधेयक के मामले में राज्यसभा की शक्तियां अत्यंत सीमित होती हैं और वह अधिकतम 14 दिनों तक ही इसे रोक सकती है।

  9. किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन का अधिकार किसके पास है?

    1. राज्य का राज्यपाल
    2. भारत का राष्ट्रपति
    3. संसद
    4. संबंधित राज्य विधानसभा

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) संसद है। संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार, संसद किसी राज्य में विधान परिषद का सृजन या उत्सादन कर सकती है, यदि उस राज्य की विधानसभा इस आशय का प्रस्ताव अपनी कुल सदस्यता के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित करती है। हालांकि राज्य विधानसभा प्रस्ताव पारित करती है, अंतिम निर्णय और कानून बनाने की शक्ति संसद के पास होती है।

    विकल्प (A) राज्यपाल के पास विधान परिषद के सृजन या उत्सादन की शक्ति नहीं है। विकल्प (B) राष्ट्रपति के पास भी यह सीधी शक्ति नहीं है, बल्कि संसद द्वारा पारित विधेयक पर उनकी सहमति की आवश्यकता होती है। विकल्प (D) संबंधित राज्य विधानसभा केवल प्रस्ताव पारित कर सकती है, वह स्वयं विधान परिषद का सृजन या उत्सादन नहीं कर सकती।

  10. भारतीय न्यायपालिका में ‘न्यायिक पुनरावलोकन’ की शक्ति का मुख्य स्रोत क्या है?

    1. संसद द्वारा पारित कानून
    2. संविधान के अनुच्छेद 13, 32 और 226
    3. उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थापित प्रथाएँ
    4. राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (B) संविधान के अनुच्छेद 13, 32 और 226 है। न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) का अर्थ है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय विधायी अधिनियमों और कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता की जांच कर सकते हैं। अनुच्छेद 13 घोषणा करता है कि कोई भी कानून जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, शून्य होगा। अनुच्छेद 32 सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए रिट जारी करने की शक्ति देता है, और अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को समान शक्तियाँ देता है। ये अनुच्छेद सीधे तौर पर न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति प्रदान करते हैं, भले ही ‘न्यायिक पुनरावलोकन’ शब्द संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेखित न हो।

    विकल्प (A) संसद द्वारा कानून बनाकर न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति नहीं दी जाती, बल्कि यह संविधान से ही प्राप्त होती है। विकल्प (C) प्रथाएँ महत्वपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन वे सीधे स्रोत नहीं हैं। विकल्प (D) राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश एक अस्थायी विधायी उपाय है और न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति का स्रोत नहीं हो सकता।

  11. किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?

    1. भारत का मुख्य न्यायाधीश
    2. राज्य का राज्यपाल
    3. भारत का राष्ट्रपति
    4. संबंधित राज्य का मुख्यमंत्री

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) भारत का राष्ट्रपति है। संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश, संबंधित राज्य के राज्यपाल और उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायाधीशों के मामले में) से परामर्श करने के बाद की जाती है। यह कॉलेजियम प्रणाली के तहत होता है जहाँ इन प्राधिकारियों की सिफारिशों को अंतिम रूप से राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृति दी जाती है।

    विकल्प (A) भारत का मुख्य न्यायाधीश परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा होता है, लेकिन वह स्वयं नियुक्ति नहीं करता। विकल्प (B) राज्य का राज्यपाल भी परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा होता है, लेकिन नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। विकल्प (D) मुख्यमंत्री का इस प्रक्रिया में कोई सीधा भूमिका नहीं होती।

  12. केंद्र-राज्य संबंधों पर सिफारिशें देने के लिए किस आयोग का गठन किया गया था?

    1. मण्डल आयोग
    2. सरकारिया आयोग
    3. केलकर आयोग
    4. पुंछी आयोग

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (B) सरकारिया आयोग है। केंद्र-राज्य संबंधों की जांच करने और उनके कामकाज के संबंध में सिफारिशें करने के लिए जून 1983 में भारत सरकार द्वारा आर.एस. सरकारिया की अध्यक्षता में सरकारिया आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग ने 1988 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और केंद्र-राज्य संबंधों को बेहतर बनाने के लिए 247 सिफारिशें कीं।

    विकल्प (A) मण्डल आयोग (1979) भारत में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान से संबंधित था। विकल्प (C) केलकर आयोग (2002) कर सुधारों से संबंधित था। विकल्प (D) पुंछी आयोग (2007) भी केंद्र-राज्य संबंधों पर था, लेकिन सरकारिया आयोग पहले और अधिक व्यापक था।

  13. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया किसके समान है?

