समाजशास्त्र की वैचारिक गहराई: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष अभ्यास सेट
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सभी समाजशास्त्र के साधकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों का स्वागत है! समाजशास्त्र केवल सिद्धांतों का अध्ययन नहीं है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने की एक दृष्टि है। आज का यह अभ्यास सेट आपकी विश्लेषणात्मक क्षमता को चुनौती देगा और आपको बुनियादी सिद्धांतों से लेकर समकालीन सामाजिक बदलावों तक की गहरी समझ प्रदान करेगा। आइए, अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें और सफलता की ओर एक कदम और बढ़ाएं!
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- अगस्त कॉम्टे ने समाजशास्त्र के अध्ययन के लिए जिस पद्धति का प्रस्ताव दिया था, उसे क्या कहा जाता है?\n
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- (A) ऐतिहासिक पद्धति
- (B) प्रत्यक्षवाद (Positivism)
- (C) व्याख्यात्मक पद्धति (Interpretative Method)
- (D) द्वंद्वात्मक पद्धति
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सही उत्तर: (B) प्रत्यक्षवाद (Positivism)
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\n विस्तृत व्याख्या: अगस्त कॉम्टे, जिन्हें ‘समाजशास्त्र का जनक’ माना जाता है, ने ‘प्रत्यक्षवाद’ का समर्थन किया। उनका मानना था कि समाज का अध्ययन उसी तरह वैज्ञानिक पद्धतियों (अवलोकन, प्रयोग, तुलना) से किया जाना चाहिए जैसे प्राकृतिक विज्ञानों का किया जाता है। विकल्प (C) मैक्स वेबर से संबंधित है और (D) कार्ल मार्क्स के द्वंद्वात्मक भौतिकवाद से।\n
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- एमिल दुर्खीम के अनुसार, जब समाज में नैतिक मानदंडों का अभाव हो जाता है और व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है, तो इस स्थिति को क्या कहा जाता है?\n
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- (A) अलगाव (Alienation)
- (B) सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification)
- (C) एनोमी (Anomie)
- (D) विसंक्रमण (Disorganization)
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सही उत्तर: (C) एनोमी (Anomie)
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\n विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने ‘एनोमी’ शब्द का उपयोग उस स्थिति के लिए किया जहाँ समाज में नियमों या मानदंडों का अभाव होता है, जिससे व्यक्ति मानसिक अस्थिरता का अनुभव करता है। यह अवधारणा उनकी पुस्तक ‘The Division of Labour in Society’ और ‘Suicide’ में महत्वपूर्ण है। ‘अलगाव’ (A) मार्क्स की अवधारणा है।\n
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- मैक्स वेबर ने ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) की अवधारणा क्यों विकसित की?\n
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- (A) समाज का पूर्ण विवरण देने के लिए
- (B) सामाजिक वास्तविकता को मापने के लिए एक वैचारिक उपकरण के रूप में
- (C) सामाजिक कानूनों को खोजने के लिए
- (D) केवल ऐतिहासिक घटनाओं का विश्लेषण करने के लिए
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सही उत्तर: (B) सामाजिक वास्तविकता को मापने के लिए एक वैचारिक उपकरण के रूप में
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\n विस्तृत व्याख्या: वेबर के अनुसार, ‘आदर्श प्रारूप’ कोई वास्तविक वास्तविकता नहीं है, बल्कि एक मानसिक निर्माण है जो समाजशास्त्री को वास्तविकता की तुलना करने और विश्लेषण करने में मदद करता है। यह तुलनात्मक विश्लेषण का एक साधन है, न कि समाज का सटीक दर्पण।\n
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- कार्ल मार्क्स के ‘अलगाव’ (Alienation) के सिद्धांत के अनुसार, श्रमिक सबसे पहले किससे अलग होता है?\n
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- (A) समाज से
- (B) अन्य श्रमिकों से
- (C) अपने उत्पाद (उत्पादन की वस्तु) से
- (D) स्वयं के मानवीय स्वभाव से
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सही उत्तर: (C) अपने उत्पाद (उत्पादन की वस्तु) से
