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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

समाजशास्त्र के छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए, अवधारणात्मक स्पष्टता सफलता की कुंजी है। यह दैनिक क्विज़ आपको अपनी समझ का परीक्षण करने और गहन विश्लेषण कौशल विकसित करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रसिद्ध विचारकों से लेकर समकालीन सामाजिक मुद्दों तक, यह अभ्यास सेट आपके ज्ञान को चुनौती देगा और आपको अपनी तैयारी को मजबूत करने में मदद करेगा। क्या आप इस बौद्धिक चुनौती के लिए तैयार हैं?


  1. प्रश्न 1: एमाइल दुर्खीम के अनुसार, समाज में ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब:

    1. सामाजिक नियम स्पष्ट और सुदृढ़ होते हैं।
    2. व्यक्ति सामाजिक मानदंडों का पूरी तरह से पालन करते हैं।
    3. समाज में मानदंडों और नैतिक दिशा-निर्देशों का अभाव होता है।
    4. सामाजिक एकता बहुत अधिक मजबूत होती है।

    सही उत्तर: c)

    विस्तृत व्याख्या: ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा एमाइल दुर्खीम द्वारा विकसित की गई थी, विशेषकर उनकी पुस्तक "आत्महत्या" (Suicide) में। दुर्खीम के अनुसार, एनोमी एक ऐसी सामाजिक स्थिति है जहाँ सामाजिक मानदंड, नियम और नैतिक दिशा-निर्देश कमजोर या अनुपस्थित हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों को यह समझ नहीं आता कि उनसे क्या अपेक्षित है। यह सामाजिक नियंत्रण में कमी लाती है और व्यक्तियों में दिशाहीनता और अनिश्चितता की भावना पैदा करती है, जो अक्सर आत्महत्या जैसी सामाजिक समस्याओं का कारण बनती है। विकल्प a और b गलत हैं क्योंकि वे एनोमी के विपरीत स्थिति का वर्णन करते हैं, जबकि विकल्प d सामाजिक एकता के एक अलग पहलू, जैसे परोपकारी आत्महत्या से जुड़ा हो सकता है, लेकिन सीधे तौर पर एनोमी की परिभाषा नहीं है।

  2. प्रश्न 2: कार्ल मार्क्स के ‘अलगाव’ (Alienation) के सिद्धांत के अनुसार, पूंजीवादी समाज में श्रमिक किससे अलगाव का अनुभव करते हैं?

    1. अपने उत्पाद से
    2. अपनी श्रम प्रक्रिया से
    3. अपनी प्रजाति-सत्ता (species-being) से
    4. उपरोक्त सभी से

    सही उत्तर: d)

    विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने अपनी पुस्तक "1844 के आर्थिक और दार्शनिक पांडुलिपियां" (Economic and Philosophic Manuscripts of 1844) में ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा का विस्तार से वर्णन किया है। मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में श्रमिक चार मुख्य तरीकों से अलगाव का अनुभव करते हैं:

    • अपने उत्पाद से (from the product of their labor): श्रमिक अपने द्वारा बनाए गए उत्पाद पर कोई नियंत्रण नहीं रखते, और वह उत्पाद उनके लिए एक बाहरी शक्ति बन जाता है।
    • अपनी श्रम प्रक्रिया से (from the act of production/labor process): श्रमिक को श्रम एक थोपी हुई, बाहरी गतिविधि लगती है, जो उनकी अपनी इच्छा से नहीं होती।
    • अपनी प्रजाति-सत्ता से (from their species-being): मनुष्य की रचनात्मक और सामाजिक प्रकृति नष्ट हो जाती है, और वे केवल उत्पादन के साधन बन जाते हैं।
    • अन्य मनुष्यों से (from other human beings): पूंजीवादी व्यवस्था श्रमिकों को एक-दूसरे से और पूंजीपतियों से अलग करती है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा और शोषण संबंधों को परिभाषित करते हैं।

    इसलिए, उपरोक्त सभी विकल्प सही हैं क्योंकि ये सभी मार्क्स के अलगाव के विभिन्न आयाम हैं।

  3. प्रश्न 3: मैक्स वेबर ने ‘सामाजिक क्रिया’ (Social Action) के कितने आदर्श प्रकार (Ideal Types) बताए हैं?

    1. दो
    2. तीन
    3. चार
    4. पांच

    सही उत्तर: c)

    विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने अपनी समाजशास्त्रीय पद्धति के हिस्से के रूप में ‘सामाजिक क्रिया’ (Social Action) के चार आदर्श प्रकारों का वर्गीकरण किया है। ये प्रकार हैं:

    1. लक्ष्य-तार्किक क्रिया (Zweckrational Action): लक्ष्य प्राप्त करने के लिए साधनों और परिणामों का तर्कसंगत मूल्यांकन।
    2. मूल्य-तार्किक क्रिया (Wertrational Action): किसी विशिष्ट नैतिक, सौंदर्यवादी, धार्मिक या अन्य मूल्य के प्रति निष्ठा के आधार पर की गई क्रिया, भले ही परिणाम कुछ भी हों।
    3. भावात्मक क्रिया (Affectual Action): भावनाओं या आवेगों द्वारा निर्धारित क्रिया।
    4. परंपरागत क्रिया (Traditional Action): आदतों, रीति-रिवाजों और स्थापित परंपराओं द्वारा निर्धारित क्रिया।

    इन आदर्श प्रकारों का उपयोग सामाजिक घटनाओं का विश्लेषण और तुलना करने के लिए एक विश्लेषणात्मक उपकरण के रूप में किया जाता है।

  4. प्रश्न 4: सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) का सबसे कठोर रूप कौन सा है जहाँ व्यक्तियों की स्थिति जन्म से निर्धारित होती है और उसमें परिवर्तन की बहुत कम संभावना होती है?

