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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

दैनिक समाजशास्त्र क्विज़: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

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प्रिय उम्मीदवारों, “The Sociology Scholar” आपके लिए लेकर आया है समाजशास्त्र के 25 उच्च-स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्नों का एक नया सेट। यह दैनिक अभ्यास सेट आपकी अवधारणात्मक समझ और विश्लेषणात्मक कौशल को चुनौती देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रत्येक प्रश्न के साथ विस्तृत व्याख्या आपकी तैयारी को और सुदृढ़ करेगी। अपनी तैयारी को अंतिम रूप देने और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!

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    प्रश्न 1: कार्ल मार्क्स के अनुसार, अलगाव (alienation) की अवधारणा का तात्पर्य क्या है?

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    • (A) समाज से व्यक्ति का भावनात्मक अलगाव
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    • (B) पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में श्रमिक का अपने श्रम उत्पाद, प्रक्रिया, प्रजाति-सार और अन्य मनुष्यों से विच्छेद
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    • (C) आधुनिक जीवन की जटिलताओं के कारण सामाजिक संबंधों का टूटना
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    • (D) धार्मिक विश्वासों से व्यक्ति का दूर होना
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में श्रमिकों द्वारा अनुभव किए जाने वाले अलगाव (alienation) की अवधारणा को समझाया। उनके अनुसार, यह अलगाव चार स्तरों पर होता है: उत्पाद से (product), उत्पादन की प्रक्रिया से (process of production), अपनी प्रजाति-सार (species-being) से, और अन्य मनुष्यों से (fellow humans)। मार्क्स का तर्क था कि पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिक अपने श्रम के फल पर कोई नियंत्रण नहीं रखते, प्रक्रिया उनके लिए नीरस होती है, और वे अपनी मानवीय क्षमता (प्रजाति-सार) को महसूस नहीं कर पाते, जिससे अन्य श्रमिकों के साथ उनके संबंध भी तनावपूर्ण हो जाते हैं।

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    प्रश्न 2: मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित ‘तर्कसंगत-कानूनी प्राधिकार’ (rational-legal authority) की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है?

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    • (A) परंपरा और प्रथाओं पर आधारित
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    • (B) व्यक्तिगत करिश्मा और असाधारण गुणों पर आधारित
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    • (C) नियमों और कानूनों द्वारा स्थापित वैधता पर आधारित
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    • (D) दैवीय शक्ति के विश्वास पर आधारित
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    सही उत्तर: (C)

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    विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने प्राधिकार (authority) के तीन शुद्ध प्रकारों का वर्णन किया: पारंपरिक, करिश्माई और तर्कसंगत-कानूनी। तर्कसंगत-कानूनी प्राधिकार आधुनिक समाजों की विशेषता है, जहाँ शक्ति का प्रयोग स्थापित कानूनों, नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है, न कि व्यक्तिगत शासक की इच्छा या परंपरा के आधार पर। नौकरशाही (bureaucracy) इसका एक आदर्श उदाहरण है।

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    प्रश्न 3: एमाइल दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ (anomie) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब:

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    • (A) समाज में अत्यधिक एकता और सामंजस्य होता है
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    • (B) व्यक्ति सामाजिक मानदंडों और नियमों से बंधे होते हैं
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    • (C) सामाजिक मानदंड कमजोर पड़ जाते हैं या अनुपस्थित हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों को दिशाहीनता महसूस होती है
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    • (D) व्यक्ति अपने धार्मिक विश्वासों का दृढ़ता से पालन करते हैं
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    सही उत्तर: (C)

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    विस्तृत व्याख्या: एमाइल दुर्खीम ने ‘एनोमी’ (एनोमी) की अवधारणा को अपनी पुस्तक ‘आत्महत्या’ (Suicide) में प्रस्तुत किया। यह एक ऐसी सामाजिक स्थिति है जहाँ सामाजिक मानदंड और नियम (सामाजिक मानदण्ड) टूट जाते हैं या अपर्याप्त हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों को यह नहीं पता चलता कि उनसे क्या अपेक्षा की जाती है। यह नैतिक विनियमन (moral regulation) की कमी की ओर ले जाता है और अक्सर उच्च आत्महत्या दर से जुड़ा होता है।

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    प्रश्न 4: टैल्कॉट पार्सन्स के अनुसार, सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए किसी भी सामाजिक प्रणाली के चार कार्यात्मक अनिवार्यताएं क्या हैं (AGIL प्रतिमान)?

