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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

नमस्ते, “The Sociology Scholar” के साथ आपकी दैनिक बौद्धिक चुनौती में आपका स्वागत है! यह अभ्यास सेट विशेष रूप से UGC-NET, UPSC, State PSCs और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यहाँ आपको 25 उच्च-स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न मिलेंगे जो आपकी समाजशास्त्रीय अवधारणाओं, विचारकों और सिद्धांतों की समझ का गहन परीक्षण करेंगे। अपने ज्ञान का मूल्यांकन करें, अपनी वैचारिक स्पष्टता को मजबूत करें और अपनी तैयारी को एक नया आयाम दें। शुभकामनाएँ!


  1. एमिल दुर्खीम के अनुसार, वह स्थिति जब सामाजिक मानदंड कमजोर या अनुपस्थित हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों में दिशाहीनता और निराशा की भावना पैदा होती है, उसे क्या कहा जाता है?

    1. सामाजिक संहति (Social Solidarity)
    2. अलगाव (Alienation)
    3. एनोमी (Anomie)
    4. संरचनात्मक कार्यवाद (Structural Functionalism)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: एमिल दुर्खीम ने ‘एनोमी’ की अवधारणा का उपयोग उस स्थिति का वर्णन करने के लिए किया था जहाँ समाज में मानदंडों और नैतिक मार्गदर्शन की कमी होती है, जिससे व्यक्ति भ्रमित और दिशाहीन महसूस करते हैं। यह विशेष रूप से तेजी से सामाजिक परिवर्तन या आर्थिक संकट के समय में होता है, जो आत्महत्या के अध्ययन से जुड़ा है।

    संदर्भ: यह अवधारणा दुर्खीम की प्रसिद्ध कृति “Le Suicide” (आत्महत्या) में विस्तार से बताई गई है।

    गलत विकल्प: A. सामाजिक संहति दुर्खीम द्वारा समाज के एक साथ रहने की व्याख्या है। B. अलगाव मार्क्स से जुड़ा है, जहाँ श्रमिक अपने श्रम, उत्पाद और स्वयं से कट जाते हैं। D. संरचनात्मक कार्यवाद एक व्यापक परिप्रेक्ष्य है जो दुर्खीम के काम का हिस्सा है, लेकिन सीधे इस विशेष स्थिति का वर्णन नहीं करता है।

  2. कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिक अपने श्रम के उत्पाद, अपनी उत्पादन प्रक्रिया, अपनी प्रजाति-सत्ता और अन्य मनुष्यों से कट जाते हैं। यह स्थिति क्या कहलाती है?

    1. सामाजिक सामंजस्य (Social Cohesion)
    2. अलगाव (Alienation)
    3. वर्ग चेतना (Class Consciousness)
    4. फाल्स चेतना (False Consciousness)

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: कार्ल मार्क्स ने ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा का प्रयोग पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में श्रमिकों की उस स्थिति का वर्णन करने के लिए किया, जहाँ वे अपने श्रम, अपने उत्पादों, अपनी मानवीय प्रकृति और अपने साथी श्रमिकों से कटे हुए महसूस करते हैं। यह पूंजीवाद की एक केंद्रीय आलोचना है।

    संदर्भ: यह विचार मार्क्स के “Economic and Philosophical Manuscripts of 1844” में प्रमुखता से आता है।

    गलत विकल्प: A. सामाजिक सामंजस्य दुर्खीम की अवधारणा है। C. वर्ग चेतना तब आती है जब श्रमिक अपनी साझा स्थिति को पहचानते हैं। D. फाल्स चेतना श्रमिकों की अपनी वास्तविक स्थिति के बारे में अज्ञानता है।

  3. मैक्स वेबर द्वारा विकसित वह वैचारिक उपकरण जो किसी सामाजिक घटना की शुद्ध और अतिरंजित विशेषताओं को कैप्चर करता है, ताकि उसका तुलनात्मक विश्लेषण किया जा सके, उसे क्या कहते हैं?

    1. सामाजिक तथ्य (Social Fact)
    2. आदर्श प्रकार (Ideal Type)
    3. सामूहिक प्रतिनिधित्व (Collective Representation)
    4. कार्य-कारण संबंध (Causal Relationship)

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: मैक्स वेबर ने ‘आदर्श प्रकार’ (Ideal Type) की अवधारणा को एक विश्लेषणात्मक उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया। यह एक अमूर्त निर्माण है जो किसी विशेष सामाजिक या ऐतिहासिक घटना की आवश्यक और तार्किक रूप से सुसंगत विशेषताओं को उजागर करता है, भले ही वह वास्तविकता में पूरी तरह से मौजूद न हो। इसका उद्देश्य तुलना और विश्लेषण को सुविधाजनक बनाना है।

    संदर्भ: वेबर ने नौकरशाही जैसे विभिन्न सामाजिक प्रणालियों का विश्लेषण करने के लिए आदर्श प्रकार का उपयोग किया।

    गलत विकल्प: A. सामाजिक तथ्य दुर्खीम से संबंधित है। C. सामूहिक प्रतिनिधित्व भी दुर्खीम से संबंधित एक अवधारणा है। D. कार्य-कारण संबंध वैज्ञानिक अध्ययन का एक सामान्य पहलू है, न कि वेबर का विशिष्ट वैचारिक उपकरण।

  4. टैल्कॉट पार्सन्स के कार्यात्मक आवश्यकताओं के AGIL मॉडल में ‘L’ क्या दर्शाता है?