    1. वर्ग (Class)
    2. जाति (Caste)
    3. संपत्ति (Estate)
    4. दासता (Slavery)

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: सामाजिक स्तरीकरण समाज में व्यक्तियों या समूहों के पदानुक्रमित व्यवस्था को संदर्भित करता है। ‘जाति’ (Caste) सामाजिक स्तरीकरण का एक अत्यंत कठोर और बंद रूप है, विशेषकर भारतीय संदर्भ में। जाति व्यवस्था में, व्यक्ति की सामाजिक स्थिति जन्म से निर्धारित होती है, और एक जाति से दूसरी जाति में गतिशीलता लगभग असंभव होती है। व्यवसाय, विवाह और सामाजिक संपर्क जैसी गतिविधियाँ जाति के मानदंडों द्वारा सख्ती से विनियमित होती हैं। जबकि ‘दासता’ (Slavery) भी कठोर है, यह कानूनी स्वामित्व पर आधारित है और इसमें (ऐतिहासिक रूप से कुछ मामलों में) मुक्ति की संभावना हो सकती है। ‘वर्ग’ (Class) एक अधिक खुला स्तरीकरण प्रणाली है जहाँ गतिशीलता संभव है, और ‘संपत्ति’ (Estate) मध्यकालीन सामंती समाज में पाया जाने वाला एक स्तरीकरण रूप था जो जन्म और कानूनी अधिकारों पर आधारित था, लेकिन जाति जितना कठोर नहीं था।

  5. प्रश्न 5: भारत में जाति व्यवस्था के अध्ययन में ‘प्रभु जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा किसने प्रस्तुत की?

    1. एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas)
    2. जी.एस. घुरिये (G.S. Ghurye)
    3. लुई ड्यूमोंट (Louis Dumont)
    4. आंद्रे बेटाई (Andre Beteille)

    सही उत्तर: a)

    विस्तृत व्याख्या: ‘प्रभु जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा प्रसिद्ध भारतीय समाजशास्त्री एम.एन. श्रीनिवास ने दी थी। उन्होंने अपनी पुस्तक "द रिमेम्बर्ड विलेज" (The Remembered Village) में मैसूर के रामपुरा गांव के अपने अध्ययन के आधार पर इस अवधारणा को विकसित किया। एक प्रभु जाति वह जाति होती है जिसके पास एक क्षेत्र में संख्यात्मक शक्ति, आर्थिक शक्ति (भूमि स्वामित्व), और राजनीतिक शक्ति होती है, और जो पारंपरिक रूप से उच्च कर्मकांडी स्थिति (कभी-कभी) रखती है। ये कारक मिलकर उन्हें स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक जीवन में प्रमुख भूमिका निभाने में सक्षम बनाते हैं। श्रीनिवास ने यह भी बताया कि कैसे प्रभु जाति ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

  6. प्रश्न 6: समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘प्रतिभागी अवलोकन’ (Participant Observation) का मुख्य लाभ क्या है?

    1. बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह की अनुमति देता है।
    2. संख्यात्मक डेटा का विश्लेषण करना आसान बनाता है।
    3. शोधकर्ता को समूह के अंदर से गहरी, आंतरिक जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है।
    4. प्रयोगों को नियंत्रित करने में आसानी प्रदान करता है।

    सही उत्तर: c)

    विस्तृत व्याख्या: ‘प्रतिभागी अवलोकन’ (Participant Observation) एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जहाँ शोधकर्ता उस समूह या समुदाय की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता है जिसका वे अध्ययन कर रहे हैं। इसका मुख्य लाभ यह है कि यह शोधकर्ता को समूह के सदस्यों के दृष्टिकोण, व्यवहार, मानदंडों और मूल्यों की गहरी और आंतरिक समझ (empathetic understanding) प्राप्त करने में मदद करता है। शोधकर्ता ‘अंदरूनी’ दृष्टिकोण से सामाजिक वास्तविकता को अनुभव करता है। अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि सहभागी अवलोकन आमतौर पर बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह के लिए उपयुक्त नहीं होता (विकल्प a), यह गुणात्मक होता है न कि मात्रात्मक (विकल्प b), और यह नियंत्रित प्रयोगों की बजाय प्राकृतिक सेटिंग्स में होता है (विकल्प d)।

  7. प्रश्न 7: ‘एकीकृत परिवार’ (Conjugal Family) की अवधारणा किससे संबंधित है?