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\n विस्तृत व्याख्या: मार्क्स के अनुसार, पूंजीवाद में श्रमिक अपने द्वारा बनाए गए उत्पाद पर नियंत्रण खो देता है, जिससे वह उत्पाद से अलग हो जाता है। इसके बाद वह उत्पादन की प्रक्रिया, साथी श्रमिकों और अंततः अपने ‘मानवीय स्वभाव’ (Species-being) से अलग हो जाता है।\n
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- टैलकोट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ का क्या अर्थ है?\n
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- (A) Leadership (नेतृत्व)
- (B) Latency (प्रसुप्तता/तनाव प्रबंधन)
- (C) Legalization (वैधीकरण)
- (D) Logic (तर्क)
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सही उत्तर: (B) Latency (प्रसुप्तता/तनाव प्रबंधन)
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\n विस्तृत व्याख्या: पार्सन्स का AGIL मॉडल सामाजिक प्रणाली के अस्तित्व के लिए चार अनिवार्य कार्य बताता है: Adaptation (अनुकूलन), Goal Attainment (लक्ष्य प्राप्ति), Integration (एकीकरण) और Latency (प्रसुप्तता)। ‘Latency’ का संबंध सांस्कृतिक मूल्यों के रखरखाव और तनाव प्रबंधन से है।\n
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- रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अप्रत्यक्ष कार्य’ (Latent Function) के बीच क्या अंतर बताया है?\n
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- (A) प्रकट कार्य अनपेक्षित होते हैं, अप्रत्यक्ष कार्य अपेक्षित होते हैं।
- (B) प्रकट कार्य इच्छित और पहचाने गए होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कार्य अनपेक्षित और अनजाने होते हैं।
- (C) दोनों एक ही हैं, केवल नाम अलग हैं।
- (D) प्रकट कार्य केवल व्यक्तिगत होते हैं और अप्रत्यक्ष कार्य सामाजिक।
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सही उत्तर: (B) प्रकट कार्य इच्छित और पहचाने गए होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कार्य अनपेक्षित और अनजाने होते हैं।
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\n विस्तृत व्याख्या: मर्टन के अनुसार, ‘प्रकट कार्य’ वे परिणाम हैं जिनके लिए कोई संस्था बनाई जाती है (जैसे स्कूल का कार्य शिक्षा देना)। ‘अप्रत्यक्ष कार्य’ वे परिणाम हैं जो अनजाने में निकलते हैं (जैसे स्कूल में सामाजिक नेटवर्क बनाना)।\n
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- जॉर्ज हरबर्ट मीड के अनुसार, ‘स्व’ (Self) का विकास कैसे होता है?\n
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- (A) केवल जैविक विरासत से
- (B) सामाजिक अंतःक्रिया और प्रतीकात्मक संचार के माध्यम से
- (C) केवल माता-पिता के अनुशासन से
- (D) एकांत चिंतन के द्वारा
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सही उत्तर: (B) सामाजिक अंतःक्रिया और प्रतीकात्मक संचार के माध्यम से
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\n विस्तृत व्याख्या: मीड ने ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि व्यक्ति दूसरों की नजरों से खुद को देखना सीखता है, जिसे उन्होंने ‘I’ और ‘Me’ के रूप में वर्णित किया है।\n
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- एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) जाति व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करना
- (B) निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाकर सामाजिक स्थिति ऊपर उठाना
- (C) पश्चिमी संस्कृति को भारतीय समाज में लागू करना
- (D) केवल धार्मिक ग्रंथों का अनुवाद करना
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सही उत्तर: (B) निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाकर सामाजिक स्थिति ऊपर उठाना
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\n विस्तृत व्याख्या: श्रीनिवास ने पाया कि भारत में कुछ निम्न जातियां उच्च जातियों (विशेषकर ब्राह्मणों) के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों और विचारधारा को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति सुधारने का प्रयास करती हैं।\n
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- निम्नलिखित में से कौन सा ‘प्रमाणीकरण’ (Triangulation) अनुसंधान पद्धति का उदाहरण है?\n
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- (A) केवल एक ही सर्वेक्षण का उपयोग करना
- (B) किसी शोध में कई अलग-अलग डेटा स्रोतों या विधियों (जैसे साक्षात्कार + सर्वेक्षण + अवलोकन) का उपयोग करना