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    • (A) अनुकूलन, लक्ष्य प्राप्ति, एकीकरण, गुप्त प्रतिमान अनुरक्षण
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    • (B) अभिग्रहण, गवर्नेंस, अंतर्क्रिया, लाभप्रदता
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    • (C) आत्मनिर्भरता, ज्ञान, ईमानदारी, नेतृत्व
    • \n

    • (D) विश्लेषण, समूह निर्माण, नवाचार, लचीलापन
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    सही उत्तर: (A)

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    विस्तृत व्याख्या: टैल्कॉट पार्सन्स, एक प्रमुख संरचनात्मक प्रकार्यवादी (structural functionalist), ने AGIL प्रतिमान (मॉडल) विकसित किया, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी सामाजिक प्रणाली को अस्तित्व बनाए रखने के लिए चार कार्यात्मक आवश्यकताओं को पूरा करना होता है: अनुकूलन (Adaptation), लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment), एकीकरण (Integration), और गुप्त प्रतिमान अनुरक्षण (Latency/Pattern Maintenance)। ये चार कार्य सामाजिक व्यवस्था और संतुलन के लिए आवश्यक हैं।

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    प्रश्न 5: रॉबर्ट के. मर्टन द्वारा प्रस्तुत ‘संदर्भ समूह’ (reference group) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

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    • (A) एक समूह जिससे व्यक्ति संबंधित है
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    • (B) एक समूह जिसके मानदंडों और मूल्यों को व्यक्ति अपने व्यवहार और मूल्यांकन के लिए आधार बनाता है, भले ही वह उसका सदस्य न हो
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    • (C) एक समूह जो केवल अस्थायी संबंधों पर आधारित होता है
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    • (D) एक समूह जो धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होता है
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘संदर्भ समूह’ की अवधारणा विकसित की। यह वह समूह है जिसके मानदंडों, मूल्यों और व्यवहारों को व्यक्ति अपने स्वयं के मूल्यांकन और आचरण के लिए मानक मानता है, भले ही वह उस समूह का सदस्य न हो। संदर्भ समूह व्यक्तियों के दृष्टिकोण और आकांक्षाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे सापेक्ष अभाव (relative deprivation) की भावना भी उत्पन्न हो सकती है।

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    प्रश्न 6: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) की अवधारणाएँ क्या दर्शाती हैं?

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    • (A) ‘मैं’ सामाजिक नियमों का आंतरिककरण है, जबकि ‘मुझे’ सहज आत्म है।
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    • (B) ‘मैं’ व्यक्ति का सामाजिक आत्म है, जबकि ‘मुझे’ व्यक्ति का जैविक आत्म है।
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    • (C) ‘मैं’ व्यक्ति का सहज, अप्रतिबंधित आत्म है, जबकि ‘मुझे’ समाज के दृष्टिकोणों और अपेक्षाओं का आंतरिककरण है।
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    • (D) ‘मैं’ सामूहिक चेतना है, जबकि ‘मुझे’ व्यक्तिगत चेतना है।
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    सही उत्तर: (C)

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    विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड, प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (symbolic interactionism) के एक प्रमुख विचारक, ने आत्म (self) के विकास में ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) की अवधारणाओं को समझाया। ‘मैं’ व्यक्ति का सहज, रचनात्मक, अप्रतिबंधित और तात्कालिक आत्म है जो प्रतिक्रिया करता है। ‘मुझे’ समाज के संगठित दृष्टिकोणों, अपेक्षाओं और मानदंडों का आंतरिककरण है जो ‘मैं’ के कार्यों को निर्देशित करता है। आत्म इन दोनों के बीच की निरंतर बातचीत से विकसित होता है।

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    प्रश्न 7: ‘जाति व्यवस्था’ की समाजशास्त्रीय समझ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