    1. कई पीढ़ियों के सदस्य एक साथ रहते हैं।
    2. पति, पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं।
    3. एक ही छत के नीचे कई विवाहित जोड़े रहते हैं।
    4. रक्त संबंधियों का एक बड़ा समूह शामिल होता है।

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: ‘एकीकृत परिवार’ (Conjugal Family) या ‘नाभिकीय परिवार’ (Nuclear Family) एक प्रकार का परिवार है जिसमें केवल पति, पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं। यह आधुनिक औद्योगिक समाजों में अधिक प्रचलित है जहाँ भौगोलिक और व्यावसायिक गतिशीलता अधिक होती है। यह ‘विस्तारित परिवार’ (Extended Family) के विपरीत है जिसमें कई पीढ़ियों के सदस्य और/या कई विवाहित जोड़े एक साथ रहते हैं। विकल्प a, c और d विस्तारित परिवार या संयुक्त परिवार (Joint Family) के विभिन्न रूपों का वर्णन करते हैं।

  8. प्रश्न 8: अर्ली रसेल हॉचचाइल्ड (Arlie Russell Hochschild) ने ‘भावनात्मक श्रम’ (Emotional Labor) की अवधारणा किस संदर्भ में विकसित की?

    1. औद्योगिक श्रमिकों के शारीरिक श्रम का अध्ययन करते हुए।
    2. सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों द्वारा अपनी भावनाओं के प्रबंधन का विश्लेषण करते हुए।
    3. बच्चों के भावनात्मक विकास का अध्ययन करते हुए।
    4. ग्रामीण समाजों में पारंपरिक व्यवसायों का अध्ययन करते हुए।

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: अर्ली रसेल हॉचचाइल्ड ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "द मैनेज्ड हार्ट: कमर्शियलाइजेशन ऑफ ह्यूमन फीलिंग" (The Managed Heart: Commercialization of Human Feeling) में ‘भावनात्मक श्रम’ (Emotional Labor) की अवधारणा विकसित की। यह अवधारणा उन नौकरियों से संबंधित है जहाँ कर्मचारियों को अपनी भावनाओं को प्रबंधित करने और प्रदर्शन करने की आवश्यकता होती है ताकि संगठन द्वारा वांछित एक विशेष भावनात्मक स्थिति (जैसे मित्रता, सहानुभूति, उत्साह) को ग्राहकों या सहकर्मियों के सामने प्रस्तुत किया जा सके। यह विशेष रूप से सेवा क्षेत्र (जैसे एयर होस्टेस, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि) में प्रचलित है, जहाँ भावनात्मक प्रदर्शन नौकरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

  9. प्रश्न 9: तीव्र शहरीकरण का पारंपरिक kinship networks (नातेदारी नेटवर्क) पर क्या प्रभाव पड़ने की संभावना है, जैसा कि चीन के शहरीकरण वाले गांवों पर शोध में देखा गया है?

    1. kinship networks और मजबूत होते हैं।
    2. kinship networks पूरी तरह से टूट जाते हैं।
    3. kinship networks का स्वरूप और कार्य बदल जाते हैं, अक्सर कम औपचारिक और अधिक लचीले हो जाते हैं।
    4. kinship networks केवल आर्थिक संबंधों तक सीमित हो जाते हैं।

    सही उत्तर: c)

    विस्तृत व्याख्या: तीव्र शहरीकरण अक्सर पारंपरिक सामाजिक संरचनाओं को चुनौती देता है, जिसमें kinship networks भी शामिल हैं। जैसा कि चीन के शहरीकरण वाले गांवों पर शोध में उजागर किया गया है, शहरीकरण के कारण लोग बेहतर अवसरों की तलाश में गांव छोड़ते हैं, जिससे भौगोलिक दूरी बढ़ती है। हालांकि kinship networks पूरी तरह से नहीं टूटते (विकल्प b गलत), उनका स्वरूप और कार्य बदल जाता है। वे अक्सर कम औपचारिक, अधिक लचीले और शहरी परिवेश के अनुकूल बन जाते हैं। परिवार के सदस्य नए शहरी संदर्भों में एक-दूसरे का समर्थन करने के लिए नए तरीके ढूंढते हैं, जैसे कि सूचना साझा करना, बच्चों की देखभाल, या नए शहर में बसने में मदद करना। यह अनुकूलन क्षमता पारंपरिक मजबूत बंधन को लचीले समर्थन नेटवर्क में बदल देती है। विकल्प a और d स्थिति को गलत तरीके से दर्शाते हैं।

  10. प्रश्न 10: बाढ़-प्रेरित विस्थापन (flood-induced displacement) का सामना करने वाले समुदायों के लिए सबसे प्रभावी दीर्घकालिक coping strategy (सामना करने की रणनीति) में से एक क्या है?

