नमस्ते समाजशास्त्र के जिज्ञासुओं!
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क्या आप अपनी समाजशास्त्रीय दृष्टि को और अधिक पैना करने के लिए तैयार हैं? आज का यह विशेष अभ्यास सेट न केवल आपके ज्ञान का परीक्षण करेगा, बल्कि आपको जटिल सिद्धांतों और समकालीन सामाजिक वास्तविकताओं के बीच संबंध स्थापित करने में मदद करेगा। अपनी विश्लेषणात्मक क्षमता को चुनौती दें और देखें कि आप इस बौद्धिक यात्रा में कहाँ खड़े हैं। चलिए, शुरू करते हैं!
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- एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Facts) की मुख्य विशेषता क्या है?\n
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- (A) यह व्यक्तिगत इच्छा पर आधारित होते हैं।
- (B) ये व्यक्ति के बाहर होते हैं और उस पर दबाव (Constrain) डालते हैं।
- (C) ये केवल मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं का परिणाम होते हैं।
- (D) इन्हें केवल व्यक्ति के आत्मनिरीक्षण से समझा जा सकता है।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘The Rules of Sociological Method’ में तर्क दिया कि सामाजिक तथ्य वे तरीके हैं सोचने, महसूस करने और कार्य करने के, जो व्यक्ति के बाहरी होते हैं और जिनमें व्यक्ति को बाध्य करने की शक्ति होती है। \n
संदर्भ: यह कार्यात्मकतावाद (Functionalism) का आधार है। \n
अन्य विकल्प: विकल्प (A), (C) और (D) गलत हैं क्योंकि वे समाजशास्त्र के बजाय मनोविज्ञान की ओर संकेत करते हैं, जबकि दुर्खीम समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विज्ञान बनाना चाहते थे।\n\n
- मैक्स वेबर की ‘आदर्श प्रारूप’ (Ideal Type) की अवधारणा का उद्देश्य क्या है?\n
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- (A) समाज के लिए एक नैतिक आदर्श स्थापित करना।
- (B) वास्तविक दुनिया की घटनाओं का विश्लेषण करने के लिए एक तुलनात्मक उपकरण बनाना।
- (C) यह बताना कि समाज को कैसा होना चाहिए।
- (D) केवल सांख्यिकीय डेटा का संकलन करना।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: ‘आदर्श प्रारूप’ कोई वास्तविक वस्तु नहीं है, बल्कि एक मानसिक निर्माण है जिसे समाजशास्त्री वास्तविक घटनाओं की तुलना करने और उनकी विसंगतियों को समझने के लिए उपयोग करते हैं। \n
संदर्भ: वेबर का व्याख्यात्मक समाजशास्त्र (Interpretive Sociology)।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) और (C) गलत हैं क्योंकि ‘Ideal Type’ का अर्थ ‘नैतिक रूप से श्रेष्ठ’ नहीं, बल्कि ‘सैद्धांतिक रूप से शुद्ध’ है।\n\n
- कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘विमुखता’ (Alienation) का अनुभव श्रमिक किस स्थिति में करता है?\n
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- (A) जब उसे पर्याप्त वेतन मिलता है।
- (B) जब वह उत्पादन की प्रक्रिया और उत्पाद पर अपना नियंत्रण खो देता है।
- (C) जब वह ट्रेड यूनियन का सदस्य बनता है।
- (D) जब समाज में वर्ग संघर्ष समाप्त हो जाता है।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: मार्क्स के अनुसार, पूंजीवाद में श्रमिक चार स्तरों पर विमुख होता है: अपने उत्पाद से, उत्पादन की प्रक्रिया से, अपने साथी श्रमिकों से और स्वयं के ‘मानवीय स्वभाव’ (Species-being) से। \n
संदर्भ: यह मार्क्स के संघर्ष सिद्धांत (Conflict Theory) का हिस्सा है।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A), (C) और (D) विमुखता के कारणों के बजाय या तो लाभ या समाधान को दर्शाते हैं।\n\n
- एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की प्रक्रिया क्या है?\n