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    • (A) यह एक खुला स्तरीकरण (stratification) है जहाँ गतिशीलता संभव है।
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    • (B) यह एक बंद स्तरीकरण प्रणाली है जो जन्म के आधार पर पदानुक्रमित होती है।
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    • (C) यह केवल आर्थिक स्थिति पर आधारित है।
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    • (D) यह आधुनिक औद्योगिक समाजों की विशेषता है।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: जाति व्यवस्था (caste system) भारतीय समाज की एक अद्वितीय और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बंद सामाजिक स्तरीकरण प्रणाली है। यह जन्म के आधार पर निर्धारित होती है, जिसमें व्यक्ति को एक विशेष जाति में जन्म लेने के कारण एक निश्चित सामाजिक स्थिति प्राप्त होती है। यह व्यवस्था पदानुक्रमित होती है, जिसमें विभिन्न जातियों को असमान प्रतिष्ठा, शक्ति और आर्थिक अवसर प्रदान किए जाते हैं, और इसमें अंतर्जातीय गतिशीलता (inter-caste mobility) बहुत सीमित या न के बराबर होती है।

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    प्रश्न 8: हालिया समाजशास्त्रीय शोधों के अनुसार, ‘क्लिकबेट अपराध सुर्खियों’ (clickbait crime headlines) का स्थानीय समाचार कक्षों में व्यावसायिक अधिकार (professional authority) पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

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    • (A) यह पत्रकारों के व्यावसायिक अधिकार को मजबूत करता है क्योंकि यह अधिक पाठकों को आकर्षित करता है।
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    • (B) यह पाठकों का विश्वास बढ़ाता है, जिससे समाचार कक्षों की प्रतिष्ठा बढ़ती है।
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    • (C) यह पत्रकारिता की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाता है और समाचार कक्षों के व्यावसायिक अधिकार को कमजोर करता है।
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    • (D) इसका व्यावसायिक अधिकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
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    सही उत्तर: (C)

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    विस्तृत व्याख्या: हालिया समाजशास्त्रीय शोध बताते हैं कि क्लिकबेट अपराध सुर्खियों का उपयोग, जो सनसनीखेज होते हैं और अक्सर तथ्यात्मक सटीकता की कीमत पर ध्यान आकर्षित करते हैं, स्थानीय समाचार कक्षों में पत्रकारों के व्यावसायिक अधिकार को कमजोर कर सकता है। यह पत्रकारिता की सत्यनिष्ठा और विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, जिससे जनता का विश्वास कम हो सकता है। यह मीडिया समाजशास्त्र (sociology of media) से संबंधित एक समकालीन मुद्दा है।

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    प्रश्न 9: ‘अंतःपीढ़ीगत आय गतिशीलता’ (intergenerational income mobility) में वर्ग अंतराल (class gaps) के widening से क्या तात्पर्य है, जैसा कि हाल के शोध में पाया गया है?

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    • (A) विभिन्न पीढ़ियों के बीच आय में कमी।
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    • (B) विभिन्न सामाजिक वर्गों के बच्चों के माता-पिता की आय की तुलना में अपनी स्वयं की आय प्राप्त करने की क्षमता में बढ़ती असमानता।
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    • (C) एक ही पीढ़ी के भीतर आय असमानता में वृद्धि।
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    • (D) उच्च आय वाले समूहों में गतिशीलता में वृद्धि।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: अंतःपीढ़ीगत आय गतिशीलता यह मापती है कि बच्चे अपने माता-पिता की आर्थिक स्थिति की तुलना में अपने जीवनकाल में कितनी अच्छी या बुरी तरह से प्रगति करते हैं। वर्ग अंतरालों के widening का अर्थ है कि विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चों के लिए यह गतिशीलता तेजी से असमान होती जा रही है। विशेष रूप से, निम्न-आय वर्ग के बच्चों के लिए उच्च-आय वर्ग में आगे बढ़ना अधिक कठिन हो रहा है, जबकि उच्च-आय वर्ग के बच्चों के लिए अपनी स्थिति बनाए रखना या सुधारना आसान है। यह सामाजिक स्तरीकरण (social stratification) और असमानता का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

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    प्रश्न 10: ‘सामाजिक तथ्य’ (social facts) की अवधारणा दुर्खीम के लिए क्यों महत्वपूर्ण थी?