- (C) केवल पुस्तकालय के आंकड़ों पर निर्भर रहना
- (D) बिना किसी योजना के डेटा एकत्र करना
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सही उत्तर: (B) किसी शोध में कई अलग-अलग डेटा स्रोतों या विधियों का उपयोग करना
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\n विस्तृत व्याख्या: ट्राइएंगुलेशन का उद्देश्य शोध की वैधता और विश्वसनीयता बढ़ाना है। जब एक ही सामाजिक घटना को अलग-अलग कोणों (विधियों) से जांचा जाता है, तो परिणाम अधिक सटीक होते हैं।\n
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- समकालीन डिजिटल समाजशास्त्र के संदर्भ में, ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) से क्या तात्पर्य है?\n
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- (A) इंटरनेट का उपयोग करने वाले सभी लोग एक ही जाति के होते हैं।
- (B) डिजिटल संसाधनों, शिक्षा और तकनीकी पहुंच में मौजूदा सामाजिक असमानताओं और जातिगत भेदभाव का बने रहना या नए रूप में प्रकट होना
- (C) जाति व्यवस्था का पूरी तरह से खत्म हो जाना
- (D) केवल उच्च जातियों का सोशल मीडिया का उपयोग करना
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सही उत्तर: (B) डिजिटल संसाधनों, शिक्षा और तकनीकी पहुंच में मौजूदा सामाजिक असमानताओं और जातिगत भेदभाव का बने रहना या नए रूप में प्रकट होना
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\n विस्तृत व्याख्या: यह अवधारणा बताती है कि कैसे पारंपरिक सामाजिक स्तरीकरण डिजिटल युग में भी ‘डिजिटल डिवाइड’ के रूप में मौजूद है, जहाँ हाशिए पर मौजूद समुदायों की तकनीकी पहुंच और उपयोग सीमित है।\n
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- शहरी समाजशास्त्र के संदर्भ में, ‘शिकागो स्कूल’ (Chicago School) ने किस बात पर सबसे अधिक जोर दिया?\n
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- (A) ग्रामीण जीवन की सादगी पर
- (B) शहरी पारिस्थितिकी (Urban Ecology) और स्थानिक संरचनाओं पर
- (C) केवल औद्योगिक क्रांति के आर्थिक पहलुओं पर
- (D) धार्मिक संस्थाओं के प्रभाव पर
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सही उत्तर: (B) शहरी पारिस्थितिकी (Urban Ecology) और स्थानिक संरचनाओं पर
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\n विस्तृत व्याख्या: शिकागो स्कूल ने शहरों को एक ‘सामाजिक प्रयोगशाला’ के रूप में देखा और यह अध्ययन किया कि कैसे शहरी स्थान (जैसे स्लम, व्यावसायिक क्षेत्र) सामाजिक व्यवहार और समूहों के वितरण को प्रभावित करते हैं।\n
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- नृवंशविज्ञान (Ethnography) अनुसंधान की मुख्य विशेषता क्या है?\n
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- (A) बड़े पैमाने पर सांख्यिकीय सर्वेक्षण
- (B) प्रयोगशाला में नियंत्रित प्रयोग
- (C) किसी संस्कृति या समूह के भीतर गहराई से रहकर सहभागी अवलोकन (Participant Observation) करना
- (D) केवल ऐतिहासिक दस्तावेजों का विश्लेषण करना
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सही उत्तर: (C) किसी संस्कृति या समूह के भीतर गहराई से रहकर सहभागी अवलोकन करना
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\n विस्तृत व्याख्या: नृवंशविज्ञान एक गुणात्मक पद्धति है जिसमें शोधकर्ता अध्ययन समूह के साथ समय बिताता है ताकि उनके जीवन के अनुभवों और सांस्कृतिक बारीकियों को उनके अपने नजरिए से समझा जा सके।\n
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- समकालीन शोधों के अनुसार, प्रारंभिक सोशल मीडिया उपयोग का स्कूली परिणामों पर क्या प्रभाव देखा गया है?\n
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- (A) इससे शैक्षणिक प्रदर्शन में हमेशा सुधार होता है।
- (B) इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- (C) अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग से शैक्षणिक परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- (D) इससे केवल रचनात्मकता बढ़ती है।