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- (A) उच्च जातियों द्वारा निम्न जातियों का शोषण।
- (B) निम्न जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवन शैली को अपनाना।
- (C) जातियों का पूरी तरह से समाप्त हो जाना।
- (D) केवल धार्मिक ग्रंथों का अनुवाद करना।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से निम्न हिंदू जातियाँ या जनजातियाँ किसी उच्च जाति (विशेषकर द्विज) के रीति-रिवाजों, कर्मकांडों, विचारधारा और जीवन पद्धति को अपनाती हैं ताकि वे सामाजिक पदानुक्रम में अपनी स्थिति सुधार सकें। \n
संदर्भ: भारतीय समाजशास्त्र और ग्रामीण अध्ययन।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) शोषण है, संस्कृतिकरण नहीं। विकल्प (C) और (D) इस अवधारणा की मूल परिभाषा से बाहर हैं।\n\n
- टैलकॉट पार्सन्स के AGIL मॉडल में ‘L’ का क्या अर्थ है?\n
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- (A) Legitimacy (वैधता)
- (B) Latency (सुप्त अवस्था/पैटर्न रखरखाव)
- (C) Leadership (नेतृत्व)
- (D) Logic (तर्क)
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: पार्सन्स के अनुसार, किसी भी सामाजिक प्रणाली को जीवित रहने के लिए चार कार्यों की आवश्यकता होती है: Adaptation (अनुकूलन), Goal Attainment (लक्ष्य प्राप्ति), Integration (एकीकरण), और Latency (सुप्त अवस्था/तनाव प्रबंधन)। \n
संदर्भ: संरचनात्मक कार्यात्मकता (Structural Functionalism)।\n
अन्य विकल्प: अन्य विकल्प भ्रमित करने के लिए दिए गए हैं, AGIL में ‘L’ का अर्थ Latency है।\n\n
- रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अप्रत्यक्ष कार्य’ (Latent Function) के बीच क्या अंतर बताया है?\n
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- (A) प्रकट कार्य हानिकारक होते हैं, अप्रत्यक्ष कार्य लाभदायक।
- (B) प्रकट कार्य इच्छित और मान्यता प्राप्त होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कार्य अनपेक्षित होते हैं।
- (C) दोनों एक ही बात हैं।
- (D) प्रकट कार्य केवल धर्म में होते हैं, अप्रत्यक्ष कार्य राजनीति में।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: प्रकट कार्य वे परिणाम हैं जो जानबूझकर किए जाते हैं और जिनके बारे में समाज जानता है। अप्रत्यक्ष कार्य वे परिणाम हैं जो अनजाने में निकलते हैं और अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। \n
संदर्भ: मर्टन का कार्यात्मक विश्लेषण।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) गलत है क्योंकि अप्रत्यक्ष कार्य ‘नकारात्मक’ (Dysfunction) भी हो सकते हैं।\n\n
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘स्व’ (Self) का विकास कैसे होता है?\n
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- (A) केवल आनुवंशिक गुणों से।
- (B) सामाजिक अंतःक्रियाओं और प्रतीकात्मक संचार के माध्यम से।
- (C) एकांत चिंतन और ध्यान से।
- (D) केवल कानूनी नियमों के पालन से।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: मीड ने तर्क दिया कि ‘स्व’ जन्मजात नहीं होता, बल्कि सामाजिक अंतःक्रियाओं के माध्यम से विकसित होता है, जहाँ व्यक्ति दूसरों की नजरों से खुद को देखना सीखता है (I and Me)। \n
संदर्भ: प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism)।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) जीवविज्ञान है, (C) मनोविज्ञान है, और (D) कानूनी दृष्टिकोण है।\n\n
- दुर्खीम ने ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति का वर्णन किस संदर्भ में किया है?\n