    1. अनुकूलन (Adaptation)
    2. लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment)
    3. एकीकरण (Integration)
    4. पैटर्न रखरखाव (Latency/Pattern Maintenance)

    सही उत्तर: D

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: टैल्कॉट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ ‘पैटर्न रखरखाव’ (Latency/Pattern Maintenance) को दर्शाता है। यह समाज की उस आवश्यकता को संदर्भित करता है कि वह अपने सदस्यों को प्रेरणा प्रदान करने और सांस्कृतिक पैटर्न को बनाए रखने के लिए उपयुक्त तंत्र विकसित करे, ताकि सामाजिक व्यवस्था बनी रहे।

    संदर्भ: यह पार्सन्स के क्रियात्मक सिद्धांत (Action Theory) और सामाजिक व्यवस्था के उनके विश्लेषण का एक केंद्रीय घटक है।

    गलत विकल्प: A. अनुकूलन (Adaptation) ‘A’ है। B. लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment) ‘G’ है। C. एकीकरण (Integration) ‘I’ है।

  5. आर.के. मर्टन के अनुसार, किसी सामाजिक संरचना का वह कार्य जो स्पष्ट रूप से इच्छित और मान्यता प्राप्त होता है, उसे क्या कहते हैं?

    1. प्रकट कार्य (Manifest Function)
    2. अव्यक्त कार्य (Latent Function)
    3. दुष्कार्य (Dysfunction)
    4. गैर-कार्य (Non-Function)

    सही उत्तर: A

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) की अवधारणा का परिचय दिया, जिसका अर्थ है किसी सामाजिक क्रिया या संस्था का वह उद्देश्यपूर्ण और जानबूझकर किया गया कार्य जिसे समाज के सदस्य पहचानते और स्वीकार करते हैं। उदाहरण के लिए, शिक्षा का प्रकट कार्य ज्ञान प्रदान करना है।

    संदर्भ: यह मर्टन के संरचनात्मक-कार्यवादी विश्लेषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो दुर्खीम और पार्सन्स के कार्यवाद को परिष्कृत करता है।

    गलत विकल्प: B. अव्यक्त कार्य वे अनपेक्षित और अज्ञात परिणाम होते हैं। C. दुष्कार्य समाज के लिए नकारात्मक परिणाम होते हैं। D. गैर-कार्य एक मान्य समाजशास्त्रीय अवधारणा नहीं है।

  6. समाजशास्त्र में ‘सामाजिक स्तरीकरण’ (Social Stratification) का क्या अर्थ है?

    1. व्यक्तियों का अनियमित वितरण
    2. समाज में व्यक्तियों का पदानुक्रमित विभाजन
    3. समूहों के बीच यादृच्छिक संपर्क
    4. भौगोलिक क्षेत्रों में जनसंख्या का वितरण

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: सामाजिक स्तरीकरण समाज में व्यक्तियों या समूहों का पदानुक्रमित विभाजन है जो शक्ति, धन, प्रतिष्ठा और सामाजिक स्थिति जैसी असमानताओं पर आधारित होता है। यह विभाजन व्यवस्थित और स्थायी होता है, जो सामाजिक संरचना का हिस्सा बनता है।

    संदर्भ: यह समाजशास्त्र की एक मौलिक अवधारणा है जिसे मार्क्स (वर्ग), वेबर (वर्ग, स्थिति, शक्ति) और अन्य ने विस्तार से समझाया है।

    गलत विकल्प: A, C, और D स्तरीकरण के व्यवस्थित और पदानुक्रमित प्रकृति को सटीक रूप से वर्णित नहीं करते हैं।

  7. डब्ल्यू.एफ. ओगबर्न द्वारा दी गई ‘सांस्कृतिक विलंबना’ (Cultural Lag) की अवधारणा क्या बताती है?

    1. एक संस्कृति का दूसरी संस्कृति से पिछड़ जाना
    2. भौतिक और अभौतिक संस्कृति के बीच असंतुलन
    3. एक पीढ़ी का अगली पीढ़ी से सांस्कृतिक रूप से पिछड़ जाना
    4. संस्कृति का धीरे-धीरे बदलना

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: डब्ल्यू.एफ. ओगबर्न ने ‘सांस्कृतिक विलंबना’ (Cultural Lag) की अवधारणा का उपयोग यह समझाने के लिए किया कि जब समाज में भौतिक संस्कृति (जैसे प्रौद्योगिकी) तेजी से बदलती है, तो अभौतिक संस्कृति (जैसे मानदंड, मूल्य, विश्वास) उतनी तेजी से नहीं बदल पाती, जिससे दोनों के बीच एक असंतुलन या “विलंबना” उत्पन्न हो जाती है।

    संदर्भ: यह अवधारणा ओगबर्न की पुस्तक “Social Change with Respect to Culture and Original Nature” (1922) में प्रस्तुत की गई थी।

    गलत विकल्प: अन्य विकल्प सांस्कृतिक परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं को संदर्भित कर सकते हैं, लेकिन ओगबर्न की विशिष्ट अवधारणा को सही ढंग से परिभाषित नहीं करते हैं।

  8. समकालीन समाजों में परिवार के बदलते स्वरूपों में से एक जिसमें एकल माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं, उसे क्या कहते हैं?

    1. विस्तृत परिवार (Extended Family)
    2. नाभिकीय परिवार (Nuclear Family)
    3. एकल-अभिभावक परिवार (Single-Parent Family)
    4. संयुक्त परिवार (Joint Family)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: ‘एकल-अभिभावक परिवार’ (Single-Parent Family) वह पारिवारिक संरचना है जहाँ बच्चे केवल एक माता या पिता के साथ रहते हैं, जो अक्सर तलाक, अलगाव, मृत्यु या अविवाहित माता-पिता द्वारा बच्चे को पालने के कारण होता है। यह आधुनिक समाजों में बढ़ती प्रवृत्ति है।

    संदर्भ: यह पारिवारिक समाजशास्त्र (Sociology of Family) में एक महत्वपूर्ण अध्ययन क्षेत्र है जो सामाजिक परिवर्तनों और उनके परिणामों को दर्शाता है।

    गलत विकल्प: A. विस्तृत परिवार में एक से अधिक पीढ़ी के सदस्य शामिल होते हैं। B. नाभिकीय परिवार में केवल माता-पिता और उनके बच्चे होते हैं। D. संयुक्त परिवार, विस्तृत परिवार का एक प्रकार है, जो भारत में अधिक प्रचलित है।

  9. एमिल दुर्खीम के अनुसार, समाज के वे पहलू जो सामान्य, पवित्र और अलौकिक माने जाते हैं, जिससे श्रद्धा और सम्मान जुड़ा होता है, उन्हें क्या कहते हैं?