    1. भारत के महान्यायवादी
    2. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश
    3. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश
    4. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से केवल उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसका अर्थ है कि उन्हें संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है, जो अक्षमता या दुर्व्यवहार के सिद्ध आधार पर आधारित हो। यह पद की स्वतंत्रता और स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।

    विकल्प (A) भारत के महान्यायवादी राष्ट्रपति की इच्छापर्यंत पद धारण करते हैं। विकल्प (B) उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान ही होती है। विकल्प (D) संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की जांच के बाद होती है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त से भिन्न है।

  14. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्यों का कार्यकाल कितना होता है?

    1. 5 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो
    2. 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो
    3. 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो
    4. 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो

    सही उत्तर: D

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (D) 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो। संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्य 6 वर्ष की अवधि के लिए या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, पद धारण करते हैं। यह उन्हें कार्यपालिका के अनावश्यक प्रभाव से बचाने और उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि वे या तो कार्यकाल की अवधि (5 वर्ष के बजाय 6 वर्ष) या अधिकतम आयु सीमा (62 वर्ष के बजाय 65 वर्ष) को गलत बताते हैं।

  15. भारत का नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) मुख्य रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होता है?

    1. राष्ट्रपति
    2. प्रधानमंत्री
    3. संसद
    4. सर्वोच्च न्यायालय

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) संसद है। संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित CAG, सार्वजनिक धन के संरक्षक के रूप में कार्य करता है। CAG भारत सरकार और राज्य सरकारों के खातों का ऑडिट करता है और अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। इस प्रकार, CAG संसद के प्रति उत्तरदायी होता है, क्योंकि वह संसद की ओर से कार्यपालिका के वित्तीय खातों की जांच करता है। इसे ‘लोक लेखा समिति का मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ भी कहा जाता है।

    विकल्प (A) राष्ट्रपति को CAG अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है, लेकिन वास्तविक उत्तरदायित्व संसद के प्रति है। विकल्प (B) प्रधानमंत्री या मंत्रिपरिषद के प्रति CAG उत्तरदायी नहीं होता, क्योंकि CAG का कार्य कार्यपालिका के वित्तीय नियंत्रण पर नजर रखना है। विकल्प (D) सर्वोच्च न्यायालय का CAG के कार्य पर सीधा उत्तरदायित्व नहीं होता है।

  16. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत वित्त आयोग का गठन किया जाता है?

    1. अनुच्छेद 275
    2. अनुच्छेद 280
    3. अनुच्छेद 300
    4. अनुच्छेद 307

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (B) अनुच्छेद 280 है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत, राष्ट्रपति द्वारा हर पाँच वर्ष में या उससे पहले एक वित्त आयोग का गठन किया जाता है। इसका मुख्य कार्य संघ और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण और राज्यों के बीच ऐसे आगमों के संबंधित शेयरों के आवंटन पर सिफारिशें करना है। यह केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    विकल्प (A) अनुच्छेद 275 कुछ राज्यों को संघ से अनुदान के प्रावधान से संबंधित है। विकल्प (C) अनुच्छेद 300 मुकदमा और कार्यवाही से संबंधित है। विकल्प (D) अनुच्छेद 307 व्यापार और वाणिज्य से संबंधित कानूनों को लागू करने के लिए प्राधिकरण नियुक्त करने की संसद की शक्ति से संबंधित है।

  17. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) किस प्रकार का निकाय है?