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- (A) जब समाज में बहुत अधिक नियम होते हैं।
- (B) जब सामाजिक मानदंडों का अभाव होता है या वे टूट जाते हैं।
- (C) जब व्यक्ति समाज से पूरी तरह कट जाता है।
- (D) जब आर्थिक समृद्धि चरम पर होती है।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: एनोमी वह स्थिति है जहाँ समाज में नियमों का अभाव होता है या तेजी से हुए सामाजिक परिवर्तन के कारण पुराने नियम काम नहीं करते और नए अभी बने नहीं होते, जिससे व्यक्ति दिशाहीन महसूस करता है। \n
संदर्भ: ‘Suicide’ पुस्तक में दुर्खीम का विश्लेषण।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) इसके विपरीत है। विकल्प (C) विमुखता (Alienation) के अधिक करीब है।\n\n
- निम्नलिखित में से कौन सा ‘बंद स्तरीकरण’ (Closed Stratification) का उदाहरण है?\n
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- (A) वर्ग (Class)
- (B) जाति (Caste)
- (C) व्यावसायिक स्थिति (Occupational Status)
- (D) शिक्षा स्तर (Educational Level)
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: बंद स्तरीकरण वह व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति की सामाजिक स्थिति जन्म से निर्धारित होती है और उसे बदला नहीं जा सकता। जाति इसका सबसे सटीक उदाहरण है। \n
संदर्भ: सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification)।\n
अन्य विकल्प: वर्ग, शिक्षा और व्यवसाय ‘खुले स्तरीकरण’ के उदाहरण हैं क्योंकि इनमें उपलब्धि के आधार पर गतिशीलता संभव है।\n\n
- लुई विर्थ के अनुसार, ‘शहरीवाद’ (Urbanism) क्या है?\n
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- (A) केवल शहरों में रहने की भौतिक स्थिति।
- (B) जीवन जीने का एक तरीका (A way of life)।
- (C) ग्रामीण क्षेत्रों का शहरों में बदलना।
- (D) केवल गगनचुंबी इमारतों का निर्माण।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: विर्थ ने तर्क दिया कि शहरीकरण केवल जनसंख्या का बढ़ना नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संबंधों की प्रकृति को बदल देता है (जैसे संबंधों का सतही होना और व्यक्तिवाद का बढ़ना), जिससे यह जीवन जीने का एक विशिष्ट तरीका बन जाता है। \n
संदर्भ: शहरी समाजशास्त्र (Urban Sociology)।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) और (C) केवल भौतिक या जनसांख्यिकीय पहलुओं को छूते हैं।\n\n
- ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) का मुख्य केंद्र बिंदु क्या है?\n
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- (A) वृहत् सामाजिक संरचनाएं (Macro structures)।
- (B) सूक्ष्म स्तर पर व्यक्तियों के बीच अर्थ और प्रतीकों का आदान-प्रदान।
- (C) आर्थिक उत्पादन के साधन।
- (D) सामाजिक स्थिरता और संतुलन।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: यह दृष्टिकोण इस बात पर जोर देता है कि लोग प्रतीकों (भाषा, संकेत) के माध्यम से दुनिया को अर्थ देते हैं और इसी आधार पर अपनी सामाजिक वास्तविकता का निर्माण करते हैं। \n
संदर्भ: सूक्ष्म समाजशास्त्र (Micro Sociology)।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) और (D) कार्यात्मकतावाद से संबंधित हैं; विकल्प (C) मार्क्सवाद से।\n\n
- ‘जाजमानी प्रथा’ (Jajmani System) मुख्य रूप से किस पर आधारित है?\n
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- (A) केवल मौद्रिक लेनदेन पर।
- (B) पारस्परिक सेवाओं और वस्तुओं के विनिमय पर।
- (C) शहरी औद्योगिक संबंधों पर।