    1. पवित्र (Sacred)
    2. अपवित्र (Profane)
    3. कर्मकांड (Ritual)
    4. टोटेम (Totem)

    सही उत्तर: A

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: एमिल दुर्खीम ने धर्म के विश्लेषण में ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र’ (Profane) के बीच अंतर किया। पवित्र वे वस्तुएं, प्रतीक या विचार हैं जिन्हें समाज द्वारा असाधारण, सम्मानजनक और अलौकिक माना जाता है, जो सामान्य दैनिक जीवन से अलग होते हैं।

    संदर्भ: यह अवधारणा दुर्खीम की “The Elementary Forms of the Religious Life” में प्रमुख है, जहाँ उन्होंने धर्म को सामाजिक संहति का स्रोत बताया।

    गलत विकल्प: B. अपवित्र दैनिक और सांसारिक पहलुओं को संदर्भित करता है। C. कर्मकांड पवित्र और अपवित्र के बीच संक्रमण के कार्य हैं। D. टोटेम कुछ समाजों में एक पवित्र प्रतीक है, लेकिन यह ‘पवित्र’ की व्यापक श्रेणी का एक उदाहरण मात्र है।

  10. समाजशास्त्रीय अनुसंधान में गुणात्मक विधि (Qualitative Method) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

    1. सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए संख्यात्मक डेटा एकत्र करना
    2. सामाजिक घटनाओं की गहराई से समझ और व्याख्या करना
    3. परिकल्पनाओं का परीक्षण और सामान्यीकरण करना
    4. बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण करना

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: गुणात्मक अनुसंधान विधियों का मुख्य लक्ष्य सामाजिक घटनाओं, अनुभवों और व्यवहारों को उनके प्राकृतिक संदर्भ में गहराई से समझना और उनकी व्याख्या करना है। यह अक्सर छोटे पैमाने पर, गहन डेटा संग्रह (जैसे साक्षात्कार, अवलोकन) के माध्यम से किया जाता है ताकि समृद्ध, वर्णनात्मक जानकारी प्राप्त की जा सके।

    संदर्भ: नृवंशविज्ञान, केस स्टडी और घटना-विज्ञान जैसे दृष्टिकोण गुणात्मक अनुसंधान में आम हैं।

    गलत विकल्प: A, C, और D मात्रात्मक अनुसंधान विधियों के प्राथमिक उद्देश्य हैं, जो संख्यात्मक डेटा, सांख्यिकीय विश्लेषण और सामान्यीकरण पर केंद्रित होते हैं।

  11. एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रस्तुत ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा क्या दर्शाती है?

    1. उच्च जातियों द्वारा निम्न जातियों का अनुकरण
    2. निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों का अनुकरण
    3. जाति व्यवस्था का कमजोर होना
    4. जाति व्यवस्था का पूरी तरह से उन्मूलन

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा का उपयोग उस प्रक्रिया का वर्णन करने के लिए किया जिसमें एक निम्न जाति या जनजातीय समूह, किसी द्विज जाति (विशेष रूप से ब्राह्मण) के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, विचारधारा और जीवन-शैली को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करता है।

    संदर्भ: यह अवधारणा श्रीनिवास के मैसूर के कुर्गों पर किए गए अध्ययन पर आधारित है और उनकी पुस्तक “Religion and Society Among the Coorgs of South India” में प्रस्तुत की गई थी।

    गलत विकल्प: A. यह विपरीत प्रक्रिया है। C और D. संस्कृतिकरण जाति व्यवस्था को कमजोर या समाप्त नहीं करता, बल्कि उसके भीतर गतिशीलता को दर्शाता है।

  12. भारतीय ग्रामीण समाज में ‘जजमानी व्यवस्था’ का मुख्य आधार क्या था?

    1. नकद भुगतान पर आधारित आर्थिक संबंध
    2. एक गाँव में भूमि का सामूहिक स्वामित्व
    3. विभिन्न जातियों के बीच वंशानुगत सेवा और वस्तु विनिमय संबंध
    4. सिर्फ राजनीतिक शक्ति का वितरण

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: जजमानी व्यवस्था भारतीय ग्रामीण समाज की एक पारंपरिक प्रणाली थी जहाँ विभिन्न जातियों के परिवार एक-दूसरे को वंशानुगत सेवाएँ प्रदान करते थे, जिसके बदले में उन्हें अनाज या अन्य वस्तुओं के रूप में भुगतान मिलता था। यह एक अंतर-जातीय, आर्थिक और सामाजिक आत्मनिर्भरता की प्रणाली थी।

    संदर्भ: विलियम वाइजर ने अपनी पुस्तक “The Hindu Jajmani System” में इसका विस्तृत अध्ययन किया।

    गलत विकल्प: A. यह नकद पर नहीं, बल्कि वस्तु विनिमय और सेवाओं पर आधारित थी। B और D. ये जजमानी व्यवस्था के प्राथमिक आधार नहीं थे।

  13. भारत में वैश्वीकरण (Globalization) के कारण हुए सामाजिक परिवर्तनों में से एक प्रमुख प्रभाव क्या है?