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    • (A) यह व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए एक उपकरण है।
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    • (B) यह समाजशास्त्र को एक वैज्ञानिक अनुशासन के रूप में स्थापित करने के लिए आवश्यक था, क्योंकि सामाजिक तथ्यों को वस्तुओं के रूप में अध्ययन किया जा सकता है।
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    • (C) यह केवल भौतिक वस्तुओं का अध्ययन करने के लिए एक विधि है।
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    • (D) यह व्यक्तिपरक अनुभवों की जांच करने पर केंद्रित है।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्त विस्तृत व्याख्या: एमाइल दुर्खीम ने समाजशास्त्र को एक कठोर वैज्ञानिक अनुशासन बनाने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने ‘सामाजिक तथ्य’ की अवधारणा प्रस्तुत की, जिन्हें वे समाजशास्त्रीय अध्ययन की प्राथमिक इकाई मानते थे। सामाजिक तथ्य सोचने, महसूस करने और कार्य करने के ऐसे तरीके हैं जो व्यक्ति के बाहर मौजूद होते हैं और उस पर एक बाध्यकारी शक्ति (coercive power) रखते हैं। उनका मानना था कि इन सामाजिक तथ्यों का वस्तुओं की तरह वस्तुनिष्ठ रूप से अध्ययन किया जा सकता है, जिससे समाजशास्त्र को एक विशिष्ट अध्ययन क्षेत्र मिलता है।

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    प्रश्न 11: हालिया लेखों में AI-जनित दृश्य संयोजकों (AI-generated visual conjoints) का उपयोग किस सामाजिक पहलू का पता लगाने के लिए किया गया है?

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    • (A) उपभोक्ता वरीयताएं।
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    • (B) घर के काम के लिंग-आधारित आरोपण (gendered attributions of housework)।
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    • (C) राजनीतिक अभियानों में जनता की प्रतिक्रिया।
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    • (D) शहरी नियोजन में दक्षता।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: हालिया समाजशास्त्रीय शोधों में AI-जनित दृश्य संयोजकों का उपयोग घर के काम के लिंग-आधारित आरोपण की पड़ताल करने के लिए किया गया है। यह विधि शोधकर्ताओं को विभिन्न लिंग भूमिकाओं और घर के भीतर श्रम विभाजन के बारे में अंतर्निहित पूर्वाग्रहों और अपेक्षाओं का अधिक सूक्ष्म तरीके से अध्ययन करने में मदद करती है। यह लिंग समाजशास्त्र (sociology of gender) और प्रौद्योगिकी समाजशास्त्र (sociology of technology) के चौराहे पर एक महत्वपूर्ण विकास है।

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    प्रश्न 12: ‘सापेक्ष अभाव’ (relative deprivation) की अवधारणा किससे संबंधित है?

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    • (A) व्यक्ति को आवश्यक संसाधनों की पूर्ण कमी महसूस होना।
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    • (B) जब व्यक्ति खुद की तुलना किसी ऐसे समूह से करता है जिसके पास उससे अधिक संसाधन या स्थिति होती है, जिससे अभाव की भावना उत्पन्न होती है।
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    • (C) सामाजिक बहिष्कार (social exclusion) की स्थिति।
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    • (D) आर्थिक असमानता का पूरी तरह से अभाव।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: सापेक्ष अभाव तब होता है जब लोग अपने आप को दूसरों (विशेषकर संदर्भ समूहों) से तुलना करते हैं और महसूस करते हैं कि उनके पास वे चीजें नहीं हैं जो दूसरों के पास हैं, या उनके पास वह स्थिति नहीं है जिसके वे हकदार हैं। यह अभाव वास्तविक पूर्ण अभाव की बजाय दूसरों की तुलना में महसूस किया गया अभाव होता है, और यह अक्सर सामाजिक आंदोलनों और विरोधों को बढ़ावा देता है। रॉबर्ट के. मर्टन ने इस अवधारणा को लोकप्रिय बनाया।

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    प्रश्न 13: ग्रामीण और शहरी समाजशास्त्र के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सी विशेषता आमतौर पर शहरी समाजों से जुड़ी है?