- (D) राज्य द्वारा नियंत्रित वितरण प्रणाली पर।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: जाजमानी प्रथा ग्रामीण भारत की एक पारंपरिक व्यवस्था थी जहाँ निम्न जातियाँ (कामगार) उच्च जातियों (जजमान) को सेवाएँ प्रदान करती थीं और बदले में उन्हें अनाज या अन्य वस्तुएँ मिलती थीं। \n
संदर्भ: ग्रामीण समाजशास्त्र और भारतीय ग्राम अध्ययन।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) गलत है क्योंकि यह विनिमय आधारित थी, न कि पूरी तरह मौद्रिक।\n\n
- निम्नलिखित में से कौन सा ‘गुणात्मक अनुसंधान’ (Qualitative Research) का तरीका है?\n
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- (A) संरचित सर्वेक्षण (Structured Survey)
- (B) सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical Analysis)
- (C) सहभागी अवलोकन (Participant Observation)
- (D) प्रयोगात्मक विधि (Experimental Method)
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सही उत्तर: (C)
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\n विस्तृत व्याख्या: सहभागी अवलोकन में शोधकर्ता स्वयं समूह का हिस्सा बनकर उनके व्यवहार और अर्थों को गहराई से समझता है, जो गुणात्मक डेटा प्रदान करता है। \n
संदर्भ: समाजशास्त्रीय अनुसंधान विधियाँ।\n
अन्य विकल्प: (A), (B) और (D) मात्रात्मक (Quantitative) विधियाँ हैं जो संख्यात्मक डेटा पर आधारित होती हैं।\n\n
- ‘प्रभावी जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा किसने दी थी?\n
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- (A) जी.एस. घुर्ये
- (B) एम.एन. श्रीनिवास
- (C) बी.आर. अंबेडकर
- (D) इरावती कर्वे
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने बताया कि ग्रामीण भारत में वह जाति ‘प्रभावी’ होती है जिसके पास संख्यात्मक बल, आर्थिक शक्ति (विशेषकर भूमि का स्वामित्व) और राजनीतिक प्रभाव होता है। \n
संदर्भ: भारतीय समाजशास्त्र।\n
अन्य विकल्प: घुर्ये ने जाति के लक्षणों पर काम किया, जबकि अंबेडकर ने जाति के उन्मूलन और आलोचना पर।\n\n
- ‘स्वास्थ्य समता’ (Health Equity) का समाजशास्त्रीय अर्थ क्या है?\n
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- (A) सभी को एक ही प्रकार की दवा देना।
- (B) स्वास्थ्य सेवाओं का समान वितरण ताकि सामाजिक असमानताएँ स्वास्थ्य परिणामों को प्रभावित न करें।
- (C) केवल अमीरों को बेहतर इलाज देना।
- (D) स्वास्थ्य को केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानना।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: स्वास्थ्य समता इस बात पर जोर देती है कि किसी व्यक्ति की जाति, वर्ग या लिंग उसकी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच और स्वास्थ्य के स्तर को निर्धारित नहीं करना चाहिए। \n
संदर्भ: स्वास्थ्य समाजशास्त्र (Sociology of Health) – समकालीन मुद्दे।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) ‘समानता’ (Equality) है, ‘समता’ (Equity) आवश्यकता आधारित न्याय है।\n\n
- ‘कम्प्यूटेशनल समाजशास्त्र’ (Computational Sociology) का उपयोग शहरी अपराध अनुसंधान में कैसे किया जा रहा है?\n
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- (A) केवल पुराने कागजों को पढ़कर।
- (B) बिग डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग करके अपराध पैटर्न का विश्लेषण करने में।
- (C) अपराधियों को शारीरिक दंड देकर।
- (D) केवल व्यक्तिगत साक्षात्कारों के माध्यम से।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: आधुनिक समाजशास्त्र में बिग डेटा, मशीन लर्निंग और नेटवर्क विश्लेषण का उपयोग यह समझने के लिए किया जा रहा है कि शहरी क्षेत्रों में अपराध कहाँ और क्यों केंद्रित होते हैं। \n