    1. संयुक्त परिवार प्रणाली का सुदृढीकरण
    2. पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बढ़ती निर्भरता
    3. शहरीकरण और प्रवासन में वृद्धि
    4. जाति व्यवस्था का सख्त होना

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: वैश्वीकरण ने भारत में शहरीकरण और प्रवासन (विशेषकर ग्रामीण से शहरी और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन) में उल्लेखनीय वृद्धि की है। आर्थिक अवसरों की तलाश, नए उद्योगों का विकास और कनेक्टिविटी में सुधार इसके प्रमुख कारक रहे हैं।

    संदर्भ: यह भारतीय समाजशास्त्र में समकालीन सामाजिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसका अध्ययन कई समाजशास्त्रियों ने किया है।

    गलत विकल्प: A. वैश्वीकरण ने अक्सर संयुक्त परिवारों को नाभिकीय परिवारों में तोड़ने में योगदान दिया है। B. यह पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जगह नई अर्थव्यवस्थाओं के विकास का कारण बना है। D. वैश्वीकरण ने जाति व्यवस्था को कमजोर किया है, हालांकि उसके कुछ नए रूप उभरे हैं।

  14. फर्डिनेंड टॉनीज़ द्वारा ग्रामीण और शहरी समुदायों के विश्लेषण के लिए प्रस्तुत अवधारणाओं का युग्म क्या है?

    1. यांत्रिक और जैविक संहति (Mechanical and Organic Solidarity)
    2. Gemeinschaft और Gesellschaft
    3. पवित्र और अपवित्र (Sacred and Profane)
    4. परंपरागत और कानूनी-तर्कसंगत सत्ता (Traditional and Legal-Rational Authority)

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: फर्डिनेंड टॉनीज़ ने ‘Gemeinschaft’ (समुदाय) और ‘Gesellschaft’ (समाज) की अवधारणाओं का उपयोग ग्रामीण और शहरी समाजों के बीच के मूलभूत अंतरों का वर्णन करने के लिए किया। Gemeinschaft छोटे, पारंपरिक समुदायों को संदर्भित करता है जहाँ व्यक्तिगत संबंध घनिष्ठ और भावनात्मक होते हैं, जबकि Gesellschaft बड़े, आधुनिक शहरी समाजों को संदर्भित करता है जहाँ संबंध अवैयक्तिक, तर्कसंगत और हितों पर आधारित होते हैं।

    संदर्भ: यह अवधारणा उनकी 1887 की पुस्तक “Gemeinschaft und Gesellschaft” में प्रस्तुत की गई थी।

    गलत विकल्प: A. यांत्रिक और जैविक संहति दुर्खीम से संबंधित हैं। C. पवित्र और अपवित्र दुर्खीम से संबंधित हैं। D. परंपरागत और कानूनी-तर्कसंगत सत्ता वेबर से संबंधित हैं।

  15. हाल के दिनों में ‘एन्हांस्ड गेम्स’ जैसे आयोजनों में डोपिंग (नशीले पदार्थों का सेवन) के सामान्यीकरण को किस समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से देखा जा सकता है, जो समाज में विचलन (Deviance) और सामाजिक नियंत्रण के मुद्दों को उजागर करता है?

    1. कार्यात्मकवाद (Functionalism)
    2. प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism)
    3. संघर्ष सिद्धांत (Conflict Theory)
    4. इनमें से सभी

    सही उत्तर: D

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: डोपिंग का सामान्यीकरण एक जटिल सामाजिक घटना है जिसे कई दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है: कार्यात्मकवाद यह देखेगा कि यह खेल के “ईमानदार प्रतिस्पर्धा” जैसे मानदंड को कैसे बाधित करता है। प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद यह देखेगा कि डोपिंग को कैसे परिभाषित किया जाता है, उसके प्रति क्या प्रतीक और अर्थ जुड़े हुए हैं, और कैसे एथलीट और दर्शक इसे देखते हैं। संघर्ष सिद्धांत शक्ति के असंतुलन, कॉर्पोरेट हितों और सामाजिक नियंत्रण के उन रूपों का विश्लेषण करेगा जो डोपिंग को बढ़ावा देते हैं या दबाते हैं। इसलिए, ये सभी दृष्टिकोण प्रासंगिक हैं।

    संदर्भ: यह विचलन, सामाजिक नियंत्रण और खेल के समाजशास्त्र (Sociology of Sport) के तहत अध्ययन किया जाता है।

    गलत विकल्प: कोई एक दृष्टिकोण पूरी तरह से इस जटिल घटना की व्याख्या नहीं कर सकता है, इसलिए ‘इनमें से सभी’ सबसे उपयुक्त है।

  16. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डिटेक्शन टूल्स द्वारा शैक्षणिक ईमानदारी (Academic Integrity) को कमजोर करने की चिंताओं को समाजशास्त्र की किस शाखा के तहत सबसे अच्छी तरह समझा जा सकता है?

    1. धर्म का समाजशास्त्र (Sociology of Religion)
    2. ज्ञान का समाजशास्त्र (Sociology of Knowledge)
    3. शिक्षा का समाजशास्त्र (Sociology of Education)
    4. परिवार का समाजशास्त्र (Sociology of Family)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: AI डिटेक्शन टूल्स और शैक्षणिक ईमानदारी के बीच का संबंध सीधे तौर पर शिक्षा के संस्थानों, सीखने की प्रक्रियाओं, अकादमिक मूल्यों और नैतिकता पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव से जुड़ा है। यह शिक्षा के समाजशास्त्र का केंद्रीय विषय है, जो शिक्षा प्रणाली पर सामाजिक और तकनीकी परिवर्तनों के प्रभावों का अध्ययन करता है।

    संदर्भ: यह समकालीन शिक्षा प्रणाली के समक्ष एक नई सामाजिक चुनौती है।

    गलत विकल्प: A, B, और D अन्य सामाजिक संस्थानों या अवधारणाओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं और सीधे तौर पर शैक्षणिक ईमानदारी या AI के प्रभावों से संबंधित नहीं हैं, हालांकि ज्ञान का समाजशास्त्र AI के ज्ञान उत्पादन पर प्रभाव को छू सकता है, लेकिन शिक्षा का समाजशास्त्र अधिक प्रत्यक्ष है।

  17. समाजशास्त्र में ‘अन-लर्निंग’ (Unlearning) की अवधारणा, जो अंतर्निहित पूर्वाग्रहों और पुरानी प्रथाओं को संबोधित करने के लिए एक ढाँचा है, किस क्षेत्र से निकटता से संबंधित है?