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    • (A) घनिष्ठ प्राथमिक संबंध और सजातीय आबादी।
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    • (B) अवैयक्तिक संबंध, सामाजिक गतिशीलता, और विषम आबादी।
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    • (C) कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और सामुदायिक भावना की प्रबलता।
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    • (D) धीमी सामाजिक परिवर्तन की दर।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: शहरी समाजशास्त्र (urban sociology) शहरी क्षेत्रों की विशेषताओं का अध्ययन करता है। शहरी समाजों में अक्सर बड़े पैमाने पर अवैयक्तिक संबंध (secondary relationships) होते हैं, सामाजिक गतिशीलता (social mobility) अधिक होती है, और आबादी जातीय, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से विषम (heterogeneous) होती है। इसके विपरीत, ग्रामीण समाज आमतौर पर घनिष्ठ प्राथमिक संबंधों और सजातीय आबादी की विशेषता रखते हैं।

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    प्रश्न 14: भारतीय समाज के संदर्भ में, ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) की अवधारणा क्या दर्शाती है?

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    • (A) डिजिटल उपकरणों के निर्माण में विभिन्न जातियों का योगदान।
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    • (B) डिजिटल साक्षरता और प्रौद्योगिकी तक पहुंच में मौजूदा जाति-आधारित असमानताओं का पुनरुत्पादन और गहरा होना।
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    • (C) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई जातियों का निर्माण।
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    • (D) प्रौद्योगिकी के उपयोग से जाति व्यवस्था का पूर्ण उन्मूलन।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ एक समकालीन समाजशास्त्रीय अवधारणा है जो यह बताती है कि कैसे डिजिटल प्रौद्योगिकी और इंटरनेट तक पहुंच में मौजूदा जाति-आधारित असमानताएं (जैसे शिक्षा, आर्थिक पूंजी, सामाजिक नेटवर्क) प्रतिबिंबित और गहरी हो रही हैं। यह केवल पारंपरिक जाति व्यवस्था का एक आधुनिक रूप नहीं है, बल्कि एक ऐसा तंत्र है जिसके द्वारा डिजिटल विभाजन (digital divide) के माध्यम से नए प्रकार के बहिष्करण और हाशिए पर धकेलने की प्रक्रियाएं उत्पन्न होती हैं, जो जाति के पुराने पदानुक्रम को और मजबूत करती हैं।

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    प्रश्न 15: फेमिनिस्ट रिसर्च मेथोडोलॉजी (नारीवादी अनुसंधान पद्धति) की एक प्रमुख विशेषता क्या है?

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    • (A) केवल मात्रात्मक डेटा (quantitative data) पर ध्यान केंद्रित करना।
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    • (B) शोधकर्ता और शोधित के बीच वस्तुनिष्ठ दूरी बनाए रखना।
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    • (C) महिलाओं के अनुभवों को केंद्रीय बनाना और शक्ति संबंधों को चुनौती देना।
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    • (D) केवल ऐतिहासिक अभिलेखों का विश्लेषण करना।
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    सही उत्तर: (C)

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    विस्तृत व्याख्या: नारीवादी अनुसंधान पद्धति एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण है जो पारंपरिक शोध पद्धतियों में पुरुष-केंद्रित पूर्वाग्रहों को चुनौती देती है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में महिलाओं के अनुभवों, दृष्टिकोणों और आवाजों को केंद्रीय बनाना, शोध प्रक्रिया में शक्ति संबंधों को आलोचनात्मक रूप से जांचना, और महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना शामिल है। यह अक्सर गुणात्मक पद्धतियों (qualitative methods) का उपयोग करता है और शोधकर्ता-शोधित संबंध को अधिक सहयोगात्मक बनाने का प्रयास करता है।

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    प्रश्न 16: ‘सामाजिक परिवर्तन’ (social change) के चक्रीय सिद्धांतों (cyclical theories) से कौन सा विचारक जुड़ा है?