    1. संवैधानिक निकाय
    2. वैधानिक निकाय
    3. गैर-संवैधानिक निकाय
    4. कार्यकारी निकाय

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (B) वैधानिक निकाय है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक वैधानिक (Statutory) निकाय है, जिसका अर्थ है कि इसे संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया है। इसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत की गई थी। यह एक संवैधानिक निकाय नहीं है क्योंकि इसका उल्लेख सीधे संविधान में नहीं है। यह एक स्वतंत्र निकाय है जो देश में मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए कार्य करता है।

    विकल्प (A) संवैधानिक निकाय वे होते हैं जिनका उल्लेख सीधे संविधान में होता है (जैसे ECI, UPSC, CAG)। विकल्प (C) ‘गैर-संवैधानिक’ एक व्यापक शब्द है जिसमें वैधानिक और कार्यकारी दोनों शामिल हो सकते हैं, लेकिन ‘वैधानिक’ अधिक सटीक है। विकल्प (D) कार्यकारी निकाय वे होते हैं जिन्हें सरकार के एक कार्यकारी निर्णय द्वारा बनाया जाता है (जैसे नीति आयोग)।

  18. भारतीय संविधान में पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन द्वारा प्रदान किया गया?

    1. 71वां संशोधन
    2. 72वां संशोधन
    3. 73वां संशोधन
    4. 74वां संशोधन

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) 73वां संशोधन है। 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया। इस अधिनियम ने संविधान में एक नया भाग IX जोड़ा, जिसका शीर्षक “पंचायतें” है, और एक नई ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी, जिसमें पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय शामिल हैं। यह ग्रामीण भारत में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

    विकल्प (A) 71वां संशोधन (1992) आठवीं अनुसूची में कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली भाषाओं को शामिल करने से संबंधित था। विकल्प (B) 72वां संशोधन (1992) त्रिपुरा राज्य की विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित था। विकल्प (D) 74वां संशोधन अधिनियम (1992) शहरी स्थानीय निकायों (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित था।

  19. भारतीय संविधान की कौन सी अनुसूची नगरपालिकाओं से संबंधित है?

    1. नौवीं अनुसूची
    2. दसवीं अनुसूची
    3. ग्यारहवीं अनुसूची
    4. बारहवीं अनुसूची

    सही उत्तर: D

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (D) बारहवीं अनुसूची है। भारतीय संविधान की बारहवीं अनुसूची 74वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ी गई थी। यह अनुसूची नगरपालिकाओं (शहरी स्थानीय निकायों) की शक्तियों, प्राधिकरण और जिम्मेदारियों से संबंधित है और इसमें 18 कार्यात्मक विषय शामिल हैं।

    विकल्प (A) नौवीं अनुसूची कुछ अधिनियमों और विनियमों को न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिए जोड़ी गई थी। विकल्प (B) दसवीं अनुसूची दलबदल विरोधी कानून से संबंधित है। विकल्प (C) ग्यारहवीं अनुसूची पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित है और इसमें पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय शामिल हैं।

  20. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है?

    1. अनुच्छेद 352
    2. अनुच्छेद 356
    3. अनुच्छेद 360
    4. अनुच्छेद 365

    सही उत्तर: A

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (A) अनुच्छेद 352 है। अनुच्छेद 352 राष्ट्रपति को युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करने की शक्ति देता है। मूल रूप से, ‘सशस्त्र विद्रोह’ के स्थान पर ‘आंतरिक गड़बड़ी’ शब्द था, जिसे 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदला गया था ताकि आपातकाल के दुरुपयोग को रोका जा सके।

    विकल्प (B) अनुच्छेद 356 राज्यों में संवैधानिक मशीनरी की विफलता (राष्ट्रपति शासन) से संबंधित है। विकल्प (C) अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल से संबंधित है। विकल्प (D) अनुच्छेद 365 संघ द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने या उन्हें प्रभावी करने में राज्य की विफलता के प्रभाव से संबंधित है, जिससे राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

  21. शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21A) भारतीय संविधान में किस संवैधानिक संशोधन द्वारा जोड़ा गया था?

    1. 84वां संशोधन अधिनियम
    2. 86वां संशोधन अधिनियम
    3. 91वां संशोधन अधिनियम
    4. 92वां संशोधन अधिनियम

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (B) 86वां संशोधन अधिनियम है। 86वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2002 ने भारतीय संविधान में अनुच्छेद 21A को जोड़ा, जिसमें 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाया गया। इसने राज्य को कानून द्वारा निर्धारित तरीके से मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। इसी संशोधन ने अनुच्छेद 51A में एक नया मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A(k)) भी जोड़ा, जिसमें माता-पिता या अभिभावकों से अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करने की अपेक्षा की गई।

    विकल्प (A) 84वां संशोधन (2001) ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या को 2026 तक अपरिवर्तित रखने का प्रावधान किया। विकल्प (C) 91वां संशोधन (2003) ने केंद्रीय और राज्य मंत्रिपरिषद के आकार को सीमित किया। विकल्प (D) 92वां संशोधन (2003) ने बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को आठवीं अनुसूची में जोड़ा।

  22. भारतीय संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?