संदर्भ: आधुनिक अनुसंधान विधियाँ और शहरी अपराध।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A), (C) और (D) पारंपरिक या गैर-वैज्ञानिक तरीके हैं।\n\n
- पियरे बोर्ड्यू (Pierre Bourdieu) के अनुसार, ‘सांस्कृतिक पूंजी’ (Cultural Capital) क्या है?\n
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- (A) बैंक में जमा पैसा।
- (B) ज्ञान, कौशल, शिक्षा और शिष्टाचार जो सामाजिक लाभ प्रदान करते हैं।
- (C) केवल प्राचीन स्मारकों का संरक्षण।
- (D) किसी देश की कुल जीडीपी।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: बोर्ड्यू के अनुसार, शिक्षा और संस्कृति के माध्यम से अर्जित ज्ञान एक प्रकार की पूंजी है जो व्यक्ति को समाज के ऊपरी स्तरों में प्रवेश दिलाने में मदद करती है। \n
संदर्भ: स्तरीकरण और शक्ति का सिद्धांत।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) आर्थिक पूंजी है, (C) विरासत है।\n\n
- ‘लुकिंग ग्लास सेल्फ’ (Looking-Glass Self) की अवधारणा किसने दी थी?\n
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- (A) चार्ल्स कूले
- (B) जॉर्ज हर्बर्ट मीड
- (C) हर्बर्ट स्पेंसर
- (D) अगस्त कॉम्टे
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सही उत्तर: (A)
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\n विस्तृत व्याख्या: कूले के अनुसार, हम खुद को वैसे ही देखते हैं जैसा हमें लगता है कि दूसरे हमें देख रहे हैं। हमारा ‘स्व’ समाज रूपी दर्पण (Mirror) का प्रतिबिंब है। \n
संदर्भ: सूक्ष्म समाजशास्त्र।\n
अन्य विकल्प: मीड ने ‘I’ और ‘Me’ दिया, जबकि कॉम्टे ने समाजशास्त्र की स्थापना की।\n\n
- इरविंग गोफमैन के ‘नाट्यशास्त्र’ (Dramaturgy) के अनुसार, ‘फ्रंट स्टेज’ (Front Stage) क्या है?\n
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- (A) वह स्थान जहाँ व्यक्ति अकेले होता है।
- (B) वह सामाजिक परिवेश जहाँ व्यक्ति दूसरों के सामने एक विशेष छवि प्रस्तुत करता है।
- (C) केवल थिएटर का मंच।
- (D) वह स्थान जहाँ व्यक्ति अपने गुप्त विचार सोचता है।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: गोफमैन के अनुसार, हम सभी अभिनेता हैं। ‘फ्रंट स्टेज’ वह सामाजिक क्षेत्र है जहाँ हम समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप व्यवहार करते हैं ताकि एक वांछित छवि बना सकें। \n
संदर्भ: छाप प्रबंधन (Impression Management)।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A) और (D) ‘बैक स्टेज’ (Back Stage) के उदाहरण हैं।\n\n
- अगस्त कॉम्टे ने समाजशास्त्र के अध्ययन के लिए किस पद्धति का सुझाव दिया था?\n
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- (A) केवल अंतःप्रज्ञा (Intuition)
- (B) प्रत्यक्षवाद (Positivism)
- (C) केवल धार्मिक व्याख्या
- (D) यादृच्छिक अनुमान
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: कॉम्टे ने तर्क दिया कि समाज का अध्ययन उसी वैज्ञानिक पद्धति से किया जाना चाहिए जैसे भौतिकी या रसायन विज्ञान का किया जाता है (अवलोकन, प्रयोग और तुलना)। \n
संदर्भ: समाजशास्त्र के जनक और प्रत्यक्षवाद।\n
अन्य विकल्प: प्रत्यक्षवाद वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है, जबकि अन्य विकल्प अवैज्ञानिक हैं।\n\n
- निम्नलिखित में से कौन सा ‘प्राथमिक समूह’ (Primary Group) का उदाहरण है?\n
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- (A) राजनीतिक दल
- (B) एक बड़ी कंपनी के कर्मचारी
- (C) परिवार
- (D) ट्रेड यूनियन
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सही उत्तर: (C)