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    • (A) कार्ल मार्क्स
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    • (B) हर्बर्ट स्पेंसर
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    • (C) ओसवाल्ड स्पेंगलर
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    • (D) एमाइल दुर्खीम
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    सही उत्तर: (C)

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    विस्तृत व्याख्या: सामाजिक परिवर्तन के चक्रीय सिद्धांत (cyclical theories) यह तर्क देते हैं कि समाज एक पैटर्न या चक्र में बदलते हैं, जैसे कि वृद्धि, शिखर, गिरावट और पतन, फिर से एक नए चक्र की शुरुआत। ओसवाल्ड स्पेंगलर (Oswald Spengler) अपनी पुस्तक ‘द डिक्लाइन ऑफ द वेस्ट’ (The Decline of the West) के लिए जाने जाते हैं, जिसमें उन्होंने सभ्यताओं के जन्म, विकास और पतन को एक जैविक चक्र के रूप में प्रस्तुत किया। पिटिरिम सोरोकिन भी चक्रीय परिवर्तन के समर्थक थे।

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    प्रश्न 17: सामाजिक संस्था के रूप में ‘परिवार’ के संदर्भ में, ‘विस्तारित परिवार’ (extended family) की मुख्य विशेषता क्या है?

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    • (A) केवल पति, पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं।
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    • (B) इसमें माता-पिता, बच्चे और दादा-दादी, चाचा-चाची जैसे अन्य रिश्तेदार एक ही छत के नीचे रहते हैं।
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    • (C) यह विवाह के बाद पति-पत्नी द्वारा अलग से स्थापित किया जाता है।
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    • (D) इसमें केवल रक्त संबंधियों को शामिल किया जाता है।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: विस्तारित परिवार (extended family) वह पारिवारिक संरचना है जिसमें पति-पत्नी और उनके बच्चों के अलावा, दादा-दादी, चाचा-चाची, चचेरे भाई-बहन जैसे अन्य रक्त संबंधी या संबंधित रिश्तेदार एक साथ रहते हैं। यह संरचना अक्सर कृषि समाजों में अधिक प्रचलित होती है, जहां श्रम और संसाधनों को साझा करने की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, नाभिक परिवार (nuclear family) केवल पति, पत्नी और उनके अविवाहित बच्चों तक सीमित होता है।

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    प्रश्न 18: हालिया शोध के अनुसार, चीन में इंटरनेट के उपयोग और प्रजनन अपेक्षाओं (fertility expectations) के बीच संबंध में ‘प्रत्यक्ष सामाजिक असमानता’ (perceived social inequality) की क्या भूमिका है?

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    • (A) इंटरनेट का उपयोग सामाजिक असमानता की धारणा को कम करता है, जिससे प्रजनन अपेक्षाएं बढ़ती हैं।
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    • (B) इंटरनेट का उपयोग सीधे प्रजनन अपेक्षाओं को बढ़ाता है।
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    • (C) प्रत्यक्ष सामाजिक असमानता इंटरनेट के उपयोग और प्रजनन अपेक्षाओं के बीच संबंध को मध्यस्थ करती है।
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    • (D) इंटरनेट का उपयोग और प्रजनन अपेक्षाएं एक-दूसरे से पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
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    सही उत्तर: (C)

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    विस्तृत व्याख्या: एक अनुदैर्ध्य विश्लेषण (longitudinal analysis) से पता चला है कि प्रत्यक्ष सामाजिक असमानता चीन में इंटरनेट के उपयोग और प्रजनन अपेक्षाओं के बीच संबंध को मध्यस्थ करती है। इसका अर्थ है कि इंटरनेट का उपयोग सीधे प्रजनन अपेक्षाओं को प्रभावित नहीं करता है, बल्कि यह व्यक्तियों की सामाजिक असमानता की धारणा को प्रभावित करता है, और यह धारणा फिर उनकी प्रजनन संबंधी योजनाओं और अपेक्षाओं को प्रभावित करती है। यह समाजशास्त्र के समकालीन मुद्दे (contemporary issues) और जनसंख्या समाजशास्त्र (demographic sociology) से संबंधित है।

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    प्रश्न 19: ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) किस बात पर जोर देता है?