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सही उत्तर: (C) अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग से शैक्षणिक परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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\n विस्तृत व्याख्या: हालिया समाजशास्त्रीय और मनोवैज्ञानिक अध्ययनों (जैसे Nature में प्रकाशित) ने संकेत दिया है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग एकाग्रता में कमी और नींद के पैटर्न में बदलाव के कारण स्कूली प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।\n
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- समाजशास्त्र में ‘शक्ति’ (Power) की वेबरियन परिभाषा क्या है?\n
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- (A) दूसरों को कानूनी रूप से नियंत्रित करने की क्षमता
- (B) किसी व्यक्ति की वह क्षमता जिससे वह दूसरों के विरोध के बावजूद अपनी इच्छा थोप सके
- (C) केवल शारीरिक बल का प्रयोग करना
- (D) समाज के सभी सदस्यों की सहमति प्राप्त करना
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सही उत्तर: (B) किसी व्यक्ति की वह क्षमता जिससे वह दूसरों के विरोध के बावजूद अपनी इच्छा थोप सके
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\n विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने शक्ति को एक ऐसी क्षमता के रूप में परिभाषित किया जहाँ व्यक्ति दूसरों के प्रतिरोध के बावजूद अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने इसे ‘प्राधिकार’ (Authority) से अलग बताया, जो वैध शक्ति होती है।\n
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- निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) का उदाहरण है?\n
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- (A) एक राजनीतिक पार्टी
- (B) एक पेशेवर संघ (Professional Association)
- (C) परिवार
- (D) एक बड़ी कंपनी के कर्मचारी
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सही उत्तर: (C) परिवार
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\n विस्तृत व्याख्या: चार्ल्स कूले के अनुसार, प्राथमिक समूह वे होते हैं जिनमें सदस्यों के बीच घनिष्ठ, व्यक्तिगत और स्थायी संबंध होते हैं (जैसे परिवार, मित्र)। अन्य विकल्प ‘द्वितीयक समूहों’ (Secondary Groups) के उदाहरण हैं।\n
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- ‘सामाजिक स्तरीकरण’ (Social Stratification) का अर्थ क्या है?\n
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- (A) समाज के सभी लोगों का समान होना
- (B) समाज का विभिन्न श्रेणियों या स्तरों (जैसे जाति, वर्ग) में विभाजित होना
- (C) केवल आर्थिक रूप से गरीब लोगों का समूह
- (D) समाज में केवल धार्मिक विभाजन का होना
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सही उत्तर: (B) समाज का विभिन्न श्रेणियों या स्तरों में विभाजित होना
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\n विस्तृत व्याख्या: स्तरीकरण एक ऐसी प्रणाली है जिसमें समाज के लोगों को उनके संसाधनों, शक्ति और प्रतिष्ठा के आधार पर एक पदानुक्रम (Hierarchy) में व्यवस्थित किया जाता है।\n
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- समकालीन मुद्दों के संदर्भ में, ‘AI-जनित विजुअल्स’ और ‘जेंडर’ के बीच संबंध का समाजशास्त्रीय अध्ययन क्या दर्शाता है?\n
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- (A) AI पूरी तरह से निष्पक्ष है।
- (B) AI अक्सर मौजूदा सामाजिक लैंगिक रूढ़ियों (Gender Stereotypes) को दोहराता और मजबूत करता है।
- (C) AI ने लैंगिक भेदभाव को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
- (D) AI केवल पुरुषों के प्रति पक्षपाती है।
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सही उत्तर: (B) AI अक्सर मौजूदा सामाजिक लैंगिक रूढ़ियों को दोहराता और मजबूत करता है।
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\n विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्रीय शोध यह बताते हैं कि AI एल्गोरिदम उसी डेटा पर प्रशिक्षित होते हैं जो मानव समाज ने बनाया है। यदि डेटा में रूढ़ियाँ हैं (जैसे घरेलू काम महिलाओं का है), तो AI उन रूढ़ियों को ही परिणामों में प्रदर्शित करता है।\n
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- ‘पूंजी’ (Capital) की अवधारणा को पियरे बोर्दियु (Pierre Bourdieu) ने किस प्रकार विस्तारित किया?\n
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- (A) केवल वित्तीय पूंजी के रूप में