    1. जनसंख्या अध्ययन (Population Studies)
    2. संस्कृति का समाजशास्त्र (Sociology of Culture)
    3. परंपरागतता का समाजशास्त्र (Sociology of Traditionalism)
    4. पर्यावरण का समाजशास्त्र (Environmental Sociology)

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: ‘अन-लर्निंग’ की अवधारणा सांस्कृतिक मानदंडों, मूल्यों और व्यवहारों पर केंद्रित है जो अंतर्निहित पूर्वाग्रहों और पुरानी प्रथाओं को जन्म देते हैं। संस्कृति का समाजशास्त्र इन सीखने और न सीखने की प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है कि कैसे सामाजिक समूह विश्वासों और प्रथाओं को अपनाते या छोड़ते हैं। यह सामाजिक परिवर्तन और ज्ञान के हस्तांतरण से भी जुड़ा है।

    संदर्भ: यह सामाजिक शिक्षा, समाजीकरण और सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांतों से संबंधित है।

    गलत विकल्प: A, C, और D अन्य समाजशास्त्रीय क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और सीधे तौर पर ‘अन-लर्निंग’ के वैचारिक ढांचे से संबंधित नहीं हैं।

  18. राज्य और स्थानीय शासन में राजनीतिक शक्ति की गतिशीलता का अध्ययन समाजशास्त्र की किस उप-शाखा के तहत आता है?

    1. परिवार का समाजशास्त्र (Sociology of Family)
    2. कानून का समाजशास्त्र (Sociology of Law)
    3. राजनीतिक समाजशास्त्र (Political Sociology)
    4. ग्रामीण समाजशास्त्र (Rural Sociology)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: ‘राजनीतिक समाजशास्त्र’ (Political Sociology) समाजशास्त्र की वह शाखा है जो शक्ति, शासन, राज्य, राजनीतिक व्यवहार और सामाजिक आंदोलनों के बीच संबंधों का अध्ययन करती है। राज्य और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक शक्ति की गतिशीलता का विश्लेषण सीधे इसके दायरे में आता है।

    संदर्भ: यह मार्क्स, वेबर और दुर्खीम जैसे क्लासिकल विचारकों के साथ-साथ समकालीन राजनीतिक सिद्धांतकारों के कार्यों पर आधारित है।

    गलत विकल्प: A, B, और D अन्य विशिष्ट सामाजिक संस्थानों या क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

  19. बढ़ती हुई वृद्ध जनसंख्या (Aging Populations) और उनके सामाजिक, आर्थिक तथा स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों का अध्ययन समाजशास्त्र की किस शाखा के तहत किया जाता है?

    1. बाल समाजशास्त्र (Sociology of Childhood)
    2. युवा समाजशास्त्र (Sociology of Youth)
    3. वृद्धावस्था समाजशास्त्र (Sociology of Aging/Gerontology)
    4. धर्म का समाजशास्त्र (Sociology of Religion)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: ‘वृद्धावस्था समाजशास्त्र’ (Sociology of Aging) या जेरोन्टोलॉजी समाजशास्त्र की एक उप-शाखा है जो वृद्ध व्यक्तियों और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के सामाजिक पहलुओं का अध्ययन करती है। इसमें उम्र बढ़ने वाली आबादी के जनसांख्यिकीय, सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव शामिल हैं।

    संदर्भ: जनसांख्यिकी और सामाजिक नीति के साथ इसका गहरा संबंध है।

    गलत विकल्प: A और B जीवन के अन्य चरणों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। D. धर्म का समाजशास्त्र वृद्ध जनसंख्या के सीधे अध्ययन से संबंधित नहीं है।

  20. स्वास्थ्य इक्विटी (Health Equity), शिक्षा नीति (Education Policy) और स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारक (Social Determinants of Health) के अंतर्संबंधों का विश्लेषण समाजशास्त्र की किस शाखा का केंद्रीय विषय है?

    1. पर्यावरण का समाजशास्त्र (Environmental Sociology)
    2. श्रम का समाजशास्त्र (Sociology of Labor)
    3. चिकित्सा समाजशास्त्र (Medical Sociology)
    4. आपदा समाजशास्त्र (Disaster Sociology)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: ‘चिकित्सा समाजशास्त्र’ (Medical Sociology) वह क्षेत्र है जो स्वास्थ्य, बीमारी, चिकित्सा देखभाल और संबंधित सामाजिक संस्थानों के सामाजिक पहलुओं का अध्ययन करता है। स्वास्थ्य इक्विटी, शिक्षा के माध्यम से स्वास्थ्य परिणामों पर प्रभाव, और सामाजिक निर्धारक (जैसे आय, शिक्षा, जाति) जो स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, ये सभी इसके मुख्य अध्ययन क्षेत्र हैं।

    संदर्भ: यह सामाजिक असमानताओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के साथ गहरा संबंध रखता है।

    गलत विकल्प: A, B, और D अन्य विशिष्ट समाजशास्त्रीय क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

  21. जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘स्व’ (Self) के विकास में दूसरे की भूमिका को कल्पना में लेना और स्वयं को दूसरे की दृष्टि से देखना क्या कहलाता है?