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\n विस्तृत व्याख्या: सी.एच. कूले के अनुसार, प्राथमिक समूह वे होते हैं जिनमें घनिष्ठ, व्यक्तिगत और आमने-सामने के संबंध होते हैं, जैसे परिवार और मित्र। \n
संदर्भ: सामाजिक समूह।\n
अन्य विकल्प: (A), (B) और (D) ‘द्वितीयक समूह’ (Secondary Groups) हैं क्योंकि इनमें संबंध औपचारिक और उद्देश्य-आधारित होते हैं।\n\n
- ‘सांस्कृतिक पिछड़ापन’ (Cultural Lag) की अवधारणा किसने विकसित की थी?\n
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- (A) विलियम एफ. ऑगबर्न
- (B) मैक्स वेबर
- (C) हर्बर्ट स्पेंसर
- (D) अगस्त कॉम्टे
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सही उत्तर: (A)
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\n विस्तृत व्याख्या: ऑगबर्न के अनुसार, जब भौतिक संस्कृति (तकनीक) तेजी से आगे बढ़ती है, लेकिन अभौतिक संस्कृति (मूल्य, मान्यताएं) पीछे रह जाती हैं, तो इस अंतराल को ‘सांस्कृतिक पिछड़ापन’ कहते हैं। \n
संदर्भ: सामाजिक परिवर्तन।\n
अन्य विकल्प: अन्य विचारकों ने सामाजिक विकास और संरचना पर काम किया, लेकिन यह विशिष्ट अवधारणा ऑगबर्न की है।\n\n
- धर्म के संदर्भ में, ‘पवित्र’ (Sacred) और ‘अपवित्र/लौकिक’ (Profane) के बीच का अंतर किसने स्पष्ट किया?\n
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- (A) कार्ल मार्क्स
- (B) एमिल दुर्खीम
- (C) मैक्स वेबर
- (D) ओगबर्न
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम ने अपनी पुस्तक ‘The Elementary Forms of the Religious Life’ में तर्क दिया कि धर्म का आधार पवित्र और लौकिक चीजों का विभाजन है, न कि केवल ईश्वर में विश्वास। \n
संदर्भ: धर्म का समाजशास्त्र।\n
अन्य विकल्प: मार्क्स ने धर्म को ‘अफीम’ कहा, जबकि वेबर ने धर्म और आर्थिक नैतिकता के संबंध पर काम किया।\n\n
- ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) का समाजशास्त्रीय अर्थ क्या हो सकता है?\n
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- (A) केवल इंटरनेट का उपयोग करना।
- (B) तकनीक और डिजिटल संसाधनों तक पहुँच में जाति-आधारित असमानता का बने रहना।
- (C) डिजिटल माध्यम से जाति प्रमाण पत्र बनाना।
- (D) सोशल मीडिया पर जातिगत समूहों का बनना।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: यह अवधारणा इस बात की ओर संकेत करती है कि कैसे पारंपरिक सामाजिक असमानताएं (जैसे जाति) डिजिटल युग में भी जारी हैं, जहाँ संसाधनों, शिक्षा और नेटवर्क तक पहुँच अभी भी कुछ विशेष समूहों के पास अधिक है। \n
संदर्भ: समकालीन भारतीय समाज और डिजिटल समाजशास्त्र।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (C) और (D) केवल सतही क्रियाएं हैं, जबकि (B) एक संरचनात्मक समस्या है।\n\n
- ‘सामाजिक स्तरीकरण’ (Social Stratification) का मुख्य आधार क्या है?\n
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- (A) केवल शारीरिक शक्ति।
- (B) संसाधनों, शक्ति और प्रतिष्ठा का असमान वितरण।
- (C) केवल भौगोलिक स्थिति।
- (D) व्यक्तियों की व्यक्तिगत पसंद।
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सही उत्तर: (B)
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\n विस्तृत व्याख्या: स्तरीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा समाज को विभिन्न स्तरों या श्रेणियों में बांटा जाता है, जो मुख्य रूप से धन (Wealth), शक्ति (Power) और प्रतिष्ठा (Prestige) के वितरण पर आधारित होता है। \n
संदर्भ: स्तरीकरण के सिद्धांत।\n
अन्य विकल्प: विकल्प (A), (C) और (D) स्तरीकरण के प्राथमिक और सार्वभौमिक आधार नहीं हैं।\n\n
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