- (B) केवल सांस्कृतिक और सामाजिक पूंजी के रूप में
- (C) आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और प्रतीकात्मक पूंजी के रूप में
- (D) केवल राजनीतिक शक्ति के रूप में
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सही उत्तर: (C) आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और प्रतीकात्मक पूंजी के रूप में
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\n विस्तृत व्याख्या: बोर्दियु ने तर्क दिया कि केवल पैसा (आर्थिक पूंजी) ही प्रभाव नहीं डालता, बल्कि शिक्षा/ज्ञान (सांस्कृतिक पूंजी), नेटवर्क (सामाजिक पूंजी) और प्रतिष्ठा (प्रतीकात्मक पूंजी) भी सामाजिक स्थिति निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।\n
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- भारतीय समाज में ‘जाति’ (Caste) और ‘वर्ग’ (Class) के बीच मुख्य अंतर क्या है?\n
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- (A) जाति अर्जित होती है, वर्ग जन्मजात होता है।
- (B) जाति जन्म पर आधारित एक बंद प्रणाली है, जबकि वर्ग आर्थिक स्थिति पर आधारित एक खुली प्रणाली है।
- (C) वर्ग केवल ग्रामीण क्षेत्रों में होता है, जाति केवल शहरी।
- (D) दोनों के बीच कोई अंतर नहीं है।
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सही उत्तर: (B) जाति जन्म पर आधारित एक बंद प्रणाली है, जबकि वर्ग आर्थिक स्थिति पर आधारित एक खुली प्रणाली है।
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\n विस्तृत व्याख्या: जाति में व्यक्ति की स्थिति जन्म से तय होती है और बदली नहीं जा सकती (Closed System), जबकि वर्ग में व्यक्ति अपनी शिक्षा और आर्थिक सफलता से अपना वर्ग बदल सकता है (Open System)।\n
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- ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) का मुख्य केंद्र क्या है?\n
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- (A) व्यापक सामाजिक संरचनाएं और कानून
- (B) व्यक्तिगत स्तर पर अर्थ, संकेत और प्रतीकों के माध्यम से होने वाली अंतःक्रिया
- (C) केवल आर्थिक उत्पादन के साधन
- (D) समाज का जैविक विकास
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सही उत्तर: (B) व्यक्तिगत स्तर पर अर्थ, संकेत और प्रतीकों के माध्यम से होने वाली अंतःक्रिया
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\n विस्तृत व्याख्या: यह सूक्ष्म-समाजशास्त्र (Micro-Sociology) का दृष्टिकोण है। यह मानता है कि समाज स्थिर नहीं है, बल्कि लोगों के बीच निरंतर होने वाली अंतःक्रियाओं और उनके द्वारा दिए गए अर्थों से बनता है।\n
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- ‘विभेदक प्रजनन’ (Differential Fertility) का समाजशास्त्रीय अध्ययन आमतौर पर किस विषय से संबंधित होता है?\n
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- (A) केवल जीव विज्ञान
- (B) जनसंख्या समाजशास्त्र (Population Sociology) और सामाजिक स्तरीकरण
- (C) केवल ग्रामीण विकास
- (D) औद्योगिक मनोविज्ञान
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सही उत्तर: (B) जनसंख्या समाजशास्त्र और सामाजिक स्तरीकरण
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\n विस्तृत व्याख्या: यह इस बात का अध्ययन करता है कि कैसे अलग-अलग सामाजिक समूहों (जैसे आय, शिक्षा या जाति के आधार पर) में जन्म दर अलग-अलग होती है और इसके पीछे सामाजिक कारण क्या हैं।\n
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- ‘सेकुलराइजेशन’ (Secularization) या धर्मनिरपेक्षीकरण का अर्थ क्या है?\n
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- (A) धर्म का पूरी तरह समाप्त हो जाना
- (B) समाज के सार्वजनिक जीवन और संस्थानों में धार्मिक प्रभाव का कम होना
- (C) सभी धर्मों का एक हो जाना
- (D) केवल विज्ञान की पूजा करना
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सही उत्तर: (B) समाज के सार्वजनिक जीवन और संस्थानों में धार्मिक प्रभाव का कम होना
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\n विस्तृत व्याख्या: धर्मनिरपेक्षीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें धर्म का प्रभाव व्यक्ति के निजी जीवन तक सीमित हो जाता है और राजनीति, कानून एवं शिक्षा जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों में तर्क और विज्ञान की प्रधानता बढ़ जाती है।\n