    1. सरकार पर पूरी तरह निर्भर रहना।
    2. अस्थायी आश्रयों में अनिश्चित काल तक रहना।
    3. समुदाय-आधारित आपदा तैयारी और लचीलापन निर्माण।
    4. व्यक्तिगत रूप से समस्याओं का सामना करना।

    सही उत्तर: c)

    विस्तृत व्याख्या: बाढ़-प्रेरित विस्थापन एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिसके लिए प्रभावी coping strategies की आवश्यकता होती है। दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति व्यक्तिगत प्रयासों या केवल सरकारी निर्भरता से आगे बढ़कर सामुदायिक स्तर पर होती है। ‘समुदाय-आधारित आपदा तैयारी और लचीलापन निर्माण’ (Community-based disaster preparedness and resilience building) इसमें सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें समुदाय के सदस्यों को आपदा के जोखिमों को समझने, निकासी योजनाओं को विकसित करने, स्थानीय संसाधनों का उपयोग करने और आपदा के बाद पुनर्निर्माण के लिए संगठित होने के लिए सशक्त बनाना शामिल है। यह सामाजिक पूंजी और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देता है, जिससे समुदाय आपदाओं के प्रभावों को बेहतर ढंग से झेल सकते हैं और उनसे उबर सकते हैं। अस्थायी आश्रयों में रहना एक अल्पकालिक उपाय है, और केवल सरकार पर निर्भर रहना या व्यक्तिगत रूप से सामना करना दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान नहीं करता।

  11. प्रश्न 11: टैल्कॉट पार्सन्स के अनुसार, एक सामाजिक व्यवस्था के अस्तित्व के लिए आवश्यक चार कार्यात्मक अनिवार्यताएं (functional prerequisites) क्या हैं, जिन्हें उन्होंने ‘AGIL’ योजना के रूप में वर्णित किया?

    1. अनुकूलन (Adaptation), लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment), एकीकरण (Integration), विलंबता (Latency)
    2. आत्मसात (Assimilation), उत्पादन (Production), आविष्कार (Innovation), विधि (Law)
    3. आकांक्षा (Aspiration), गौरव (Glory), पहचान (Identity), सीखना (Learning)
    4. पहुंच (Access), विकास (Growth), प्रभाव (Impact), नेतृत्व (Leadership)

    सही उत्तर: a)

    विस्तृत व्याख्या: टैल्कॉट पार्सन्स ने अपनी संरचनात्मक-कार्यात्मकवादी (Structural-Functionalist) सिद्धांत में सामाजिक व्यवस्थाओं के विश्लेषण के लिए ‘AGIL’ योजना प्रस्तुत की। यह एक ऐसा ढांचा है जो किसी भी सामाजिक व्यवस्था के अस्तित्व और स्थिरता के लिए आवश्यक चार कार्यात्मक अनिवार्यताएं बताता है:

    1. अनुकूलन (Adaptation – A): पर्यावरण से संसाधन प्राप्त करना और उन्हें वितरित करना।
    2. लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment – G): व्यवस्था के प्राथमिक लक्ष्यों को परिभाषित करना और प्राप्त करना।
    3. एकीकरण (Integration – I): व्यवस्था के विभिन्न घटकों को एक साथ समन्वयित करना और उन्हें एकजुट रखना।
    4. विलंबता (Latency – L) या पैटर्न रखरखाव (Pattern Maintenance): सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना और सदस्यों को प्रेरित करना।

    ये चार कार्यात्मक अनिवार्यताएं किसी भी सामाजिक व्यवस्था को कार्यशील बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।

  12. प्रश्न 12: किसी संस्कृति में उन मानदंडों और मूल्यों को क्या कहा जाता है जो समाज के एक छोटे से हिस्से द्वारा साझा किए जाते हैं, जबकि वे व्यापक संस्कृति के भीतर सह-अस्तित्व में रहते हैं?

    1. प्रति-संस्कृति (Counter-culture)
    2. उप-संस्कृति (Sub-culture)
    3. लोकप्रिय संस्कृति (Popular culture)
    4. उच्च संस्कृति (High culture)

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: ‘उप-संस्कृति’ (Sub-culture) उन सांस्कृतिक समूहों को संदर्भित करती है जिनके पास व्यापक समाज की प्रमुख संस्कृति के भीतर अपने विशिष्ट मानदंड, मूल्य, भाषा, शैली और जीवनशैली होती है। वे प्रमुख संस्कृति से भिन्न होते हैं लेकिन उसके खिलाफ सीधे विद्रोह नहीं करते। उदाहरण के लिए, किशोरों के समूह, संगीत शैलियों के प्रशंसक (जैसे हिप-हॉप या गॉथ), या कुछ जातीय समूह एक उप-संस्कृति का हिस्सा हो सकते हैं। ‘प्रति-संस्कृति’ (Counter-culture) उप-संस्कृति से भिन्न होती है क्योंकि यह सक्रिय रूप से प्रमुख संस्कृति के मानदंडों और मूल्यों को चुनौती देती है या अस्वीकार करती है (जैसे 1960 के दशक के हिप्पी आंदोलन)। ‘लोकप्रिय संस्कृति’ व्यापक समाज द्वारा उपभोग की जाने वाली मुख्यधारा की संस्कृति है, और ‘उच्च संस्कृति’ अभिजात वर्ग से जुड़ी कला और परंपराओं को संदर्भित करती है।

  13. प्रश्न 13: ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा, जहाँ निम्न जाति या समूह उच्च जाति के रीति-रिवाजों और जीवनशैली को अपनाते हैं, किसने दी?