    1. सामान्यीकृत अन्य (Generalized Other)
    2. मी (Me)
    3. आई (I)
    4. भूमिका ग्रहण (Role-taking)

    सही उत्तर: D

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: जॉर्ज हर्बर्ट मीड ने ‘भूमिका ग्रहण’ (Role-taking) को स्व के विकास में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया। इसमें व्यक्ति दूसरों के दृष्टिकोणों को समझने और उन्हें अपनी कल्पना में ग्रहण करने की कोशिश करता है, जिससे वह स्वयं को दूसरों की आँखों से देख पाता है। यह सामाजिक अंतःक्रिया और समाजीकरण का आधार है।

    संदर्भ: यह मीड के प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद और उनकी पुस्तक “Mind, Self, and Society” का केंद्रीय विचार है।

    गलत विकल्प: A. सामान्यीकृत अन्य समाज के संगठित दृष्टिकोणों और अपेक्षाओं का आंतरिककरण है। B. ‘मी’ स्व का सामाजिक रूप से निर्मित पहलू है। C. ‘आई’ स्व का तात्कालिक, सहज और रचनात्मक पहलू है।

  22. जब एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक भूमिकाओं की परस्पर विरोधी अपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है, तो उसे किस स्थिति का अनुभव होता है?

    1. भूमिका तनाव (Role Strain)
    2. भूमिका संघर्ष (Role Conflict)
    3. भूमिका प्रतिमान (Role Set)
    4. भूमिका प्रदर्शन (Role Performance)

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: ‘भूमिका संघर्ष’ (Role Conflict) तब उत्पन्न होता है जब एक व्यक्ति को एक साथ दो या दो से अधिक सामाजिक भूमिकाओं को निभाना पड़ता है, और उन भूमिकाओं की अपेक्षाएं एक-दूसरे के विपरीत या असंगत होती हैं। उदाहरण के लिए, एक पुलिस अधिकारी जो एक मित्र के अपराध को छिपाने और अपनी ड्यूटी निभाने के बीच संघर्ष करता है।

    संदर्भ: यह अवधारणा सामाजिक मनोविज्ञान और सामाजिक संरचना के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।

    गलत विकल्प: A. भूमिका तनाव एक ही भूमिका की अपेक्षाओं के भीतर उत्पन्न होने वाला तनाव है। C. भूमिका प्रतिमान एक व्यक्ति से जुड़ी सभी भूमिकाओं का कुल योग है। D. भूमिका प्रदर्शन वह तरीका है जिससे एक व्यक्ति अपनी भूमिका निभाता है।

  23. ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) की अवधारणा भारत में किस सामाजिक समस्या को उजागर करती है?

    1. ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट तक पहुंच की कमी
    2. पारंपरिक जाति व्यवस्था का तकनीकी माध्यम से मजबूत होना
    3. डिजिटल साक्षरता में लैंगिक असमानता
    4. तकनीकी संसाधनों तक पहुंच में सामाजिक-आर्थिक असमानता

    सही उत्तर: D

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ एक अवधारणा है जो भारत में डिजिटल विभाजन (Digital Divide) को दर्शाती है, जहाँ जाति, आय, शिक्षा और भौगोलिक स्थिति जैसे पारंपरिक सामाजिक स्तरीकरण के कारक यह निर्धारित करते हैं कि लोगों के पास डिजिटल प्रौद्योगिकियों (जैसे इंटरनेट, स्मार्टफोन) तक कितनी पहुंच और उपयोग की क्षमता है। यह तकनीकी संसाधनों तक पहुंच में सामाजिक-आर्थिक असमानता को उजागर करता है, जिससे मौजूदा असमानताएं और बढ़ सकती हैं।

    संदर्भ: यह समकालीन भारतीय समाजशास्त्र और सूचना समाज के अध्ययन में एक उभरता हुआ क्षेत्र है।

    गलत विकल्प: A और C विशिष्ट पहलू हैं जो D के भीतर शामिल हैं। B. यह पारंपरिक जाति व्यवस्था के पुनरुत्थान के बजाय, डिजिटल पहुंच के माध्यम से नई असमानताओं या मौजूदा असमानताओं के नए रूपों पर अधिक केंद्रित है।

  24. समाजशास्त्रीय अनुसंधान में, प्रतिभागियों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए शोधकर्ता द्वारा किस नैतिक सिद्धांत का पालन किया जाना चाहिए?

    1. सहमति (Consent)
    2. गोपनीयता (Confidentiality)
    3. गुमनामी (Anonymity)
    4. नॉन-मैलेफिसेंस (Non-maleficence)

    सही उत्तर: D

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: ‘नॉन-मैलेफिसेंस’ (Non-maleficence) का सिद्धांत यह बताता है कि शोधकर्ता को अपने प्रतिभागियों को शारीरिक, मनोवैज्ञानिक या सामाजिक रूप से कोई नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। यह शोध नैतिकता का एक मूलभूत सिद्धांत है जो प्रतिभागियों की भलाई को प्राथमिकता देता है।

    संदर्भ: यह सिद्धांत चिकित्सा नैतिकता से आया है और समाजशास्त्रीय अनुसंधान सहित सभी मानव-विषय अनुसंधान में लागू होता है।

    गलत विकल्प: A, B, और C अनुसंधान नैतिकता के अन्य महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं, लेकिन वे सीधे ‘नुकसान न पहुँचाने’ के व्यापक सिद्धांत से अलग हैं। सहमति जानकारीपूर्ण निर्णय लेने के बारे में है, गोपनीयता डेटा की पहचान छिपाने के बारे में है, और गुमनामी यह सुनिश्चित करती है कि पहचान बिल्कुल भी ज्ञात न हो।

  25. ‘समाजशास्त्रीय कल्पना’ (Sociological Imagination) की अवधारणा किसने विकसित की, जो व्यक्तिगत समस्याओं को व्यापक सामाजिक मुद्दों से जोड़ने की क्षमता पर जोर देती है?