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    • (A) सामाजिक संरचनाओं और संस्थाओं की भूमिका।
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    • (B) व्यक्तियों के बीच दैनिक अंतःक्रियाओं में अर्थों के निर्माण पर।
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    • (C) आर्थिक उत्पादन के संबंधों पर।
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    • (D) संघर्ष और शक्ति के वितरण पर।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद एक माइक्रो-स्तरीय समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य है जो व्यक्तियों के बीच दैनिक अंतःक्रियाओं, प्रतीकों और साझा अर्थों पर केंद्रित है। यह मानता है कि समाज व्यक्तियों की अंतःक्रियाओं के माध्यम से निर्मित होता है, और ये अंतःक्रियाएं प्रतीकों (जैसे भाषा, हावभाव) के माध्यम से होती हैं जिन्हें साझा अर्थ दिए जाते हैं। जॉर्ज हर्बर्ट मीड और इरविंग गोफमैन इस परंपरा से जुड़े प्रमुख विचारक हैं।

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    प्रश्न 20: ‘सांस्कृतिक विलंबना’ (cultural lag) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की?

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    • (A) डब्ल्यू.आई. थॉमस
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    • (B) विलियम एफ. ओगबर्न
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    • (C) रॉबर्ट रेडफील्ड
    • \n

    • (D) हरबर्ट ब्लूमर
    • \n

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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: विलियम एफ. ओगबर्न (William F. Ogburn) ने ‘सांस्कृतिक विलंबना’ की अवधारणा प्रस्तुत की। यह तब होता है जब समाज के भौतिक संस्कृति (जैसे प्रौद्योगिकी) में तेजी से परिवर्तन होता है, लेकिन गैर-भौतिक संस्कृति (जैसे मानदंड, मूल्य, कानून) उस परिवर्तन के साथ तालमेल नहीं बिठा पाती। इसके परिणामस्वरूप सामाजिक समस्याएं और तनाव उत्पन्न हो सकते हैं, जब सामाजिक संस्थाएं नई भौतिक वास्तविकताओं के अनुकूल होने में विफल रहती हैं।

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    प्रश्न 21: निम्न- और मध्यम-आय वाले संदर्भों में स्कूल बंद होने के दौरान फोन-आधारित ट्यूटरिंग का संख्यात्मक कौशल (numeracy scores) पर क्या प्रभाव पाया गया?

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    • (A) कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं।
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    • (B) संख्यात्मक कौशल में उल्लेखनीय गिरावट।
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    • (C) संख्यात्मक कौशल में महत्वपूर्ण वृद्धि।
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    • (D) केवल उच्च-आय वाले परिवारों के बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव।
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    सही उत्तर: (C)

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    विस्तृत व्याख्या: अनुदैर्ध्य विश्लेषण (longitudinal analysis) से पता चला है कि स्कूल बंद होने के दौरान निम्न- और मध्यम-आय वाले संदर्भों में फोन-आधारित ट्यूटरिंग ने बच्चों के संख्यात्मक कौशल (गणितीय क्षमताओं) में महत्वपूर्ण वृद्धि की। यह शिक्षा के समाजशास्त्र (sociology of education) और सामाजिक नीति के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है, खासकर आपातकालीन स्थितियों में शिक्षा जारी रखने के तरीकों पर।

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    प्रश्न 22: समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से, ‘धार्मिक विश्वासों’ की जटिल भूमिका किस समकालीन मुद्दे में खोजी जा रही है?

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    • (A) उपभोक्ता व्यवहार पर प्रभाव।
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    • (B) महिलाओं के गर्भपात निर्णयों पर प्रभाव।
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    • (C) राजनीतिक चुनाव परिणामों पर प्रभाव।
    • \n

    • (D) जलवायु परिवर्तन पर जनमत पर प्रभाव।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्री हाल ही में महिलाओं के गर्भपात निर्णयों में मजबूत धार्मिक विश्वासों की जटिल भूमिका की जांच कर रहे हैं। यह एक संवेदनशील और बहुआयामी मुद्दा है जहां व्यक्तिगत नैतिक और धार्मिक विश्वास, सामाजिक मानदंड और कानूनी ढांचे एक दूसरे को काटते हैं। यह धर्म के समाजशास्त्र (sociology of religion) और लिंग समाजशास्त्र (sociology of gender) के बीच के महत्वपूर्ण अंतर्संबंध को दर्शाता है।

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    प्रश्न 23: फार्मासिस्टों द्वारा आपातकालीन गर्भनिरोधक जैसी दवाओं को देने से इनकार करने के व्यावसायिक-अधिकार (professional-rights) संबंधी बहस किस सामाजिक समस्या से जुड़ी है?