    1. डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
    2. पं. जवाहरलाल नेहरू
    3. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
    4. सरदार वल्लभभाई पटेल

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारतीय संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया था। इससे पहले, 9 दिसंबर 1946 को हुई पहली बैठक में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    विकल्प (A) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे और उन्हें भारतीय संविधान का जनक माना जाता है। विकल्प (B) पं. जवाहरलाल नेहरू उद्देश्य प्रस्ताव के प्रस्तुतकर्ता और संघ संविधान समिति के अध्यक्ष थे। विकल्प (D) सरदार वल्लभभाई पटेल मौलिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों पर सलाहकार समिति के अध्यक्ष थे।

  23. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण’ से संबंधित है?

    1. अनुच्छेद 19
    2. अनुच्छेद 20
    3. अनुच्छेद 21
    4. अनुच्छेद 22

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) अनुच्छेद 21 है। यह अनुच्छेद घोषणा करता है कि “किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।” सर्वोच्च न्यायालय ने इस अनुच्छेद की व्याख्या बहुत व्यापक रूप से की है, इसमें गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार, प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार, निजता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार (86वें संशोधन के बाद) आदि शामिल हैं। मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) वाद में, सर्वोच्च न्यायालय ने इस अधिकार के दायरे का महत्वपूर्ण विस्तार किया।

    विकल्प (A) अनुच्छेद 19 वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित छह स्वतंत्रताओं की गारंटी देता है। विकल्प (B) अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण से संबंधित है। विकल्प (D) अनुच्छेद 22 कुछ मामलों में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण से संबंधित है।

  24. लोकसभा का प्रोटेम स्पीकर कौन नियुक्त करता है?

    1. भारत का मुख्य न्यायाधीश
    2. लोकसभा का महासचिव
    3. भारत का राष्ट्रपति
    4. निवर्तमान लोकसभा अध्यक्ष

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (C) भारत का राष्ट्रपति है। एक प्रोटेम स्पीकर (अस्थायी अध्यक्ष) वह व्यक्ति होता है जिसे राष्ट्रपति द्वारा नवनिर्वाचित लोकसभा के सदस्यों को शपथ दिलाने और नए अध्यक्ष के चुनाव तक सदन की कार्यवाही का संचालन करने के लिए नियुक्त किया जाता है। आमतौर पर, सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को इस पद के लिए चुना जाता है। प्रोटेम स्पीकर का पद तब समाप्त हो जाता है जब नए अध्यक्ष का चुनाव हो जाता है।

    विकल्प (A) भारत का मुख्य न्यायाधीश शपथ दिला सकता है, लेकिन प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। विकल्प (B) लोकसभा का महासचिव सदन के प्रशासनिक कार्यों का प्रबंधन करता है, लेकिन नियुक्ति नहीं करता। विकल्प (D) निवर्तमान लोकसभा अध्यक्ष का नई लोकसभा में प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति में कोई भूमिका नहीं होती।

  25. दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना किसके द्वारा की जा सकती है?

    1. भारत के राष्ट्रपति
    2. संसद द्वारा कानून बनाकर
    3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा
    4. संबंधित राज्यों की विधानसभाओं द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही उत्तर (B) संसद द्वारा कानून बनाकर। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 231 संसद को कानून द्वारा दो या अधिक राज्यों के लिए या दो या अधिक राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ही उच्च न्यायालय स्थापित करने का अधिकार देता है। उदाहरण के लिए, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय दोनों राज्यों और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ही उच्च न्यायालय है।

    विकल्प (A) राष्ट्रपति अकेले ऐसा नहीं कर सकते, बल्कि उन्हें संसद द्वारा पारित कानून के अनुसार कार्य करना होता है। विकल्प (C) सर्वोच्च न्यायालय की इसमें कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। विकल्प (D) संबंधित राज्य विधानसभाएं केवल प्रस्ताव पारित कर सकती हैं, लेकिन कानून बनाने की शक्ति संसद के पास है।

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