    1. एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim)
    2. मैक्स वेबर (Max Weber)
    3. सी. राइट मिल्स (C. Wright Mills)
    4. टैल्कॉट पार्सन्स (Talcott Parsons)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: सी. राइट मिल्स ने ‘समाजशास्त्रीय कल्पना’ (Sociological Imagination) की अवधारणा को अपनी 1959 की पुस्तक “The Sociological Imagination” में पेश किया। यह व्यक्तियों की निजी परेशानियों (troubles) और बड़े सार्वजनिक मुद्दों (issues) के बीच संबंधों को देखने की क्षमता है, जिससे व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत स्थितियों को व्यापक सामाजिक, ऐतिहासिक और संरचनात्मक संदर्भ में समझ पाता है।

    संदर्भ: यह समाजशास्त्र में एक मौलिक परिप्रेक्ष्य है जो व्यक्तिगत अनुभवों और सामाजिक संरचनाओं के बीच एक पुल का निर्माण करता है।

    गलत विकल्प: A, B, और D समाजशास्त्र के अन्य प्रमुख विचारक हैं जिन्होंने अन्य महत्वपूर्ण अवधारणाएं विकसित कीं, लेकिन समाजशास्त्रीय कल्पना मिल्स से जुड़ी है।

  26. सार्वजनिक उत्सवों और समारोहों का सांस्कृतिक महत्व, विशेष रूप से अमेरिकी पहचान को नया आकार देने में, समाजशास्त्र की किस उप-शाखा के तहत अध्ययन किया जा सकता है?

    1. आर्थिक समाजशास्त्र (Economic Sociology)
    2. ग्रामीण समाजशास्त्र (Rural Sociology)
    3. सांस्कृतिक समाजशास्त्र (Cultural Sociology)
    4. पर्यावरण समाजशास्त्र (Environmental Sociology)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: ‘सांस्कृतिक समाजशास्त्र’ (Cultural Sociology) वह शाखा है जो संस्कृति के सामाजिक पहलुओं का अध्ययन करती है, जिसमें मूल्य, मानदंड, विश्वास, प्रथाएं, कला और प्रतीक शामिल हैं। सार्वजनिक उत्सव और समारोह पहचान के निर्माण, सामूहिक स्मृति और सामाजिक एकजुटता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो सांस्कृतिक समाजशास्त्र के अध्ययन का एक केंद्रीय विषय है।

    संदर्भ: यह दुर्खीम के सामूहिक प्रतिनिधित्व और प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद जैसे विचारों से प्रभावित है।

    गलत विकल्प: A, B, और D अन्य समाजशास्त्रीय क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो सीधे तौर पर सार्वजनिक उत्सवों और पहचान निर्माण के सांस्कृतिक महत्व से संबंधित नहीं हैं।

  27. संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंसक अपराधों में अप्रत्याशित गिरावट और इसे समर्थन देने वाली फंडिंग के नुकसान के जोखिम पर चर्चा समाजशास्त्र के किस क्षेत्र से संबंधित है?

    1. चिकित्सा समाजशास्त्र (Medical Sociology)
    2. शहरी समाजशास्त्र (Urban Sociology)
    3. अपराधशास्त्र (Criminology)
    4. शिक्षा का समाजशास्त्र (Sociology of Education)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: हिंसक अपराधों में गिरावट, अपराध के पैटर्न, और उन्हें कम करने के लिए समर्थन और फंडिंग जैसे विषय सीधे ‘अपराधशास्त्र’ (Criminology) के दायरे में आते हैं। अपराधशास्त्र समाजशास्त्र की एक शाखा है जो अपराध, उसके कारणों, परिणामों और सामाजिक नियंत्रण तंत्रों का अध्ययन करती है।

    संदर्भ: यह सामाजिक समस्या, विचलन और सामाजिक नीति के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।

    गलत विकल्प: A, B, और D अन्य समाजशास्त्रीय क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, हालांकि अपराध शहरी क्षेत्रों में भी हो सकता है, अपराधशास्त्र सीधे इस विषय से संबंधित है।

  28. नाइजीरिया जैसे देशों में ‘डाकुओं’ (Banditry) की निरंतरता समाजशास्त्र की किस शाखा के तहत एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय है, जो राज्य की प्रभावशीलता और सामाजिक व्यवस्था के विघटन को उजागर करती है?

    1. पर्यावरण का समाजशास्त्र (Environmental Sociology)
    2. पारिवारिक समाजशास्त्र (Family Sociology)
    3. संघर्ष और विचलन का समाजशास्त्र (Sociology of Conflict and Deviance)
    4. कार्य का समाजशास्त्र (Sociology of Work)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: डाकुओं की निरंतरता और इसकी जड़ें सामाजिक व्यवस्था के विघटन, राज्य की कमजोर नियंत्रण क्षमता, आर्थिक अभाव और विचलनकारी व्यवहार में निहित हैं। ये सभी ‘संघर्ष और विचलन का समाजशास्त्र’ (Sociology of Conflict and Deviance) के केंद्रीय विषय हैं, जो सामाजिक मानदंडों से हटकर व्यवहार, सामाजिक नियंत्रण की विफलता और समाज के भीतर संघर्षों का अध्ययन करता है।

    संदर्भ: यह सामाजिक समस्याओं, राज्य-समाज संबंधों और विकासशील देशों में सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में प्रासंगिक है।

    गलत विकल्प: A, B, और D अन्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो सीधे तौर पर डाकुओं या सामाजिक व्यवस्था के विघटन से संबंधित नहीं हैं।

  29. मैक्स वेबर के अनुसार, समाज में सत्ता (Power) के तीन शुद्ध प्रकार कौन से हैं?