    1. योगेंद्र सिंह (Yogendra Singh)
    2. डेविड हार्डीमैन (David Hardiman)
    3. एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas)
    4. आंद्रे बेटाई (Andre Beteille)

    सही उत्तर: c)

    विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा प्रस्तुत की। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक ‘निम्न’ हिंदू जाति या जनजाति या अन्य समूह अपनी स्थिति को ऊपर उठाने के लिए एक ‘उच्च’ और अक्सर ‘द्विज’ जाति के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, विचारधाराओं और जीवन शैली को अपनाता है। श्रीनिवास ने यह विचार अपनी पुस्तक "धर्म और समाज कुर्ग में" (Religion and Society Among the Coorgs of South India) में प्रस्तुत किया। यह सामाजिक गतिशीलता के एक रूप का वर्णन करता है, जो अक्सर एक समूह की सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने में मदद करता है, हालांकि यह केवल कर्मकांडी स्थिति में बदलाव को दर्शाता है, आर्थिक या राजनीतिक शक्ति में हमेशा नहीं।

  14. प्रश्न 14: जॉर्ज हर्बर्ट मीड (George Herbert Mead) के अनुसार, ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) की अवधारणाएँ किससे संबंधित हैं?

    1. व्यक्तिगत और सामूहिक अचेतन।
    2. स्व (Self) के विकास के दो चरण।
    3. जैविक और सामाजिक आवश्यकताएं।
    4. भावना और तर्क।

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड एक प्रमुख प्रतीकात्मक अंतःक्रियावादी (Symbolic Interactionist) थे जिन्होंने ‘स्व’ (Self) के विकास के सिद्धांत में ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) की अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं।

    • मुझे (Me): यह स्व का सामाजिक पहलू है, जो समाज के संगठित दृष्टिकोणों, मानदंडों और अपेक्षाओं का आंतरिककरण है। यह वह ‘स्व’ है जिसे समाज द्वारा आकार दिया जाता है और जिसे हम दूसरों की आँखों से देखते हैं। यह सीखा हुआ, सामाजिक ‘स्व’ है।
    • मैं (I): यह स्व का सहज, रचनात्मक, आवेगपूर्ण और अप्रत्याशित पहलू है। यह वह हिस्सा है जो सामाजिक अपेक्षाओं पर प्रतिक्रिया करता है और नवीनता लाता है। यह ‘मुझे’ पर प्रतिक्रिया करता है।

    मीड के अनुसार, ‘स्व’ का विकास ‘मुझे’ और ‘मैं’ के बीच एक सतत बातचीत के माध्यम से होता है।

  15. प्रश्न 15: vulnerability taxonomy (संवेदनशीलता वर्गीकरण) पर एक bibliometric study (ग्रंथसूची अध्ययन) में natural-language processing (प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण) का उपयोग करने का प्राथमिक उद्देश्य क्या होगा?

    1. डेटा का हस्त-विश्लेषण करने के लिए।
    2. पाठ्य डेटा (जैसे लेखों के सार) से पैटर्न, प्रवृत्तियों और प्रमुख अवधारणाओं को स्वचालित रूप से निकालने और विश्लेषण करने के लिए।
    3. केवल संख्यात्मक डेटा का विश्लेषण करने के लिए।
    4. गुणात्मक साक्षात्कार आयोजित करने के लिए।

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: Bibliometric studies (ग्रंथसूची अध्ययन) वैज्ञानिक प्रकाशनों का सांख्यिकीय विश्लेषण करते हैं। जब इसमें natural-language processing (NLP) का उपयोग किया जाता है, तो इसका प्राथमिक उद्देश्य बड़ी मात्रा में पाठ्य डेटा (जैसे वैज्ञानिक लेखों के शीर्षक, सार और कीवर्ड) से जानकारी को स्वचालित रूप से निकालना, पहचानना और विश्लेषण करना होता है। ‘वल्नरेबिलिटी टैक्सोनॉमी’ के संदर्भ में, एनएलपी शोधकर्ताओं को विभिन्न अध्ययनों में संवेदनशीलता की विभिन्न परिभाषाओं, आयामों और संबंधित अवधारणाओं में पैटर्न, प्रवृत्तियों और संबंधों को समझने में मदद करेगा। यह उन्हें मैन्युअल रूप से हजारों दस्तावेजों को पढ़ने के बजाय एक कुशल तरीके से विषय क्षेत्र की व्यापक समझ विकसित करने की अनुमति देता है। विकल्प a, c और d एनएलपी के उपयोग के लिए गलत या अपर्याप्त विवरण हैं।

  16. प्रश्न 16: रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अव्यक्त कार्य’ (Latent Function) की अवधारणाओं को किस सिद्धांत के तहत विकसित किया?