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- समकालीन लोकतांत्रिक विमर्श में ‘डिलीबरेटिव मिनी-पब्लिक्स’ (Deliberative Mini-publics) का उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) चुनाव में धांधली करना
- (B) नागरिकों के एक छोटे, प्रतिनिधि समूह को गहन चर्चा के माध्यम से नीतिगत सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित करना
- (C) केवल विशेषज्ञों की राय लेना
- (D) सोशल मीडिया पर पोल आयोजित करना
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सही उत्तर: (B) नागरिकों के एक छोटे, प्रतिनिधि समूह को गहन चर्चा के माध्यम से नीतिगत सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित करना
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\n विस्तृत व्याख्या: यह एक लोकतांत्रिक नवाचार है जहाँ आम नागरिकों को तथ्य-आधारित चर्चा में शामिल किया जाता है ताकि जटिल सामाजिक मुद्दों पर सामूहिक सहमति बनाई जा सके, जो केवल मतदान से संभव नहीं होता।\n
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- ‘सांस्कृतिक अंतराल’ (Cultural Lag) की अवधारणा किसने दी थी?\n
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- (A) विलियम ओगबर्न (William Ogburn)
- (B) हर्बर्ट स्पेंसर
- (C) अगस्त कॉम्टे
- (D) एमिल दुर्खीम
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सही उत्तर: (A) विलियम ओगबर्न (William Ogburn)
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\n विस्तृत व्याख्या: ओगबर्न के अनुसार, जब भौतिक संस्कृति (तकनीक) तेजी से बदलती है, लेकिन गैर-भौतिक संस्कृति (मूल्य, विश्वास, नियम) उसी गति से नहीं बदल पाती, तो उनके बीच एक अंतराल पैदा होता है, जिसे ‘सांस्कृतिक अंतराल’ कहा जाता है।\n
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- ग्रामीण समाजशास्त्र में ‘ग्राम अध्ययन’ (Village Studies) के अग्रदूत के रूप में किसे जाना जाता है?\n
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- (A) कार्ल मार्क्स
- (B) एम.एन. श्रीनिवास और एस.सी. दुबे
- (C) मैक्स वेबर
- (D) टैलकोट पार्सन्स
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सही उत्तर: (B) एम.एन. श्रीनिवास और एस.सी. दुबे
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\n विस्तृत व्याख्या: भारत में ग्रामीण समाजशास्त्र को समृद्ध करने में श्रीनिवास (रामपुरा गाँव का अध्ययन) और एस.सी. दुबे का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने गाँव को एक इकाई मानकर वहां की सामाजिक संरचना और जाति संबंधों का गहन अध्ययन किया।\n
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- ‘प्रोफेशनल अथॉरिटी’ (Professional Authority) का समाजशास्त्रीय अर्थ क्या है, विशेषकर मीडिया के संदर्भ में?\n
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- (A) केवल संपादक की शक्ति
- (B) उस विशेषज्ञता और मान्यता पर आधारित शक्ति जिससे एक पेशेवर व्यक्ति यह तय करता है कि क्या ‘सत्य’ है या ‘महत्वपूर्ण’ है
- (C) सरकार द्वारा दी गई कानूनी शक्ति
- (D) सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की संख्या
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सही उत्तर: (B) उस विशेषज्ञता और मान्यता पर आधारित शक्ति जिससे एक पेशेवर व्यक्ति यह तय करता है कि क्या ‘सत्य’ है या ‘महत्वपूर्ण’ है
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\n विस्तृत व्याख्या: यह अवधारणा बताती है कि कैसे पत्रकार या विशेषज्ञ अपनी ट्रेनिंग और संस्थागत स्थिति का उपयोग करके सूचनाओं को फिल्टर करते हैं और समाज के लिए ‘एजेंडा’ सेट करते हैं।\n
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निष्कर्ष: आशा है कि यह अभ्यास सेट आपकी तैयारी में मददगार साबित होगा। याद रखें, समाजशास्त्र केवल रटने का विषय नहीं है, बल्कि अपने आसपास की दुनिया को एक नए दृष्टिकोण से देखने की कला है। निरंतर अभ्यास और विश्लेषणात्मक सोच ही आपको सफलता दिलाएगी। पढ़ते रहें, सोचते रहें!
सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, सही मार्गदर्शन से मिलती है। हमारे सभी विषयों के कम्पलीट नोट्स, G.K. बेसिक कोर्स, और करियर गाइडेंस बुक के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।