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    • (A) आर्थिक असमानता।
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    • (B) व्यावसायिक नैतिकता, व्यक्तिगत विवेक और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के बीच तनाव।
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    • (C) दवाओं की उपलब्धता की कमी।
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    • (D) फार्मास्युटिकल उद्योग में एकाधिकार।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: फार्मासिस्टों द्वारा कुछ दवाओं, जैसे आपातकालीन गर्भनिरोधक या अप्रमाणित COVID-19 उपचारों को देने से इनकार करने से जुड़ी बहस व्यावसायिक नैतिकता (professional ethics), व्यक्तिगत विवेक (personal conscience) और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच (access to healthcare services) के बीच तनाव को दर्शाती है। यह चिकित्सा समाजशास्त्र (sociology of medicine) और व्यावसायिक समाजशास्त्र (sociology of professions) के दायरे में आता है, जहाँ व्यक्तिगत अधिकारों और व्यावसायिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती होती है।

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    प्रश्न 24: विद्वानों के अनुसार, AI के सामाजिक प्रभाव को समझना समाजशास्त्र के भविष्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

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    • (A) AI समाजशास्त्रियों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
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    • (B) AI सामाजिक संरचनाओं और दैनिक जीवन को कैसे नया आकार देता है, इसकी अंतर्दृष्टि के लिए समाजशास्त्रीय जांच की उपेक्षा करना सीमाएं पैदा कर सकता है।
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    • (C) समाजशास्त्र को AI प्रौद्योगिकी विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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    • (D) AI समाजशास्त्र को पूरी तरह से अप्रचलित कर देगा।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: विद्वानों का तर्क है कि AI के सामाजिक प्रभाव को समझना समाजशास्त्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। चेतावनी दी गई है कि समाजशास्त्रीय जांच की उपेक्षा करना इस बात की अंतर्दृष्टि को सीमित कर सकता है कि AI कैसे सामाजिक संरचनाओं, शक्ति संबंधों और दैनिक जीवन को नया आकार देता है। समाजशास्त्र को AI के विकास और अपनाने के सामाजिक परिणामों का विश्लेषण करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है ताकि प्रौद्योगिकी के मानवीय और सामाजिक आयामों को समझा जा सके। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समाजशास्त्र (sociology of science and technology) से संबंधित है।

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    प्रश्न 25: ‘संरचनात्मक प्रकार्यवाद’ (Structural Functionalism) के अनुसार, समाज को कैसे समझा जाता है?

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    • (A) विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच निरंतर संघर्ष के रूप में।
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    • (B) एक प्रणाली के रूप में जिसके विभिन्न भाग एक साथ मिलकर समाज को कार्यशील और स्थिर बनाए रखते हैं।
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    • (C) व्यक्तियों के बीच प्रतीकात्मक अंतःक्रियाओं के एक सेट के रूप में।
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    • (D) सत्ता और दमन के एक साधन के रूप में।
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    सही उत्तर: (B)

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    विस्तृत व्याख्या: संरचनात्मक प्रकार्यवाद (Structural Functionalism) एक प्रमुख समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य है जो समाज को एक जटिल प्रणाली के रूप में देखता है जिसके विभिन्न भाग (जैसे परिवार, शिक्षा, सरकार, धर्म) एक साथ मिलकर समाज को कार्यशील, स्थिर और संतुलित बनाए रखने के लिए कार्य करते हैं। यह समाज में प्रत्येक संरचना के योगदान (कार्यों) और उसके रखरखाव पर जोर देता है। एमाइल दुर्खीम और टैल्कॉट पार्सन्स इसके प्रमुख प्रतिपादक हैं।

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