    1. संघर्ष सिद्धांत (Conflict Theory)
    2. प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism)
    3. संरचनात्मक-कार्यात्मकवाद (Structural-Functionalism)
    4. विनिमय सिद्धांत (Exchange Theory)

    सही उत्तर: c)

    विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन, टैल्कॉट पार्सन्स के साथ, संरचनात्मक-कार्यात्मकवाद (Structural-Functionalism) के प्रमुख विचारकों में से एक थे। उन्होंने ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अव्यक्त कार्य’ (Latent Function) की अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं।

    • प्रकट कार्य: ये किसी सामाजिक पैटर्न के वे उद्देश्यपूर्ण और मान्यता प्राप्त परिणाम होते हैं जिनका इरादा होता है। उदाहरण के लिए, शिक्षा का प्रकट कार्य छात्रों को ज्ञान और कौशल प्रदान करना है।
    • अव्यक्त कार्य: ये किसी सामाजिक पैटर्न के वे अनजाने और अक्सर अनजाने परिणाम होते हैं। उदाहरण के लिए, शिक्षा का अव्यक्त कार्य युवा वयस्कों को विवाह योग्य साथी खोजने के लिए एक मंच प्रदान करना हो सकता है।

    मर्टन ने इन अवधारणाओं का उपयोग यह दिखाने के लिए किया कि सामाजिक संरचनाओं और संस्थाओं के जटिल और बहुआयामी परिणाम हो सकते हैं, जिनमें से सभी हमेशा स्पष्ट या इच्छित नहीं होते हैं।

  17. प्रश्न 17: भारत में ‘डिजिटल जाति’ (Digital Caste) की अवधारणा क्या दर्शाती है?

    1. पारंपरिक जाति व्यवस्था का पूर्ण उन्मूलन।
    2. डिजिटल उपकरणों तक पहुंच और उपयोग के आधार पर सामाजिक स्तरीकरण का एक नया रूप।
    3. केवल उच्च जातियों के बीच डिजिटल साक्षरता में वृद्धि।
    4. ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच का अभाव।

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: ‘डिजिटल जाति’ (Digital Caste) की अवधारणा भारत में डिजिटल विभाजन (Digital Divide) के संदर्भ में उभरी है। यह दर्शाती है कि कैसे डिजिटल उपकरणों (जैसे स्मार्टफोन, कंप्यूटर) और इंटरनेट तक पहुंच और उनका उपयोग करने की क्षमता सामाजिक स्तरीकरण का एक नया आयाम बन गई है। पारंपरिक जाति व्यवस्था के साथ मिलकर, यह विभाजन शिक्षा, रोजगार, सरकारी सेवाओं और सूचना तक पहुंच में और असमानताएं पैदा करता है। जिन लोगों के पास डिजिटल संसाधनों और कौशल की कमी है, वे सामाजिक और आर्थिक रूप से और हाशिए पर जा सकते हैं, जिससे एक ‘डिजिटल जाति’ जैसी स्थिति बनती है जहाँ डिजिटल पहुंच एक नया विभेदक कारक बन जाती है। यह पारंपरिक जाति व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त नहीं करता, बल्कि एक नए पहलू को जोड़ता है।

  18. प्रश्न 18: समाज में मानदंडों और नियमों के उल्लंघन को रोकने और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले तंत्रों को क्या कहा जाता है?

    1. सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility)
    2. सामाजिक नियंत्रण (Social Control)
    3. सामाजिक विघटन (Social Disorganization)
    4. सामाजिक परिवर्तन (Social Change)

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: ‘सामाजिक नियंत्रण’ (Social Control) उन सभी तरीकों और प्रक्रियाओं को संदर्भित करता है जिनके द्वारा समाज व्यक्तियों और समूहों के व्यवहार को नियंत्रित करता है ताकि सामाजिक मानदंडों, मूल्यों और कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जा सके और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके। इसमें औपचारिक तंत्र (जैसे कानून, पुलिस, न्यायपालिका) और अनौपचारिक तंत्र (जैसे परिवार, धर्म, सहकर्मी समूह, जनमत) दोनों शामिल हैं। सामाजिक नियंत्रण विचलन को रोकता है और सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देता है। अन्य विकल्प अलग-अलग सामाजिक प्रक्रियाओं का वर्णन करते हैं: सामाजिक गतिशीलता व्यक्तियों की स्थिति में परिवर्तन है, सामाजिक विघटन सामाजिक संरचनाओं का टूटना है, और सामाजिक परिवर्तन समय के साथ समाज में बदलाव है।

  19. प्रश्न 19: मिशेल फूको (Michel Foucault) ने शक्ति और ज्ञान के बीच संबंध को किस प्रकार चित्रित किया है?

    1. शक्ति ज्ञान से पूरी तरह स्वतंत्र है।
    2. ज्ञान शक्ति का एक उत्पाद है, और शक्ति ज्ञान के माध्यम से संचालित होती है।
    3. ज्ञान केवल तथ्यों का एक वस्तुनिष्ठ संग्रह है।
    4. शक्ति केवल राजनीतिक दमन का एक रूप है।

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: मिशेल फूको एक फ्रांसीसी दार्शनिक और समाजशास्त्री थे जिन्होंने शक्ति (Power) और ज्ञान (Knowledge) के बीच एक जटिल और आंतरिक संबंध पर जोर दिया। उनके अनुसार, शक्ति केवल दमनकारी नहीं है बल्कि उत्पादक भी है; यह ज्ञान के विशिष्ट रूपों को उत्पन्न करती है और उन्हें वैधता प्रदान करती है। इसी तरह, ज्ञान कभी भी तटस्थ या वस्तुनिष्ठ नहीं होता बल्कि हमेशा शक्ति संबंधों में निहित होता है और उन पर निर्भर करता है। वे एक साथ ‘शक्ति/ज्ञान’ (power/knowledge) के रूप में कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए, मानसिक बीमारी के बारे में चिकित्सा ज्ञान ने मानसिक रूप से बीमार लोगों पर शक्ति के प्रयोग को वैध बनाया। फूको ने तर्क दिया कि ज्ञान और शक्ति एक दूसरे को सुदृढ़ करते हैं, जिससे सामाजिक नियंत्रण के नए तरीके बनते हैं।

  20. प्रश्न 20: ग्रामीण समाजशास्त्र में, ‘ग्रामीण-शहरी सातत्य’ (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा क्या बताती है?