    1. उत्पादन, वितरण, उपभोग (Production, Distribution, Consumption)
    2. आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक (Economic, Political, Cultural)
    3. परंपरागत, कानूनी-तर्कसंगत, करिश्माई (Traditional, Legal-Rational, Charismatic)
    4. व्यक्तिगत, समूहगत, संगठनात्मक (Individual, Group, Organizational)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: मैक्स वेबर ने अपनी समाजशास्त्रीय विश्लेषण में सत्ता (Authority) के तीन शुद्ध प्रकारों (Ideal Types) को पहचाना: 1. परंपरागत सत्ता (Traditional Authority), जो रीति-रिवाजों और इतिहास पर आधारित है (जैसे राजशाही)। 2. कानूनी-तर्कसंगत सत्ता (Legal-Rational Authority), जो नियमों, कानूनों और पदों की वैधानिकता पर आधारित है (जैसे नौकरशाही)। 3. करिश्माई सत्ता (Charismatic Authority), जो किसी व्यक्ति के असाधारण गुणों और व्यक्तिगत आकर्षण पर आधारित है (जैसे महात्मा गांधी)।

    संदर्भ: यह वेबर के प्रभुत्व (Domination) और सामाजिक क्रिया के सिद्धांतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    गलत विकल्प: A. ये आर्थिक प्रक्रियाएं हैं। B. ये समाजशास्त्र के व्यापक क्षेत्र हैं, न कि सत्ता के विशिष्ट प्रकार। D. ये शक्ति के स्तर हैं, न कि वेबर द्वारा परिभाषित शुद्ध प्रकार।

  30. सामाजिक परिवर्तन के संदर्भ में ‘आधुनिकीकरण सिद्धांत’ (Modernization Theory) का मुख्य फोकस क्या है?

    1. कम विकसित देशों का शोषण
    2. पारंपरिक समाजों का औद्योगिक समाजों में परिवर्तन
    3. वर्ग संघर्ष के माध्यम से परिवर्तन
    4. विकासशील देशों की निर्भरता

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: आधुनिकीकरण सिद्धांत सामाजिक परिवर्तन का एक परिप्रेक्ष्य है जो बताता है कि पारंपरिक या “कम विकसित” समाज कैसे आर्थिक विकास, औद्योगीकरण, शहरीकरण, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाकर “आधुनिक” औद्योगिक समाजों में परिवर्तित होते हैं। यह सिद्धांत आंतरिक कारकों और विकास के चरणों पर जोर देता है।

    संदर्भ: यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के युग में प्रमुख था और पार्सन्स तथा रोस्टोव जैसे विचारकों से जुड़ा है।

    गलत विकल्प: A और D निर्भरता सिद्धांत (Dependency Theory) और विश्व-प्रणाली सिद्धांत (World-Systems Theory) से संबंधित हैं, जो आधुनिकीकरण सिद्धांत के आलोचक हैं। C. वर्ग संघर्ष मार्क्सवादी सिद्धांत का केंद्रीय तत्व है।

  31. किस प्रकार की गतिशीलता में एक व्यक्ति का सामाजिक दर्जा उसके अपने जीवनकाल में बदल जाता है?

    1. अंतर-पीढ़ीगत गतिशीलता (Intergenerational Mobility)
    2. अंतर-व्यक्तिगत गतिशीलता (Intra-individual Mobility)
    3. अंतर-व्यक्तिगत गतिशीलता (Intra-generational Mobility)
    4. क्षैतिज गतिशीलता (Horizontal Mobility)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: ‘अंतर-पीढ़ीगत गतिशीलता’ (Intra-generational Mobility), जिसे करियर गतिशीलता भी कहते हैं, एक व्यक्ति के जीवनकाल में उसके सामाजिक या व्यावसायिक स्थिति में होने वाले परिवर्तन को संदर्भित करती है। उदाहरण के लिए, एक फैक्ट्री वर्कर का अपने जीवन में मैनेजर बन जाना।

    संदर्भ: यह सामाजिक स्तरीकरण और गतिशीलता के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    गलत विकल्प: A. अंतर-पीढ़ीगत गतिशीलता एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में सामाजिक स्थिति के परिवर्तन को संदर्भित करती है (जैसे पिता की तुलना में पुत्र का सामाजिक दर्जा)। B. अंतर-व्यक्तिगत गतिशीलता एक मान्य समाजशास्त्रीय अवधारणा नहीं है। D. क्षैतिज गतिशीलता सामाजिक स्थिति में बिना किसी बदलाव के एक पद से दूसरे पद पर जाना है।

  32. सार्वजनिक क्षेत्र में सामाजिक वैज्ञानिकों की धारणा (public perception of social scientists) का अध्ययन समाजशास्त्र की किस शाखा से संबंधित है?

    1. विज्ञान का समाजशास्त्र (Sociology of Science)
    2. ज्ञान का समाजशास्त्र (Sociology of Knowledge)
    3. जनसंचार का समाजशास्त्र (Sociology of Mass Communication)
    4. इनमें से सभी

    सही उत्तर: D

    विस्तृत व्याख्या:

    सही होने का कारण: सार्वजनिक क्षेत्र में सामाजिक वैज्ञानिकों की धारणा का अध्ययन कई समाजशास्त्रीय शाखाओं से संबंधित है। विज्ञान का समाजशास्त्र यह देखता है कि वैज्ञानिक ज्ञान कैसे निर्मित और प्राप्त होता है, और जनता इसे कैसे देखती है। ज्ञान का समाजशास्त्र यह विश्लेषण करता है कि ज्ञान और विशेषज्ञता की सामाजिक रूप से व्याख्या कैसे की जाती है। जनसंचार का समाजशास्त्र यह जांच करता है कि मीडिया सामाजिक वैज्ञानिकों की छवि को कैसे आकार देता है। इसलिए, ‘इनमें से सभी’ सबसे उपयुक्त विकल्प है क्योंकि ये सभी पहलू इस जटिल घटना को समझने में योगदान करते हैं।

    संदर्भ: यह अकादमिक और सार्वजनिक क्षेत्रों के बीच संबंधों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

    गलत विकल्प: कोई एक विकल्प इस बहुआयामी विषय को पूरी तरह से कवर नहीं कर सकता।

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