    1. ग्रामीण और शहरी क्षेत्र पूरी तरह से भिन्न और असंबद्ध हैं।
    2. ग्रामीण और शहरी क्षेत्र एक स्पेक्ट्रम पर मौजूद हैं, जहाँ कोई स्पष्ट सीमांकन नहीं है बल्कि क्रमिक परिवर्तन होता है।
    3. शहरी क्षेत्र हमेशा ग्रामीण क्षेत्रों से श्रेष्ठ होते हैं।
    4. ग्रामीण क्षेत्रों का शहरीकरण संभव नहीं है।

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: ‘ग्रामीण-शहरी सातत्य’ (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा बताती है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र पूरी तरह से अलग इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि एक निरंतरता पर स्थित हैं जहाँ ग्रामीण से शहरी विशेषताओं में धीरे-धीरे परिवर्तन होता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, कोई कठोर विभाजन रेखा नहीं है, बल्कि एक छोर पर शुद्ध ग्रामीण विशेषताएं और दूसरे छोर पर शुद्ध शहरी विशेषताएं हैं, और बीच में मिश्रित या उपनगरीय क्षेत्र हैं जिनमें दोनों की विशेषताएं मिलती हैं। यह अवधारणा इस बात पर जोर देती है कि ग्रामीण और शहरी समाज एक दूसरे को प्रभावित करते हैं और उनके बीच सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध होते हैं।

  21. प्रश्न 21: समाजशास्त्र में ‘सामाजिक नेटवर्क’ (Social Networks) के अध्ययन का प्राथमिक उद्देश्य क्या है, जैसा कि स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में देखा गया है?

    1. केवल व्यक्तियों की आय का विश्लेषण करना।
    2. व्यक्तियों और समूहों के बीच संबंधों, संरचनाओं और उनके पैटर्न का विश्लेषण करना।
    3. किसी विशिष्ट क्षेत्र में भौतिक अवसंरचना का अध्ययन करना।
    4. केवल बड़े संगठनों के आंतरिक कामकाज का अध्ययन करना।

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: ‘सामाजिक नेटवर्क’ (Social Networks) व्यक्तियों, समूहों या संगठनों के बीच संबंधों (जैसे मित्रता, परिवार, कार्य संबंध) की संरचना का अध्ययन करते हैं। यह विश्लेषण करता है कि ये संबंध कैसे बने हैं, वे कैसे कार्य करते हैं, और वे व्यक्तियों के व्यवहार, सूचना के प्रवाह और परिणामों (जैसे स्वास्थ्य, रोजगार) को कैसे प्रभावित करते हैं। स्वास्थ्य के संदर्भ में, एक सामाजिक नेटवर्क का अध्ययन यह समझने में मदद कर सकता है कि सामाजिक समर्थन स्वास्थ्य परिणामों को कैसे प्रभावित करता है, या बीमारियों का प्रसार कैसे होता है। यह सिर्फ आय या भौतिक अवसंरचना पर ध्यान केंद्रित नहीं करता है, बल्कि संबंधों के पैटर्न और उनके प्रभावों पर केंद्रित है।

  22. प्रश्न 22: एंथोनी गिडेंस (Anthony Giddens) ने ‘संरचना और एजेंसी’ (Structure and Agency) के बीच संबंधों को समझने के लिए किस अवधारणा को विकसित किया?

    1. द्वंद्वात्मक भौतिकवाद (Dialectical Materialism)
    2. प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism)
    3. संरचनाकरण सिद्धांत (Structuration Theory)
    4. प्रकार्यात्मक अनिवार्यताएं (Functional Imperatives)

    सही उत्तर: c)

    विस्तृत व्याख्या: एंथोनी गिडेंस ने ‘संरचनाकरण सिद्धांत’ (Structuration Theory) को विकसित किया, जो समाजशास्त्र में ‘संरचना’ (Structure) और ‘एजेंसी’ (Agency) के बीच के पारंपरिक द्वंद्व को पाटने का प्रयास करता है। गिडेंस का तर्क है कि संरचनाएं केवल व्यक्तियों पर थोपी नहीं जाती हैं, बल्कि वे व्यक्तियों की क्रियाओं (एजेंसी) के माध्यम से लगातार उत्पन्न और पुनरुत्पादित होती हैं। साथ ही, व्यक्तियों की क्रियाएँ इन संरचनाओं द्वारा सक्षम और विवश होती हैं। दूसरे शब्दों में, संरचना और एजेंसी एक दूसरे पर परस्पर निर्भर हैं और लगातार एक दूसरे को आकार देते हैं। यह सिद्धांत बताता है कि सामाजिक जीवन में संरचनाएं और एजेंसी अविभाज्य हैं।

  23. प्रश्न 23: मैक्स वेबर ने अपनी किस पुस्तक में प्रोटेस्टेंट नैतिकता और पूंजीवाद के उद्भव के बीच संबंध का विश्लेषण किया है?

    1. समाजशास्त्र की प्राथमिक अवधारणाएँ (Basic Concepts in Sociology)
    2. प्रोटेस्टेंट एथिक और पूंजीवाद की भावना (The Protestant Ethic and the Spirit of Capitalism)
    3. अर्थव्यवस्था और समाज (Economy and Society)
    4. धर्म का समाजशास्त्र (The Sociology of Religion)

    सही उत्तर: b)

    विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर की सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक "प्रोटेस्टेंट एथिक और पूंजीवाद की भावना" (The Protestant Ethic and the Spirit of Capitalism) है, जिसे उन्होंने 1905 में प्रकाशित किया था। इस पुस्तक में, वेबर ने तर्क दिया कि प्रोटेस्टेंट धर्म की कुछ शाखाओं (विशेषकर केल्विनवाद) से जुड़ी नैतिक मान्यताओं (जैसे तपस्या, कड़ी मेहनत, सांसारिक सफलता को ईश्वर की कृपा का संकेत मानना, और पुनर्निवेश की नैतिकता) ने पश्चिमी पूंजीवाद के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह नहीं कहा कि प्रोटेस्टेंटवाद ने पूंजीवाद का कारण बना, बल्कि यह कि इसने पूंजीवादी मानसिकता और व्यवहार के लिए एक अनुकूल सांस्कृतिक वातावरण प्रदान किया।

  24. प्रश्न 24: रॉबर्ट के. मर्टन के ‘विचलन के प्रतिमान’ (Modes of Adaptation to Anomie/Deviance) में, जो व्यक्ति समाज के सांस्कृतिक लक्ष्यों को स्वीकार करते हैं लेकिन संस्थागत साधनों को अस्वीकार करते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?

    1. नवाचारी (Innovator)
    2. कर्मकांडी (Ritualist)
    3. पीछे हटने वाले (Retreatist)
    4. विद्रोही (Rebel)

    सही उत्तर: a)

    विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए बताया कि कैसे व्यक्ति समाज के सांस्कृतिक लक्ष्यों और उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के संस्थागत साधनों के बीच तनाव का सामना करते हैं। उन्होंने विचलन के पांच प्रतिमानों का वर्णन किया:

    1. अनुरूपतावादी (Conformist): लक्ष्यों और साधनों दोनों को स्वीकार करता है।
    2. नवाचारी (Innovator): सांस्कृतिक लक्ष्यों को स्वीकार करता है लेकिन संस्थागत साधनों को अस्वीकार करता है और नए, अक्सर अवैध, साधनों का उपयोग करता (उदाहरण: ड्रग डीलर जो अमीर बनना चाहता है)।
    3. कर्मकांडी (Ritualist): सांस्कृतिक लक्ष्यों को अस्वीकार करता है लेकिन संस्थागत साधनों का सख्ती से पालन करता (उदाहरण: वह व्यक्ति जो पदोन्नति की उम्मीद छोड़ देता है लेकिन फिर भी अपने काम के नियमों का पालन करता रहता है)।
    4. पीछे हटने वाले (Retreatist): लक्ष्यों और साधनों दोनों को अस्वीकार करता है (उदाहरण: ड्रग एडिक्ट, बेघर व्यक्ति)।
    5. विद्रोही (Rebel): लक्ष्यों और साधनों दोनों को अस्वीकार करता है और एक वैकल्पिक सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास करता है।

    इसलिए, जो व्यक्ति लक्ष्यों को स्वीकार करते हैं लेकिन संस्थागत साधनों को अस्वीकार करते हैं, वे ‘नवाचारी’ कहलाते हैं।

  25. प्रश्न 25: भारत में जनजातीय समुदायों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों में से एक क्या है?

    1. सांस्कृतिक अलगाव का पूर्ण अभाव।
    2. मुख्यधारा के समाज से पूरी तरह से एकीकरण।
    3. भूमि विस्थापन, संसाधनों का नुकसान, और पहचान का संकट।
    4. अत्यधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व और शक्ति।

    सही उत्तर: c)

    विस्तृत व्याख्या: भारत में जनजातीय समुदाय लंबे समय से विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इनमें ‘भूमि विस्थापन’ (Land displacement) प्रमुख है, अक्सर विकास परियोजनाओं (जैसे बांध, खनन) के कारण। इसके परिणामस्वरूप उनके पारंपरिक ‘संसाधनों का नुकसान’ होता है, जिस पर उनकी आजीविका निर्भर करती है। इसके अलावा, मुख्यधारा के समाज के साथ संपर्क और विकास के दबाव के कारण उन्हें अपनी अनूठी ‘पहचान का संकट’ का सामना करना पड़ता है, जहाँ उनकी भाषाएं, रीति-रिवाज और जीवनशैली खतरे में पड़ जाती है। विकल्प a और b गलत हैं क्योंकि जनजातीय समुदायों को अक्सर सांस्कृतिक अलगाव और एकीकरण के मुद्दों का सामना करना पड़ता है। विकल्प d भी गलत है क्योंकि वे अक्सर राजनीतिक रूप से हाशिए पर होते हैं।


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